ईश्वर दुबे
संपादक - न्यूज़ क्रिएशन
+91 98278-13148
newscreation2017@gmail.com
Shop No f188 first floor akash ganga press complex
Bhilai
समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं तारा देवी राठौर
बिहान योजना से मिला आर्थिक संबल, समूह से ऋण लेकर शुरू किया स्वरोजगार
रायपुर, सितंबर 2026/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) 'बिहान' से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। स्वसहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और संबल बनाने के साथ-साथ उन्हें स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। जिले के ग्राम पंचायत करमरी निवासी श्रीमती तारा देवी राठौर इसकी प्रेरणादायी मिसाल हैं।
श्रीमती तारा देवी राठौर जय मां दुर्गा स्वसहायता समूह की अध्यक्ष हैं। उनका समूह भूमिका ग्राम संगठन एवं करमरी क्लस्टर संगठन के माध्यम से सर्वोदय क्लस्टर संगठन, शामपुर से जुड़ा हुआ है। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें शासन की आजीविका संवर्धन गतिविधियों से जुड़ने और आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिला।
समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर श्रीमती राठौर ने मोबाइल दुकान शुरू की। वर्तमान में उनके पुत्र द्वारा दुकान का संचालन किया जा रहा है। मोबाइल दुकान के व्यवसाय से परिवार को प्रतिमाह लगभग 20 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और घर-परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक सहयोग मिल रहा है।
श्रीमती तारा देवी राठौर बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। समूह के माध्यम से प्राप्त ऋण का उपयोग उन्होंने स्वरोजगार शुरू करने में किया, जिससे परिवार की आय में वृद्धि हुई। आज मोबाइल दुकान उनके परिवार के लिए आय का एक महत्वपूर्ण साधन बन गई है।
शासन की बिहान योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं संगठित होकर, उन्हें वित्तीय एवं आजीविका संबंधी अवसर उपलब्ध कराने से वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई राह भी बना रही हैं।
सेवा सेतु के जरिए घर के पास ही राशन कार्ड में जुड़ा बच्चे का नाम
ऑनलाइन प्रक्रिया से कम समय में हुआ काम पूरा
रायपुर, सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विजन के अनुरूप शासकीय सेवाओं को आम नागरिकों के घर के नजदीक, सरल, पारदर्शी और सुगम तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में सेवा सेतु पोर्टल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी क्रम में कोंडागांव जिले में डिजिटल माध्यम से नागरिकों को विभिन्न शासकीय सेवाओं का लाभ स्थानीय स्तर पर ही मिल रहा है। ग्राम पंचायत सिंगनपुर निवासी श्री उमेश कुमार नाग का राशन कार्ड में नाम जुड़वाना सेवा सेतु से आसान हुआ।
श्री नाग ने सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से अपने राशन कार्ड में बच्चे का नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया। अटल डिजिटल सुविधा केंद्र मुलमुला के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की गई और उनका कार्य बहुत ही कम समय में सफलतापूर्वक पूरा हो गया। पहले ऐसे कार्यों के लिए नागरिकों को संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने और अलग से समय निकालना पड़ता था। अब सेवा सेतु के माध्यम से ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध होने से अब नागरिकों को अपने क्षेत्र के नजदीक ही आवश्यक शासकीय सेवाओं का लाभ मिल रहा है। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है। हितग्राही श्री नाग ने इस त्वरित एवं जनहितकारी सेवा के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। सेवा सेतु के माध्यम से उपलब्ध हो रही ऐसी सुविधाएं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के उस संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिसमें शासकीय सेवाओं को नागरिकों तक पहुंचाकर उन्हें सरल और सहज गांव और आसपास के क्षेत्र में ही आवश्यक सेवाओं का लाभ मिल रहा है।
सेवा, स्वच्छता और राष्ट्र निर्माण का दिया संदेश
रायपुर, सितंबर 2026/ ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत कोंडागांव जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय जामकोटपारा में ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता सहित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साह, अनुशासन एवं रचनात्मकता के साथ सहभागिता की।
चित्रकला प्रतियोगिता में आयुष सिंह ने प्रथम तथा इशांत देवांगन ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इसी तरह भाषण प्रतियोगिता में करनदीप ने प्रथम तथा तोशन दीवान ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा एवं रचनात्मक सोच के माध्यम से सेवा, स्वच्छता, डिजिटल भारत और विकसित भारत 2047 जैसे विषयों पर प्रभावशाली संदेश प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने नाटक के माध्यम से स्वच्छता का संदेश देते हुए अपने आसपास के क्षेत्र एवं शहर को स्वच्छ रखने के लिए जागरूक किया। वहीं, चित्रकला के माध्यम से विद्यार्थियों ने ‘विकसित भारत 2047’ की अपनी कल्पना को रंगों एवं रचनात्मक चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। डिजिटल भारत, स्वच्छ भारत सहित विभिन्न विषयों पर विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए आकर्षक चित्रों ने उपस्थितजनों का ध्यान आकर्षित किया।
‘नमो सेवा, अनकही कहानियां’ संगीतमय एवं नुक्कड़ नाटक का आयोजन, 22 सितंबर से 15 अक्टूबर तक जिले के विभिन्न बाजारों और महाविद्यालयों में होंगी आकर्षक प्रस्तुतियां
रायपुर सितंबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शासन के निर्देशानुसार खैरागढ़ जिले में ‘नमो सेवा, अनकही कहानियां’ के संगीतमय नाटक एवं नुक्कड़ नाटक श्रृंखला का आयोजन किया जाएगा। कला, संगीत और अभिनय के माध्यम से विगत 25 वर्षों के सेवा कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा उनके माध्यम से लोगों के जीवन में आए बदलाव की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाएगी।
निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार 22 सितंबर से 15 अक्टूबर 2026 के मध्य जिले के विभिन्न सामुदायिक साप्ताहिक बाजारों और दो प्रमुख महाविद्यालयों में नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। बाजारों में अतरिया, ठेलकाडीह, बीजलदही, पांडादाह, गंडई, पद्मावतीपुर, पैलीमेटा, साल्हेवारा और बुंदेली में कार्यक्रम आयोजित होंगे। वहीं रानी रश्मि देवी शासकीय महाविद्यालय खैरागढ़ तथा वीरांगना अवंति बाई लोधी महाविद्यालय छुईखदान में भी नाटक के माध्यम से लोगों को योजनाओं और सेवा कार्यों से अवगत कराया जाएगा।
09 अक्टूबर को होगा जिला स्तरीय भव्य आयोजन
कार्यक्रम श्रृंखला की प्रमुख कड़ी के रूप में 09 अक्टूबर 2026 को संगीत की नगरी खैरागढ़ में शाम 5 बजे राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, कैंपस-02 ऑडिटोरियम में जिला स्तरीय संगीतमय नाटक की विशेष प्रस्तुति होगी। कार्यक्रम में कला और संगीत के माध्यम से सेवा, जनकल्याण और विकास की विभिन्न कहानियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।
नुक्कड़ नाटक एवं जिला स्तरीय संगीतमय नाटक के मंचन के लिए राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय द्वारा निर्देशन एवं प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय के प्रतिभावान छात्र-कलाकार अपनी अभिनय और संगीत प्रतिभा के माध्यम से प्रस्तुतियां देंगे।
सेवा संकल्प अभियान के जिला प्रभारी अधिकारी ने बताया कि 09 अक्टूबर को आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिले के सम्मानित जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों को आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कला और संगीत के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवा कार्यों को सरल और रोचक तरीके से आमजन तक पहुंचाने का यह एक प्रभावी माध्यम बनेगा।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ के जामपाली में खुली 'बदलाव की राह'
रायपुर, सितंबर 2026/ कभी अवैध कब्जे की आड़ में उपेक्षित पड़ी शासकीय जमीन आज गांव के मासूमों के उज्ज्वल भविष्य और बेहतर स्वास्थ्य की आधारशिला बन चुकी है। छत्तीसगढ़ के जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ अंतर्गत सरिया तहसील के ग्राम जामपाली ने प्रशासनिक मुस्तैदी और जनहितैषी दृष्टि का एक ऐसा अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है, जहां अतिक्रमण से मुक्त कराई गई जमीन पर अब बच्चों की किलकारियां और शिक्षा के स्वर गूंज रहे हैं।
अवैध कब्जे की जकड़न से जनहित का सफर
ग्राम जामपाली स्थित शासकीय भूमि (खसरा नंबर 309/1, कुल रकबा 1.833 हेक्टेयर) के एक हिस्से पर लंबे समय से स्थानीय लोगों का अवैध कब्जा था। इसके चलते गांव के नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए आवश्यक प्राथमिक सुविधाओं और बाल विकास केंद्र के निर्माण में बाधा आ रही थी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत तहसीलदार सरिया द्वारा राजस्व अभिलेखों के सूक्ष्म परीक्षण व कड़े स्थल निरीक्षण के बाद नियमानुसार बेदखली की सख्त कार्रवाई की गई। राजस्व टीम की इस त्वरित प्रशासनिक पहल से करोड़ों मूल्य की शासकीय भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया गया।
आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र: बाल विकास की नई मिसाल
जमीन को केवल खाली कराने तक सीमित न रखते हुए, जिला व जनपद पंचायत बरमकेला के समन्वय से वहां एक 'आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र' का भव्य निर्माण कराया गया। अब गांव के छोटे बच्चों को एक ही छत के नीचे सुरक्षित, हाइजीनिक और खेल-खेल में सीखने योग्य परिवेश मिल रहा है। केंद्र के माध्यम से बच्चों को सही पोषण, स्वास्थ्य जांच और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।अतिक्रमण हटने से न केवल गांव की सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षित हुई, बल्कि शासन के प्रति ग्रामीणों का विश्वास भी और मजबूत हुआ है।
बदलाव की स्थायी छाप
कब्जामुक्त हुई यह जमीन आज जामपाली के बच्चों के सुनहरे कल को आकार दे रही है। यह पहल सिद्ध करती है कि यदि प्रशासनिक दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ जनहित को प्राथमिकता दी जाए, तो उपेक्षित पड़ी शासकीय संपत्तियां भी समाज और नई पीढ़ी के उत्थान का सबसे मजबूत आधार बन सकती हैं।
सरिया की 14 महिलाएं 'लखपति दीदी' बनने की राह पर
रायपुर, सितंबर 2026/ सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले के तहसील सरिया स्थित ग्राम सुखापाली में बदलाव की एक अनूठी और प्रेरणादायक कहानी आकार ले रही है। जिस 25 एकड़ शासकीय भूमि पर वर्षों से भू-माफिया और अतिक्रमणकारियों का कब्जा था, आज वही भूमि महिलाओं के श्रम, दृढ़ संकल्प और सरकारी योजनाओं के बेहतर अभिसरण (Convergence) से हरी-भरी होकर आर्थिक समृद्धि का केंद्र बन चुकी है। 'हरियाली स्व-सहायता समूह' की 14 महिलाएं इस भूमि के जरिए न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि राज्य के 'लखपति दीदी' अभियान की नई पहचान बनकर उभर रही हैं।
कब्जे से मुक्ति: अतिक्रमण से आजीविका तक का सफर
ग्राम सुखापाली की करीब 25 एकड़ शासकीय भूमि लंबे समय से अतिक्रमण की चपेट में थी। राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयास से इस भूमि को सफलतापूर्वक मुक्त कराया गया। प्रशासन ने भूमि को केवल अपने आधिपत्य में लेने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन का जरिया बनाने की दूरदर्शी योजना तैयार की।
योजनाओं का अभिसरण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
बंजर और असिंचित भूमि को मॉडल फार्म में बदलने के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया। वीबीग्रामजी (VB-GramG) योजना के तहत जमीन को कृषि योग्य बनाकर आवश्यक शेड का निर्माण कराया गया। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से पूरे 25 एकड़ क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चैन-लिंकिंग फेंसिंग कराई गई और आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की गई। क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) के माध्यम से समूह को 10 लाख रुपये की ऋण सहायता दी गई।
7,300 अमरूद के पौधे और अंतर-फसली मॉडल
प्राप्त वित्तीय सहायता से समूह ने उच्च गुणवत्ता वाले वीएनआर (VNR) और पिंक ताइवान किस्म के करीब 7,300 अमरूद के पौधों का रोपण किया। चूंकि अमरूद के बाग से फल आने में समय लगता है, इसलिए महिलाओं की दैनिक आय बनी रहे, इसके लिए स्मार्ट अंतर-फसली (Inter-Cropping) मॉडल अपनाया गया।
महिलाओं ने अमरूद के पौधों के बीच खाली पड़ी जमीन पर खीरा, लौकी और मखना जैसी सब्जियों व नकदी फसलों की खेती शुरू की। स्थानीय मंडियों और बाजारों में इन फसलों की बिक्री से समूह को तत्काल और नियमित आय प्राप्त होने लगी है।
महिला सशक्तिकरण और 'लखपति दीदी' का सपना
कब्जे से मुक्त हुई शासकीय भूमि पर आज खेती, बागवानी और आधुनिक सिंचाई का जो संगम दिख रहा है, उसने सुखापाली गांव के आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है। 'हरियाली स्व-सहायता समूह' की 14 महिलाएं अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर व्यावसायिक कृषि उद्यमी के रूप में स्थापित हो रही हैं।
शासकीय भूमि के संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का यह अभिनव प्रयोग पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन चुका है, जो यह साबित करता है कि इच्छाशक्ति और सही नीति से बंजर व अतिक्रमित भूमि को भी 'समृद्धि का आधार' बनाया जा सकता है।
धमतरी के 97 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने रंगों और शब्दों में उकेरी ‘मेरे सपनों के भारत’ की स्वर्णिम तस्वीर
रायपुर, सितंबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले के विकासखंड स्तर पर आयोजित दो दिवसीय ‘मेरे सपनों का भारत’ विषयक चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता में स्कूली विद्यार्थियों का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। 1,483 विद्यालयों के लगभग 97,754 विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक कला और ओजस्वी विचारों के माध्यम से एक शिक्षित, आत्मनिर्भर, हरित और तकनीकी रूप से सक्षम भारत का खाका प्रस्तुत किया।
प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य बच्चों में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना रहा। अभियान की मूल भावना 'सेवा, सहभागिता और सर्वांगीण विकास' को केंद्र में रखते हुए आयोजित इस कार्यक्रम ने जिले में जनभागीदारी का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।
60 हजार से अधिक बच्चों ने चित्रों से दिए सामाजिक संदेश
चित्रकला प्रतियोगिता में 1,483 विद्यालयों के 60,608 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कैनवास और कागजों पर रंगों के जरिए बच्चों ने केवल कला का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि आधुनिक शिक्षा, हरित व स्वच्छ पर्यावरण, डिजिटल तकनीक, उन्नत कृषि, महिला सशक्तिकरण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की अपनी परिकल्पना को जीवंत कर दिया। चित्रों में औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर संतुलन दिखाई दिया।
ओजस्वी भाषणों में झलकी राष्ट्र निर्माण की प्रतिबद्धता
इसी क्रम में भाषण प्रतियोगिता में 37,146 विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपने विचारों को तार्किक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, नागरिक कर्तव्यों, विज्ञान व तकनीक के उपयोग और सामाजिक समरसता जैसे गंभीर विषयों पर विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों का मानना था कि देश का स्वर्णिम भविष्य केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के सक्रिय योगदान और संकल्पों से निर्मित होता है।
भविष्य की नींव और सशक्त भावी पीढ़ी
सेवा संकल्प अभियान से विद्यार्थियों का यह जुड़ाव आने वाले समय के सशक्त भारत की दिशा तय करता है। धमतरी जिले के हजारों बच्चों की यह सक्रिय भागीदारी यह स्पष्ट संदेश देती है कि भारत का उज्ज्वल भविष्य बड़े सपनों के साथ-साथ उन्हें पूरा करने के लिए आज लिए गए छोटे-छोटे संकल्पों से साकार होगा।
नस्ल सुधार ने बदली किसान विनोद की किस्मत, घर की बछिया बनी आर्थिक समृद्धि का आधार
रायपुर, सितंबर 2026/ ग्रामीण अंचलों में अक्सर दैनिक जरूरतों की चीजों के लिए भी लोगों को संघर्ष करना पड़ता है। ऐसा ही कुछ हाल नारायणपुर जिले के धौड़ाई गांव निवासी किसान श्री विनोद नुरेटी का था। उनके परिवार में दूध की रोजाना जरूरत तो थी, लेकिन गांव में उपलब्धता न होने और बाजार में ऊंची कीमतों के कारण उन्हें काफी दिक्कत झेलनी पड़ती थी। परंतु, राज्य सरकार के पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन और विनोद की मेहनत ने इस समस्या को न सिर्फ खत्म किया, बल्कि उनकी आजीविका की नई राह भी खोल दी।
कृत्रिम गर्भाधान से नस्ल सुधार की नींव
दूध की समस्या के स्थायी समाधान के लिए विनोद नुरेटी ने पशुधन विकास विभाग से संपर्क साधा। विभागीय सलाह पर उनकी देशी गाय का कृत्रिम गर्भाधान कराया गया। परिणामस्वरूप, एक उच्च नस्ल की बछिया का जन्म हुआ। देशी नस्ल में सुधार का यह प्रयोग किसान के लिए पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
'उन्नत मादा वत्स पालन योजना' से मिला आर्थिक बल
बछिया के सही पोषण और नस्ल संवर्धन के लिए पशुधन विकास विभाग की उन्नत मादा वत्स पालन योजना के तहत विनोद को 18 हजार रुपये की अनुदान राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही विभाग की ओर से समय-समय पर नि:शुल्क पशु चिकित्सा देखभाल और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई गईं।
आत्मनिर्भरता और आय का नया जरिया
विभागीय मार्गदर्शन और अनुदान से विनोद ने बछिया की बेहतर देखरेख की, जो समय के साथ एक स्वस्थ और अत्यधिक दुधारू गाय के रूप में विकसित हुई। आज स्थिति यह है कि विनोद के परिवार को न केवल घर पर ही प्रचुर मात्रा में शुद्ध दूध मिल रहा है, बल्कि वे दूध, दही और घी बेचकर हर महीने अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं।
जो परिवार कल तक दूध की एक-एक बूंद के लिए दूसरों पर निर्भर था, आज वह खुद दूध उत्पादन कर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन चुका है। विनोद नुरेटी के लिए यह योजना केवल एक बछिया के पालन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने उनके पूरे परिवार के जीवन में आर्थिक स्थिरता, सुविधा और सम्मान की नई सुबह ला दी है।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से नारायणपुर के श्रमिक परिवारों के सपनों को मिली नई उड़ान
रायपुर, सितंबर 2026/छत्तीसगढ़ सरकार के भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना नारायणपुर जिले के श्रमिक परिवारों के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की एक नई और मजबूत राह तैयार कर रही है। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के कारण जिन प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना श्रमिक परिवारों के लिए केवल एक अधूरा सपना हुआ करता था, आज इस योजना की बदौलत उन्हीं संस्थानों के दरवाजे उनके मेधावी बच्चों के लिए पूरी तरह खुल गए हैं। जिले के पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण और आवासीय शिक्षा प्रदान कर यह योजना उनके सपनों को पंख लगा रही है।
जिले के ग्राम खरगांव में राजमिस्त्री का कार्य करने वाले रामधर दुग्गा के पुत्र साहिल दुग्गा का चयन जब राज्य के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार 'राजकुमार कॉलेज, रायपुर' में हुआ, तो पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। रामधर भावुक होकर कहते हैं कि एक श्रमिक परिवार के लिए ऐसे बड़े विद्यालय में बच्चे को पढ़ाने की कल्पना करना भी आसान नहीं होता, लेकिन सरकार की इस पहल ने उनके बेटे की राह बेहद आसान कर दी है।
इसी तरह नारायणपुर के जगदीश मंदिर वार्ड की रहने वाली डिगेश्वरी जैन, जो स्वयं रेजा-कुली का कठिन काम करती हैं, अपनी पुत्री तेजल जैन के इस बड़े अवसर को लेकर बेहद उत्साहित हैं। तेजल का चयन 'दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), राजनांदगांव' में निःशुल्क अध्ययन के लिए हुआ है। वहीं ओरछा तहसील के सुदूर ग्राम कुतुल की रेजा-कुली गणेशिया उसेंडी की बेटी दिप्ती उसेंडी और ग्राम बाकुलवाही के दयाल सिंह पात्र की पुत्री पूर्वी पात्र का चयन 'संस्कार द गुरुकुल, बस्तर' में हुआ है। ग्राम बोरण्ड निवासी बेनु राम राना के पुत्र हिमांशु राना को भी 'कृष्णा एजुकेशन सोसायटी, भिलाई' में रहकर पढ़ने का बेहतरीन मौका मिला है।
यह योजना केवल निःशुल्क शिक्षा का जरिया मात्र नहीं है, बल्कि दूरस्थ और आदिवासी अंचलों के बच्चों के भीतर आत्मविश्वास का नया संचार कर उनके करियर को संवारने की एक मजबूत नींव साबित हो रही है। एक समृद्ध और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण पाकर बच्चे न केवल अपनी प्रतिभा को निखार सकेंगे, बल्कि भविष्य की बड़ी चुनौतियों के लिए भी तैयार हो सकेंगे। इस सुखद बदलाव से गदगद हितग्राही परिवारों ने श्रम विभाग के प्रति आभार जताते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का सहृदय धन्यवाद व्यक्त किया है, जिनकी दूरगामी सोच से आज गरीब परिवारों के बच्चों का भविष्य संवर रहा है।
साहित्य, लोककला, संगीत, नृत्य, सिनेमा और रंगकर्म सहित 13 क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रतिभाओं को मिलेगा सम्मान, 5 अक्टूबर तक पंजीकृत डाक से भेज सकेंगे आवेदन
रायपुर, सितंबर 2026। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विभिन्न कला, साहित्य, संस्कृति एवं सामाजिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को प्रदान किए जाने वाले राज्य सम्मान 2026 के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। विभाग द्वारा स्थापित 12 राज्य स्तरीय सम्मान एवं 1 राष्ट्रीय सम्मान के लिए निर्धारित प्रारूप में 5 अक्टूबर 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। चयनित प्रतिभाओं को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ‘राज्योत्सव 2026’ के राज्य अलंकरण समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
राज्य सम्मान के लिए इच्छुक पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रारूप में अपनी प्रविष्टियां प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन में आवेदक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि एवं आयु के साथ प्रस्तावक का विवरण तथा आवेदक की उपलब्धियों का संक्षिप्त ब्यौरा देना होगा। आवेदक द्वारा पूर्व में प्राप्त सम्मान एवं पुरस्कारों की जानकारी भी निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करनी होगी। इसमें अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रदेश एवं जिला स्तर पर प्राप्त सम्मान एवं पुरस्कारों का विवरण शामिल किया जाना है।
शासकीय सेवा में कार्यरत आवेदकों को सामान्य प्रशासन विभाग से अनुमति पत्र संलग्न करने का प्रावधान भी रखा गया है। सम्मान की नियमावली एवं आवेदन का निर्धारित प्रारूप विभागीय वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध है।
13 प्रमुख क्षेत्रों में मिलेगा सम्मान
संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026 के लिए विभिन्न विधाओं और क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित किया जाएगा। पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में, दाऊ मंदराजी सम्मान लोक नाट्य एवं लोक शिल्प के क्षेत्र में तथा चक्रधर सम्मान शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य के क्षेत्र में प्रदान किया जाएगा।
देवदास बंजारे स्मृति पुरस्कार लोक नृत्य के क्षेत्र में तथा लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार आंचलिक साहित्य एवं लोक कविता के क्षेत्र में दिया जाएगा। हबीब तनवीर सम्मान समकालीन रंगकर्म के लिए प्रदान किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ी, हिन्दी एवं अन्य भाषाओं के नाटक शामिल हैं।
इसी क्रम में देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार पंथी नृत्य के क्षेत्र में, लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान छत्तीसगढ़ी लोकगीत के क्षेत्र में और खुमान साव सम्मान छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के क्षेत्र में प्रदान किया जाएगा।
सिनेमा के क्षेत्र में भी प्रतिभाओं को सम्मान
किशोर साहू सम्मान हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में रचनात्मक लेखन, निर्देशन, अभिनय एवं पटकथा निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा। वहीं किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में निर्देशन के क्षेत्र में प्रदान किया जाएगा।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान देश के बाहर रहकर सामाजिक कल्याण, मानव संसाधन विकास, कला, साहित्य अथवा आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अप्रवासी भारतीयों को प्रदान किया जाएगा। डॉ. तीजन बाई राज्य सम्मान पंडवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाएगा।
दीर्घ साधना और उपलब्धियों के आधार पर होगा चयन
संबंधित क्षेत्रों में उपलब्धि, योगदान एवं दीर्घ साधना को ध्यान में रखते हुए पात्र प्रतिभाओं का चयन किया जाएगा। चयनित प्रतिभाओं को ‘राज्योत्सव 2026’ के राज्य अलंकरण समारोह में राज्य सम्मान से विभूषित किया जाएगा।
प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, साहित्य, संगीत, नृत्य, रंगमंच एवं सिनेमा के क्षेत्र में निरंतर योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने की यह पहल राज्य की कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी।
5 अक्टूबर तक पंजीकृत डाक से भेजें आवेदन
संस्कृति विभाग ने संबंधित क्षेत्र के पात्र कलाकारों, साहित्यकारों, सांस्कृतिक कर्मियों एवं अन्य प्रतिभाओं से निर्धारित प्रारूप में अपनी प्रविष्टियां 5 अक्टूबर 2026 तक पंजीकृत डाक से भेजने का आग्रह किया है।
आवेदन इस पते पर भेजे जा सकते हैं:
संचालक, संस्कृति एवं राजभाषा
द्वितीय तल, व्यावसायिक परिसर, सेक्टर-27,
नवा रायपुर अटल नगर, छत्तीसगढ़
आवेदन निर्धारित प्रारूप में आवश्यक दस्तावेजों एवं उपलब्धियों के विवरण के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर भेजना होगा। सम्मान से संबंधित विस्तृत जानकारी, नियमावली एवं आवेदन का निर्धारित प्रारूप संस्कृति विभाग की वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध है।
खनिज विभाग ने कोलबिर्रा क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन करते 5 ट्रैक्टर किए जब्त, शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की दिशा में प्रशासन की सक्रिय पहल
रायपुर, सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा पारदर्शी, जवाबदेह एवं संवेदनशील प्रशासन को प्राथमिकता देते हुए आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निराकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में सीएम हेल्पलाइन एवं ग्रामीणों से प्राप्त शिकायतों पर खनिज विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोलबिर्रा क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन करते हुए 5 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया है।
शिकायत मिलते ही मौके पर पहुंची खनिज विभाग की टीम
जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए खनिज विभाग द्वारा लगातार निगरानी एवं जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में कोलबिर्रा क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन की शिकायत प्राप्त होने पर विभागीय टीम ने तत्काल कार्रवाई की। जांच के दौरान रेत का अवैध परिवहन करते पाए गए 5 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त कर लिया गया।
जब्त सभी वाहनों को कोटमी चौकी में सुरक्षित रखा गया है। संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
शिकायतों के निराकरण में प्रशासन की तत्परता
कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने अधिकारियों को सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों की गंभीरता एवं गुणवत्तापूर्ण जांच करते हुए समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों के अनुरूप जिले में नागरिकों से प्राप्त शिकायतों पर संबंधित विभागों द्वारा त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
खनिज विभाग द्वारा अवैध खनन एवं परिवहन से संबंधित शिकायतों पर विशेष निगरानी रखते हुए नियमित जांच की जा रही है। इससे एक ओर जहां खनिज संपदा के अवैध दोहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर शासन की व्यवस्था के प्रति आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत हो रहा है।
अवैध खनन और परिवहन पर लगातार जारी रहेगा अभियान
खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। विभाग द्वारा प्राप्त शिकायतों की जांच के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण और निगरानी की जा रही है, ताकि खनिज संसाधनों के अवैध दोहन को रोका जा सके।
इस कार्रवाई में सहायक खनि अधिकारी श्री आदित्य मानकर एवं खनिज विभाग के स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रशासन की यह कार्रवाई मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप जनशिकायतों के त्वरित निराकरण, कानून के प्रभावी पालन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
हर माह एक हजार रुपये की सहायता से घरेलू जरूरतें हुईं आसान
रायपुर, सितंबर 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं और परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत ठाड़पथरा की श्रीमती प्रीति सुजान बैगा के लिए महतारी वंदन योजना नियमित आर्थिक सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है। योजना के तहत उन्हें प्रत्येक माह एक हजार रुपये की राशि प्राप्त हो रही है, जिससे परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में उन्हें आर्थिक सहायता मिल रही है।
नियमित आर्थिक सहायता से घरेलू खर्च में मिली राहत
श्रीमती प्रीति सुजान बैगा बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली राशि से उन्हें घर की जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी मदद मिलती है। वे इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से राशन, सब्जी और अन्य घरेलू जरूरतों की पूर्ति में करती हैं। नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता से उन्हें छोटे-छोटे घरेलू खर्चों के लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव का सामना कम करना पड़ता है।
परिवार की जरूरतों में मिल रहा योजनाओं का संयुक्त लाभ
प्रीति बैगा को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न का लाभ भी मिल रहा है। एक ओर महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है, वहीं दूसरी ओर पीडीएस के माध्यम से खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। इन दोनों योजनाओं के संयुक्त लाभ से उनके परिवार के घरेलू बजट को राहत मिली है और आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में अधिक सुदृढ़ हुई है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में पहल
महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें परिवार की आवश्यकताओं में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिल रहा है। प्रीति बैगा जैसी महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि नियमित आर्थिक सहयोग दैनिक जीवन की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रहा है।
राज्य सरकार की योजनाओं से ग्रामीण परिवारों को मिल रहा संबल
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। महतारी वंदन योजना और पीडीएस जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं तथा जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक एवं खाद्य सुरक्षा का सहयोग मिल रहा है। इन योजनाओं का लाभ विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।
मुख्यमंत्री के प्रति व्यक्त किया आभार
श्रीमती प्रीति सुजान बैगा ने कहा कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि उनके परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। प्रीति का कहना है कि नियमित आर्थिक सहायता से उन्हें अपने परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने में सहयोग मिल रहा है।
20 हजार रुपये से शुरू की किराना दुकान, आज सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय
रायपुर, सितंबर 2026। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं एवं आजीविका गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव गांव-गांव में दिखाई दे रहा है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की श्रीमती सुमन लता वाकरे की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, मेहनत और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायी मिसाल बनकर सामने आई है।
स्व-सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी
श्रीमती सुमन लता वाकरे आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। कभी परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को लेकर चिंतित रहने वाली सुमन लता ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी मेहनत और लगन से आर्थिक सशक्तिकरण की राह चुनी। वे माँ महामाया महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं और वर्तमान में समूह की सचिव के दायित्व का निर्वहन कर रही हैं।
सुमन लता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला और धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। समूह की गतिविधियों और उपलब्ध वित्तीय सहायता ने उन्हें स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
15 हजार की आरएफ राशि से शुरू हुई आत्मनिर्भरता की राह
समूह के माध्यम से श्रीमती सुमन लता को 15 हजार रुपये की आरएफ राशि प्राप्त हुई। इसके बाद 60 हजार रुपये की सीआईएफ राशि में से 20 हजार रुपये का उपयोग कर उन्होंने गांव में किराना दुकान शुरू की। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन अपनी मेहनत, ग्राहकों के प्रति विश्वास और बेहतर संचालन के बल पर उन्होंने दुकान का लगातार विस्तार किया।
व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने बैंक से ऋण लेकर अपनी दुकान में आवश्यक सामग्री बढ़ाई। आज उनकी किराना दुकान पहले की तुलना में काफी विस्तृत हो चुकी है और व्यवसाय से उन्हें प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। आर्थिक गतिविधि के विस्तार ने न केवल उनके परिवार की आय को मजबूत किया, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी दिया।
‘लखपति दीदी’ बनकर बनीं गांव की प्रेरणा
श्रीमती सुमन लता की सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब महिलाओं को संगठित होकर आगे बढ़ने का अवसर, आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। स्व-सहायता समूह ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि अपने सपनों को साकार करने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया।
किराना दुकान के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर सुमन लता ने ‘लखपति दीदी’ बनने की उपलब्धि हासिल की है। उनकी कहानी गांव की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है।
महतारी वंदन योजना का भी मिला संबल
श्रीमती सुमन लता को महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। उनके अनुसार योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग दिया है। उन्होंने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मिल रहा बढ़ावा
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्व-सहायता समूहों को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ उन्हें विभिन्न आजीविका अवसरों का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से प्रेरित होकर गांव की महिलाएं अब सहायता की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं रोजगार और आय के साधन तैयार कर रही हैं। सुमन लता वाकरे की कहानी इसी बदलाव की जीवंत तस्वीर है, जहां समूह से मिला सहयोग, सरकारी योजनाओं का संबल और स्वयं की मेहनत मिलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहे हैं।
बलौदाबाजार की पायल भट्टर ने रजिस्ट्री में बचाए 1.32 लाख रुपये, बेटी के बचत खाते में जमा की पूरी राशि
महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट से मिला आर्थिक संबल, सेवा संकल्प अभियान में साझा किया अनुभव
रायपुर, सितम्बर 2026/ एक महिला के लिए अपने नाम संपत्ति होना आर्थिक सुरक्षा का आधार बना और पंजीयन शुल्क में मिली बचत ने उसकी बेटी के भविष्य के लिए एक नई उम्मीद जोड़ दी। बलौदाबाजार की श्रीमती पायल भट्टर के लिए संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान मिली 50 प्रतिशत की पंजीयन शुल्क छूट महज आर्थिक राहत नहीं रही, बल्कि यह उनकी बेटी के भविष्य के लिए बचत का अवसर बन गई। पंजीयन शुल्क में छूट से बचे 1 लाख 32 हजार रुपये उन्होंने अपनी बेटी के बचत खाते में जमा कर दिए हैं।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत हितग्राहियों से सीधे संवाद कर योजनाओं एवं नागरिक सुविधाओं के जमीनी प्रभाव को जाना जा रहा है। इसी संवाद के दौरान श्रीमती पायल भट्टर ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पंजीयन शुल्क में मिली राहत से संपत्ति खरीदने का खर्च कम हुआ और बची राशि को उन्होंने बेटी के भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया।
रजिस्ट्री में मिली राहत, बेटी के भविष्य के लिए बनी पूंजी
श्रीमती पायल भट्टर ने बताया कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर मिलने वाली शुल्क छूट से उन्हें 1 लाख 32 हजार रुपये की बचत हुई। उन्होंने इस राशि को खर्च करने के बजाय अपनी बेटी के बचत खाते में जमा करने का निर्णय लिया, ताकि भविष्य में शिक्षा, जरूरत या किसी महत्वपूर्ण अवसर पर यह राशि उसके काम आ सके।
उनके लिए यह केवल रजिस्ट्री के खर्च में हुई बचत नहीं, बल्कि बेटी के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण शुरुआत है। पायल भट्टर का अनुभव यह बताता है कि शासन की किसी नीति का लाभ जब परिवार की जरूरत और भविष्य की योजना से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव कागजों और आंकड़ों से आगे बढ़कर सीधे परिवार के जीवन में दिखाई देता है।
महिला के नाम संपत्ति, परिवार के भविष्य को भी मजबूती
श्रीमती भट्टर ने महिलाओं के नाम संपत्ति को प्रोत्साहित करने के लिए पंजीयन शुल्क में दी जा रही रियायत को परिवारों के लिए आर्थिक राहत देने वाला निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि अपने नाम संपत्ति होने से महिलाओं में आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास की भावना मजबूत होती है। पंजीयन शुल्क में बची राशि को बेटी के नाम सुरक्षित करना उनके लिए इस निर्णय का एक अतिरिक्त लाभ बन गया। उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।
महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत पंजीयन शुल्क की छूट
राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत दी जा रही है। इसके तहत पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इस पहल का उद्देश्य संपत्ति स्वामित्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ उन्हें प्रत्यक्ष आर्थिक राहत उपलब्ध कराना है।
सेवा संकल्प अभियान : नीति से लाभ तक, हितग्राहियों से सीधा संवाद
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप, वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा सेवाओं को अधिक सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर यह जाना जा रहा है कि शासन की सुविधाओं और सुधारों का लाभ नागरिकों तक किस रूप में पहुंच रहा है। श्रीमती पायल भट्टर की कहानी इसी जमीनी बदलाव की एक मिसाल है, जहां पंजीयन शुल्क में मिली राहत ने संपत्ति स्वामित्व के साथ उनकी बेटी के भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा की एक नई शुरुआत की है।
पंजीयन शुल्क में मिली 1.32 लाख रुपये की बचत अब केवल एक आंकड़ा नहीं है। यह एक मां की अपनी बेटी के भविष्य को सुरक्षित करने की सोच, परिवार की आर्थिक योजना और शासन की नागरिक-केंद्रित पहल के प्रत्यक्ष प्रभाव की कहानी बन गई है।