ईश्वर दुबे
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Bhilai
लोक कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण-संवर्धन को मिलेगा नया संबल, संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी किए निर्देश
रायपुर, सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला, लोक संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित एवं संवर्धित करने तथा प्रदेश के लोक कलाकारों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा, छत्तीसगढ़ द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश के कार्यशील लोक कला दलों को वाद्य यंत्र उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय सहायता अनुदान प्रदान किया जाएगा। इस पहल से पारंपरिक लोक कला से जुड़े कलाकारों और दलों को अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए आवश्यक वाद्य यंत्र उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
‘संगीत की दुर्लभ शैलियों व वाद्यों हेतु संचालित योजना’ के अंतर्गत लोक कला दलों को वाद्य यंत्र क्रय करने के लिए सहायक अनुदान उपलब्ध कराया जाना है। योजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संगीत शैलियों, दुर्लभ वाद्य यंत्रों और लोक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को संरक्षण प्रदान करते हुए उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। इसके माध्यम से प्रदेश में सक्रिय लोक कला दलों को अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग मिल सकेगा।
प्रदेशभर के कार्यशील लोक कला दल कर सकेंगे आवेदन
योजना के तहत प्रदेश के पात्र एवं कार्यशील लोक कला दल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। लोक कला दलों को निर्धारित प्रारूप में आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेजों के साथ अपना आवेदन संबंधित जनपद पंचायत अथवा नगरीय निकाय कार्यालय में जमा करना होगा।
आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 28 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक लोक कला दल समय-सीमा का विशेष ध्यान रखते हुए निर्धारित तिथि तक अपना आवेदन संबंधित कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं।
जिला स्तर पर अधिकारियों को जारी किए गए निर्देश
संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अनुपालन में संबंधित जिला प्रशासन द्वारा जिले के सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों तथा नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को परिपत्र जारी कर दिया गया है।
अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में कार्यरत लोक कला दलों तक योजना की जानकारी पहुंचाने तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोक कलाकारों और लोक कला दलों को योजना की जानकारी समय पर मिल सकेगी और वे निर्धारित अवधि में आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे।
लोक कलाकारों को मिलेगा आवश्यक संसाधनों का सहयोग
लोक कला दलों के लिए वाद्य यंत्र केवल प्रस्तुति का माध्यम नहीं, बल्कि उनकी कला और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा होते हैं। अनेक पारंपरिक लोक कलाओं में स्थानीय और पारंपरिक वाद्य यंत्रों का विशेष महत्व है। समय के साथ इन वाद्यों की उपलब्धता और संरक्षण भी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बनकर सामने आई है।
वाद्य यंत्रों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध होने से लोक कला दलों को अपनी प्रस्तुतियों के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। इससे लोक संगीत, लोक नृत्य और पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिल सकती है।
दुर्लभ लोक संगीत शैलियों और पारंपरिक वाद्यों के संरक्षण पर जोर
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत में अनेक विशिष्ट लोक संगीत शैलियां, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वाद्य यंत्र शामिल हैं। इनका संरक्षण केवल कला के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने से भी जुड़ा है।
योजना के माध्यम से पारंपरिक लोक कला से जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहन मिलने के साथ दुर्लभ संगीत शैलियों और वाद्यों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। अनुभवी कलाकारों से नई पीढ़ी तक पारंपरिक कला और वाद्य संगीत की जानकारी पहुंचाने में भी यह पहल उपयोगी साबित हो सकती है।
रायपुर, सितम्बर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ अभियान का आयोजन छत्तीसगढ़ के सभी आश्रम एवं छात्रावासों में किया जाएगा। अभियान के तहत विद्यार्थियों के बीच चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को अपने सपनों के भारत की कल्पना को चित्रों और विचारों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का अवसर मिलेगा। अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की भावना को प्रोत्साहित करना है।
ICAR-CIFRI और मत्स्य विभाग की संयुक्त कार्यशाला में किसानों को मिला वैज्ञानिक एवं तकनीकी मार्गदर्शन
रायपुर, सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ के जलाशयों में केज कल्चर (पिंजरा पालन) के माध्यम से मछली उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग, छत्तीसगढ़ एवं ICAR-CIFRI, बैरकपुर (कोलकाता) के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। 8 एवं 9 सितंबर को रायपुर स्थित मत्स्य पालन विभाग कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में मछलियों में होने वाली बीमारियों की त्वरित पहचान, रोकथाम और आधुनिक प्रबंधन तकनीकों पर किसानों एवं अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला में ICAR-CIFRI के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा एवं श्रीमती सोहिनी चटर्जी ने केज कल्चर एवं तालाबों में मछलियों में होने वाले रोगों के लक्षण, बचाव तथा वैज्ञानिक उपचार की जानकारी दी। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 50-60 केज कल्चर किसानों, 50-60 पारंपरिक तालाब मत्स्य पालकों तथा मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यशाला में फील्ड स्तर पर रोगों की त्वरित जांच, डायग्नोस्टिक सुविधाओं के विस्तार, मैदानी कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जलाशयों एवं मछलियों के स्वास्थ्य संबंधी डेटाबेस तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया गया। एकीकृत प्रबंधन व्यवस्था को राज्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
कार्यक्रम में संचालक मत्स्य पालन श्री एन.एस. नाग, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा श्री आनंद निषाद, उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा डॉ. लखन लाल धीवर, उप-संचालक मत्स्य पालन प्रशिक्षण संस्थान सुश्री बीना गड़पाले तथा सहायक मत्स्य अधिकारी श्री विकास कुमार साहू सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
जलाशयों में पहुंचकर वैज्ञानिकों ने किया केज कल्चर का निरीक्षण
कार्यशाला के उपरांत 10 सितंबर को ICAR-CIFRI के वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा एवं श्रीमती सोहिनी चटर्जी ने राज्य के जलाशयों का मैदानी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थापित केज कल्चर की स्थिति का जायजा लिया तथा मौके पर ही मत्स्य पालक किसानों को मछलियों के स्वास्थ्य, रोग प्रबंधन एवं बेहतर उत्पादन के संबंध में व्यावहारिक सुझाव दिए। राज्य में वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मेहनत, हौसले और अवसर ने बदली तस्वीर, खेत से व्यवसाय तक महिलाओं ने लिखी ‘लखपति दीदी’ बनने की कहानी
स्व-सहायता समूहों से मिला साथ, बचत और ऋण से आजीविका को मिला विस्तार
रायपुर, सितम्बर 2026/ कभी घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अपनी मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास से परिवार की आर्थिक मजबूती की आधारशिला बन रही हैं। किसी ने खेत में नई फसल उगाकर आय का रास्ता बनाया, किसी ने सब्जी उत्पादन को व्यवसाय का रूप दिया तो किसी ने मुर्गी पालन को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बना लिया। यह बदलाव केवल आय बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता बढ़ने की कहानी भी है।
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जुड़ी महिलाओं को बचत, ऋण, प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। महिलाएं इन अवसरों को अपनी मेहनत और लगन से उपलब्धि में बदल रही हैं। यही प्रयास उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहे हैं और अनेक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ के रूप में नई पहचान बना रही हैं।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आ रही ‘सेवा की कहानियां’ में इन महिलाओं का सफर इस बात का उदाहरण है कि जब शासन की योजनाएं जरूरतमंद तक पहुंचती हैं और उसके प्रयासों को सही दिशा मिलती है, तो बदलाव केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि परिवारों और जीवन में दिखाई देता है।
छोटी बचत से बड़े सपनों तक
ग्रामीण परिवारों में सीमित आय के बीच महिलाओं की भूमिका लंबे समय तक मुख्य रूप से घर संभालने तक सीमित रही। छोटी जरूरतों के लिए भी परिवार को दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था। बिहान से जुड़े स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं को संगठित होने, नियमित बचत करने और सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर दिया।
नियमित बचत ने आर्थिक अनुशासन बढ़ाया तो समूह की सामूहिक शक्ति ने महिलाओं के लिए ऋण और आजीविका गतिविधियों के रास्ते खोले। किसी ने खेती को चुना, किसी ने सब्जी उत्पादन शुरू किया, किसी ने मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाया तो किसी ने अपनी रुचि और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप आय का साधन अपनाया।
छोटी शुरुआत धीरे-धीरे बड़े बदलाव में बदलती गई। घर की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली महिलाएं अब अपनी आय अर्जित कर रही हैं और परिवार के आर्थिक फैसलों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
खेत से बाजार तक पहुंची कल्पना सिंह की आत्मनिर्भरता
अम्बिकापुर विकासखंड की कल्पना सिंह की कहानी इस बदलाव की सशक्त मिसाल है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने कृषि कार्य के लिए डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया और खीरे की खेती से शुरुआत की। इसके साथ ही वे बैंगन, टमाटर, तरबूज सहित मौसम के अनुरूप विभिन्न सब्जियों और फसलों की खेती करती हैं।
कल्पना के लिए यह बदलाव केवल खेत में फसल उगाने तक सीमित नहीं रहा। पहले घर से बाहर निकलने और लोगों से बातचीत करने में संकोच महसूस करने वाली कल्पना आज बैंकिंग, बाजार और कृषि से जुड़े कार्य स्वयं आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं।
खेती से मिली आय ने उनके भीतर यह विश्वास मजबूत किया है कि यदि मेहनत के साथ सही अवसर मिले तो ग्रामीण महिला अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। खेत से बाजार तक का उनका सफर आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सामाजिक आत्मविश्वास की भी कहानी है।
मजदूरी से अपने व्यवसाय तक पहुंचीं मति बाई
उदयपुर विकासखंड के ग्राम सोनतरई की मति बाई की कहानी भी संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक के सफर को सामने लाती है। कभी उनके परिवार की आजीविका मजदूरी और छोटे-मोटे कामों पर निर्भर थी। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने राधा स्व-सहायता समूह से जुड़कर आगे बढ़ने का रास्ता चुना।
समूह के माध्यम से तीन लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। मेहनत, निरंतरता और परिवार के सहयोग से शुरू हुआ यह काम आज उनकी आय का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। मति बाई के अनुसार मुर्गी पालन से उन्हें सालाना लगभग दो से तीन लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।
आज वे पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर महसूस करती हैं। उनके बच्चे भी इस काम में हाथ बंटाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य को लेकर उम्मीद भी मजबूत हुई है।
बस्तर के नितेश कश्यप को मिला नया जीवन, लिवर कैंसर को दी मात
समय पर जांच और उपचार के साथ आयुष्मान भारत योजना से मिला पांच लाख रुपए तक के निःशुल्क उपचार का सहारा
रायपुर, सितंबर 2026/ बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड के ग्राम करंजी निवासी 27 वर्षीय श्री नितेश कश्यप के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जीवन में नई उम्मीद लेकर आई। लंबे समय से पेट दर्द की असहनीय पीड़ा झेल रहे नितेश जब गांव के आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहुंचे, तो उन्हें प्राथमिक उपचार और दवाइयां दी गईं। दवाइयों से अपेक्षित राहत नहीं मिलने पर दोबारा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने पर वहां पदस्थ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर श्रीमती प्रीति बघेल ने उनकी स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल उन्हें महारानी जिला अस्पताल, जगदलपुर रेफर किया।
समय पर जांच से सामने आई गंभीर बीमारी
महारानी जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने नितेश की आवश्यक जांचें कराईं। खून की जांच, अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी विस्तृत जांचों में उनके लिवर कैंसर से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। गंभीर बीमारी की जानकारी मिलने के बाद परिवार चिंतित हो गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें उपचार की पूरी प्रक्रिया समझाते हुए आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत उपलब्ध निःशुल्क उपचार सुविधा का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
पांच लाख रुपए तक के उपचार कवच से हुआ सफल ऑपरेशन
आयुष्मान भारत योजना के तहत उपलब्ध पांच लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा ने नितेश और उनके परिवार को बड़ी आर्थिक चिंता से राहत दी। योजना के माध्यम से उनके जटिल उपचार और ऑपरेशन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। उपचार के बाद नितेश स्वस्थ होकर अपने सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।
आयुष्मान भारत ने मुझे नई जिंदगी दी
सफल उपचार के बाद नितेश कश्यप ने भावुक होकर कहा कि आयुष्मान भारत योजना ने उन्हें वास्तव में नई जिंदगी दी है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि पात्र हितग्राही इस जनहितकारी योजना का लाभ अवश्य लें। नितेश ने समय पर सही मार्गदर्शन देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों, उपचार करने वाले चिकित्सकों और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी कहानी यह बताती है कि समय पर स्वास्थ्यकर्मियों की सतर्कता, उचित जांच और उपचार के साथ स्वास्थ्य योजना का आर्थिक संबल गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकता है।
रायपुर, सितंबर 2026/ पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज कवर्धा के ऐतिहासिक रानी सागर तालाब परिसर स्थित आस्था के पावन केंद्र और कवर्धा राज परिवार न्यास द्वारा निर्मित श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर एवं श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक किया। उन्होंने भगवान श्री सिद्धेश्वर महादेव से समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगल कामना की।
इस अवसर पर मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल यहां की प्राकृतिक सुंदरता से ही नहीं, बल्कि इसकी समृद्ध धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी है। भोरमदेव और कवर्धा क्षेत्र आस्था, इतिहास और संस्कृति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमारी सरकार का प्रयास है कि इन ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों का संरक्षण करते हुए इन्हें आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी सृजित हों। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती आस्था और संस्कृति की विविध परंपराओं से समृद्ध है। इन परंपराओं को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
भोरमदेव कॉरिडोर की प्रगति की समीक्षा के लिए कवर्धा पहुंचे मंत्री
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के साथ पर्यटन विभाग की महत्वाकांक्षी भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना की प्रगति एवं आगामी कार्ययोजनाओं की समीक्षा के लिए कवर्धा प्रवास पर हैं। इस दौरान परियोजना से जुड़े कार्यों की वर्तमान स्थिति, निर्माण एवं विकास कार्यों की प्रगति तथा आगामी चरण की कार्ययोजना को लेकर समीक्षा की जाएगी।
केंद्र की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना से भोरमदेव को मिल रहा नया आयाम
केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत कबीरधाम के भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए 145.99 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत है। भोरमदेव क्षेत्र छत्तीसगढ़ की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। कॉरिडोर के विकास से क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने और आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों को एक समग्र पर्यटन अनुभव से जोड़ने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि भोरमदेव केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां आने वाला पर्यटक मंदिरों की स्थापत्य कला, क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय संस्कृति को एक साथ अनुभव कर सकता है। भोरमदेव कॉरिडोर का विकास इस समृद्ध विरासत को बेहतर ढंग से सामने लाने का अवसर है।
स्थानीय लोगों के लिए बढ़ेंगे अवसर
भोरमदेव कॉरिडोर के विकास से पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। होटल, होम-स्टे, स्थानीय परिवहन, हस्तशिल्प, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय उत्पादों से जुड़े लोगों को पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही का लाभ मिलेगा।
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन विकास का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़ना भी है। स्थानीय संस्कृति, कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर क्षेत्र के लोगों के लिए आय के नए अवसर तैयार किए जाएगें।
आस्था और विकास का बनेगा सुंदर संगम
रानी सागर तालाब परिसर में पूजा-अर्चना के दौरान मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। भोरमदेव जैसे स्थलों का विकास आस्था, संस्कृति, इतिहास और पर्यटन को एक साथ जोड़ने का माध्यम बनेगा।
उन्होंने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। हमारा प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलें, पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिले और स्थानीय लोगों को पर्यटन के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों।
पक्का घर मिलने से बदली जीवन की तस्वीर, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन से साकार हो रहे जरूरतमंदों के सपने
रायपुर, सितम्बर 2026/ अपना घर हर परिवार के जीवन का सबसे बड़ा सपना होता है। एक ऐसा घर, जिसकी मजबूत दीवारों के बीच परिवार सुरक्षित रहे, बच्चे बेहतर भविष्य के सपने देखें और जीवन सम्मान एवं सुकून के साथ आगे बढ़े। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सपना कई बार सीमित संसाधनों के कारण अधूरा रह जाता है। ऐसे परिवारों के सपनों को साकार करने में प्रधानमंत्री आवास योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। गौरेला के लोहरा झोरकी निवासी श्री रामप्रकाश की कहानी इसी बदलाव और उम्मीद की प्रेरक मिसाल है।
श्री रामप्रकाश का वर्षों से सपना था कि उनका भी अपना पक्का घर हो, जहां वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सुख-शांति से जीवन व्यतीत कर सकें। आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने के कारण उनके लिए पक्का मकान बनाना आसान नहीं था। सीमित आय और घरेलू जरूरतों के बीच अपने घर के निर्माण के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती थी।
ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आई। योजना के अंतर्गत प्राप्त सहायता से उनके आवास निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ। धीरे-धीरे निर्माण कार्य आगे बढ़ा और वर्षों से देखा जा रहा उनका सपना आखिरकार हकीकत में बदल गया। आज श्री रामप्रकाश का अपना पक्का मकान पूर्ण होकर तैयार है।
पक्का घर मिलने के बाद श्री रामप्रकाश और उनके परिवार के जीवन में खुशी और संतोष का नया अध्याय शुरू हुआ है। अब उनका परिवार एक सुरक्षित और मजबूत आवास में रह रहा है। बारिश, गर्मी और अन्य मौसम की चुनौतियों से सुरक्षा के साथ उन्हें अपने घर में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिला है।
श्री रामप्रकाश के लिए उनका नया घर केवल ईंट और सीमेंट से बना मकान नहीं है, बल्कि यह उनके वर्षों के सपने, संघर्ष और उम्मीदों के पूरा होने का प्रतीक है। वे बताते हैं कि अपने घर का सपना पूरा होना उनके परिवार के लिए बेहद खुशी और भावुकता का क्षण है। पक्का मकान उनके लिए सुरक्षा के साथ-साथ सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार बन गया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने देशभर में अनेक परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के पीछे मूल भावना यही है कि प्रत्येक पात्र परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध हो तथा वह अपने परिवार के साथ बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ सके।
श्री रामप्रकाश के जीवन में आया यह बदलाव इसी संकल्प की एक तस्वीर है। जिस पक्के घर का सपना कभी आर्थिक कठिनाइयों के कारण दूर दिखाई देता था, वही सपना आज उनके सामने एक मजबूत आशियाने के रूप में खड़ा है। उनका घर उनके परिवार के लिए वर्तमान की सुरक्षा और भविष्य की उम्मीद दोनों बन गया है।
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। शासन की योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाना है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से श्री रामप्रकाश को मिला पक्का घर इसी दिशा में हो रहे कार्यों का उदाहरण है।
पक्का आवास मिलने से श्री रामप्रकाश के परिवार में आत्मविश्वास बढ़ा है। अपने स्वयं के घर में परिवार के साथ रहने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिखाई देती है। यह घर उनके लिए सामाजिक सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व की नई पहचान बन गया है।
श्री रामप्रकाश प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं के क्रियान्वयन के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उनका कहना है कि सरकार की सहायता से उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ है और अब उनका परिवार अपने घर में सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन जी रहा है।
श्री रामप्रकाश की कहानी यह बताती है कि जब जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचता है, तो सरकारी सहायता केवल एक सुविधा नहीं रहती, बल्कि वह किसी परिवार के जीवन की दिशा बदलने वाली ताकत बन जाती है। प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला उनका पक्का घर उनके परिवार के लिए खुशियों का आशियाना, सम्मान की पहचान और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बन गया है।
नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली
रायपुर, सितंबर 2026/जब सुबह की शुरुआत पानी जुटाने की चिंता से न होकर एक नए आत्मविश्वास और सुविधा के साथ हो, तो समझ लेना चाहिए कि विकास ज़मीन पर उतर चुका है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित पंडरवाही गांव में आज यह सुखद बदलाव हर घर की देहरी पर साफ़ महसूस किया जा सकता है। अंगीरा ऋषि पर्वत की मनमोहक वादियों और बालका नदी के प्राकृतिक आंचल में बसे इस गांव में कभी पानी के लिए मीलों पैदल चलने और घंटों इंतज़ार करने की मजबूरी थी। लेकिन आज 'सेवा संकल्प अभियान' और जल जीवन मिशन के सशक्त संयोजन ने यहाँ की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। गांव के 94 परिवारों के घरों तक नल कनेक्शन पहुँचने से अब स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल ग्रामीणों की दिनचर्या का एक सहज और सम्मानजनक हिस्सा बन गया है।
पंडरवाही में पहले प्राकृतिक जलस्रोत उपलब्ध होने के बावजूद, विशेषकर गर्मी के दिनों में, पानी का प्रबंध करना एक गंभीर चुनौती हुआ करता था। इसका सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ता था, जिनकी सुबह और शाम का बहुमूल्य समय भारी बर्तन ढोने और पानी की कतारों में ही बीत जाता था। गांव की निवासी सुपेन बाई और सुशीला बाई बताती हैं कि अब घर-आंगन में ही नल लग जाने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बेहद आसान हो गई है। पानी लाने में जो श्रम और समय नष्ट होता था, अब उसका उपयोग वे अपने परिवार की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में कर रही हैं। इसके साथ ही, पानी भरने की जिम्मेदारी से मुक्त होकर बच्चे भी अब नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं, जिससे उनके सुनहरे भविष्य की नींव मजबूत हो रही है।
यहाँ यह योजना केवल नल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि जलापूर्ति को नियमित और सुचारू बनाए रखने के लिए एक पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था भी तैयार की गई है। स्थानीय पंप ऑपरेटर चुमन पटेल निर्धारित समय पर मोटर चलाकर ओवरहेड टैंक भरते हैं और जलापूर्ति की हर जानकारी 'मेरी पंचायत' ऐप पर दर्ज करते हैं। इसके अलावा, पाइपलाइन या मोटर में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी आने पर उसके तुरंत निवारण के लिए ग्रामीणों को सीधे संपर्क की सुविधा दी गई है, जो प्रशासनिक सजगता और जन-भागीदारी की एक मिसाल पेश करता है।
घर-घर नल से जल पहुँचने का सीधा प्रभाव गांव की स्वच्छता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी साफ़ दिखाई दे रहा है। नियमित जल उपलब्धता से व्यक्तिगत स्वच्छता, घरेलू साफ़-सफाई और बीमारियों से बचाव में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। पंडरवाही की यह सफलता दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं की असली उपलब्धि केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए गुणात्मक सुधार में निहित है। आज पंडरवाही के घरों में नल से बहती पानी की धार केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि बदली हुई दिनचर्या, बचे हुए समय और छत्तीसगढ़ में सुशासन के एक नए और बेहतर कल का प्रतीक बन चुकी है।
नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली
रायपुर, सितंबर 2026/जब सुबह की शुरुआत पानी जुटाने की चिंता से न होकर एक नए आत्मविश्वास और सुविधा के साथ हो, तो समझ लेना चाहिए कि विकास ज़मीन पर उतर चुका है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित पंडरवाही गांव में आज यह सुखद बदलाव हर घर की देहरी पर साफ़ महसूस किया जा सकता है। अंगीरा ऋषि पर्वत की मनमोहक वादियों और बालका नदी के प्राकृतिक आंचल में बसे इस गांव में कभी पानी के लिए मीलों पैदल चलने और घंटों इंतज़ार करने की मजबूरी थी। लेकिन आज 'सेवा संकल्प अभियान' और जल जीवन मिशन के सशक्त संयोजन ने यहाँ की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। गांव के 94 परिवारों के घरों तक नल कनेक्शन पहुँचने से अब स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल ग्रामीणों की दिनचर्या का एक सहज और सम्मानजनक हिस्सा बन गया है।
पंडरवाही में पहले प्राकृतिक जलस्रोत उपलब्ध होने के बावजूद, विशेषकर गर्मी के दिनों में, पानी का प्रबंध करना एक गंभीर चुनौती हुआ करता था। इसका सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ता था, जिनकी सुबह और शाम का बहुमूल्य समय भारी बर्तन ढोने और पानी की कतारों में ही बीत जाता था। गांव की निवासी सुपेन बाई और सुशीला बाई बताती हैं कि अब घर-आंगन में ही नल लग जाने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बेहद आसान हो गई है। पानी लाने में जो श्रम और समय नष्ट होता था, अब उसका उपयोग वे अपने परिवार की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में कर रही हैं। इसके साथ ही, पानी भरने की जिम्मेदारी से मुक्त होकर बच्चे भी अब नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं, जिससे उनके सुनहरे भविष्य की नींव मजबूत हो रही है।
यहाँ यह योजना केवल नल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि जलापूर्ति को नियमित और सुचारू बनाए रखने के लिए एक पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था भी तैयार की गई है। स्थानीय पंप ऑपरेटर चुमन पटेल निर्धारित समय पर मोटर चलाकर ओवरहेड टैंक भरते हैं और जलापूर्ति की हर जानकारी 'मेरी पंचायत' ऐप पर दर्ज करते हैं। इसके अलावा, पाइपलाइन या मोटर में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी आने पर उसके तुरंत निवारण के लिए ग्रामीणों को सीधे संपर्क की सुविधा दी गई है, जो प्रशासनिक सजगता और जन-भागीदारी की एक मिसाल पेश करता है।
घर-घर नल से जल पहुँचने का सीधा प्रभाव गांव की स्वच्छता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी साफ़ दिखाई दे रहा है। नियमित जल उपलब्धता से व्यक्तिगत स्वच्छता, घरेलू साफ़-सफाई और बीमारियों से बचाव में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। पंडरवाही की यह सफलता दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं की असली उपलब्धि केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए गुणात्मक सुधार में निहित है। आज पंडरवाही के घरों में नल से बहती पानी की धार केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि बदली हुई दिनचर्या, बचे हुए समय और छत्तीसगढ़ में सुशासन के एक नए और बेहतर कल का प्रतीक बन चुकी है।
धमतरी के विशाल परिवार के लिए बनी नई सुबह, बकाया मुक्त जीवन की ओर बढ़ता कदम
रायपुर, सितंबर 2026/ राज्य शासन की जनकल्याणकारी नीतियां किस प्रकार जमीनी स्तर पर आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं, इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल धमतरी जिले में देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित सेवा संकल्प अभियान के तहत लागू ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026’ से राज्य भर के हजारों आर्थिक रूप से कमजोर एवं बकाया बिजली बिल से परेशान परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है। राज्य सरकार की इस संवेदनशील पहल का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को बढ़ते विद्युत बकाया के बोझ से मुक्त कर उन्हें पुनः नियमित भुगतान की मुख्यधारा में जोड़ना है।
धमतरी निवासी श्री बी. एस. विशाल के परिवार के लिए भी बढ़ता हुआ बिजली बिल लंबे समय से एक बड़ी मानसिक और आर्थिक चिंता का कारण बना हुआ था। सीमित पारिवारिक आय के कारण समय पर बिल का भुगतान संभव नहीं हो पा रहा था, जिससे बकाया राशि में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। इसी दौरान जब परिवार को राज्य सरकार की इस जनहितकारी समाधान योजना की जानकारी मिली, तो उनके पुत्र श्री डेनियल विशाल ने तत्परता दिखाते हुए आवेदन प्रक्रिया पूरी की। विभागीय सहयोग और सरल व्यवस्था के चलते विशाल परिवार को शीघ्र ही योजना का प्रत्यक्ष लाभ मिल गया।
योजना के तहत परिवार को बकाया मूल राशि में पर्याप्त छूट के साथ-साथ अधिभार यानी सरचार्ज की शत-प्रतिशत माफी मिली। इसके साथ ही शेष राशि को आसान किस्तों में जमा करने की सुविधा मिलने से विशाल परिवार पर से आर्थिक तनाव का बोझ हमेशा के लिए समाप्त हो गया। अब वे पुनः नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करने की स्थिति में आ गए हैं। योजना का लाभ मिलने पर हितग्राही श्री डेनियल विशाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया और इस योजना को आम जनता के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
धमतरी जिले में भी इस योजना की प्रगति काफी उल्लेखनीय रही है। जिले में अब तक 4,652 पात्र हितग्राहियों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 4,115 उपभोक्ता ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं और 537 उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष रूप से बकाया मुक्ति का लाभ प्रदान किया जा चुका है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि योजना तेजी से आम जनता तक पहुंच रही है और लोगों को वास्तविक राहत प्रदान कर रही है।
इस योजना के तहत बीपीएल, घरेलू तथा कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को विशेष राहत दी जा रही है। जहां गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले बीपीएल उपभोक्ताओं को बकाया मूल राशि पर 75 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है, वहीं घरेलू और कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत तक की राहत दी जा रही है। इसके अतिरिक्त सभी पात्र श्रेणियों के लिए सरचार्ज पूरी तरह माफ किया जा रहा है। उपभोक्ता मात्र 10 प्रतिशत की न्यूनतम राशि जमा कर शेष बकाया को निर्धारित अवधि में आसान किस्तों में चुका सकते हैं।
उपभोक्ताओं के व्यापक हित और उत्साह को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने योजना की अवधि को बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दिया है। विद्युत विभाग द्वारा लगातार शिविरों और जागरूकता अभियानों के जरिए अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना न केवल आर्थिक राहत प्रदान कर रही है, बल्कि लोगों को एक नई शुरुआत का अवसर देते हुए राज्य सरकार की पारदर्शी, सुगम और संवेदनशील सुशासन की प्रतिबद्धता को पूरी सार्थकता के साथ दर्शा रही है।
उन्नत नस्ल सुधार और आधुनिक पशुपालन से बदली परदेशी की किस्मत
अब सालाना कमाई 10 लाख रुपए पार
रायपुर, सितंबर 2026/सेवा, संकल्प और समर्पण जब शासकीय योजनाओं से जुड़ते हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखी जाती है। कुछ वर्ष पहले तक केवल 8 से 10 देशी गायों के सहारे प्रतिदिन महज 15 से 20 लीटर दूध का उत्पादन करने वाले सारंगढ़ तहसील के ग्राम खुड़डेना निवासी किसान परदेशी लाल चंद्रा आज एक सफल और समृद्ध डेयरी उद्यमी बनकर उभरे हैं। शुरुआती दिनों में कम दूध उत्पादन और पशुओं की अचानक होने वाली बीमारियों या मृत्यु से परिवार को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, जिसके कारण उनकी आमदनी भी बेहद सीमित थी। ऐसे मुश्किल समय में राज्य सरकार का राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम उनके लिए वरदान साबित हुआ। पशुपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने अपनी गायों में कृत्रिम गर्भाधान के जरिए नस्ल सुधार की शुरुआत की, जिसके सुखद परिणामस्वरूप आज उनके पास उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली एचएफ (Holstein Friesian) क्रॉसब्रीड गायें तैयार हो चुकी हैं।
वर्तमान में परदेशी लाल चंद्रा के पास 6 उन्नत एचएफ क्रॉसब्रीड गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 65 से 70 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। उत्पादित दूध को वे स्थानीय निजी होटलों और उपभोक्ताओं को 40 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचते हैं, जिससे उन्हें रोजाना लगभग 2,600 से 2,800 रुपए की आमदनी होती है। इस तरह दूध बिक्री से उनकी मासिक आय 78,000 से 84,000 रुपए और वार्षिक आय बढ़कर 9.36 लाख से 10.08 लाख रुपए तक पहुँच चुकी है। जो पशुपालन कभी परिवार के लिए केवल एक पूरक आय का जरिया था, आज वही उनकी मुख्य आजीविका और आर्थिक मजबूती का ठोस आधार बन गया है।
भविष्य की आय को सुरक्षित करने के लिए उनके पास वर्तमान में 2 एचएफ क्रॉस, 2 जर्सी क्रॉस और 2 साहीवाल क्रॉस की कुल 6 उन्नत बछिया तैयार हो रही हैं, जो आने वाले दिनों में दूध उत्पादन और आय को और बढ़ाने का आधार बनेंगी। इसके साथ ही, पशुपालन के जोखिमों से सुरक्षा के लिए उन्होंने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत अपने पशुओं का 60,000 रुपए प्रति पशु की दर से तीन वर्षों का बीमा कराया है, जिसके लिए मात्र 585 रुपए प्रति पशु का प्रीमियम निर्धारित है। उन्नत मादा वत्स पालन योजना के अंतर्गत भी उनका चयन किया गया है, जिसके तहत बछियों के बेहतर पोषण के लिए उन्हें 19,500 रुपए मूल्य का संतुलित पशु आहार मिल रहा है, जिसमें हितग्राही अंशदान केवल 4,500 रुपए है।
परदेशी लाल ने अपनी आय को केवल दूध बिक्री तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि पशुओं से प्राप्त गोबर से जैविक खाद बनाकर स्थानीय किसानों को बेच रहे हैं। इससे उन्हें न केवल अतिरिक्त कमाई हो रही है, बल्कि कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों पर खर्च कम करने में भी मदद मिल रही है। सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई परदेशी लाल चंद्रा की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब शासकीय योजनाओं का लाभ सही हितग्राही तक पहुँचता है, तो पारंपरिक व्यवसाय भी आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बन सकता है।
‘सक्षम योजना’ से धमतरी की सफीना बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
रायपुर, सितंबर 2026/ हौसले बुलंद हों और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो तंगहाली की बेड़ियों को तोड़कर सफलता का नया इतिहास रचा जा सकता है। इसे सच कर दिखाया है धमतरी जिले के मगरलोड विकासखण्ड स्थित सुदूर वनांचल क्षेत्र की रहने वाली श्रीमती सफीना बानो ने। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत सामने आई सफीना की कहानी केवल संघर्ष की दास्तान नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों को हराकर आत्मनिर्भर बनने की एक जीवंत मिसाल है।
जब थम सी गई थी जिंदगी
पति द्वारा परित्यक्त किए जाने के बाद सफीना के सामने जिम्मेदारियों का पहाड़ टूट पड़ा। बुजुर्ग माँ की देखभाल, मासूम बच्ची का पालन-पोषण और घर चलाने का खर्च—सब कुछ अकेले उनके कंधों पर आ गया। न रोजगार का कोई जरिया था और न ही कोई पैतृक संपत्ति। आर्थिक तंगी से घिरीं सफीना को एक समय लगा कि उनकी जिंदगी अब यहीं ठहर गई है।
दिशा बदलने वाला 'सक्षम' सहारा
घने अंधेरे के बीच उम्मीद की किरण बनकर आईं महिला एवं बाल विकास विभाग की सेक्टर पर्यवेक्षक। सफीना ने उनसे अपना दर्द साझा किया। पर्यवेक्षक ने सफीना को ढांढस बंधाया और विभाग की ‘सक्षम योजना’ की जानकारी दी। सफीना के भीतर आगे बढ़ने का जज्बा देखकर उन्होंने खुद घर पहुँचकर 2 लाख रुपये के स्वरोजगार ऋण के लिए आवेदन करवाया।
दिसंबर 2025 में ऋण स्वीकृत हुआ और यह राशि सफीना के लिए सिर्फ एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने के सपनों की पहली उड़ान साबित हुई।
छोटे कदम से बड़ा मुकाम: मुर्गी पालन से ईंट-भट्ठा तक
ऋण राशि मिलते ही सफीना ने मुर्गी और खरगोश पालन से अपना छोटा-सा व्यवसाय शुरू किया। उनकी दिन-रात की मेहनत और लगन रंग लाई। देखते ही देखते फार्म में सैकड़ों मुर्गियाँ हो गईं और बिक्री से अच्छी आय होने लगी।
सफीना यहीं नहीं रुकीं; अपनी व्यावसायिक समझ को बढ़ाते हुए उन्होंने ईंट-भट्ठा निर्माण का काम भी शुरू किया। आज वे अपनी माँ की दवाइयों, घर के खर्च और बच्ची की पढ़ाई को बिना किसी परेशानी के पूरा कर रही हैं।
"पहले बेचारी कहते थे, आज काम माँगने आते हैं"
आर्थिक स्थिति सुधरने के साथ-साथ सफीना के आत्मविश्वास में जो बदलाव आया, वह सबसे बड़ा परिवर्तन है। अपनी इस यात्रा पर भावुक होते हुए सफीना कहती हैं कि दीदी, पहले लोग मुझे बेचारी कहते थे, आज वही लोग मुझसे काम माँगने आते हैं।
समाज के लिए नई मिसाल
सफीना की यह सफलता दर्शाती है कि जब दृढ़ इच्छाशक्ति को सरकारी योजनाओं का सही संबल और मार्गदर्शन मिलता है, तो कोई भी राह असंभव नहीं रहती। कभी परिस्थितियों के आगे बेबस दिखने वाली महिला आज दूसरों को रोजगार दे रही है। उनकी यह प्रेरक यात्रा प्रदेश की हज़ारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रही है।
सोनिबाई की संघर्ष और सफलता की कहानी
रायपुर,सितंबर 2026/प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशीलता के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में विकास की बयार हर जरूरतमंद के द्वार तक पहुँच रही है। राज्य सरकार की सुशासन नीति से दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के ऐसे हज़ारों परिवारों के सपने साकार हो रहे हैं, जो वर्षों से एक पक्की छत की आस में संघर्षरत थे। ऐसी ही एक सुखद और जीवन बदलने वाली कहानी नारायणपुर जिले के ग्राम पंचायत भरंडा की रहने वाली श्रीमती सोनिबाई पति श्री संनु राम की है।
सोनिबाई और उनका परिवार सालों से कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर था। बारिश के दिनों में टपकती छत, कड़कड़ाती ठंड में ठिठुरती रातें और तेज आंधियों का डर—हर मौसम उनके लिए एक नया इंतहान लेकर आता था। कच्चे घरौंदे में असुरक्षा और परेशानियों के बीच बीतते हर दिन के साथ एक सुरक्षित और पक्के मकान की आस धुंधली पड़ती जा रही थी। लेकिन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सोनिबाई के परिवार के लिए एक नया सवेरा और वरदान बनकर आई। योजना के तहत स्वीकृत राशि और प्रशासन की सहज प्रक्रिया से उनका पक्के घर का सपना हकीकत में बदल गया। जब घर की पक्की नींव पड़ी और छत ढली, तो केवल एक मकान ही नहीं खड़ा हुआ, बल्कि उस परिवार का आत्मसम्मान और नए कल का भरोसा भी सुदृढ़ हुआ।
अपनी खुशी और अनुभव साझा करते हुए श्रीमती सोनिबाई कहती हैं कि पुराने दिनों की तकलीफें याद कर आज भी मन सिहर उठता है। टपकती छत और कड़कड़ाती ठंड में नींद उड़ जाती थी। अब पक्का मकान मिलने से जिंदगी से असुरक्षा का साया हमेशा के लिए हट गया है। यह योजना हमारे जैसे गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुँचे। ग्राम भरंडा की सोनिबाई की यह सफलता की कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि राज्य सरकार के उस अटूट संकल्प की प्रतीक है, जो हर नागरिक को सम्मानजनक, सुरक्षित और खुशहाल जीवन देने के लिए कटिबद्ध है।
2 वर्ष 8 माह में 7,650 संपत्तियों का विक्रय, वार्षिक औसत में 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पारदर्शी, सरल और हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था को मिली नई गति
1,609.18 करोड़ रुपये की संपत्तियों का विक्रय, ओटीएस-2 से 1,584 संपत्तियों का हुआ निराकरण
• श्री सुनील त्रिपाठी
सहायक संचालक, जनसंपर्क
रायपुर, 21 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और अधोसंरचना विकास को नई गति देने की दिशा में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने संपत्ति विक्रय के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विकास कार्यों में गति, पारदर्शिता और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, विक्रय प्रक्रिया को सरल बनाने और हितग्राहियों की सुविधा को प्राथमिकता देने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
मंडल के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मात्र 2 वर्ष 8 माह की अवधि में 7,650 संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 2,869 संपत्ति रहा है। यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों के प्रदर्शन की तुलना में मंडल की विक्रय क्षमता में आई उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों की अवधि में मंडल द्वारा कुल 7,793 संपत्तियों का विक्रय किया गया था। इस दौरान वार्षिक औसत लगभग 1,559 संपत्ति रहा। इसके मुकाबले वर्ष 2024 से अगस्त 2026 की वर्तमान अवधि में वार्षिक औसत बढ़कर लगभग 2,869 संपत्ति हो गया है। अर्थात पिछले पांच वर्षों की तुलना में वर्तमान अवधि में मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय में लगभग 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
केवल संख्या नहीं, विक्रय मूल्य में भी बड़ी छलांग
मंडल की उपलब्धि केवल संपत्तियों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि संपत्ति विक्रय से प्राप्त राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मंडल द्वारा कुल 1,609.18 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 603 करोड़ रुपये रहा। वहीं वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों में कुल 1,362.21 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय हुआ था। इस अवधि में वार्षिक औसत विक्रय मूल्य 272.44 करोड़ रुपये रहा। वर्तमान अवधि में यह औसत बढ़कर लगभग 603 करोड़ रुपये हो गया है। इस तरह मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय मूल्य में पिछले पांच वर्षों की तुलना में दो गुने से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
ये आंकड़े बताते हैं कि मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के प्रबंधन और विक्रय को लेकर अपनाई गई कार्ययोजना प्रभावी रही है। संपत्तियों के बेहतर उपयोग, मांग के अनुरूप विक्रय व्यवस्था, हितग्राहियों के लिए प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने तथा लंबित मामलों के निराकरण पर ध्यान देने से विक्रय गतिविधियों में तेजी आई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकास और सुशासन पर जोर
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ शासन की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। नागरिकों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध हों और सरकारी संस्थाओं की संपत्तियों का बेहतर उपयोग हो, इस दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में सामने आई यह वृद्धि इसी व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ी हुई है। मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग से एक ओर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं।