Google Analytics —— Meta Pixel
newscreation

newscreation

 


सुनामी की वजह से तट के आसपास सैकड़ों इमारतें तबाह हो गईं।
सुनामी की वजह से तट के आसपास सैकड़ों इमारतें तबाह हो गईं।
बॉडीबैग में भरे शवों की पहचान करने की कोशिश करते लोग।
बॉडीबैग में भरे शवों की पहचान करने की कोशिश करते लोग।
अनाक क्राकातोआ द्वीप में है क्राकातोआ ज्वालामुखी।
अनाक क्राकातोआ द्वीप में है क्राकातोआ ज्वालामुखी।
मृतकों के शव को बॉडी बैग में भरकर ले जाते बचावकर्मी
मृतकों के शव को बॉडी बैग में भरकर ले जाते बचावकर्मी
बचावकर्मी तट के पास तबाह हुई इमारतों के मलबे में लोगों को ढूंढने की कोशिश में जुटे हैं।
बचावकर्मी तट के पास तबाह हुई इमारतों के मलबे में लोगों को ढूंढने की कोशिश में जुटे हैं।
सुनामी से सुमात्रा और जावा द्वीप के कई शहर प्रभावित हुए।
सुनामी से सुमात्रा और जावा द्वीप के कई शहर प्रभावित हुए।
पत्रकार ओएस्टीन एंडरसन के मुताबिक, जिस वक्त ज्वालामुखी फटा तब वे उसकी फोटो ले रहे थे।
पत्रकार ओएस्टीन एंडरसन के मुताबिक, जिस वक्त ज्वालामुखी फटा तब वे उसकी फोटो ले रहे थे।
आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, सुनामी से मरने वालों की संख्या अभी बढ़ सकती है।
आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, सुनामी से मरने वालों की संख्या अभी बढ़ सकती है।
राहत और बचाव कार्यों के लिए पुलिस के साथ सेना की भी मदद ली जा रही है।
राहत और बचाव कार्यों के लिए पुलिस के साथ सेना की भी मदद ली जा रही है।
बंदार लाम्पुंग में इमारतों के तबाह होने के बाद लोगों को सरकारी कैंपों में लाया गया।
बंदार लाम्पुंग में इमारतों के तबाह होने के बाद लोगों को सरकारी कैंपों में लाया गया।
इंडोनेशिया में सुनामी के बाद भी भड़क रहा है क्राकातोआ ज्वालामुखी।
इंडोनेशिया में सुनामी के बाद भी भड़क रहा है क्राकातोआ ज्वालामुखी।
Tsunami in Indonesia many killed and injured news and updates
Next
1 / 13
इंडोनेशिया में शनिवार शाम क्राकातोआ ज्वालामुखी फटने के बाद समुद्र में भूस्खलन हुआ
भूस्खलन से समुद्र में ऊंची लहरें उठीं, जिससे तट पर मौजूद इमारतें तबाह हो गईं
Dainik Bhaskar
Dec 24, 2018, 11:45 AM IST
जकार्ता. इंडोनेशिया की सुंदा खाड़ी में सुनामी की चपेट में आकर 281 लोगों की मौत हो गई। 1000 से ज्यादा जख्मी हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार देर रात अनाक क्राकातोआ ज्वालामुखी फटने के बाद समुद्र के नीचे भूस्खलन आ गया। इससे उठी ऊंची लहरों ने तटीय इलाकों में तबाही मचा दी। दक्षिणी सुमात्रा के किनारे स्थित कई इमारतें तबाह हो गईं।

1:32




अभी नहीं टला सुनामी का खतरा
सुंदा के तटीय क्षेत्रों में एक और सुनामी आ सकती है। इंग्लैंड की पोर्ट्समाउथ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिचर्ड टियू के मुताबिक, क्राकातोआ ज्वालामुखी अभी भी भड़क रहा है, इसके चलते फिर से समुद्र तल पर भूस्खलन की स्थिति पैदा हो सकती है। 1883 में क्राकातोआ ज्वालामुखी के फटने के बाद करीब 36 हजार लोगों की जान चली गई थी।

मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है
इंडोनेशिया के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रवक्ता सुतोपो पुरवो नुग्रोहो ने मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है। इमारतों के मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए पहले ही पुलिस के साथ सैन्यकर्मियों को लगाया गया है। सुंदा खाड़ी इंडोनेशिया के जावा और सुमात्रा द्वीप के बीच है। यह जावा समुद्र को हिंद महासागर से जोड़ती है। सुमात्रा के दक्षिणी लाम्पुंग और जावा के सेरांग और पांदेलांग इलाके में सुनामी का सबसे ज्यादा असर पड़ा।

लोगों को सावधान नहीं कर पाया आपदा प्रबंधन विभाग
एबीसी के रिपोर्टर डेविड लिप्सन के मुताबिक, आपदा विभाग लोगों को सुनामी के बारे में बताने में नाकाम रहा। पहले ऊंची लहरें उठने पर कहा गया था कि पूरे चांद की वजह से ज्वार भाटा आ सकता है। विभाग ने लोगों से अफवाह न फैलाने की अपील की थी। हालांकि अब एजेंसी ने माफी मांगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस भ्रम की एक वजह यह थी कि सुनामी से पहले भूकंप जैसी कोई गतिविधि नहीं थी।

Indonesia Tsunami
अनक क्राकातोआ एक छोटा ज्वालामुखी द्वीप है। यह 1883 में क्राकातोआ ज्वालामुखी के फटने के बाद अस्तित्व में आया था। नॉर्वे के पत्रकार ओएस्टीन एंडरसन के मुताबिक, ज्वालामुखी फटने के समय वे करीब के ही एक द्वीप से उसकी फोटो ले रहे थे। इसी दौरान एक 50 से 65 फीट ऊंची लहर तट पर आती दिखी। एंडरसन ने बताया कि उन्हें जान बचाकर होटल की तरफ भागना पड़ा। हालांकि, इसके बाद अगली ही लहर होटल तक पहुंच गई। इसकी चपेट में आने से होटल के बाहर खड़ी कारें पलट गईं।

तीन महीने पहले भूकंप और सुनामी से हुई थी 832 लोगों की मौत
इसी साल सितंबर में इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप स्थित पालु और दोंगला शहर में भूकंप के बाद सुनामी आने से 832 लोगों की मौत हो गई थी। हजारों लोग घायल हुए थे। कुल छह लाख की आबादी वाले इन दोनों शहरों में आपदा के बाद बीते तीन महीनों से हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं।

14 साल पहले आई सुनामी में गई थी 2 लाख लोगों की जान
2004 में इंडोनेशिया के सुमात्रा में 9.3 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके बाद हिंद महासागर के तटीय इलाकों वाले देश सुनामी की चपेट में आ गए थे। तब भारत समेत 14 देश सुनामी से प्रभावित हुए थे। दुनियाभर में 2.20 लाख लोगों की जान गई। इनमें 1.68 लाख लोग इंडोनेशिया के थे।

सबसे ज्यादा प्राकृतिक आपदाओं वाला देश इंडोनेशिया
इसी साल जुलाई में इंडोनेशिया में एक हफ्ते के अंतराल में भूकंप के दो झटके आए थे। लोम्बोक में 7 और बाली में 6.4 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था। इनमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी। इंडोनेशिया दुनिया में सबसे ज्यादा प्राकृतिक आपदाओं वाला देश है। यह ‘रिंग ऑफ फायर’ पर मौजूद है। यहां धरती के अंदर मौजूद टेक्टॉनिक प्लेट्स आपस में टकराने से भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाएं ज्यादा होती हैं।

13 कैबिनेट और 10 राज्यमंत्रियों ने शपथ ली, 18 विधायक पहली बार मंत्री बने
मंत्रिमंडल में सिर्फ एक महिला और एक मुस्लिम विधायक को जगह, पायलट खेमे से 7 मंत्री
34 साल के चांदना सबसे युवा और 75 साल के धारीवाल सबसे उम्रदराज मंत्री
मप्र, छत्तीसगढ़ में नए मंत्रियों को मंगलवार को दिलाई जा सकती है शपथ
जयपुर. राजस्थान में सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण हुआ। राज्यपाल कल्याण सिंह ने राजभवन में 13 कैबिनेट और 10 राज्यमंत्रियों को शपथ दिलाई। तीन दिन चले मंथन के बाद दिल्ली में राजस्थान का मंत्रिमंडल तय हुआ था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ चर्चा के बाद 23 मंत्री तय किए थे। गहलोत के खेमे से 13 विधायकों को मंत्री बनाया गया है। वहीं, पायलट के करीबी माने जाने वाले सात विधायक मंत्री बने हैं। दो मंत्रियों का दोनों खेमों से बराबर संपर्क है। हरीश चौधरी ऐसे विधायक हैं जो राहुल की सिफारिश पर मंत्री बनाए गए हैं।
मंत्रिमंडल पर नजर डालें तो 18 विधायक पहली बार मंत्री बने, जबकि पहली बार चुनकर आए 25 से अधिक विधायकों में से किसी को भी मंत्री नहीं बनाया गया। 11 महिला विधायकों में से एकमात्र सिकराय विधायक ममता भूपेश मंत्री बनीं। मुस्लिमों में भी सिर्फ पोकरण विधायक सालेह मोहम्मद को मौका दिया गया। गठबंधन के दल आरएलडी से विधायक सुभाष गर्ग भी मंत्री बनाए गए।
कैबिनेट मंत्री
बीडी कल्ला (बीकानेर पश्चिम), शांति धारीवाल (कोटा उत्तर), परसादी लाल मीणा (लालसोट), मास्टर भंवरलाल मेघवाल (सुजानगढ़), लालचंद कटारिया (झोटवाड़ा), डॉ. रघु शर्मा (केकड़ी), प्रमोद जैन भाया (अंता), विश्वेंद्र सिंह (डीग-कुम्हेर), हरीश चौधरी (बायतू), रमेश मीणा (सपोटरा), उदयलाल आंजना (निंबाहेड़ा) , प्रताप सिंह खाचरियावास (सिविल लाइंस) और सालेह मोहम्मद (पोकरण) को मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया।
राज्यमंत्री और स्वतंत्र प्रभार
गोविंद सिंह डोटासरा (लक्ष्मणगढ़- सीकर), ममता भूपेश (सिकराय), अर्जुन सिंह बामनिया (बांसवाड़ा), भंवर सिंह भाटी (कोलायत), सुखराम विश्नोई (सांचौर), अशोक चांदना (हिंडौली), टीकाराम जूली (अलवर ग्रामीण), भजनलाल जाटव (वैर), राजेन्द्र सिंह यादव (कोटपूतली) गठबंधन दल आरएलडी के सुभाष गर्ग (भरतपुर) को राज्यमंत्री या स्वतंत्र प्रभार वाला मंत्री बनाया गया है।
18 विधायकों को पहली बार बनाया गया मंत्री
रघु शर्मा, लाल चंद, विश्वेंद्र सिंह, हरीश चौधरी, रमेश मीणा, प्रताप सिंह, उदयलाल आंजना, सालेह मोहम्मद, गोविंद डोटासरा, ममता भूपेश, अर्जुन बामनिया, भंवर सिंह, सुखराम विश्नोई, अशोक चांदना, टीकाराम जूली, भजनलाल, राजेन्द्र यादव, सुभाष गर्ग।
मंत्रिमंडल में गहलोत खेमा भारी
अशोक गहलोत खेमा सचिन पायलट खेमा
बीडी कल्ला भंवरलाल मेघवाल
शांति धारीवाल रमेश मीणा
परसादी लाल मीणा प्रताप सिंह खाचरियावास
लालचंद कटारिया डॉ. रघु शर्मा
सालेह मोहम्मद प्रमोद जैन भाया
अर्जुन सिंह बामनिया उदयलाल आंजना
भंवर सिंह भाटी भजनलाल जाटव
सुखराम विश्नोई
अशोक चांदना
टीकाराम जूली
सुभाष गर्ग
विश्वेंद्र सिंह
राजेन्द्र सिंह यादव
दोनों खेमों से बराबर संपर्क : ममता भूपेश और गोविंद सिंह डोटासरा
राहुल गांधी की सिफारिश : हरीश चौधरी (कांग्रेस में सचिव हैं)

23 में से 9 मंत्री ग्रेजुएट, एक 10वीं पास
शिक्षा कितने मंत्री
ग्रेजुएट 9
बारहवीं 7
पोस्ट ग्रेजुएट 3
पीएचडी 3
दसवीं 1
इनमें से एक ने एमबीए, एक ने बीएड और तीन ने एलएलबी की है। सबसे युवा मंत्री 34 साल के अशोक चांदना हैं। सबसे बुजुर्ग 75 साल के शांति धारीवाल हैं।

पूरी कैबिनेट करोड़पति, दो की संपत्ति 100 करोड़ से ज्यादा
उदयलाल आंजना 107 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं। विश्वेंद्र सिंह 104 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं। इनके अलावा मुख्यमंत्री गहलोत और उपमुख्यमंत्री पायलट समेत सभी मंत्री करोड़पति हैं।

जयपुर-भरतपुर से सबसे ज्यादा मंत्री
14 जिलों से कोई मंत्री नहीं। सबसे ज्यादा 3-3 मंत्री जयपुर और भरतपुर से। दौसा-बीकानेर से 2-2, अलवर, चूरू, चित्तौड़, जालौर, बूंदी, अजमेर, कोटा, बाड़मेर, करौली, जैसलमेर, सीकर, बांसवाड़ा और बारां से 1-1 मंत्री बनाए गए हैं।

संवैधानिक पदों पर नवाजे जा सकते हैं वरिष्ठ नेता
विधायक सीपी जोशी, दीपेंद्र सिंह शेखावत, परसराम मोरदिया, भंवर लाल शर्मा, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, राजेंद्र पारीक, विजेंद्र ओला, राज कुमार शर्मा को मंत्री नहीं बनाया। इन्हें विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्यसचेतक, उप मुख्यसचेतक पद दिया जा सकता है।

2019 के लोकसभा चुनाव पर नजर
कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर सियासी समीकरण बैठाने की कोशिश की है। 25 में से 18 संसदीय क्षेत्रों से मंत्री बनाए गए हैं। जिन सात संसदीय क्षेत्रों से मंत्री नहीं बनाए गए हैं, उनमें शामिल पाली, सिरोही और झालावाड़ जिलों से एक भी कांग्रेस विधायक नहीं जीता है।

13 कैबिनेट और 10 राज्यमंत्रियों ने शपथ ली, 18 विधायक पहली बार मंत्री बने
मंत्रिमंडल में सिर्फ एक महिला और एक मुस्लिम विधायक को जगह, पायलट खेमे से 7 मंत्री
34 साल के चांदना सबसे युवा और 75 साल के धारीवाल सबसे उम्रदराज मंत्री
मप्र, छत्तीसगढ़ में नए मंत्रियों को मंगलवार को दिलाई जा सकती है शपथ
जयपुर. राजस्थान में सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण हुआ। राज्यपाल कल्याण सिंह ने राजभवन में 13 कैबिनेट और 10 राज्यमंत्रियों को शपथ दिलाई। तीन दिन चले मंथन के बाद दिल्ली में राजस्थान का मंत्रिमंडल तय हुआ था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ चर्चा के बाद 23 मंत्री तय किए थे। गहलोत के खेमे से 13 विधायकों को मंत्री बनाया गया है। वहीं, पायलट के करीबी माने जाने वाले सात विधायक मंत्री बने हैं। दो मंत्रियों का दोनों खेमों से बराबर संपर्क है। हरीश चौधरी ऐसे विधायक हैं जो राहुल की सिफारिश पर मंत्री बनाए गए हैं।
मंत्रिमंडल पर नजर डालें तो 18 विधायक पहली बार मंत्री बने, जबकि पहली बार चुनकर आए 25 से अधिक विधायकों में से किसी को भी मंत्री नहीं बनाया गया। 11 महिला विधायकों में से एकमात्र सिकराय विधायक ममता भूपेश मंत्री बनीं। मुस्लिमों में भी सिर्फ पोकरण विधायक सालेह मोहम्मद को मौका दिया गया। गठबंधन के दल आरएलडी से विधायक सुभाष गर्ग भी मंत्री बनाए गए।
कैबिनेट मंत्री
बीडी कल्ला (बीकानेर पश्चिम), शांति धारीवाल (कोटा उत्तर), परसादी लाल मीणा (लालसोट), मास्टर भंवरलाल मेघवाल (सुजानगढ़), लालचंद कटारिया (झोटवाड़ा), डॉ. रघु शर्मा (केकड़ी), प्रमोद जैन भाया (अंता), विश्वेंद्र सिंह (डीग-कुम्हेर), हरीश चौधरी (बायतू), रमेश मीणा (सपोटरा), उदयलाल आंजना (निंबाहेड़ा) , प्रताप सिंह खाचरियावास (सिविल लाइंस) और सालेह मोहम्मद (पोकरण) को मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया।
राज्यमंत्री और स्वतंत्र प्रभार
गोविंद सिंह डोटासरा (लक्ष्मणगढ़- सीकर), ममता भूपेश (सिकराय), अर्जुन सिंह बामनिया (बांसवाड़ा), भंवर सिंह भाटी (कोलायत), सुखराम विश्नोई (सांचौर), अशोक चांदना (हिंडौली), टीकाराम जूली (अलवर ग्रामीण), भजनलाल जाटव (वैर), राजेन्द्र सिंह यादव (कोटपूतली) गठबंधन दल आरएलडी के सुभाष गर्ग (भरतपुर) को राज्यमंत्री या स्वतंत्र प्रभार वाला मंत्री बनाया गया है।
18 विधायकों को पहली बार बनाया गया मंत्री
रघु शर्मा, लाल चंद, विश्वेंद्र सिंह, हरीश चौधरी, रमेश मीणा, प्रताप सिंह, उदयलाल आंजना, सालेह मोहम्मद, गोविंद डोटासरा, ममता भूपेश, अर्जुन बामनिया, भंवर सिंह, सुखराम विश्नोई, अशोक चांदना, टीकाराम जूली, भजनलाल, राजेन्द्र यादव, सुभाष गर्ग।
मंत्रिमंडल में गहलोत खेमा भारी
अशोक गहलोत खेमा सचिन पायलट खेमा
बीडी कल्ला भंवरलाल मेघवाल
शांति धारीवाल रमेश मीणा
परसादी लाल मीणा प्रताप सिंह खाचरियावास
लालचंद कटारिया डॉ. रघु शर्मा
सालेह मोहम्मद प्रमोद जैन भाया
अर्जुन सिंह बामनिया उदयलाल आंजना
भंवर सिंह भाटी भजनलाल जाटव
सुखराम विश्नोई
अशोक चांदना
टीकाराम जूली
सुभाष गर्ग
विश्वेंद्र सिंह
राजेन्द्र सिंह यादव
दोनों खेमों से बराबर संपर्क : ममता भूपेश और गोविंद सिंह डोटासरा
राहुल गांधी की सिफारिश : हरीश चौधरी (कांग्रेस में सचिव हैं)

23 में से 9 मंत्री ग्रेजुएट, एक 10वीं पास
शिक्षा कितने मंत्री
ग्रेजुएट 9
बारहवीं 7
पोस्ट ग्रेजुएट 3
पीएचडी 3
दसवीं 1
इनमें से एक ने एमबीए, एक ने बीएड और तीन ने एलएलबी की है। सबसे युवा मंत्री 34 साल के अशोक चांदना हैं। सबसे बुजुर्ग 75 साल के शांति धारीवाल हैं।

पूरी कैबिनेट करोड़पति, दो की संपत्ति 100 करोड़ से ज्यादा
उदयलाल आंजना 107 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं। विश्वेंद्र सिंह 104 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं। इनके अलावा मुख्यमंत्री गहलोत और उपमुख्यमंत्री पायलट समेत सभी मंत्री करोड़पति हैं।

जयपुर-भरतपुर से सबसे ज्यादा मंत्री
14 जिलों से कोई मंत्री नहीं। सबसे ज्यादा 3-3 मंत्री जयपुर और भरतपुर से। दौसा-बीकानेर से 2-2, अलवर, चूरू, चित्तौड़, जालौर, बूंदी, अजमेर, कोटा, बाड़मेर, करौली, जैसलमेर, सीकर, बांसवाड़ा और बारां से 1-1 मंत्री बनाए गए हैं।

संवैधानिक पदों पर नवाजे जा सकते हैं वरिष्ठ नेता
विधायक सीपी जोशी, दीपेंद्र सिंह शेखावत, परसराम मोरदिया, भंवर लाल शर्मा, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, राजेंद्र पारीक, विजेंद्र ओला, राज कुमार शर्मा को मंत्री नहीं बनाया। इन्हें विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्यसचेतक, उप मुख्यसचेतक पद दिया जा सकता है।

2019 के लोकसभा चुनाव पर नजर
कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर सियासी समीकरण बैठाने की कोशिश की है। 25 में से 18 संसदीय क्षेत्रों से मंत्री बनाए गए हैं। जिन सात संसदीय क्षेत्रों से मंत्री नहीं बनाए गए हैं, उनमें शामिल पाली, सिरोही और झालावाड़ जिलों से एक भी कांग्रेस विधायक नहीं जीता है।

पहाड़ों के प्राकृतिक नजारों के बीच आप क्रिसमस डे मना सकते हैं। क्रिसमस में बेस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को माना जाता है। क्रिसमस पर यहां काफी धूम रहती है। दिसंबर में पहाड़ों पर बर्फबारी भी होती है। ऐसे में आपके क्रिसमस डे का मजा स्नोफॉल से दुगुना हो जाएगा।

साल में एक दिन आता है जब सांता निकोलस धरती पर आते हैं और बच्चों को बहुत सारे गिफ्ट देकर जाते हैं। ये लाइन तो हर मां-बाप ने क्रिसमस डे पर अपने बच्चों से जरूर कही होगी, क्योंकि ईसाई धर्म में ऐसा माना जाता है कि क्रिसमस के दिन यीशु मसीह खुद सांता के रूप में आते हैं और सबको प्यार करके जाते हैं। साल के अंतिम दिनों में आने वाला खुशियों भरा ये त्योहार यीशू के जन्मदिन के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन का एक खास महत्व ये भी है कि विश्व भर में इस दिन को सबसे बड़ा दिन भी कहा जाता है और इस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश होता है। ईसाई धर्म में इसका खास महत्व है इसलिए लोग क्रिसमस को बहुत ही धूमधाम से सेलिब्रेट करते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे की क्रिसमस डे की अलसी धूम कहां मचती है और ऐसी कौन-सी जगह है जहां जाकर आपका क्रिसमस यादगार बन जाएगा-
 

शिमला
पहाड़ों के प्राकृतिक नजारों के बीच आप क्रिसमस डे मना सकते हैं। क्रिसमस में बेस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को माना जाता है। क्रिसमस पर यहां काफी धूम रहती है। दिसंबर में पहाड़ों पर बर्फबारी भी होती है। ऐसे में आपके क्रिसमस डे का मजा स्नोफॉल से दुगुना हो जाएगा।
 
पुड्डुचेरी
पुड्डुचेरी में क्रिसमस डे काफी धमाकेधार अंदाज में मनाया जाता है। रात में पूरा पुड्डुचेरी रोशनी से जगमगा जाता है। यीशू का जन्म होते ही खूब आतिशबाजियां होती हैं। क्रिसमस के दिनों में इस शहर की रौनक दोगुनी बढ़ जाती है। दूर-दराज से लोग अपने परिवार संग यहां क्रिसमस मनाने आते हैं। 

 
केरल

क्रिसमस के मौके पर केरल को दुल्हन की तरह तरह सजाया जाता है। भारत के केरल में ईसाइयों की संख्या ज्यादा है, इसलिए यहां क्रिसमस की धूम देखने बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इस फेस्टिवल में ज्यादातार गलियां क्रिसमस ट्री और बड़े-बड़े स्टार्स से सज जाती हैं। यह रौनक गलियों तक ही नहीं रहती है बल्कि मार्केट में भी नज़र आती है। अगर आप कोच्चि जा रहे हैं तो 16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों के जरिए बनाए गए सेंट फ्रांसिस चर्च का दीदार करने ना भूलें।
 
कोलकाता
अब बात करते हैं कोलकाता की तो कोलकाता किसी से कम नहीं है। हर त्योहर की धूम कोलकाता में दिखाई पड़ती है तो इसमें क्रिसमस डे कैसे पीछे हो सकता है। कोलकाता की सड़कें और संकरी गलियां क्रिसमस पर रोशनी के रंग से जगमगाती हैं। चारों ओर इमारतों को लाइट्स और बड़े-बड़े स्टार्स से सजाया जाता है। कोलकाता में इस दिन सेंट पॉल कथेड्रल में बहुत भीड़ देखने को मिलेगी। यहां पर 25 तारीख की रात को 12 बजते ही जीसस क्राइस्ट का जन्म मनाया जाता है। 
 
 
गोवा
गोवा देश-विदेश में अपने पार्टी कलचर के लिए जाना जाता है। भारत के अन्य राज्यों की तुलना में यहां पर चर्च की संख्या ज्यादा है और ईसाई भी ज्यादा मात्रा में हैं इसलिए गोवा में भी क्रिसमस वीक का जश्न बेहद ही खास होता है। 
पांच राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में जो चुनाव के परिणाम आये हैं, उसकी गूंज आने वाले 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में भी दिखायी देंगे। लोकतंत्र के इस मंदिर की चौखट पर विराजमान दृश्य कुछ ऐसा है जिसमें व्यवस्था की सफाई-धुलाई के कोई आसार नहीं है। हालात किसी एक पार्टी तक ही सीमित नहीं, बल्कि सभी प्रमुख दलों में टिकटों की दावेदारी में कांग्रेस, भाजपा और इसके साथ ही कोई भी अन्य दल इनसे अछूता नहीं है। वैसे सच यह है कि व्यक्ति विशेष की छवि से कहीं ज्यादा पैसे का महत्व हावी है। टिकटों की छीना-झपटी में पैसे व प्रलोभन की भूमिका को भांपा जा सकता है।
 
पांच राज्यों की ताजा चुनाव परिणाम शायद इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि वर्ष 2014 वाला जादू, दूसरे शब्दों में जुमला शायद अब ना चले। क्योंकि जनता अब चाय बेचने वाला मोदी, चाय पर चर्चा, आदर्श गांव, स्मार्ट सिटी, स्टार्टअप इंडिया, प्रधान चौकीदार, मन की बात, शब्दों का जादू, शायद अब उसे लुभा नहीं पा रही है या वह इन शब्दों के हकीकत से रू-ब-रू हो चुकी है, जनता द्वारा किये गये वोट शायद इसी की ओर इशारा कर रहे हैं और सरकार को इससे सबक लेना चाहिए। व्यर्थ के मुद्दे, जो वादा पूरा नहीं किया जा सकता, उसे सिर्फ चुनाव जीतने के लिए हथकंडों के रूप में उपयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि एक निश्चित समय के बाद नेताओं द्वारा किये गये वायदे उनके लिए ही आफत लेकर आते हैं और स्थिति ऐसी बनती है कि उन्हें न तो उससे निगलते बनता है और न उगलते बनता है। उनकी स्थिति सांप-छूछूंदर वाली बन जाती है।
 
एग्जिट पोल के परिणाम को धत्ता साबित करते हुए छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने बीजेपी को बुरी तरह से हरा दिया है और एकतरफा बहुमत हासिल किया है। जबकि राजस्थान में कांग्रेस को जादुई आंकड़े से एक सीट कम मिला है, जितना सीट वह अनुमान लगा रही थी, उससे कम मिला है। वहीं मध्यप्रदेश में बहुमत के आंकड़ों से दो सीट कम मिला है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में तमाम नाराजगी के बावजूद बीजेपी के लिए सूपड़ा साफ जैसी स्थिति कहीं नहीं है और दोनों बड़े हिंदीभाषी राज्यों में उसने कांग्रेस को कांटे की टक्कर दी है। तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ही बुरी तरह से धो डाला है। मिजोरम में कांग्रेस के हाथ से सत्ता चली गई है, वहां सत्ता मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के हाथों आ गयी है।
 
आज किसान अपने फसल का दाम, जनता नोटबंदी की मार, बिजनेस करने वाले को अभी तक जीएसटी समझ नहीं आ रही है और बेरोजगार नौकरी के नाम पर हताशा में हैं। केंद्र सरकार येन-केन प्रकारेण रिजर्व बैंक के बटुए को साफ करने पर लगी हुई है और शायद यह भी कारण हो कि गवर्नर उर्जित पटेल की अंतरात्मा झकझोर रही हो और अब इतने समय तक सरकार का साथ देने के बाद उन्हें और कोई उपाय नहीं लग रहा हो जबकि उनके कार्यकाल का अब सिर्फ नौ महीना बचा हुआ था, तब उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया। लेकिन इस्तीफे के पीछे उनका आरबीआइ की स्वायत्ता और उसके रिजर्व को सरकार को ट्रांसफर किए जाने समेत अन्य अहम मुद्दों पर सरकार के साथ टकराव चल रहा था।
 
केंद्र सरकार को उर्जित पटेल के इस्तीफा देने के एक दिन बाद ही आर्थिक मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है। वरिष्ठ अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने प्रधानमंत्री की इकोनॉमिस्ट एडवायजरी काउंसिल से इस्तीफा दे दिया है। भल्ला का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब बीते पन्द्रह महीनों में तीन अर्थशास्त्री सरकार का साथ छोड़ चुके हैं। सबसे पहले अगस्त 2017 में नीति आयोग के पहले उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने अपना पद छोड़ा था, इसके बाद जून 2018 में पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने इस्तीफा दिया और 10 दिसंबर को आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया।
 
विधानसभा चुनावों के नतीजों ने जनता के बदलते मन-मिजाज की एक झलक पेश की है। इन चुनावों को 2019 के आम चुनाव का सेमी फाइनल माना जा रहा है, इसलिए इनके नतीजों में सभी राजनीतिक दलों के लिए कुछ न कुछ संदेश जरूर छिपा है। यह बानगी है मोदी सरकार के कामकाज की। नोटबंदी से लेकर जीएसटी जैसे मुद्दे, पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को भी परे रखें, तो भी केंद्र सरकार के खिलाफ हिंदी पट्टी में एक आक्रोश उभरता हुआ दिख ही रहा था।
 

बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत करिश्मे के सहारे चुनाव दर चुनाव जीत रही थी, लेकिन अभी जीत का सिलसिला अचानक टूट जाना यह बताता है कि मोदी का करिश्मा चल नहीं पा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न सिर्फ एकजुट विपक्ष की ओर से बड़ा चैलेंज मिलेगा, बल्कि उन्हें अपनी पार्टी के भीतर से भी चुनौती मिल सकती है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले एक वर्ष में लगातार अपने को किसानों, आदिवासियों, दलितों और युवाओं के मुद्दे पर फोकस किया और केंद्र सरकार की नाकामियों की ओर जनता का ध्यान खींचा। पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद से राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी को सीधी चुनौती देते रहे हैं। उन्होंने नोटबंदी और राफेल से लेकर बैंकों को हजारों करोड़ का चूना लगाने वाले उद्योगपतियों तक के सवाल ढंग से उठाए। संयोग ही है कि नतीजों के दिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का बतौर पार्टी अध्यक्ष एक साल पूरा हुआ है। कांग्रेस के पक्ष में आए जनादेश को भविष्य के नेता के रूप में राहुल गांधी की स्वीकृति की तरह भी देखा जाएगा। कांग्रेस के साथ कभी हां कभी ना के रिश्ते में जुड़े क्षेत्रीय दलों में भी राहुल गांधी के नेतृत्व से जुड़े संशय कुछ कम हो सकते हैं।

 
जनता अब स्थानीय मुद्दों को ज्यादा तवज्जो दे रही है। सबसे बड़ी बात यह कि हिंदीभाषी राज्यों में उसे कांग्रेस में उम्मीद नजर आ रही है। हिंदीभाषी इलाके में जनता ने केंद्र और राज्य सरकारों के कामकाज के प्रति नाराजगी दिखाई है। कहा जा सकता है कि कांग्रेस की वापसी हो रही है। केंद्र और राज्य सरकारों ने काम करने के जो भी दावे किए, वे जमीनी स्तर पर हवाई साबित हुए। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बीजेपी जिस हिंदुत्व के मुद्दे को उभार कर देशव्यापी माहौल बनाने में जुटी थी, उसका कुछ खास असर चुनावी राज्यों पर नहीं पड़ा। किसानों के सवाल, नौजवानों, दलितों-आदिवासियों के सवाल ज्यादा प्रभावी रहे।
 
कुल मिलाकर अभी तक के रुझानों में बीजेपी के लिए झटका है। देखने वाली बात यह है कि लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले आए इन चुनाव परिणामों का देश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है। क्या पीएम मोदी अर्थव्यवस्था को लेकर कोई बड़ा फैसला करेंगे और इसके साथ ही अब वह क्या रणनीति अपनाएंगे। पांच राज्यों के परिणामों से स्पष्ट है कि अब माहौल उसके खिलाफ हो रहा है। भावनात्मक मुद्दों की हवा निकलना इन नतीजों का दूसरा संदेश है।
 
आम चुनावों में तीन-चार महीने का वक्त बाकी है। देखें, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही जनता से जुड़ाव बनाने में इस समय का कैसा इस्तेमाल करते हैं। चुनाव नतीजों को मोदी सरकार के साढ़े चार साल के कामकाज पर टिप्पणी की तरह भी देखा जाएगा। मोदी चाहे कितना भी अच्छा भाषण कर लें, पर उसकी सार्थकता तभी है जब उनके दावे जमीन पर खरे उतरें। मोदी, शाह का जादू अब ढलान पर है और ऐसा हो सकता है कि मोदी, शाह के बाद नये नेतृत्व बीजेपी को कितना संभाल पायेंगे यह तो आने वाला समय ही बतायेगा? मोदी, शाह की जोड़ी जो हर कुछ को बदलने में लगी है, कहीं जनता 2019 में वोट की चोट पर मोदी, शाह को ही न बदल दें।
 
-बरुण कुमार सिंह

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के सांसद पुत्र अभिषेक सिंह के पनामा पेपर्स मामले सहित पूर्ववर्ती सरकार में हुए 'भ्रष्टाचार के सभी मामलों' की जांच कराई जाएगी और इस संदर्भ में बहुत जल्द आधिकारिक निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र से सुरक्षाबलों की वापसी अभी नहीं होगी। सभी से बातचीत के बाद इसपर फैसला लिया जाएगा।

 बघेल ने कहा, " जब पनामा पेपर्स में नाम होने की वजह से पाकिस्तान में नवाज शरीफ की कुर्सी जा सकती है तो फिर अभिषेक सिंह की जांच क्यों नहीं होगी?' यह पूछे जाने पर कि अभिषेक सिंह के मामले जांच के लिए किसी समिति या जांच दल का गठन किया जाएगा तो मुख्यमंत्री ने कहा, 'इस बारे में जल्द निर्णय होगा और आप लोगों (मीडिया) को सूचित किया जाएगा।" उल्लेखनीय है कि पिछले साल बहुचर्चित “पनामा पेपर्स” में अभिषेक सिंह का नाम आया था। अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज करते हुए अभिषेक ने उस वक्त कहा था कि उनके तथाकथित विदेशी अकाउंट से संबंधित जो विषय उठाए जा रहे हैं, वो पूरी तरह से असत्य एवं राजनीति से प्रेरित हैं। उनका कहना था कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है।
 
 मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले की जांच के लिए एसआईटी के गठन का मुख्य उद्देश्य ‘राजनीतिक षड्यंत्र’ का खुलासा करना है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रूप से दो बातें हैं, जब 23 मई और 24 मई को परिवर्तन यात्रा में शामिल नेताओं को सुरक्षा दी गई तब 25 तारीख को सुरक्षा क्यों हटा ली गई। इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं। दूसरा यह कि नक्सली, घटना को अंजाम देने के बाद तुरंत निकल जाते हैं। यह पहली घटना है जिसमें पूछा गया कि नंद कुमार पटेल कौन है, दिनेश पटेल कौन है, महेंद्र कर्मा कौन है। जैसे ही वह लोग मिले उन्होंने गोलीबारी बंद कर दी। इसलिए उनका उद्देश्य केवल इन नेताओं को मारना था। इसका मतलब यह है कि यह षड़यंत्र था। 

इंदौर। बजरंग बली की जाति-धर्म को लेकर भाजपा नेताओं द्वारा की जा रही बयानबाजी पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने रविवार को निशाना साधा। उन्होंने कहा कि "हिन्दू देवता पर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य भाजपा नेताओं के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा अखाड़ा परिषद जैसे संगठनों को कोई भी संबंध नहीं रखना चाहिये और इन नेताओं का सार्वजनिक रूप से तिरस्कार किया जाना चाहिये।" उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, "हनुमानजी को लेकर अनर्गल बहस की शुरूआत उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजरंग बली को दलित कहकर की थी। इसके बाद अन्य भाजपा नेताओं ने बजरंग बली को मुसलमान और जाट भी बता दिया।" 

 

 71 वर्षीय राज्यसभा सांसद ने कहा, "हम हनुमानजी को भगवान शंकर का अवतार मानते हैं। लेकिन भाजपा नेता हनुमानजी को भी जाति-धर्म के मामले में घसीट रहे हैं। आखिर ये नेता किस धर्म का पालन कर रहे हैं?" उन्होंने मांग की योगी और अन्य भाजपा नेताओं को भगवान हनुमान पर अपने आपत्तिजनक बयानों के लिये माफी मांगनी चाहिये। इसके साथ ही, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और अखाड़ा परिषद जैसे संगठनों को इन नेताओं का सार्वजनिक रूप से बहिष्कार व तिरस्कार करना चाहिये।  दिग्विजय ने मध्यप्रदेश के हालिया विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बहुचर्चित बयान "टाइगर जिंदा है" पर तंज कसा।  उन्होंने कहा, "टाइगर (शिवराज) के नाखून और दांत तो निकल चुके हैं। वैसे भी संकटग्रस्त प्रजाति के टाइगर के संरक्षण की जवाबदारी अब हमारी (नवगठित कांग्रेस सरकार) है।" 
 
प्रदेश की नवगठित कांग्रेस सरकार की कर्जमाफी योजना के दायरे में कथित रूप से नहीं आने के कारण खंडवा जिले में आदिवासी तबके के 45 वर्षीय किसान ने हाल ही में आत्महत्या कर ली है। इस बारे में पूछे जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "मुझे इस मामले की हालांकि जानकारी नहीं है। लेकिन हमने सूबे में किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा जून 2018 में की थी। उस अवधि (जून 2018 तक) में जितने भी किसान कर्जदार थे, उनके कर्ज माफ होंगे।" दिग्विजय ने एक सवाल पर आरोप लगाया कि व्यापमं घोटाले की जांच कर रही सीबीआई इस मामले को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, "इन हालात में व्यापमं मामले को लेकर उठाये जाने वाले कदमों पर हम अध्ययन कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि "आगामी लोकसभा चुनाव तय करेंगे कि देश महात्मा गांधी के दिखाये रास्ते पर चलेगा या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक (प्रमुख) माधव सदाशिव गोलवलकर के प्रदर्शित पथ पर आगे बढ़ेगा।" 

 

पुणे (महाराष्ट्र)। तीन हिंदी भाषी राज्यों में हाल में भाजपा की हार के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को कहा कि ‘‘नेतृत्व’’ को ‘‘हार और विफलताओं’’ की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। साफगोई के लिये चर्चित भाजपा नेता ने कहा कि सफलता की तरह कोई विफलता की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता।  

गडकरी ने कहा, ‘‘सफलता के कई दावेदार होते हैं लेकिन विफलता में कोई साथ नहीं होता। सफलता का श्रेय लेने के लिये लोगों में होड़ रहती है लेकिन विफलता को कोई स्वीकार नहीं करना चाहता, सब दूसरे की तरफ उंगली दिखाने लगते हैं।’’ 
 
वह यहां पुणे जिला शहरी सहकारी बैंक असोसिएशन लिमिटेड द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। 

नयी दिल्ली : वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने शनिवार को आम लोगों को राहत देते हुए टीवी स्क्रीन, सिनेमा के टिकट और पावर बैंक सहित विभिन्न प्रकार की 23 वस्तुओं पर जीएसटी की दरों में कमी की घोषणा की. हालांकि, देश के उपभोक्ताओं को अभी पेट्रोल और सीमेंट की दरों पर से जीएसटी की कटौती के लिए इंतजार करना होगा. टैक्स की दरों में संशोधन का यह फैसला आगामी नये साल के पहले दिन यानी एक जनवरी से प्रभावी होगा. परिषद की 31वीं बैठक के बाद यहां वित्त मंत्री अरूण जेटली ने इन फैसलों की घोषणा की.

 

उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रकार की वस्तुओं पर जीएसटी दरें कम करने से सालाना राजस्व में 5,500 करोड़ रुपये का असर पड़ेगा. परिषद ने जीएसटी की 28 फीसदी की सबसे ऊंची टैक्स के दायरे में आने वाली वस्तुओं में से सात को निम्न दर वाले स्लैब में डाल दिया है. इसके साथ ही, 28 फीसदी के स्लैब में अब केवल 28 वस्तुएं बची हैं.

जेटली ने कहा कि जीएसटी की दरों को तर्कसंगत बनाना एक सतत प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि 28 फीसदी की दर का धीरे-धीरे पटाक्षेप हो जायेगा. अगला लक्ष्य परिस्थिति अनुकूल होने के साथ सीमेंट पर जीएसटी में कमी करना है. अब 28 फीसदी की कर दर वाहनों के कल-पुर्जों और सीमेंट के अलावा केवल विलासिता के सामान और अहितकर वस्तुओं पर ही रह गया.

वित्त मंत्री ने बताया कि सिनेमा के 100 रुपये तक के टिकटों पर अब 18 फीसदी की बजाय 12 फीसदी की दर से और 100 रुपये से ऊपर के टिकट पर 28 फीसदी की बजाय 18 फीसदी की जीएसटी लगेगा. इसी तरह 32 इंच तक के मॉनिटर और टीवी स्क्रीन पर अब 28 फीसदी की बजाय 18 फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा. वस्तुओं पर जीएसटी की संशोधित दरें एक जनवरी, 2019 से लागू होगी.

सूत्रों के मुताबिक, एसी, टीवी, वॉशिंग मशीन आदि से टैक्स कटौती के जरिये मध्य वर्ग को नये साल का तोहफा दिया जा रहा है. वहीं, सीमेंट पर टैक्स कटौती से निर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने की तैयारी है. जीएसटी के पांच टैक्स स्लैब 0, 8, 12, 18 और 28 फीसदी हैं. टैक्स अनुपालन को आसान बनाने और व्यापारियों को राहत देने संबंधी उपायों पर भी विचार हो रहा है.

सूत्रों के मुताबिक, शीतल पेय, सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू उत्पाद, पान मसाला, धूम्रपान पाइप, वाहन, विमान, याट, रिवाल्वर और पिस्तौल और गैंबलिंग लॉटरी पर 28 फीसदी टैक्स लगता रहेगा.

नयी दिल्ली : सरकार 5जी नेटवर्क की व्यावसायिक शुरुआत करते समय हुआवेई जैसी चीन की दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनियों से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे से संबंधित आशंकाओं पर गौर करेगी. हालांकि, जहां तक 5जी सेवाओं के परीक्षण में इन कंपनियों के भाग लेने की बात है, सरकार को फिलहाल इससे कोई दिक्कत नहीं है.

दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि सरकार सुरक्षा संबंधी आशंकाओं को लेकर वैश्विक परिस्थिति पर नजर रख रही है. 5जी सेवाओं के परीक्षण में चीन की दूरसंचार उपकरण कंपनियों की भागीदारी से फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है. इन आशंकाओं पर 5जी सेवाओं की व्यावसायिक शुरुआत के समय मंत्रालयों के एक समूह द्वारा गौर किया जायेगा. 

हुआवेई ने वोडाफोन आइडिया लिमिटेड के साथ मिलकर देश में 5जी परीक्षण का प्रस्ताव दिया है. दोनों कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी इस संबंध में दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन से मुलाकात कर चुके हैं. दूरसंचार निर्यात संवर्धन परिषद ने हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से अनुरोध किया था कि हुआवेई, जेडटीई और फाइबरहोम जैसी चीन की दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनियों से सरकारी सेवाओं के लिए उपकरण खरीदने पर रोक लगा दी जाये. परिषद ने इन कंपनियों से राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा होने की आशंका व्यक्त की थी.

Ads

R.O.NO. 13784/149 Advertisement Carousel

MP info RSS Feed

फेसबुक