खास खबर

खास खबर (1096)

अमेरिका में इस विषाणु के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देश में कोरोना वायरस के अब तक लगभग 1,90,000 मामले सामने आ चुके हैं। संक्रमण के मामलों की संख्या महज पांच दिन के भीतर ही दुगुनी हो गई है।

पेरिस। कोरोना वायरस की महामारी बुधवार तक के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार अकेले यूरोप में ही 30 हजार से अधिक लोगों की जान ले चुकी है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने इसे दूसरे विश्वयुद्ध के बाद मानवता के समक्ष सबसे भीषण संकट करार दिया है। इटली और स्पेन में कोरोना वायरस ने कहर मचा रखा है और पूरे महाद्वीप में प्रत्येक चार मौतों में से तीन मौत इन देशों में हो रही हैं। स्थिति यह है कि पृथ्वी की लगभग आधी आबादी इस समय लॉकडाउन की जद में है, ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश में पिछले 24 घंटों की अवधि के सर्वाधिक खतरनाक रहने के बीच आगाह किया कि समूचे अटलांटिक के लिए दो सप्ताह बहुत दर्दनाक हो सकते हैं। उन्होंने इस स्थिति को ‘‘प्लेग’’ करार दिया। अमेरिका में इस विषाणु के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देश में कोरोना वायरस के अब तक लगभग 1,90,000 मामले सामने आ चुके हैं। संक्रमण के मामलों की संख्या महज पांच दिन के भीतर ही दुगुनी हो गई है।
चीन में दिसंबर में महामारी के उभरने के बाद से समूचे विश्व में अब तक लगभग 41 हजार लोगों की मौत हो चुकी है और 8,30,000 से अधिक मामले सामने आए हैं। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस का मानना है कि वायरस की वजह से असाधारण आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल की स्थिति पैदा हो रही है तथा विश्व भीषण खतरे का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘...हमारा मानना है कि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद हम सबसे बड़े चुनौतीपूर्ण संकट का सामना कर रहे हैं।’’ कोरोना वायरस के चलते दुनियाभर में लॉकडाउन के चलते कंपनियां बंद हो गई हैं और श्रमशक्ति को घरों में बैठना पड़ रहा है। इसके चलते विश्व में आर्थिक अनिश्चितता और अशांति के दृश्य सामने आ रहे हैं। इटली में नि:शुल्क भोजन वितरण केंद्रों के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं, जबकि कुछ सुपर बाजारों में लूटपाट की खबरें हैं। विकासशील देशों में लॉकडाउन का आर्थिक दर्द काफी ज्यादा है। इसके चलते दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है और लाखों लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है। लॉकडाउन के चलते संकट अभी और गहरा सकता है। वहीं, अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि कोविड-19 का केंद्र रहे वुहान को बंद करने के चीन के फैसले से हजारों नए मामलों को रोकने में मदद मिली।
 

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफर डिये ने कहा, ‘‘हमारा आकलन कहता है कि वुहान में यात्रा प्रतिबंध और राष्ट्रीय आपदा मोचन जैसे कदम न उठाए गए होते तो फरवरी के मध्य तक ही वुहान के बाहर सात लाख से अधिक मामले हो जाते।’’ इसके साथ ही ध्यान अब लक्षणमुक्त मामलों से वायरस के प्रसार की ओर केंद्रित हो रहा है। चीन ने बुधवार को कहा कि उसके यहां कोरोना वायरस के 1,300 से अधिक लक्षणमुक्त मामले हैं। चीन ने इस चिंता के बाद पहली बार इस तरह का आंकड़ा जारी किया है कि जांच में संक्रमित, लेकिन लक्षणमुक्त लोगों से वायरस का प्रसार हो सकता है। जर्मनी और फ्रांस अपने लोगों की जांच में तेजी ला रहे हैं। न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क में तंबुओं के लगभग एक दर्जन फील्ड अस्पताल खड़े किए गए हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें अब भी विकल्प चुनने पड़ रहे हैं। बेथ इजराइल अस्पताल के शमित पटेल ने कहा, ‘‘यदि रोगियों की संख्या अधिक हो और आपके पास वेंटिलेटरों की संख्या सीमित हो, तो आप आवश्यक रूप से सभी रोगियों को वेंटिलेटर पर नहीं रख सकते। तब आपको चुनना पड़ता है कि वेंटिलेटर पर रखने के लिए किसे प्राथमिकता देनी है।

कक्षा नौवीं और 11 वीं में अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं को अब तक हुए प्रोजेक्ट, समय-समय पर होने वाली परीक्षाएं, आदि के मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा/दर्जे में प्रोन्नत किया जाएगा।

नयी दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बुधवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को देश में कोरोना वायरस महामारी के कारण पैदा हालात के कारण कक्षा एक से आठवीं तक के सभी छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने का निर्देश दिया। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, ‘‘कोरोना वायरस के कारण मौजूदा हालात के मद्देनजर मैंने सीबीएसई को कक्षा एक से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने की सलाह दी है।’’
उन्होंने कहा कि कक्षा नौवीं और 11 वीं के छात्र-छात्राओं को स्कूलों में अब तक हुए मूल्यांकन के आधार पर प्रोन्नत किया जाएगा। इस बार प्रोन्नत नहीं हुए छात्र स्कूल स्तर पर ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षाओं में शामिल हो सकते हैं। निशंक ने ट्वीट किया, ‘‘कक्षा नौवीं और 11 वीं में अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं को अब तक हुए प्रोजेक्ट, समय-समय पर होने वाली परीक्षाएं, आदि के मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा/दर्जे में प्रोन्नत किया जाएगा। इस बार प्रोन्नत नहीं होने वाले छात्र स्कूल स्तर पर ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षाओं में बैठ सकते हैं।

नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।

सोमवार को गिरफ्तार किए तीन में से एक व्यक्ति ने बताया ‘‘हमने मुख्य जिला प्रशासक से पुल का द्वार खोलने का आग्रह करने के लिए नदी तैर कर पार की। शुक्रवार की रात को नेपाली अधिकारियों ने भारत नेपाल को जोड़ने वाले पुल को खोल कर धारचुला में फंसे 225 नेपालियों को निकाल लिया था। ’’

शिरीष बी प्रधान
काठमांडू। कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिएलागू किए गए बंद के बीच भारत से नेपाल में प्रवेश करने के लिए महाकाली नदी तैरकर पार करने वाले तीन नेपाली नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। कोविड-19 को देखते हुए भारत और नेपाल, दोनों ही देशों ने बंद (लॉकडाउन) लागू किया हुआ है। भारत के उत्तराखंड में पिथौरागढ़ के धारचुला जिले में इन तीन व्यक्तियों समेत नेपाल के करीब 500 नागरिक चार दिन से फंसे हुए थे। सोमवार को गिरफ्तार किए तीन में से एक व्यक्ति ने बताया ‘‘हमने मुख्य जिला प्रशासक से पुल का द्वार खोलने का आग्रह करने के लिए नदी तैर कर पार की। ’’

 शुक्रवार की रात को नेपाली अधिकारियों ने भारत नेपाल को जोड़ने वाले पुल को खोल कर धारचुला में फंसे 225 नेपालियों को निकाल लिया था। फंसे हुए अधिकतर नेपाली नागरिक भारत में मजदूरी करते हैं। उन्होंने पुल के दरवाजे खोलने की मांग करते हुए रविवार को नेपाल सरकार के खिलाफ नारे लगाए थे।नेपाल की कैबिनेट ने रविवार को भारत नेपाल सीमा पर फंसे नेपालियों को इस शर्त पर देश में आने की अनुमति दे दी थी कि वे 14 दिन तक पृथक रहेंगे।

एनवाईके शिप मैनेजमेंट में फर्स्ट इंजीनियर अखिल धरमराज ने कहा, ‘‘हमारी 23 और 24 मार्च को परीक्षाएं होनी थीं, लेकिन परीक्षा केंद्र में प्रश्न पत्र मिलने के बाद 23 तारीख को परीक्षाएं रद्द कर दी गईं और तब तक भारत ने भी यात्रा प्रतिबंध लगा दिया।’’ बहरहाल, उन्हें और अन्य मरीनों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि उनकी परीक्षाएं कब होंगी।

लंदन। ब्रिटेन में फंसे सैकड़ों भारतीय छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें यहां से निकालने के लिए विमान की व्यवस्था करने की अपील की है।

दरअसल भारत ने कोरोना वायरस वैश्विक महामारी को फैलने से रोकने के लिए यात्रा प्रतिबंध लगा रखा है। भारत के कम से कम 380 छात्रों ने भारत सरकार से कार्रवाई की सामूहिक अपील करने के लिए अपने पासपोर्ट की जानकारी के साथ एक डेटा श्रृंखला शुरू कर दी है। इनमें केरल के मरीन इंजीनियरों का एक समूह भी शामिल है जिन्हें इस सप्ताह अपनी प्रबंधन स्तर की परीक्षाएं देने के बाद भारत लौटना था।

एनवाईके शिप मैनेजमेंट में फर्स्ट इंजीनियर अखिल धरमराज ने कहा, ‘‘हमारी 23 और 24 मार्च को परीक्षाएं होनी थीं, लेकिन परीक्षा केंद्र में प्रश्न पत्र मिलने के बाद 23 तारीख को परीक्षाएं रद्द कर दी गईं और तब तक भारत ने भी यात्रा प्रतिबंध लगा दिया।’’ बहरहाल, उन्हें और अन्य मरीनों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि उनकी परीक्षाएं कब होंगी। वे अपार्टमेंट्स और हॉस्टलों में साझा रूप से पृथक रह रहे हैं। उनके पास मास्क, दस्ताने या सैनिटाइज़र नहीं हैं और उन्हें इस जानलेवा विषाणु के संपर्क में आने का खतरा है। धरमराज ने कहा, ‘‘मुझे कोचीन हवाईअड्डे से जानकारी मिली है कि हाल ही में सिडनी से भारतीय नागरिकों को लेकर एक विमान उतरा। भारतीयों को दुनियाभर में अन्य देशों से निकाला जा रहा है लेकिन मालूम नहीं कि हमें क्यों छोड़ दिया गया है और हम अपनी बात प्रधानमंत्री मोदी तक कैसे पहुंचा सकते हैं।’’ ब्रिटेन के गृह विभाग ने हाल ही में पुष्टि की थी कि अगर किसी भी विदेशी छात्र या पेशेवर की वीजा अवधि खत्म हो गई है या खत्म हो रही है तो उसे 31 मई तक का विस्तार दिया जाएगा। केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र और उत्तराखंड समेत भारत के विभिन्न हिस्सों में फंसे कई छात्रों ने वीजा अवधि के विस्तार की घोषणा पर राहत जताई लेकिन आवास और आवश्यक सामान की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर सीमित संसाधनों को लेकर चिंता जताई।

इसके अलावा कई भारतीयों को संक्रामक रोग की चपेट में आने का खतरा है क्योंकि वे बड़ी संख्या में एक साथ मिलकर हॉस्टलों में रह रहे हैं तथा रसोईघर और बाथरूम साझा रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं। कोवेंट्री विश्वविद्यालय के मार्गेश राज ने टि्वटर पर प्रधानमंत्री मोदी से अपील की, ‘‘सर कृपया इस मामले पर गौर करें क्योंकि पढ़ाई के लिए ब्रिटेन आए मेरे जैसे कई भारतीय मित्र फंसे हुए हैं।’’ ये छात्र सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर रहे हैं और लंदन में भारतीय उच्चायोग के जरिए अपील कर रहे हैं जिसने उनसे अपनी जानकारियां देने को कहा है। नेशनल इंडियन स्टूडेंट्स और एलुमनी यूनियन यूके तथा इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स एसोसिएशन जैसे भारतीय छात्रों के प्रतिनिधि समूह परामर्श और सहायता दे रहे हैं। गौरतलब है कि भारत ने अपने यात्रा परामर्श में 14 अप्रैल तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया है और लंदन में भारतीय उच्चायोग ने भारतीय नागरिकों से राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) और पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए कहा है। उच्चायोग ने एक बयान में कहा, ‘‘भारत का उच्चायोग अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और वेबसाइट के जरिए यात्रा परामर्श में किसी भी तरह के बदलाव की जानकारी भारतीय नागरिकों को देगा। यह मुश्किल वक्त है। हम इस चुनौती से तभी बाहर निकलेंगे जब हम जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करेंगे और एक-दूसरे की मदद करेंगे।

नई दिल्ली. दुनिया भर में कोरोना वायरस (Coronavirus) से कोहराम मचा है. हर दिन हजारों लोगों की मौत हो रही है. इस बीच भारत के वैज्ञानिकों (Indian Scientists) को बड़ी कामयाबी मिली है. वैज्ञानिकों ने पहली बार कोरोना वायरस की माइक्रोस्कोप (Microscope) से ली गई तस्वीर जारी की है. कहा जा रहा है कि इस तस्वीर से वैज्ञानिकों को आगे रिसर्च में फायदा मिलेगा. साथ ही ये भी उम्मीद जग गई है कि भारत में इसके इलाज के लिए वैक्सिन बनाने में भी कामयाबी मिल सकती है.


ऐसे मिली तस्वीर
भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला 30 जनवरी को केरल से आया था. वैज्ञानिकों ने इस खतरनाक वायरस की चपेट में आने वाले देश के पहले शख्स के गले से कोरोना वायरस का सैंपल लिया था. इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (IJMR) के ताजा अंक में इसे विस्तार से प्रकाशित किया गया है.


 दवाओं की खोज
कोरोना वायरस के उपचार की दवा विकसित करने के लिये भारत, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ दुनिया के तमाम देशों की साझेदारी वाली परीक्षण प्रक्रिया में अपनी भागीदारी कर सकता है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की महामारी एवं संक्रामक रोग इकाई के प्रमुख डा. रमन आर गंगाखेडकर ने शुक्रवार को कहा कि परीक्षण के बाद नयी दवाओं की खोज हो सकेगी.इस बीच फ्रांस ने दावा किया है कि उसने इस वायरस की नई दवा खोज ली है. शुरुआती परीक्षण में पता चला है कि इस दवा से 6 दिन के भीतर संक्रमण को गंभीर स्थिति में पहुंचने से रोका जा सकता है. फ्रांस के इंस्‍टीट्यूट हॉस्पिटलो यूनिवर्सिटी के संक्रमण बीमारियों के विशेषज्ञ रिसर्च प्रोफेसर डिडायर राओ ने दावा किया है कि उन्‍होंने नई दवा का सफल परीक्षण कर लिया है. उन्‍होंने दवा के ट्रायल्‍स का एक वीडियो भी शेयर किया है.
 

देश में आतंकवाद के समान ही एक दूसरी बड़ी चुनौती है नक्सलवाद। आए दिन नक्सली हिंसा की घटनाएं देखने और पढ़ने को मिलती हैं। अगर पिछले दस सालों पर नजर डालें तो चाहे सरकार कांग्रेस की रही हो या बीजेपी की दोनों ही सरकारों के कार्यकाल के दौरान नक्सलियों ने हिंसा की वारदातों को अंजाम दिया है।

दिमाग में नफरत का बारूद और हाथ में नफरत की बंदूक मिल जाए तो बन जाते हैं नक्सली। यही नक्सली आज देश को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं। नक्सलियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। सत्ता से लड़ते -लड़ते नक्सली जवानों को निशाना बनाने से नहीं चूकते। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में नक्सलियों ने एक बार फिर खूनी खेला है। सुकमा में हुए नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 17 जवान शहीद हो गए। देश में आतंकवाद के समान ही एक दूसरी बड़ी चुनौती है नक्सलवाद। आए दिन नक्सली हिंसा की घटनाएं देखने और पढ़ने को मिलती हैं। अगर पिछले दस सालों पर नजर डालें तो चाहे सरकार कांग्रेस की रही हो या बीजेपी की दोनों ही सरकारों के कार्यकाल के दौरान नक्सलियों ने हिंसा की वारदातों को अंजाम दिया है।

इनमें कुछ ऐसी घटनाएं भी शामिल हैं, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। कौन हैं ये नक्सली क्या है नक्सवाद का इतिहास इन सारे सवालों के जवाब इस रिपोर्ट के जरिए तलाशने की कोशिश की है साथ ही कैसे देश में लाल आतंक ने पैर पसारा है, इसका भी जिक्र करेंगे।

छत्तीसगढ़ में हुए बड़े नक्सली हमले

 मनमोहन सिंह के कार्यकाल में नक्सली घटनाएं

    नक्सलियों ने 15 मार्च 2007 को बीजापुर के रानीबोदली में पुलिस कैंप पर हमला। नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग की और कैंप में आग लगा दी। इस घटना में पुलिस के 55 जवान शहीद हो गए थे।
    9 जुलाई 2007 को उरपलमेटा में सीआरपीएफ  और ज़िला पुलिस का बल नक्सलियों की तलाश कर के वापस बेस कैंप लौट रहा था। तभी  इस दल पर नक्सलियों ने हमला बोला जिसमें 23 पुलिसकर्मी मारे गए।
    12 जुलाई 2009 राजनांदगांव के मानपुर में नक्सलियों ने 29 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी।
    6 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में जंगलों के बीच में नक्सलियों के हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे।
    17 मई 2010 में जवान दंतेवाड़ा से सुकमा जा रहे थे। नक्सलियों की बारूदी सुरंग की चपेट में आने से 12 पुलिस अधिकारियों सहित 36 लोग मारे गए।
    29 जून 2010 में नारायणपुर जिले के धोड़ाई में सीआरपीएफ  के जवानों पर नक्सलियों ने हमला किया। इस हमले में पुलिस के 27 जवान मारे गए।
    जून 2011 को दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट कर एंटी लैंड माइन वाहन विकल को उड़ा दिया था। इसमें 10 पुलिसकर्मी शहीद हो गए।
    12 मई 2012 को सुकमा में दूरदर्शन केंद्र पर हमला, चार जवान शहीद।
    25 मई 2013 को परिवर्तन यात्रा करके लौट रहे कांग्रेस के काफिले पर झीरम में नक्सलियों ने हमला कर दिया। इसमें आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 30 से अधिक लोग मारे गए।
    झीरम में 11 मार्च 2014 को नक्सलियों ने 15 जवानों की हत्या कर दी।
    12 अप्रैल 2014 को छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में एक बड़ा नक्सली हमला किया गया था। उस हमले में  सुरक्षा बल के 5 जवानों समेत 14 लोगों की मौत हो गई थी।

मोदी सरकार के कार्यकाल में नक्सली घटनाएं

    22 मार्च 2015 को लातेहार इलाके में नक्सलियों ने कुछ राज नेताओं के परिजनों को निशाना बनाया था। नक्सलियों ने लातेहार-लोहरदगा जिले की सीमा पर स्थित मुरमू गांव के जमींदार, भाजपा नेता और झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ठाकुर बालमुकुंद नाथ शाहदेव के दो भाईयों और भतीजे की हत्या कर दी थी।
    अप्रैल 2015 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने बारुदी सुरंग बिछाई थी। इसी दौरान बारुदी सुरंग के फटने से सुरक्षा बल के 4 जवान शहीद हो गए थे।
    मार्च 2017 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने अपने चिर परिचित अंदाज में लैंडमाइन ब्लास्ट किया था। जिसमें वहां से गुजरने वाले CRPF के काफिले  के 7 जवान शहीद हो गए थे।
    11 मार्च 2017 को छत्तीसगढ़ में ही नक्सलियों ने सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन को निशाना बनाया था। जोरदार हमला किया गया था। जिसमें सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद हो गए थे।
    25 अप्रैल 2017 को छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों ने एक बड़े हमले को अंजाम दिया था। इस नक्सली हमले में 26 जवान शहीद हो गए थे।
    13 मार्च 2018 को छत्तीसगढ़ के सुकमा में 9 जवान नक्सली हमले में शहीद हो गए।
    11 नवंबर 2018 को छत्तीसगढ़ में हुए एक नक्सली हमले में सुरक्षा बलों के पांच जवान और एक स्थानीय नागरिक घायल हो गए थे।
    4 अप्रैल 2019 को छ्त्तीसगढ़ के कांकेर में सुरक्षा बल के जवानों की नक्सलियों से मुठभेड़ हो गई। इस दौरान बीएसएफ के 4 जवान शहीद हो गए।
    9 अप्रैल 2019 दंतेवाड़ा में मतदान से ठीक पहले छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने बीजेपी विधायक के काफिले पर हमला कर दिया। इसमें बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की मौत हो गई। हमले में 4 जवान भी शहीद हो गए।
    21 मार्च 2020 को सुकमा के कसालपाड़ और मिनपा में सीआरपीएफए एसटीएफ और डीआरजी यडिस्ट्रिक्ट रिजर्व फोर्सद्ध के करीब 550 जवान सर्चिंग के लिए निकले थे, जवानों को नक्सलियों के छत्तीसगढ़ के सक्रिय टॉप लीडर हिड़मा, नागेश और अन्य द्वारा कैंप लगाने का इनपुट मिला था, जवान सर्चिंग से लौट रहे थे, इसी दौरान नक्सलियों ने एंबुश लगाकर जवानों को फंसा लिया था, जवानों और नक्सलियों के बीच करीब साढ़े 3 घंटे तक मुठभेड़ चली, इसके बाद जवान अलग.अलग समूह में कैंप वापस लौटे, इनमें से 17 जवान लापता थे इनकी शहादत हुई है।

नक्सवाद का इतिहास
बात अगर नक्सल वाद शब्द की करें तो इसकी उत्पत्ति पश्चिम बंगाल के गाँव नक्सलबाड़ी से हुई है जहाँ भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता चारू मजूमदार और कानू सान्याल ने 1967 में सत्ता के खिलाफ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत की थी। मजूमदार चीन के कम्यूनिस्ट नेता माओत्से तुंग के बहुत बड़े प्रशंसकों में से था इसलिए इसे मोआवाद भी कहा जाता है। इनका मानना था कि भारतीय मजदूरों और किसानों की दुर्दशा के लिये सरकारी नीतियां जिम्मेदार हैं जिसकी वजह से उच्च वर्गों का शासन तंत्र और फलस्वरूप कृषितंत्र पर वर्चस्व स्थापित हो गया है।  1967 में नक्सलवादियों ने एक अखिल भारतीय समन्वय समिति बनाई। बाद में खुद को औपचारिक तौर पर स्वयं को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से अलग कर लिया और सरकार के खिलाफ भूमिगत होकर सशस्त्र लड़ाई छेड़ दी। 1971 के आंतरिक विद्रोह और मजूमदार की मृत्यु के बाद यह आंदोलन विभक्त होकर कदाचित अपने लक्ष्य और विचारधारा से विचलित हो गया।

नक्सली घटनाओं में आई 38 प्रतिशत की कमी
नक्सली घटनाओं की संख्या में 38% से अधिक की कमी आई है। साथ ही सुरक्षा बल कार्मिकों के मरने की संख्या में भी कमी हुई है। गृह मंत्रलाय की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक नक्सली हिंसा की गतिविधियों में साल 2014 के मुकाबले साल 2019 में खासी कमी आई है और यह गिरावट 38% से ज्यादा देखी गई है। साल 2015 में नक्सली घटनाओं की संख्या 1089 थी जबकि साल 2016 में 1048 साल 2017 में 908 साल 2018 में 833 और साल 2019 में यह संख्या घटकर 670 पहुंच गई।
नक्सलियों का आत्मसमर्पण
29 मार्च 2018 को सुकमा में 16 महिला नक्सली समेत 59 नक्सलियों ने पुलिस और सीआरपीएफ के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इसी क्रम में पिछले दो सालों में सरकार द्वारा 1476 नक्सल विरोधी आपरेशन चलाए गए जिसमें  2017 में सबसे ज्यादा 300 नक्सली मारे गए और 1994 गिरफ्तार किए गए।  11 राज्यों के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की संख्या 126 से घटकर 90 रह गई है और अत्यधिक प्रभावित जिलों की संख्या भी 36 से कम होकर 30 रह गई है। सरकार के अनुसार भौगोलिक दृष्टि से भी नक्सली हिंसा के क्षेत्र में कमी आई है, जहाँ 2013 में यह 76 जिलों में फैला था वहीं 2017 में यह केवल 58 जिलों तक सिमट कर रह गया है।

प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए एक तंत्र बनाने के लिए व्यक्तियों, स्थानीय समुदायों और संगठनों के साथ सक्रिय रूप से चर्चा करने पर जोर दिया है। उन्होंने साथ ही अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों से कहा कि वे आगे उठाये जाने वाले कदमों पर विमर्श करें।

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना वायरस के प्रकोप को लेकर उत्पन्न हो रही स्थिति और इससे निपटने के लिए किये जा रहे प्रयासों को लेकर बृहस्पतिवार रात में देश को संबोधित करेंगे। यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय ने बुधवार को दी। पीएमओ ने ट्वीट किया, ‘‘प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 19 मार्च 2020 को रात आठ बजे देश को संबोधित करेंगे जिसमें वह कोरोना वायरस से संबंधी मुद्दों और इससे निपटने को लेकर प्रयासों पर बात करेंगे।’’
एक अन्य ट्वीट में पीएमओ ने कहा कि मोदी ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए जारी प्रयासों की समीक्षा करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इसमें कहा गया, ‘‘भारत की तैयारियों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई। इसमें जांच सुविधाएं और बढ़ाना शामिल था।’’ प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए एक तंत्र बनाने के लिए व्यक्तियों, स्थानीय समुदायों और संगठनों के साथ सक्रिय रूप से चर्चा करने पर जोर दिया है। उन्होंने साथ ही अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों से कहा कि वे आगे उठाये जाने वाले कदमों पर विमर्श करें। प्रधानमंत्री नियमित रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से स्वयं को तैयार करने लेकिन नहीं घबराने की अपील कर रहे हैं। उन्होंने इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए गैर जरूरी यात्राएं से बचने और लोगों के एक जगह एकत्रित होने से बचने के विचार का समर्थन किया है।
 

मोदी ने साथ ही उन लोगों के प्रति आभार जताया है जो आगे रहकर कोरोना वायरस से मुकाबला कर रहे हैं जिसमें राज्य सरकारें, चिकित्सा क्षेत्र के लोग, पैरामेडिकल कर्मी, सशस्त्र बल कर्मी और अर्धसैनिक बल कर्मी, उड्डन क्षेत्र से जुड़े लोग और निकाय कर्मी शामिल हैं। वह इस सप्ताह के शुरू में दक्षेस देशों के एक वीडियो सम्मेलन में भी शामिल हुए थे जिसमें इस महामारी से निपटने के लिए एक संयुक्त रणनीति तैयार करने पर चर्चा हुई। देश में बुधवार को कोरोना वायरस के कुल मामले बढ़कर 151 हो गए।

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच में एक रिसर्च में दावा किया गया है कि ए (A) ब्लड ग्रुप वालों को कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। शोध में यह चौंका देने वाला खुलासा हुआ है कि ए ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों को कोविड-19 से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

नयी दिल्ली। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच में एक चौंका देने वाली रिसर्च सामने आई है। रिसर्च में दावा किया गया है कि ए (A) ब्लड ग्रुप वालों को कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। चीन के वुहान शहर से फैले इस वायरस की चपेट में आने से दुनियाभर में लगभग 8,000 लोगों की मौत हो गई है। जबकि भारत में अबतक 3 लोगों की मौत हो गई है और कोविड-19 से संक्रमित होने वालों की संख्या बढ़कर 148 हो गई है।

ए- ब्लड ग्रुप वालों को ज्यादा खतरा

चीन के वुहान और शेन्जेन शहर में हुई शोध में यह चौंका देने वाला खुलासा हुआ है कि ए ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों को कोविड-19 से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। जबकि ओ (O) ब्लड ग्रुप वाले इसके प्रतिरोधी हो सकते हैं। रिसर्च में सामने आया कि मरने वाले ज्यादातर लोग ए ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति थे। जबकि ओ (O) ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों की मौत की संख्या ए ब्लड ग्रुप वालों से कम है।

कोरोना वायरस का असर अब ऑनलाइन फूड सुविधा मुहैया कराने वाली कम्पनियों में भी दिखाई दे रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक फास्ट फूड चेन कम्पनी डोमिनोज और मैक डी की तर्ज पर स्विगी और जोमैटो ने कॉन्टैक्टलेस डिलीवरी की शुरूआत की है।

नयी दिल्ली। चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस ने भारत में कोहराम मचाया हुआ है। संक्रमित व्यक्तियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। भारत में अब वायरस से पीड़ित व्यक्तियों की संख्या बढ़कर 132 हो गई है। जबकि कर्नाटक, दिल्ली और मुंबई के एक-एक व्यक्ति ने दम तोड़ दिया है। वहीं, वायरस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सरकार ने एहतियात बरतते हुए जागरुकता अभियान चलाया है। सरकार देशवासियों से अपील कर रही है कि बार-बार साबुन से हाथ धोएं, सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें साथ ही साथ जरूरी न हो तो भीड़-भाड़ वाले इलाकों में न जाएं। इसी के साथ लगभर हर एक राज्य ने 31 मार्च तक सभी शिक्षण संस्थान, जिम और सिनेमाघरों को बंद रखने का आदेश दे दिया है। हालांकि सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि वायरस की वजह से घबराने की आवश्यकता नहीं है।

सरकार द्वारा जारी किए गए परामर्शों की अनदेखी न करें। साथ ही साथ हम आपको बताएंगे कि कोरोना वायरस की वजह से बाजार में क्या सस्ता और क्या महंगा हुआ है।

सस्ता:

    फ्लाइट टिकट
    चिकन
    सी फूड
    फिश
    सोना
    शेयर
    पेट्रोल-डीजल

महंगा:

    हैंड सेनिटाइजर (अल्कोहल)
    मास्क
    रूमाल
    हैंड टॉवल  
    दवाईयां
    मोबाइल फोन

वायरस का असर सड़कों से लेकर फ्लाइट तक में दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं दिल्ली मेट्रो में भी यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मिली जानकारी के मुताबिक एक महीने में लगभग 11 लाख यात्रियों की कमी को दर्ज किया गया है। साथ ही साथ कई सारे दफ्तरों ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की इजाजत भी दे दी है।

कॉन्टैक्टलेस डिलीवरी

कोरोना वायरस का असर अब ऑनलाइन फूड सुविधा मुहैया कराने वाली कम्पनियों में भी दिखाई दे रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक फास्ट फूड चेन कम्पनी डोमिनोज और मैक डी की तर्ज पर स्विगी और जोमैटो ने कॉन्टैक्टलेस डिलीवरी की शुरूआत की है।

इस डिलीवरी की सुविधा पाने के लिए ग्राहकों को सबसे पहले अपने ऐप को अपडेट करना पड़ेगा और डिलीवरी के आप्शन चुनते समय जीरो कॉन्टेक्ट डिलीवरी पर क्लिक करना पड़ेगा। जीरो कॉन्टेक्ट डिलीवरी पर क्लिक करते ही आप इस सुविधा का लाभ उठा पाएंगे।

जिसके मुताबिक जब डिलीवरी वाला व्यक्ति ग्राहक के घर में पहुंचेगा तो ऑर्डर को दरवाजे के सामने रखकर कुछ फीट पीछे चला जाएगा और जब तक ग्राहक ऑर्डर रिसीव नहीं करता है तब तक वह वहीं खड़ा रहेगा।

आयशा ने आईएस ज्वाइन करने वाले लोगों को संदेश देते हुए कहा कि मुझे लगता है कि बहुत से लोग जो (आईएस के लिए) आना चाहते हैं, उनकी भी मेरी तरह ही उम्मीदें होंगी लेकिन मैं उन्हें निर्णय लेने से पहले दो बार सोचने का सुझाव दूंगी।

आईएसआईएस को दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकी संगठन माना जाता है। पिछले काफी समय से यह भारत में अपनी पैठ गहरी करने की कोशिश करता रहा है। केरल के कई इलाके आईएसआईएस की निगाहों में है। यहां लोगों को बरगलाकर आतंकी गतिविधियों का हिस्सा बनाने की कोशिश लगातार की जाती रही है। ताजा मामला भी केरल से जुड़ा है और आईएसआईएस से भी।

दरअसल, सोनिया सेबेस्टियन उर्फ आयशा नाम की एक महिला जिन्होंने 2016 में अफगानिस्तान में आईएस में शामिल होने के लिए केरल छोड़ दिया था ने इस आतंकी संगठन को लेकर बड़े-बड़े खुलासे किए हैं। आयशा आज अपने शौहर की मौत के बाद आयशा वापस भारत लौटना चाहती है। उसका कहना है कि आईएस के गढ़ में स्थितियां उसकी उम्मीदों के विपरीत थीं।

एक मीडिया समूह द्वारा जारी एक वीडियो में आयशा ने कहा कि उनके पति, अब्दुल राशिद अब्दुल्ला भी आईएस को लेकर अपने जीवन के अंतिम दिनों में बहुत निराश थे। बता दें कि आयशा ने कुछ समय पहले आईएसआईएस मॉड्यूल के कासरगोड रिंग लीडर अब्दुल राशिद से निकाह किया था और उसके बाद कई युवकों को कट्टरपंथी बनाने का काम किया था। आयशा इस समय कुछ महीनों पहले आत्मसमर्पण करने के बाद दो मलयाली सहित अन्य महिलाओं के साथ काबुल की जेल में बंद हैं।

आयशा ने आईएस ज्वाइन करने वाले लोगों को संदेश देते हुए कहा कि मुझे लगता है कि बहुत से लोग जो (आईएस के लिए) आना चाहते हैं, उनकी भी मेरी तरह ही उम्मीदें होंगी लेकिन मैं उन्हें निर्णय लेने से पहले दो बार सोचने का सुझाव दूंगी। आयशा ने कहा कि वह अब और आईएस के साथ जुड़े रहना नहीं चाहती हैं।
आयशा ने आईएस की असलियत बयां करते हुए कहा कि हम अफगानिस्तान यह सोचकर गए थे कि ‘खलीफा’ के हिसाब से इस्लामी जीवन जी सकेंगे। लेकिन जब हम यहां पहुंचे, तो हमने महसूस किया कि लोग नमाज पढ़ने तक के लिए भी नहीं जा रहे थे।

आयशा के मुताबिक उसका पति अफगानिस्तान जाकर इन चीजों को देखकर बहुत निराश हुआ और इसके बाद उसने ऑडियो मैसेज भेजना बंद कर दिया। बता दें कि राशिद ने 90 से ज्यादा ऑडियो क्लिप भेजकर आईएस के प्रचार-प्रसार का काम किया था और केरल के लोगों तक इसे फैलाया था।

समूह की एक अन्य महिला फातिमा उर्फ ​​निमिषा ने वीडियो में कहा कि वह भी भारत लौटना चाहती है बशर्ते उसे कैद न हो और अत्याचार न किया जाए। उसने कहा कि मैं यह नहीं कह सकती कि मैं अफगानिस्तान में रहना चाहती हूं क्योंकि यह मेरी जगह नहीं है। भारत मेरी जगह है।

Ads

R.O.NO. 1399/63 Advertisement Carousel

MP info RSS Feed

फेसबुक