छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ (21093)

छत्तीसगढ़-ओडिशा के आपसी सहयोग, विकास और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा

रायपुर  सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज ओडिशा प्रवास के दौरान भुवनेश्वर में ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी से उनके निवास पर सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री माझी ने श्री साय का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच छत्तीसगढ़ और ओडिशा के आपसी सहयोग, विकास एवं जनकल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा पड़ोसी राज्य होने के साथ ही सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से भी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच भी आत्मीय संबंध हैं। विकास और जनकल्याण से जुड़े विषयों पर दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से नागरिकों को लाभ मिलने के साथ ही पूरे क्षेत्र की प्रगति को भी नई गति मिलेगी।

 

धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक
जनसंपर्क रायपुर

रायपुर, 20 सितम्बर 2026/ महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली 1,000 रुपये की मासिक राशि छत्तीसगढ़ की लाखों महिलाओं के लिए घर-गृहस्थी में मदद से कहीं ज्यादा साबित हो रही है। यह राशि कर्ज, स्वयं सहायता समूहों और आजीविका के अवसरों के साथ मिलकर महिलाओं की आय का स्थायी जरिया बन रही है।

महतारी वंदन योजना राज्य की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है, जिसमें लगभग 68 लाख महिला लाभार्थी शामिल हैं। इस योजना के तहत लाभार्थियों को अब तक 31 किस्तों में 20,075.38 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इस साल राज्य के बजट में इस योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इसी योजना की पूरक महतारी शक्ति ऋण योजना के तहत नवंबर 2024 से अब तक लगभग 41,124 लाभार्थियों ने 102.38 करोड़ रुपये के बिना गारंटी वाले स्वरोजगार ऋण का लाभ उठाया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा, "इस योजना के तहत मिलने वाले लोन से सब्जी बेचने, कारीगरी और दूसरे छोटे-मोटे काम करने वाली महिलाओं को अपना कारोबार बढ़ाने और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलती है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'लखपति दीदी' के विजन को साकार करने में भी मदद मिल रही है।"

इनकी कहानियां बनीं मिसाल

रानू कैवर्त, आंदी गांव, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही

सिलाई, कपड़े और किराने के कारोबार के साथ-साथ बटेर और देसी मुर्गी पालन एवं हैचरी का काम करके सालाना 3 लाख रुपये की आमदनी।

सीता मरावी, गुडुमदेवारी

किराने की दुकान के लिए बैंक से 25 हजार और मुर्गी पालन के लिए स्वयं सहायता समूह से 50 हजार रुपये का लोन लेकर सालाना कमाई 2.5 लाख रुपये तक पहुंचाई।

सुमन लता वाकरे, गुडुमदेवारी

स्वयं सहायता समूह से 15 हजार रुपये लेकर किराने की दुकान शुरू की, बाद में बैंक लोन से विस्तार किया। अब सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई।

केजू बाई सलामे, रामगढ़, मोहला-मानपुर- अंबागढ़ चौकी

महतारी वंदन के हर महीने मिलने वाले 1,000 रुपये का इस्तेमाल किराने के सामान का स्टॉक भरने में करती हैं, जिससे बिक्री बढ़ी और वे लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी

10 मार्च, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्चुअल मौजूदगी में शुरू हुई महतारी वंदन योजना ने लखपति दीदी के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाई है। प्रदेश में स्वयं-सहायता समूहों की 13.85 लाख महिला सदस्य पहले ही लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।

राज्य सरकार द्वारा लखपति दीदी भ्रमण योजना के तहत भी बजटीय प्रावधान किया गया है, ताकि लखपति दीदियां देश भर के व्यापारिक और आर्थिक केंद्रों के साथ-साथ प्रमुख शक्तिपीठों का भी दौरा कर सकें।

डिजिटल क्रांति की ओर छत्तीसगढ़: 'वसुंधरा' परियोजना से सुशासन और पारदर्शी राजस्व सेवाओं का नया दौर

विष्णु प्रसाद वर्मा
सहायक संचालक

रायपुर,20 सितंबर 2026/​छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के नागरिकों को सुगम, त्वरित और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 'सेवा के संकल्प' के साथ एक ऐतिहासिक डिजिटल क्रांति का नेतृत्व कर रही है। राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग द्वारा शुरू की गई 'वसुंधरा' (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना के माध्यम से प्रदेश भर के पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों का संपूर्ण डिजिटलीकरण, संरक्षण तथा प्रमाणीकरण किया जा रहा है, जिससे आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी।

सफलता का आधार: दंतेवाड़ा का क्रांतिकारी मॉडल

​इस महत्वाकांक्षी योजना की सफलता की मजबूत नींव दंतेवाड़ा जिले के क्रांतिकारी मॉडल पर आधारित है। दंतेवाड़ा में पिछले एक वर्ष के दौरान 12 हजार से अधिक नागरिकों ने कियोस्क सेवाओं का लाभ उठाया और 15 हजार से अधिक जाति प्रमाण-पत्र मात्र एक से दो दिनों में जारी किए गए। इसके साथ ही सैकड़ों विवादित मामलों का त्वरित निराकरण संभव हुआ और अभिलेखों में छेड़छाड़ का एक भी मामला सामने नहीं आया।

विस्तृत खाका: 12.89 करोड़ पृष्ठों का डिजिटलीकरण

​दंतेवाड़ा के इसी सफल प्रयोग से प्रेरणा लेते हुए अब पूरे राज्य में लगभग 12 करोड़ 89 लाख पृष्ठों के विभिन्न राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज़ करने का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत 22.72 करोड़ रुपए की लागत से 5.68 करोड़ पृष्ठ खसरा पांचसाला, 11.77 करोड़ रुपए की लागत से 2.94 करोड़ पृष्ठ B-1 रिकॉर्ड, 9.98 करोड़ रुपए की लागत से 2.49 करोड़ पृष्ठ नामांतरण व संशोधन पंजी, 2.13 करोड़ रुपए की लागत से 53.16 लाख पृष्ठ मिसल पंजी और 1.89 करोड़ रुपए की लागत से 47.29 लाख पृष्ठ अधिकार अभिलेख शामिल हैं। इसके अतिरिक्त निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा, नजूल शीट एवं व्यवर्तन पंजी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा।

वित्तीय ढांचा और समयबद्ध कार्यान्वयन

​इस विशाल परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए 65.41 करोड़ रुपए की कुल एकमुश्त पूंजीगत लागत (CAPEX) और 50 लाख रुपए प्रति वर्ष का परिचालन व्यय (OPEX) तय किया गया है, जिसकी वित्तीय व्यवस्था राज्य के अधोसंरचना मद और केंद्र सरकार की DILRMP 3.0 योजना से की जाएगी। योजना के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से अगले तीन महीनों के भीतर वसुंधरा पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा, जिसके बाद कार्यदायी एजेंसियों का चयन कर एक वर्ष के भीतर सभी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और सत्यापन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

तकनीकी नवाचार: AI और ब्लॉकचेन से सुरक्षा

​'वसुंधरा' परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसमें आधुनिकतम तकनीकों का समावेश है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित OCR, डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और स्मार्ट सर्च इंजन की मदद से दशकों पुराने रिकॉर्ड भी पलक झपकते ही खोजे जा सकेंगे। वहीं अभिलेखों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या हेरफेर को रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा, डिजिटल हस्ताक्षर और यूनिक QR व बारकोड प्रणाली लागू की जाएगी।

त्वरित सेवाएं और सुशासन का नया युग

​इस योजना के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद वर्तमान में नकल प्राप्ति में लगने वाला 3 से 7 दिनों का समय घटकर मात्र कुछ मिनटों का रह जाएगा और यह सेवा नागरिकों को 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। नागरिक अब वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, लोक सेवा केंद्रों और कियोस्क के माध्यम से घर बैठे आसानी से प्रमाणित अभिलेख प्राप्त कर सकेंगे। सुगम ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और अधिकारियों के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं से आम जनता को राहत मिलेगी। छत्तीसगढ़ सरकार का यह नवाचार न केवल भूमि विवादों और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाएगा, बल्कि राज्य में डिजिटल गवर्नेंस, पारदर्शिता और सुशासन के एक नए युग का सूत्रपात भी करेगा।

जल संरक्षण से लेकर सड़क, स्कूल, पंचायत भवन, आजीविका, कृषि, पशुपालन और आपदा प्रबंधन के कार्य शामिल

छत्तीसगढ़ के बजट में 4 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को मिलेगा विस्तार

रायपुर, 20 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास को रोजगार, आजीविका और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ने की दिशा में विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की संख्या अब 318 से बढ़ाकर 375 कर दी गई है।

उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने अनुमेय कार्यों की संख्या में वृद्धि पर हर्ष जताते हुए कहा कि वीबी-जीरामजी के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की संख्या 318 से बढ़कर 375 होने से विकास कार्यों को गति प्राप्त होगी और ग्रामीण विकास सुदृढ होगा। छत्तीसगढ़ शासन ने मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 4 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान का लाभ केवल मजदूरी भुगतान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके माध्यम से गांवों में ऐसी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा, जो आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करेंगी।

श्री शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए वीबी-जीरामजी के तहत 3,354.85 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन प्रदान किया गया है। मिशन के अंतर्गत अकुशल श्रमिकों की मजदूरी दर 261 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन की गई है। रोजगार के दिनों में वृद्धि, मजदूरी दर में सुधार और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण का यह समन्वय ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा तथा गांवों के समग्र विकास को नई गति देगा।

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत@2047 की परिकल्पना में गांवों को विकास की केंद्रीय इकाई के रूप में महत्व दिया है। वीबी-जीरामजी के माध्यम से रोजगार, आजीविका, जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अधोसंरचना को एक साथ जोड़ने का प्रयास इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को नई दिशा मिली है।

क्यूआर कोड से मिलेगी अनुमेय कार्यों की जानकारी
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बताया कि वीबी-जीरामजी के अंतर्गत 375 अनुमेय कार्यों को 4 मुख्य श्रेणियों और 30 उप-श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया है। इनमें 68 प्रकार के व्यक्तिगत कार्य, 99 प्रकार के मरम्मत एवं रखरखाव संबंधी कार्य तथा समूह और सामुदायिक उपयोगिता से जुड़े कार्य शामिल हैं। अनुमेय कार्यों की जानकारी प्रत्येक ग्रामीण तक आसानी से पहुंचे, इसके लिए राज्य में क्यूआर कोड भी जारी किया गया है, जिसके माध्यम से ग्रामीण अनुमेय कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

2027 तक हर बालिका के लिए स्कूलों में शौचालय का लक्ष्य
वीबी-जीरामजी की कार्य-सूची में शासकीय विद्यालयों की अधोसंरचना को विशेष महत्व दिया गया है। विद्यालयों में शौचालयों की मरम्मत, अतिरिक्त कक्षों का निर्माण, प्रयोगशालाएं, रसोई शेड, परिसर की दीवार और खेल मैदान जैसे कार्य इसके अंतर्गत किए जा सकेंगे।

इसी दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 26 जनवरी 2027 तक ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। यह पहल बालिकाओं की गरिमा, स्वच्छता और विद्यालयों में बेहतर सुविधाजनक वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

हर गांव में मुक्तिधाम और प्रतीक्षालय की दिशा में आगे बढ़ रहा राज्य
ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सामुदायिक अधोसंरचना के विस्तार के लिए राज्य सरकार द्वारा हर गांव में मुक्तिधाम निर्माण का संकल्प लिया गया है। 6,524 गांवों में प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वीबी-जीरामजी में श्मशान घाट तथा अन्य सामुदायिक अधोसंरचना से संबंधित निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को भी अनुमेय बनाया गया है। इसके अतिरिक्त जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए राज्य के 10 हजार से अधिक बंद अथवा डिफंक्ट बोरवेलों में सैंड फिल्टर एवं रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा।

जल सुरक्षा से लेकर भूजल पुनर्भरण तक
अनुमेय कार्यों की पहली मुख्य श्रेणी में जल संरक्षण और जल सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल हैं। इनमें नहर, बाढ़ नियंत्रण चैनल, चेकडैम, गली प्लग, भूमिगत डाइक, तालाबों का पुनर्जीवन, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज पिट और रिचार्ज शाफ्ट, इंजेक्शन वेल, सिंचाई कुएं, माइक्रो एवं ड्रिप सिंचाई चैनल, वाटरशेड भूमि का पुनरुद्धार, वनीकरण एवं पौधरोपण, मृदा-नमी संरक्षण तथा रूफटॉप वर्षाजल संचयन जैसे कार्य शामिल हैं।
इन कार्यों से गांवों में जल संचयन क्षमता बढ़ाने, भूजल पुनर्भरण, सिंचाई सुविधा के विस्तार और कृषि भूमि की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों स्तरों पर जल संरक्षण से जुड़ी संरचनाओं के निर्माण एवं रखरखाव को भी इसमें स्थान दिया गया है।

सड़क, स्कूल, पंचायत भवन और स्वच्छता सहित मजबूत होगी ग्रामीण अधोसंरचना
कार्यों की दूसरी मुख्य श्रेणी में ग्रामीण अधोसंरचना से संबंधित है। इसमें ग्रामीण सड़कें, पुलिया एवं क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाएं, ग्राम संपर्क सुविधाएं, ग्राम पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, ग्रामीण पुस्तकालय, सार्वजनिक भवन, स्कूल अधोसंरचना, रसोई शेड, अतिरिक्त कक्ष, प्रयोगशालाएं, स्कूल परिसर की दीवारें और खेल मैदान जैसे कार्य शामिल हैं।
इसके साथ श्मशान घाट, कब्रिस्तान, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता परिसर, अपशिष्ट पृथक्करण एवं संग्रहण केंद्र, सौर प्रकाश व्यवस्था, बायोगैस प्लांट, पार्किंग एवं परिवहन शेड सहित अन्य सामुदायिक सुविधाओं के निर्माण और विकास को भी अनुमेय कार्यों में शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत अनुमेय ग्रामीण आवास कार्य तथा जल जीवन मिशन के तहत निर्मित जलापूर्ति परिसंपत्तियों की मरम्मत एवं रखरखाव भी इस श्रेणी में शामिल हैं।

आजीविका के साथ स्थानीय स्तर पर आय के अवसर
कार्यों की तीसरी मुख्य श्रेणी आजीविका संबंधी अधोसंरचना की है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण-सह-कौशल विकास केंद्र, स्वयं सहायता समूहों के लिए वर्कशेड, ग्रामीण हाट एवं साप्ताहिक बाजार, खाद्यान्न एवं कृषि उपज भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़ी संरचनाएं, स्वयं सहायता समूह एवं फेडरेशन स्तर के भवन, वर्मी कम्पोस्ट एवं नाडेप इकाइयां, सिल्विपास्चर, डेयरी एवं दुग्ध संग्रहण केंद्र, पशु आश्रय, मत्स्य पालन अधोसंरचना, नर्सरी एवं पौधरोपण तथा भवन निर्माण सामग्री के उत्पादन से जुड़े कार्य शामिल हैं।

कृषि आधारित प्रसंस्करण को भी इस श्रेणी में स्थान दिया गया है। मिनी फ्लोर मिल, खाद्य प्रसंस्करण, तेल प्रसंस्करण, एकीकृत कृषि प्रसंस्करण, वन उत्पाद प्रसंस्करण, हस्तशिल्प प्रसंस्करण, जैव-अवक्रमणीय उत्पाद प्रसंस्करण तथा बांस शिल्प जैसी गतिविधियों के लिए अधोसंरचना विकसित की जा सकेगी। इससे स्थानीय संसाधनों के स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की संभावनाएं बढ़ेंगी।

‘मेरे सपनों का भारत-चित्र सेवा’ थीम पर विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा, विजेताओं को वितरित किए प्रमाण पत्र

रायपुर,  सितंबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जीपीएम जिले में विभिन्न रचनात्मक एवं जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में जिले के विभिन्न संलों में ‘मेरे सपनों का भारत-चित्र सेवा’ थीम पर चित्रकला, रंगोली एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी रचनात्मक प्रतिभा, विचारों तथा राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया।

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवसा, विकासखंड गौरेला में संकुल स्तरीय चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें संकुल केंद्र नेवसा के अंतर्गत आने वाले विद्यालयों से चयनित छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य श्री पवन पैकरा रहे। इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री शिवनाथ बघेल, ग्राम पंचायत नेवसा की सरपंच श्रीमती समरिया नागेश, पूर्व जनपद अध्यक्ष सुश्री ममता पैकरा, पूर्व सरपंच श्री दीनदयाल नागेश एवं शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष श्रीमती अनीता यादव सहित संकुल के शिक्षकगण उपस्थित रहे।

पूर्व माध्यमिक एवं माध्यमिक स्तर की भाषण प्रतियोगिता में करण ने प्रथम, देवानंद ने द्वितीय तथा कुमारी रीता ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। चित्रकला प्रतियोगिता में कुमारी पार्वती प्रथम, कुमारी नेहा सारीवान द्वितीय तथा वीरेंद्र तृतीय स्थान पर रहे।

हायर सेकेंडरी स्तर की भाषण प्रतियोगिता में कुमारी साक्षी यादव ने प्रथम, कुमारी आयुषी विश्वकर्मा ने द्वितीय तथा कुमारी शिवानी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी स्तर की चित्रकला प्रतियोगिता में विकास कुमार प्रथम, अमित धुर्वे द्वितीय तथा कुमारी पुष्पा परस्ते तृतीय स्थान पर रहीं।

मुख्य अतिथि श्री पवन पैकरा ने सभी विजेता एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने के साथ उनमें संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी एवं राष्ट्र सेवा की भावना को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान कर रहा है। प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

हायर सेकेंडरी स्कूल सरकारी पारा पेंड्रा में न्योता भोज का आयोजन

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत हायर सेकेंडरी स्कूल सरकारी पारा पेंड्रा में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत न्योता भोज का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेंद्र बहादुर सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

न्योता भोज के माध्यम से विद्यार्थियों के साथ सहभागिता और सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ावा दिया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने बच्चों के साथ सहभागिता करते हुए शिक्षा, पोषण एवं संस्कार के महत्व को रेखांकित किया।

जीपीएम में आयोजित इन गतिविधियों के माध्यम से सेवा संकल्प अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता, सामाजिक जागरूकता एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके संकल्प को प्रोत्साहित किया गया।

 

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने बढ़ाया बच्चों का उत्साह

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण : वन मंत्री श्री कश्यप

रायपुर,  सितंबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के तहत नारायणपुर के बालक हायर सेकेंडरी विद्यालय में ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन किया और भाषण प्रतियोगिता में शामिल बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

वन मंत्री श्री कश्यप ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश के विकास की मजबूत नींव बच्चों और युवाओं से तैयार होती है। युवा पीढ़ी पर शिक्षा, संस्कार और अनुशासन के माध्यम से स्वयं को बेहतर बनाने के साथ परिवार, समाज और देश की प्रगति में सक्रिय भागीदारी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में प्रतिभा और ऊर्जा की कमी नहीं है। उन्हें सही दिशा, उचित मार्गदर्शन और प्रतिभा प्रदर्शन के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। ऐसे आयोजन बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों के प्रति उनकी जागरूकता बढ़ाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के मार्गदर्शन में आगे बढ़ने, स्वच्छता अपनाने, नशे से दूर रहने और समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने का आह्वान किया।

चित्रों में बच्चों ने उकेरा अपने सपनों का भारत
विद्यालय परिसर में आयोजित चित्रकला प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने विकसित भारत, स्वच्छ भारत, नशामुक्त समाज, देशभक्ति और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों को रंगों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। श्री कश्यप ने विद्यार्थियों से उनके चित्रों के विषय और उनके पीछे की कल्पना के बारे में चर्चा की तथा उनकी रचनात्मकता की सराहना की।
भाषण प्रतियोगिता में छात्र डेविड नेताम ने ‘विकसित भारत’, विद्या सोनवानी ने ‘नशा मुक्ति’ और सूरज पोटाई ने ‘स्वच्छ भारत-सुंदर भारत’ विषय पर अपने विचार रखे। विद्यार्थियों ने नशे के दुष्प्रभाव, स्वच्छता की आवश्यकता और देश के विकास में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।

वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवा पीढ़ी को अभी से जागरूक और जिम्मेदार बनना होगा। शिक्षा, अनुशासन, मेहनत, स्वच्छता, नशामुक्ति और आपसी एकता जैसे मूल्यों को अपनाकर युवा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नारायण मरकाम, नगर पालिका अध्यक्ष श्री इंद्र प्रसाद बघेल, चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्री मनोज जैन, कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री चित्रकांत चार्ली ठाकुर सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और शिक्षक उपस्थित थे।

अहिवारा, मुंगेली और कांकेर में 7.29 करोड़ रुपए की लागत से विकसित होंगे आधुनिक उद्यान

तीनों उद्यानों में लगाए जाएंगे 8,732 पौधे, बच्चों के लिए प्ले-एरिया और नागरिकों के लिए ओपन जिम सहित विकसित होंगी अनेक सुविधाएं

एक वर्ष में पूर्ण होंगे निर्माण कार्य, पांच वर्षों तक चयनित एजेंसी करेगी संचालन एवं संधारण

मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन और उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के निर्देशन में मिशन अमृत 2.0 के तहत मिली प्रशासकीय स्वीकृति

रायपुर  सितम्बर 2026/ छत्तीसगढ़ के शहरों को स्वच्छ, सुंदर, हरित और नागरिक सुविधाओं से परिपूर्ण बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत अहिवारा, मुंगेली और कांकेर नगर पालिका क्षेत्रों में आधुनिक उद्यान विकसित किए जाएंगे। तीनों उद्यानों के निर्माण के लिए कुल 7 करोड़ 29 लाख 24 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में नागरिकों को बेहतर और सुविधायुक्त जीवन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। शहरों में ऐसे सार्वजनिक स्थलों का विकास किया जा रहा है, जहां हरियाली और स्वच्छ वातावरण के साथ बच्चों को खेलने, युवाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों को व्यायाम, पैदल भ्रमण और विश्राम की बेहतर सुविधाएं मिल सकें। नए उद्यानों का विकास इसी सोच को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन और उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के निर्देशन में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत इन उद्यानों का निर्माण एक वर्ष के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। अहिवारा, मुंगेली और कांकेर में विकसित होने वाले इन उद्यानों में कुल 8,732 पौधे लगाए जाएंगे। व्यापक पौधरोपण के साथ ही नागरिकों की अलग-अलग आयु वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

उद्यानों में बच्चों के लिए प्ले-एरिया एवं खेल उपकरण, युवाओं और अन्य नागरिकों के लिए ओपन जिम, पैदल भ्रमण के लिए पाथवे, बैठने एवं विश्राम के लिए स्थान, प्रकाश व्यवस्था, टॉयलेट ब्लॉक और गज़ेबो जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन को ध्यान में रखते हुए वर्षा जल संचयन की व्यवस्था भी की जाएगी।

निर्माण के बाद उद्यानों के बेहतर रख-रखाव पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद पांच वर्षों तक इन परिसरों का संचालन एवं संधारण चयनित निर्माण एजेंसी द्वारा किया जाएगा। इससे उद्यानों में विकसित हरियाली, अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं का नियमित रख-रखाव सुनिश्चित होगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे शहरों में अधोसंरचना के विस्तार के साथ पर्यावरण और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता का ध्यान रखना भी आवश्यक है। मिशन अमृत 2.0 के माध्यम से विकसित किए जा रहे ये उद्यान केवल हरित क्षेत्र नहीं होंगे, बल्कि बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित होंगे।

उन्होंने कहा कि व्यापक पौधरोपण से इन परिसरों का हरित स्वरूप समृद्ध होगा। साथ ही ओपन जिम, पाथवे, खेल एवं विश्राम की सुविधाएं लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए बेहतर वातावरण प्रदान करेंगी। वर्षा जल संचयन जैसी व्यवस्थाएं पर्यावरण संरक्षण के साथ जल संवर्धन के प्रयासों को भी मजबूती देंगी।

हरित और सुविधायुक्त शहरों के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही सरकार : उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार नगरीय क्षेत्रों को स्वच्छ, सुंदर, हरित और सुविधायुक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत इन परियोजनाओं से शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ने के साथ नागरिकों को मनोरंजन, व्यायाम और विश्राम के लिए बेहतर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध होंगे।

 

कच्चे मकान की परेशानियों से मिली मुक्ति, प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला सुरक्षित और सम्मानजनक आशियाना

रायपुर,  सितंबर 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रत्येक परिवार को सुरक्षित, मजबूत और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के संकल्प को प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से देशभर में नई गति मिल रही है। इस योजना ने जरूरतमंद परिवारों के अपने पक्के घर के सपने को साकार करने का रास्ता आसान किया है। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत पंडरीपानी निवासी श्री अमृतलाल का परिवार भी इस बदलाव का उदाहरण है। लंबे समय तक कच्चे मिट्टी के मकान में रहने के बाद अब उनका परिवार अपने पक्के और सुरक्षित आवास में सुखमय जीवन व्यतीत कर रहा है।

कच्चे मकान में बारिश के दिनों में होती थी परेशानी

श्री अमृतलाल बताते हैं कि पक्का मकान बनने से पहले उनका परिवार कच्चे मिट्टी के मकान में रहता था। बरसात के दिनों में घर की छत से पानी टपकने लगता था और दीवारों में सीलन आ जाती थी। बारिश के साथ मौसम की अन्य परिस्थितियों में भी परिवार को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कच्चे मकान में रहना न केवल असुविधाजनक था, बल्कि परिवार की सुरक्षा और बच्चों की पढ़ाई के लिए भी बेहतर वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता था।

प्रधानमंत्री आवास योजना ने पूरा किया पक्के घर का सपना

ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत श्री अमृतलाल को पक्का आवास स्वीकृत हुआ। योजना से मिली सहायता ने उनके वर्षों पुराने पक्के घर के सपने को साकार कर दिया। निर्माण पूरा होने के बाद अब उनका परिवार मजबूत और सुरक्षित आवास में रह रहा है। नया घर उनके लिए केवल ईंट और दीवारों से बना भवन नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य और सम्मानजनक जीवन का आधार बन गया है।

नए घर ने बदली परिवार की दिनचर्या

पक्का आवास मिलने के बाद श्री अमृतलाल के परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अब बारिश के दौरान छत से पानी टपकने और दीवारों में सीलन जैसी परेशानियों से राहत मिल गई है। परिवार के सभी सदस्य स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर वातावरण में रह रहे हैं। आवास की सुविधा ने परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी को अधिक सहज और व्यवस्थित बनाया है।

बच्चों को मिला पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल

नए पक्के मकान का सकारात्मक प्रभाव परिवार के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा है। अब उन्हें पढ़ने के लिए सुरक्षित और शांत वातावरण मिल रहा है। श्री अमृतलाल बताते हैं कि पक्के घर ने परिवार की सुविधाओं को बढ़ाने के साथ बच्चों के भविष्य के लिए भी बेहतर माहौल उपलब्ध कराया है। घर में खुशहाली का वातावरण है और परिवार अपने भविष्य को लेकर अधिक आश्वस्त महसूस करता है।

पक्का घर बना सम्मान और सुरक्षा का आधार

प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से मिला पक्का मकान श्री अमृतलाल के परिवार के लिए सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का प्रतीक बन गया है। कच्चे मकान की कठिन परिस्थितियों से निकलकर पक्के आवास में पहुंचना उनके जीवन में आए महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। अब परिवार को मौसम की चुनौतियों के बीच अपने घर की सुरक्षा को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहती।

श्री अमृतलाल बोले- प्रधानमंत्री आवास योजना ने दी नई पहचान

अपने अनुभव साझा करते हुए श्री अमृतलाल ने कहा कि पक्का मकान उनके परिवार के लिए बहुत बड़ी खुशी और राहत लेकर आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना से उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योजना के माध्यम से उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है।

हर परिवार के पक्के घर के संकल्प को मिल रही मजबूती

श्री अमृतलाल का परिवार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन का उदाहरण है, जिसमें हर जरूरतमंद परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे परिवारों को पक्की छत मिल रही है, जिनके लिए कभी मजबूत और सुरक्षित घर का सपना दूर की बात थी।

आज श्री अमृतलाल का परिवार अपने पक्के घर में निश्चिंत होकर जीवन व्यतीत कर रहा है। उनके लिए यह आवास सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, बच्चों के बेहतर भविष्य और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत है।

घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाकर श्री शुभम राठौर का परिवार बना ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर, बिजली खर्च में मिली राहत

रायपुर, सिंतंबर 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने की दिशा में ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ देशभर में आम परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ रही है। योजना के माध्यम से घरों की छतों को बिजली उत्पादन का माध्यम बनाकर परिवार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ बिजली खर्च में भी राहत पा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में भी इस योजना का लाभ नागरिकों तक पहुंच रहा है।

गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत भदौरा निवासी श्री शुभम राठौर ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने के विजन से प्रेरित होकर अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कराया है। सौर ऊर्जा को अपनाने से उनके परिवार की घरेलू बिजली जरूरतें अब सौर ऊर्जा से पूरी हो रही हैं और बिजली खर्च में भी राहत मिली है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और देश के परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ की शुरुआत की है। योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सोलर प्लांट स्थापित कर परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना और बिजली के खर्च को कम करने में सहायता प्रदान करना है।

श्री शुभम राठौर ने योजना का लाभ लेकर अपने घर की छत पर सोलर प्लांट स्थापित कर इस संकल्प को अपने जीवन में अपनाया है। उनके परिवार के लिए अब घर की छत ही बिजली उत्पादन का माध्यम बन गई है।

केंद्र और राज्य की सब्सिडी से आसान हुआ सौर ऊर्जा का सफर

श्री राठौर को पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये की सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई। वहीं राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की सब्सिडी का लाभ मिला। केंद्र और राज्य सरकार से प्राप्त सहायता ने सोलर प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया को उनके लिए आसान बनाया।

बिजली बिल में राहत, परिवार को मिली आर्थिक सुविधा

सोलर प्लांट लगाने से पहले श्री राठौर को हर महीने लगभग 400 से 500 रुपये तक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद बिजली खर्च में उन्हें उल्लेखनीय राहत मिली है। श्री राठौर बताते हैं कि अब बिजली बिल को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहती। घर की जरूरत की बिजली उनकी अपनी छत पर लगे सोलर प्लांट से तैयार हो रही है।

अतिरिक्त बिजली का भी हो रहा उपयोग

सोलर प्लांट से आवश्यकता से अधिक बिजली बनने पर अतिरिक्त विद्युत ग्रिड में पहुंचती है और उसका समायोजन बिजली बिल में किया जाता है। इससे सौर ऊर्जा से होने वाले लाभ का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है। श्री राठौर का परिवार अपनी जरूरत की बिजली सौर ऊर्जा से पूरी करने के साथ ऊर्जा संरक्षण की दिशा में भी योगदान दे रहा है।

स्वच्छ ऊर्जा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश

श्री शुभम राठौर का परिवार सौर ऊर्जा को अपनाकर स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। सौर ऊर्जा के उपयोग से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। इस तरह योजना का लाभ परिवार की आर्थिक बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ रहा है।

श्री शुभम राठौर बोले- अपनी छत से बन रही हमारी बिजली

श्री शुभम राठौर बताते हैं कि सोलर प्लांट लगने के बाद उनके परिवार को बिजली खर्च में राहत मिली है। अब घर की जरूरत की बिजली उनकी अपनी छत पर तैयार हो रही है। उन्होंने कहा कि योजना से मिली सब्सिडी के कारण सोलर प्लांट लगाना आसान हुआ और अब स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करते हुए परिवार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

भदौरा से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मिल रही मजबूती

ग्राम भदौरा के श्री शुभम राठौर की कहानी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वच्छ ऊर्जा के विजन को स्थानीय स्तर पर साकार होते दिखाती है। एक परिवार द्वारा अपनी छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना न केवल बिजली की जरूरत पूरी करने का माध्यम बना है, बल्कि ऊर्जा बचत, आर्थिक राहत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सार्थक कदम है।

‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ के माध्यम से घर-घर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर ऐसे परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। श्री राठौर का परिवार इसी बदलाव का उदाहरण है, जहां सूरज की रोशनी से बिजली भी बन रही है और आत्मनिर्भर भविष्य की राह भी रोशन हो रही है।

दूर के हैंडपंप और लंबी कतारों से मिली मुक्ति, घर-आंगन में पहुंचा पानी तो ग्रामीणों के जीवन में आया सुकून

रायपुर  सितंबर 2026/ जल जीवन मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव ला रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड अंतर्गत ग्राम बारीउमराव में भी इस योजना का सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। योजना के तहत गांव के शत-प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन पहुंचने से अब ग्रामीणों को घर बैठे शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है। नल खोलते ही घर के आंगन तक पानी पहुंचने से ग्रामीण परिवारों के दैनिक जीवन में सुविधा, समय की बचत और राहत का नया अध्याय जुड़ा है।

पहले पानी के लिए करना पड़ता था लंबा इंतजार

जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन से पहले ग्राम बारीउमराव के ग्रामीणों को पेयजल और घरेलू जरूरतों के लिए दूर स्थित हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ता था। विशेषकर गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ने के साथ हैंडपंपों पर लंबी कतारें लगती थीं। कई बार हैंडपंप खराब होने की स्थिति में ग्रामीणों को दूसरे स्थानों से पानी लाना पड़ता था। पानी भरने और उसे घर तक पहुंचाने में ग्रामीणों का काफी समय और श्रम खर्च होता था। महिलाओं और बच्चों को भी पानी की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त समय देना पड़ता था।

घर तक नल पहुंचा तो आसान हुई जिंदगी

जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन मिलने से अब ग्रामीणों को पानी के लिए दूर जाने और कतार में खड़े होने की परेशानी से राहत मिली है। घर में ही नल से पानी उपलब्ध होने के कारण रोजमर्रा के काम पहले की अपेक्षा आसानी से पूरे हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल की सुविधा घर तक पहुंचने से उनके समय और श्रम की बचत हो रही है तथा वे बचा हुआ समय खेती-किसानी, रोजगार और अन्य घरेलू कार्यों में लगा पा रहे हैं।

श्री करम दास बोले- अब पानी के लिए न दूर जाना पड़ता है, न लाइन में लगना

ग्राम बारीउमराव के निवासी श्री करम दास बताते हैं कि पहले पीने और रोजमर्रा के कामों के लिए पानी लेने घर से दूर स्थित हैंडपंप पर जाना पड़ता था। गर्मी के दिनों में हैंडपंप पर लंबी कतार लगने के कारण काफी समय इंतजार करना पड़ता था। कई बार हैंडपंप खराब होने पर दूर-दराज से पानी लाना पड़ता था, जिससे काफी परेशानी होती थी।

उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत घर में नल कनेक्शन लगने के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। अब घर पर ही नल से नियमित पानी मिल रहा है। पानी के लिए न तो दूर जाना पड़ता है और न ही लंबी कतार में लगना पड़ता है। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है और परिवार के सदस्य अन्य जरूरी कार्यों पर अधिक ध्यान दे पा रहे हैं।

स्वच्छ पेयजल से बेहतर हो रहा ग्रामीण जीवन

घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने से ग्रामीणों को पेयजल के लिए स्थानीय जलस्रोतों और दूर स्थित हैंडपंपों पर निर्भरता कम हुई है। नियमित रूप से घर तक पानी उपलब्ध होने से परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त सुविधा मिल रही है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा मिल रहा है।

जल जीवन मिशन ने गांव में पहुंचाई सुविधा की नई रोशनी

ग्राम बारीउमराव में जल जीवन मिशन के तहत शत-प्रतिशत घरों तक नल कनेक्शन पहुंचना ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। घर की चौखट तक पानी पहुंचने से ग्रामीणों के जीवन में सुविधा और सुकून बढ़ा है। कभी पानी के लिए लंबी दूरी तय करने वाले परिवार अब अपने घर में ही नल खोलकर पानी प्राप्त कर रहे हैं। यह बदलाव ग्रामीणों के लिए केवल पेयजल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके समय, श्रम और जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रहा है।

Page 7 of 1507

Ads

R.O.NO. 1399/63 Advertisement Carousel

MP info RSS Feed

फेसबुक