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71 सोलर हाईमास्ट से रोशन हो रहे गांव, 672 सोलर पम्पों से पेयजल और 4,300 सोलर पम्पों से किसानों के खेतों को मिल रहा सिंचाई का सहारा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सौर ऊर्जा और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के विकास के विजन से जुड़ रही जमीनी पहल मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दूरस्थ अंचलों में सुविधाओं का हो रहा विस्तार

रायपुर,  सितम्बर 2026/ सुकमा जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा अब केवल बिजली का विकल्प नहीं, बल्कि रोशनी, पेयजल, सिंचाई और रोजमर्रा की सुविधाओं को मजबूत करने का माध्यम बन रही है। गांवों में सोलर हाईमास्ट से रात रोशन हो रही है, सोलर पम्पों से पेयजल की उपलब्धता आसान हुई है और किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने में सौर ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकास विजन में गांवों में आधुनिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने, स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर रहा है। ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना में ग्रामीण भारत को मजबूत आधार देना इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने छत्तीसगढ़ के ‘विकसित भारत विकसित छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने, छत्तीसगढ़ को सौर ऊर्जा का केंद्र बनाने और किसानों को ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया था। इसी व्यापक सोच के अनुरूप सुकमा जैसे दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव ला रहा है।

अंधेरे से रोशनी तक, 71 सोलर हाईमास्ट से बदल रही गांवों की रात

कभी शाम ढलते ही अंधेरे में सिमट जाने वाले सुकमा के कई गांवों में अब सौर ऊर्जा से संचालित हाईमास्ट रोशनी का माध्यम बन रहे हैं। नियद नेल्लानार योजना के जरिए सिलगेर, सालातोंग, टेकलगुडियम, पूवर्ती, बगडेगुड़ा, सुरपनगुड़ा, दुलेड़, मोरपल्ली, मंडीमरका, बेदरे, केरलापेन्दा और तोकनपल्ली सहित विभिन्न ग्रामों एवं नगरीय निकाय क्षेत्रों में 71 सोलर हाईमास्ट संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं 8 अन्य संयंत्रों की स्थापना प्रगतिरत है।

इन हाईमास्ट की रोशनी का लाभ केवल सड़कों और चौक-चौराहों तक सीमित नहीं है। शाम के बाद जरूरी काम से आने-जाने वाले ग्रामीणों, बाजार जाने वाले परिवारों, बच्चों और युवाओं तथा सार्वजनिक आयोजनों में शामिल होने वाले लोगों के लिए यह रोशनी सुविधा का नया आधार बनी है। महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए भी गांवों में आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हुआ है।

सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं के रखरखाव में भी प्रशासन की तत्परता दिखाई दे रही है। सुशासन तिहार में प्राप्त शिकायतों पर क्रेडा जिला कार्यालय द्वारा कार्रवाई करते हुए खराब सोलर हाईमास्ट संयंत्रों की एलईडी लाइट और बैटरियों को बदला गया। इससे बंद पड़ी रोशनी फिर से शुरू हुई और ग्रामीणों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सुविधा मिल सकी।

672 सोलर पम्पों से पेयजल की राह हुई आसान

सौर ऊर्जा का दूसरा महत्वपूर्ण प्रभाव ग्रामीण पेयजल व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। जल जीवन मिशन के तहत जिले के विभिन्न गांवों में 672 सोलर पम्प स्थापित किए गए हैं। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का उपयोग पेयजल व्यवस्था को सुगम बनाने में किया जा रहा है। केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल की सुविधा पहुंचाना है। वर्ष 2026 में केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक जारी रखने तथा इसे केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण से आगे बढ़ाकर नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर अधिक केंद्रित करने का निर्णय लिया है।

सुकमा के ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पम्पों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को ऊर्जा की उपलब्धता से जोड़ा जाना दूरस्थ गांवों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। जिन परिवारों को पहले पानी के लिए नदी, झिरिया या कुओं तक जाना पड़ता था, उनके लिए गांव में ही सौर ऊर्जा से संचालित पम्प के माध्यम से पानी उपलब्ध होने से समय और श्रम की बचत हो रही है। इसका लाभ विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को मिल रहा है, जिन्हें पानी लाने में अतिरिक्त समय और मेहनत नहीं करनी पड़ती।

 

जल जन सेवा संकल्प के तहत जागरूकता रैली और स्वच्छता अभियान, जलस्रोतों के संरक्षण के साथ स्वच्छ पर्यावरण का दिया संदेश

रायपुर, 18 सितंबर 2026/ ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के अंतर्गत जिले में जल संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में गौरेला विकासखंड के ग्राम देवरगांव स्थित मल्हनिया जलाशय में ‘जल जन सेवा संकल्प‘ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से जल संरक्षण, जलस्रोतों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की सहभागिता रही। इस अवसर पर जल संरक्षण जागरूकता रैली निकाली गई। रैली के माध्यम से ग्रामीणों एवं स्थानीय नागरिकों को जल के महत्व, जलस्रोतों की सुरक्षा तथा पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। प्रतिभागियों ने जल संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और भविष्य के लिए जलस्रोतों को सुरक्षित रखने का संदेश दिया।

स्वच्छ जलाशय, स्वस्थ पर्यावरण का लिया संकल्प

जल जन सेवा संकल्प कार्यक्रम के अंतर्गत मल्हनिया जलाशय एवं उसके आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। अभियान के दौरान जलाशय परिसर की साफ-सफाई करते हुए लोगों को जलस्रोतों में कचरा नहीं डालने, आसपास स्वच्छता बनाए रखने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया।

अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जल संरक्षण और स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जलस्रोत ग्रामीण जीवन, कृषि और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार हैं। इनके संरक्षण के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से जलस्रोतों को स्वच्छ रखने और उनके संरक्षण में निरंतर सहयोग करने की अपील की।

जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण का अभियान

‘जल जन सेवा संकल्प‘ का उद्देश्य आम नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जिम्मेदार बनाना तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जलस्रोतों की स्वच्छता एवं सुरक्षा को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नागरिकों से जल का अनावश्यक अपव्यय रोकने, पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने, जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने तथा अपने आसपास के लोगों को भी जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने की अपील की।

सेवा संकल्प अभियान में सेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश

‘सेवा संकल्प अभियान‘ के माध्यम से जिले में जनहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को व्यापक रूप दिया जा रहा है। जल संरक्षण और स्वच्छता से जुड़ा यह आयोजन सेवा की भावना को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मल्हनिया जलाशय में आयोजित कार्यक्रम ने लोगों को यह संदेश दिया कि जलस्रोतों और प्रकृति की सेवा भी समाज तथा आने वाली पीढ़ियों के प्रति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

जल संरक्षण जागरूकता रैली और स्वच्छता अभियान के माध्यम से ग्रामीणों में सामूहिक सहभागिता की भावना को मजबूत किया गया। कार्यक्रम के दौरान जल, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश दिया गया। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित यह पहल जिले में जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की दिशा में सामूहिक प्रयासों को गति देने वाली रही।

 

नुक्कड़ नाटक, रंगोली, ड्रॉइंग एवं भाषण प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई राष्ट्र निर्माण की कल्पना, युवा शक्ति, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता को बनाया केंद्र

रायपुर, 18 सितंबर 2026/ ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के अंतर्गत गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा, जनजागरूकता और राष्ट्र निर्माण की भावना को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। अभियान के तहत विद्यार्थियों ने कला, अभिनय और अभिव्यक्ति के माध्यम से विकसित भारत की अपनी कल्पना को प्रस्तुत किया। जिले के गौरेला स्थित रानी दुर्गावती चौराहा के पास आईटीआई गौरेला एवं कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की बालिकाओं द्वारा नुक्कड़ नाटक और रंगोली के माध्यम से जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं ‘पच्चीस करोड़ बच्चों के सपनों का भारत‘ थीम के तहत जिले के शासकीय एवं निजी सहित सभी 905 विद्यालयों में ड्रॉइंग एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।

नुक्कड़ नाटक के जरिए युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण का संदेश

रानी दुर्गावती चौराहा में आयोजित नुक्कड़ नाटक में बालिकाओं ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा भाव, नमो गाथा तथा देश को समृद्ध, सशक्त और मजबूत राष्ट्र बनाने में युवा शक्ति की भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि देश के विकास में युवाओं की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है और शिक्षा, कौशल, मेहनत तथा नवाचार के माध्यम से युवा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

नुक्कड़ नाटक में युवाओं को आत्मनिर्भर बनने, स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठाने तथा अपनी क्षमता और कौशल के अनुरूप आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एवं मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश भी दिया गया।

स्वच्छता से पर्यावरण संरक्षण तक, विद्यार्थियों ने दिखाई जिम्मेदारी

जनजागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, पानी एवं बिजली की बचत करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश दिया। नाटक के माध्यम से मेहनत, लगन, अनुशासन, एकता और भाईचारे जैसे मूल्यों को भी प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।

रंगोली के माध्यम से भी सामाजिक सरोकारों, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेशों को आकर्षक रूप में प्रदर्शित किया गया। रंगों और रचनात्मक आकृतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने समाज को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करने वाले विचारों को सामने रखा।

905 विद्यालयों में गूंजा ‘पच्चीस करोड़ बच्चों के सपनों का भारत‘

‘पच्चीस करोड़ बच्चों के सपनों का भारत‘ थीम के तहत जिले के सभी 905 शासकीय एवं निजी विद्यालयों में ड्रॉइंग एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी कल्पनाशीलता और विचारों के माध्यम से विकसित भारत के सपने को चित्रों और भाषणों में अभिव्यक्त किया।

ड्रॉइंग प्रतियोगिता में बच्चों ने स्वच्छ एवं सुंदर भारत, हरित पर्यावरण, आधुनिक शिक्षा, तकनीकी प्रगति, आत्मनिर्भरता, सामाजिक एकता और सशक्त राष्ट्र जैसे विषयों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया। वहीं भाषण प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा, युवा शक्ति, नवाचार, कौशल विकास, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।

बच्चों के सपनों में दिखी विकसित भारत की तस्वीर

प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की कल्पनाओं में ऐसा भारत दिखाई दिया, जो स्वच्छ, शिक्षित, आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हो। बच्चों ने अपने चित्रों और विचारों के माध्यम से आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रकृति संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और समान अवसरों वाले भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की।

 

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से घरों की छतें बनीं ऊर्जा उत्पादन की इकाइयां, सरगुजा में 1,733 घरों में स्थापित हुए रूफटॉप सोलर संयंत्र

सौर ऊर्जा से बिजली खर्च में राहत के साथ स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मिल रहा बढ़ावा

रायपुर, 18 सितम्बर 2026/ देश में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ आम नागरिकों को ऊर्जा उत्पादन में सहभागी बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। योजना ने घरों की छतों को केवल मकान का हिस्सा नहीं रहने दिया, बल्कि उन्हें बिजली उत्पादन की छोटी इकाइयों में बदलने का रास्ता खोला है। रूफटॉप सोलर संयंत्र के माध्यम से परिवार अपनी बिजली की जरूरतें पूरी करने के साथ अतिरिक्त बिजली को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार विद्युत ग्रिड में भेज सकते हैं। इस तरह बिजली का एक सामान्य उपभोक्ता ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया में सहभागी बनकर ‘ऊर्जा दाता’ की भूमिका की ओर बढ़ रहा है।

सूर्य की रोशनी से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई राह

भारत में सौर ऊर्जा की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए घरों की खाली छतों का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए करना स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत पात्र परिवार अपने घरों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करा सकते हैं और निर्धारित प्रावधानों के अनुसार केंद्र एवं राज्य सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी से संयंत्र स्थापित करने की प्रारंभिक लागत का बोझ कम होता है। वहीं, सौर ऊर्जा से घर की बिजली जरूरतों की पूर्ति होने पर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता और घरेलू बिजली खर्च में कमी आने की संभावना रहती है। आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पादन होने पर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजने की व्यवस्था नागरिकों को ऊर्जा व्यवस्था से सीधे जोड़ती है।

सरगुजा में योजना के प्रति बढ़ा उत्साह, लक्ष्य से अधिक आए आवेदन

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को सरगुजा जिले में भी नागरिकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। वर्ष 2025-26 के लिए जिले में 2,000 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 3,282 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 3,222 आवेदनों में वेंडरों का चयन किया जा चुका है, जबकि 1,733 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।

शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में योजना की पहुंच बढ़ रही है। अम्बिकापुर शहर में 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 2,158 आवेदन प्राप्त हुए और 1,360 घरों में संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं अम्बिकापुर ग्रामीण क्षेत्र में 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 1,124 आवेदन प्राप्त हुए तथा 373 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं।

ये आंकड़े बताते हैं कि सरगुजा में नागरिक सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए तेजी से आगे आ रहे हैं। योजना के प्रति बढ़ती रुचि यह भी दर्शाती है कि परिवार बिजली की जरूरत पूरी करने के साथ ऊर्जा उत्पादन में अपनी भागीदारी को लेकर भी जागरूक हो रहे हैं।

विनोद कुमार राय की छत बनी ऊर्जा उत्पादन का माध्यम

अम्बिकापुर के राजेंद्र प्रसाद वार्ड, दर्रीपारा निवासी श्री विनोद कुमार राय के परिवार का अनुभव इस बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत करता है। सोलर संयंत्र स्थापित करने से पहले उनके घर का बिजली बिल कई बार 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच जाता था। इससे परिवार के मासिक बजट पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ता था।

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी मिलने के बाद श्री राय ने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया और अपने घर की छत पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कराया। लगभग 2 लाख रुपये की लागत वाले संयंत्र पर उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार से 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इस तरह उन्हें कुल 1.08 लाख रुपये की अनुदान सहायता प्राप्त हुई।

श्री राय ने सब्सिडी की राशि सोलर संयंत्र के लिए लिए गए बैंक ऋण में जमा की। अब उनके लिए सौर ऊर्जा केवल बिजली खर्च कम करने का माध्यम नहीं है, बल्कि बिजली उत्पादन में स्वयं की भागीदारी का अवसर भी है। कई बार उनके घर में सोलर संयंत्र से उत्पादित बिजली घरेलू खपत से अधिक हो जाती है। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है और निर्धारित नियमों के अनुसार उसका लाभ मिलता है।

 

प्रदेश के 25 जिलों में कार्यरत 1535 अतिथि शिक्षकों को मिलेगा लाभ, छह माह के मानदेय के लिए राशि स्वीकृत

रायपुर, 18 सितम्बर 2026/ राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 18 करोड़ 42 लाख रुपए का आवंटन जारी किया गया है। यह राशि छह माह के मानदेय भुगतान के लिए जारी की गई है। आदेश में अतिथि शिक्षकों का प्रतिमाह मानदेय 20 हजार रुपए निर्धारित है।

लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 18 सितम्बर को जारी आदेश के अनुसार प्रदेश के 25 जिलों के कुल 1535 अतिथि शिक्षकों के लिए राशि आवंटित की गई है। इसमें बस्तर जिले के 133 अतिथि शिक्षकों के लिए 1 करोड़ 59 लाख 60 हजार रुपए का आवंटन किया गया है। वहीं कांकेर के 126 अतिथि शिक्षकों के लिए 1 करोड़ 51 लाख 20 हजार रुपए तथा कोंडागांव के 141 अतिथि शिक्षकों के लिए 1 करोड़ 69 लाख 20 हजार रुपए स्वीकृत किए गए हैं।

इसी प्रकार दंतेवाड़ा के 31 अतिथि शिक्षकों के लिए 37 लाख 20 हजार रुपए, सुकमा के 48 अतिथि शिक्षकों के लिए 57 लाख 60 हजार रुपए, बीजापुर के 48 अतिथि शिक्षकों के लिए 57 लाख 60 हजार रुपए और नारायणपुर के 36 अतिथि शिक्षकों के लिए 43 लाख 20 हजार रुपए का आवंटन जारी किया गया है। इस तरह बस्तर संभाग के सातों जिलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान के लिए राशि उपलब्ध कराई गई है।प्रदेश स्तर पर बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 220 अतिथि शिक्षकों के लिए 2 करोड़ 64 लाख रुपए, सूरजपुर में 130 अतिथि शिक्षकों के लिए 1 करोड़ 56 लाख रुपए तथा सरगुजा में 71 अतिथि शिक्षकों के लिए 85 लाख 20 हजार रुपए जारी किए गए हैं।

रायपुर, 18 सितंबर 2026/ पण्डित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर ने शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MOU) किए हैं। विश्वविद्यालय ने *महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बिलासपुर (MUMT) तथा जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के साथ समझौता किया है। इन समझौतों के जरिए अकादमिक गतिविधियों, संयुक्त शोध, प्रशिक्षण, नवाचार और जनजातीय विषयों पर अध्ययन को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का आधार तैयार हुआ है।

अकादमिक गतिविधियों से लेकर डिजिटल शिक्षा तक सहयोग

महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते के तहत दोनों संस्थान अकादमिक, अनुसंधान, प्रशिक्षण, नवाचार, विस्तार और संस्थागत विकास के क्षेत्र में सहयोग करेंगे। संयुक्त संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यान और अकादमिक आयोजनों के साथ अंतर्विषयी अध्ययन तथा पाठ्यचर्या से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। दोनों संस्थान MOOCs, मुक्त शैक्षिक संसाधन (OER), डिजिटल एवं स्व-अध्ययन सामग्री तथा तकनीक आधारित शिक्षण संसाधनों के विकास में भी सहयोग कर सकेंगे।

संयुक्त शोध और प्रकाशन को बढ़ावा

MOU के तहत संयुक्त अनुसंधान, सर्वेक्षण, क्षेत्र अध्ययन, प्रायोजित शोध, परामर्श और संयुक्त प्रकाशन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए अनुसंधान पद्धति, प्रशिक्षण, विशेषज्ञ व्याख्यान और संकाय विकास कार्यक्रमों के आयोजन की संभावनाएं भी रखी गई हैं।

विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, परियोजना कार्य, क्षेत्रीय अनुभव, शैक्षिक भ्रमण, कौशल विकास, करियर मार्गदर्शन और उद्यमिता से जुड़े अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी दोनों संस्थान मिलकर काम कर सकेंगे।

जनजातीय समाज से जुड़े विषयों पर विशेष फोकस

जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के साथ हुए MOU में जनजातीय मुद्दों और अनुसूचित जनजातियों से जुड़े विषयों पर संयुक्त अध्ययन एवं शोध को प्रमुखता दी गई है। सम्मेलन, संगोष्ठी, प्रकाशन और ज्ञान- साझाकरण जैसी गतिविधियों के माध्यम से जनजातीय विषयों पर अकादमिक विमर्श को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

समझौते के तहत जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र रणनीति निर्माण, योजना और कार्य-रोडमैप तैयार करने में बौद्धिक सहयोग प्रदान करेगा। आवश्यकता के अनुसार केंद्र अपनी विशेषज्ञता और ज्ञान भी उपलब्ध करा सकेगा।

दो सदस्यीय संचालन समिति करेगी समन्वय

MOU के तहत प्रस्तावित गतिविधियों के समन्वय और निगरानी के लिए दोनों पक्षों से एक-एक प्रतिनिधि वाली दो सदस्यीय संचालन समिति गठित करने का प्रावधान किया गया है। बौद्धिक संपदा, स्वामित्व, प्रोत्साहन और ज्ञान-साझाकरण से जुड़े विषय संबंधित कार्य की प्रकृति के अनुसार आपसी सहमति से तय किए जाएंगे।

शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर

विश्वविद्यालय के अनुसार दोनों समझौतों का उद्देश्य विशेषज्ञता और संसाधनों के साझा उपयोग के साथ संस्थागत सहयोग को व्यावहारिक रूप देना है। इससे शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए अकादमिक एवं शोध के नए अवसर विकसित हो सकेंगे।

वहीं जनजातीय अनुसंधान से जुड़े समझौते के माध्यम से जनजातीय समाज, संस्कृति, परंपरा और समसामयिक विषयों पर अध्ययन को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

इस अवसर पर PSSOU की ओर से कुलपति प्रो. वी. के. सारस्वत एवं कुलसचिव श्री चंद्रभूषण मिश्र उपस्थित रहे। MUMT की ओर से कुलपति प्रो. डॉ. नरेश कुमार तिवारी एवं कुलसचिव डॉ. विजय गरुडिक शामिल हुए।

जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली की ओर से प्रदेश समन्वयक राजीव शर्मा एवं सामाजिक कार्यकर्ता वैभव सुरंगे उपस्थित रहे।

9 हजार सरकारी पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया

छत्तीसगढ़ सरकार की रोजगार और कौशल विकास पहल से युवाओं को मिल रहे अवसर

धनंजय राठौर,
संयुक्त संचालक,
जनसम्पर्क (रायपुर)

रायपुर, 18 सितंबर2026/ युवाओं को विकास के केंद्र में रखते हुए छत्तीसगढ़ की श्री विष्णु देव साय की सरकार कौशल विकास, रोजगार, उच्च शिक्षा, उद्यमिता और खेल क्षेत्र में अवसरों का विस्तार कर रही है। पिछले करीब तीन वर्षों में जब से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सत्ता संभाली है, युवाओं को सक्षम, रोजगारपरक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं और पहल शुरू की हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य शिक्षा और प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ते हुए राज्य की युवा आबादी को विकास की नई ताकत में बदलना है। लक्ष्य केवल युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें कुशल, आत्मनिर्भर, नवाचारी और भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार मानव संसाधन के रूप में विकसित करना है।

18 हज़ार 330 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत राज्य के 26 जिलों में करीब 18 हज़ार 330 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इस पर लगभग 29 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं, 35 हजार और युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य सरकार ने युवाओं के कौशल विकास के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है, ताकि प्रशिक्षण को उद्योगों और बाजार की बदलती जरूरतों के अनुसार बनाया जा सके।

युवा को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, अवसर और पारदर्शी व्यवस्था

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा, “युवा छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत और भविष्य की उम्मीद हैं। हमारा प्रयास है कि हर युवा को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, अवसर और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध हो। युवा सशक्तीकरण विकसित छत्तीसगढ़ के हमारे विजन का केंद्र है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप है।”

पारदर्शी भर्ती पर फोकस

युवा केंद्रित एजेंडे में रोजगार के साथ सरकारी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता को भी प्राथमिकता दी गई है। राज्य में करीब 9 हजार रिक्त सरकारी पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा क्लास-3 और क्लास-4 के पदों पर भर्ती को एकीकृत, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए नए छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल का गठन किया गया है।

युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकार द्वारा निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था

सरकार ने युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर अवसर देने के लिए CG-ACE पहल शुरू की है। इसके तहत NEET, CLAT, JEE, UPSC, CGPSC, बैंकिंग, SSC और रेलवे जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए 33 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार

युवा विकास की रणनीति में विष्णु देव साय सरकार ने उच्च शिक्षा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है। उच्च शिक्षा के बजट में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-26 में इसे बढ़ाकर 1,822.75 करोड़ रुपये किया गया है। राज्य के पांच सरकारी कॉलेजों को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें जशपुर, रायपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार और रायगढ़ के कॉलेज शामिल हैं। इसी तरह, आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की तर्ज पर कवर्धा, जशपुर, रायगढ़ और जगदलपुर में छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CGIT) विकसित किए गए हैं। आने वाले समय में रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में भी इनके विस्तार की योजना है।

नए दौर की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो रहा छत्तीसगढ़, भविष्य के उद्योगों पर हमारा फोकस : मुख्यमंत्री

सेमीकंडक्टर से ग्रीन एनर्जी तक, भविष्य के उद्योगों का नया गंतव्य बन रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री

छत्तीसगढ़ निवेश और उद्योगों की नई संभावनाओं का केंद्र : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने रायपुर में किया ‘इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026’ का शुभारंभ

देशभर के 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमी तीन दिवसीय औद्योगिक मेले में ले रहे हिस्सा

नई औद्योगिक विकास नीति से छत्तीसगढ़ में निवेश को मिली नई गति, प्रस्तावों के साथ धरातल पर भी उतर रही परियोजनाएं : मुख्यमंत्री श्री साय

आईटी, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और ग्रीन एनर्जी सहित नए एवं उभरते सेक्टरों पर राज्य सरकार का विशेष फोकस

निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ उद्योगों के लिए ‘एक्सीलरेटर’ की भूमिका निभा रही राज्य सरकार

स्थानीय संसाधनों के वैल्यू एडिशन और युवाओं के रोजगार को औद्योगिक विकास का आधार बना रही सरकार

मुख्यमंत्री ने औद्योगिक स्टॉलों का किया अवलोकन, देशभर से आए उद्यमियों से किया आत्मीय संवाद

रायपुर, 18 सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों से आए उद्यमियों, निवेशकों और औद्योगिक प्रतिनिधियों का छत्तीसगढ़ की धरती पर स्वागत करते हुए उन्हें प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने और यहां उपलब्ध निवेश की व्यापक संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज अपनी पारंपरिक औद्योगिक ताकत के साथ नई अर्थव्यवस्था और उभरते उद्योगों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। खनिज, ऊर्जा, वन संपदा, पर्याप्त मानव संसाधन और देश के मध्य में अनुकूल भौगोलिक स्थिति हमारी स्वाभाविक ताकत है। राज्य सरकार इन खूबियों को आधुनिक तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और निवेशक हितैषी नीतियों से जोड़कर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की भूमिका केवल उद्योगों के लिए नियामक की नहीं है। हम सरकार को उद्योग और निवेश की राह आसान करने वाले सहयोगी और ‘एक्सीलरेटर’ के रूप में विकसित कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि निवेश का प्रस्ताव आने से लेकर उद्योग के धरातल पर स्थापित होने तक हर चरण में निवेशकों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था मिले।

मुख्यमंत्री ने लघु उद्योग भारती द्वारा राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक आयोजन के लिए रायपुर का चयन किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं। बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई का विस्तार होने से स्थानीय स्तर पर उद्यमिता बढ़ती है, रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और आर्थिक गतिविधियों का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लघु उद्योग भारती देशभर के 750 से अधिक जिलों में उद्यमियों को संगठित कर उद्योग और उद्यमिता को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ के 25 जिलों में भी 1200 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्योग संगठन से जुड़े हैं। 18 से 20 सितम्बर तक आयोजित इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में देशभर के 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों की भागीदारी इस आयोजन के महत्व को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि यह औद्योगिक मेला केवल उत्पादों और तकनीकों की प्रदर्शनी नहीं है। यह उद्यमियों के बीच संवाद, अनुभव, नवाचार और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से नए व्यावसायिक संबंध बनेंगे, नई संभावनाओं पर चर्चा होगी और युवाओं को उद्योग तथा उद्यमिता की दुनिया को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

नई औद्योगिक नीति से निवेश को मिली नई गति

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने उद्योग जगत, निवेशकों और विभिन्न हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू की है। इस नीति का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि ऐसा औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें निवेश, उत्पादन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था एक साथ आगे बढ़ें।

रायपुर, 18 सितंबर 2026/ प्रदेश में अधोसंरचना विकास को गति देने और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत एवं एकीकृत अधोसंरचना तैयार करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के संबंध में आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। लोक निर्माण विभाग को मिशन का नोडल विभाग बनाया गया है।

बैठक में मिशन के तहत प्रदेश के सड़क, ऊर्जा, ट्रांसमिशन, जल, सिंचाई, संचार, फाइबर नेटवर्क तथा अन्य आवश्यक अधोसंरचना के समग्र विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीति और कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने प्रदेश के रोड नेटवर्क के लिए आगामी 20 वर्षों का मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान में वर्तमान अधोसंरचना की स्थिति, भविष्य की जरूरतों, कनेक्टिविटी की आवश्यकताओं और संभावित विकास क्षेत्रों का समग्र आकलन किया जाए। इसके आधार पर चरणबद्ध तरीके से परियोजनाओं की प्राथमिकता तय कर उनके क्रियान्वयन की कार्ययोजना तैयार की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी के साथ ऊर्जा, जल, सिंचाई, संचार एवं डिजिटल कनेक्टिविटी सहित सभी प्रमुख अधोसंरचना घटकों को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ देखा जाए। प्रत्येक क्षेत्र की आवश्यकता का आकलन कर यह निर्धारित किया जाए कि आने वाले वर्षों में किस प्रकार की अधोसंरचना और किन क्षेत्रों में विकसित की जानी है।

इंटरमॉडल ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब की संभावनाओं का होगा अध्ययन

मुख्य सचिव ने प्रदेश में इंटरमॉडल ट्रांसपोर्ट एवं लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सड़क एवं रेल सहित विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने तथा माल परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक परियोजनाओं को चिन्हित करने को कहा। उन्होंने अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए नए फंडिंग मैकेनिज्म की संभावनाओं का भी अध्ययन करने के निर्देश दिए। निजी एवं सार्वजनिक निवेश सहित विभिन्न वित्तीय विकल्पों का परीक्षण कर परियोजनाओं के लिए उपयुक्त वित्तीय व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

दीर्घकालिक योजना के साथ बनेगा वार्षिक एक्शन प्लान

मुख्य सचिव ने कहा कि 20 वर्षीय मास्टर प्लान के साथ वार्षिक एक्शन प्लान भी तैयार किया जाए। इसमें प्रत्येक वर्ष प्रस्तावित कार्यों, उनकी प्राथमिकता, आवश्यक संसाधनों और समय-सीमा का स्पष्ट निर्धारण हो। उन्होंने परियोजनाओं की प्रॉपर प्लानिंग एवं मैपिंग के साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने देश के अन्य राज्यों में विकसित की जा रही आधुनिक अधोसंरचना परियोजनाओं का अध्ययन करने के लिए अधिकारियों के एक्सपोजर विजिट आयोजित करने को भी कहा, इससे वहां अपनाई जा रही बेहतर तकनीकों एवं कार्यप्रणालियों को छत्तीसगढ़ की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया जा सके। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए मिशन के कार्यों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

बैठक में मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर, लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के सीईओ श्री चंदन कुमार सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

पांच लाख से अधिक दीपों से जगमगाया सरोवर तालाब, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की उपस्थिति में उमड़ा जनसैलाब

रायपुर,  सितंबर 2026/प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने तथा उनके जन्मदिन के अवसर पर मनेन्द्रगढ़ से ‘सेवा संकल्प अभियान-2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर वार्ड क्रमांक-8 स्थित सरोवर तालाब में आयोजित जिला स्तरीय दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में पांच लाख से अधिक दीप जलाए गए। दीपों की रोशनी से पूरा क्षेत्र जगमगा उठा और इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा मनेन्द्रगढ़ विधायक श्री श्याम बिहारी जायसवाल थे। स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने विधि-विधान के साथ दीप प्रज्वलित कर सेवा संकल्प अभियान एवं जिला स्तरीय दीपोत्सव का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का 25 वर्षों का सार्वजनिक जीवन राष्ट्रसेवा, जनकल्याण और अंत्योदय के संकल्प का प्रेरणादायी अध्याय है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में सेवा को केवल दायित्व नहीं, बल्कि जनभागीदारी और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया गया है। इसी सेवा भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सेवा संकल्प अभियान प्रारंभ किया गया है।

पांच लाख दीपों की रोशनी से जगमगाया मनेन्द्रगढ़

सरोवर तालाब के चारों ओर जलाए गए पांच लाख से अधिक दीपों ने मनमोहक दृश्य प्रस्तुत किया। तालाब के पानी में दिखाई दे रहे दीपों के प्रतिबिंब और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्ति एवं उल्लास से भर गया। आयोजन को देखने के लिए मनेन्द्रगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने सफल आयोजन के लिए एमसीबी जिले की जनता और जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सेवा भावना, मनेन्द्रगढ़ की एकजुटता और क्षेत्र के विकास की नई रोशनी का प्रतीक है। जनभागीदारी ने इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बना दिया।

जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम में राज्य योग आयोग के अध्यक्ष श्री संजय अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती यशवंती सिंह, नगर निगम महापौर श्री रामनरेश राय, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती प्रतिमा यादव और उपाध्यक्ष श्री धर्मेंद्र पटवा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस अवसर पर नगर निगम सभापति श्री संतोष सिंह, नई लेदरी के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र सिंह राणा, झगराखांड नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीमा यादव, खोंगापानी नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती ललिता राम यादव, जिला पंचायत सदस्य श्री रामजीत लकड़ा, पूर्व विधायक श्रीमती चंपा देवी पावले, जिला उपाध्यक्ष श्री आशीष सिंह और मनेन्द्रगढ़ मंडल अध्यक्ष श्री रोहित वर्मा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे।

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