ईश्वर दुबे
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शिवसेना ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘‘भगवान राम कानून से बड़े नहीं हैं’’ क्योंकि उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए किसी अध्यादेश पर निर्णय न्यायिक प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही करेगी। शिवसेना भाजपा की सहयोगी पार्टी है और उसने अयोध्या में मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए अध्यादेश लाने की मांग की है। उसने दलील दी है कि मामला दशकों से अदालतों में चल रहा है।
जयपुर। राजस्थान की महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री :स्वतंत्र प्रभार: ने कथित तौर पर कहा कि 'हमारा प्रथम कार्य हमारी जाति के लिये, उसके बाद समाज के लिये और फिर सर्वसमाज के लिये है।' अशोक गहलोत सरकार में एक मात्र महिला मंत्री ममता भूपेश अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व करती है।
रविवार को 'बैरवा दिवस' पर अलवर में आयोजित एक कार्यक्रम में ममता भूपेश ने लोगों को विश्वास दिलाया कि जब भी उनके लोगों को आवश्यकता होगी, वह मौजूद रहेंगी।’’
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को बताया कि विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे लगभग चार हजार सरकारी अधिकारियों को सरकार ने नये साल का तोहफा देते हुए उन्हें पदोन्नति दी है। कार्मिक राज्य मंत्री ने कहा, ‘‘इनमें से अधिकतर पदोन्नति 10 से 15 साल से भी अधिक समये से या तो मुकदमे अथवा अन्य कारणों से लंबित थी। जहां तक संभव हो, बैकलॉग को हटाने का निर्णय किया गया है...।" केंद्रीय मंत्री ने संतोष जाहिर करते हुए कहा कि यह मसला उनके बहुत करीब था।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को अदालत से राहत मिलने के बाद बुधवार को कहा कि यह निर्णय देश के उभरते हुए ‘महापुरुषों और महानुभावों’ के खिलाफ कांग्रेस द्वारा किये जा रहे षड्यंत्रों को पूरी तरह उजागर करता है। इसके लिये कांग्रेस को देश से माफी मांगनी चाहिये। मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाता सम्मेलन में सोहराबुद्दीन मामले में सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस की समाज विरोधी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का लगातार भंडाफोड़ हो रहा है। कुछ ही दिनों के अंदर तीसरी बार कांग्रेस के षड्यंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ के शर्मनाक कृत्य देश की जनता के सामने आये हैं।
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक इंटरव्यू में कहा कि राम मंदिर के मामले में न्याय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अध्यादेश लाने पर विचार किया जाएगा। इसके बाद भाजपा के समर्थक दलों और संगठनों ने इस पर नाराजगी जताई। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इस मुद्दे को लेकर बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उसने सरकार से मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग की। इससे पहले मोदी ने कहा था कि सरकार संविधान के तहत ही काम करेगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा।
विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, "हमने राम जन्मभूमि पर प्रधानमंत्री का बयान देखा है। यह मामला 69 साल से कोर्ट में चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला उनकी प्राथमिकता में नहीं है। अब यह सुनवाई 4 जनवरी को हो रही है, लेकिन जिस बेंच को सुनवाई करनी थी, उसका गठन नहीं हुआ है। अब यह फिर से सीजेआई की कोर्ट में आ गया है।"
'संत तय करेंगे कि आगे क्या करना है'
आलोक कुमार ने कहा, "हमें लग रहा है कि सुनवाई अभी कोसों मील दूर है। ऐसे में विहिप का फैसला है कि हिंदू समाज सालों तक कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं कर सकता। हम चाहते हैं कि सरकार अध्यादेश लाकर भव्य मंदिर बनाए। इस मामले में आगे की बातचीत प्रयागराज में धर्म संसद होगी। वहां संत तय करेंगे कि हमें आगे क्या करना है।"
'सांसदों ने मंदिर निर्माण का समर्थन किया'
उन्होंने कहा, ''हम देश के ज्यादातर सांसदों से मिले। उन्होंने संसद में कानून लाकर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने का समर्थन किया है। हिंदू समाज लंबे समय से लोकतंत्र की लड़ाई लड़ रहा है। संत समाज हमारे साथ खड़ा है। 31 जनवरी को धर्म संसद में संत जो निर्णय लेंगे, हम उसी पर आगे बढ़ेंगे।''
'कांग्रेस के वकीलों ने मामले को लटकाया'
आलोक कुमार ने कहा- ''कांग्रेस के वकीलों की कोशिश है कि यह मामला कोर्ट में लटकता रहे। हमारे पास दोनों मामले खुले हैं कि संसद में कानून बने या सुप्रीम कोर्ट लगातार सुनवाई करे। प्रधानमंत्री ने भले ही हमारा समर्थन नहीं किया है, लेकिन हमें उन्हीं से उम्मीद है। हमने प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा है।"
मोदी ने कहा था- तीन तलाक पर भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हम अध्यादेश लाए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा था कि राम मंदिर मुद्दे पर अध्यादेश लाने के बारे में न्याय प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही विचार किया जाएगा। तीन तलाक पर भी हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अध्यादेश लाए थे। कांग्रेस के वकील खलल पैदा कर रहे हैं, इसलिए अदालती कार्यवाही धीमी हो गई है। न्याय प्रक्रिया खत्म होने के बाद सरकार के तौर पर हमारी जो भी जिम्मेदारी होगी, हम वह करेंगे।
नई दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में अगस्ता-वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर डील में बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल से हुई पूछताछ का ब्योरा दिया। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ईडी ने अदालत से कहा कि क्रिश्चियन मिशेल ने ‘श्रीमती गांधी’ का नाम लिया, लेकिन उसने यह नाम किस संदर्भ में लिया यह अभी हम नहीं कह सकते। मिशेल ने इस बात का भी जिक्र किया कि ‘इतालवी महिला का बेटा’ किस तरह भारत का प्रधानमंत्री बनेगा।
ईडी ने कहा- मिशेल को बाहर से पढ़ाया जा रहा
ईडी के मुताबिक, मिशेल ने बताया कि किस तरह हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (एचएएल) को इस डील से अलग किया गया और उसकी जगह यह डील टाटा को दी गई। ईडी ने अदालत को बताया कि वकील को मिशेल से मिलने की इजाजत ना दी जाए, क्योंकि उसे बाहर से निर्देश दिए जा रहे हैं।
ईडी ने कहा- पता लगाएंगे कि 'R' कौन था?
ईडी ने अदालत से कहा- हम यह पता करना चाह रहे हैं कि वह बड़ा आदमी कौन है, जिसे क्रिश्चियन मिशेल और दूसरे लोगों की बातचीत के बीच 'R' कहकर बुलाया जा रहा है। हम मिशेल से दूसरे लोगों के सामने पूछताछ करना चाहते हैं कि वह बड़ा आदमी कौन है, जिसे R कहा जा रहा है। इसके बाद अदालत ने मिशेल को 7 दिन की रिमांड पर भेज दिया।
मिशेल पर 225 करोड़ की दलाली का आरोप
मिशेल पर वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे में 225 करोड़ रुपए की दलाली लेने का आरोप है। इस मामले में पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी भी आरोपी हैं।
मिशेल पर आरोप था कि उसने बिचौलिए की भूमिका निभाते हुए भारतीय अफसरों को गलत तरीक से पैसा दिया था। पिछले साल सितंबर में मिशेल के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी।
उसके खिलाफ 24 सितंबर 2015 को गैर जमानती वॉरंट जारी किया गया था। फरवरी 2017 में उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया। मिशेल को दुबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह यूएई की जेल में ही था।
मिशेल पर आपराधिक साजिश का आरोप लगा था, जिसमें एसपी त्यागी, उनके परिवार के सदस्यों और अफसरों को भी शामिल किया गया था। यह भी कहा गया कि अधिकारियों ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करके वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की सर्विस सीलिंग 6 हजार मीटर से 4500 मीटर तक कम करा ली थी।
सीलिंग कम होने के बाद 556.262 मिलियन यूरो (करीब 44 लाख करोड़ रुपए) के हेलिकॉप्टर कॉन्ट्रैक्ट पर सहमति बनी थी। इसके लिए रक्षा मंत्रालय (यूपीए 2) ने 8 फरवरी 2010 को 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों के लिए पैसे दिए थे।
रक्षा सौदों में बिचौलिए की भूमिका निभाता था मिशेल
मिशेल कंपनी में 1980 से काम कर रहा था। उसके पिता भी कंपनी में भारतीय क्षेत्र के मामलों के लिए सलाहकार रहे थे। सीबीआई का कहना है कि मिशेल का भारत का काफी आना-जाना था। वह रक्षा सौदों में वायुसेना और रक्षा मंत्रालय के बीच बिचौलिए की भूमिका निभाता था। मिशेल को वायुसेना और रक्षा मंत्रालय के अफसरों से सूचनाएं मिलती थीं। इनको वह फैक्स के जरिए इटली और स्विट्जरलैंड भेजता था। इस मामले में एसपी त्यागी को 2016 में गिरफ्तार किया गया था। त्यागी पर आरोप है कि उन्होंने डील को इस तरह प्रभावित किया कि कॉन्ट्रैक्ट इटली की अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी को ही मिले।
2022 तक भेजा जाएगा गगनयान मिशन, 7 दिन स्पेस में रह सकेंगे भारतीय एस्ट्रोनॉट
भारत इस मिशन में सफल हुआ तो ऐसा करने वाला चौथा देश होगा
राकेश शर्मा 1984 में अंतरिक्ष यात्रा करने वाले पहले भारतीय थे, लेकिन मिशन रूस का था
नई दिल्ली। पहले भारतीय गगनयान मानव मिशन के लिए मंत्रिमंडल ने 10 हजार करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी है। केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस अभियान के तहत 3 एस्ट्रोनॉट को 7 दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इससे पहले 1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष यात्रा करने वाले पहले भारतीय थे, लेकिन यह रूस का मिशन था।
मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर किया था ऐलान
गगनयान कार्यक्रम के तहत 3 क्रू मेंबर्स को 7 दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर इस अभियान का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था- 2022 में आजादी के 75 साल पूरे होने से पहले भारत अंतरिक्ष में मानव मिशन के साथ गगनयान भेजेगा।
इसरो चेयरमैन के. सिवन ने भास्कर के साथ बातचीत में कहा था- गगनयान के लिए डिजाइन तैयार हो चुका है। अभी हम अपनी क्षमताओं के आकलन में लगे हैं। समूचे सिस्टम को अधिक से अधिक स्वदेशी बनाएंगे।
इसरो गगनयान के लिए आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेस पोर्ट पर अपना सबसे बड़ा रॉकेट जीएसएलवी मार्क 3 स्थापित करना चाहता है। इसके जरिए 3 अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस में भेजा जाएगा।
स्पेस एजेंसी अपनी इस योजना को अगले 40 महीनों के भीतर खत्म करना चाहती है। शुरुआती चरणों के दौरान एजेंसी पहले दो मानव रहित अंतरिक्ष यान भेजना चाहती है। इसके बाद मानवयुक्त अंतरिक्ष यान भेजने की योजना है, जो 5-7 दिनों तक पृथ्वी की निचली कक्षा में रहेंगे।
चेयरमैन के सिवन ने कहा- 2022 तक गगनयान की डेडलाइन है। यह बेहद कसा हुआ कार्यक्रम है, लेकिन इसरो इसे हर हाल में तय सीमा के भीतर अंजाम देगा। इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले अंतरिक्षयात्रियों को व्योमनॉट्स कहा जाएगा। यह शब्द संस्कृत के व्योमÓ से लिया गया है, जिसका अर्थ अंतरिक्ष है
खदान से पानी निकालने के लिए कर्मचारी 100 हॉर्स पावर की मशीन का इंतजार कर रहे हैं।
मेघालय की खदान के अंदर पानी भरने से फंसे बच्चे, राहुल का आरोप- उपकरणों की कमी के चलते बचाव का काम बाधित
मेघालय के अफसर ने कहा- रेस्क्यू के लिए हमारे पास पर्याप्त बल नहीं
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुल पर फोटो खिंचवाना छोड़कर मेघालय की खदान में फंसे 15 नाबालिगों को बचाना चाहिए। मेघालय की कोयला खदान में पानी भरने से 13 दिसंबर से कई बच्चे फंसे हुए हैं।
Óबच्चे जीवन के लिए संघर्ष कर रहेÓ
राहुल ने ट्वीट किया, 15 नाबालिग पानी से भरी खदान में जिंदगी के लिए दो हफ्ते से संघर्ष कर रहे हैं। वहीं, प्रधानमंत्री बोगीबील पुल पर फोटो खिंचा रहे हैं। उनकी सरकार ने बचाव के लिए हाईप्रेशर पंप्स देने से इनकार कर दिया है। मैं पीएम से अपील करता हूं कि नाबालिगों को बचाएं।
राहुल ने रिपोट्र्स का हवाला देते हुए यह भी कहा कि उपकरणों की कमी के चलते 15 बच्चों को बचाने का काम बाधित हो रहा है। खदान में अचानक से लाइतीन नदी के पानी घुसने के चलते बच्चे उसमें फंसे हुए हैं।
उधर, मेघालय के एक गृह विभाग के वरिष्ठ अफसर ने बताया कि खदान ईस्ट जैंतिया हिल जिले में स्थित है, वहां पुलिस फोर्स को भेजा गया है। हमारे पास इस समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त बल नहीं है।
मोदी ने कल किया था पुल का उद्घाटन
मोदी ने मंगलवार को असम के डिब्रूगढ़ में देश के सबसे लंबे रेल-रोड पुल बोगीबील का उद्घाटन किया था। यह ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर और दक्षिण तट को जोड़ेगा। पुल की लंबाई 4.94 किमी है। पुल से मिलिट्री टैंक गुजर सकते हैं। जरूरत पडऩे पर लड़ाकू विमान भी पुल पर लैंड कर सकते हैं। मोदी ने कहा, यहां कुछ लोग ऐसे होंगे,जो 16 साल पहले भी यहां आए होंगे, जब अटलजी ने इसका शिलान्यास किया था। दुर्भाग्यवश 2004 में सरकार जाने के बाद कई प्रोजेक्टों की तरह यह भी अटक गया। अटलजी की सरकार को दोबारा मौका मिलता तो यह ब्रिज 2007-08 में ही बन जाता। 2014 में सरकार बनने के बाद हमने सारी बाधाओं को दूर किया और गति दी।ÓÓ
भाजपा महासचिव ने कहा- हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह सुनवाई करेगा
रविशंकर प्रसाद ने कहा- सबरीमाला-समलैंगिकता पर जल्द फैसला आ सकता है तो राम मंदिर पर क्यों नहीं
उन्होंने कहा- बाबर का संविधान में जिक्र नहीं, हमें उनकी इबादत नहीं करनी चाहिए
नई दिल्ली। भाजपा महासचिव राम माधव ने बुधवार को कहा कि राम मंदिर पर अध्यादेश का विकल्प हमेशा खुला है। उन्होंने कहा कि अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। अदालत ने इसकी सुनवाई के लिए 4 जनवरी तय की है। हमें आशा है कि अदालत इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह सुनवाई करेगा और जल्द फैसला सुनाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हम दूसरा रास्ता अपनाएंगे। इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सुप्रीम कोर्ट से राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह करने की मांग की।
Óसबरीमाला पर फैसला जल्द आ सकता है तो राम मंदिर पर क्यों नहीं?Ó रविशंकर प्रसाद मंगलवार को अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद की 15वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब सबरीमाला मामले में जल्द फैसला आ सकता है, तो सालों से अटके इस मामले में क्यों नहीं?
प्रसाद ने कहा कि मैं कानून मंत्री के नाते नहीं, बल्कि एक आम नागरिक के तौर पर सुप्रीम कोर्ट से मामले पर जल्द फैसला देने की अपील करता हूं। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह, इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस एआर मसूदी भी मौजूद थे।
उन्होंने कहा, इस मामले में इतने सबूत हैं कि अच्छी बात हो सकती है। लेकिन लोग मेरे पास आते हैं और पूछते हैं कि समलैंगिकता पर 6 महीने में, सबरीमाला पर 5-6 महीने में, अर्बन नक्सल पर 2 महीने में फैसला हो जाता है। हमारे रामलला का विवाद 70 सालों से कोर्ट में अटका है। 10 साल से सुप्रीम कोर्ट के पास है, इसमें सुनवाई क्यों नहीं होती?ÓÓ
कानून मंत्री ने कहा , 'Óहम बाबर को क्यों पूजें, उसकी इबादत नहीं होनी चाहिए।ÓÓ उन्होंने संविधान की प्रति को दिखाते हुए कहा कि इसमें राम, कृष्ण और अकबर का भी जिक्र है, लेकिन बाबर का नहीं। उन्होंने कहा कि भारत में इस तरह की बात कर दो तो नया विवाद खड़ा हो जाता है।
अयोध्या विवाद पर 4 जनवरी को होनी है सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर 4 जनवरी को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 3 जजों की बेंच इस मामले में सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया था।
पुणे (महाराष्ट्र)। तीन हिंदी भाषी राज्यों में हाल में भाजपा की हार के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को कहा कि ‘‘नेतृत्व’’ को ‘‘हार और विफलताओं’’ की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। साफगोई के लिये चर्चित भाजपा नेता ने कहा कि सफलता की तरह कोई विफलता की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता।
अहमदाबाद : अयोध्या में राम मंदिर बनाने की रणनीति पर चर्चा के लिए अहमदाबाद में एक अहम बैठक हुई है. बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के अलावा कुछ हिंदू संत भी मौजूद थे. बैठक में शाह ने संघ प्रमुख और हिंदू नेताओं को भरोसा दिया कि अयोध्या में मंदिर का निर्माण होगा. बताया जाता है कि अमित शाह और भागवत ने बंद कमरे में डेढ़ घंटे तक गुफ्तगू की.
अहमदाबाद से 210 किलोमीटर दूर स्थित राजकोट में शुक्रवार को हुई बैठक में शामिल कुछ नेताओं ने मीडिया को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर मंदिर निर्माण को लेकर आगे के रास्तों पर चर्चा हुई.
उन्होंने बताया कि अहमदाबाद से 210 किलोमीटर दूर राजकोट में दो दिवसीय हिंदू आचार्य सभा की बैठक में मौजूद भागवत और संतों ने स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त किया कि मई, 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल पूरा होने से पहले मंदिर का निर्माण शुरू हो जाना चाहिए.
बैठक में हिस्सा लेने वाले आचार्य सतगिरि महाराज ने कहा, ‘मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गयी. एक रास्ता विधिक रास्ता है. नेता अपना काम कर रहे हैं. संतों ने कहा कि वे राममंदिर निर्माण को जितना जल्दी संभव हो आगे बढ़ाना चाहते हैं.’ राजस्थान के जोधपुर के रहने वाले सतगिरि महाराज ने कहा, ‘मैं उम्मीद करता हूं कि वे दो-तीन महीने में कुछ करेंगे.’
सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि मालिकाना हक विवाद पर जनवरी में सुनवाई की उम्मीद है. यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा को मंदिर का निर्माण वर्ष 2019 से पहले शुरू करने का एक अल्टीमेटम दिया गया, सतगिरि ने ना में जवाब दिया. सतगिरि ने कहा, ‘मोहनजी ने अपनी इच्छा व्यक्त की कि राममंदिर का निर्माण 2019 चुनाव से पहले शुरू होना चाहिए, लेकिन कोई अल्टीमेटम नहीं दिया गया.’
एक अन्य संत ने कहा कि शाह ने बैठक में विधिक मामले की जानकारी साझा की और सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की सुनवाई जनवरी में लिये जाने की संभावना के बारे में बात की. संत ने कहा, ‘शाह ने हमें भरोसा दिया कि मंदिर का निर्माण उसी स्थल (अयोध्या में वहीं जो कि विवादों में है) पर होगा.’ एक तीसरे संत ने धैर्य रखने की बात की और कहा, ‘वे (आरएसएस और भाजपा) जो भी जरूरी है, करेंगे (मंदिर निर्माण के लिए).’
आरएसएस प्रवक्ता विजय ठाकुर ने कहा कि हिंदू आचार्य सभा का आयोजन प्रत्येक दो वर्ष पर होता है, जिसमें हिंदू समाज से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षणिक मुद्दों पर चर्चा होती है. हिंदू सभा में भागवत और शाह के अलावा राम माधव और सुब्रमण्यम स्वामी जैसे नेताओं ने भी हिस्सा लिया. स्वामी ने कहा कि दलीलें हिंदुओं के पक्ष में हैं कि उन्हें राम मंदिर के लिए जमीन मिल जायेगी, लेकिन सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई कब करेगा.
उन्होंने कहा, ‘(पूर्व प्रधानमंत्री) नरसिंह राव ने कहा था कि यदि यह साबित हो जाता है कि उसी स्थान पर एक मंदिर था, तो हम जमीन हिंदुओं को दे देंगे, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने भी यह साबित किया है.’ उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसला दिया है कि नमाज के लिए मस्जिद जरूरी हिस्सा नहीं है, जो कि कहीं भी की जा सकती है. सभी चीजें और दलीलें हमारे पक्ष में है.’ उन्होंने कहा, ‘अब देखना है कि सुनवाई कब होती है और फैसला कब आता है.’
बैठक राजकोट में अर्ष विद्या मंदिर में हुई, जिसमें करीब 100 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. आरएसएस सहित हिंदू संगठनों ने पिछले कुछ महीनों में मंदिर निर्माण जल्द करने को लेकर अपनी मांग तेज कर दी है और भागवत सहित कई इसके लिए कानून बनाने पर जोर दे रहे हैं.
हिंदू आचार्य सभा में पहुंचे अविचलदासजी महाराज ने कहा कि धर्म सभा में आचार्य सम्मेलन, कुंभ के लिए आमंत्रण और राम मंदिर के बारे में बात हुई है. राममंदिर पर अध्यादेश के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस सभा में इस तरह की कोई बात नहीं हुई.
धर्म सभा में राम मंदिर के मुद्दे के अलावा धर्मांतरण के मुद्दे पर भी खुल कर चर्चा हुई. मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हारने के बाद भाजपा राम मंदिर के मुद्दे पर फूंक-फूंक कर रणनीति बनाने में लगी है, ताकि इसका फायदा 2019 के चुनाव में मिल पाये.
मुंबई : देश में सशक्त संविधान और कानून तो है पर लोगों में संवेदनशीलता की कमी के कारण यह सही तरीके से लागू नहीं हो पाता. उक्त बातें आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कही, वे नूतन गुलगुले फाउंडेशन के एक समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे.
पम्बा : सबरीमाला में प्रवेश को लेकर एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गयी है. कारण है 11 महिलाओं द्वारा मंदिर में प्रवेश की अनुमति मांगना. तनाव तब उत्पन्न हुआ जब पम्बा में रविवार सुबह 50 वर्ष से कम आयु की 11 महिलाओं के एक समूह ने भगवान अयप्पा मंदिर में पहुंचने की कोशिश की. श्रद्धालुओं ने महिलाओं के इस कदम का विरोध किया. महिलाओं के समूह ने मंदिर परिसर से लगभग पांच किलोमीटर दूर पारंपरिक वन पथ के माध्यम से अयप्पा मंदिर पहुंचने की कोशिश की, लेकिन श्रद्धालुओं के विरोध की वजह से वे आगे नहीं बढ़ सकीं.
निषेधात्मक आदेश की अवहेलना करते हुए सैकड़ों श्रद्धालु यहां एकत्रित हुए और उन्होंने भगवान अयप्पा के भजन जोर-जोर से गाने शुरू कर दिए. चेन्नई के 'मानिथि' संगठन की ये महिलाएं लगातार विरोध के बाद सुबह पांच बजकर 20 मिनट से सड़क पर बैठीं हैं. पुलिस ने उनके आसपास घेरेबंदी कर दी है. इस समूह की संयोजक सेल्वी से पुलिस की बातचीत भी विफल रही क्योंकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे दर्शन किए बिना नहीं लौटेंगी. सेल्वी ने पत्रकारों से कहा, ‘‘प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस हमें वापस जाने को कह रही है लेकिन हम दर्शन किए बिना नहीं जाएंगे. हम यहां तब तक इंतजार करेंगे जब तक हमें आगे नहीं जाने दिया जाता.'
गौरतलब है कि सबरीमाला मंदिर में 10-50 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पारंपरिक रूप से लगी रोक के खिलाफ आदेश देते हुए उच्चतम न्यायालय ने 28 सितंबर को सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश और पूजा की अनुमति दे दी थी. तब से मंदिर में प्रवेश को लेकर कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं. महिला का समूह केरल-तमिलनाडु सीमा पर इडुक्की-कम्बदु मार्ग से तड़के करीब साढ़े तीन बजे पम्बा पहुंचा था. स्थानीय टेलीविजन चैनलों के अनुसार उन्हें रास्ते में कई स्थानों पर विरोध का सामना करना पड़ा लेकिन वे पम्बा पहुंचने में कामयाब रहीं.
समूह की सदस्य तिलकवती ने कहा, "मंदिर में दर्शन नहीं होने तक हम प्रदर्शन जारी रखेंगे. पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए हमें वापस जाने को कहा है. लेकिन हम वापस नहीं जाएंगे." केरल सरकार के उच्चतम न्यायालय के 28 सितम्बर को दिए आदेश को लागू करने के निर्णय के बाद से श्रद्धालुओं ने सबरीमला मंदिर के पास व्यापक स्तर पर प्रदर्शन किए हैं. पहले भी कुछ महिलाएं मंदिर पहुंचने का असफल प्रयास कर चुकी हैं.
नयी दिल्ली : भगवान हनुमान की जाति और धर्म बताने के बाद अब एक नया बयान सामने आया है. अब उत्तर प्रदेश सरकार के कैबनेट मंत्री और पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान ने हनुमान जी को खिलाड़ी बताने का काम किया है. चौहान ने कहा कि हनुमान जी कुश्ती लड़ते थे वो खिलाड़ी थे उनकी कोई जाति नहीं थी वो खिलाड़ी थे और मैं भी खिलाड़ी हूं... चौहान ने अमरोहा में पत्रकरों के सवालो का जवाब देते हुए ये बातें कही. यदि आपको याद हो तो योगी सरकार में मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने पिछले दिनों कहा था कि मुझे लगता है कि हनुमान जी जाट थे.
यहां चर्चा कर दें कि सारा विवाद उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के उस बयान से शुरू हुआ था जिसमें उन्होंने में हनुमान जी को दलित बताया था. उन्होंने ने कहा था कि बजरंगबली एक ऐसे लोक देवता हैं जो स्वयं वनवासी हैं, गिर वासी हैं, दलित हैं और वंचित हैं.
हनुमान को बताया ‘मुसलमान'
उत्तर प्रदेश के भाजपा एमएलसी बुक्कल नवाब ने कुछ दिन पूर्व हुनमान जी को मुसलमान बताया था. उन्होंने कहा था हमारा मानना है कि हनुमान जी मुसलमान थे, इसलिए मुसलमानों के जो नाम होते हैं - रहमान, रमजान वो करीब-करीब उन्हीं पर रखे जाते हैं.
आदिवासी थे हनुमान
नेशनल कमीशन ऑफ शेड्यूल ट्राइब के चेयरमैन नंद कुमार साय ने सीएम योगी के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वनवासी हम भी हैं और इसलिए मैं बता दूं कि लोग यह समझते हैं कि राम की सेना में वानर, भालू, गिद्ध थे. इस पर शोध करेंगे तो पायेंगे हमारी जनजाति में है. उरांव जनजाति में तिग्गा वानर है. जिस समाज से मैं हूं वानर गोत्र है.कई लोगों का गोत्र गिद्ध है. आप मानेंगे कि जंगलों में हमारे लोग रहते थे और वही भगवान राम के साथ बड़ी लड़ाई में शामिल हुए थे.