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नयी दिल्ली। सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला संविधान 124वां संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश कर दिया गया। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने संविधान (124 वां संशोधन) विधेयक, 2019 पेश किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को ही इसे मंजूरी प्रदान की है।

 

 विधेयक पेश किये जाने के दौरान समाजवादी पार्टी के कुछ सदस्य अपनी बात रखना चाह रहे थे लेकिन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इसकी अनुमति नहीं दी।  उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण को सोमवार को मंजूरी दी। सूत्रों के अनुसार, यह कोटा मौजूदा 50 प्रतिशत आरक्षण से अलग होगा।
 
सामान्य वर्ग को अभी आरक्षण हासिल नहीं है। समझा जाता है कि यह आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे गरीब लोगों को दिया जाएगा, जिन्हें अभी आरक्षण का फायदा नहीं मिल रहा है। आरक्षण का लाभ उन्हें मिलने की उम्मीद है जिनकी वार्षिक आय आठ लाख रूपये से कम होगी और 5 एकड़ तक जमीन होगी।
 

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फोन पर बातचीत कर रक्षा, आतंकवाद विरोधी कदमों और ऊर्जा के क्षेत्रों में बढ़ते द्विपक्षीय सहयोग को सराहा। अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने बातचीत के दौरान एक दूसरे को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं और वर्ष 2018 में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझीदारी लगातार बढ़ने पर संतोष व्यक्त किया।

 

 उन्होंने नई 2+2 वार्ता व्यवस्था और भारत, अमेरिका एवं जापान के बीच पहले त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन की भी प्रशंसा की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक मामलों पर समन्वय के अलावा रक्षा, आतंकवाद रोधी कदमों और ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ते द्विपक्षीय सहयोग को भी सराहा।
 
मोदी और ट्रम्प ने सोमवार शाम हुई वार्ता में 2019 में भारत-अमेरिकी संबंधों को और मजबूत बनाने तथा मिलकर काम करने पर सहमति जताई।

नयी दिल्ली। नागरिकता संशोधन विधेयक पर कुछ वर्गों की आशंकाओं को निर्मूल बताते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि असम की सीमा देश की सीमा है और जो भी जरूरी होगा, केंद्र सरकार वह सब करेगी। सिंह ने संसद की संयुक्त समिति द्वारा यथाप्रतिवेदित नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को लोकसभा में चर्चा एवं पारित करने के लिये रखते हुए यह बात कही। कांग्रेस एवं तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया।

यह विधेयक नागरिकता कानून 1955 में संशोधन के लिए लाया गया है। इस विधेयक के कानून बनने के बाद, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 12 साल के बजाय छह साल भारत में गुजारने पर और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता मिल सकेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दी। इस पर संसद की संयुक्त समिति ने विचार किया है और समिति में तृणमूल कांग्रेस समेत कुछ दलों के सदस्यों ने असहमति का नोट दिया था। 

सदन में सिंह ने बताया कि असम के छह समुदायों को आदिवासी समुदाय का दर्जा देने की मांग लम्बे समय से की जा रही थी। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में एक समिति का गठन किया था और समिति ने सिफारिश दे दी है। इस बारे में विचार विमर्श भी किया गया है। इसके अनुरूप कोच राजभोगशी, ताइ आहोम, चोटिया, मतक, मोरान एवं चाय बागान से जुड़े समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी में शामिल किया जाने का प्रस्ताव है। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार इस संबंध में विधेयक लायेगी।

 

उन्होंने कहा कि असम समझौता एक महत्पूर्ण स्तम्भ है। इसमें असम के लोगों की सामाजिक, सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने की बात कही गई। इसके लिये कानूनी एवं प्रशासनिक आधार तैयार करने की बात भी कही गई। लेकिन पिछले वर्षो में ऐसा नहीं हुआ। राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस विषय पर एक समिति का गठन किया है। यह समिति सभी पक्षकारों से परामर्श करेगी और सांस्कृतिक, सामाजिक एवं भाषायी पहचान के बारे में छह मार्च तक अपनी सिफारिशें देगी। उन्होंने कहा कि सरकार बोडो समुदाय की मांगों के बारे में न केवल चिंता करती है बल्कि इसके लिये प्रतिबद्ध भी है।

गृह मंत्री ने कहा कि नागरिकता विधेयक के संबंध में गलतफहमी पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है और असम के कुछ भागों में आशंकाएं पैदा करने की कोशिक हो रही है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सिर्फ असम के लिये नहीं है बल्कि ऐसे हजारों लोगों के लिये है जो पश्चिमी सीमा से आकर दिल्ली, गुजरात एवं अन्य स्थानों पर रह रहे हैं। यह सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा। इसके पीछे सोच यह है कि उत्पीड़न के शिकार प्रवासी देश के किसी हिस्से में रह सकें। सिंह ने जोर दिया कि पाकिस्तान में राष्ट्र एवं समुदाय के स्तर पर अल्पसंख्यकों के साथ सुनियोजित तरीके से भेदभाव किया जाता है। उन्हें बुनियादी अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता से वंचित किया जाता है।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और अफगानिस्तान में वर्तमान सरकार अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा को प्रतिबद्ध है। लेकिन इन देशों में भी घटनाएं सामने आई हैं। गृह मंत्री ने कहा कि ऐसे में इन लोगों के पास भारत में रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का जिक्र करते हुए कहा कि इसे उचित ढंग से लागू किया जा रहा है। इसके तहत शिकायत करने का प्रावधान किया गया है। हम प्रक्रिया पूरी करने को प्रतिबद्ध है। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा।

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय द्वारा आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद पर मंगलवार को बहाल किए जाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राफेल मामले की जांच से कोई नहीं बचा सकता और पूरे देश को पता चलेगा कि मोदी ने 30 हजार करोड़ रुपये अपने ‘मित्र’ अनिल अंबानी को दे दिए। संसद भवन परिसर में गांधी ने संवाददाताओं से कहा कि सीबीआई प्रमुख को रात एक बजे हटाया गया था क्योंकि वह राफेल मामले की जांच शुरू करने वाले थे।

 

उन्होंने कहा, ‘सीबीआई प्रमुख को रात में एक बजे हटाया गया था क्योंकि वह राफेल मामले की जांच शुरू करने वाले थे। अब न्यायालय के फैसले से हमें कुछ राहत मिली है। अब देखते हैं कि आगे क्या होता है।’ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘सीबीआई प्रमुख बहाल हो गए हैं। वे (प्रधानमंत्री) इस मामले की जांच से भाग नहीं सकते... यह असंभव है। मोदी जी चर्चा से भाग गए। उन्हें राफेल मुद्दे पर जनता की अदालत में हमसे चर्चा करनी चाहिए थी। उन्हें राफेल मामले (की जांच) से नहीं बचा सकते। (वह) कोई भी चर्चा से भाग नहीं सकते।’

इससे पहले, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ‘वह (मोदी) सीबीआई को बर्बाद करते हुए बेनकाब होने वाले पहले प्रधानमंत्री बने। इसके बाद उन्होंने सीवीसी की विश्वसनीयता को खत्म किया। अब वह पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं जिनके गैरकानूनी आदेशों को शीर्ष अदालत ने रद्द कर दिया है।’ उन्होंने कहा, ‘मोदी जी, कृपया याद रखिए कि सरकारें आती-जाती हैं। हमारे संस्थानों की गरिमा बरकरार रही है।’

 

गौरतलब है कि मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद पर बहाल करते हुए उनके अधिकार वापस लेने और छुट्टी पर भेजने के केन्द्र के फैसले को रद्द कर दिया। हालांकि शीर्ष अदालत ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की जांच पूरी होने तक वर्मा के, कोई भी बड़ा निर्णय लेने पर रोक लगा दी है।

नयी दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा कि सीबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने का सरकार का निर्णय केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की अनुशंसा पर लिया गया था। उच्चतम न्यायालय द्वारा सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को पद पर बहाल करने का फैसला सुनाये जाने के बाद संसदीय परिसर में संवाददाताओं से जेटली ने कहा कि सरकार शीर्ष अदालत के आदेशों का अनुपालन करेगी।

वर्मा एवं सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजे जाने के निर्णय का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, “सरकार ने यह फैसला सीबीआई की संप्रभुता को बचाए रखने के लिए किया...सरकार ने सीबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारियों को छुट्टी पर भेजे जाने की कार्रवाई सीवीसी की अनुशंसा पर की थी।’’उन्होंने कहा कि न्यायालय ने एक हफ्ते के भीतर फैसला लेने के लिए मुद्दे को समिति के पास भेज दिया है। जेटली ने कहा, “सीबीआई की निष्पक्ष एवं भेदभाव रहित कार्यशैली के व्यापक हित को देखते हुए न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर सीबीआई निदेशक को मिली सुरक्षा को मजबूत किया है। साथ ही साथ न्यायालय ने जवाबदेही की व्यवस्था का रास्ता भी निकाला है। न्यायालय के निर्देशों का निश्चित तौर पर अनुपालन होगा।”
 
वर्मा के अधिकार वापस ले लेने के केंद्र को फैसले को दरकिनार करते हुए उच्चतम न्यायालय ने वर्मा की बहाली कर दी लेकिन उनपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की सीवीसी जांच खत्म होने तक उन्हें कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला लेने से रोक दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि वर्मा के खिलाफ आगे कोई भी फैसला उच्चाधिकार प्राप्त समिति लेगी जो सीबीआई निदेशक का चयन एवं नियुक्ति करती है। गौरतलब है कि वर्मा को केंद्र सरकार के 23 अक्टूबर के फैसले के बाद छुट्टी पर भेज दिया गया था और वह 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। 

महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों को लेकर एक बार फिर बीजेपी और शिवसेना के बीच द्वंद्व शुरू हो गया है, पिछली बार जब ऐसा हुआ था तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ अकेले एक कमरे में मुलाकात की थी। जिसके बाद दोनों पार्टियों के बीच रिश्ते सामान्य होते हुए दिखाई दे रहे थे। लेकिन, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा लगातार बीजेपी को राफेल मामले में निशाने पर लिए जाने के बाद से देखा जा रहा है कि शिवसेना अब बीजेपी को आंख दिखा रही है। 

पिछले दिनों शिवसेना प्रमुख ने राफेल पर जेपीसी बनाए जाने का समर्थन किया तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए चौकीदार का नारा अपनी रैलियों में लगवाया। हालांकि, इसके बाद भी बीजेपी ने नरम रुख अख्तियार करते हुए उद्धव ठाकरे के बयानों को नजरअंदाज किया। 

इसी बीच अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि प्रदेश की 48 में से 40 सीटें हमें जीतनी है। जिसके बाद अमित शाह ने भी इस बयान का उल्लेख किया। 

2014 का लोकसभा चुनाव

साल 2014 में हुए लोकसभा चुनावों से ठीक पहले शिवसेना ने बीजेपी के साथ अपना नाता समाप्त कर दिया। विशेषज्ञों ने माना था कि करीब ढाई दशक से एक साथ काम कर रही शिवसेना के भीतर इतना आत्मविश्वास भर गया था कि वह प्रदेश की आधी सीटें आसानी से जीत सकती है। हालांकि चुनाव नतीजों में साफ हो गया और शिवसेना के खेमे में 18 सीटें आई। 

बता दें कि शिवसेना के मुखपत्र सामना में छप रहे लेखों से यह तो साफ हो गया कि भले ही शिवसेना ने चुनावों के बाद बीजेपी को समर्थन देकर देवेंद्र फडणवीस को प्रदेश की सत्ता सौंप दी हो लेकिन वह खुद को इसके काबिल मानते थे। 

अमित शाह के साथ उद्धव ठाकरे की मुलाकात

जून के पहले सप्ताह में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री में संपर्क फॉर समर्थन के मुहीम के जरिए भाजपा प्रमुख अमित शाह एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुलाकात की। यह मुलाकात एक कमरे में हुई जहां पर इन तीनों नेताओं के अलावा आदित्य ठाकरे मौजूद थे। इस मुलाकात के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि शिवसेना और बीजेपी के बीच रिश्ते सामान्य हो गए। 

निकाय चुनाव से पहले बीजेपी और शिवसेना के बीच द्वंद्व

जून में हुई मुलाकात से पहले फरवरी में महाराष्ट्र में निकाय चुनाव हुए। इन चुनावों के बीच में बीजेपी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर सामना पर प्रतिबंध लगाने की गुहार लगाई। बीजेपी ने यह पत्र लिखा ही था कि उद्धव ठाकरे ने बीजेपी को निशाने में लेते हुए कहा कि क्या बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का मुंह बंद करा पाएगी।

सामना में छप रहे लेख में ऐसे ही बयानों के ढेर लग गए। हालांकि जब दोनों राजनीतिक दलों की मुलाकात हुई तो सामना में ठाकरे की तर्ज पर लेख छपा कि सरकार को सत्ता संभालते हुए चार साल बीत गए और उनके पास राजग के साथ मुलाकात करने का वक्त था मगर हमारे साथ नहीं। वहीं, इस मुलाकात को चुनावी रणनीति करार दिया और यह दर्शा दिया कि एक बार फिर वह आने वाले लोकसभा चुनावों में अपने दम पर प्रदेश की सीटें हासिल करेंगे।

कांग्रेस नेताओं एवं गठबंधन का समर्थन करते हुए दिखे ठाकरे

कई बार ऐसे मौके सामने आए जहां पर कांग्रेसी नेताओं एवं कांग्रेस के साथ की राजनीतिक पार्टियों के समर्थन पर सामना मे लेख छपा। अमित शाह द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा करने के बाद सामना ने लिखा कि चुनावों के दौरान सोशल मीडिया के जरिए जनता को बरगलाने के बाद आज उपदेश देने आई है बीजेपी। 

पिछले साल अक्टूबर में सोशल मीडिया पर अंकुश लगाने के लिए बीजेपी एक नया कानून ले कर आ रही थी। जिसके बाद सामना ने लिखा कि बीजेपी ने विरोधियों की बदनामी, अवमानना और दुष्प्रचार के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया और पर्दाफाश होने के बाद कानून की बात कर रही है।

इसी के बाद शिवसेना ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार का समर्थन करते किया और पवार का बयान छापा कि अभिव्यक्ति की आजादी वाले युवकों अपने विचार व्यक्त करते समय अपना एक पैर कारागृह में रखकर सोशल मीडिया में बोलते रहो।

ऐसे कई मौके आए जब शिवसेना ने कांग्रेसियों का या फिर उनसे वास्ता रखने वाले राजनीतिक पार्टियों का समर्थन किया हो। हाल ही में राफेल मामले में कांग्रेस का समर्थन करते हुए जेपीसी की मांग की। उससे पहले राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को चौकीदार चोर कहने वाले बयान का उपयोग अपनी रैलियों में करते हुए देखे गए।

विशषज्ञों का मानना है कि पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद शिवसेना को ऐसा प्रतीत हो रहा है कि देश में बीजेपी की छवि धूमिल हुई है एवं 2019 के चुनावों में बीजेपी एवं उनके साथी पार्टियों को काफी नुकसान होने वाला है। ऐसे में शिवसेना अपने दम पर प्रदेश का चुनाव लड़ना चाहेगी और फिर चुनावों के बाद स्थिति को टटोलते हुए उस राजनीतिक पार्टी के साथ गठबंधन कर सकती है, जिसकी सरकार बनने के आसार हों। 

शिवसेना नेताओं के बीच फूट के आसार

मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक शिवसेना के सांसदों का मानना है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन करना चाहिए और मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए, तभी हम सभी सीटों को जीत पाएंगे। जबकि शिवसेना के राज्यसभा सांसदों की माने तो उनका साफ कहना है कि प्रदेश में इस बार हमें किसी के साथ गठबंधन करने की जरुरत नहीं है। पिछले लोकसभा चुनावों की तर्ज पर इस बार भी हमें अकेले ही चुनाव लड़ना चाहिए। ऐसे में यह माना जा रहा है कि बीजेपी के साथ गठबंधन के लिए शिवसेना के भीतर फूट पड़ सकती है और जैसा देखा गया कि दल-बदल का खेल शुरू हो सकता हैं। 

नयी दिल्ली। कर्नाटक सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर कर बढ़ाये जाने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को राज्य की कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार की नीति की आलोचना की और कहा कि आखिर जनता ‘‘राज्य सरकार के भ्रष्टाचार और निकम्मेपन’’ के लिये भारी कीमत क्यों चुकाये? शाह ने ट्वीट किया, ‘कर्नाटक में मौजूदा सरकार के शासनकाल में किसान मर रहे हैं। दलितों को गुलाम बनाया जा रहा है। आम जनता कर के बोझ से दबी जा रही है। आखिर कर्नाटक की जनता राज्य सरकार के भ्रष्टाचार और उसकी निकम्मेपन के लिये इतनी भारी कीमत क्यों चुकाये?’

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट के चलते राज्य के राजकोषीय संग्रह पर इसके विपरीत असर का हवाला देते हुए कर्नाटक की कांग्रेस-जद (एस) सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर कर की दर को बढ़ाकर क्रमश: 32 प्रतिशत और 21 प्रतिशत कर दिया है। इसके एक दिन बाद भाजपा अध्यक्ष की यह टिप्पणी सामने आयी है। शाह ने इससे पहले किसानों की आत्महत्या और दलितों को कथित तौर पर गुलाम बनाये जाने के मुद्दे पर राज्य सरकार पर हमला बोला था।

डाल्टनगंज। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर कर्ज माफी के नाम पर किसानों को ‘गुमराह’ करने का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा कि विपक्षी दल उन्हें महज ‘वोट बैंक’ समझता है। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए किसान ‘अन्नदाता’ हैं जिनके वास्तविक कल्याण के लिए उनकी सरकार गंभीरता से काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने झारखंड में यहां एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘हम किसानों को अन्नदाता समझते हैं जबकि पूर्ववर्ती सरकारों ने उन्हें महज वोट बैंक समझा।’ मोदी ने शनिवार को झारखंड में 2,391.36 करोड़ रुपए की कोयल कारो मंडल बांध सहित कई सिंचाई परियोजनाओं की नींव रखने के बाद जनसभा को संबोधित किया। इस बांध से झारखंड के 19604 हेक्टेयर तथा बिहार के कुछ इलाकों में सिंचाई होगी।

उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस की सरकार ने किसानों को कर्ज लेने के लिए बाध्य किया और आज वे कर्जमाफी के वादों से उन्हें गुमराह कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘अगर मैंने किसानों को वोट बैंक समझा होता तो मैं उनके एक लाख रुपये का कर्ज माफ कर देता... इससे किसानों को तुरंत राहत मिल जाती लेकिन हमारी प्राथमिकता उन्हें सुविधाएं मुहैया कराना है ताकि उनके उत्पाद को बढ़ावा मिले और उनकी आय दोगुनी हो जाए। इससे किसानों को पीढ़ियों तक राहत मिलेगी।’ मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा, ‘उन्हें नहीं मालूम होगा कि कोयल क्या है... यह सिंचाई परियोजना है या किसी नदी या चिड़िया का नाम है।’

 

प्रधानमंत्री ने इस महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना पर मिलकर काम करने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास की प्रशंसा की और कहा कि यह संघवाद का अच्छा उदाहरण है जिससे दूसरों को भी सीखना चाहिए। दास और दोनों राज्यों के कई सांसदों की मौजूदगी में उन्होंने कहा, ‘ऐसे समय में जब कई राज्य एक-दूसरे से लड़ रहे हैं, जिस तरह से नीतीश कुमार और रघुवर दास और दोनों राज्यों के सांसदों ने कोयल कारो मंडल परियोजना के लिए मिलकर काम किया, वह संघवाद का अच्छा उदाहरण है जिससे दूसरों को भी सीखना चाहिए।’ जनसभा को संबोधित करने से पहले मोदी ने यहां ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (पीएमएवाय) के लाभार्थियों में से पांच को उनके मकानों की चाबी सौंपी।

प्रधानमंत्री ने पूर्व सरकारों पर कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें झारखंड के किसानों के हितों की परवाह नहीं थी, मंडल बांध परियोजना में देरी इसका सबूत है। बांध पर काम 1972 में शुरू किया गया थे लेकिन 1993 में इसे रोक दिया गया था। इसे लातेहार जिले के बरवाडीह ब्लॉक में उत्तरी कोयल नदी पर बनाया जाएगा। बिहार के औरंगाबाद और गया के अलावा राज्य के लातेहार, पलामू और गढ़वा जिलों में 19,604 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई सुविधाएं बेहतर होंगी। मोदी ने बिहार और झारखंड सरकार का किसान सुमदाय के हित के लिए काम करने हेतु शुक्रिया भी अदा किया।

 

प्रधानमंत्री ने झारखंड में करीब 3500 करोड़ रुपए की कई विकास परियोजनाओं की नींव रखी। पीएमएवाई योजना पर बात करते हुए मोदी ने कहा कि पहले आवास योजना के अधीन कुछ नया प्रदान नहीं करने के लिए उनकी सरकार की आलोचना की जा रही थी। उन्होंने कहा, ‘रिमोट कंट्रोल संचालित सरकार के दिनों में इस योजना के तहत केवल 25 लाख मकान बनाए गए जबकि हमने साढ़े चार वर्षों में करीब सवा करोड़ मकान बनाए हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हमारा लक्ष्य ग्रामीण और शहरी सभी इलाकों में सबको घर मुहैया कराना है। हम राजनेताओं के नाम पर योजनाओं का नाम रखने में विश्वास नहीं करते, योजना के तहत लाभ पहुंचना (लोगों को) मायने रखता है।‘ 

मोदी ने कहा कि इस योजना के तहत मुहैया मकानों में गैस, बिजली कनेक्शन, शौचालय सहित सभी बुनियादी सुविधाएं होंगी। उन्होंने कहा कि राजग सरकार पारदर्शिता में विश्वास करती है और दलालों द्वारा किसानों का फायदा उठाने की कोई गुंजाइश नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के खातों में सीधे पैसे जमा करा पारदर्शी तरीके से काम कर रहे हैं। प्रणाली में दलाली की कोई गुंजाइश नहीं है।’

नयी दिल्ली। भाजपा ने शनिवार को दावा किया कि उसके पास अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर करार के बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल द्वारा कथित तौर पर लिखा गया एक पत्र है, जिससे ‘‘रोम और रागा की कहानी’’ का खुलासा होता है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कांफ्रेंस में मिशेल के कथित पत्र को पढ़ कर सुनाया। इस ‘‘पत्र’’ में मिशेल ने कथित तौर पर लिखा है कि ‘‘करार की राह के सभी अड़ंगों से निपट लिया गया है।’’ 

 

 पात्रा ने कहा, ‘‘क्रिश्चियन मिशेल ने डिस्पैच के रूप में हजारों पत्र लिखे थे और उसने भारत में रहने के बावजूद उन पत्रों को भेजा। भारत में जब वह ‘दलाल’ और बिचौलिये के तौर पर रह रहा था, तब वह अगस्तावेस्टलैंड के सीईओ को पत्र लिखा करता था।’’ 
 
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी एजेंसियों को इनमें से कुछ पत्र मिले हैं। हमें मीडिया के जरिए ऐसा ही एक पत्र मिला। इस पत्र से रोम और रागा के पीछे की कहानी का खुलासा हो जाएगा।’’ 

कोलकाता। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में बसपा के साथ मिल कर आगामी आम चुनाव में भाजपा को हराने में सक्षम है और इसके लिए कांग्रेस जैसी “गैर जरूरी”ताकत की जरूरत नहीं है। हालांकि उन्होंने यह संकेत दिया कि सपा-बसपा गठबंधन रायबरेली एवं अमेठी निर्वाचन क्षेत्र को छोड़ सकता है जिनका लोकसभा में प्रतिनिधित्व क्रमश: संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी करते हैं। नंदा ने बताया, “उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अनावश्यक ताकत है इसलिए हम उसे शामिल करने या बाहर रखने के बारे में सोच ही नहीं रहे हैं।

 

 उन्होंने कहा, “राज्य में सपा-बसपा गठबंधन मुख्य ताकत है तो भाजपा का सामना करेंगे। कांग्रेस एक या दो सीट पर हो सकती है। यह फैसला लेना कांग्रेस पर है कि वह अपने आप को कहां देखना चाहती है।” लोकसभा चुनावों से पहले सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला लेने के लिए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी (सपा) नेता अखिलेश यादव के बीच बातचीत तेज होने संबंधी खबरों के बाद नंदा की यह टिप्पणी आई है। दोनों नेताओं ने शुक्रवार को नयी दिल्ली में मुलाकात की थी। नंदा के मुताबिक कांग्रेस अभी भी “गठबंधन राजनीति” के मंत्र के हिसाब से नहीं ढल पाई है क्योंकि “वह अपने सहयोगियों के लिए उन राज्यों में एक इंच भी छोड़ने के लिए तैयार नहीं जहां वह मजबूत है लेकिन जहां वह कमजोर है वहां दूसरों से अपने लिए बड़ा हिस्सा छोड़ने की उम्मीद करती है।” 
 
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को गठबंधन से बाहर रखना क्या भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होगा? इस सवाल पर उन्होंने कहा, “हमारे पूर्व के अनुभवों के आधार पर हम कह सकते हैं कि जहां कांग्रेस ने सपा-बसपा गठबंधन के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारे भी हैं, वहां हमें भाजपा को हराने में कोई मुश्किल नहीं हुई। कांग्रेस का वोट शेयर पूरी तरह गैर जरूरी है।” विपक्षी गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में पूछे जाने पर नंदा ने कहा कि इस बारे में फैसला चुनाव के बाद आम सहमति से किया जाएगा। 

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