ईश्वर दुबे
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रायपुर, 17 सितम्बर 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मासिक सम्मान कार्यक्रम में ई-ऑफिस के माध्यम से नस्तियों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण तथा कार्यालयीन समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने वाले मंत्रालयीन अधिकारी एवं कर्मचारियों को अगस्त माह के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
मुख्य सचिव ने कहा कि मंत्रालय में 10 बजे से पूर्व आने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। मुख्य सचिव ने कहा कि अटेंडेंस एवं ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने पर प्रशंसा पत्र पाने में महिला अधिकारी अग्रणी है। मुख्य सचिव ने प्रशंसा पत्र प्राप्त करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। मुख्य सचिव ने बताया कि आगामी मूल्यांकन में 1 अप्रैल 2026 से 30 सितम्बर 2026 तक की अवधि का संचयी (क्यूमुलेटिव) आकलन किया जाएगा। इसके लिए ई-ऑफिस एवं कार्यालयीन उपस्थिति के आधार पर मंत्रालय में स्कोरबोर्ड तैयार किया जाएगा। जिससे सभी अपने प्रदर्शन का आकलन कर बेहतर कार्य के लिए प्रेरित हो सकें। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, दक्षता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने में ई-ऑफिस की महत्वपूर्ण भूमिका है।
विभागीय श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन
ई-ऑफिस पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विभागों में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग प्रथम, आदिम जाति विकास विभाग द्वितीय तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग तृतीय स्थान पर रहा। मुख्य सचिव ने संयुक्त सचिव, उप सचिव, अवर सचिव, अनुभाग अधिकारी, सहायक अनुभाग अधिकारी, वरिष्ठ सचिवालय सहायक, कनिष्ठ सचिवालय सहायक तथा अन्य कर्मचारियों को भी ई-ऑफिस पर उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान किए।
संयुक्त सचिव श्रेणी में आदिम जाति विकास विभाग के श्री भूपेन्द्र कुमार राजपूत प्रथम, अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के श्री अनुपम त्रिवेदी द्वितीय तथा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के श्री गजपाल सिंह सिकरवार तृतीय स्थान पर रहे।
उप सचिव श्रेणी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के श्री दूरदेशी राम सोन्टापर प्रथम, सामान्य प्रशासन विभाग-1 के श्री किशोर कुमार भूआर्य द्वितीय तथा वाणिज्यिक कर (आबकारी एवं पंजीयन) विभाग के श्री शिव कुमार सिंह तृतीय स्थान पर रहे।
अवर सचिव श्रेणी में सामान्य प्रशासन विभाग-1 के श्री कैलाश कुमार नेताम प्रथम, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के श्री अरूण कुमार मिश्रा द्वितीय पर तथा वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के श्री मगन लाल पवार तृतीय स्थान पर रहे।
अनुभाग अधिकारी श्रेणी में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के श्री मनीराम रात्रे प्रथम स्थान पर, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के श्री वीरेन्द्र कुमार द्वितीय स्थान पर तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के श्री लिलाम्बर ओहोदर तृतीय स्थान पर रहे।
सहायक अनुभाग अधिकारी श्रेणी में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मोहम्मद शाहिर अंसारी प्रथम स्थान पर, श्रम विभाग के श्री गोपाल प्रसाद चंद्रा द्वितीय स्थान पर तथा सामान्य प्रशासन विभाग-4 के श्री जलेश राम तृतीय स्थान पर रहे।
वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के श्री मुकेश राम प्रधान प्रथम स्थान पर, आदिम जाति विकास विभाग की सुश्री अंजू दत्ता द्वितीय स्थान पर तथा आदिम जाति विकास विभाग की सुश्री प्रमिला यादव तृतीय स्थान पर रहीं।
कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में सामान्य प्रशासन विभाग-1 के श्री रामकुमार सिंह प्रथम स्थान पर, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के श्री प्रभु सिंह राठिया द्वितीय स्थान पर तथा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के श्री संदीप कुमार तारम तृतीय स्थान पर रहे।
टेक्निकल सेक्शन में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के श्री जगन्नाथ साहू प्रथम स्थान पर, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की श्रीमती माया देवांगन द्वितीय स्थान पर तथा आदिम जाति विकास विभाग के श्री स्मीत कुमार गुप्ता तृतीय स्थान पर रहे।
श्रमिकों का सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और उनके परिवारों का उज्ज्वल भविष्य हमारी सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री श्री साय
विश्वकर्मा जयंती पर राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने श्रमिक हित में की तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं
शहरों में बनेंगे सर्वसुविधायुक्त आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र, पंजीकृत श्रमिकों के लिए शुरू होगी ई-बाइक सहायता योजना
असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदी के लिए अब 50 हजार के स्थान पर एक लाख रुपए की मिलेगी सहायता
1.43 लाख से अधिक श्रमिकों के खातों में 51.32 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि अंतरित
100 श्रमिक दीदियों को मिली ई-रिक्शा की चाबी, मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
श्रमिक परिवार की प्रतिभावान बेटी मनिंदर कौर की इंजीनियरिंग की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगी सरकार
श्रमिक बहनों के साथ मुख्यमंत्री ने किया दोपहर का भोजन, आत्मीय संवाद कर जाना परिवार का हाल-चाल
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर हजारों श्रमिकों के साथ मुख्यमंत्री ने प्रज्ज्वलित किया ‘आशीर्वाद का दीया’
रायपुर, 17 सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के श्रमवीर अपने परिश्रम, पुरुषार्थ और पसीने से समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की नई इबारत लिख रहे हैं। गांवों के खेत-खलिहानों से लेकर शहरों की ऊंची इमारतों तक, सड़कों और पुलों से लेकर सिंचाई परियोजनाओं, उद्योगों और अधोसंरचना के निर्माण तक प्रदेश की प्रगति की हर तस्वीर में हमारे श्रमिक भाई-बहनों की मेहनत समाहित है। छत्तीसगढ़ ने अपने गठन के 25 वर्षों में विकास के जो नए प्रतिमान स्थापित किए हैं, उनके पीछे हमारे मेहनतकश हाथों का बड़ा योगदान है। यही हाथ आने वाले वर्षों में विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी साकार करेंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेशभर से आए हजारों श्रमिक भाई-बहनों को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और भगवान विश्वकर्मा से छत्तीसगढ़ की सुख, शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा निर्माण और सृजन के आराध्य हैं। वे हमें श्रम के सम्मान और अपने हुनर पर गर्व करने की प्रेरणा देते हैं। सही मायनों में हमारे श्रमिक भाई-बहन ही विकसित छत्तीसगढ़ के विश्वकर्मा हैं। राज्य सरकार श्रमिकों के परिश्रम का सम्मान करने के साथ उनके जीवन में सुरक्षा, सुविधा और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की सोच स्पष्ट है कि विकास का लाभ उस श्रमिक तक भी पहुंचे, जिसके श्रम से विकास की नींव तैयार होती है। श्रमिक को उसके परिश्रम का पूरा सम्मान मिले, उसे सामाजिक सुरक्षा का भरोसा मिले, परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बने और उसके बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें - इसी उद्देश्य के साथ सरकार श्रमिक कल्याण की योजनाओं को लगातार विस्तार दे रही है।
श्रमिक हित में मुख्यमंत्री की तीन बड़ी घोषणाएं
मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में श्रमिक भाई-बहनों की सुविधा, आवागमन और स्वरोजगार को ध्यान में रखते हुए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
मुख्यमंत्री ने शहरों में रोजगार की तलाश में विभिन्न स्थानों पर एकत्र होने वाले श्रमिकों के लिए सर्वसुविधायुक्त आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। इन केंद्रों में श्रमिकों के बैठने की समुचित व्यवस्था के साथ स्वच्छ पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे काम की तलाश में शहर आने वाले श्रमिकों को सम्मानजनक और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने पंजीकृत श्रमिकों के आवागमन को सुगम बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से ई-बाइक सहायता योजना प्रारंभ करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि काम के लिए प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने वाले श्रमिकों के लिए आवागमन की सुविधा सीधे तौर पर उनकी आजीविका और जीवन की सहजता से जुड़ी है।
नागरिक सेवाएं मिलेंगी और अधिक सरल और पारदर्शी रूप में
रायपुर, 17 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में नागरिक सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए वसुंधरा परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर कार्य शुरू हो गया है। इसके अंतर्गत जिला एवं तहसील स्तर के राजस्व रिकॉर्ड रूम का आधुनिकीकरण और राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। इस संबंध में आज मंत्रालय महानदी भवन में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
मुख्य सचिव श्री विकासशील ने बैठक के दौरान नामांतरण और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में स्पष्टता व एकरूपता लाने तथा अभिलेखों के व्यवस्थित संधारण पर विशेष जोर दिया। इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में कुछ चयनित जिलों के राजस्व अभिलेखों का पूर्ण डिजिटलीकरण होगा, जिसके बाद इसे प्रदेश के सभी 33 जिलों में विस्तारित किया जाएगा।
सुरक्षित किए जाने वाले प्रमुख दस्तावेज
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने बताया कि डिजिटलीकरण के तहत अधिकार अभिलेख पंजी, बंदोबस्त एवं चकबंदी मिसल, निस्तार पत्रक, खसरा, राजस्व न्यायालय के आदेश, मूल ग्राम नक्शे, संशोधन पंजी, वर्ष 2020 से पूर्व के खसरा पंचशाला अभिलेख और किश्तबंदी खतौनी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की स्कैनिंग व डाटा एंट्री कर उन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा।
सेवा सेतु पोर्टल से एकीकरण
परियोजना के तहत तैयार किए जाने वाले डिजिटल रिकॉर्ड भंडार को सेवा सेतु से जोड़ा जाएगा। इससे नागरिकों को ऑनलाइन आवेदन करने, शुल्क भुगतान करने, प्रमाणित डिजिटल प्रतियां प्राप्त करने और आवेदन की स्थिति ट्रैक करने जैसी सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।
आधुनिक तकनीक (AI और OCR) का उपयोग
रिकॉर्ड रूम के भौतिक अभिलेखों को बारकोड आधारित वर्गीकरण और डिजिटल लोकेशन के जरिए व्यवस्थित किया जाएगा। इसके अलावा, पुरानी और हस्तलिखित दस्तावेजों को आसानी से खोजने के लिए ओसीआर (OCR) तकनीक और एआई (AI) आधारित खोज सुविधा विकसित करने की योजना है, जिससे दस्तावेजों के संरक्षण के साथ-साथ नागरिकों का काम बेहद आसान हो जाएगा।
रायपुर, 17 सितम्बर 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के क्रियान्वयन के संबंध में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गहन चर्चा की गई।
बैठक में जानकारी दी गई कि इस एक्ट के शेड्यूल-1 के अंतर्गत 43 सेवाएं, 9 शासकीय अधिनियम और 8 प्रशासनिक विभाग शामिल किए गए हैं। इसके क्रियान्वयन के लिए 27 अगस्त 2026 से 90 दिनों की विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। एक्ट के तहत तीन-स्तरीय निगरानी और समीक्षा प्रणाली निर्धारित की गई है। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एपेक्स काउंसिल, कार्यकारी स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति, जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला सशक्त समिति बनाई गई है।
मुख्य सचिव ने एक्ट का प्रथम प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार कर संबंधित विभागों से जल्द सुझाव प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आवश्यक संशोधन प्रस्ताव तैयार रखकर प्राप्त सुझावों के आधार पर इसे अंतिम रूप देने को कहा गया है।
डीम्ड अप्रूवल और पेनाल्टी
बैठक में डीम्ड अप्रूवल प्रमाण-पत्र के प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रमाण-पत्र जारी न होने के मामलों की समीक्षा करने, आवश्यक कार्रवाई करने और विलंब की स्थिति में नियमानुसार पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने एक्ट का चरणबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने, नोडल विभागों का निर्धारण करने और आवश्यक मानक कार्यप्रणाली (SOP) अधिसूचित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा विभागवार सेवाओं की नियमित समीक्षा और त्रैमासिक (क्वार्टरली) मॉनिटरिंग पर भी जोर दिया गया है।
बैठक में विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनीष कुमार ठाकुर, माननीय मुख्यमंत्री के सचिव एवं वाणिज्यिक कर तथा लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे
समूह से आर्थिक सहयोग लेकर शुरू किया किराना और मुर्गी व्यवसाय, आय में हुआ उल्लेखनीय इजाफा
रायपुर, 17 सितंबर 2026। जीपीएम जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की श्रीमती सीता मरावी की सफलता ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है। महिला स्वसहायता समूह से जुड़कर उन्होंने आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत की और आज किराना दुकान तथा मुर्गी व्यवसाय के माध्यम से उनकी वार्षिक आय लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
श्रीमती सीता मरावी वंदना महिला स्वसहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और स्वरोजगार शुरू करने का अवसर मिला। उन्होंने बैंक लोन तथा समूह के माध्यम से प्राप्त सीआईएफ एवं आरएफ की राशि से 25 हजार रुपये की सहायता लेकर गांव में किराना दुकान शुरू की। इसके बाद समूह के संकुल से 50 हजार रुपये की राशि प्राप्त कर मुर्गी व्यवसाय भी प्रारंभ किया।
दोनों व्यवसायों को उन्होंने मेहनत, लगन और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ाया। अलग-अलग आजीविका गतिविधियों से होने वाली आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया। आज श्रीमती सीता मरावी अपने गांव में ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना रही हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ संकल्प से जुड़ी आत्मनिर्भरता की कहानी
श्रीमती सीता मरावी की सफलता ग्रामीण महिलाओं को स्वसहायता समूहों से जोड़कर उनकी आजीविका और उद्यमिता को मजबूत करने की केन्द्र सरकार की पहल से भी जुड़ती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन केन्द्र प्रायोजित योजना है, जिसे केन्द्र और राज्य सरकारों की साझेदारी से लागू किया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वसहायता समूहों से जोड़कर वित्तीय समावेशन, आजीविका और छोटे उद्यमों को बढ़ावा दिया जाता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महिला स्वसहायता समूहों की सदस्यों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘लखपति दीदी’ के संकल्प को प्रमुखता दी गई है। इस पहल का उद्देश्य स्वसहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को टिकाऊ तरीके से कम से कम एक लाख रुपये की वार्षिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। इसके लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बैंक ऋण, उद्यमिता और आजीविका गतिविधियों के विस्तार जैसी व्यवस्थाओं को जोड़ा गया है। केन्द्र सरकार के अनुसार जुलाई 2026 तक देशभर में 10.08 करोड़ ग्रामीण परिवार लगभग 92 लाख स्वसहायता समूहों से जुड़े थे और 3.46 करोड़ से अधिक स्वसहायता समूह सदस्यों को ‘लखपति दीदी’ के रूप में सक्षम बनाया जा चुका था।
छत्तीसगढ़ में लाखों महिलाओं को स्वसहायता समूहों से मिला मंच
केन्द्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 2.79 लाख स्वसहायता समूह सक्रिय हैं और लगभग 29.78 लाख महिलाएं इस कार्यक्रम से लाभान्वित हो रही हैं।
स्वसहायता समूहों को मिलने वाले रिवॉल्विंग फंड (आरएफ), कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआईएफ) तथा बैंक लिंकेज जैसी व्यवस्थाएं महिलाओं को अपनी आजीविका गतिविधियों को शुरू करने और आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय आधार उपलब्ध कराने में मदद करती हैं। केन्द्र सरकार के अनुसार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आरएफ और सीआईएफ के माध्यम से स्वसहायता समूहों को पूंजी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
सीता मरावी की कहानी में भी समूह से मिली वित्तीय सहायता का उपयोग किराना दुकान और मुर्गी व्यवसाय शुरू करने में किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्वसहायता समूह केवल महिलाओं को संगठित करने का माध्यम नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का आधार भी बन रहे हैं।
किराना दुकान से मुर्गी व्यवसाय तक, बढ़े आय के अवसर
सीता मरावी ने एक ही व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आय के अलग-अलग स्रोत विकसित किए। किराना दुकान ने उन्हें गांव में ही नियमित व्यवसाय का अवसर दिया, जबकि मुर्गी पालन ने उनकी आय में एक और स्रोत जोड़ा। दोनों गतिविधियों को उन्होंने निरंतर मेहनत और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ाया।
बिहान से जुड़कर हुनर को बनाया कारोबार का आधार, सिलाई से किराना और मुर्गी पालन से हैचरी तक कई गतिविधियों से सालाना 2 से 3 लाख रुपये की आय
रायपुर, 17 सितंबर 2026। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत अंडी निवासी श्रीमती रानू कैवर्त की सफलता ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़कर श्रीमती रानू कैवर्त ने अपने हुनर, मेहनत और उपलब्ध संसाधनों को आजीविका के विभिन्न साधनों से जोड़ा और आज उनकी वार्षिक आय लगभग 2 से 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
श्रीमती रानू कैवर्त शिव गुरु महिला स्व-सहायता समूह की सचिव हैं। बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें समूह के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। उन्होंने समूह से प्राप्त सहयोग और मार्गदर्शन का उपयोग करते हुए एक ही व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय कई आजीविका गतिविधियों को अपनाया। सिलाई कार्य, कपड़ों की दुकान, किराना स्टोर, बटेर पालन, देशी मुर्गी पालन और हैचरी जैसे कार्यों को उन्होंने अपनी आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा बनाया।
इन प्रयासों ने न केवल उनकी आय के स्रोतों में विस्तार किया, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया। आज श्रीमती रानू कैवर्त अपनी मेहनत और बहुआयामी आजीविका गतिविधियों के माध्यम से सालाना लगभग 2 से 3 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं और लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ संकल्प से महिलाओं को मिला नया अवसर
श्रीमती रानू कैवर्त की सफलता को ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की उस व्यापक पहल से जोड़कर देखा जा सकता है, जिसमें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘लखपति दीदी’ के संकल्प को प्रमुखता दी है। केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के तहत स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आजीविका, वित्तीय समावेशन, कौशल, उद्यमिता और संस्थागत ऋण तक पहुंच के लिए सहायता दी जाती है। लखपति दीदी पहल इसी मिशन का एक परिणाम है, जिसका उद्देश्य स्व-सहायता समूह की महिला सदस्यों को टिकाऊ आधार पर कम से कम एक लाख रुपये वार्षिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। केन्द्र सरकार के अनुसार जुलाई 2026 तक देशभर में 10.08 करोड़ ग्रामीण परिवारों को लगभग 92 लाख स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका था और 3.46 करोड़ से अधिक महिलाएं लखपति दीदी के रूप में सक्षम हुई थीं।
छत्तीसगढ़ में भी लाखों महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं
केन्द्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 2.79 लाख स्व-सहायता समूह सक्रिय थे और लगभग 29.78 लाख महिलाएं इस कार्यक्रम से लाभान्वित हो रही थीं।
यह व्यवस्था महिलाओं को केवल समूह से जोड़ने तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूहों को वित्तीय समावेशन, टिकाऊ आजीविका और सामुदायिक संस्थाओं के सशक्तिकरण से जोड़ा जाता है। केन्द्र सरकार की ओर से समूहों को रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड जैसी सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान भी है, जिससे महिलाएं अपनी आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए पूंजी और संस्थागत सहयोग प्राप्त कर सकें।
एक नहीं, कई आजीविका गतिविधियों से बढ़ी आय
रानू कैवर्त की कहानी की खासियत यह है कि उन्होंने अपनी आय के लिए एक ही साधन पर निर्भर रहने के बजाय कई गतिविधियों को जोड़ा। सिलाई और कपड़ों की दुकान से लेकर किराना व्यवसाय, बटेर पालन, देशी मुर्गी पालन और हैचरी तक के कार्यों ने उनके लिए आय के अलग-अलग अवसर तैयार किए हैं।
रानू बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने का अवसर मिला। बिहान समूह से प्राप्त सहयोग और मार्गदर्शन का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने अलग-अलग आजीविका गतिविधियां अपनाईं। उनके अनुसार, समूह से जुड़ने से उनमें अपने दम पर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
रायपुर, 17 सितंबर 2026/लोकभवन में आज भगवान विश्वकर्मा की जयंती धूमधाम से मनाई गई। राज्यपाल श्री रमेन डेका एवं प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी ने भगवान विश्वकर्मा का विधि विधान से पूजा अर्चना कर देश-प्रदेश के खुशहाली के लिए कामना की। उन्होंने सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, विधिक सलाहकार श्रीमती सत्यभामा दुबे एवं लोक भवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
पीएम जनमन आवास के हितग्राहियों से की आत्मीय मुलाकात, लखपति दीदी श्रीमती भानुकला बैगा की सफलता को सराहा
जनकल्याणकारी योजनाओं से बदली जिंदगी, सेवा संकल्प अभियान में सामने आईं सफलता की कहानियां
रायपुर, 17 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्षों की समर्पित जनसेवा के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित सेवा संकल्प अभियान के तहत पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर हितग्राहियों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत धनौली पहुंचकर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित परिवारों से मुलाकात की और उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।
मंत्री श्री अग्रवाल ने पीएम जनमन आवास योजना के हितग्राही श्री कार्तिक राम बैगा एवं श्री धीरपाल सिंह बैगा के नवनिर्मित आवासों का अवलोकन किया। उन्होंने दोनों परिवारों से चर्चा कर आवास मिलने के बाद उनके जीवन में आए बदलावों के बारे में जाना। हितग्राहियों ने पक्का आवास मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया।
सेवा संकल्प अभियान के दौरान ग्रामीणों से संवाद करते हुए मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने श्री धीरपाल सिंह बैगा की पत्नी श्रीमती भानुकला बैगा की सफलता की कहानी भी जानी। श्रीमती भानुकला बैगा ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के महिला स्वसहायता समूह से जुड़ी हैं और बकरी पालन सहित विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं।
स्वसहायता समूह से जुड़कर निरंतर मेहनत और आजीविका गतिविधियों के विस्तार के माध्यम से उन्होंने लखपति दीदी बनने की उपलब्धि हासिल की है। मंत्री श्री अग्रवाल ने उनकी सफलता की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं का स्वसहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने श्रीमती भानुकला बैगा को आगे भी अपनी आजीविका गतिविधियों को विस्तार देने के लिए प्रोत्साहित किया।
आयुष्मान भारत योजना के हितग्राही से जाना योजना का लाभ
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद की कड़ी में मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आयुष्मान भारत योजना के हितग्राही श्री नेमचंद गुर्जर से भी मुलाकात की। उन्होंने श्री गुर्जर एवं उनके परिवार से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली और आयुष्मान भारत योजना से मिले लाभ के बारे में जाना।
श्री नेमचंद गुर्जर ने बताया कि उन्होंने आयुष्मान कार्ड के माध्यम से उपचार का लाभ लिया है। उन्होंने रेबीज का टीकाकरण भी कराया है। मंत्री श्री अग्रवाल ने योजना से मिले लाभ की जानकारी लेते हुए परिवार के स्वास्थ्य का हालचाल जाना।
ग्रामीणों की आत्मीयता से अभिभूत हुए मंत्री श्री अग्रवाल
मुलाकात के दौरान गुर्जर परिवार ने मंत्री श्री राजेश अग्रवाल का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें गरमा-गरम स्वादिष्ट भुट्टा खिलाया। ग्रामीण परिवार के इस सहज और आत्मीय आतिथ्य के लिए मंत्री श्री अग्रवाल ने परिवार का धन्यवाद किया। इस दौरान ग्रामीणों और मंत्री के बीच सहज संवाद का वातावरण बना रहा।
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने ग्रामीणों से सेवा संकल्प अभियान में अधिक से अधिक सहभागिता की अपील की। उन्होंने कहा कि यह अभियान सेवा, समर्पण और जनभागीदारी की भावना को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने ग्रामीणों से ‘आशीर्वाद का दीप’ जलाकर अभियान से जुड़ने और जनसेवा की भावना को आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होता है, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और लाभार्थी अपने अनुभव साझा कर दूसरे लोगों को भी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें। सेवा संकल्प अभियान इसी जनभागीदारी और सेवा भावना को व्यापक बनाने का माध्यम है।
इस अवसर पर विधायक श्री प्रणव कुमार मरपची, जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैकरा, कलेक्टर श्री विजय दयाराम के., जिला पंचायत सीईओ श्री मुकेश रावटे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अविनाश मिश्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर, 17 सितंबर 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोक भवन में उच्च शिक्षा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
जल संसाधन विभाग की 25 वर्षों की विकास यात्रा ने बदली कृषि की तस्वीर, 4,458 हेक्टेयर से बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हुई सिंचाई क्षमता
रायपुर, 17 सितम्बर 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के विजन और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जल संसाधन विभाग की 25 वर्षों की विकास यात्रा ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र में आए महत्वपूर्ण बदलावों को रेखांकित करती है। राज्य निर्माण के बाद जिले में सिंचाई अधोसंरचना के विस्तार से सिंचाई क्षमता 4,458 हेक्टेयर से बढ़कर वर्ष 2026 में 25,936 हेक्टेयर हो गई है।
राज्य गठन के समय सीमित थीं सिंचाई सुविधाएं
राज्य गठन के समय जिले में जल संसाधन अधोसंरचना सीमित थी। 1 नवंबर 2000 से पूर्व जिले में कुल 28 जल संसाधन परियोजनाएं निर्मित थीं। इनमें 17 जलाशय, 4 व्यपवर्तन योजनाएं, 2 स्टॉप डेम और 5 एनीकट शामिल थे। इन परियोजनाओं से मात्र 4,458 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो पाती थी। सिंचाई के सीमित साधनों के कारण कृषि मुख्यतः मानसूनी वर्षा पर निर्भर थी।
25 वर्षों में 57 नई परियोजनाओं का निर्माण
राज्य गठन के पश्चात जल संसाधन विभाग ने चरणबद्ध तरीके से सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया। पिछले 25 वर्षों में जिले में 57 नई जल संसाधन परियोजनाओं का निर्माण पूर्ण किया गया। पूर्व की 28 परियोजनाओं और नई 57 परियोजनाओं को मिलाकर जिले में कुल 85 जल संसाधन योजनाओं का आधार तैयार हुआ है।
पुरानी नहरों के जीर्णाेद्धार और विस्तार के साथ दूर-दराज के खेतों तक पानी पहुंचाने के प्रयास किए गए। कम पानी में अधिक क्षेत्र में सिंचाई के लिए माइक्रो एवं लिफ्ट इरिगेशन को बढ़ावा दिया गया। सोलर पंप और डिजिटल तकनीक के उपयोग से जल वितरण की निगरानी जैसे नवाचार भी किए गए। इसके साथ ही नदियों के संरक्षण, एनीकट निर्माण और भू-जल संवर्धन की दिशा में भी कार्य किया गया।
4,458 से बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हुई सिंचाई क्षमता
जल संसाधन विभाग के प्रयासों का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम जीपीएम की सिंचाई क्षमता में दिखाई देता है। राज्य गठन के समय जहां 4,458 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई संभव थी, वहीं वर्ष 2026 तक यह क्षमता बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हो गई है। इस प्रकार 25 वर्षों में सिंचाई क्षमता में 21,476 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि राज्य गठन के समय की तुलना में छह गुना से अधिक है।
सिंचाई के विस्तार से कृषि को मिला नया आधार
सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि की तस्वीर में बदलाव आया है। खेतों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को स्थानीय स्तर पर कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने और बहुफसलीय खेती की दिशा में बढ़ने का अवसर मिला है। सिंचाई का दायरा बढ़ने से कृषि उत्पादन में सुधार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।
जीपीएम जिले की प्रमुख जल संरचनाओं में ग्राम देवरगांव का मलनिया जलाशय, ग्राम आंदुल का जोगीडोंगरी जलाशय तथा ग्राम बनझोरका का एनीकट शामिल हैं। ये जल संरचनाएं जिले में विकसित जल अधोसंरचना और जल संरक्षण के प्रयासों को प्रदर्शित करती हैं।
जल प्रबंधन में आधुनिक तकनीक और संरक्षण पर जोर
जीपीएम में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ जल के बेहतर उपयोग और संरक्षण पर भी ध्यान दिया गया है। माइक्रो एवं लिफ्ट इरिगेशन, सोलर पंप तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से जल प्रबंधन को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। नदियों के संरक्षण, एनीकट निर्माण और भू-जल संवर्धन जैसे प्रयास जल की उपलब्धता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
जल संरचनाओं के निर्माण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का सीधा संबंध खेतों में पानी की उपलब्धता, कृषि गतिविधियों के विस्तार और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक संभावनाओं से है। जिले में सिंचाई क्षमता का 4,458 हेक्टेयर से बढ़कर 25,936 हेक्टेयर होना इस दीर्घकालीन प्रयास का महत्वपूर्ण परिणाम है।
500 करोड़ के मुख्यमंत्री एआई मिशन से संवरेगा युवाओं और तकनीक का भविष्य
धनंजय राठौर
सयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर, 17 सितंबर 2026/ दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में छत्तीसगढ़ भी अब एक नई छलांग लगाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार एआई को विकास, रोजगार और सुशासन के नए अवसरों से जोड़ने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। खेती-किसानी से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासन तक हर क्षेत्र में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और जनसेवा के विभिन्न क्षेत्रों में एआई के प्रभावी उपयोग से रोजगार और नवाचार के नए अवसर सृजित करते हुए हम विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं।
500 करोड़ रुपये का मुख्यमंत्री एआई मिशन
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 500 करोड़ रुपये के मुख्यमंत्री एआई मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ को केवल एआई तकनीक अपनाने वाला राज्य नहीं, बल्कि इसके उपयोग और नवाचार में सिरमौर बनाना है। इस मिशन के तहत प्रदेश में 100 एआई लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाएंगे।
योजना के अंतर्गत लगभग 6 लाख विद्यार्थियों और डेढ़ लाख शासकीय अधिकारी- कर्मचारियों को एआई के उपयोग से जोड़ा जाएगा। साथ ही, शासन की 50 से अधिक सेवाओं को एआई के जरिए अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। युवाओं को जॉब सीकर (नौकरी तलाशने वाला) की बजाय जॉब क्रिएटर (नौकरी पैदा करने वाला) बनाने के लिए मशीन लर्निंग और डेटा साइंस का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कृषि, स्वास्थ्य और प्रशासन में एआई का प्रयोग
इस मिशन का दायरा केवल आईटी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर आम जनता के जीवन को आसान बनाने के लिए उतारा जा रहा है। कृषि मौसम, फसल, कीट और रोगों के आंकड़ों के विश्लेषण से किसानों को समय पर सटीक सलाह मिल सकेगी। एआई आधारित तकनीक से जांच, रोग पहचान और स्वास्थ्य संसाधनों के प्रबंधन में सुधार होगा।
सुशासन एवं उद्योग
सरकारी पोर्टलों (जैसे सेवा सेतु) के विस्तार और एआई के उपयोग से योजनाओं की मॉनिटरिंग और नागरिक सेवाओं को सुगम बनाया जा रहा है। वहीं उद्योगों में उत्पादकता और ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी। कारखानों में रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग के उपयोग से उत्पादन की गति बढ़ती है और त्रुटियाँ कम होती हैं। AI सेंसर मशीनों की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं और खराबी आने से पहले ही चेतावनी दे देते हैं, जिससे लागत बचती है। उद्योगों में व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को समझने और 24X7 सहायता प्रदान करने के लिए AI संचालित टूल का उपयोग किया जाता है।
नवा रायपुर बन रहा तकनीक और एआई का नया हब
नवा रायपुर को आईटी, एआई और डाटा सेंटर के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ लगभग 1 हजार करोड़ रुपये के निवेश से एआई आधारित डाटा सेंटर और एआई एसईजेड विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा, नवा रायपुर में करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना का निर्णय लिया गया है। एनआईटी रायपुर और ट्रिपल आईटी (IIIT) नवा रायपुर में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से खनन, इस्पात, स्वास्थ्य, कृषि और स्मार्ट गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान और स्टार्टअप को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए उच्च तकनीक आधारित रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं।
नवा रायपुर में देश का पहला एआइ आधारित डेटा सेंटर
नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला एआइ आधारित डेटा सेंटर सेक्टर-22 में 13.5 एकड़ में विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट न केवल प्रदेश की पहचान को नई ऊंचाई देगा, बल्कि आम जनता के लिए भी बड़े बदलाव लेकर आएगा। प्रदेश के युवाओं को बेहतर करियर के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही एआइ तकनीक का फायदा किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भी मिलेगा। डिजिटल सेवाएं मजबूत होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का लाभ दूरदराज के क्षेत्रों तक आसानी से पहुंच सकेगा।
मुख्यमंत्री निवास में भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की
मुख्यमंत्री ने श्रमवीरों, शिल्पकारों, कारीगरों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को दी विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं
रायपुर 17 सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में सृजन, शिल्प और निर्माण के अधिष्ठाता भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा से प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह सहित मुख्यमंत्री निवास के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने भगवान विश्वकर्मा को नमन करते हुए प्रदेशवासियों, विशेषकर श्रमवीरों, शिल्पकारों, कारीगरों, अभियंताओं, तकनीशियनों तथा उद्योग और निर्माण क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजनशीलता, कौशल, कर्मनिष्ठा और उत्कृष्टता के प्रतीक हैं। उनकी आराधना हमें अपने ज्ञान, हुनर और परिश्रम से समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देती है। विश्वकर्मा जयंती केवल हमारी आस्था और परंपरा से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह श्रम की प्रतिष्ठा, कौशल के सम्मान और सृजन की शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी अवसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी प्रदेश और राष्ट्र की प्रगति के पीछे उसके श्रमवीरों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों और निर्माणकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान होता है। खेत-खलिहानों से लेकर कारखानों तक, छोटे-छोटे प्रतिष्ठानों से लेकर बड़े उद्योगों तक और पारंपरिक शिल्प से लेकर आधुनिक तकनीक तक, हमारे कुशल हाथ अपने परिश्रम और प्रतिभा से विकास को आकार देते हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान सदैव मेहनतकश लोगों और समृद्ध शिल्प परंपरा की रही है। हमारे शिल्पकारों और कारीगरों ने पीढ़ियों से अपने हुनर के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजा है। वहीं आज के श्रमिक, अभियंता और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े युवा आधुनिक छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। परंपरागत कौशल और आधुनिक तकनीक का यह समन्वय प्रदेश के विकास को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रम केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि सृजन और राष्ट्र निर्माण की शक्ति है। प्रत्येक श्रमिक के परिश्रम और प्रत्येक कारीगर के हुनर का सम्मान करना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। छत्तीसगढ़ के श्रमिक, कारीगर और निर्माण से जुड़े लाखों हाथ अपने परिश्रम से प्रदेश की प्रगति को निरंतर गति दे रहे हैं। उनका श्रम और कौशल समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत नींव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वकर्मा जयंती हमें यह संदेश भी देती है कि हम अपने प्रत्येक कार्य को पूरी निष्ठा, अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता के साथ करें। बदलते समय के अनुरूप कौशल को निरंतर निखारना और नई तकनीक को अपनाना आज की आवश्यकता है। कौशलयुक्त और परिश्रमी मानव संसाधन के बल पर ही हम आत्मनिर्भर, आधुनिक और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने भगवान विश्वकर्मा से प्रार्थना की कि वे प्रदेश के सभी श्रमवीरों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों, अभियंताओं और उद्यमियों को अपने कार्य में निरंतर सफलता प्रदान करें तथा उनके कौशल और परिश्रम से छत्तीसगढ़ प्रगति, समृद्धि और खुशहाली के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।
रायपुर, सितंबर 2026/छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह ने बताया कि हर वर्ष अलग-अलग राज्यों में होने वाले राज्य निर्वाचन आयुक्तगणों के सम्मेलन के क्रम में 32वां सम्मेलन इस वर्ष 16-17 सितम्बर को छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर अटल नगर में हो रहा है। इस सम्मेलन का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया जा रहा है।
सम्मेलन का शुभारंभ आज माननीय राज्यपाल द्वारा किया गया। सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर मेजबान छत्तीसगढ़ के निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह, राज्य निर्वाचन आयुक्तगण की स्थाई समिति के अध्यक्ष श्री विजय देव एवं संयोजक श्री सुधांशु पांडे तथा प्रदेश के मुख्य सचिव श्री विकासशील उपस्थित रहे। शुभारंभ सहारोह के इस विशेष अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ स्थानीय निकाय निर्वाचन वार्षिकी 2026 Year Book के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया।
उद्घाटन उपरांत आज सम्मेलन में देशभर से विभिन्न राज्यों के पधारे राज्य निर्वाचन आयुक्तगण ने स्थानीय लोकतंत्र विशेषकर त्रिस्तरीय पंचायतों व नगरीय निकायों को और अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी, विश्वसनीय एवं सहभागी बनाने हेतु निर्वाचन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया एवं कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्तगण और विषय-विशेषज्ञों के द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया ।
सम्मेलन के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्तगण द्वारा स्थानीय निकाय निर्वाचन के संचालन में सामने आने वाली चुनौतियों, अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा "राज्य गठन उपरांत नक्सल प्रभावित बस्तर में पिछले 25 वर्षों में स्थानीय लोकतंत्र की प्रगति" विषय पर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह के निर्देशन में तैयार प्रस्तुति आयोग की सचिव श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी द्वारा प्रस्तुत की गई।
बस्तर में स्थानीय लोकतंत्र की यात्रा को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। भौगोलिक दुर्गमता, विस्तृत वन क्षेत्र, सीमित संचार सुविधाओं तथा लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित बस्तर संभाग की परिस्थितियों के बीच स्थानीय निर्वाचन कराना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक चुनौती रहा है। छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकायों के निर्वाचन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया गया कि प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बल, निर्वाचन कर्मियों तथा स्थानीय समुदाय के समन्वित प्रयासों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निरंतर सुदृढ़ किया गया है। वर्ष 2025 में नगरीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन एक साथ राज्यभर में, बस्तर संभाग सहित, शांतिपूर्वक एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने तथा पुनर्मतदान की आवश्यकता न पड़ने का उल्लेख किया गया।
मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान एवं केरलम की ओर से सूचना प्रोद्योगिकी के उपयोग के संबंध में 'EVM sharing tracking policy and it's challenges and EMS SOFTWARE' 'Panchayat Delimitation 2026: Transforming Delimitation through Technology A New Era of Paperless Delimitation', 'Digitalising Elections in India', 'Re-engineering elections in the Digital Era: The Kerala Story' विषयों पर प्रस्तुतियां दी गई।
सम्मेलन में लोकतांत्रिक निर्वाचन विषय से जुड़े प्रिंसटन यूनिवर्सिटी न्यू जर्सी अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञ ने भी हिस्सा लिया और उन्होंने भारत के राज्यों में होने वाले स्थानीय निर्वाचनों का तुलनात्मक एवं समेकित अध्ययन का सार प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तुत किया। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, हैदराबाद एवं भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड, बेंगलूरु के ईलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के विषय विशेषज्ञ ने भी सम्मेलन में अपने संस्थानों की अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि निर्वाचन में उपयोग होने वाली इलेक्ट्रानिक वोति वोटिंग मशीन हर प्रकार से सुरक्षित है और इसमें लगातार नवाचार करते हुए राज्य निर्वाचन आयोगों के अनुकूल इसका विकास एवं उत्पादन किया जा रहा है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल का प्रदेशवासियों से आह्वान, 17 सितंबर की शाम 7 बजे अपने घर में दीप प्रज्ज्वलित कर सेवा, आभार और सकारात्मकता का दें संदेश
रायपुर, सितम्बर 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा एवं समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत 17 सितंबर को शाम 7 बजे ‘आशीर्वाद का दीया’ पहल के माध्यम से प्रदेशभर में सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन किया जाएगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने छत्तीसगढ़वासियों से आह्वान किया है कि वे 17 सितंबर की शाम 7 बजे अपने घर में ‘आशीर्वाद का दीया’ अवश्य जलाएं और सेवा, समर्पण, आभार एवं सकारात्मकता के इस सामूहिक संकल्प का हिस्सा बनें।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि दीप भारतीय संस्कृति में केवल प्रकाश का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह आशा, सद्भाव, सकारात्मकता और सेवा की भावना का भी प्रतीक है। ‘आशीर्वाद का दीया’ के माध्यम से हम अपने परिवार और समाज में सेवा की भावना को और मजबूत करने का संकल्प ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर की शाम जब प्रदेश के घर-घर में एक साथ दीप प्रज्ज्वलित होंगे, तब यह दृश्य जनभागीदारी की शक्ति और सामूहिक संकल्प की भावना का संदेश देगा।
उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि ‘आशीर्वाद का दीया’ को केवल दीप जलाने की पहल तक सीमित न रखें, बल्कि इसे किसी जरूरतमंद की सहायता, बुजुर्गों के सम्मान, बच्चों के प्रति संवेदनशीलता, पर्यावरण संरक्षण अथवा समाज के लिए किए जाने वाले किसी सकारात्मक योगदान के संकल्प से जोड़ें। उन्होंने कहा कि सेवा के लिए बड़े साधनों की नहीं, बल्कि संवेदनशील मन और सहयोग की भावना की आवश्यकता होती है।
सेवा और समर्पण के 25 वर्ष, जनभागीदारी का नया संकल्प
‘सेवा संकल्प अभियान’ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा एवं समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में सेवा, जनभागीदारी और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी विभिन्न पहलें आयोजित की जाएंगी।
अभियान का उद्देश्य सेवा और समर्पण की भावना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना तथा नागरिकों को अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार जनकल्याण के कार्यों में सहभागी बनाना है। ‘आशीर्वाद का दीया’ इसी व्यापक भावना की शुरुआत का प्रतीक बनेगा।
घर-घर का दीप बनेगा सेवा और सकारात्मकता का संदेश
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि एक दीपक का प्रकाश भले ही छोटा हो, लेकिन जब लाखों दीप एक साथ प्रज्ज्वलित होते हैं तो वह सामूहिक ऊर्जा और एकता का बड़ा संदेश बन जाता है। इसी भावना के साथ ‘आशीर्वाद का दीया’ पहल में प्रदेश के प्रत्येक परिवार की सहभागिता महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि 17 सितंबर की शाम 7 बजे जब गांवों, कस्बों और शहरों में घर-घर दीप जलेंगे, तो यह केवल रोशनी का उत्सव नहीं होगा, बल्कि सेवा के प्रति कृतज्ञता और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को स्वीकार करने का सामूहिक अवसर होगा। यह दीप हमें प्रेरणा देगा कि हम अपने आसपास किसी एक व्यक्ति, परिवार या समुदाय के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अपनी ओर से कुछ योगदान करें।
सेवा को जीवन का संस्कार बनाने का आह्वान
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारतीय परंपरा में सेवा को सदैव जीवन-मूल्य के रूप में देखा गया है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी भावना को जनभागीदारी से जोड़ने का अवसर है। उन्होंने कहा कि कोई विद्यार्थी अपनी प्रतिभा से, युवा अपने नवाचार से, महिला अपने अनुभव और सामुदायिक सहभागिता से, किसान जल एवं पर्यावरण संरक्षण से और कलाकार अपनी कला के माध्यम से समाज के लिए योगदान दे सकता है।
उन्होंने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ पहल के माध्यम से हम अपने पूर्वजों, बुजुर्गों और समाज से मिले संस्कारों के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ आने वाली पीढ़ी के लिए सेवा और संवेदनशीलता की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प भी ले सकते हैं।