ईश्वर दुबे
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Bhilai
0.40 हेक्टेयर में गुलाब पटेल ने लिखा मछली पालन से समृद्धि का नया अध्याय
रायपुर, सितम्बर 2026/ एक किसान के लिए उसकी ज़मीन सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की उम्मीदों का आधार होती है। सारंगढ़ विकासखंड के ग्राम नवरंगपुर निवासी गुलाब पटेल पिता: स्व. श्री प्रेमलाल पटेल ने अपनी इसी ज़मीन में छिपी संभावनाओं को पहचाना और एक ऐसी मिसाल कायम की, जो आज प्रदेश के हज़ारों किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
पारंपरिक खेती से इतर कुछ नया करने की सोच के साथ गुलाब पटेल ने जल संरक्षण और मत्स्य पालन को आजीविका का जरिया बनाने का फैसला किया। उनकी इस सोच को साकार करने में केंद्र व राज्य सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना और सेवा संकल्प अभियान संबल बने।
शासकीय योजना से मिली राह और संबल
गुलाब पटेल के पास 0.40 हेक्टेयर भूमि थी, जिसे उन्होंने तालाब निर्माण के लिए चुना। योजना के तहत उन्हें विभाग से 1.20 लाख रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ। विभागीय मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता से तालाब का निर्माण पूरा हुआ और इसी के साथ शुरू हुआ मछली पालन का एक नया सफर।
250 क्विंटल उत्पादन और 10 से 15 लाख का शुद्ध लाभ
तालाब बनने के बाद गुलाब पटेल ने मत्स्य पालन को वैज्ञानिक तकनीक और पूरे समर्पण के साथ अपनाया। नियमित देखरेख, उत्तम आहार और सही प्रबंधन का नतीजा यह रहा कि आज उनके 0.40 हेक्टेयर के जलक्षेत्र से प्रतिवर्ष लगभग 250 क्विंटल मछली का उत्पादन हो रहा है। तमाम लागत निकालने के बाद उन्हें हर साल 10 से 15 लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ मिल रहा है।
सेवा संकल्प अभियान: कागजों से निकलकर ज़मीन पर उतरती योजनाएं
गुलाब पटेल की यह सफलता 'सेवा संकल्प अभियान' की उस मूल भावना को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य शासकीय योजनाओं को केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित न रखकर आम जन के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव लाना है। शासन के सहयोग, विभागीय मार्गदर्शन और किसान की अनथक मेहनत के इस संगम ने एक छोटे से भू-खंड को आर्थिक आत्मनिर्भरता के मजबूत मॉडल में बदल दिया है।
आज गुलाब पटेल न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं, बल्कि अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग कर दूसरों के लिए भी एक मार्गदर्शक बनकर उभरे हैं। उनकी यह कहानी साबित करती है कि यदि सही योजना और दृढ़ संकल्प का साथ मिले, तो ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा भी समृद्धि का द्वार खोल सकता है।
नुक्कड़ नाटक से दिया नशामुक्ति का संदेश
रायपुर, सितम्बर 2026/ राज्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत धमतरी स्थित शासकीय श्रवण बाधितार्थ बालिका विद्यालय में समाज कल्याण विभाग द्वारा एक दिवसीय विभागीय प्रचार-प्रसार एवं सामाजिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बालिकाओं को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा समाज में नशामुक्त वातावरण का निर्माण करना था।
योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी
शिविर में समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित विभिन्न हितग्राहीमूलक एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया तथा मिलने वाले लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शासन की मंशा अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की है। बालिकाओं को उपलब्ध अवसरों और अधिकारों की जानकारी देते हुए बताया गया कि सही जानकारी ही सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है।
नुक्कड़ नाटक बना आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नशामुक्ति पर आधारित नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति रही। कलाकारों ने अपने संवादों और जीवंत अभिनय के माध्यम से नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक तथा सामाजिक दुष्परिणामों को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया। नाटक के जरिए संदेश दिया गया कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल व्यक्तिगत संकल्प नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा सामूहिक दायित्व है।
उपस्थित प्रमुख जन-प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने अंत में लोगों को नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाने और दूसरों को प्रेरित करने का संकल्प दिलाया।
सरगुजा संभाग ने लहराया सफलता का परचम
रायपुर, सितम्बर 2026/ राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा ने संपूर्ण प्रदेश में अपना परचम लहराया है। छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी वर्ष 2025-26 की राज्य स्तरीय एनएसएस पुरस्कार चयन सूची में विश्वविद्यालय और उससे जुड़ी संस्थाओं तथा स्वयंसेवकों ने कुल पांच पुरस्कार अपने नाम किए हैं। इस शानदार उपलब्धि में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय स्तर की श्रेणी में पूरे राज्य में पहला स्थान प्राप्त कर सरगुजा संभाग का गौरव बढ़ाया है।
संस्थागत श्रेणी में सरगुजा जिले के सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय, अम्बिकापुर को राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। वहीं महाविद्यालयीन स्वयंसेवक श्रेणी में राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अम्बिकापुर के शिवम शर्मा और शासकीय राम भजन राय एन.ई.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय जशपुर नगर की कु. नेहा यादव ने बाजी मारी है। इसके अलावा विद्यालय स्तर की स्वयंसेवक श्रेणी में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अधिना (सूरजपुर) की कु. मीना राजवाड़े का चयन हुआ है।
राष्ट्रीय सेवा योजना के स्थापना दिवस के अवसर पर 24 सितम्बर को रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय सभागार में राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया जाएगा, जहाँ इन सभी उत्कृष्ट संस्थाओं और स्वयंसेवकों को सम्मानित किया जाएगा। वर्तमान में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के अंतर्गत सरगुजा संभाग के छह जिलों में 158 इकाइयां संचालित हैं, जो जमीनी स्तर पर समाजसेवा और सामुदायिक विकास के कार्यों में जुटी हुई हैं।
विश्वविद्यालय की इस ऐतिहासिक सफलता पर कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले ने सभी विजेताओं, प्राचार्यों और कार्यक्रम अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों का समर्पण ही राष्ट्र निर्माण की असली नींव है और यह उपलब्धि उनके कठिन परिश्रम, अनुशासन व निष्ठा का ही परिणाम है।
नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में जनदर्शन, दूर-दराज से पहुंचे नागरिकों से आत्मीय संवाद कर सुनीं समस्याएं और मांगें
अधिकारियों को प्रकरणों के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने दिए निर्देश
रायपुर, सितंबर 2026/ पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में जनदर्शन के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों एवं आगंतुकों से भेंट की। इस दौरान उन्होंने आमजन से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी मांगों, समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से सुना तथा संबंधित विषयों पर आवश्यक जानकारी ली।
जनदर्शन में दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने अपनी विभिन्न समस्याओं एवं आवश्यकताओं से मंत्री श्री अग्रवाल को अवगत कराया। मंत्री श्री अग्रवाल ने प्रत्येक व्यक्ति की बात को ध्यानपूर्वक सुना और संबंधित अधिकारियों को प्रकरणों का निराकरण करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को आमजन की शिकायतों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण के साथ ही प्रकरणों पर समय-सीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए तथा पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ समय पर मिलना सुनिश्चित करें।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि जनसेवा ही सुशासन सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। प्रदेश की जनता की समस्याओं को सुनना और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है। आमजन से निरंतर संवाद के माध्यम से उनकी आवश्यकताओं को समझते हुए प्रभावी निराकरण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक की समस्या के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जनदर्शन के माध्यम से नागरिकों को अपनी बात सीधे रखने का अवसर मिल रहा है और प्राप्त प्रकरणों पर संबंधित विभागों के अधिकारियों के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
जनदर्शन के दौरान नागरिकों ने अपनी समस्याओं के साथ विभिन्न सुझाव भी साझा किए। मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि आमजन के सुझाव शासन की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य कर रही है।
375 अनुमेय कार्यों में से स्थानीय आवश्यकता के अनुसार कार्यों का करें चयन- उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा
रायपुर, सितंबर 2026/ विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के जिला पंचायत अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं सदस्यों से संवाद किया। बैठक में योजनांतर्गत जिलों में स्वीकृत कार्यों, प्रगति तथा योजना के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने जिला पंचायत प्रतिनिधियों से बारी-बारी संवाद करते हुए योजना के क्रियान्वयन की जानकारी ली तथा उनके सुझाव और जमीनी स्तर पर आ रही कठिनाइयों को जाना। उन्होंने सभी को वीबी-जीरामजी के अंतर्गत अब 375 प्रकार के अनुमय कार्यों में से स्थानीय आवश्यकता के अनुसार कार्यों का चयन एवं स्वीकृति के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों में पर्याप्त संख्या में कार्य स्वीकृत किए गए है, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ग्राम सभा के माध्यम से नए कार्य भी लिए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि योजना में मजदूरी एवं सामग्री का 60:40 अनुपात बनाए रखते हुए तथा जल संरक्षण से संबंधित कम से कम 30 प्रतिशत कार्यों को प्राथमिकता देते हुए ग्राम सभाएं आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कार्य स्वीकृत कर सकती हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से योजना का लाभ ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कार्यों का चयन करने पर जोर दिया।
बैठक में अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्रीमती ऋचा शर्मा ने पंचायतों में स्वीकृत कार्यों के गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किए जाएंगे, जिससे निर्माण कार्यों की प्रभावी निगरानी की जा सकेगी।
आयुक्त, विकसित भारत–जीरामजी श्री तारन प्रकाश सिन्हा ने जिला पंचायत सदस्यों के योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा तकनीकी समस्याओं से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों तथा किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खेत सड़क और धरसा को भी अनुमय कार्यों में शामिल किया गया है। प्रदेश में बालिका शौचालय, मुक्तिधाम शेड तथा डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज जैसे कार्यों को प्राथमिकता से लिया जा रहा है। ग्राम पंचायतें अपनी स्थानीय आवश्यकता के अनुसार इन कार्यों का चयन कर सकती हैं। श्री सिन्हा ने बताया कि विभिन्न योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेंस) से संबंधित भारत सरकार का नोटिफिकेशन जल्द जारी होने की प्रक्रिया में है। वहीं मनरेगा के शेष लंबित भुगतान के संबंध में भारत सरकार को पत्र प्रेषित किया गया है।
वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रथम चरण में 175 पदों पर भर्ती की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें कार्यक्रम अधिकारी, कंप्यूटर प्रोग्रामर एवं लेखापाल के पद शामिल हैं तथा भर्ती प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। इसके अतिरिक्त बस्तर, बीजापुर एवं नारायणपुर जिलों में 63 रोजगार सहायक पदों पर भर्ती की अनुमति भी प्रदान की गई है।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं सदस्यों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने सुझाव साझा किए तथा मैदानी स्तर पर आ रही विभिन्न कठिनाइयों से अधिकारियों को अवगत कराया। बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों से प्राप्त सुझावों एवं समस्याओं को आवश्यक कार्रवाई हेतु संकलित किया गया है।
धमतरी के जगदेव की आजीविका डबरी बनी समृद्धि का नया आधार
रायपुर, सितम्बर 2026/जब शासन की नीतियाँ धरातल पर उतरती हैं और ग्रामीणों की मेहनत से जुड़ती हैं, तो वे बदलाव का एक नया इतिहास रचती हैं। ऐसी ही एक सुखद और प्रेरणादायक तस्वीर धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत केकराखोली से सामने आई है। यहाँ सेवा संकल्प अभियान के तहत निर्मित एक आजीविका डबरी ने स्थानीय निवासी श्री जगदेव पिता श्री मंगलू राम के परिवार को आत्मनिर्भरता की नई दिशा दी है।
वर्षों से सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती-किसानी के सहारे अपने परिवार का गुजर-बसर करने वाले जगदेव के लिए दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के बाद बचत कर पाना बेहद कठिन था। उनके पास कोई ऐसा स्थायी साधन नहीं था जिससे वे अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर सकें। परिवार की इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वित्तीय वर्ष 2026 में वीबी-जी रामजी योजना के अंतर्गत जगदेव के लिए आजीविका डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया। शासन की इस जनकल्याणकारी पहल ने उनके खेत में न केवल एक स्थायी जल संसाधन तैयार किया, बल्कि भविष्य के लिए आजीविका का एक मजबूत आधार भी खड़ा कर दिया।
वर्तमान में यह डबरी लबालब पानी से भरी हुई है। जल की पर्याप्त उपलब्धता को देखते हुए जगदेव ने इसे केवल जल संग्रहण तक सीमित न रखकर इसमें मछली पालन शुरू करने का निर्णय लिया है। जगदेव का मानना है कि यह डबरी उनके लिए सिर्फ पानी जमा करने की संरचना नहीं, बल्कि रोजगार और स्वावलंबन का नया जरिया है। इस पहल में उनके परिवार के सदस्य भी बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। मछली पालन से होने वाली भावी आय से परिवार ने बच्चों की बेहतर शिक्षा, कृषि कार्यों के आधुनिकीकरण और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए बचत करने की योजना बनाई है।
जगदेव की यह कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब शासन की योजनाओं से निर्मित परिसंपत्तियों का सही उपयोग हितग्राही की लगन और मेहनत के साथ होता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलती है। आज पानी से लबालब भरी यह आजीविका डबरी जगदेव के परिवार के लिए केवल मिट्टी और पानी का ढांचा नहीं, बल्कि उनके उज्ज्वल और समृद्ध कल का प्रतीक बन चुकी है।
छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर में ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन' पर प्रशिक्षण हुआ आयोजित
गणितीय अवधारणाओं को सरल, रोचक और प्रयोगात्मक तरीके से समझाने पर हुई चर्चा
रायपुर, सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में मंगलवार को ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन' विषय पर विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को गणित शिक्षण की ऐसी नवीन, गतिविधि - आधारित और रचनात्मक विधियों से परिचित कराना रहा, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों के लिए गणित को सरल, रोचक और आनंददायक बनाया जा सके।
प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग श्री सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक श्री प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में गणित को केवल पाठ्यपुस्तक, सूत्रों और गणनाओं तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन, अनुभव, गतिविधियों और रचनात्मकता से जोड़कर पढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इस तरह की शिक्षण पद्धति विद्यार्थियों में गणित के प्रति रूचि और जिज्ञासा बढ़ाने के साथ-साथ तार्किक सोच विकसित करने में भी सहायक हो सकती है।
कार्यक्रम के विशेषज्ञ इंजीनियर, ऑल इंडिया रामानुजन सोसाइटी के निदेशक एवं रामानुजन टैलेंट सर्च फाउंडेशन बेंगलुरु के मैथ्स कोच श्री बी. एन. राव ने शिक्षकों को विभिन्न गतिविधि-आधारित एवं नवाचारपूर्ण शिक्षण विधियों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने गणितीय अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने के लिए व्यावहारिक उदाहरणों और विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन किया तथा बताया कि कक्षा में विद्यार्थियों की जिज्ञासा और सक्रिय सहभागिता बढ़ाकर गणित को सहज एवं आनंददायक बनाया जा सकता है।
सेशन के दौरान शिक्षकों ने स्वयं विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर गणितीय अवधारणाओं को समझा। गतिविधियों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया कि कठिन प्रतीत होने वाली गणितीय अवधारणाओं को भी सरल, रोचक और प्रयोगात्मक तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है। शिक्षकों ने इन तकनीकों को अपने-अपने कक्षा में लागू करने के तरीकों को भी समझा।
कार्यक्रम में रायपुर के चार विकासखंडों के शिक्षकों ने ऑफलाइन सहभागिता की, जबकि पूरे रायपुर जिले के शिक्षकों के लिए कार्यक्रम का ऑनलाइन प्रसारण किया गया। इसके माध्यम से जिले के विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षक विशेषज्ञ द्वारा साझा की गई गतिविधि-आधारित गणित शिक्षण की विधियों से जुड़े और लाभान्वित हुए।
इंटरैक्टिव सत्र में गणित शिक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर शिक्षकों के साथ संवाद भी किया गया। छोटे-छोटे प्रयोग, गतिविधियां, प्रश्नोत्तर और रचनात्मक अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि विकसित करने के तरीकों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे प्रभावी शिक्षण उपकरण और तकनीक उपलब्ध कराना रहा, जिनसे विद्यार्थी गणितीय अवधारणाओं को समझकर सीखें, उनका प्रयोग करें तथा उनमें तार्किक और वैज्ञानिक सोच विकसित हो।
कार्यक्रम में शिक्षकों की उत्साहपूर्ण एवं सक्रिय सहभागिता रही। प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते हुए गणित शिक्षण की नई तकनीकों और दृष्टिकोणों को समझा। शिक्षकों के अनुभव और सुझावों ने कार्यक्रम को अधिक संवादात्मक एवं उपयोगी बनाया। इसी तरह 23 सितंबर को बी.एड. विद्यार्थियों के लिए भी प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा चंपारण्य, करीब 15 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का होगा विस्तार
चंपारण्य को राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम - श्री राजेश अग्रवाल
रायपुर, 22 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रायपुर जिले के चंपारण्य में लगभग 73.42 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित “श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स” परियोजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति CSMC ने स्वीकृति प्रदान की है। सीएसएमसी स्वदेश दर्शन 2.0 की केंद्रीय समिति है, जो मिशन निदेशालय की अनुशंसाओं के आधार पर परियोजनाओं की स्वीकृति पर विचार करती है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा किया जाएगा तथा इसके लिए 18 माह की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि निर्धारित की गई है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की स्वीकृति पर कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पर्यटन, विशेषकर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास को नई गति मिल रही है। चंपारण्य छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली को बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी। हमारा प्रयास होगा कि महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली की गरिमा और धार्मिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त सुविधाएं विकसित हों। यह परियोजना चंपारण्य को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के बीच और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करने में सहायक होगी।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। चंपारण्य परियोजना की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह तथा केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।
महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली चंपारण्य देशभर में वैष्णव श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य चंपारण्य को केवल तीर्थ यात्रा के एक पड़ाव तक सीमित न रखते हुए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विरासत एवं अनुभव-आधारित पर्यटन के एक समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है। परियोजना के माध्यम से पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, उनके ठहराव की अवधि बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी से संबंधित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
परियोजना में यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे एवं कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग सहित अन्य पर्यटक सुविधाओं का भी विकास प्रस्तावित है। यह श्रद्धालुओं के साथ-साथ परिवारों, सांस्कृतिक पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन से जुड़े पर्यटकों के लिए भी आकर्षक अनुभव होगा।
81 वर्षीय सोनकुंवर के लिए आसान हुआ बेटे के नाम जमीन का हस्तांतरण
पारिवारिक दानपत्र पर पंजीयन शुल्क अब केवल 500 रुपये, परिवार को मिली 6,600 रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष बचत
सरल प्रक्रिया और डिजिटल सुविधाओं से बुजुर्गों को मिली सहूलियत, ‘सेवा संकल्प अभियान’ में साझा किया अनुभव
रायपुर, 22 सितम्बर 2026/ उम्र के इस पड़ाव में जब कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाना और लंबी प्रक्रियाओं से गुजरना बुजुर्गों के लिए कठिन हो सकता है, तब सरल और सुविधाजनक पंजीयन व्यवस्था उन्हें बड़ी राहत देती है। महासमुंद जिले के ग्राम बम्हनी निवासी 81 वर्षीय श्रीमती सोनकुंवर के लिए अपने पुत्र श्री रवि राम पाल के नाम जमीन का दानपत्र कराना ऐसा ही अनुभव रहा। पारिवारिक संपत्ति के दानपत्र पर पंजीयन शुल्क केवल 500 रुपये होने से उनके परिवार को 6,600 रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष आर्थिक बचत हुई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद के दौरान उन्होंने पंजीयन प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में विभिन्न सुधार किए जा रहे हैं। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों को कम समय में सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराना और संपत्ति से जुड़े कार्यों में अनावश्यक दौड़भाग को कम करना है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर यह भी जान रहा है कि इन सुविधाओं का उनके जीवन में किस तरह प्रभाव पड़ रहा है।
मां के लिए कम हुई दौड़भाग, बेटे के नाम आसानी से हुआ संपत्ति हस्तांतरण
श्रीमती सोनकुंवर ने बताया कि उम्रदराज लोगों के लिए संपत्ति से जुड़े कार्यों को पूरा करने में बार-बार कार्यालय जाना परेशानी का कारण बन सकता है। अपने पुत्र के नाम जमीन का दानपत्र कराने के दौरान उन्हें पंजीयन प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान लगी। प्रक्रिया सरल होने और शुल्क कम होने से उनके परिवार को आर्थिक राहत के साथ-साथ अनावश्यक दौड़भाग से भी सहूलियत मिली।
उनके लिए यह सुविधा इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि पारिवारिक संपत्ति का हस्तांतरण किसी परिवार के लिए केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होता, बल्कि संपत्ति और परिवार के भविष्य से जुड़ा निर्णय भी होता है। सरल पंजीयन व्यवस्था ने इस प्रक्रिया को उनके लिए अधिक सहज बनाया।
शुल्क 0.8 प्रतिशत से घटकर अब केवल 500 रुपये
राज्य शासन द्वारा पारिवारिक दानपत्र, हकत्याग पत्र एवं बंटवारे के पंजीयन शुल्क में महत्वपूर्ण राहत दी गई है। इन दस्तावेजों पर पहले संपत्ति मूल्य के आधार पर 0.8 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे घटाकर अब केवल 500 रुपये निर्धारित किया गया है।
श्रीमती सोनकुंवर के मामले में भी इसी शुल्क सुधार का लाभ मिला। पंजीयन शुल्क कम होने से उनके परिवार को 6,600 रुपये से अधिक की बचत हुई। कम खर्च में पारिवारिक संपत्ति का हस्तांतरण पूरा होना उनके लिए सीधे तौर पर आर्थिक राहत का कारण बना।
तकनीक से आसान हो रही पंजीयन के बाद की प्रक्रिया
पंजीयन विभाग द्वारा प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ तकनीक आधारित सुविधाओं का विस्तार भी किया जा रहा है। ऑनलाइन दस्तावेज तैयार करने, ऑनलाइन शुल्क भुगतान, आधार सत्यापन और डिजिटल माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराने जैसी सुविधाओं से नागरिकों की सुविधा बढ़ी है।
पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को भी ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे नागरिकों को अलग से आवेदन करने और कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होती है। इस तरह पंजीयन से जुड़ी सेवाओं को एक सरल और सुविधाजनक प्रक्रिया के रूप में विकसित किया जा रहा है।
शुल्क में राहत और सरल व्यवस्था ने बनाया अनुभव आसान
श्रीमती सोनकुंवर और उनके पुत्र श्री रवि राम पाल ने पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण पर शुल्क में मिली राहत तथा पंजीयन प्रक्रिया में मिली सुविधा के लिए छत्तीसगढ़ शासन और पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
81 वर्षीय सोनकुंवर की यह कहानी बताती है कि जब शासन की नीति में कम शुल्क और सरल प्रक्रिया दोनों का समावेश होता है, तो उसका सीधा लाभ नागरिकों तक पहुंचता है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई यह कहानी इसी बदलाव की एक झलक है, जहां पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण की प्रक्रिया कम खर्चीली, सुविधाजनक और बुजुर्ग नागरिकों के लिए अधिक सहज बनी।
मूल्यांकन-चिन्हांकन से लेकर UDID, मेडिकल प्रमाण पत्र, पेंशन और सहायक उपकरण तक एक ही स्थान पर मिली सेवाएं
रायपुर, 22 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगजनों को आवश्यक सेवाएं, सुविधाएं और शासकीय योजनाओं का लाभ सहज एवं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में दुर्ग और उत्तर बस्तर कांकेर जिले में आयोजित मूल्यांकन एवं चिन्हांकन शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों को विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ा गया।
दुर्ग जिले के जनपद पंचायत धमधा स्थित अंबेडकर भवन में आयोजित शिविर में दिव्यांगजनों का आवश्यक मूल्यांकन एवं चिन्हांकन किया गया। पात्र हितग्राहियों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं एवं सहायक उपकरणों से लाभान्वित करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई। साथ ही विभागीय योजनाओं की जानकारी और आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।
इसी तरह उत्तर बस्तर कांकेर जिले में कोयलीबेड़ा, पखांजूर और बांदे जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से पहुंचे दिव्यांगजनों को एक ही स्थान पर अनेक आवश्यक सेवाओं का लाभ मिला। शिविर में दिव्यांगजनों के तत्काल मेडिकल प्रमाण पत्र एवं यूडीआईडी (UDID) कार्ड बनाने की कार्यवाही की गई। राशन कार्ड और बस पास से संबंधित जानकारी एवं मार्गदर्शन देने के साथ पेंशन योजनाओं के लिए भी आवश्यक कार्यवाही की गई।
शिविर में 6 दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल एवं बैटरी संचालित ट्राइसाइकिल वितरित किए गए। आवश्यक सहायक उपकरण मिलने से दिव्यांगजनों को दैनिक जीवन में सुविधा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का संबल मिला। सुविधाएं प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताया।
सेवा की कहानी
इन शिविरों की खासियत यह रही कि दिव्यांगजनों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय एक ही स्थान पर मूल्यांकन, चिन्हांकन, प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, पेंशन संबंधी कार्यवाही और सहायक उपकरण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। यह पहल दिव्यांगजनों तक योजनाओं की पहुंच आसान बनाने और उन्हें सम्मानपूर्वक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
69.58 लाख रुपए से पक्के फड़ एवं समतलीकरण कार्य को मिली स्वीकृति, किसानों को मिलेगी बेहतर उपार्जन सुविधा
रायपुर, 22 सितंबर 2026/ किसानों को धान उपार्जन के दौरान बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भटगांव विधानसभा क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की गई है। भटगांव विधायक एवं कैबिनेट मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से विधानसभा क्षेत्र के 7 धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण कार्य के लिए 69.58 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। इससे इन केंद्रों में आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी और किसानों को धान बेचने के दौरान अधिक व्यवस्थित एवं सुविधाजनक वातावरण मिलेगा।
स्वीकृत कार्यों में सूरजपुर विकासखंड के टमकी, सिरसी, करोटी बी, खोपो, बतरा, सांवारांवां एवं कुर्रीडीह स्थित धान उपार्जन केंद्र शामिल हैं। प्रत्येक केंद्र में 9.94 लाख रुपए की लागत से पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण का कार्य किया जाएगा।
धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ और समतलीकरण होने से उपार्जन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी। इससे धान की आवक, खरीदी और रख-रखाव के दौरान होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को उपार्जन केंद्रों पर बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में यह कार्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र में अधोसंरचना विकास को गति देने के क्रम में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा भटगांव विधानसभा क्षेत्र में किसानों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने के प्रयासों का यह एक और परिणाम है। इससे धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था मजबूत होने के साथ किसानों को सुविधाजनक उपार्जन व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
सेवा संकल्प अभियान के तहत महतारी वंदन और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की हितग्राहियों से जानी योजनाओं की उपयोगिता
रायपुर, 22 सितंबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले रहीं महिलाओं से सीधे संवाद की पहल को आगे बढ़ाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री एवं भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ग्राम कुंजनगर पहुंचीं। उन्होंने महिलाओं और अन्य हितग्राहियों से आत्मीय संवाद कर योजनाओं से मिल रहे लाभ, उनके अनुभवों और परिवार के जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने विशेष रूप से महतारी वंदन योजना एवं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की हितग्राही महिलाओं से बातचीत की। उन्होंने जाना कि योजनाओं से प्राप्त आर्थिक सहायता महिलाओं की दैनिक आवश्यकताओं, परिवार के खर्च और मातृत्व से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में किस प्रकार सहयोगी बन रही है। महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शासकीय योजनाओं से उन्हें आर्थिक संबल और आत्मविश्वास मिला है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाएं महिलाओं को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ मातृत्व और परिवार के बेहतर पोषण में भी सहयोग प्रदान कर रही हैं। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से इन योजनाओं के वास्तविक लाभ और हितग्राहियों के अनुभवों को सामने लाने के साथ शासन और जनता के बीच सीधा संवाद मजबूत किया जा रहा है।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने ग्रामीण महिलाओं की बातों को गंभीरता से सुना और योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े उनके अनुभव जाने। ग्राम कुंजनगर में महिलाओं से हुआ यह संवाद महिला सशक्तिकरण, जनभागीदारी और सेवा की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
लोक अदालत के अवसर पर दिव्यांग हितग्राहियों को वितरित किए गए सहायक उपकरण
रायपुर, 22 सितंबर 2026/ सेवा संकल्प के तहत जरूरतमंदों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में समाज कल्याण विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में लोक अदालत के अवसर पर समाज कल्याण विभाग, जिला रायपुर द्वारा संविलित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के अंतर्गत दिव्यांग हितग्राहियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण प्रदान किए गए। इन उपकरणों के माध्यम से दिव्यांगजनों के दैनिक जीवन को सुगम बनाने के साथ उनकी गतिशीलता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में कुल 10 सहायक उपकरण वितरित किए गए, जिनमें 06 श्रवण यंत्र, 02 ट्राइसाइकिल और 02 छड़ियां शामिल हैं। सहायक उपकरण मिलने से हितग्राहियों को अपनी दैनिक गतिविधियों में सुविधा के साथ आवागमन और सामाजिक सहभागिता में भी सहूलियत मिलेगी।
जिला न्यायाधीश श्री बलराम प्रसाद वर्मा ने हितग्राहियों को सहायक उपकरण प्रदान किए। उन्होंने दिव्यांगजनों तक शासन की कल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। विभाग का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र दिव्यांग हितग्राही को उसकी आवश्यकता के अनुरूप सहायता और योजनाओं का लाभ समय पर मिले। सहायक उपकरणों का वितरण इसी सेवा भावना की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो दिव्यांगजनों को सुविधा के साथ सम्मानपूर्वक और आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है।
पोषण माह 2026 में बच्चों के विकास की निगरानी और देखभाल पर विशेष जोर
रायपुर, 22 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में पोषण माह 2026 के तहत बच्चों के समुचित विकास, पोषण और स्वास्थ्य को लेकर परिवारों को जागरूक किया जा रहा है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत भी बच्चों के विकास की समय पर पहचान, उचित परामर्श और जरूरतमंद बच्चों को विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने की दिशा में सेवाभाव के साथ प्रयास किए जा रहे हैं।
अभियान के माध्यम से अभिभावकों को बताया जा रहा है कि वे बच्चे की उम्र के अनुसार उसके सीखने, खेलने, प्रतिक्रिया देने और व्यवहार पर ध्यान दें। विकास में किसी प्रकार की देरी या चिंता दिखाई देने पर इंतजार न करें, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से बात करें और स्वास्थ्यकर्मी से आवश्यक सलाह लें। जरूरत पड़ने पर बच्चे को विशेषज्ञ सेवा के लिए रेफर कराया जा सकता है।
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के विकास और पोषण की नियमित निगरानी की जा रही है। ‘हर बच्चे के विकास में ध्यान देना जरूरी’ संदेश के साथ परिवारों को यह समझाया जा रहा है कि समय पर पहचान और उचित मार्गदर्शन बच्चों के बेहतर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ पोषण माह में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्यकर्मी और परिवार मिलकर बच्चों के स्वस्थ विकास की दिशा में काम कर रहे हैं। यही निरंतर देखभाल और समय पर सहयोग ‘सेवा की कहानी’ को मजबूत करते हुए बच्चों के सुरक्षित, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की नींव तैयार कर रहा है।