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शिवसेना ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘‘भगवान राम कानून से बड़े नहीं हैं’’ क्योंकि उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए किसी अध्यादेश पर निर्णय न्यायिक प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही करेगी। शिवसेना भाजपा की सहयोगी पार्टी है और उसने अयोध्या में मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए अध्यादेश लाने की मांग की है। उसने दलील दी है कि मामला दशकों से अदालतों में चल रहा है।

 
शिवसेना नेता संजय राउत ने ट्वीट किया, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि राम मंदिर तत्काल (सुनवाई वाला) मामला नहीं है। मोदी ने भी कुछ अलग नहीं कहा। मैं उन्हें मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए बधाई देता हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘...(प्रधानमंत्री कहते हैं) राम मंदिर के लिए कोई अध्यादेश नहीं लाएंगे। इसका संवैधानिक अर्थ यह है कि भगवान राम कानून से बड़े नहीं हैं।’’
 
उल्लेखनीय है कि विभिन्न टेलीविजन चैनलों द्वारा प्रसारित एक साक्षात्कार में मोदी से अयोध्या में राम मंदिर के लिए अध्यादेश लाने के विभिन्न हिंदुत्व समूहों की मांग के बारे में सवाल किया गया। इस पर मोदी ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया समाप्त होने दीजिये। न्यायिक प्रक्रिया समाप्त होने पर एक सरकार के तौर पर जो भी हमारी जिम्मेदारी होगी, हम सभी प्रयास करने को तैयार हैं। ज्ञातव्य है कि शिवसेना ने राममंदिर मुद्दे को लेकर अपना रुख कड़ा कर लिया है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गत महीने महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक रैली में भाजपा के सहयोगी दलों से राम मंदिर मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहा था।
 

जयपुर। राजस्थान की महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री :स्वतंत्र प्रभार: ने कथित तौर पर कहा कि 'हमारा प्रथम कार्य हमारी जाति के लिये, उसके बाद समाज के लिये और फिर सर्वसमाज के लिये है।' अशोक गहलोत सरकार में एक मात्र महिला मंत्री ममता भूपेश अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व करती है।

रविवार को 'बैरवा दिवस' पर अलवर में आयोजित एक कार्यक्रम में ममता भूपेश ने लोगों को विश्वास दिलाया कि जब भी उनके लोगों को आवश्यकता होगी, वह मौजूद रहेंगी।’’

उन्होंने कहा 'जब भी हमारी आवश्यकता होगी, मैं कभी आपको पीठ नहीं दिखाउंगी। मैं यह विश्वास दिलाना चाहती हूं कि हमारा प्रथम कार्य हमारा हमारी जाति के लिये, उसके बाद हमारे समाज के लिये और फिर सर्व समाज के लिये, सबके लिये होगा। हमारी कोशिश रहेगी कि हम सबके लिये काम करें, सबको लाभ दे पायें'।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को बताया कि विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे लगभग चार हजार सरकारी अधिकारियों को सरकार ने नये साल का तोहफा देते हुए उन्हें पदोन्नति दी है। कार्मिक राज्य मंत्री ने कहा, ‘‘इनमें से अधिकतर पदोन्नति 10 से 15 साल से भी अधिक समये से या तो मुकदमे अथवा अन्य कारणों से लंबित थी। जहां तक संभव हो, बैकलॉग को हटाने का निर्णय किया गया है...।" केंद्रीय मंत्री ने संतोष जाहिर करते हुए कहा कि यह मसला उनके बहुत करीब था।

 
सिंह ने बताया, ‘‘इन कर्मचारियों के लिए यह नये साल का तोहफा है। जब से मैं 2014 में कार्मिक विभाग में आया हूं, मुझे इस बात से बहुत दुख होता था कि हर महीने दर्जनों सरकारी अधिकारी वर्षों से बिना किसी पदोन्नति के ही अवकाश ग्रहण कर रहे हैं।’’ एक आधिकारिक बयान के अनुसार 3991 अधिकारियों को पदोन्नति दी गयी है। इनमें 1756 अधिकारी केंद्रीय सचिवालय सेवा के हैं जबकि 2235 केंद्रीय सचिवालय स्टेनोग्राफर सेवा के हैं। मंत्री ने बताया कि सेक्सन आफिसर के 584 और अधिकारियों की पदोन्नति पहले से ही प्रक्रिया में है और आने वाले कुछ दिनों में इस संबंध में आदेश जारी कर दिये जायेंगे।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को अदालत से राहत मिलने के बाद बुधवार को कहा कि यह निर्णय देश के उभरते हुए ‘महापुरुषों और महानुभावों’ के खिलाफ कांग्रेस द्वारा किये जा रहे षड्यंत्रों को पूरी तरह उजागर करता है। इसके लिये कांग्रेस को देश से माफी मांगनी चाहिये। मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाता सम्मेलन में सोहराबुद्दीन मामले में सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस की समाज विरोधी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का लगातार भंडाफोड़ हो रहा है। कुछ ही दिनों के अंदर तीसरी बार कांग्रेस के षड्यंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ के शर्मनाक कृत्य देश की जनता के सामने आये हैं। 

 

 
योगी ने कहा कि हाल ही में सीबीआई की विशेष अदालत ने 2007 में गुजरात में हुए सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ ही सभी अन्य लोगों को आरोपों से मुक्त किया है। ‘‘अदालत का फैसला इस देश के उभरते हुए महापुरुषों और महानुभावों के खिलाफ कांग्रेस द्वारा किये जा रहे षड्यंत्रों को पूरी तरह उजागर करता है।’’ योगी ने कहा कि हालांकि शाह को उच्चतम न्यायालय ने 2014 में और उससे पहले मुम्बई की अदालत ने भी बरी किया था। लेकिन फिर भी तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उस समय प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने उन्हें जेल भेजने का षड्यंत्र किया। जिन व्यक्तियों से कांग्रेस को भय हो रहा था, उन्हें फर्जी और मनगढ़ंत तरीके से फंसाने के कुत्सित प्रयास किये गये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सोहराबुद्दीन रूपी आतंकवादी के हितों के लिये लड़ रही है। देश की सम्प्रभुता के खिलाफ लड़ने वाले आतंकवादी के पक्ष में किस तरह से तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने लॉबिंग करके शाह को जेल भेजने की साजिश रची। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये और देश की जनता से माफी भी मांगनी चाहिये।

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक इंटरव्यू में कहा कि राम मंदिर के मामले में न्याय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अध्यादेश लाने पर विचार किया जाएगा। इसके बाद भाजपा के समर्थक दलों और संगठनों ने इस पर नाराजगी जताई। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इस मुद्दे को लेकर बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उसने सरकार से मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग की। इससे पहले मोदी ने कहा था कि सरकार संविधान के तहत ही काम करेगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा।
विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, "हमने राम जन्मभूमि पर प्रधानमंत्री का बयान देखा है। यह मामला 69 साल से कोर्ट में चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला उनकी प्राथमिकता में नहीं है। अब यह सुनवाई 4 जनवरी को हो रही है, लेकिन जिस बेंच को सुनवाई करनी थी, उसका गठन नहीं हुआ है। अब यह फिर से सीजेआई की कोर्ट में आ गया है।"
'संत तय करेंगे कि आगे क्या करना है'
आलोक कुमार ने कहा, "हमें लग रहा है कि सुनवाई अभी कोसों मील दूर है। ऐसे में विहिप का फैसला है कि हिंदू समाज सालों तक कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं कर सकता। हम चाहते हैं कि सरकार अध्यादेश लाकर भव्य मंदिर बनाए। इस मामले में आगे की बातचीत प्रयागराज में धर्म संसद होगी। वहां संत तय करेंगे कि हमें आगे क्या करना है।"
'सांसदों ने मंदिर निर्माण का समर्थन किया'
उन्होंने कहा, ''हम देश के ज्यादातर सांसदों से मिले। उन्होंने संसद में कानून लाकर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने का समर्थन किया है। हिंदू समाज लंबे समय से लोकतंत्र की लड़ाई लड़ रहा है। संत समाज हमारे साथ खड़ा है। 31 जनवरी को धर्म संसद में संत जो निर्णय लेंगे, हम उसी पर आगे बढ़ेंगे।''
'कांग्रेस के वकीलों ने मामले को लटकाया'
आलोक कुमार ने कहा- ''कांग्रेस के वकीलों की कोशिश है कि यह मामला कोर्ट में लटकता रहे। हमारे पास दोनों मामले खुले हैं कि संसद में कानून बने या सुप्रीम कोर्ट लगातार सुनवाई करे। प्रधानमंत्री ने भले ही हमारा समर्थन नहीं किया है, लेकिन हमें उन्हीं से उम्मीद है। हमने प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा है।"
मोदी ने कहा था- तीन तलाक पर भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हम अध्यादेश लाए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा था कि राम मंदिर मुद्दे पर अध्यादेश लाने के बारे में न्याय प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही विचार किया जाएगा। तीन तलाक पर भी हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अध्यादेश लाए थे। कांग्रेस के वकील खलल पैदा कर रहे हैं, इसलिए अदालती कार्यवाही धीमी हो गई है। न्याय प्रक्रिया खत्म होने के बाद सरकार के तौर पर हमारी जो भी जिम्मेदारी होगी, हम वह करेंगे।

नई दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में अगस्ता-वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर डील में बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल से हुई पूछताछ का ब्योरा दिया। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ईडी ने अदालत से कहा कि क्रिश्चियन मिशेल ने ‘श्रीमती गांधी’ का नाम लिया, लेकिन उसने यह नाम किस संदर्भ में लिया यह अभी हम नहीं कह सकते। मिशेल ने इस बात का भी जिक्र किया कि ‘इतालवी महिला का बेटा’ किस तरह भारत का प्रधानमंत्री बनेगा।
ईडी ने कहा- मिशेल को बाहर से पढ़ाया जा रहा
ईडी के मुताबिक, मिशेल ने बताया कि किस तरह हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (एचएएल) को इस डील से अलग किया गया और उसकी जगह यह डील टाटा को दी गई। ईडी ने अदालत को बताया कि वकील को मिशेल से मिलने की इजाजत ना दी जाए, क्योंकि उसे बाहर से निर्देश दिए जा रहे हैं।
ईडी ने कहा- पता लगाएंगे कि 'R' कौन था?
ईडी ने अदालत से कहा- हम यह पता करना चाह रहे हैं कि वह बड़ा आदमी कौन है, जिसे क्रिश्चियन मिशेल और दूसरे लोगों की बातचीत के बीच 'R' कहकर बुलाया जा रहा है। हम मिशेल से दूसरे लोगों के सामने पूछताछ करना चाहते हैं कि वह बड़ा आदमी कौन है, जिसे R कहा जा रहा है। इसके बाद अदालत ने मिशेल को 7 दिन की रिमांड पर भेज दिया।
मिशेल पर 225 करोड़ की दलाली का आरोप
मिशेल पर वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे में 225 करोड़ रुपए की दलाली लेने का आरोप है। इस मामले में पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी भी आरोपी हैं।
मिशेल पर आरोप था कि उसने बिचौलिए की भूमिका निभाते हुए भारतीय अफसरों को गलत तरीक से पैसा दिया था। पिछले साल सितंबर में मिशेल के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी।
उसके खिलाफ 24 सितंबर 2015 को गैर जमानती वॉरंट जारी किया गया था। फरवरी 2017 में उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया। मिशेल को दुबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह यूएई की जेल में ही था।
मिशेल पर आपराधिक साजिश का आरोप लगा था, जिसमें एसपी त्यागी, उनके परिवार के सदस्यों और अफसरों को भी शामिल किया गया था। यह भी कहा गया कि अधिकारियों ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करके वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की सर्विस सीलिंग 6 हजार मीटर से 4500 मीटर तक कम करा ली थी।
सीलिंग कम होने के बाद 556.262 मिलियन यूरो (करीब 44 लाख करोड़ रुपए) के हेलिकॉप्टर कॉन्ट्रैक्ट पर सहमति बनी थी। इसके लिए रक्षा मंत्रालय (यूपीए 2) ने 8 फरवरी 2010 को 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों के लिए पैसे दिए थे।
रक्षा सौदों में बिचौलिए की भूमिका निभाता था मिशेल
मिशेल कंपनी में 1980 से काम कर रहा था। उसके पिता भी कंपनी में भारतीय क्षेत्र के मामलों के लिए सलाहकार रहे थे। सीबीआई का कहना है कि मिशेल का भारत का काफी आना-जाना था। वह रक्षा सौदों में वायुसेना और रक्षा मंत्रालय के बीच बिचौलिए की भूमिका निभाता था। मिशेल को वायुसेना और रक्षा मंत्रालय के अफसरों से सूचनाएं मिलती थीं। इनको वह फैक्स के जरिए इटली और स्विट्जरलैंड भेजता था। इस मामले में एसपी त्यागी को 2016 में गिरफ्तार किया गया था। त्यागी पर आरोप है कि उन्होंने डील को इस तरह प्रभावित किया कि कॉन्ट्रैक्ट इटली की अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी को ही मिले।

2022 तक भेजा जाएगा गगनयान मिशन, 7 दिन स्पेस में रह सकेंगे भारतीय एस्ट्रोनॉट
भारत इस मिशन में सफल हुआ तो ऐसा करने वाला चौथा देश होगा
राकेश शर्मा 1984 में अंतरिक्ष यात्रा करने वाले पहले भारतीय थे, लेकिन मिशन रूस का था
नई दिल्ली। पहले भारतीय गगनयान मानव मिशन के लिए मंत्रिमंडल ने 10 हजार करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी है। केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस अभियान के तहत 3 एस्ट्रोनॉट को 7 दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इससे पहले 1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष यात्रा करने वाले पहले भारतीय थे, लेकिन यह रूस का मिशन था।
मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर किया था ऐलान
गगनयान कार्यक्रम के तहत 3 क्रू मेंबर्स को 7 दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर इस अभियान का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था- 2022 में आजादी के 75 साल पूरे होने से पहले भारत अंतरिक्ष में मानव मिशन के साथ गगनयान भेजेगा।
इसरो चेयरमैन के. सिवन ने भास्कर के साथ बातचीत में कहा था- गगनयान के लिए डिजाइन तैयार हो चुका है। अभी हम अपनी क्षमताओं के आकलन में लगे हैं। समूचे सिस्टम को अधिक से अधिक स्वदेशी बनाएंगे।
इसरो गगनयान के लिए आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेस पोर्ट पर अपना सबसे बड़ा रॉकेट जीएसएलवी मार्क 3 स्थापित करना चाहता है। इसके जरिए 3 अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस में भेजा जाएगा।
स्पेस एजेंसी अपनी इस योजना को अगले 40 महीनों के भीतर खत्म करना चाहती है। शुरुआती चरणों के दौरान एजेंसी पहले दो मानव रहित अंतरिक्ष यान भेजना चाहती है। इसके बाद मानवयुक्त अंतरिक्ष यान भेजने की योजना है, जो 5-7 दिनों तक पृथ्वी की निचली कक्षा में रहेंगे।
चेयरमैन के सिवन ने कहा- 2022 तक गगनयान की डेडलाइन है। यह बेहद कसा हुआ कार्यक्रम है, लेकिन इसरो इसे हर हाल में तय सीमा के भीतर अंजाम देगा। इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले अंतरिक्षयात्रियों को व्योमनॉट्स कहा जाएगा। यह शब्द संस्कृत के व्योमÓ से लिया गया है, जिसका अर्थ अंतरिक्ष है

खदान से पानी निकालने के लिए कर्मचारी 100 हॉर्स पावर की मशीन का इंतजार कर रहे हैं।
मेघालय की खदान के अंदर पानी भरने से फंसे बच्चे, राहुल का आरोप- उपकरणों की कमी के चलते बचाव का काम बाधित
मेघालय के अफसर ने कहा- रेस्क्यू के लिए हमारे पास पर्याप्त बल नहीं
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुल पर फोटो खिंचवाना छोड़कर मेघालय की खदान में फंसे 15 नाबालिगों को बचाना चाहिए। मेघालय की कोयला खदान में पानी भरने से 13 दिसंबर से कई बच्चे फंसे हुए हैं।
Óबच्चे जीवन के लिए संघर्ष कर रहेÓ
राहुल ने ट्वीट किया, 15 नाबालिग पानी से भरी खदान में जिंदगी के लिए दो हफ्ते से संघर्ष कर रहे हैं। वहीं, प्रधानमंत्री बोगीबील पुल पर फोटो खिंचा रहे हैं। उनकी सरकार ने बचाव के लिए हाईप्रेशर पंप्स देने से इनकार कर दिया है। मैं पीएम से अपील करता हूं कि नाबालिगों को बचाएं।
राहुल ने रिपोट्र्स का हवाला देते हुए यह भी कहा कि उपकरणों की कमी के चलते 15 बच्चों को बचाने का काम बाधित हो रहा है। खदान में अचानक से लाइतीन नदी के पानी घुसने के चलते बच्चे उसमें फंसे हुए हैं।
उधर, मेघालय के एक गृह विभाग के वरिष्ठ अफसर ने बताया कि खदान ईस्ट जैंतिया हिल जिले में स्थित है, वहां पुलिस फोर्स को भेजा गया है। हमारे पास इस समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त बल नहीं है।
मोदी ने कल किया था पुल का उद्घाटन
मोदी ने मंगलवार को असम के डिब्रूगढ़ में देश के सबसे लंबे रेल-रोड पुल बोगीबील का उद्घाटन किया था। यह ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर और दक्षिण तट को जोड़ेगा। पुल की लंबाई 4.94 किमी है। पुल से मिलिट्री टैंक गुजर सकते हैं। जरूरत पडऩे पर लड़ाकू विमान भी पुल पर लैंड कर सकते हैं। मोदी ने कहा, यहां कुछ लोग ऐसे होंगे,जो 16 साल पहले भी यहां आए होंगे, जब अटलजी ने इसका शिलान्यास किया था। दुर्भाग्यवश 2004 में सरकार जाने के बाद कई प्रोजेक्टों की तरह यह भी अटक गया। अटलजी की सरकार को दोबारा मौका मिलता तो यह ब्रिज 2007-08 में ही बन जाता। 2014 में सरकार बनने के बाद हमने सारी बाधाओं को दूर किया और गति दी।ÓÓ

भाजपा महासचिव ने कहा- हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह सुनवाई करेगा
रविशंकर प्रसाद ने कहा- सबरीमाला-समलैंगिकता पर जल्द फैसला आ सकता है तो राम मंदिर पर क्यों नहीं
उन्होंने कहा- बाबर का संविधान में जिक्र नहीं, हमें उनकी इबादत नहीं करनी चाहिए
नई दिल्ली। भाजपा महासचिव राम माधव ने बुधवार को कहा कि राम मंदिर पर अध्यादेश का विकल्प हमेशा खुला है। उन्होंने कहा कि अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। अदालत ने इसकी सुनवाई के लिए 4 जनवरी तय की है। हमें आशा है कि अदालत इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह सुनवाई करेगा और जल्द फैसला सुनाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हम दूसरा रास्ता अपनाएंगे। इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सुप्रीम कोर्ट से राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह करने की मांग की।
Óसबरीमाला पर फैसला जल्द आ सकता है तो राम मंदिर पर क्यों नहीं?Ó रविशंकर प्रसाद मंगलवार को अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद की 15वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब सबरीमाला मामले में जल्द फैसला आ सकता है, तो सालों से अटके इस मामले में क्यों नहीं?
प्रसाद ने कहा कि मैं कानून मंत्री के नाते नहीं, बल्कि एक आम नागरिक के तौर पर सुप्रीम कोर्ट से मामले पर जल्द फैसला देने की अपील करता हूं। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह, इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस एआर मसूदी भी मौजूद थे।
उन्होंने कहा, इस मामले में इतने सबूत हैं कि अच्छी बात हो सकती है। लेकिन लोग मेरे पास आते हैं और पूछते हैं कि समलैंगिकता पर 6 महीने में, सबरीमाला पर 5-6 महीने में, अर्बन नक्सल पर 2 महीने में फैसला हो जाता है। हमारे रामलला का विवाद 70 सालों से कोर्ट में अटका है। 10 साल से सुप्रीम कोर्ट के पास है, इसमें सुनवाई क्यों नहीं होती?ÓÓ
कानून मंत्री ने कहा , 'Óहम बाबर को क्यों पूजें, उसकी इबादत नहीं होनी चाहिए।ÓÓ उन्होंने संविधान की प्रति को दिखाते हुए कहा कि इसमें राम, कृष्ण और अकबर का भी जिक्र है, लेकिन बाबर का नहीं। उन्होंने कहा कि भारत में इस तरह की बात कर दो तो नया विवाद खड़ा हो जाता है।
अयोध्या विवाद पर 4 जनवरी को होनी है सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर 4 जनवरी को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 3 जजों की बेंच इस मामले में सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया था।

पुणे (महाराष्ट्र)। तीन हिंदी भाषी राज्यों में हाल में भाजपा की हार के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को कहा कि ‘‘नेतृत्व’’ को ‘‘हार और विफलताओं’’ की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। साफगोई के लिये चर्चित भाजपा नेता ने कहा कि सफलता की तरह कोई विफलता की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता।  

गडकरी ने कहा, ‘‘सफलता के कई दावेदार होते हैं लेकिन विफलता में कोई साथ नहीं होता। सफलता का श्रेय लेने के लिये लोगों में होड़ रहती है लेकिन विफलता को कोई स्वीकार नहीं करना चाहता, सब दूसरे की तरफ उंगली दिखाने लगते हैं।’’ 
 
वह यहां पुणे जिला शहरी सहकारी बैंक असोसिएशन लिमिटेड द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। 

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