ईश्वर दुबे
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Bhilai
कोरोना काल में जहाँ स्कूल कॉलेज बंद पड़े हैं वहीँ इस बीच सीबीएसई तथा अन्य बोर्ड के बाहरवीं कक्षा के नतीजे भी घोषित कर दिए गए हैं। चूंकि रिजल्ट आ चुका है और छात्र कॅरियर को लेकर चिंतित हैं, इसी कारण उनकी मदद के लिए जानी-मानी मोटिवेशनल स्पीकर श्रीमती छवि हेमंत ने छात्रों की करियर काउन्सलिंग को लेकर एक वेबिनार का आयोजन किया।
इस वेबिनार में एशिया पसिफ़िक फ्लाइट ट्रेनिंग अकादमी लिमिटेड के सीईओ हेमंत डीपी, मिललेनियम वर्ल्ड स्कूल - फरीदाबाद की प्रिंसिपल संगीता धमीजा, करियर काउंसलर अश्विनी भावे तथा डब्लूसीएससी की सीईओ मनीषा शर्मा ने छात्रों की काउन्सलिंग की।
अनेकों छात्रों ने अलग अलग विषय पर सवाल किये जिसमे सबसे महत्वपूर्ण विषय रहा कॉमर्शियल पायलट ट्रेनिंग कोर्स का जिसको लेकर छात्रों में उत्सुकता दिखाई दी।
पायलट ट्रेनिंग कोर्स को लेकर सवाल पूछने पर एशिया पसिफ़िक फ्लाइट ट्रेनिंग अकादमी लिमिटेड के सीईओ हेमंत डीपी ने छात्रों को बताया की एविएशन सेक्टर में पायलट का सुनहरा भविष्य है और आने वालो सालों में इसकी डिमांड भी बढ़ेगी। इसके साथ ही साथ
उन्होंने महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर कुछ टिप्स भी बताये।
1. कोई भी विज्ञान और गणित में बाहरवीं पास किया हुआ छात्र इस कॉमर्शियल पायलट ट्रेनिंग कोर्स को कर सकता है।
2. इस कोर्स को करने के लिए न्यूनतम आयु 17 वर्ष है और 20 साल की आयु तक एक कॉमर्शियल पायलट बना जा सकता है, जिसमे 65 वर्ष सेवानिवृत्ति की आयु निर्धारित की गयी है।
3. कॉमर्शियल पायलट बनाने के लिए 185 सिंगल इंजन के साथ तथा 15 घंटे मल्टी इंजन के साथ जहाज को उड़ाने का परिक्षण करना होता है।
4. एक कॉमर्शियल पायलट की शुरूआती सैलरी 30 से 35 लाख सालाना हो सकती है।
5. कॉमर्शियल पायलट के पेशे में एक स्वस्थ जीवन शैली की जरूरत होती है और साल में एक बार हेल्थ सर्टिकेट लेना ज़रूरी होता है।
6. यदि कोई छात्र किसी अन्य देश से पायलट प्रशिक्षण लेता है तो भी उसे भारतीय पायलट लाइसेंस प्राप्त करना होता है।
7. भारत में कॉमर्शियल पायलट की फीस 40-45 लाख तक हो सकती है परन्तु विदेशो में यह फीस 1 करोड़ से ऊपर भी जा सकती है।
ईएमएस/फीचर/23जुलाई
नई दिल्ली । देश में ग्रामीण बेरोजगारी की दर बढऩा शुरू हो गई है, क्योंकि फसलों की बुआई का वक्त खत्म होने को आ गया है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़ों के अनुसार पिछले हफ्ते ये दर 6.34 फीसदी थी, जो 19 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में बढ़कर 7.1 फीसदी हो गई है। हालांकि, यह अभी भी लॉकडाउन के दौरान बेरोजगारी के आंकड़े से कम ही है, लेकिन अर्थशास्त्री मानते हैं कि ग्रामीण बेरोजगारी में तगड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी और जुलाई में नौकरियां पैदा नहीं होंगी। बात अगर पूरे देश में बेरोजगारी की करें तो उसमें भी बढ़ोतरी हुई है। पिछले हफ्ते ये 7.44 फीसदी थी, जो 19 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में बढ़कर 7.94 फीसदी तक जा पहुंची है। हालांकि, शहरी बेरोजगारी अभी भी सबसे बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि ये पहले से ही काफी अधिक है और उसमें कोई कमी आती नहीं दिख रही है।
शहरी इलाकों में भी बढ़ेगी दिक्कत
अर्थशास्त्री और एक्सपर्ट कहते हैं कि लेबर मार्केट को आने वाले कुछ महीनों में ग्रामीण इलाकों और शहरी दोनों ही इलाकों में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीण इलाकों में बुआई का सीजन खत्म होने के करीब आ पहुंचा है। मानसून के वजह से आने वाले दिनों में तमाम आपदाएं भी आएंगी, जैसे बाढ़, जिसकी वजह से एग्रीकल्चर सेक्टर में रोजगार में कमी देखने को मिलेगी। शहरी इलाकों में लॉकडाउन की वजह से काफी नुकसान हुआ है और धीरे-धीरे बाजारों के खुलने की वजह से तेज रिकवरी देखने को नहीं मिल पाएगी, जैसा कि जून महीने में दिखी थी। शहरी बेरोजगारी में पिछले हफ्ते के 9.92 फीसदी से 19 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में मामूली कमी आई है और आंकड़ा 9.78 फीसदी हो गया है।
रीलंका की सरकार ने एक विज्ञापन जारी कर लोगों से रावण के बारे में कोई भी दस्तावेज शेयर करने को कहा है। यह विज्ञापन पर्यटन और उड्डयन मंत्रालय ने अलग-अलग अखबार में जारी किया। अगर किसी भी व्यक्ति को रावण व उसकी एविएशन तकनीक के बारे में कोई भी जानकारी है, कोई पुस्तक या दस्तावेज हैं तो वो सरकार से संपर्क कर सकते हैं।
समस्त संसार इस वक्त कोरोना महामारी से जद्दोजहद में लगा है। लेकिन इस दौर में त्रेता युग के किरदारों को लेकर चर्चा भी खूब तेज है। नेपाल प्रभु श्रीराम को नेपाली बता असली अयोध्या नेपाल में होने का दावा कर रहा है। इसके बाद से नेपाल का पुरातत्व विभाग अपने यहां असली अयोध्या साबित करने के लिए खुदाई करने में जुटा हुआ है। इन सब के बीच श्रीलंका ने रावण को लेकर एक बड़ा दावा किया है। श्रीलंका ने रावण को एविएशन तकनीक का जनक बताते हुए उसके पुष्पक विमान को लेकर रिसर्च शुरू किया है। श्रीलंका का दावा है कि पांच हजार साल पहले रावण मे पहली बार इस विमान का इस्तेमाल किया था। इस बीच श्रीलंका की सरकार ने एक विज्ञापन जारी कर लोगों से रावण के बारे में कोई भी दस्तावेज शेयर करने को कहा है। यह विज्ञापन पर्यटन और उड्डयन मंत्रालय ने अलग-अलग अखबार में जारी किया। अगर किसी भी व्यक्ति को रावण व उसकी एविएशन तकनीक के बारे में कोई भी जानकारी है, कोई पुस्तक या दस्तावेज हैं तो वो सरकार से संपर्क कर सकते हैं। श्रीलंका के खोए गौरव को फिर से हासिल करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। श्रीलंका के सिविल एविएशन अथॉरिटी के पूर्व उपाध्यक्ष शशि दानतुंज ने कहा कि उनके पास ये साबित करने के लिए ढेर सारे तथ्य हैं। अगले पांच वर्षों में, हम ये साबित करेंगे।’
रामायण काल का पुष्पक विमान
रामायण में लिखा है कि रावण ने माता सीता का अपहरण करके पुष्पक विमान के जरिए लंका लेकर गया था। वाल्मिकी रामायण में इस बात का वर्णन मिलता है कि पंचवटी आश्रम से माता सीता का हरण करके रावण पुष्पक विमान से लंका की ओर उड़ चला। प्रभु श्री राम लंका विजय के बाद अयोध्या इसी विमान से पहुंचे थे।रामायण में जिस तरह से पुष्पक विमान का जिक्र मिलता है, उससे तो यही लगता है कि ये आज के हवाई जहाज की तरह था, लेकिन तकनीक के मामले में मॉर्डर्न एयरोप्लेन से कहीं आगे था।
श्रीलंका का रावण प्रेम
श्रीलंका के लोगों के लिए रावण एक महान राजा था। कुछ भारतीय धर्मग्रंथ भी उन्हें "महा ब्राह्मण" के रूप में वर्णित करते हैं, जिसका अर्थ है एक महान ब्राह्मण या एक महान विद्वान।
पीठ ने कहा, “हम इस बात से चकित हैं कि विकास दुबे जैसे व्यक्ति को इतने सारे मामलों के बावजूद जमानत मिल गई।” पीठ ने कहा, “यह संस्थान की विफलता है कि जिस व्यक्ति को जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए, उसे जमानत मिली।”
नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि कुख्यात अपराधी विकास दुबे की मुठभेड़ की जांच के लिये गठित समिति में शीर्ष अदालत के एक पूर्व न्यायाधीश और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी को शामिल करने पर विचार करे। उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि वह जांच समिति के बारे में दिये गये सुझावों को शामिल करके नयी अधिसूचना का मसौदा 22 जुलाई को पेश कर देगी। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि एक अपराधी के खिलाफ इतने मामले दर्ज होने के बावजूद उसे जमानत मिलने से वह “स्तब्ध” है।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें दुबे और उसके कथित सहयोगियों की मुठभेड़ों की अदालत की निगरानी में जांच कराने का अनुरोध किया गया है। पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि उसे ‘‘कानून का शासन बनाये रखना होगा।’’ शीर्ष अदालत ने कहा, “एक राज्य के तौर पर आपको कानून का शासन बरकरार रखना होगा। ऐसा करना आपका कर्तव्य है।” पीठ ने कहा कि वह शीर्ष अदालत के किसी पीठासीन न्यायाधीश को जांच समिति का हिस्सा बनने के लिए उपलब्ध नहीं करा सकती।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सालिसटीर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर आवश्यक निर्देश प्राप्त करने और उससे न्यायालय को अवगत कराने के लिये कुछ वक्त चाहिए। पीठ ने सॉलीसीटर जनरल से कहा कि अगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री कोई बयान देते है और इसके बाद कुछ होता है तो आपको इस पर गौर करना होगा। पीठ ने कहा, “हम इस बात से चकित हैं कि विकास दुबे जैसे व्यक्ति को इतने सारे मामलों के बावजूद जमानत मिल गई।” पीठ ने कहा, “यह संस्थान की विफलता है कि जिस व्यक्ति को जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए, उसे जमानत मिली।”
कानपुर के चौबेपुर इलाके के बिकरू गांव में तीन जुलाई की मध्यरात्रि दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस की टीम पर घात लगाकर हमला कर दिया गया था जिसमें डीएसपी देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक दुबे की 10 जुलाई की सुबह हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी जब उसे उज्जैन से कानपुर ले जा रहा पुलिस वाहन भौती इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और उसने मौके से भागने की कोशिश की थी। मुठभेड़ में दुबे के मारे जाने से पहले उसके सभी पांच कथित सहयोगियों को अलग-अलग मुठभेड़ में मार गिराया गया था।
देश में इस समय कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए सात टीके विकास के विभिन्न स्तर पर हैं जिनमें से दो को मनुष्य पर क्लीनिकल ट्रायल शुरू करने की मंजूरी मिल चुकी है।
चंडीगढ़। हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने ट्वीट किया है कि भारत बायोटेक ने अपने कोविड-19 रोधी टीके कोवेक्सिन का मनुष्य पर परीक्षण शुक्रवार को रोहतक के पीजीआईएमएस में शुरू कर दिया। विज हरियाणा के गृह एवं विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्री भी हैं। विज ने कहा, ‘‘भारत बायोटेक के कोरोना वायरस के टीके (कोवेक्सिन) का मनुष्य पर परीक्षण आज पीजीआई रोहतक में शुरू हो गया।’’ विज ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘‘आज तीन लोगों का पंजीकरण किया गया। किसी पर टीके का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं दिखा।’’
भारत बायोटेक को पिछले दिनों ही उसके कोरोना वायरस रोधी टीके कोवेक्सिन का क्लीनिकल ट्रायल शुरू करने के लिए देश के दवा नियामक की मंजूरी मिली थी। देश में इस समय कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए सात टीके विकास के विभिन्न स्तर पर हैं जिनमें से दो को मनुष्य पर क्लीनिकल ट्रायल शुरू करने की मंजूरी मिल चुकी है। इस महीने की शुरुआत में जाइडस कंपनी ने कहा था कि उसे टीके के मानव पर परीक्षण शुरू करने के लिए प्राधिकारियों से स्वीकृति मिल गयी है।
बच्चों को खाना-खिलाना कोई आसान काम नहीं है। हर चीज को लेकर उनकी आना-कानी माता-पिता के लिए परेशानी बन जाती है क्योंकि वे इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि उनके लिए पोषण कितना ज्यादा जरूरी है। वहीं, बच्चे भूख न लगने की बात कहकर खाना टाल लेते हैं पर अगर बच्चा खाना नहीं खा रहा तो इसके पीछे कुछ कारण भी हो सकते हैं।
पेट के कीड़े
जब बच्चे के पेट में कीड़े होते हैं तो उन्हें भूख नहीं लगती। कई बार तो इससे दस्त, सूजन, कमजोरी और पोषण की कमी होने लगती है। इस बात पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।
एनीमिया
शरीर में एनीमिया की कमी होने पर चिड़चिड़ापन,कमजोरी और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। जिससे बच्चे का खाना खाने का मन नहीं करता। बच्चे के डांटने की बजाए उसके पोषण पर ध्यान दें।
कब्ज
पेट से जुड़ी परेशानियां भी भूख न लगने का कारण बनती हैं। कब्ज भी इसका संकेत है। पाचन क्रिया की गड़बड़ी के कारण पेट साफ नहीं हो सकता, जिससे बच्चा खाना नहीं खा पाता। जब आंत साफ होती है तो धीरे-धीरे बच्चे की भूख में भी सुधार आने लगता है।
अवसाद
अवसाद यानि तनाव का शिकार सिर्फ बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी हो जाते हैं। भूख न लगने का यह भी एक हिस्सा है। तनावग्रस्त बच्चों को भूख नहीं लगती।
दवाओं का सेवन
बच्चा ज्यादादेर तक किसी प्रकार की दवाइयों का सेवन कर रहा हो तब भी उसे भूख नहीं लगती। एंटीबायोटिक से बच्चों में भूख की कमी हो सकती है। अगर दवाइयां बंद करने के बाद भी बच्चा भूख महसूस नहीं कर रहा हो डॉक्टरी जांच बहुत जरूरी है।
11जुलाई ईएमएस फीचर
घर में छोटे बच्चे हो तो घर व्यवस्थित रहेगा, इसकी कल्पना करना भी बेकार है क्योंकि बच्चे घर के सामान को खेल-खेल में बिखेर देते हैं। ऐसे में जरूरी है कि वीकेंड पर बच्चों से ही घर को व्यवस्थित करा लिया जाए, जिससे वे घर का रख-रखाव सीख जाएंगे और घर को व्यवस्थित रखने में आपकी मदद भी कर देंगे।
बच्चों को टास्क दें
कोई भी बच्चा एक दिन में पूरे घर की सफाई करना नहीं सीख सकता। वीकेंड पर बच्चों को छोटी-छोटी चीजें व्यवस्थित करना सिखाएं। इसके लिए उन्हें घर के किसी एक कोने को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी दे सकती हैं। आप उन्हें उनके वॉर्डरोब के सामान को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी दें परन्तु उन्हें यह जरूर बताएं कि पहले सारे कपड़े वॉर्डरोब से बाहर निकालें और फिर उन्हें दोबारा तह कर के वॉर्डरोब में लगाएं। उसके बाद कपड़े वॉर्डरोब में इस तरह रखें कि उन्हें इस्तेमाल करने के लिए निकालना आसान रहेगा।
उनकी काम में मदद करें
यदि आपको लगे कि बच्चा अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहा है तो बीच-बीच में उसकी मदद करें तथा काम को सही ढंग से करने का तरीका बताएं। उसे बचाएं कि शर्ट कैसे तह की जाती, मोजों को हमेशा जोड़ा बनाकर रखते हैं ताकि वे खोएं नहीं। यहीं नहीं कपड़े शैल्फ में कैसे रखे जाते हैं यह भी उन्हें करके बताएं। यदि आप उन्हें बुक शैल्फ अरेंज करने का काम दे रही है तो उन्हें बताएं कि बुक शैल्फ में सबसे पहले बड़ी किताबें सैट की जाती हैं, फिर उससे छोटी और सबसे आगे छोटे आकार की किताबें रखी जाती हैं।
म्यूजिक लगाएं
बच्चा काम को एन्जॉय करते हुए सीख पाए, इसलिए उसकी पसंद का म्यूजिक लगा दें। बीच-बीच में छोटा-सा ब्रेक लेकर उसके साथ डांस करें। म्यूजिक के साथ काम करने में उसे मजा भी आएगा और आसानी से काम भी सीख जाएगा।
खेल और ईनाम
नया काम सीखते समय बच्चा बोर न हो, इसलिए उसे खेल-खेल में काम सिखाने की कोशिश करें। आप पांच मिनट का अलार्म लगा दें और कहें कि यदि वह पांच मिनट में पांच जोड़े जूते अल्मारी में रख देगा तो उसे चॉकलेट मिलेगी। यदि बच्चा समय पर अपना टास्क पूरा कर ले तो उसके प्रयास की तारीफ करें और अपना प्रॉमिस भी निभाएं।
सबके सामने तारीफ करें
जब बच्चा अपना काम पूरा कर ले तो उसकी मनपसंद चीज उसे ईनाम में दें या उसकी पसंदीदा डिश बना कर उसे खिलाएं। यही नहीं परिवार के अन्य सदस्यों के सामने भी उसकी तारीफ करें। इससे उसे न केवल अपना टास्क पूरा करने की खुशी मिलेगी, बल्कि आपका प्यार और आपका साथ उसमें नई ऊर्जा का संचार करेगा।
11जुलाई ईएमएस फीचर
नई दिल्ली । इंडियन रेलवे के ट्रैक पर अब सोलर पावर की बिजली से ट्रेनें दौड़ेंगीं। भारतीय रेलवे ने इसके लिए तैयारी पूरी कर ली है। दरअसल, रेलवे ने अपने पायलट प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश के बीना में सोलर पावर प्लांट को स्थापित किया है जिससे 1.7 मेगा वाट की बिजली का उत्पादन हो सकता है और इस बिजली से ट्रेनों को दौड़ाने की तैयारी है।
रेलवे का दावा है कि दुनिया के इतिहास में यह पहली बार है जब सौर ऊर्जा का इस्तेमाल ट्रेनों को चलाने के लिए किया जाएगा। इस पावर प्लांट की खास बात यह है कि यहां से 25 हजार वोल्ट की बिजली पैदा होगी जिसे डायरेक्ट रेलवे के ओवरहेड पर ट्रांसफर किया जाएगा और इसकी मदद से ट्रेनों को दौड़ाया जाएगा। मध्य प्रदेश के बीना में रेलवे की खाली पड़ी जमीन पर बीएचईएल के सहयोग से 1.7 मेगावाट क्षमता वाले सोलर पॉवर प्लांट को तैयार किया गया है। पूरी दुनिया में ऐसा पावर प्लांट नहीं लगा है, जिससे ट्रेन को चलाया जा सके। दुनिया के अन्य रेलवे नेटवर्क, सौर ऊर्जा का उपयोग मुख्य रूप से स्टेशनों, आवासीय कॉलोनियों और दफ्तरों की बिजली की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करते हैं।
भारतीय रेलवे ने कुछ डिब्बों की छत पर सौर ऊर्जा पैनल भी लगाए हैं, जिनसे ट्रेन के डिब्बों में बिजली की आपूर्ति हो रही है। लेकिन अब तक, किसी भी रेलवे नेटवर्क ने ट्रेनों को चलाने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग नहीं किया है।सोलर प्लांट डीसी बिजली उत्पन्न करेगा जो एक इनवर्टर के माध्यम से एसी में परिवर्तित होगा और एक ट्रांसफार्मर के माध्यम से 25केवी एसी की ऊर्जा को ओवर हेड ट्रेनों के ऊपर लगे बिजली के तार तक पहुंचाएगा। इस सोलर प्लांट से सालाना 24.82 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। रेलवे को इस प्लांट से सालाना बिजली बिल में 1.37 करोड़ रुपये की बचत की उम्मीद है।रेलवे अधिकारियों के मुताबिक कुल 3 गीगावाट की क्षमता वाला सोलर पावर प्लांट लगाने की योजना है। ये पावर प्लांट सीधे इंजनों तक पहुंचेंगे। इन्हें तैयार करने का काम 2-3 वर्षों में पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए पहले ही टेंडर्स आमंत्रित किए जा चुके हैं।बता दें कि इस परियोजना के लिए पिछले साल नवंबर में नींव रखी गई थी। फिलहाल बीना सोलर पावर प्लांट का व्यापक परीक्षण किया जा रहा है।
कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) मोहित अग्रवाल ने बताया कि विकास दुबे और उसके सहयोगियों को पकड़ने के लिये पुलिस की 25 टीमें लगायी गयी हैं जो प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा कुछ दूसरे प्रदेशों में भी छापेमारी कर रही हैं।
लखनऊ। कानपुर के चौबेपुर में बृहस्पतिवार देर रात दबिश देने गई पुलिस टीम पर हमला कर आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले कुख्यात अपराधी विकास को पकड़ने के लिये पुलिस की 25 से अधिक टीम उत्तर प्रदेश और अन्य प्रदेशों में लगातार छापेमारी कर रही हैं लेकिन घटना के करीब 36 घंटे बाद भी वह पुलिस की पकड़ से बाहर है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक कुछ पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह जाना जा सके कि दुबे को उसके घर पर पुलिस की छापेमारी के बारे में पहले से खबर कैसे लगी जिससे उसने पूरी तैयारी के साथ पुलिस दल पर हमला किया।
कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) मोहित अग्रवाल ने बताया कि विकास दुबे और उसके सहयोगियों को पकड़ने के लिये पुलिस की 25 टीमें लगायी गयी हैं जो प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा कुछ दूसरे प्रदेशों में भी छापेमारी कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह नहीं बताया जा सकता कि पुलिस की टीमें किन-किन जनपदों में और किन प्रदेशों में तलाशी अभियान चला रही है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सर्विलांस टीम लगभग 500 मोबाइल फोन की छानबीन कर रही है और उससे विकास दुबे के बारे में सुराग लगाने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा उप्र एसटीएफ की टीमें भी अपने काम में लगी हैं।
आईजी ने विकास दुबे के बारे में सही जानकारी देने वाले को पचास हजार रुपये का इनाम भी देने की घोषणा की है और जानकारी देने वाले की पहचान गुप्त रखने की बात कही है। पुलिस के अनुसार मुठभेड. में घायल सात पुलिसकर्मियों का कानपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। जहां सभी की हालत स्थिर बतायी जा रही है। लखनऊ पुलिस ने शुक्रवार शाम को विकास दुबे के कृष्णानगर स्थित मकान पर भी छापा मारा था लेकिन वहां दुबे नही मिला। गौरतलब है कि बृहस्पतिवार देर रात कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के गांव बिकरू निवासी कुख्यात अपराधी विकास दुबे को उसके गांव पकड़ने पहुंची पुलिस टीम पर हमला कर दिया गया था जिसमें एक क्षेत्राधिकारी, एक थानाध्यक्ष समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए। मुठभेड़ में पांच पुलिसकर्मी, एक होमगार्ड और एक आम नागरिक घायल है।
पहली मुठभेड़ में अपराधी पुलिसकर्मियों के हथियार भी छीन ले गये, जिनमें एके-47 रायफल, एक इंसास रायफल, एक ग्लाक पिस्टल तथा दो नाइन एमएम पिस्टल शामिल हैं। इस मुठभेड़ के कुछ घंटे बाद हुई दूसरी पुलिस मुठभेड़ में पुलिस ने दो अपराधियों को मार गिराया था और उनके पास से लूटी गयी एक पिस्टल भी बरामद की थी। घटना के बाद शुक्रवार शाम कानपुर पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चौबेपुर थानाक्षेत्र में अपराधियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी और घटना के लिए जिम्मेदार किसी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। योगी ने शहीदों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी एलान किया था।
सर्वे के जरिए पता चला है कि देश का सबसे युवा राज्य बिहार है। यहां पर 25 साल से कम उम्र की आबादी 57.2 फीसदी है। वहीं 52.7 फीसदी आबादी के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर जबकि 51.9 फीसदी आबादी के साथ झारखंड तीसरे स्थान पर है।
नयी दिल्ली। हिन्दुस्तान एक युवा देश है। ऐसा एक सर्वे के जरिए पता चला है। सर्वे के मुताबिक भारत की आधी से अधिक आबादी या तो 25 साल की है या फिर उससे अधिक उम्र की है। वहीं, बची हुई 46.9 फीसदी आबादी 25 साल से कम उम्र की है। भारत के महा पंजीयक एवं जनगणना आयुक्त की तरफ से तैयार नमूना पंजीकरण तंत्र 2018 में कहा गया है कि देश में 25 साल से कम्र उम्र की आबादी में पुरुषों की संख्या 47.4 फीसदी है जबकि महिलाओं की संख्या 46.3 फीसदी है।
सबसे युवा राज्य बिहार
सर्वे के जरिए पता चला है कि देश का सबसे युवा राज्य बिहार है। यहां पर 25 साल से कम उम्र की आबादी 57.2 फीसदी है। वहीं 52.7 फीसदी आबादी के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर जबकि 51.9 फीसदी आबादी के साथ झारखंड तीसरे स्थान पर है।
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इन राज्यों के अलावा भी कुछ राज्य ऐसे हैं जहां पर 50 फीसदी से ज्यादा 25 साल से कम उम्र की आबादी अपना जीवन व्यतीत कर रही है। ऐसे राज्यों में उत्तराखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश शामिल हैं।
केरल में सबसे कम युवा
केरल देश का ऐसा राज्य है जहां पर 25 साल के कम उम्र के लोगों की संख्या सबसे कम है। इतना ही नहीं ग्रामीण इलाकों की तुलना में यहां पर 25 साल से कम उम्र के लोगों की संख्या भी कम है।
25 साल से कम आबादी वाले राज्यों की बात करें तो केरल में 37.4 प्रतिशत, तमिलनाडु में 37.8 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 38.8 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश में 39.8 प्रतिशत हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया कि अपने मुल्क में जैसे-जैसे प्रजनन की दर गिरती जा रही है ठीक उसी प्रकार युवा आबादी का अनुपात भी गिरता जा रहा है। हालांकि देश में 50 फीसदी से ज्यादा जनसंख्या 25 साल से ऊपर से की है जिसका मतलब है कि भारत का भविष्य युवाओं के कंधों पर टिका हुआ है।
सर्वे में एक बात और सामने आई कि ग्रामीण पुरुषों में भी 25 साल से कम उम्र के लोगों के अनुपात में गिरावट देखी गई है। साल 2017 में 50.2 फीसदी से घटकर 49.9 फीसदी हो गई।
मृत्युदर के मामले छत्तीसगढ़ सबसे ऊपर
दिल्ली में जहां मृत्युदर सबसे कम है तो वहीं छत्तीसगढ़ को सूची में पहला स्थान प्राप्त हुआ है। बता दें कि छत्तीसगढ़ में मृत्युदर सबसे ज्यादा 8 फीसदी है और दिल्ली में 3.3 फीसदी है। अगर हम साल 1971 की बात करें तो देश में मृत्यु दर 14.9 फीसदी के आसपास थी जो 2018 में घटकर 6.2 फीसदी हो गई है।
रायपुर, 03 जुलाई 2020 इंसान की काबिलियत उसकी मेहनत पर निर्भर करती है और यदि कम मेहनत और कम संसाधन में ज्यादा फायदा मिले तो उसे एक अलग ही पहचान मिलती है। ऐसी ही पहचान टिपनी की जय महामाया महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने गोबर से गमले का निर्माण कर बनायी है। अभी तक गोबर का उपयोग खाद के रूप में होता था।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की दूरदर्शिता से अब गोबर का उपयोग व्यवसायिक रूप में होने जा रहा है। अब गोबर से कंडे ही नही बल्कि दीये, गमले एवं अन्य वस्तुएं भी बनने लगे हैं। राज्य सरकार द्वारा गांव की समृद्धि और किसानों की खुशहाली के लिए गोबर खरीदने की कार्य योजना तैयार की जा रही है। गोबर के गमले से बेमेतरा जिले के ग्राम पंचायत टिपनी की जय महामाया महिला स्व सहायता समूह ने कमाई शुरू भी कर दिया है। महिलाओं ने अभी तक 1200 गमले बेचकर 18 हजार रूपए की कमाई कर चुकी हैं। एक गमला बनाने में 7 रूपए की लागत आती है और वह बिकता 15 रूपए में है। इस तरह से 9600 रूपए की शुद्ध कमाई। महिलाओं ने अभी तक 1500 गमलों का निर्माण कर चुकी हैं।
गोबर गमला निर्माण में कच्चा माल के रूप में गोबर, पीली मिट्टी, चूना, भूसा इत्यादि का उपयोग किया जाता है। जिला प्रशासन द्वारा जिले में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविकास मिशन (बिहान) के तहत प्रेरित किया जा रहा है। गोबर से गमला बनाने का मुख्य लाभ यह है कि यह टिकाऊ होने के साथ ही पर्यावरण के अनुकूल है तथा प्लास्टिक-पॉलीथिन के गमले के स्थान पर इनका उपयोग किया जाता है। अगर गमला क्षतिग्रस्त हो गया तो इसका खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। गोबर के गमले का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग वृक्षारोपण या पौधे की नर्सरी तैयार करने में हैं जिसमें गोबर के गमले में लगें पौधंे को सीधा भूमि पर रोपित कर सकते है।
गोबर खाद के रूप में अधिकांश खनिजों के कारण मिट्टी को उपजाऊ बनाता है। पौधें की मुख्य आवश्यकता नाईट्रोजन, फॉसफोरस तथा पोटेशियम की होती है। ये खनिज गोबर में क्रमशः 0.3-0.4, 0.1-0.15 तथा 0.15-0.2 प्रतिशत तक विद्यमान रहते है। मिट्टी के सम्पर्क में आने से गोबर के विभिन्न तत्व मिट्टी के कणों को आपस में बांधते है। यह पौधों की जड़ो को मिट्टी में अत्यधिक फैलाता हैं एवं मिट्टी को अधिक उपजाऊ बनाती है। इस तरह समूह की महिलाओं ने गोबर से गमला बनाकर आजीविका के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
रायपुर 1 जुलाई 2020 धान की कतार बोनी विधि में कम लागत आती है साथ ही कम वर्षा में भी उपज पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है। इस विधि से खेती करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है और उन्हें कतार बोनी विधि से खेती करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र कांकेर द्वारा कम समय में फसल उगाई, कम लागत और कम मजदूर के माध्यम से भी उन्नत कृषि हो इसका प्रशिक्षण किसानों को दिया जा रहा है। किसानों को बीज उर्वरक बुवाई यंत्र द्वारा धान की कतार बोनी विधि के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस विधि में कम वर्षा की स्थिति में भी उपज में विशेष प्रभाव नहीं पड़ता बल्कि प्रारंभ में ही वर्षा जल का सीधे लाभ मिल जाता है। जिससे किसान वर्षा जल पर पूर्णतः निर्भर न रहते हुए भी अच्छी फसल प्राप्त कर सकते हैं।
कांकेर जिले में उपलब्ध कुल धान के रकबे में लगभग 65 प्रतिशत क्षेत्र में किसान छिटकवां विधि से धान की बुवाई करते है और बुवाई के एक माह बाद बियासी करके धान की निंदाई एवं गुड़ाई करते हैं। इस प्रक्रिया में सही समय पर यदि बारिश नहीं होती तो किसान बियासी प्रक्रिया में पिछड़ जाते है। इन परिस्थितियों की वजह से कई किसान खेतों में घास की अधिकता के कारण आधार खाद का उपयोग भी नहीं कर पाते, जिसकी वजह से धान की उपज में काफी कमी आ जाती है। वैज्ञानिको ने बताया कि बीज उर्वरक बुवाई यंत्र द्वारा बुवाई के तुरंत पश्चात नींदानाशक का उपयोग कर खरपतवारों को रोका जा सकता है। इस विधि द्वारा उत्पन्न धान की उपज रोपाई वाले धान के बराबर आती है। कतार बोनी में निंदाई, रोपाई की जरूरत नहीं पड़ती है। छिटकवा विधि की तुलना में फसल 10-15 दिन जल्दी पकती है। जिससे मिट्टी में उपलब्ध नमी का उपयोग कर किसान दूसरी फसल भी ले सकते हैं।
वाशिंगटन। बीते दस साल में सूर्य में काफी बदलाव हुआ है। नासा ने इसको लेकर करीब एक दशक से अध्ययन किया है। इस दौरान करीब सूरज की 42.5 करोड़ तस्वीरें ली गईं। साथ ही दो करोड़ जीगाबाइट के करीब डाटा भी इकट्ठा किया गया। इन तमाम जानकारियों पर नासा ने रिसर्च किया, जिससे यह बात सामने निकल कर आई है कि बीते दस साल में सूरज काफी बदल गया है।
नासा के Solar Dynamics Observatory ने बीते दस वर्षों में हर 0.75 सेकेंट पर सूर्य की तस्वीर ली है। Atmospheric Imaging Assembly (AIA) ने दस विभिन्न प्रकाश की तरंग दैर्ध्य पर प्रत्येक 12 सेकेंड में एक तस्वीर ली है। हर घंटे एक तस्वीर को संकलित करते हुए, 61 मिनट का वीडियो तैयार किया गया है।
नासा ने कहा कि सूरज बहुत बदल गया है। यह भी दर्शाने की कोशिश की गई है कि यह सौर मंडल को कैसे प्रभावित करता है। नासा के अनुसार, सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र हर 10 साल बाद पूरी तरह से बदल जाता है।
सूर्य के 11 साल के सौर चक्र के हिस्से के रूप में होने वाली गतिविधियों में वृद्धि और गिरावट को दर्शाता है, जो ग्रहों और विस्फोटों को पार करने जैसे उल्लेखनीय घटनाओं को दर्शाता है। "सोलर ऑब्जर्वर" शीर्षक वाला कस्टम संगीत संगीतकार लार्स लियोनहार्ड ने बनाया था।
एसडीओ ने सूर्य पर लगातार नजर बनाए रखा, कम ही ऐसे पल आए होंगे जहां चूक हुई हो। वीडियो में काले फ्रेम पृथ्वी या चंद्रमा के ग्रहण एसडीओ के कारण होते हैं क्योंकि वे अंतरिक्ष यान और सूर्य के बीच से गुजरते हैं। 2016 में लंबे समय तक ब्लैकआउट एआईए उपकरण के साथ एक अस्थायी मुद्दे के कारण हुआ था जिसे एक सप्ताह के बाद सफलतापूर्वक हल किया गया था। जब एसडीओ अपने उपकरणों को कैलिब्रेट कर रहे थे, तब सूर्य जहां ऑफ-सेंटर हैं, वहां की छवियां देखी गईं।
डीएचएलआई के अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में कुछ नर्सों ने तो अस्पताल को कोविड-19 इकाई बनाने से पहले ही नौकरी छोड़ दी थी जबकि 15 प्रतिशत नेअस्पताल को कोविड-19 देखभाल इकाई बनाये जाने के बाद नौकरी छोड़ दी।
नयी दिल्ली। ऐसे में जब राजधानी दिल्ली में निजी अस्पतालों में कोविड-19 मरीजों के लिए बेड की संख्या बढ़ायी जा रही है, कोरोना वायरस मरीजों के इलाज के लिए चिकित्सकों, नर्सों और अन्य पैरामेडिकल कर्मियों की कमी की शिकायतें आ रही हैं। निजी अस्पतालों का कहना है कि यह कमी इसलिए है क्योंकि कोरोना वायरस संबंधी जटिलताओं के इलाज के लिए विशेषज्ञों का अभाव है और इसलिए भी क्योंकि बड़ी संख्या में स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों को पृथकवास में जाना पड़ा है। कई मेडिकल पेशेवरों ने संक्रमण के भय से या परिवार के दबाव के चलते नौकरियां छोड़ दीं जबकि अन्य ने अधिक पैसे और बीमा की मांग की है। हतोत्साहित कर्मचारी, सरकारी सहयोग नहीं मिलने, स्वास्थ्य कर्मियों में संक्रमण, परिवारों की अपने परिजन को कोविड-19 वार्ड में काम करने देने को लेकर अनिच्छा, मरीजों द्वारा सरकारी अस्पतालोंकी तुलना में निजी अस्पतालों को अधिक तरजीह देना ऐसे कुछ कारणों में शामिल हैं जिससे राष्ट्रीय राजधानी में निजी अस्पताल कर्मचारियों की कमीका सामना कर रहे हैं।
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कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि और सरकार द्वारा बैंक्वेट हॉल और होटलों को कोविड-19 इकाइयों में परिवर्तित करना और उन्हें अस्पतालों से सम्बद्ध करने के बीच इन अस्पतालों के प्रबंधन आंतरिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। दिल्ली हर्ट एंड लंग इंस्टीट्यूट (डीएचएलआई) के अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में कुछ नर्सों ने तो अस्पताल को कोविड-19 इकाई बनाने से पहले ही नौकरी छोड़ दी थी जबकि 15 प्रतिशत नेअस्पताल को कोविड-19 देखभाल इकाई बनाये जाने के बाद नौकरी छोड़ दी। इन नर्सों ने इसके लिए जो कारण बताये उनमें अभिभावकों का दबाव, निजी भय शामिल था।
इसी तरह से रोहिणी में सरोज सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि 40 से 50 प्रतिशत नर्सो ने अवागमन के साधनों की कमी और परिवार द्वारा उन्हें कोविड-19 ड्यूटी करने की इजाजत देने से इनकार जैसे कारण बताकर नौकरी छोड़ दी। डीएचएलआई के अध्यक्ष डा. के के सेठी ने कहा, ‘‘चिकित्सकों की कमी है। हमारे अस्पताल में एक हृदय चिकित्सा रोग इकाई है और हमारे चिकित्सक ऐसे मामलों के लिए प्रशिक्षित हैं। लेकिन इस तरह की बीमारी के लिए आपको कई तरह के विशेषज्ञों की जरुरत होती है जैसे इंटरनल मेडिसिन, रेस्पीरेटरी मेडिसिन विशेषज्ञ आदि। वे उपलब्ध नहीं हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘रेजीडेंट चिकित्सक जो आपात इकाइयों को संभालते हैं वे काम करने से इनकार कर रहे हैं। कोई भी अस्पताल में नौकरी शुरू करने के लिए तैयार नहीं होता जब आप उन्हें यह कहते हैं उन्हें कोविड-19 वार्ड में काम करना होगा। जो काम करने के लिए तैयार भी हैं वे लगभग तीन से चार गुना अधिक वेतन मांग रहे हैं।’’ दिल्ली सरकार राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के मामलों से निपटने के लिए बेड की क्षमता बढ़ा रही है, कोविड-19 के कुल मामले दिल्ली में अगले महीने के अंत तक बढ़कर 5.5 लाख होने की आशंका है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा मानवीय कारकों को ध्यान में रखे बिना किया जा रहा है।