ईश्वर दुबे
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Bhilai
यस बैंक (YES BANK) की खास्ता हालत से न सिर्फ लोग परेशान हो रहे हैं बल्कि भगवान जगन्नाथ मंदिर के पुजारी और श्रद्धालु भी चिंता में पड़ गए हैं।इस मंदिर के लगभग 545 करोड़ रुपये इस बैंक में जमा है। इतने करोड़ो रूपये जमा होने की वजह से मंदिर के पुजारी और श्रद्धालु काफी चिंता में पड़ गए है।
नई दिल्ली। यस बैंक (YES BANK) की खास्ता हालत से न सिर्फ लोग परेशान हो रहे हैं बल्कि भगवान जगन्नाथ मंदिर के पुजारी और श्रद्धालु भी चिंता में पड़ गए हैं। जिस तरीके से आम जनता के पैसे जमा हैं वैसे ही इस मंदिर के भी करोड़ों रुपये यस बैंक में जमा किए गए हैं। बता दें कि इस मंदिर के लगभग 545 करोड़ रुपये इस बैंक में जमा है। इतने करोड़ो रूपये जमा होने की वजह से मंदिर के पुजारी और श्रद्धालु काफी चिंता में पड़ गए है।
इस गंभीर मामले को देखते हुए ओडिशा के मंत्री प्रताप जेना ने पुजारी और श्रद्धालुओं को आश्वासन देते हुए कहा कि मंदिर में जमा 545 करोड़ रूपये की फिक्स डिपॉजिट की अवधि मार्च 2029 तक पुरी हो जाएगी जिसके बाद मंदिर प्रबंधन पैसे निकाल सकते हैं। इन पैसों को बाद में किसी भी राष्ट्रीय बैंक में जमा कराया जा सकता हैं। उन्होंने ये भी कहा कि यस बैंक से पैसे निकालने पर सिर्फ सेविंग अकाउंट पर प्रतिबंध है।
वहीं जगन्नाथ सेना के संयोजक प्रियदर्शी पटनायक ने मंदिर के पैसों को प्राइवट बैंक में जमा कराए जाने का विरोध किया और कहा कि यस बैंक में पैसे जमा कराना न सिर्फ गैर-कानूनी है बल्कि यह अनैतिक भी है। उन्होंने श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और मंदिर की प्रबंधन समिति को इस गलती के लिए जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही उन्होंने बताया कि ऐसे किसी भी प्राइवट बैंक में पैसे जमा कराने की उन्होंने पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज की थी लेकिन कोई कारवाई नहीं की गई।
RBI ने लगाई रोक
बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने यस बैंक पर हर तरीके की पाबंदी लगा दी है जिसके बाद से खाताधारकों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आरबीआई के अनुसार जमाकर्ता एक महीने तक सिर्फ 50,000 रुपये तक निकाल सकते हैं। यस बैंक पर छाए इस गहरे सकंट से आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खबर सुनते ही कई लोग यस बैंक के एटीएम पर जाकर अपने पैसे निकालने के लिए खड़े हो गए। पैसे न निकलने पर कई लोगों ने गुस्से में आकर सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास भी निकाली है। RBI के इस फैसले से मंदिर के विनायक दासमहापात्रा ने कहा कि इतनी बड़ी रकम फंसने से सेवक और भक्त काफी डरे हुए हैं।
कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सेना देशभर में आइसोलेशन सेंटर बनाए जाएंगे। ऐसे में राज्य की योगी सरकार ने भी कोरोना के कहर से दो-दो हाथ करने के लिए अपनी कमर कस रही है।
चीन के बाद कोरोना वायरस दुनिया के 70 से ज्यादा देशों में अपने पांव-पसार चुका है। भारत में अभी तक इस वायरस के 31 लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें इटली से भारत घूमने आए 15 पर्यटक और उनका एक ड्राइवर भी शामिल है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के आगरा के 5 लोग भी इस वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। गाजियाबाद के एक व्यक्ति में भी कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है।
कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सेना देशभर में आइसोलेशन सेंटर बनाए जाएंगे। ऐसे में राज्य की योगी सरकार ने भी कोरोना के कहर से दो-दो हाथ करने के लिए अपनी कमर कस रही है। उत्तर प्रदेश की सरकार ने गाजियाबाद के अर्थला में बने आलीशना आला हजरत हज हाउस को 500 बेड के आइसोलेशन सेंटर में बदलने का निर्णय किया है। इस आइसोलेशन सेंटर में कोरोना वायरस से संक्रमित या ग्रसित मरीजों को रखा जाएगा।
बता दें कि गाजियाबाद के इस हज हाउस में कई बड़े कमरे हैं और मरीजों की आवश्यकता की सभी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि इस हज हाउस को अगले तीन से चार दिनों के अंदर कोरोना आइसोलेशन सेंटर में तब्दील कर दिया जाएगा। गाजियाबाद में इस हज हाउस का निर्माण समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान कराया गया था।
कोरोना वायरस के कारण चीनी अर्थ-व्यवस्था पैंदे में बैठ गई है। उसका असर संपूर्ण विश्व-अर्थव्यवस्था पर भी हो रहा है। चीन के साथ भारत का व्यापार सबसे ज्यादा है। वह ठप्प होने के कगार पर है। भारत चीन का पड़ौसी है और कई दृष्टियों से चीन-जैसा ही है।
कोरोना वायरस का मुकाबला करने में भारत का स्वास्थ्य मंत्रालय और दिल्ली सरकार ने जो मुस्तैदी दिखाई है, वह काबिले-तारीफ है। हजारों लोगों की जांच हवाई अड्डों और अन्य स्थानों पर हो रही है। यदि चीन से निकली यह बीमारी अमेरिका-जैसे हजारों मील दूर स्थित देश तक फैल सकती है तो चीन तो हमारा एक दम पड़ौसी देश है। यदि केंद्रीय स्वाथ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तत्काल मुस्तैदी नहीं दिखाई होती तो अब तक चीन की तरह हजारों लोग भारत में भी काल के गाल में समा जाते।
सरकार द्वारा टीवी चैनलों और अखबारों के जरिए जो चेतावनियां जारी की जा रही हैं, उन पर लोग बराबर ध्यान दे रहे हैं और फिर गर्मियों का मौसम शुरू हो रहा है, इसीलिए देश के लोगों को बदहवास होने की जरूरत नहीं है। यों तो राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने इस बार होली के उत्सव से बचने की घोषणा की है और कई अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन भी स्थगित किए जा रहे हैं। लेकिन हमें यह सोचना चाहिए कि 70-80 देशों में फैला यह वायरस चीन में ही क्यों उत्पन्न हुआ ? यदि इसका ठीक-ठीक पता चल सके तो भारत और दुनिया के अन्य देश भी इससे बच सकेंगे।
अभी कुछ सामरिक विशेषज्ञों का यह मत प्रकट हुआ है कि चीन के वैज्ञानिकों ने इस वायरस को खुद पैदा किया है ताकि चीन के दुश्मन राष्ट्रों के विरुद्ध एक हथियार के रूप में इसका प्रयोग कर सकें। कुछ दिन पहले इसके दूसरे कारण के तौर पर चीनियों की मांसाहारी प्रवृत्ति को बताया गया था। वे किसी भी पशु या पक्षी के मांस से परहेज नहीं करते। चमगादड़ का मांस कोरोना का खास कारण माना गया है। इसका तीसरा कारण चीन के औद्योगीकरण में साफ-सफाई के प्रति लापरवाही को भी माना गया है। कारण जो भी हो, इस बीमारी के कारण चीनी अर्थ-व्यवस्था पैंदे में बैठ गई है। उसका असर संपूर्ण विश्व-अर्थव्यवस्था पर भी हो रहा है। चीन के साथ भारत का व्यापार सबसे ज्यादा है। वह ठप्प होने के कगार पर है। भारत चीन का पड़ौसी है और कई दृष्टियों से चीन-जैसा ही है। यह बिल्कुल सही मौका है, जबकि भारत को चीन से सबक लेना चाहिए।
-डॉ. वेदप्रताप वैदिक
लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी करने वालों की पहचान कर प्रशासन की ओर से अब तक 1 करोड़ 55 लाख रुपये के रिकवरी का नोटिस दिया जा चुका है।
नागरिकता संशोधन कानून की आड़ में उत्तर प्रदेश को उपद्रव की आग में झोंकने वालों और दंगा−आगजनी की साजिश को पर्दे के पीछे से अंजाम देने वाली देश विरोधी ताकतों के खिलाफ प्रदेश के कप्तान योगी आदित्यनाथ ने मोर्चा खोल दिया है। यूपी की सत्ता पर काबिज योगी सरकार ने एक तरफ जहां अमन−चैन से रहने का पाठ पढ़ा रही है वहीं शांति भंग करने वालों के खिलाफ एक्शन मोड में भी नजर आ रही है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नागिरकता कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन के दौरान उपद्रवियों ने सरकारी संस्थाओं को काफी नुकसान पहुंचाया था। अब जिला प्रशासन ने सीएए विरोधी उपद्रवियों की पहचाने के लिए शहर में पोस्टर लगाए हैं। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ भड़की हिंसा में नुकसान की भरपाई के लिए तोड़फोड़ और आगजनी करने वाले 57 आरोपियों के पोस्टर लगाए गए हैं। लखनऊ में 19 दिसंबर को सड़कों पर जमकर आगजनी और तोड़फोड़ की गई थी। लखनऊ के चौराहों पर बड़े होर्डिंग्स लगाए गए हैं, जिनमें बीते साल 19 और 20 दिसंबर को राजधानी में आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा करने वालों के नाम के साथ उनकी फोटो लगाई गई है। लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी करने वालों की पहचान कर प्रशासन की ओर से अब तक 1 करोड़ 55 लाख रुपये के रिकवरी का नोटिस दिया जा चुका है।
इस मामले में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर प्रशासन की ओर से उन्हें वसूली नोटिस भेजा गया था। अब ऐसे ही करीब 57 उपद्रवियों की तस्वीरें लखनऊ के अटल चौक और हजरतगंज सहित अन्य चौराहों पर लगाए गए हैं। बता दें कि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हिंसा के अगले दिन ही यह साफ कर दिया था कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को सरकार से मशविरा करने के बाद येस बैंक पर रोक लगायी और उसके निदेशक मंडल को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। वहीं बैंक के ग्राहकों पर भी 50,000 रुपये मासिक तक निकासी करने की रोक लगायी है। येस बैंक किसी भी तरह का नया ऋण वितरण या निवेश भी नहीं कर सकेगा।
नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को येस बैंक के खाताधारकों को भरोसा दिलाया कि उनका पैसा सुरक्षित है और रिजर्व बैंक येस बैंक से जुड़े मुद्दों का तेजी से समाधान करने के लिए काम कर रहा है। सीतारमण ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं रिजर्व बैंक के साथ लगातार संपर्क में हूं। केंद्रीय बैंक की इस मामले पर पूरी पकड़ है और उसने इसके जल्द समाधान के लिए आश्वस्त किया है। मैं भरोसा दिलाना चाहती हूं कि येस बैंक के हर जमाकर्ता का धन सुरक्षित है।’’ उन्होंने कहा कि यह कदम जमाकर्ताओं, बैंक और अर्थव्यवस्था के हित में उठाए गए हैं। सीतारमण ने कहा, ‘‘हमारी इस मामले पर पूरी पकड़ है। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने मुझे भरोसा दिलाया है कि येस बैंक के किसी भी ग्राहक को कोई नुकसान नहीं होगा।’’
रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को सरकार से मशविरा करने के बाद येस बैंक पर रोक लगायी और उसके निदेशक मंडल को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। वहीं बैंक के ग्राहकों पर भी 50,000 रुपये मासिक तक निकासी करने की रोक लगायी है। येस बैंक किसी भी तरह का नया ऋण वितरण या निवेश भी नहीं कर सकेगा। वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि बैंक के ग्राहक 50,000 रुपये की सीमा में पैसे निकाल सकें, यह सुनिश्चित करना सबसे पहली प्राथमिकता है। अगले एक महीने के लिए रिजर्व बैंक ने भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी प्रशांत कुमार को येस बैंक का प्रशासक नियूक्त किया है। वहीं देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के निदेशक मंडल ने नकदी संकट से जूझ रहे येस बैंक में निवेश के लिए ‘सैद्धांतिक’ स्वीकृति दे दी है।
सीतारमण ने कहा, आरबीआई पता लगाएगा येस बैंक में क्या गलत हुआ
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक से यह पता लगाने के लिए कहा है कि येस बैंक में क्या गलत हुआ और इसमें व्यक्तिगत स्तर पर जवाबदेही तय की जानी चाहिये। रिजर्व बैंक द्वारा येस बैंक के बोर्ड को भंग करने और जमा खाताधारकों की निकासी सीमा तय करने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में वित्त मंत्री ने कहा कि बैंक की 2017 से निगरानी की जा रही थी और इससे संबंधित गतिविधियों की हर दिन निगरानी की गई। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने 2017 से बैंक में प्रशासन संबंधी मसले, कमजोर अनुपालन, गलत परिसंपत्ति वर्गीकरण जैसी स्थिति को पाया। उन्होंने कहा कि कर्ज के जोखिम भरे फैसलों का पता चलने के बाद रिजर्व बैंक ने येस बैंक प्रबंधन में बदलाव का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ये फैसले बैंक के हित में किए गए और सितंबर 2018 में एक नए सीईओ की नियुक्ति हुई। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को भी येस बैंक में अनियमितताओं का पता चला।
सीतारमण ने कहा कि सरकार चाहती है कि रिजर्व बैंक तात्कालिकता की भावना के साथ यथोचित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि पुनर्गठन योजना 30 दिनों में पूरी तरह प्रभावी हो जाएगी और एसबीआई ने येस बैंक में निवेश करने की इच्छा जताई है। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि येस बैंक के कर्मचारियों की नौकरी, वेतन एक साल तक सुरक्षित रहने का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि अनिल अंबानी समूह, एस्सेल, डीएचएफएल, आईएलएफएस, वोडाफोन उन संकटग्रस्त कंपनियों में शामिल हैं, जिन्हें येस बैंक ने कर्ज दिया था।
ऐसा कहा जाता है की भारतीय शास्त्रों में व्यक्ति के हर सवाल का जवाब है | इसलिए शायद भारत के अधिकांशतः हिन्दू धर्म ग्रंथो को पुर्तगालियों ने जला दिया था | जब वे भारत से लौटकर अपने देश गये तो कई शास्त्र ऐसे थे, जिन्हे वे अपने साथ ले गये | ऐसा कहा जाता है की प्राचीन काल में भारत के ऋषि मुनियों ने ऐसी शक्तियां विकसित कर ली थी | जो काफी विचित्र थी | जिससे किसी व्यक्ति को सदैव यौवन की अवस्था में रखा जा सकता था |
ऐसा कहा जाता है की यदि एक निश्चित समय और कालग्रह का योग बनने पर इन मंत्रो का उपयोग किया जावे तो कोई भी व्यक्ति चिरंजीवी हो सकता है | इतिहास में ऐसी बहुत सी रानियां थी | जिन्होंने इस मंत्र का उपयोग किया और चिर यौवन को प्राप्त हुई | लेकिन इस मंत्र से वही व्यक्ति यौवन को प्राप्त होता है जो निश्चित काल ग्रह के समय ही जन्मा हो | आईये इस मंत्र को जाने, हो सकता है की आप भी अपनी खोई हुई जवानी को प्राप्त कर ले |
लेकिन इतिहास में अभी तक कुछ रानियों ने ही इसका प्रयोग किया था | जिसके बाद वे पुनः जवान हो गयी थी | इसलिए यह भी संभव है की किसी पुरुष को इस मंत्र का लाभ ना मिले | लेकिन स्त्रियों को शतप्रतिशत इसका लाभ मिलेगा | शास्त्रों में दो मंत्र बताये गये है | लेकिन हम आपको सिर्फ एक ही मंत्र बता रहे है | क्योंकि यह उच्चारण में सरल और सुरक्षा की दृष्टि से भी आसान है |
'ॐ एँ सोन्दर्यं सिद्धि एँ ॐ'
इस मंत्र का प्रयोग प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त पर ही करना चाहिए | क्योंकि इस समय यह मंत्र अधिक प्रभावी रहेगा | इस मंत्र का उपयोग करते समय अपना मुख उत्तर दिशा में रखना चाहिए | क्योंकि ऐसा कहा जाता है इस ओर भगवान आशुतोष विराजमान रहते है | जिससे आपकी मनोकामना शीघ्र ही पूर्ण होगी | जिससे आपको अधिक इन्तजार नहीं करना पड़ेगा और आपके चेहरे पर काफी निखार आ जायेगा |
सावधानियाँ
1. इस मंत्र का उपयोग गुरूवार से प्रारम्भ करते हुये, 9 दिनों तक करें |
2. इस मंत्र को करते समय आपके सामने से कोई भी व्यक्ति नहीं गुजरना चाहिए |
3. इस मंत्र का उपयोग माला के साथ करें |
4. अपने कार्य को गुप्त रखते हुये यह कर्म करें |
5. इन दिनों में क्रोध का विकार अपने मन में ना लाये |
6. इन दिनों मांस-मदिरे का सेवन नहीं करना चाहिए |
7. मंत्र का अनुकूल प्रभाव स्वयं पर हो, इसलिए किसी महाज्ञानी ब्राह्मण की सहायता अवश्य लेनी चाहिए |
8. किसी आवेश में आकर इस मंत्र का प्रयोग ना करें |
9. किसी भी कीमत पर रात्रि में इस मंत्र का जाप ना करें |
देश के बड़े बैंकों में से एक यस बैंक पर आए संकट से करोड़ों ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से यस बैंक के संकट को देखते हुए निकासी पर एक लिमिट तय कर दी गई है. अगले एक महीने तक लोग सिर्फ 50 हजार रुपये ही अपने खाते से निकाल पाएंगे. जिसके बाद लोगों में हलचल का माहौल है. दिल्ली से लेकर मुंबई, हैदराबाद और अहमदाबाद तक एटीएम के बाहर लोगों की भीड़ जुट गई है.
मुंबई में येस बैंक की फोर्ट ब्रांच के पास शुक्रवार सुबह से ही भीड़ लगने शुरू हो गई. यहां लोग बैंक की ब्रांच, एटीएम से पैसे निकालने आए हैं. हालांकि, इस दौरान लोगों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि एक व्यक्ति पूरे महीने में सिर्फ 50 हजार रुपये ही निकाल सकता है.
हालांकि, बैंक की ओर से ग्राहकों को बताया जा रहा है कि ये हालात सिर्फ 3 अप्रैल तक ही रहेंगे, बाकी हालात सुधारने की कोशिशें जारी हैं.
मुंबई के साथ-साथ अहमदाबाद में भी यस बैंक की ब्रांच के बाहर ग्राहकों की भीड़ है. हालांकि, यहां पैसा निकालने में लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि एटीएम का सर्वर ही डाउन हो गया है.
अब कुछ ब्रांच में जो ग्राहक एटीएम से पैसा नहीं निकाल पा रहे हैं उन्हें टोकन दिया जा रहा है. ब्रांच की ओर से बताया जा रहा है कि सिर्फ चेक से लोग अपने 50 हजार रुपये निकाल सकते हैं.
- बिहार के पटना में मौजूद यस बैंक की ब्रांच के पहुंचे मनोज कुमार ने कहा कि मुझे सिर्फ नोटिस थमाया गया, पैसा नहीं दिया गया. मनोज कुमार ने कहा कि उन्हें अपने बच्चे का मेडिकल कॉलेज में एडमिशन करवाना है और उन्हें 7.5 लाख रुपये की जरूरत है. लेकिन बैंक पैसे नहीं दे रहा है.
कोरोना का आतंक हमारे यहां अब तक इस कदर नहीं गहराया तो इसका सबसे बड़ा कारण यही रहा कि जहां चीन ने इस संक्रमण के सामने आने के बाद खबर को दबाने में काफी समय गंवा दिया, वहीं भारत ने समय रहते संक्रमण से बचाव के तरीकों पर कार्य करना शुरू कर दिया था।
दिसम्बर माह में चीन से शुरू हुआ कोरोना वायरस का आतंक अब एक-एक कर दुनिया के 70 से भी अधिक देशों में पैर पसार चुका है और दर्जन भर देशों में इसके चलते मौतें भी हो चुकी हैं। चीन में कोरोना संक्रमण के 80 हजार से भी ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और तीन हजार से अधिक मौतें हो चुकी हैं। संक्रमण के मामले में चीन, ईरान, इटली, कोरिया तथा सिंगापुर की स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। दूसरी ओर कुछ दिनों पहले भारत में मिले तीन कोरोना मरीजों के ठीक होने के बाद अब दो दिनों के भीतर 11 राज्यों में कोरोना के कई संदिग्ध मरीजों के मिलने से हड़कंप मचा है। इनमें से लगभग सभी दूसरे देशों की यात्रा करके भारत लौटे थे। यही कारण है कि सरकार द्वारा आनन-फानन में सक्रियता दिखाते हुए इटली, ईरान, कोरिया और जापान के वीजा निलंबित कर 12 से भी अधिक देशों से आने वाले यात्रियों की जांच का निर्णय लिया गया है।
चीन के बाहर भी करीब नौ गुना तेजी से फैल रहे कोरोना के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों की चिंता बढ़ना तो स्वाभाविक है लेकिन इससे घबराने की बजाय इससे बचने के लिए विशेष सतर्कता और एहतियात बरतना सबसे जरूरी है। संतोषजनक स्थिति यह है कि भारत में कोरोना के नए मामले सामने आने के बाद भारत में भी चीन जैसे हालात न बनने पाएं, इसके लिए सरकार और स्वास्थ्य तंत्र तुरंत सतर्क हो गए हैं और इस वायरस का प्रसार रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले अगर कोरोना का आतंक हमारे यहां अब तक इस कदर नहीं गहराया तो इसका सबसे बड़ा कारण यही रहा कि जहां चीन ने इस संक्रमण के सामने आने के बाद खबर को दबाने में काफी समय गंवा दिया, वहीं भारत ने समय रहते संक्रमण से बचाव के तरीकों पर कार्य करना शुरू कर दिया था। केरल में कोरोना संक्रमण के तीन मामले सामने आने के बाद ही सरकार द्वारा तमाम एहतियाती कदम उठाए गए थे और भारतीय नागरिकों को चीन न जाने की सलाह देते हुए वहां से आने वाले व्यक्तियों को ई-वीजा नहीं देने का निर्णय लिया गया था। दरअसल भारत व्यापार, कांफ्रेंस, पर्यटन, स्वास्थ्य और मरीजों के सहयोगी के लिए ई-वीजा जारी करता है।
दुनियाभर में कोरोना के आतंक को देखें तो इसने मौतों के मामले में वर्ष 2003 में कहर बनकर बरपे ‘सार्स’ (गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम) को भी काफी पीछे छोड़ दिया है। कोरोना वायरस के संबंध में चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग का मानना है कि कोरोना वायरस का करीब 17 साल पहले चीन में आतंक मचा चुके सार्स से जुड़ाव खतरनाक है। कुछ वर्षों पहले सार्स नामक खतरनाक बीमारी का संबंध भी चीन से ही था, जिसके चलते करीब आठ सौ लोगों की मौत हुई थी। कोरोना संक्रमण को लेकर पूरी दुनिया में दहशत के माहौल को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पहले ही वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया गया था और संगठन द्वारा कोरोना वायरस संक्रमण को आतंकवाद से भी गंभीर बताया जा चुका है। दरअसल कोई नहीं जानता कि कोरोना संक्रमण से विश्वव्यापी दहशत और हो रही मौतों का यह सिलसिला कहां जाकर थमेगा? विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस को ‘कोविड-19’ (सीओवीआईडी-19) नाम दिया है, जिसका अर्थ है कोरोना वायरस डिजीज। चिंताजनक स्थिति यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन स्वयं यह स्वीकार कर रहा है कि विश्वभर में संक्रामक रोग अब पहले से कहीं ज्यादा तेजी से फैल रहे हैं और 1970 के दशक से प्रतिवर्ष नए-नए रोगों के बारे में जानकारी मिल रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अब तक छह प्रकार के कोरोना वायरस की ही जानकारी थी लेकिन वुहान में नए प्रकार के कोरोना वायरस का पता चलने के बाद इनकी संख्या बढ़कर सात हो चुकी है। कोरोना वास्तव में वायरसों का एक बड़ा समूह है, जो कुछ जंगली जानवरों में पाया जाना एक आम बात है। कोरोना वायरस वैसे तो कई किस्म के होते हैं लेकिन अभी तक कुल छह किस्म के इन वायरसों को ही इंसानों को संक्रमित करने के लिए जाना जाता रहा था। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीएस) के मुताबिक यह वायरस जानवरों से मनुष्यों तक पहुंच जाता है लेकिन इसके मनुष्य से मनुष्य में फैलने की नई प्रवृत्ति ने इसे अत्यंत घातक बना दिया है। इस वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर यह आसानी से फैल सकता है। एक अध्ययन से यह तथ्य भी सामने आया है कि नया कोरोना वायरस औसतन एक मरीज से दस लोगों में फैल रहा है। लंदन के इंपीरियल कॉलेज के संक्रमण रोग विशेषज्ञ नील फर्ग्यूसन का कहना है कि नया कोरोना वायरस इतना खतरनाक है कि संक्रमण के 60 फीसदी मामलों में सफलता पाकर ही इसे मंद किया जा सकेगा। नए कोरोना वायरस के संक्रमण का अभी तक कोई इलाज नहीं है क्योंकि अब तक इसकी कोई वैक्सीन या दवा नहीं बनी है।
कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते दुनियाभर में निवेशकों की चिंता भी बढ़ी है। इस वायरस के खौफ के चलते चीन के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है, जिसका असर आने वाले समय में लंबे समय तक देखा जाता रहेगा। जनवरी माह से लेकर अभी तक 11 लाख करोड़ रुपये डूबने का अनुमान लगाया जा रहा है। भारत में चीन से आने वाले कच्चे माल की उपलब्धता न होने के कारण उद्योगों पर बुरा असर पड़ रहा है। इसके अलावा पर्यटन उद्योग और विमानन क्षेत्र को भी काफी घाटा हो रहा है। भारत में रोजगार के क्षेत्र में पर्यटन क्षेत्र का करीब दस फीसदी योगदान है और जीडीपी में इसकी करीब सात फीसदी हिस्सेदारी है। क्वार्ट्ज इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल भारत में 1.09 करोड़ विदेशी पर्यटक आए थे लेकिन कोरोना के वैश्विक आतंक के चलते पर्यटकों की संख्या में इस साल बहुत बड़ी गिरावट आना तय है। पिछले साल विदेशी पर्यटकों से भारत को करीब 28 अरब डॉलर की आय हुई थी लेकिन कोरोना के कारण इस वर्ष पर्यटन क्षेत्र पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।
कोरोना इतना संक्रामक है कि खांसी, छींक अथवा हाथ मिलाना भी इसके जोखिम का कारण बन सकते हैं। किसी संक्रमित व्यक्ति के छूने और फिर अपने मुंह, नाक अथवा आंखों को छूने से भी इस वायरस का संक्रमण हो सकता है। इसके संक्रमण के बाद सामने आने वाले लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश, कभी-कभी सिरदर्द इत्यादि प्रमुख हैं। निमोनिया, फेफड़ों में सूजन, छींक आना, अस्थमा का बिगड़ना भी इसके लक्षण हैं। कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें कोरोना संक्रमण के बाद भी कई दिनों तक कोई लक्षण नजर नहीं आए। ऐसे मामले काफी खतरनाक साबित हो रहे हैं। बुजुर्ग और बच्चे इसके आसान शिकार हैं तथा कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए तो यह काफी घातक है। किसी बीमार, जुकाम या निमोनिया से ग्रसित व्यक्ति के सीधे सम्पर्क में आने से बचें, मास्क पहनें, अपनी आंखों, नाक और मुंह को न छुएं तथा हाथों को बार-बार अच्छी तरह से साबुन से धोएं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने अथवा उसे कम करने के लिए जो सावधानियां बरतने की सलाह दी है और इस वायरस के संक्रमण के खतरे को कम करने के जो उपाय बताए हैं, उनके अनुसार अपने हाथ साबुन और पानी या अल्कोहल युक्त हैंड रब से साफ करें, खांसते या छींकते समय अपनी नाक और मुंह को टिश्यू या मुड़ी हुई कोहनी से ढंकें। जिन व्यक्तियों को सर्दी या फ्लू जैसे लक्षण हों, उनके साथ करीबी सम्पर्क बनाने से बचें। जंगल और खेतों में रहने वाले जानवरों के साथ असुरक्षित सम्पर्क न बनाएं और मीट तथा अंडों को अच्छे से पका कर ही खाएं।
कोरोना को लेकर भले ही पूरी दुनिया में दहशत का माहौल है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि कोरोना का संक्रमण हो जाने का सीधा अर्थ मौत ही है। अगर कोरोना से संक्रमित हुए लोगों के मामले देखें तो जहां भारत में केरल में मिले तीनों मरीज उपचार के बाद ठीक हो गए, वहीं चीन में अभी तक काफी लोगों को इलाज के बाद ठीक किया जा चुका है। हालांकि कोरोना वायरस के संक्रमण का अभी तक कोई पुख्ता इलाज नहीं है क्योंकि अब तक इसकी कोई वैक्सीन या टीका नहीं बना है। कोरोना से बचने का एकमात्र तरीका इससे बचने के लिए सुरक्षा के पर्याप्त उपाय अपनाया जाना ही है। बहरहाल, कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए बेहद जरूरी है कि भारत में अब कोरोना की दस्तक को हल्के में न लिया जाए और हर व्यक्ति को इससे बचने के तौर-तरीकों और उपायों की पूरी जानकारी हो ताकि भारत में चीन या इससे प्रभावित दूसरे देशों जैसे हालात बनने से बचा जा सके।
-योगेश कुमार गोयल
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं तथा तीन दशकों से समसामयिक विषयों पर लिख रहे हैं।)
आरबीआई ने देर शाम जारी बयान में कहा कि येस बैंक के निदेशक मंडल को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) प्रशांत कुमार को येस बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है।
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को नकदी संकट से जूझ रहे निजी क्षेत्र के येस बैंक के निदेशक मंडल को भंग करते हुए उस पर प्रशासक नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही बैंक के जमाकर्ताओं पर निकासी की सीमा सहित इस बैंक के कारोबार पर कई तरह की पाबंदिया लगा दी गयी हैं। केंद्रीय बैंक ने अगले आदेश तक बैंक के ग्राहकों के लिए निकासी की सीमा 50,000 रुपये तय की है। बैंक का नियंत्रण भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में वित्तीय संस्थानों के एक समूह के हाथ में देने की तैयारी की गयी है।
आरबीआई ने देर शाम जारी बयान में कहा कि येस बैंक के निदेशक मंडल को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) प्रशांत कुमार को येस बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इससे करीब छह माह पहले रिजर्व बैंक ने बड़ा घोटाला सामने आने के बाद शहर के सहकारी बैंक पीएमसी बैंक के मामले में भी इसी तरह का कदम उठाया गया था। येस बैंक काफी समय से डूबे कर्ज की समस्या से जूझ रहा है। इससे पहले दिन में सरकार ने एसबीआई और अन्य वित्तीय संस्थानों को येस बैंक को उबारने की अनुमति दी थी।
उत्तर बस्तर कांकेर 05 मार्च 2020 आधुनिक पद्धति से लाभकारी फसलों की खेती में कांकेर जिले के किसान भी नई इबारत लिख रहें है। चारामा विकासखण्ड के ग्राम परसोदा के किसान बिसेश्वर साहू ने पिछले वर्ष मात्र ड़ेढ एकड़ में टमाटर की खेती कर 04 लाख रूपये की आमदनी प्राप्त की है, इस वर्ष मात्र 40 डिस्मिल मे बैगन की खेती कर अब तक 50 हजार रूपये तक का बैगन बेच चुका है तथा अभी भी फल लगे हुए है। आधुनिक खेती को अपनाकर बिसेश्वर स्वयं आत्म निर्भर बन चुके है, साथ ही अपने गांव के 10 अन्य लोगों को भी प्रतिदिन रोजगार उपलब्ध करा रहें है।
कलेक्टर श्री के.एल. चौहान जिले के आला अधिकारियों के साथ चारामा विकासखण्ड के ग्राम परसोदा के सेंदार नाला डायर्वसन के नहर-नाली निर्माण के निरीक्षण पर पहुंचे थे, उस समय उन्हें कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस अंचल के किसानों द्वारा आधुनिक पद्धति से नकदी फसलों जैसे- साग-सब्जी, मक्का इत्यादि की खेती की जा रही है। ग्राम परसोदा के किसान बिसेश्वर साहू द्वारा भी आधुनिक पद्धति को अपनाकर खेती किया जा रहा है, उनकी बातों को सुनकर कलेक्टर श्री चौहान तत्काल बिसेश्वर साहू की खेत पर पहुंच गये तथा उनके द्वारा टपक सिंचाई पद्धति सह प्लास्टिक मल्चिंग से की जा रही कलिंदर, बैगन, टमाटर, फुलगोभी, पत्तागोभी, करेला, इत्यादि की खेती का अवलोकन किया। कलेक्टर द्वारा जानकारी लेने पर बिसेश्वर साहू ने बताया कि पिछले वर्षो से उनके द्वारा आधुनिक पद्धति को अपनाकर खेती की जा रही है, इससे पानी की भी बचत होती, लागत कम आती है और आमदनी भी ज्यादा होता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष ड़ेढ एकड़ में टमाटर की खेती की गई थी, जिससे 04 लाख का फायदा हुआ, इस वर्ष मात्र 40 डिस्मिल में बैगन की खेती से अब तक 50 हजार रूपये का फायदा हो चुका है। उनके द्वारा दो एकड़ में पत्तागोभी एवं फुलगोभी, चार एकड़ में कलिंदर(तरबूज), ड़ेढ एकड़ में टमाटर, एक एकड़ में करेला और 40 डिस्मिल में बैगन की खेती की जा रही है। कलेक्टर श्री चौहान ने उनके द्वारा की जा रही आधुनिक खेती की प्रसंशा की गई, साथ ही कृषि विभाग के उप संचालक एन.के. नागेश को निर्देशित किया गया कि जिले के अन्य किसानों को भी इस प्रकार की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाय, इसके लिए क्षेत्र भ्रमण भी कराया जावे। कलेक्टर से चर्चा के दौरान किसान बिसेश्वर साहू ने कहा कि चार एकड़ में की जा रही कलिंदर की खेती में 40 से 50 टन उत्पादन होने का अनुमान है। उन्हांने अपने खेत में लगे कलिंदर को तोड़कर कलेक्टर सहित अन्य जिला अधिकारियों को भेंट किया।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बैंकिंग लेनदेन में क्रिप्टोकरेंसी और बिटक्वाइन आदि पर पूरी तरह रोक लगाने वाले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सर्कुलर को निरस्त कर दिया है। आरबीआई के निर्णय को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने याचिका दाखिल की थी, जिस पर कोर्ट ने यह फैसला दिया है। इस तरह अब सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेड की अनुमति दे दी है। सुनवाई के दौरान आईएएमएआई ने कहा था कि केंद्रीय बैंक के इस कदम से क्रिप्टोकरेंसी में होने वाली वैध कारोबारी गतिविधियों पर प्रभावी रूप से पाबंदी लग गई है, जिसके जवाब में आरबीआई ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया। आरबीआई ने कहा कि उसने क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से मनी लाउंड्रिंग और टेरर फंडिंग के खतरे के मद्देनजर यह कदम उठाया है।
न्यायमूर्ति रोहिंटन नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने क्रिप्टोकरेंसी पर यह अहम निर्णय दिया। पीठ में जस्टिस अनिरुद्ध बोस और वी रामसुब्रमण्यन भी शामिल थे। बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने साल 2018 में एक सर्कुलर जारी कर क्रिप्टोकरेंसी कारोबार को बैन किया था।
लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने वर्चुअल करेंसी, जिसे क्रिप्टोकरेंसी भी कहते हैं, उससे ट्रेड को मंजूरी दे दी है। अब कोर्ट के इस आदेश के बाद वर्चुअल करेंसी जैसे बिटक्वाइन में कानूनी रूप से लेन-देन किया जा सकता है।
6 अप्रैल 2018 को भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्चुअल करेंसी में ट्रेड पर बैन लगाया था। मौजूदा समय में पूरे विश्व में कई तरह की वर्चुअल करेंसी हैं। इनमें से बिटक्वाइन का मूल्य सबसे अधिक है। मंगलवार को बिटक्वाइन की कीमत 0.39 फीसदी टूटकर 8815 डॉलर पर पहुंच गई थी। इसका मार्केट कैप 161 अरब डॉलर है।
क्रिप्टोकरेंसी एक ऐसी करेंसी है जिसे आप देख नहीं सकते। आसान शब्दों में आप इसे डिजिटल रुपया कह सकते हैं। क्रिप्टोकरेंसी को कोई बैंक जारी नहीं करती है। इसे जारी करने वाले ही इसे कंट्रोल करते हैं। इसका इस्तेमाल डिजिटल दुनिया में ही होता है।
बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध और आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विधेयक, 2019 (Banning of Cryptocurrency and Regulation of Official Digital Currency Bill, 2019) के ड्राफ्ट में यह प्रस्ताव दिया गया था कि देश में क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-बिक्री करने वालों को 10 साल की जेल की सजा मिलेगी। ड्राफ्ट के मुताबिक इसकी जद में वे सभी लोग आएंगे जो क्रिप्टोकरेंसी तैयार करेगा, उसे बेचेगा, क्रिप्टोकरेंगी रखेगा, किसी को भेजेगा या क्रिप्टोकरेंसी में किसी प्रकार की डील करेगा। इन सभी मामलों में दोषी पाए जाने वालों को 10 साल तक की जेल की सजा मिलती थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने यह प्रतिबंध हटा दिया है।
अब यह साफ हो चुका है कि अराजक तत्वों का लक्ष्य दुनियाभर में भारत को बदनाम करना था, भारत की छवि को खराब करना था। साफ नजर आ रहा है कि हिंसा एक त्वरित प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि सोची-समझी साजिश थी और इसको लेकर लंबे समय से षड्यंत्र किया जा रहा था।
दिल्ली हिंसा का सच सामने आना जरूरी है क्योंकि अगर दिल्ली नहीं बची तो फिर कुछ भी नहीं बचेगा। 1947 में बंटवारे के साथ मिली आजादी के तुरंत बाद देश के कई इलाकों में दंगे भड़क उठे। दंगों और हिंसा की आग में सिर्फ भारत और नए-नए बने पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाके ही नहीं झुलस रहे थे बल्कि इसने देश की राजधानी दिल्ली के भी एक हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया था। देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के लिए हालात लगातार चिंताजनक हो रहे थे।
एक तरफ सरदार पटेल को बंटवारे से जुड़ी समस्याओं से जूझना पड़ रहा था। आजाद होने का सपना देख रहे राजे-रजवाड़ों से जूझना पड़ रहा था। पाकिस्तान से आ रहे शरणार्थियों के रहने और खाने-पीने की उचित व्यवस्था के लिए मशक्कत करनी पड़ रही थी और इसी बीच देश की राजधानी दिल्ली में भी दंगे भड़क उठे। हालात लगातार खराब होते जा रहे थे। प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल को शांति स्थापित करने और हालात को नियंत्रण में लेने के लिए खुद दिल्ली की सड़कों पर उतरना पड़ा था। बीच में एक दौर ऐसा भी आया जब सरदार पटेल को यह कहना पड़ा कि दिल्ली नहीं बचेगी तो फिर कुछ भी नहीं बचेगा।
73 वर्षों बाद 2020 में दिल्ली में जो कुछ भी हुआ, उसने हम सबको शर्मसार कर दिया। विश्व के सबसे ताकतवर लोकतांत्रिक देश का राष्ट्रपति दुनिया के सबसे विशाल लोकतांत्रिक देश के दौरे पर था। जोर-शोर से स्वागत किया जा रहा था, दोस्ती की नई कहानी लिखी जा रही थी। ऐसा पहली बार हो रहा था कि सबसे ताकतवर देश का मुखिया भारत की धरती पर आकर भारत के प्रधानमंत्री की तारीफ में कसीदें पढ़ रहा था, आतंकवाद जैसे मसले पर खुल कर भारत के पक्ष में बयान दे रहा था। आतंकवाद को हर हाल में खत्म करने का दावा कर रहा था और सबसे बड़ी बात कि नागरिकता कानून हो या दिल्ली हिंसा का मसला या फिर कश्मीर, हर मुद्दे पर भारत का समर्थन करते हुए किसी भी घरेलू और आंतरिक मसले पर बोलने से साफ-साफ इंकार कर रहा था। तो दूसरी तरफ दुनिया के सबसे विशाल लोकतांत्रिक देश की राजधानी दिल्ली में दंगाई हिंसा का नंगा नाच कर रहे थे। मार-काट कर रहे थे। मीडिया के साथ-साथ पुलिस को भी निशाना बना रहे थे।
अब यह साफ हो चुका है कि ऐसे तत्वों का लक्ष्य दुनियाभर में भारत को बदनाम करना था, भारत की छवि को खराब करना था। साफ-साफ नजर आ रहा है कि हिंसा एक त्वरित प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि सोची-समझी साजिश थी और इसको लेकर लंबे समय से षड्यंत्र किया जा रहा था। आशंका तो यहां तक जताई जा रही है कि इस हिंसा के पीछे विदेशी आतंकी संगठनो का भी हाथ हो सकता है। जिस तरह से दिल्ली में छोटी और बड़ी दोनों तरह की मोबाइल गुलेल मिली है। छतों पर ईंट-पत्थरों का जखीरा मिला है। ईंट पत्थरों के अलावा रॉड, डंडे, पेट्रोल बम, तेजाब यहां तक कि निर्दोष लोगों को मारने के लिए पिस्तौल और तमंचे तक का इस्तेमाल किया गया। उससे यह साफ जाहिर हो रहा है कि हिंसा करने वालों ने कितना जबरदस्त षड्चंत्र रचा था। इन नापाक लोगों का मंसूबा देश की राजधानी दिल्ली को ऐसे समय पर दहलाना था जब अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा को लेकर दुनिया भर के नेताओं और मीडिया की नजरें भारत पर लगी हुई थीं। ये अपने नापाक मंसूबों के साथ निर्दोष लोगों को निशाना बना रहे थे। हत्या-लूटपाट और आगजनी कर रहे थे। इनकी हिम्मत इतनी बढ़ी हुई थी कि ये लोगों के साथ-साथ दंगे को कवर करने वाले मीडियाकर्मियों पर भी निशाना साध रहे थे। पुलिस के आला अफसरों को भी निशाना बना रहे थे। जाहिर तौर पर ये तैयारियां, ये दुस्साहस अपने आप में काफी कुछ बयां करता है।
इसलिए यह जरूरी हो गया है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। जैसा कि लौह-पुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल ने कहा था, जैसा कि देश के पहले उपप्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री सरदार पटेल ने कहा था कि अगर दिल्ली को नहीं बचा पाए तो फिर कुछ नहीं बचेगा। आज जरूरत उसी महापुरूष के उस कथन को याद करने की है।
दिल्ली के हालातों का जायजा दिल्ली पुलिस के नवनियुक्त कमिश्नर के साथ-साथ देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी लिया। दिल्ली हिंसा पर देश के गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के साथ कई दौर की बैठकें भी कीं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दिल्ली हिंसा के पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है। दिल्ली में बैठे तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं ने हिंसा के वीभत्स दौर को देखा। दिल्ली उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक, देश की अदालतों ने दिल्ली के हालात पर गंभीर चिंता जताई। मीडिया ने बहुत करीब से दंगों की आंच को झेला।
जाहिर है कि भारतीय लोकतंत्र का हर स्तंभ दिल्ली के हालात से दुखी है और सबको यह मालूम है कि यह एक गहरी साजिश थी, षड्यंत्र था और इसलिए अब सबको मिल कर कई स्तरों पर एक साथ काम करना होगा। एक तरफ दिल्ली में शांति बनाए रखनी होगी, अफवाहों को फैलने से रोकना होगा तो साथ ही दूसरी तरफ दिल्ली दंगों के असली ष़ड्यंत्रकारियों को जेल के सीखचों के पीछे पहुंचाना होगा और यह सख्त संदेश देश के दुश्मनों को देना होगा कि भारत दिल्ली जैसी हिंसा को बिल्कुल सहन नहीं करेगा। अब वक्त सच सामने लाने का है। दुश्मन को सख्त संदेश देने का है और सख्त एक्शन लेने का है।
-संतोष पाठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया छोड़ने की अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि वह अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को नहीं छोड़ने वाले हैं। उनका कहना है कि आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर वह अपने अकाउंट्स को उन महिलाओं को देंगे जिनके कार्य और जिंदगी ने हमें प्रेरित किया है। इसकी जानकारी खुद उन्होंने ट्विटर के जरिए दी।
प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर लिखा, 'इस महिला दिवस पर मैं अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को उन महिलाओं को सौंप दूंगा जिनका जीवन और कार्य हमें प्रेरित करता है। इससे उन्हें लाखों लोगों में प्रेरणा प्रज्वलित करने में मदद मिलेगी। क्या आप ऐसी महिला हैं या फिर आप ऐसी किसी प्रेरणादायक महिला को जानती हैं? ऐसी कहानियों को हैशटैग #SheInspiresUs (शी इंस्पायर्स अस) के साथ साझा करें।'
प्रधानमंत्री ने 16 घंटे पहले कहा था कि वह इस रविवार को सोशल मीडिया छोड़ने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने सोमवार को ट्विटर पर लिखा था, इस रविवार को मैं फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब समेत अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट छोड़ने पर विचार कर रहा हूं। इस बारे में मैं आपको जानकारी दे दूंगा।'
प्रधानमंत्री से लोगों ने की सोशल मीडिया न छोड़ने की अपील की, ट्विटर पर ट्रेंड हुआ ‘नो सर’
प्रधानमंत्री मोदी के सोशल मीडिया छोड़ने पर विचार करने से जुड़ा ट्वीट करने के कुछ ही देर के अंदर इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले बहुत से लोगों ने उनसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं छोड़ने का अनुरोध किया और इस दौरान माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर ‘नो सर’ ट्रेंड कर रहा था।
करीब एक घंटे में उनका ट्वीट 26,000 बार रीट्वीट किया गया और इस दौरान लगभग हर सेकेंड लोग इस पर कमेंट कर रहे थे। कुछ ही मिनटों में ट्विटर पर ‘नो सर’ ट्रेंड करने लगा और लोग प्रधानमंत्री के इस विचार पर कहीं चौंकते तो कहीं भ्रम में दिखे। इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले बहुत से लोगों ने उनसे सोशल मीडिया नहीं छोड़ने का अनुरोध किया।
ट्विटर पर मोदी के हैं पांच करोड़ 33 लाख फॉलोवर्स
प्रधानमंत्री मोदी सोशल मीडिया खास तौर पर ट्विटर पर सक्रिय रहते है। ट्विटर पर मोदी के पांच करोड़ 33 लाख, फेसबुक पर चार करोड़ 40 लाख और इंस्टाग्राम पर तीन करोड़ 52 लाख फॉलोअर्स हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय के ट्विटर हैंडल पर तीन करोड़ 20 लाख फॉलोअर्स हैं। मोदी ट्विटर पर पांच करोड़ फॉलोअर्स को पार करने वाले पहले भारतीय हैं।
कांग्रेस ने कसा तंज
प्रधानमंत्री के ट्वीट पर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, 'सम्मानीय प्रधानमंत्री जी, आपसे आग्रह है कि आप उन ट्रोल्स की फौज को यह सलाह दीजिए जो आपके नाम पर लोगों को हर सेकेंड अपशब्द कहते हैं और धमकी देते हैं! आभार, भारत का नागरिक।' वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था, 'नफरत छोड़िए, सोशल मीडिया नहीं।'
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में हुई हिंसा में कई घरों के चिराग बुझ गए, घर सूने हो गए, मोहल्लों की रौनक छिन गई। इसी हिंसा ने अशफाक को भी लील लिया। जिसकी शादी हाल ही में 14 फरवरी को हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अशफाक की मौत गोली लगने से हुई है।
नयी दिल्ली। दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में हुई हिंसा में कई घरों के चिराग बुझ गए, घर सूने हो गए, मोहल्लों की रौनक छिन गई। इसी हिंसा ने इंदिरा विहार में रह रहे अशफाक को भी लील लिया। जिसकी शादी हाल ही में 14 फरवरी को हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अशफाक की मौत गोली लगने से हुई है। अशफाक की पत्नी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
रोते-बिलखते हुए अशफाक के पिता न्याय चाहते हैं और चाहते हैं कि हिंसा में मारे गए तमाम लोगों को शहीद का दर्जा मिले। साथ ही अशफाक के पिता को हिन्दुस्तानी होने का गर्व है और वह कहते है कि कुछ लोगों ने महौल खराब किया। हालांकि उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उनके बेटे अशफाक की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है। मामले में कितनी सच्चाई है यह कह पाना तो अभी मुश्किल है क्योंकि एसआईटी हिंसा से जुड़े तमाम मामलों की छानबीन कर रही है।
मिली जानकारी के मुताबिक अशफाक बुलंदशहर के सासनी गांव से अपने सपने पूरे करने के लिए दिल्ली आया था। लेकिन 25 फरवरी को बिजली का काम करने गया अशफाक दंगाइयों की पांच गोलियां खाकर जमीदोंज हो गया था। सबसे दुखद: बात तो यह थी कि शवगृह में अशफाक का शव ले जाने के लिए आए उसके चाचा ने बताया कि वह पढ़ना चाहता था और वह अपने सपने पूरे करने के लिए दिल्ली आया था मगर दिल्ली ने तो उसकी जान ले ली। गौरतलब है कि दिल्ली हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 42 हो गई है। जबकि 200 से अधिक लोग जख्मी बताए जा रहे हैं।