ईश्वर दुबे
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Bhilai
अधिकारी ने बताया कि 66 निजी शराब की दुकानों ने सरकारी आदेशों का अनुपालन किया है। इन्हें सुबह नौ बजे से शाम छह बजकर 30 मिनट तक खोले जाने की अनुमति है। सरकार के आदेश के अनुसार, हालांकि जो शराब की दुकानें मॉल मे हैं, वे अभी बंद रहेंगी।
नयी दिल्ली। दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी के 66 निजी शराब दुकानों को खोले जाने की मंजूरी दे दी लेकिन इन दुकानों के मालिकों से सम-विषम नियम का पालन करने के लिए कहा है। अधिकारी ने बताया कि 66 निजी शराब की दुकानों ने सरकारी आदेशों का अनुपालन किया है।
इन्हें सुबह नौ बजे से शाम छह बजकर 30 मिनट तक खोले जाने की अनुमति है। सरकार के आदेश के अनुसार, हालांकि जो शराब की दुकानें मॉल मे हैं, वे अभी बंद रहेंगी।दिल्ली में 864 शराब की दुकानें हैं, जिनमें से 475 सरकारी हैं। वहीं 389 निजी दुकानें हैं, इनमें से 150 मॉल में स्थित हैं और उन्हें 31 मई तक खोले जाने की अनुमति नहीं है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, ‘‘केंद्रीय टीम के दौरे समेत कई अन्य चीजों में अगर केंद्रीय मंत्रियों की तरफ से बयान दिए जाएंगे और अखबारों को सूचनाएं लीक की जाएंगी तो राज्यों का नाराज होना उचित है।’’
नयी दिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही में केंद्र पर भेदभाव का आरोप लगाने वाली ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार के कदमों के बारे में राज्यों को सूचित करने से पहले इनकी सूचना लीक करना और मीडिया को बताना प्रदेश सरकारों के अधिकारों को कमजोर करने के समान है। उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने भी प्रवासी श्रमिकों को लेकर ट्रेन भेजने से पहले राज्यों के साथ समन्यवय नहीं करने और सूचित नहीं करने को लेकर चिंता जताई थी। बघेल ने कहा, ‘‘केंद्रीय टीम के दौरे समेत कई अन्य चीजों में अगर केंद्रीय मंत्रियों की तरफ से बयान दिए जाएंगे और अखबारों को सूचनाएं लीक की जाएंगी तो राज्यों का नाराज होना उचित है।’’
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार संकट के इस समय राजनीति कर रही है। पलानीस्वामी ने 31 मई से पहले रेल एवं विमानन सेवाओं की बहाली का विरोध किया था। बघेल ने कहा कि कोई कदम उठाने से पहले राज्यों को विश्वास में लिया जाना चाहिए और अगर केंद्र ने समय पर प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श किया होता तो कई मुश्किलों को टाला जा सकता था। उनके मुताबिक अगर केंद्र सरकार ने 24 मार्च से पहले प्रवासी कामगारों के लिए रेल सेवा की बहाली का निर्णय लिया होता तो श्रमिकों की परेशानी को कम किया जा सकता था। छत्तीसगढ़ में कामगारों के लौटने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इनमें कुछ लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि गांवों में 16,000 से अधिक पृथक-वास केंद्र बनाए गए हैं और इन प्रवासी कामगारों को 14 दिनों के लिए वहां रखा जाएगा।
नई दिल्ली। कोविड‑19 की महामारी और देशव्यापी लॉकडाउन के बीच सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का सालाना रिटर्न दाखिल करने की तारीख को बढ़ा दिया है। सरकार ने करोबारियों को राहत देते हुए जीएसटी का सालाना रिटर्न दाखिल करने की तारीख 30 सितंबर तक के लिए बढ़ा दी है। अब कारोबारी वित्त वर्ष 2018–19 के लिए जीएसटी रिटर्न 30 सितम्बर तक भर कर सकते हैं।
कैट ने बुधवार को सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। साथ ही व्यापारियों के लिए राहत पैकेज देने की अपनी मांग को एक बार फिर दोहराया। कैट राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि सरकार खुदरा करोबारियों के लिए राहत देने पर विचार करे। गौरतलब है कि इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मार्च महीने का जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मई तक बढ़ाई थी।
गौरतलब है कि 5 मई को जारी की गई अधिसूचना में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क (सीबीआईसी) ने पंजीकृत व्यक्तियों को 21 अप्रैल से लेकर 30 जून के बीच इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन कोड के माध्यम से सत्यापित जीएसटीआर-3बी को प्रस्तुत करने की अनुमति दी है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने व्यापारियों की मांग को देखते हुए जीएसटी भरने की आख़िरी तारीख आगे बढ़ाया है। सरकार के सूत्रों के मुताबिक किसी सेक्टर को पूरा टैक्स माफ करने से क्रेडिट चेन में दिक्कत आएगी और समस्याएं भी बढ़ेंगी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक लॉकडाउन से प्रभावित सेक्टर्स को राहत पैकेज देने की मांग पर केंद्र सरकार विचार कर रही है।
नई दिल्ली। विदेश में जहां इजराइल, इटली और फ्रांस से कोरोना वैक्सीन को लेकर अच्छी खबर आई है तो वहीं देश में भी वैक्सीन पर तेजी से काम चल रहा है। लगभग 5 वैक्सीन ट्रायल के लिए पूरी तरह तैयार हैं। भारत में कोरोना के 30 से अधिक वैक्सीन रिसर्च का काम अलग-अलग चरणों में चल रहा है। इनमें से कुछ वैक्सीन ट्रायल के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वहीं कुछ अगले महीने तैयारी के चरण में पहुंच जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद इस पर निगरानी रखे हुए हैं। उन्होंने टॉस्क फोर्स की बैठक ली थी, जिसमें कहा था कि वैज्ञानिकों को वैक्सीन तैयार करने के लिए केन्द्र सरकार जरूरी संसाधन उपलब्ध कराएगी। वर्तमान में उन्होंने कहा कि दवा, टीका और जांच से जुड़े मसलों पर हैकाथान का आयोजन होना चाहिए। इसके लिए स्टार्टअप कंपनी को भी आगे आना चाहिए।
चीन छोडऩे वाली कंपनियों के लिए भारत तैयार
कोरोना वायरस की जन्मस्थली चीन को छोडऩे वाली सभी कंपनियों के लिए भारत ने बांहें फैला दी हैं। तैयारी के तौर पर भारत इन कंपनियों के लिए 4 लाख 61 हजार हेक्टेयर जमीन मुहैया कराएगा। यह जमीन राजधानी दिल्ली से 3 गुना बड़ी है। इनमें से 1 लाख 15 हजार 161 हेक्टेयर जमीन गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं इस पर नजर रखे हुए हैं और इसको लेकर राज्य सरकारों से लगातार सम्पर्क कर रहे हैं।
नई दिल्ली। भारतीय सेना के बड़े अस्पतालों में से एक दिल्ली का रिसर्च एंड रेफरल यानि आरएंडआर हॉस्पिटल भी कोरोना वायरस की चपेट में आ गया है। यहां के डॉक्टर, नर्स और मरीजों सहित कुल 25 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। अब इनके संपर्क में आए करीब 100 लोगों की तलाश कर जांच की जा रही है। यहां के मरीजों को दिल्ली कैंट के बेस अस्पताल भेजा गया है। मेडिकल स्टाफ कोभी क्वारन्टीन किया गया है।
सेना के आरएंडआर हॉस्पिटल में भारतीय सेना के एक अधिकारी की 28 वर्षीय बेटीकोरोना से संक्रमित होकर कुछ दिनों पहले आयी थी। उसके संपर्क में आने के बाद यहां का एक डॉक्टर कोरोनासंक्रमित हुआ।फिर उसके संपर्क में आने के बाद अब तक 25 लोग पॉज़िटिव हो चुके हैं। अब इनके संपर्क में आए करीब 100 लोगों की तलाश कर जांच की जा रही है।
संक्रमित हुए लोगों में अस्पताल के दो मेडिकल अधिकारी, 3 नर्सिंग अधिकारी, 2 नर्सिंग असिस्टेंट शामिल हैं। इसके अलावा संबंधित वार्ड के कई मरीज भी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। अस्पताल के मरीजों को दिल्ली कैंट के बेस अस्पताल भेजा गया है और मेडिकल स्टाफ को क्वारन्टीन किया गया है।
नई दिल्ली । कोविड‑19 (कोरोना वायरस) महामारी वजह से देश में जारी लॉकडाउन का तीसरा चरण आज (सोमवार से) शुरू हो रहा है। इस क्रम में केंद्र सरकार ने लोगों को राहत पहुंचाते हुए थोड़ी छूट भी दी है। इसमें सबसे अहम है शराब की दुकानों को खोलने की अनुमति मिलना। सरकारी निर्देशों में शराब की दुकानें तीनों जोन (रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन) में खुल सकेंगी।
लॉकडाउन‑3 के लागू होते ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शराब की दुकानों पर जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है। हालांकि इस दौरान सामाजिक दूरी का पालन भी किया जा रहा है। नियत दूरी पर बने गोल घेरे में ही लोग खड़े हैं। यह जरूर है कि बने गोलों की संख्या दुकानों के आगे लाइन में खड़ें लोगों से काफी कम है। स्थिति यह कि शराब की बोतल खरीदने को लेकर करीब एक किलोमीटर की दूरी तक कतारबद्ध हैं।
पूर्वी दिल्ली के दो इलाकों कृष्णा नगर और लक्ष्मी नगर में शराब की दुकानों के पास लोगों की लंबी लाइनें लगी हैं। वैसे तो शराब की ये दुकानें सुबह दस बजे खुलीं लेकिन दुकानों के बाहर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए लोग सुबह आठ बजे से ही खड़े रहे। इस दौरान पुलिसकर्मी भी काफी संख्या में मौजूद हैं ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी ना हो।
लक्ष्मी नगर क्षेत्र में दुकान के बाहर खड़े लोगों ने बताया कि करीब 50 दिनों के बाद दुकानें खुली हैं, ऐसे में वह शराब खरीदने को कतार में खड़े हैं। एक व्यक्ति सुदीप्त ने कहा कि दुकानों से हैंड सैनेटाइजर गायब हैं, इस स्थिति में शराब सैनेटाइजर का काम करेगी। जबकि दुकान के बाहर खड़े एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि वह यहां कुछ खरीदने नहीं दुकान खोलने के लिए आया है। उस शख्स ने नाम बताए बिना कहा कि दुकानों के लंबे समय तक बंद होने से उनकी आमदनी प्रभावित हुई थी। उन्हें काफी समय से इंतजार था कि सरकार जल्द दुकानों को खोलने का निर्णय ले।
इसके इतर लक्ष्मी नगर के मंगलबाजार इलाके सब्जी मार्केट तथा अन्य दुकानें भी खुली हैं। इनमें सब्जी-फल आदि के ही ठेले और खोमचे हैं। परच्यून एवं डेयरी शॉप पर भी लोग सामाजिक दूरी के साथ सामान खरीदने में लगे हैं। हालांकि कपड़ों एवं बर्तन आदि की दुकानों पर अब भी ताला लगा हुआ है। लॉकडाउन के तीसर चरण की शुरुआत में सड़कें अब भी सूनी ही हैं। ना तो चौराहों पर ऑटो या रिक्शा की कतार है और ना ही बिजली व हार्डवेयर आदि की दुकान तथा ढाबे आदि खुले हैं। बीते दिन लक्ष्मी नगर में भी कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद पुलिस ने सब्जी व फल मार्केट को बंद करा दिया था। साथ ही फल एवं सब्जी विक्रेताओं को ठेले से गलियों-कॉलोनियों में बिक्री करने की हिदायत दी थी। हालांकि आज फिर से मंगलबाजार का इलाका गुलजार दिखा।
नई दिल्ली। लॉकडाउन के दिनों में अब घरों में रहने वाले लोग अपना समय इंटरनेट सर्फिंग में गुजार रहे हैं। जिसकी वजह अचानक से इंटरनेट पर लोगों की निर्भरता बढ़ गई है। इसे आप इस तरह भी समझ सकते है कि बंदी के वक्त अब इंटरनेट ही लोगों का सहारा बन गया है। लॉकडाउन की वजह से घरों में कैद लोग अपना ज्यादातर समय टीवी या इंटरनेट पर गुजार रहे हैं। इंटरनेट का मजा लेने वाले लोग अपना ज्यादातर समय वीडियो देखने में या फिर ऑनलाइन गेम खेलने में गुजार रहे हैं। जिसकी वजह से इंटरनेट पर खासा दबाव बढ़ गया है। उल्लेखनीय है कि भारत में हर माह औसतन 11 करोड़ जीबी डाटा का इस्तेमाल किया जाता है, जो दुनिया में सबसे अधिक है।
दरअसल, इंटरनेट की बैंडविथ पर असर न पड़े इस पर ध्यान देते हुए केंद्र सरकार ने वीडियो प्लेटफॉर्म की क्वालिटी को एसडी पर डिफॉल्ट करने का फैसला किया है और रामायण तथा महाभारत जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों को फिर से प्रसारण शुरू कर दिया है। लॉकडाउन के बाद ज्यादातर लोग अपने घरों में पर इंटरनेट पर समय गुजार रहे हैं। चीन के लगभग 85 करोड़ लोग इंटरनेट डेटा का इस्तेमाल करते हैं, जबकि भारत में 56 करोड़ के आस-पास लोग डाटा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक डेटा का इस्तेमाल पहले दिनों की तुलना में डबल हो गया है। सीओएआई की रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन में कुछ सर्किल में डाटा की मांग में 100 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया है। पहले की तुलना में डाटा की मांग में 30 फीसदी से लेकर 100 फीसदी तक का इजाफा देखा गया है। यहां तक की एक एडवाइजरी भी जारी की जा चुकी हैं। जिसमें कहा गया है कि सुबह 9 बजे से लेकर 11 बजे तक और शाम में 4 बजे से लेकर 10 बजे तक लोग हैवी फाइल डाउनलोड न करें। साथ ही साथ वीडियो कॉल भी न करने की हिदायद दी है।
एक वीडियो भी खूब वायरल हुई थी जिसमें झुग्गियों में घोषणा करवाई जा रही है कि आनंद विहार और दिल्ली से बाहर जाने के लिए बसें चलाई जा रही हैं। हालांकि यह घोषणा किसने करवाई थी और क्यों करवाई गई थी इस पर अभी कोई स्पष्टीकरण कहीं से भी नहीं आया है।
भले ही कोरोना महामारी के बीच लॉकडाउन की स्थिति में केजरीवाल बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं लेकिन उन पर अब सवाल उठने लगे है। दरअसल मामला प्रवासियों को दिल्ली से बाहर भेजने का है। दिल्ली की सरकार और यहां के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आरोप लग रहे है कि उन्होंने बकायदा जान-बूझकर प्रवासियों को दिल्ली के बाहर भिजवाया। आपको बता दें कि देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद ही दिल्ली से हजारों की तादाद में प्रवासी मजदूर अपने राज्य के लिए लौटने लगे। इन मजदूरों के पलायन को रोकना केंद्र की सरकार और राज्य सरकारों के लिए मुश्किल हो गया। दिल्ली में स्थिति इतनी बिगड़ी कि लॉकडाउन के बावजूद भी सड़कों पर हजारों मजदूर पैदल चलते दिखाई दे रहे थे। यह मजदूर रिक्शा चालक, फैक्ट्री कर्मचारी आदि थे जो अपने गांव जाने के लिए निकल पड़े थे।
अब यह दावा किया जा रहा है कि भले ही दिल्ली सरकार और अरविंद केजरीवाल पलायन कर रहे मजदूरों को रोकने के लिए तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं पर सच यही है कि दिल्ली सरकार की ही वजह से मजदूरों का पलायन हुआ। दरअसल यह कहा जा रहा है कि लॉक डाउन की स्थिति में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के 300 बस ड्राइवरों से बात की थी और उन्हें दिल्ली से बाहर जाने का परमिशन दिया था। उन बस ड्राइवरों से कहा गया था कि पलायन कर रहे मजदूरों को उनके गांव तक आपको छोड़ कर आना है। दिल्ली बस एसोसिएशन का दावा है कि 28 मार्च को दिल्ली सरकार ने यह बैठक रात के 12 बजे से 2 बजे के बीच की थी। इस बैठक में दिल्ली सरकार ने मजदूरों को उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचाने के लिए 300 बसों के इंतजाम करने की बात कही थी। लगभग 2:30 बजे रात को सभी बस ड्राइवर को यह सूचित कर दिया गया था कि उन्हें बस को लेकर यूपी के अलग-अलग हिस्सों में जाना होगा।
सुबह 8:00 बजे तक कई बसें रवाना हो चुकी थी। यह बसें मेरठ, लखनऊ और कानपुर की तरफ जा रही थी लेकिन जैसे यह भनक दिल्ली पुलिस को लगी तो कार्रवाई की शुरुआत की गई। बसों को खाली करवाया गया। मजदूरों से ना जाने की बात कही गई और बसों को जप्त भी कर लिया गया। इससे पहले भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर दावा किया था कि केजरीवाल सरकार जगह-जगह से आनंद विहार के लिए डीटीसी बस चलवा रही है। इन्हीं बसों से लाखों की भीड़ आनंद विहार में इकट्ठा हो रही है। साफ-साफ यह तमाशा जानबूझकर किया जा रहा है और उन्होंने पूछा था केजरीवाल जी आप क्या चाहते हो? आपको बता दें कि आनंद विहार बस अड्डे के पास मजदूरों का ऐसा रेला लगा था जैसे मानो कि उन्हें यहां से भगाया जा रहा है।
एक वीडियो भी खूब वायरल हुई थी जिसमें झुग्गियों में घोषणा करवाई जा रही है कि आनंद विहार और दिल्ली से बाहर जाने के लिए बसें चलाई जा रही हैं। हालांकि यह घोषणा किसने करवाई थी और क्यों करवाई गई थी इस पर अभी कोई स्पष्टीकरण कहीं से भी नहीं आया है। भले ही अरविंद केजरीवाल यह दावा कर रहे हैं कि वे 6 लाख लोगों को दो वक्त का खाना दे रहे हैं, उन्हें रहने की सुविधा मुहैया करा रहे हैं लेकिन सच तो यही है कि उनकी यह कोशिश अब तक गरीब मजदूरों तक नहीं पहुंच पा रही है। वह एक तरफ जहां मजदूरों को पलायन रोकने के लिए कहते हैं तो दूसरी तरफ उनके ही राज्य से बसे चलवाई जाती है और मजदूरों को दिल्ली से बाहर निकलवाया जाता है। एक मुख्यमंत्री के नाते उन्हें इसकी जिम्मेदारी तो लेनी पड़ेगी आखिर दिल्ली से बसें चली तो चली कैसे और चली भी तो क्यों चलाई गई जबकि देशव्यापी लॉक डाउन की घोषणा की गई थी।
डीडी नेशनल ने ट्वीट कर इसकी जानकारी पहले ही दर्शकों को दे दी थी। डीडी नेशनल ने ट्वीट किया था कि दोस्तों, आज सुबह रामायण 9 बजे शुरू न होकर थोड़ी देर से शुरू होगी। रामायण पीएम नरेंद्र मोदी के वीडियो मैसेज के खत्म होने के तुरंत बाद ही शुरू हो जाएगी।
1987 में प्रसारित हुई रामानंद सागर की रामायण लॉकडाउन के चलते फिर से दूरदर्शन पर टेलीकास्ट हो रही है। सालों पहले भी रामायण दर्शकों की पहली पसंद थी और आज जब इसे दोबारा से री-टेलीकास्ट किया जा रहा है तो इस शो ने टीआरपी में रिकॉर्ड कायम किया है। रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण सुबह 9 और रात को 9 बजे दूरदर्शन पर हो रहा है।
लेकिन आज के दिन यानी शुक्रवार को फैंस को रामायण के देश के प्रधानमंत्री और लिए रामभक्त नरेंद्र मोदी की वजह से थोड़ा इंतजार करना पड़ा। दरअसल, शुक्रवार सुबह 9 बजे पीएम नरेंद्र मोदी का एक वीडियो मैसेज रिलीज किया गया, जिसके कारण रामायण का समय बदला गया।
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डीडी नेशनल ने ट्वीट कर इसकी जानकारी पहले ही दर्शकों को दे दी थी। डीडी नेशनल ने ट्वीट किया था कि दोस्तों, आज सुबह रामायण 9 बजे शुरू न होकर थोड़ी देर से शुरू होगी। रामायण पीएम नरेंद्र मोदी के वीडियो मैसेज के खत्म होने के तुरंत बाद ही शुरू हो जाएगी।
बता दें कि कोरोना संकट काल में प्रधानमंत्री मोदी तीसरी बार देश की जनता से मुखातिब हुए। उन्होंने सुबह 9 बजे देशवासियों को वीडियो संदेश में कहा कि रविवार को रात नौ बजे 9 मिनट तक घर की लाइट बंद कर दीप जलाने की अपील की। पीएम ने सोशल डिस्टेंनसिंग की लक्ष्मण रेखा को कभी भी लांघना नहीं है और इसे किसी भी हालत में तोड़ना नहीं है। कोरोना की चेन तोड़ने का यही रामबाण इलाज है। जहां तक बात रामायण की करें तो इस टीवी सीरीज को 82% व्यूअरशिप मिल थी, ये किसी भी टीवी सीरीज के लिए रिकॉर्ड है।
नईदिल्ली। खुद को हाइड्रेटेड और तरोताजा रखने के लिए रोज एक तरबूज खाना काफी फायदेमंद है। तरबूज न केवल हेल्दी होता है बल्कि इससे शरीर में पानी की कमी भी दूर होती है। तरबूज के सेवन से आपको तुरंत एनर्जी मिलती है, इसलिए गर्मियों में तरबूज जरूर खाएं। एनर्जी देने के अलावा भी तरबूज हमारे लिए कई तरह से फायदेमंद है. तरबूज में हाई लाइकोपीन होता है जो आपकी त्वचा की चमक को बनाए रखता है। अगर आप वजन कम करना चाहते हों तो तरबूज से बेहतर ऑप्शन कुछ और नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें फाइबर और पानी की मात्रा सबसे ज्यादा होती है और कैलरी बिलकुल नहीं होती। दिल के मामले में भी तरबूज एक औषधी की तरह काम करता है। इससे आपका हार्ट कई रोगों से दूर रहता है। साथ-साथ आपकी किडनी भी हेल्दी बनी रहती है। तरबूज के सेवन से आपका बीपी भी कंट्रोल में रहता है। तरबूज में शूगर न के बराबर होती है इसलिए शूगर के मरीज भी बेफिक्र होकर तरबूज खा सकते हैं। तरबूज में विटमिन-सी और ए काफी तादाद में पाया जाता है। विटमिन-सी हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत बनाता है, फ्लू होने से भी बचाता है और स्किन भी हेल्दी रहती है।
नई दिल्ली। क्या आपको पता है कि कुछ चीजों को साथ में खाने से आप बीमार भी पड़ सकते हैं। तो जानते हैं कुछ ऐसी चीजों के बारे में जिन्हें साथ में खाना हानिकारक हो सकता है। केला और दूध साथ खाने की खूब चलन है लेकिन आयुर्वेद में भी वजनी लोगों के लिए इसे साथ-साथ खाना मना है। ये खाने में काफी भारी होते हैं और शरीर में टॉक्सिन पैदा करते हैं। साथ ही ये सोचने और समझने की शक्ति को भी बाधित करते हैं। नाश्ते में केला और दूध साथ लेने से आप पूरा दिन सुस्त महसूस करते हैं। खाने के बाद फल सेहत के लिए खराब साबित हो सकते हैं। इससे पाचन क्रिया में काफी परेशानी होती है। फल हमारे शरीर में आसानी से पच जाते हैं। लेकिन खाने में मौजूद फैट और स्टार्च पचने में काफी समय लेता है, जिस वजह से फल में मौजूद शुगर पूरी तरह से पच नहीं पाती और सड़ने लगती है। इससे बीमारियां हो सकती हैं। अगर आप फल और योगर्ट साथ में खा रहे हैं, तो आपको कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं, जैसे थकान, एलर्जी। इसे खाने से शरीर के काम करने की प्रक्रिया भी काफी धीमी हो जाती हैं। सेहतमंद और संतुलित भोजन शरीर के लिए बेहद जरूरी होता है। ऐसा माना जाता है कि अपने आहार में कई तरह के खाद्य पदार्थों को शामिल करने से आप सेहतमंद रहते हैं।
नई दिल्ली। वनप्लस 8 प्रो स्मार्ट फोन 14 अप्रैल को लॉन्च किया जाएगा। यह स्मार्टफोन पिछले कुछ समय से चर्चा में बना हुआ है। पता चला है कि इस सीरीज का स्मार्टफोन्स में 120हर्ट्ज रिफ्रेश रेट और 5जी नेटवर्क के साथ आएगा। अभी तक ऑनलाइन सामने आई जानकारी के मुताबिक इस सीरीज का प्रो मॉडल ऑनिक्स ब्लैक, ग्लैशियल ग्रीन और अल्ट्रामरीन ब्लू कलर ऑप्शन में उपलब्ध होगा। वहीं वनप्लस 8 इंटरस्टेलर ग्लो कलर में आएगा। इसके अलावा यह फोन ग्लैशियल ग्रीन कलर में भी उपलब्ध होगा। वनप्लस 8 प्रो में सोनी आईएमएक्स689 सेंसर के साथ 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा दिया जा सकता है। फोन के रियर में 48 मेगापिक्सल का एक और कैमरा मौजूद है जो सोनी के आईएमएक्स 586 अल्ट्रा-वाइड ऐंगल सेंसर से लैस हो सकता है।
वहीं दूसरे कैमरों की बात करें तो इनमें 3एक्स ऑप्टिकल जूम के साथ 8 मेगापिक्सल का टेलिफोटो और एक 5 मेगापिक्सल का कलर फिल्टर होने की उम्मीद है। लीक्स के जरिए पता चला है कि कैमरों की एक और खास बात है कि यह 3एक्स ऑप्टिकल जूम के अलावा 30एक्स डिजिटल जूम भी दिया गया है। फोन के कैमरे नाइट पोर्ट्रेट मोड, इलेक्ट्रॉनिक इमेज स्टेबिलाइजेशन, ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन, 3-एचडीआर और सिनेमैटिक इफेक्ट्स दिए गए हैं। यह फोन क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 865 प्रोसेसर दिया जाएगा। इसके अलावा यह फोन एलपीडीडीआर5 रैम और यूएफएस3।0 स्टोरेज से लैस हो सकता है।
महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से मृत 65 वर्षीय एक मुस्लिम व्यक्ति के परिजनों ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि उपनगर मलाड में कब्रिस्तान के न्यासियों द्वारा शव दफनाने से मना करने के बाद उसे जलाना पड़ा।
मुंबई। महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से मृत 65 वर्षीय एक मुस्लिम व्यक्ति के परिजनों ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि उपनगर मलाड में कब्रिस्तान के न्यासियों द्वारा शव दफनाने से मना करने के बाद उसे जलाना पड़ा।
यह घटना बुधवार की है। मृतक मालवाणी के कलेक्टर परिसर में रहता था और जोगेश्वरी स्थित बीएमसी के अस्पताल में बुधवार तड़के उसकी मौत हुई थी।
मृतक के परिवार के सदस्य ने आरोप लगाया कि शव को मलाड के मालवाणी कब्रिस्तान ले जाया गया लेकिन न्यासियों ने यह कह कर शव को दफनाने से इनकार कर दिया कि मृतक कोरोना वायरस से संक्रमित था। उन्होंने कहा, ‘‘यह तब किया गया जब महानगर पालिका ने सुबह चार बजे शव को दफनाने की अनुमति दी थी।’’ परिवार के सदस्य ने बताया कि स्थानीय पुलिस और एक स्थानीय नेता ने हस्तक्षेप की कोशिश की और न्यासियों से शव दफनाने की अनुमति देने का आग्रह किया लेकिन वे नहीं माने।
उन्होंने बताया कि इसके बाद कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप किया और नजदीक स्थित हिंदू शमशान भूमि में शव को जलाने का अनुरोध किया। परिवार की सहमति से अंतत: सुबह दस बजे शव को जलाया गया। महाराष्ट्र के मंत्री और मालवानी से विधायक असलम शेख ने पीटीआई को बताया, ‘‘सरकार के दिशानिर्देश के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमित मुस्लिम मृतक के शव को उस स्थान के नजदीक स्थित कब्रिस्तान में दफनाया जाना चाहिए, जहां पीड़ित का निधन हुआ हो।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इस मामले में परिवार के लोग मृतक का शव कब्रिस्तान के न्यासियों सहित किसी को बताए बिना सीधे मलाड मालवाणी कब्रिस्तान ले गए और उसे दफनाने की मांग करने लगे।’’ शेख ने कहा, ‘‘महानगर पालिका कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए जिन्होंने शव को दिशानिर्देश के बावजूद ले जाने दिया।’’
उन्होंने कहा कि इससे एक दिन पहले ही एक और कोरोना वायरस संक्रमित मृतक को उस कब्रिस्तान में दफनाया गया था। मृतक के बेटे ने कहा, ‘‘ अस्पताल में पिता की मौत होने के बाद कोई मदद को आगे नहीं आया। मैं अस्पताल के बाहर तीन घंटे तक शव के करीब बैठा रहा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ हम शव को मलाड मालवाणी कब्रिस्तान में दफनाना चाहते थे लेकिन कब्रिस्तान के न्यासियों ने, मृतक के कोरोना वायरस संक्रमित होने की वजह से शव दफनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। बाद में पुलिस और अन्य अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद शव को हिंदू शमशन भूमि में जलाया गया।
नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।
पिछले कुछ दिनों से एक मैसेज या कहे सर्कुलर खूब वायरल हो रहा है। जिसमें कहा गया है कि आज की आधी रात के बाद से देशभर में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू हो रहा है, इसके बाद कोरोना वायरस को लेकर किसी भी तरह की जानकारी शेयर करना अपराध होगा।
दुनियाभर में कोरोना वायरस ट्रेंडिंग टॉपिक है। यहां तक कि इन दिनों गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला शब्द भी कोरोना वायरस ही है। ऐसे में तुर्कमेनिस्तान ने कथिततौर पर ‘कोरोना वायरस’ शब्द पर बैन लगा दिया है। सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों में भी इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। बताते हैं कि ‘कोरोना वायरस’ शब्द की जगह ‘बीमारी’ या ‘सांस की बीमारी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आप कह रहे होंगे विदेशी बात है हमे इससे क्या। लाकडाउन चल रहा है और ऐसे में घर से बाहर निकल नहीं सकते तो टीवी पर रामायण देख लेते है या थोड़ा मोबाइल चला लेते हैं, सोशल मीडिया को स्काल कर लेते हैं। तो ये खबर, वायरल खबर आपने भी जरूरी सुनी या पढ़ी होगी।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से एक मैसेज या कहे सर्कुलर खूब वायरल हो रहा है। जिसमें कहा गया है कि आज की आधी रात के बाद से देशभर में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू हो रहा है, इसके बाद कोरोना वायरस को लेकर किसी भी तरह की जानकारी शेयर करना अपराध होगा। इसके अलावा फेसबुक पर इस मैसेज के साथ में एक पुलिस अधिकारी का वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अधिकारी कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि, 'कोई किसी भी तरह का आपत्तिजनक पोस्ट करता है तो उसके ग्रुप एडमिन को आवश्यक रूप से आरोपी बनाया जाएगा। ग्रुप एडमिन यह सुनिश्चित कर लें कि कम से कम उनके जो मेंबर हैं, उन पर उनका नियंत्रण होना चाहिए। वरना ऐसे मेम्बर्स को तुरंत बाहर कर दें।
अब आपको इसकी हकीकत से रूबरू करवाते हैं। ये तमाम दावे पूरी तरह से निराधार है, अर्धसत्य हैं और तथ्यात्मक रूप से गलत भी हैं। दरअसल, कोरोना नहीं, बल्कि किसी भी तरह की भ्रामक गौर किजिएगा भ्रामक या गलत जानकारी वायरल कर यदि भय का माहौल बनाया जाता है या आपसी सौहार्द बिगाड़ा जाता है तो ऐसे व्यक्ति के खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है। इसका ये कतई मतलब नहीं है कि आप कोई भी खबर या कोरोना से जुड़ी तथ्यात्मक रूप से सही चीजें पोस्ट करें और पुलिस तुरंत आएगी और आपको अपने साथ ले जाएगी। पत्र सूचना कार्यालय यानी पीआईबी ने भी स्पष्ट किया है कि कोरोना वायरस से संबंधित किसी भी पोस्ट को शेयर करना दंडनीय अपराध नहीं है। कोरोना वायरस पर आधिकारिक और सटीक जानकारी को ही साझा करके आप अपनी और अपने परिजनों की सुरक्षा कर सकते हैं।
अब आपको थोड़ा उस एक्ट के बारे में भी बताते हैं जिसके नाम पर अफवाहें फैलाने और लोगों को डराने का काम किया जा रहा है। आखिर क्या है डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट? इसके अंतर्गत क्या-क्या नियम हैं और क्या-क्या सजाओं का प्रवाधान इसके उल्लंघन पर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (24 मार्च) रात 12 बजे से अगले 21 दिनों के लिए तीन सप्ताह के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी जिसके बाद ही गृह मंत्रालय (एमएचए) ने उसी दिन से आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 को लागू किया।
आपदा प्रबंधन अधिनियम राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लिए सहायता प्रदान करता है और इस अधिनियम की धारा-6 प्राधिकरण की शक्तियों से संबंधित है- जिसके अंतर्गत प्राधिकरण ने राज्य सरकारों औऱ केंद्र सरकारों को ये निर्देश जारी किए हैं। इसके अंतर्गत इस अधिनियम की धारा 51 से 60 तो पूरे देश में लागू किया जाता है।
क्या है इसका मकसद
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 का मकसद आपदाओं का प्रबंधन करना है, जिसमें रणनीति, क्षमता निर्माण, शमन और अन्य चीजें शामिल हैं। आमतौर पर एक आपदा जैसी कि चक्रवात या भूकंप से समझा जा सकता है। इस अधिनियम की धारा 2 (डी) में आपदा की परिभाषा में कहा गया है कि आपदा का अर्थ है किसी भी क्षेत्र में प्राकृतिक या मानव कारणों से या उपेक्षा से उत्पन्न कोई महा विपत्ति या महा बिमारी।
वर्तमान में महामारी के प्रकोप को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने कोविड-19 को गंभीर चिकिकत्सा स्थिति या महामारी की स्थिति के रूप में अधिसूचित आपदा के रूप में शामिल किया है।
अब आते हैं असल मुद्दे पर यानी कि इस अधनियम के प्रावधानों की बात करते हैं जिन्हें मौजूदा समय में देश भर में लागू किया गया है।
धारा 51
यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी कर्मचारी को उनके कर्तव्यों को पूरा करने से रोकता या बाधा डालता है, या केंद्र/राज्य सरकारों या एनडीएमए द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन करने से इनकार करता है तो वह व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत दंडित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, इस धारा के अंतर्गत, दिशानिर्देशों का कोई भी उल्लंघन, जिसमें पूजा स्थल पर जाना, सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन करना आदि शामिल हैं, सभी को इस धारा के तहत अपराध माना जाएगा।
धारा 52
धारा के अंतर्गत, वह मामले आयेंगे जहाँ यह आरोप लगाया जाए कि अभियुक्त ने कुछ ऐसा लाभ (राहत, सहायता, मरम्मत, निर्माण या अन्य फायदे) का दावा किया जो कि मिथ्या या केवल भ्रम फैलाने वाला हो पर इस धारा के तहत कार्यवाई की जा सकती है।
धारा 53 राहत कार्यों के पैसों का दुरूपयोग और धारा 54 मिथ्या चेतावनी या घबराहट फैलानी कोशिश जैसे कृत्यों पर दंड को परिभाषित करता है।
धारा 55, सरकार के विभागों द्वारा अपराध से सम्बंधित है। हमें कुछ अधिकार दिए गए हैं तो हरेक अधिकार अपने साथ कुछ जिम्मेदारियां भी लेकर आता है। धारा 56 इसको ही परिभाषित करती है। यदि एक सरकारी अधिकारी, जिसे लॉकडाउन से संबंधित कुछ कर्तव्यों को करने का निर्देश दिया गया है, और वह उन्हें करने से मना कर देता है, या बिना अनुमति के अपने कर्तव्यों को पूरा करने से पीछे हट जाता है तो वह इस धारा के अंतर्गत दोषी ठहराया जा सकता है।
धारा 57 अध्यपेक्षा के आदेश पर उल्लंघन और अधिनियम की धारा 58, कंपनियों द्वारा अपराध से सम्बंधित है। इसके अलावा धारा 59 अभियोजन के लिए पूर्व मंजूरी (धारा 55 और धारा 56 के मामलों में) से सम्बंधित है, वहीं धारा 60 न्यायालयों द्वारा अपराधों के संज्ञान से संबंधित है।