ईश्वर दुबे
संपादक - न्यूज़ क्रिएशन
+91 98278-13148
newscreation2017@gmail.com
Shop No f188 first floor akash ganga press complex
Bhilai
—— !-- Meta Pixel Code -->
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से की भेंट: लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय व्यवस्था की मिली जानकारी
रायपुर 14 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान आज विधानसभा परिसर लोकतंत्र की पाठशाला बन गया, जब भिलाई स्थित शकुंतला विद्यालय के ग्यारहवीं एवं बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं का दल शैक्षणिक भ्रमण पर विधानसभा पहुंचा। विद्यार्थियों ने विधानसभा की कार्यवाही का प्रत्यक्ष अवलोकन कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसदीय परंपराओं को निकट से समझने का अवसर प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि आज के विद्यार्थी ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के भविष्य के निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनता की आकांक्षाओं को सदन में अभिव्यक्त करने की सतत प्रक्रिया है। विधानसभा में जनहित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा होती है और जनता के कल्याण के लिए नीतियां एवं कानून बनाए जाते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के साथ-साथ संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने का आग्रह किया।उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण उन्हें लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को समझने, संविधान के प्रति सम्मान विकसित करने तथा जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव तथा विधायक श्री रिकेश सेन भी उपस्थित थे।
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने सदन की कार्यवाही को दर्शक दीर्घा से देखा और प्रश्नकाल, विभिन्न विषयों पर चर्चा तथा संसदीय प्रक्रियाओं को निकट से समझा। उन्होंने विधानसभा भवन की संरचना, कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त कीं।
विद्यार्थियों ने इस अनुभव को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि पुस्तकों में पढ़ी गई संसदीय व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर उनके लिए विशेष रहा। उन्होंने कहा कि इससे लोकतंत्र, संविधान और जनप्रतिनिधियों की भूमिका के प्रति उनकी समझ और अधिक विकसित हुई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण स्व. डॉ. तीजन बाई को दी भावभीनी श्रद्धांजलि : गनियारी में आयोजित दशगात्र एवं श्रद्धांजलि सभा में हुए शामिल
रायपुर 14 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज दुर्ग जिले के ग्राम गनियारी पहुंचे, जहां उन्होंने विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई के दशगात्र एवं श्रद्धांजलि सभा में शामिल होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके पैतृक गृह ग्राम गनियारी में आयोजित इस शोकसभा में मुख्यमंत्री ने स्व. डॉ. तीजन बाई के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें सादर नमन किया तथा शोकसंतप्त परिजनों से भेंट कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर स्व. डॉ. तीजन बाई के पुत्र श्री दिलहरण पारधी तथा परिवार के अन्य सदस्यों से भेंट कर उनका हालचाल जाना और उन्हें ढांढस बंधाया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि स्व. डॉ. तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक पहचान थीं। उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा, अद्भुत साधना और पंडवानी की कापालिक शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्व. डॉ. तीजन बाई का योगदान आने वाली पीढ़ियों को भी निरंतर प्रेरित करता रहेगा। स्व. डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोककला, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित रहा। उन्होंने पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाकर न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। उनकी कला, साधना और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि राज्योत्सव के अवसर पर प्रतिवर्ष 'डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण' प्रदान किया जाएगा, जिसके माध्यम से लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्राम गनियारी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण स्व. डॉ. तीजन बाई के नाम पर किया जाएगा, ताकि इस क्षेत्र के विद्यार्थी उनके जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों से प्रेरणा प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने यह कहा कि लोककला की महान साधिका डॉ. तीजन बाई की स्मृतियों को राज्य सरकार द्वारा चिरस्थायी रखते हुए उनकी जीवनभर की कला-साधना के प्रतीक रहे तंबूरे को रायपुर के संग्रहालय में पूरे सम्मान के साथ संरक्षित रखा जाएगा, जिससे भविष्य की पीढ़ियां उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।
श्रद्धांजलि सभा को सांसद श्री विजय बघेल, प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल तथा विधायक पद्मश्री श्री अनुज शर्मा ने भी संबोधित किया। उन्होंने स्व. डॉ. तीजन बाई के व्यक्तित्व, कृतित्व और लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा उन्हें सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर पद्मश्री श्री आर.एस. बारले, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित अन्य गणमान्यजन, छत्तीसगढ़ प्रदेश के विभिन्न अंचलों से पहुंचे कलाकार, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai and Speaker Dr. Raman Singh plant Rudraksha saplings
Raipur, July 14, 2026/ Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai planted a Rudraksha sapling today during a large-scale plantation drive organized at the Chhattisgarh Legislative Assembly premises under the 'Ek Ped Maa Ke Naam 3.0' campaign during the Monsoon Session of the Assembly.
Addressing the programme, the Chief Minister said the 'Ek Ped Maa Ke Naam' campaign, launched at the call of Prime Minister Shri Narendra Modi, has grown into a nationwide people's movement. He said the campaign is not merely about planting saplings but also about expressing gratitude towards one's mother, nurturing sensitivity towards nature and strengthening the collective responsibility of safeguarding the environment for future generations.
Shri Sai said planting a sapling in the name of one's mother creates an emotional bond that inspires people to nurture and protect it. He said this emotional connect has made the campaign sustainable, impactful and driven by public participation.
Chief Minister described the initiative by Members of the Legislative Assembly to plant saplings in their mothers' names as highly inspiring. He said the message from the Chhattisgarh Legislative Assembly would create greater awareness about environmental conservation across the state. Thanking Speaker Dr. Raman Singh for organizing the initiative, he said it would play an important role in transforming tree plantation into a people's movement.
Highlighting the growing challenges posed by climate change, global warming, erratic rainfall and the loss of biodiversity, Shri Sai said tree plantation is one of the most effective ways to protect natural resources and secure the future of coming generations. Trees, he said, are essential for maintaining ecological balance, conserving water, preserving biodiversity and ensuring a healthy environment. He urged every citizen to plant at least one sapling and nurture it with the same care and affection as a member of the family.
Chief Minister said the state government is according the highest priority to environmental conservation alongside its vision of a developed Chhattisgarh. He said sustained efforts are being made to promote forest conservation, expand green cover, conserve water, protect biodiversity and encourage community participation in environmental initiatives.
Expressing confidence in the success of the campaign, Shri Sai said 'Ek Ped Maa Ke Naam 3.0' would reach every village, town and household in the state and evolve into a people's movement for nature conservation. He added that if every citizen plants and nurtures a sapling in the name of their mother, Chhattisgarh could emerge as a model for environmental conservation.
Speaker Dr. Raman Singh, Leader of Opposition Dr. Charan Das Mahant, Deputy Chief Ministers Shri Vijay Sharma and Shri Arun Sao, Parliamentary Affairs Minister Shri Kedar Kashyap, and other Members of the Legislative Assembly participated in the plantation drive by planting saplings in their mothers' names. A special selfie point created for the campaign also drew enthusiastic participation, and the public representatives appealed to people across the state to plant more trees and ensure their care and protection.
Principal Secretary, Forest and Climate Change, Shri Manoj Kumar Pingua, Principal Chief Conservator of Forests and Head of Forest Force Shri Arun Pandey, senior officials, public representatives and forest department officers and staff were also present on the occasion.
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से की भेंट: लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय व्यवस्था की मिली जानकारी
रायपुर 14 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान आज विधानसभा परिसर लोकतंत्र की पाठशाला बन गया, जब भिलाई स्थित शकुंतला विद्यालय के ग्यारहवीं एवं बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं का दल शैक्षणिक भ्रमण पर विधानसभा पहुंचा। विद्यार्थियों ने विधानसभा की कार्यवाही का प्रत्यक्ष अवलोकन कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसदीय परंपराओं को निकट से समझने का अवसर प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि आज के विद्यार्थी ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के भविष्य के निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनता की आकांक्षाओं को सदन में अभिव्यक्त करने की सतत प्रक्रिया है। विधानसभा में जनहित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा होती है और जनता के कल्याण के लिए नीतियां एवं कानून बनाए जाते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के साथ-साथ संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने का आग्रह किया।उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण उन्हें लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को समझने, संविधान के प्रति सम्मान विकसित करने तथा जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव तथा विधायक श्री रिकेश सेन भी उपस्थित थे।
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने सदन की कार्यवाही को दर्शक दीर्घा से देखा और प्रश्नकाल, विभिन्न विषयों पर चर्चा तथा संसदीय प्रक्रियाओं को निकट से समझा। उन्होंने विधानसभा भवन की संरचना, कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त कीं।
विद्यार्थियों ने इस अनुभव को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि पुस्तकों में पढ़ी गई संसदीय व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर उनके लिए विशेष रहा। उन्होंने कहा कि इससे लोकतंत्र, संविधान और जनप्रतिनिधियों की भूमिका के प्रति उनकी समझ और अधिक विकसित हुई है।
लोकतंत्र के मंदिर से पर्यावरण संरक्षण और मातृ सम्मान का सशक्त संदेश
रायपुर 14 जुलाई 2026/छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान आज विधानसभा परिसर हरियाली, जनभागीदारी और मातृ सम्मान के भाव से सराबोर नजर आया। 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान के अंतर्गत आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप सहित विधानसभा के सभी सदस्यों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया। यह संकल्प केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के संरक्षण, मातृत्व के सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरित भविष्य के निर्माण का सामूहिक संकल्प बनकर उभरा। कार्यक्रम के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों ने अभियान के लिए तैयार विशेष सेल्फी प्वाइंट पर तस्वीरें भी खिंचवाईं तथा प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रारंभ हुआ 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान आज पूरे देश में जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी मां के प्रति कृतज्ञता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी मां के नाम पर पौधा लगाता है तो उस पौधे के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता भी जुड़ जाता है और वह उसके संरक्षण के लिए स्वयं प्रेरित होता है। यही भाव इस अभियान को स्थायी, प्रभावी और जनभागीदारी आधारित बनाता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायकों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधारोपण किया जाना अत्यंत प्रेरणादायी पहल है। विधानसभा परिसर से दिया गया यह संदेश निश्चित रूप से पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न करेगा। उन्होंने इस अभिनव आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल समाज में वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों में वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के संतुलन के आधार हैं। वे हमें शुद्ध वायु, जल संरक्षण, जैव विविधता का संरक्षण और स्वस्थ पर्यावरण प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी उसी आत्मीयता से करनी चाहिए, जिस भाव से वह अपने परिवार के किसी सदस्य की देखभाल करता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में वन संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि, जल संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा जनभागीदारी आधारित पर्यावरणीय अभियानों को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान प्रदेश के गांव-गांव, शहर-शहर और प्रत्येक परिवार तक पहुंचेगा तथा प्रकृति संरक्षण को सामाजिक दायित्व और जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपनी मां के नाम पर एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में उत्कृष्ट मॉडल बन सकता है।
कार्यक्रम में विधानसभा के सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी माताओं के नाम पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग श्री मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डेय सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
राज्य शासन ने जारी की अधिसूचना
रायपुर. 14 जुलाई 2026. राज्य शासन ने राजिमवासियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी करते हुए राजिम नगर पंचायत का नगर पालिका के रूप में उन्नयन कर दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। राजिम नगर पंचायत की सीमाएं ही राजिम नगर पालिका की सीमाएं होंगी। राज्य शासन के इस निर्णय से पूरे शहर में खुशी एवं उत्साह का वातावरण है।
उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने राजिम नगर पंचायत के नगर पालिका के रूप में उन्नयन पर कहा कि राज्य शासन के इस निर्णय से राजिम के सुनियोजित विकास को नई दिशा मिलेगी तथा शहरी सुविधाओं के विस्तार के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे राजिम में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, उद्यान, सामुदायिक भवन सहित विभिन्न आधारभूत सुविधाओं के विकास को और ज्यादा गति मिलेगी। साथ ही राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ भी अधिक प्रभावी ढंग से नगरवासियों तक पहुंचेगा।
2.85 लाख जल संरचनाओं से बढ़ी जल संचयन क्षमता
रायपुर, 14 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ में 'मोर गांव-मोर पानी' महाअभियान अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और भूजल स्तर को बढ़ाने का एक सफल जनआंदोलन बन चुका है। जनभागीदारी, श्रमदान और महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को अभूतपूर्व सफलता दिलाई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को लेकर एक बड़ी क्रांति आकार ले रही है। राज्य शासन की 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण' (वीबीजी-रामजी योजना) के तहत संचालित ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान अब प्रदेशभर में एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। इसी कड़ी में बालोद जिले ने जल सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन की दिशा में एक बड़ी और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
19.23 लाख घनमीटर अतिरिक्त जल संचयन क्षमता विकसित
जिला प्रशासन बालोद द्वारा जनभागीदारी के समन्वय से जिले में अब तक 2.85 लाख जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण व पुनर्जीवन किया जा चुका है। इन संरचनाओं के माध्यम से जिले में लगभग 19.23 लाख घनमीटर अतिरिक्त जल संचयन क्षमता विकसित की गई है। इस महत्वपूर्ण पहल से:भू-जल स्तर (वाटर टेबल) में उल्लेखनीय सुधार होगा।खेतों की मिट्टी में नमी बनी रहेगी।किसानों को खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों के लिए भी सुनिश्चित सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।
“जहाँ वर्षा हो, जब वर्षा हो- वहीं वर्षा जल का संचयन हो”
अभियान के तहत जिले के प्रत्येक शासकीय भवन में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त सतही जल संचयन के लिए रिचार्ज शाफ्ट, डबरी, तालाब, ट्रेंच और सोख्ता गड्ढों का निर्माण किया जा रहा है। बेकार पड़े निष्क्रिय बोरवेलों को रिचार्ज करने के साथ-साथ तालाबों के गहरीकरण और चेकडैम निर्माण को भी गति दी गई है।
जनभागीदारी से हरित विकास 3 लाख सीड बॉल का रोपण
इस महाअभियान की सबसे बड़ी ताकत स्थानीय आमजन और सामाजिक संगठन बने हैं। महिला स्व-सहायता समूहों, ग्राम विकास समितियों, महिला कमांडो, ग्रीन आर्मी और स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता से तालाबों की स्वच्छता और वृक्षारोपण का कार्य जोरों पर है। जुलाई माह में अब तक 03 लाख से अधिक सीड बॉल का रोपण किया जा चुका है, जबकि 02 लाख पौधों के रोपण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है।
जनपदवार विकास कार्यों की एक झलक (प्रमुख उपलब्धियां)
जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में ग्राउंड लेवल पर किए गए कुछ प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं जनपद पंचायत गुरूर के ग्राम पंचायत अर्जुनी में 1200 नग ट्रेंच निर्माण, ग्राम पंचायत कुलिया में 01 हेक्टेयर क्षेत्र में मिश्रित फलोदयन रोपण तथा ग्राम पंचायत चंदनबिरही में गौठान के पास सी.सी. चेकडेम का निर्माण कार्य किया गया है। इसी तरह जनपद पंचायत गुंडरदेही के ग्राम पंचायत कोंगनी में 27,000 लीटर क्षमता का रिचार्ज पिट, बेलौदी में 6750 लीटर जलग्रहण क्षमता वाला रेनवाटर हार्वेस्टिंग, तवेरा में 2.82 लाख लीटर क्षमता का कुआं निर्माण, गब्दी में 05 केएलडी क्षमता का ग्रे-वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, चिरचार में 05 लीटर क्षमता का रेनवाटर हार्वेस्टिंग, खुरसुनी में 25,000 लीटर क्षमता का मैजिकपिट, मुंदेरा में 30 हजार लीटर क्षमता का असफल बोर रिचार्ज शाफ्ट, माहुद (बी) में 16 लाख लीटर क्षमता की आजीविका डबरी तथा ओडारसकरी में चेकडेम का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है। साथ ही ग्राम पंचायत खुरसुनी में 25,000 लीटर क्षमता का रिचार्ज पिट भी निर्मित है। जनपद पंचायत डौंडी के ग्राम सिंघनवाही में 12 लाख लीटर क्षमता की निजी आजीविका डबरी का निर्माण एवं ग्राम गुजरा में 35 लाख लीटर क्षमता के जल संचयन हेतु 4700 ट्रेंच निर्माण किया गया है।
व्यापक स्तर पर सीड बॉल का रोपण
जिला प्रशासन, 'जल संरक्षण, जन सहभागिता से जल समृद्धि की ओर' के ध्येय वाक्य के साथ बालोद को पूरी तरह से जल-सुरक्षित और समृद्ध बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने स्वयं आगे आकर श्रमदान से लाखों सोख्ता गड्ढे और जल संचयन संरचनाएं बनाई हैं, जिससे लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल हुई है
Raipur, July 14, 2026/ The state government has upgraded Rajim Nagar Panchayat to a Municipal Council, fulfilling a long-pending demand of the town's residents. The Urban Administration and Development Department has issued a notification to this effect. The existing jurisdiction of Rajim Nagar Panchayat will constitute the limits of the newly constituted Municipal Council.
Welcoming the decision, Deputy Chief Minister and Urban Administration and Development Minister Shri Arun Sao said the upgradation would provide fresh impetus to Rajim's planned urban development and enable greater investment in civic infrastructure. He said the move would accelerate the development of roads, drains, drinking water supply, sanitation, street lighting, parks, community buildings and other basic urban amenities, while ensuring more effective implementation of central and state government schemes for the benefit of residents.
182 हेक्टेयर में बढ़ेगी सिंचाई क्षमता
रायपुर, 14 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के किसानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य शासन के जल संसाधन विभाग ने विकासखण्ड खड़गंवा के अंतर्गत आने वाले गज्जूपानी जलाशय के जीर्णाेद्धार के लिए तीन करोड़ आठ लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस जलाशय के के जीर्णाेद्धार 182 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाइ्र की सुविधाए मिलेगी।
मुख्य नहर और बांध का होगा कायाकल्प
इस स्वीकृत राशि से गज्जूपानी जलाशय के मुख्य बांध और उसकी नहरों के जीर्णाेद्धार व मरम्मत का कार्य किया जाएगा। लंबे समय से बेहतर रखरखाव की बांट जोह रहे इस जलाशय की नहरों के सुदृढ़ीकरण से पानी की बर्बादी रुकेगी और अंतिम छोर (टेलर एंड) तक पानी आसानी से पहुंच सकेगा।
182 हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगी संजीवनी
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत प्रस्तावित सभी कार्य समय सीमा के भीतर पूरे कर लिए जाएंगे। कार्य पूर्ण होने के बाद क्षेत्र के किसानों को खरीफ और रबी फसलों के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। इस जीर्णाेद्धार कार्य से क्षेत्र के कुल 182 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की बेहतर और सुनिश्चित सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे स्थानीय कृषि उत्पादन और किसानों की आय में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होगी।
[3:43 PM, 7/14/2026] +91 94255 58741: डबरी निर्माण से बदली बस्तर के किसान सोनधर की तकदीर
जल संरक्षण के साथ आजीविका को मिली नई उड़ान
रायपुर, 14 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना “विकसित भारत -गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन का एक बड़ा जरिया बनकर उभर रही है। इस योजना के तहत बस्तर जिले के विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत खोटलापाल में कराए गए डबरी (छोटे तालाब) निर्माण कार्य ने न केवल जल संकट को दूर किया है, बल्कि स्थानीय किसान की जिंदगी में भी समृद्धि के नए रंग भर दिए हैं। ग्राम खोटलापाल निवासी किसान श्री सोनधर की भूमि पर निर्मित यह डबरी आज पूरे क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और ग्रामीण विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है।
सिंचाई के संकट से मिली मुक्ति, अब ले रहे हैं अतिरिक्त फसलें
सोनधर ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले वर्षा का अधिकांश पानी बहकर बर्बाद हो जाता था, जिसके कारण गर्मी के मौसम में खेतों की सिंचाई के लिए भारी संकट का सामना करना पड़ता था। लेकिन डबरी निर्माण के बाद अब बारिश के पानी का प्रभावी ढंग से संचयन हो रहा है। खेतों को अब समय पर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल रहा है।
डबरी में पानी की उपलब्धता से सोनधर को अब साल में अतिरिक्त फसल लेने का सुनहरा अवसर मिला है। पानी की प्रचुरता से पशुपालन और बाड़ी (सब्जी उत्पादन) विकास जैसी गतिविधियों को भी नया जीवन मिला है।
सिर्फ सिंचाई नहीं, मछली पालन से बढ़ी अतिरिक्त आय
यह डबरी केवल खेतों की प्यास बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सोनधर के लिए आजीविका का एक मजबूत अतिरिक्त साधन भी बन गई है। लाभार्थी किसान श्री सोनधर ने कहा कि अब इस डबरी में सफलतापूर्वक मछली पालन किया जा रहा है, जिससे परिवार को हर साल अच्छी अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। आने वाले समय में यहाँ बतख पालन शुरू करने की भी योजना है, जिससे आमदनी के स्रोत और बढ़ेंगे।
भूजल स्तर में सुधार और स्थानीय स्तर पर रोजगार
इस डबरी निर्माण का सकारात्मक प्रभाव केवल एक किसान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका लाभ पूरे ग्रामीण परिवेश को मिल रहा है। डबरी के कारण आसपास के क्षेत्र का भूजल स्तर (वाटर टेबल) सुधरा है, जिससे निकटवर्ती कुओं और हैंडपंपों में पानी की उपलब्धता बढ़ गई है। खेतों की मिट्टी में नमी बनी रहने से आसपास की फसलों को भी लाभ हो रहा है। डबरी निर्माण के दौरान ग्राम पंचायत के जॉब कार्डधारी ग्रामीणों को गाँव में ही रोजगार मिला, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े और काम की तलाश में होने वाले पलायन पर प्रभावी रोक लगी।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
खोटलापाल में हुआ यह सफल प्रयोग यह साबित करता है कि यदि जल संरक्षण के कार्यों को जनभागीदारी और सरकारी योजनाओं के समन्वय से लागू किया जाए, तो खेती, पर्यावरण और ग्रामीण आजीविकाकृतीनों को एक साथ सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
रायपुर, 14 जुलाई 2026/ विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी जी राम जी) के अंतर्गत सारंगढ़,-बिलाईगढ़ जिले के जनपद पंचायत सारंगढ़ की ग्राम पंचायत गोड़म में सीएलएफ क्लस्टर से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा लगभग 30 हजार सीड बॉल तैयार किए गए।
मानव श्रृंखला बनाकर बीज रोपण उत्सव मनाया
इन सीड बॉल का वितरण जिला पंचायत अध्यक्ष, कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, क्लस्टर के सरपंचों, अन्य अधिकारियों तथा स्व-सहायता समूह की दीदियों की उपस्थिति में क्लस्टर अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों को किया गया। इस दौरान सभी ने मिलकर मानव श्रृंखला का निर्माण कर बीज रोपण उत्सव मनाया और लोगों को वीबी जीरामजी अंतर्गत पौधारोपण करने एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
तालाबों एवं डबरियों की मेड़ों सहित उपयुक्त स्थलों पर होगा रोपण
इस अवसर पर निर्देश दिए गए कि सीड बॉल का उपयोग वीबी- जीरामजी के अंतर्गत निर्मित तालाबों की मेड़ों, डबरियों की मेड़ों तथा अन्य उपयुक्त स्थलों पर रोपण के लिए किया जाएगा, ताकि वर्षा ऋतु में हरित आवरण बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण तथा जल संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
वीबी - जीरामजी के उद्देश्यों एवं जनभागीदारी आधारित विकास कार्यों की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं ग्रामीणों को वीबी - जीरामजी योजना के उद्देश्यों, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा जनभागीदारी आधारित विकास कार्यों की जानकारी भी दी गई। सभी से अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाकर इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया गया।