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रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश से सशस्त्र बल सप्ताह 2018 में भाग लेने की अपील की जो 1 से 7 दिसंबर 2018 के बीच चल रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे सशस्त्र बल के जवान हमारे लिए गौरव हैं। उनकी बहादुरी और बलिदान का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि आइए हम सशस्त्र बल का झंडा पहन कर और उत्साह के साथ सशस्त्र बल सप्ताह मनाकर अपने सैनिकों को अपना समर्थन दे।वहीं रक्षा प्रवक्ता ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि भारत के सभी कोनों में सभी उम्र और सभी समाज के लोग इस जश्न को मनाते हैं। मजदूर वर्ग हो या फिर स्कूल या कोई आम नागरिक, सभी इस जश्न में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और सशस्त्र बल ध्वज दिवस कोष के लिए अपना योगदान देते हैं। इसके साथ ही रक्षा प्रवक्ता ने एक विडियो भी शेयर किया है जिसमें हमारे जवान लोगों को एक खास संदेश दे रहे हैं।

उधर रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने भी लोगों से अपने सैनिकों और उनके परिवारों के साथ खड़े रहने की अपील की और कहा कि सशस्त्र बलों को गर्व के साथ ध्वजांकित करें और जो भी आप #ArmedForcesFlagDay फंड की ओर कर सकते हैं उसमें योगदान दें।

जयपुर। राफेल विमान सौदे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार हमला कर रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से एक कदम आगे निकलते हुए पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने शनिवार को कहा कि 'चौकीदार का कुत्ता भी चोर से मिल गया है।' राजस्थान के अलवर जिले के खैरथल में चुनावी रैली में सिद्वू ने राफेल लडाकू विमान सौदे में कथित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘500 करोड़ रुपये का विमान 1600 करोड रुपये में खरीदा गया तो 1100 करोड रुपये किसकी जेब में डाले? 

इस पर जनता ने नारे लगाये कि ‘चौकीदार चौर है’ तो सिद्वू बोले कि 'चौकीदार का कुत्ता भी चोर से मिल गया है।' सिद्वू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर हमला करते हुए कहा कि, ‘अंधा गुरु बहरा चेला, दोनों नरक में खेलम खेला।’ उन्होंने कहा, ‘‘आपने (भाजपा सरकार) ने किसानों की कमर तोड दी है।
आप गरीब और किसानों के नहीं है आप अंबानी और अडाणी के हो। आप बडे़ बडे़ पूंजीपतियों की कठपुतली बन गये हो और वो रोज गाना गाते है कि नाच मेरी बुलबुल तुझे पैसा मिलेगा।’’ उन्होंने विश्वास जताया कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनेगी और सत्ता में आने में दस दिन के अंदर किसानों का कर्जा माफ कर दिया जायेगा और किसानों को उचित एमएसपी मिलेगा।

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद राकेश सिंह ने कांग्रेस द्वारा ईवीएम को लेकर किए जा रहे प्रोपेगंडा पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस का यह इतिहास रहा है कि वह संवैधानिक संस्थाओं पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आरोप लगाकर उनकी गरिमा को भंग करती रहती है। संवैधानिक व्यवस्था के तहत चुनाव आचार संहिता के दौरान सारा कंट्रोल चुनाव आयोग के पास होता है। किसी राजनीतिक दल अथवा सरकार का चुनाव संचालन और अन्य व्यवस्थाओं में कोई दखल नहीं होता। इसके बावजूद कांग्रेस अनर्गल प्रलाप कर भ्रम की स्थिति पैदा कर रही हैं।

 
राकेश सिंह ने आज एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस के नेताओं को पता है कि वह बुरी तरह हार का सामना करने वाले हैं, इसलिए कांग्रेस के लोगों ने मतदान के दिन से ही ईवीएम को लेकर प्रलाप करना शुरु कर दिया है। यह कांग्रेस का शगल बन गया है की जब हार रहे हैं तो ईवीएम को दोष देना शुरू कर दो और जब जीत रहे हैं तो ईवीएम पर चुप्पी साधे रहो। सिंह ने प्रश्न किया है कि यदि ईवीएम कांग्रेस के विरुद्ध ही चलती है तो पंजाब में कांग्रेस की सरकार कैसे बनी ? यदि ईवीएम भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में ही काम करती है तो फिर भारतीय जनता पार्टी को किसी भी चुनाव क्षेत्र में पराजित नहीं होना चाहिए। सच्चाई यह है कि कांग्रेसी घपले घोटालों के अपने काले अध्याय से बाहर नहीं आना चाहते है।
 
आज वह जिस प्रकार से चुनाव प्रक्रिया को लांछित करने पर उतारू है, इससे स्पष्ट है कि चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होने के कारण कांग्रेस के पेट में मरोड़ हो रही है। यह इस बात का भी संकेत है पांच-छह दशकों तक लगातार सरकारों ने रहने वाली कांग्रेसी शायद चुनाव में गड़बड़ियां कराकर ही सत्ता प्राप्त करती रही होगी। चुनाव से पूर्व ही कांग्रेस ने चुनाव आयोग के विरुद्ध वातावरण बनाना शुरू कर दिया था। चुनाव आयोग पर फर्जी मतदाता सूची जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, लेकिन आयोग ने जब पूरी सतर्कता और परिश्रम के साथ इस मतदाता सूची  का परीक्षण निरीक्षण कराया तो फर्जी मतदाता नाम का कोई व्यक्ति प्राप्त नहीं हुआ। कांग्रेस ने इस मोर्चे पर भी बुरी तरह मुंह की खाई, लेकिन बेशर्मी की पराकाष्ठा देखिए कि कांग्रेस नए-नए विषय रोज लेकर आती है।
 
जहां तक ईवीएम के लेट पहुंचने का या समय पर पहुंचने का विषय है तो इसका भारतीय जनता पार्टी या सरकार से क्या लेना देना है। सारी व्यवस्थाएं चुनाव आयोग के अधीन होने के कारण चुनाव आयोग लापरवाही के विरुद्ध जो कार्यवाही करना चाहिए और करता ही है और कर भी रहा है। मूल बात यह है कि कांग्रेस बुरी तरह पराजय की ओर बढ़ गई है, इसलिए चुनाव परिणाम के बाद अपनी कमियों को छुपाने के लिए ईवीएम पर ठीकरा फोड़ने की भूमिका तैयार कर रही है। कांग्रेस हार के बाद यही बयान देने वाली है कि ईवीएम में गड़बड़ी के कारण कांग्रेस पराजित हुई है।

जयपुर। केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस अपने नेता के मजहब व जाति को लेकर दुविधा में है और उसकी दुविधा बार बार प्रकट हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस पांचों राज्यों में हो रहे चुनाव में हार रही है।

 
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हिंदुत्व संबंधी बयान पर सुषमा ने यहां संवाददाताओं से कहा,‘ मैं जानती हूं कि वे यह बात वह क्यों कह रहे है क्योंकि वे स्वयं व उनकी पार्टी कांग्रेस अपने नेता के मजहब व जाति को लेकर दुविधाग्रस्त है। और यह दुविधा बार बार प्रकट हो रही है।’ 
 
 
कांग्रेस अध्यक्ष ने इससे पहले उदयपुर में कहा था,‘ हमारे प्रधानमंत्री कहते हैं कि मैं हिंदू हूं। लेकिन जो हिंदुत्व की नींव है उसको (वे) नहीं समझते। किस प्रकार के हिंदू हैं?’ पलटवार करते हुए सुषमा ने कहा,‘भगवान न करे कि वह दिन कभी आए कि राहुल गांधी से हमें हिंदू होने का मतलब जानना पड़े।’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस राजस्थान सहित पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव हारने वाली है। 
 
उन्होंने कहा,‘दुविधाग्रस्त कांग्रेस तीनों भाजपा शासित प्रदेशों में जीतने वाली नहीं। इन राज्यों में हम पुन: वापस आ रहे हैं। तेलंगाना और मिजोरम में भी कांग्रेस जीतेगी नहीं । दीवार पर लिखी इबारत है कि दुविधाग्रस्त कांग्रेस ये पांचों चुनाव हारेगी।

ब्यूनस आयर्स। भारत 2022 में जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यह घोषणा की। उस साल देश की आजादी के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं। जी-20 विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। मोदी ने यहां अर्जेंटीना की राजधानी में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के समापन समारोह में यह घोषणा की। वर्ष 2022 में जी 20 सम्मेलन की मेजबानी इटली को करनी थी।

मोदी ने भारत को इसकी मेजबानी मिलने के बाद इसके लिए इटली का शुक्रिया अदा किया। साथ ही, उन्होंने जी-20 समूह के नेताओं को 2022 में भारत आने का न्यौता दिया। वर्ष 2022 में भारत की आजादी के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं।
 
 प्रधानमंत्री ने घोषणा के बाद ट्वीट किया, ‘‘वर्ष 2022 में भारत की आजादी के 75 साल पूरे हो रहे हैं। उस विशेष वर्ष में, भारत जी-20 शिखर सम्मेलन में विश्व का स्वागत करने की आशा करता है। विश्व की सबसे तेजी से उभरती सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में आइए। भारत के समृद्ध इतिहास और विविधता को जानिए और भारत के गर्मजोशी भरे आतिथ्य का अनुभव लीजिए।’’ 

इंदौर। गलाकाट प्रतिस्पर्धा वाली प्रवेश परीक्षा में कामयाब होने के बाद देश के आठ प्रमुख भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में दाखिला पाने वाले करीब 66,000 विद्यार्थी फैकल्टी के अभाव से जूझ रहे हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से खुलासा हुआ है कि देश के इन शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में औसत आधार पर शिक्षकों के लगभग 36 प्रतिशत स्वीकृत पद खाली पड़े हैं। मध्यप्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने बताया कि उनकी अर्जी के जवाब में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक आला अधिकारी ने उन्हें 26 नवंबर को भेजे पत्र में सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी दी है।

 
आरटीआई के तहत मुहैया कराये गये आंकड़े बताते हैं कि मुंबई (बॉम्बे), दिल्ली, गुवाहाटी, कानपुर, खड़गपुर, चेन्नई (मद्रास), रूड़की और वाराणसी स्थित आईआईटी में फिलहाल 65,824 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इन आईआईटी में पढ़ा रहे शिक्षकों की संख्या 4,049 है, जबकि इनमें फैकल्टी के कुल 6,318 पद स्वीकृत हैं। यानी 2,269 पद खाली रहने के कारण इन संस्थानों में करीब 36 प्रतिशत शिक्षकों की कमी है। औसत आधार पर इन आठ संस्थानों में विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात 16:1 है। यानी वहां हर 16 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक नियुक्त है।
 
शिक्षकों की कमी के मामले में सबसे गंभीर स्थिति वाराणसी स्थित आईआईटी बीएचयू में है जहां अलग-अलग पाठ्यक्रमों में 5,485 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इस प्रतिष्ठित संस्थान में 548 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 265 शिक्षक काम कर रहे हैं। यानी इस संस्थान में शिक्षकों के 283 पद खाली पड़े हैं और यह आंकड़ा स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब 52 प्रतिशत की कमी दर्शाता है। इस संस्थान में हर 21 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक है।
 
वरिष्ठ शिक्षाविद् और करियर सलाहकार जयंतीलाल भंडारी ने इन आंकड़ों की रोशनी में कहा, "देश में आईआईटी की तादाद अब बढ़कर 23 पर पहुंच चुकी है। ऐसे में यह बात बेहद चिंतित करने वाली है कि आठ प्रमुख आईआईटी शिक्षकों की कमी से अब तक जूझ रहे हैं। जब इन संस्थानों में यह हाल है, तो इस सिलसिले में नये आईआईटी की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है।" उन्होंने कहा कि आईआईटी में शिक्षकों की कमी को सरकार द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता से दूर किया जाना चाहिये, क्योंकि इस अभाव से शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
 
आरटीआई के तहत मिले आंकड़ों के मुताबिक स्वीकृत पदों के मुकाबले शिक्षकों की कमी आईआईटी खड़गपुर में 46 प्रतिशत, आईआईटी रूड़की में 42 प्रतिशत, आईआईटी कानपुर में 37 प्रतिशत, आईआईटी दिल्ली में 29 प्रतिशत, आईआईटी मद्रास में 28 प्रतिशत, आईआईटी बॉम्बे में 27 प्रतिशत और आईआईटी गुवाहाटी में 25 प्रतिशत के स्तर पर है।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वह अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगीं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वह राजनीति से संन्यास लेने जा रही हैं। सुषमा ने कहा, 'मैं कई चुनाव प्रचार कार्यक्रमों में गई हूं, मैंने हमेशा कहा है कि कार्यक्रम बंद दरवाजों के पीछे होना चाहिए। धूल आदि से बचना मेरे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इसलिए मैंने कहा कि मैं अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ूंगी। लेकिन, मैंने यह कभी नहीं कहा कि मैं राजनीति से संन्यास ले रही हूं।'

 

स्वराज ने कहा, 'मेरा स्वास्थ्य ठीक है, लेकिन इसे लेकर मैं लगातार सावधानी बरत रही हूं। डॉक्टरों ने मुझे इंफेक्शन और धूल से बचने के लिए कहा है। मैं खुद को धूल से दूर भी रखती हूं, लेकिन कितना भी प्रयास किया जाए चुनाव के दौरान ऐसा नहीं हो पाता।'

महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने शनिवार को उम्मीद जतायी कि प्रस्तावित मानव तस्करी निरोधक विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में राज्यसभा द्वारा पारित कर दिया जाएगा। विधेयक पीड़ितों, गवाहों और शिकायतकर्ताओं की गोपनीयता, समयबद्ध सुनवायी और पीड़ितों को उनके मूल स्थान भेजने का प्रावधान करता है। 
 
गांधी ने उनके मंत्रालय के विधेयक के आगामी संसद के शीतकालीन सत्र में आने के बारे में पूछे जाने पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम तस्करी निरोधक विधेयक के आने का इंतजार कर रहे हैं। लोकसभा ने पहले ही विधेयक को पारित कर दिया है और मैं उम्मीद कर रही हूं कि राज्यसभा उसे पारित कर देगा।’’ 

लोकसभा ने मानव तस्करी (निरोधक, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक 2018 गत जुलाई में संसद के मानसून सत्र के दौरान पारित किया था। गांधी ने कहा कि विधेयक का इरादा यौन कर्मियों को प्रताड़ित करना नहीं है और इसका इरादा मानव तस्करों के खिलाफ जाने का है, पीड़ितों के नहीं।

अपनी आने वाली पुस्तक के बारे में की चर्चा

उन्होंने कहा, ‘विधेयक में उन लोगों के प्रति दयालु रूख है जो सेक्स रैकेट के पीड़ित रहे हैं।’ कानून में जिला, राज्य और केंद्रीय स्तरों पर संस्थागत तंत्र निर्मित करने का प्रस्ताव है। इसमें कम से कम 10 वर्ष सश्रम कारावास और कम से कम एक लाख रूपये के जुर्माने का प्रावधान है। 

केंद्रीय मंत्री ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में अपनी आने वाली पुस्तक ‘‘देयर इज मॉन्स्टर अंडर माई बेड एंड अदर टेरिबल टेरर्स’’ के बारे में चर्चा की जिसके जनवरी में आने की उम्मीद है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘बच्चे कई चीजों से भयभीत होते हैं और हमें इनसे निपटने की जरूरत है।’’

नयी दिल्ली। देश के अलग-अलग प्रांतों से आए किसान दिल्ली में गुरुवार की शाम रामलीला मैदान में अपना डेरा डालते हैं और फिर शुक्रवार की सुबह वह दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन करते हुए संसद मार्ग पुलिस थाने तक पहुंचे। वहां पर विपक्षीसान मुक्ति मोर्चा की अगुवाई करने वाले 200 से अधिक किसान संगठनों का लक्ष्य सरकार को किसानों के लिए तीन हफ्तों का विशेष संसदीय सत्र बुलाने के लिए मजबूर करना है। शुक्रवार के दिन समूची दिल्ली से किसानों के प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आ रही थीं और कहा जा रहा है कि एक लाख से अधिक किसानों ने राजधानी में प्रदर्शन किया मगर एकाध अखबार छोड़ दिया जाए तो किसी भी अखबार ने इन किसानों को पहले पेज पर तवज्जो नहीं दी। पहले पेज में जगह मिली भी तो विपक्षी एकता को जिन्होंने एक के बाद किसानों को संबोधित करने के बहाने सरकार को अपने मुताबिक गरियाया। 

 सबसे पहले किसानों के पास पहुंचे पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस प्रमुख एचडी देवेगौड़ा ने आंदोलन को समर्थन दे दिया। देवेगौड़ा द्वारा रामलीला मैदान में पहुंचने की खबर सुर्खियों में जैसे ही आई मानो नेताओं का हुजूम रामलीला मैदान की तरफ बढ़ने लगा और जो नेता रामलीला मैदान नहीं पहुंच पाए उन्होंने शुक्रवार के दिन किसानों का मंच हथिया लिया और अपना-अपना वक्तव्य पेश किया।
 
तेजस्वी यादव द्वारा दिल्ली के रामलीला मैदान पर मुजफ्फरपुर आश्रृयग्रह में बच्चियों के साथ हुए दुराचार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भी विपक्षी एकता को देखा गया था। लेकिन, बीते दिनों सोशल मीडिया पर जिस तरह से किसान आंदोलन को तवज्जो मिली वैसे आज के अखबारों ने उन्हें सुर्खियों में नहीं रखा। किसी ने कहा कि किसानों ने दिल्ली को जाम कर दिया तो किसी ने इसे नौटंकी बताया। सीधा सवाल आपसे कि जो किसान दिन रात मेहनत करके आपके लिए फसल का उत्पादन करता है उस किसान के लिए क्या आप थोड़ी सी परेशानियां उठा नहीं सकते हैं? हम आपसे यह भी प्रश्न करना चाहते हैं किक्या अन्नदाता दिल्ली के लोगों को परेशानी देने के लिए आया था?
    • क्या अन्नदाता नेताओं के द्वारा एक बार फिर से ठगा गया?
    • क्या आपने किसानों की जो मांगे हैं उससे बड़ी सुर्खियां नेताओं के बयानों की नहीं पढ़ीं? नावों को देखते हुए इस बार किसानों को दिल्ली आने से रोका नहीं गया लेकिन क्या गारंटी है कि अगली बार जब किसान दिल्ली की तरफ कूच करेंगे तो उन्हें लाठियां नहीं मिलेगी?
इस तरह के आंदोलनों में पहली बार देखा गया कि किसानों ने स्वयं किसान घोषणा पत्र का निर्माण किया है। दरअसल, किसानों ने कहा कि कर्ज से मुक्ति दिलाने और कृषि उपज की लागत को डेढ़ गुनी कीमत दिलाने से जुड़े प्रस्तावित दो विधेयक संसद में लंबित हैं। इन्हें पारित कराने के लिये किसानों ने सरकार से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग को लेकर यह आंदोलन किया है। 

 

वहीं, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के नेता योगेन्द्र यादव ने कहा है कि किसानों ने कृषि संकट के स्थायी समाधान के लिये पहली बार सरकार के समक्ष समस्या के समाधान का मसौदा पेश किया है। किसान चार्टर और किसान घोषणा पत्र के रूप में इस मसौदे को शुक्रवार को संसद मार्ग पर आयोजित किसान सभा में पेश किया गया। 

काठमांडू। आतंकवाद को दुनिया के समक्ष वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने शनिवार को कहा कि आतंकवाद कोई सीमा या धर्म को नहीं मानता और भारत लम्बे समय से प्रायोजित आतंकवाद से प्रभावित रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे में आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिये दुनिया के देशों को मिलकर अंतरराष्ट्रीय कानून बनाना चाहिए। एशिया प्रशांत शिखर सम्मेलन के प्रारंभिक सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व करते हुए देवेगौड़ा ने कहा कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती आतंकवाद है। यह तेजी से बढ़ रहा है। यह लिंग, सीमा, धर्म का कोई भेद नहीं करता। आतंकवाद ऐसी बुराई है जो वैश्विक शांति, स्थिरता एवं प्रगति के मार्ग में बड़ी बाधा बन गया है।

उन्होंने कहा कि भारत लम्बे समय से प्रायोजित आतंकवाद से प्रभावित रहा है। एक छोटा आतंकी समूह भी बड़ी समस्या और चुनौती खड़ी कर रहा है। ऐसे में वैश्विक आतंकवाद का मुकाबला वैश्विक सामूहिक प्रयासों से ही हो सकती है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी स्थिति में आतंकवाद या किसी आतंकी समूह को उचित नहीं ठहराया जा सकता है। इसे महिमामंडित करना ठीक नहीं है। देवेगौड़ा ने कहा कि हाल के वर्षो में कुछ अच्छी पहल हुई है। दुनिया आतंकवाद के बारे में सजग हुई है, आतंकवाद के वित्त पोषण के नेटवर्क पर लगाम लगाने की पहल शुरू हुई है लेकिन अब भी आतंकवाद के संबंध में कोई अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं बन पाया है।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिये अंतरराष्ट्रीय कानून जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के खिलाफ कानून का प्रस्ताव लंबित है। इसे मंजूर नहीं किया जा सका क्योंकि आतंकवाद की परिभाषा तय नहीं हो पायी है। इस पर दुनिया के सभी देशों को मिलकर पहल करने की जरूरत है तभी टिकाऊ विकास, शांति और स्थिरता कायम की जा सकती है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी ने कहा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री ने आतंकवाद का उल्लेख किया और वह इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि दुनिया में शांति एवं प्रगति के मार्ग को आतंकवाद बाधित कर रहा है।

गिलानी ने कहा कि मैं इस बात से सहमत हूं कि अच्छा आतंकवाद या बुरा आतंकवाद जैसी कोई बात नहीं होती है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान भी लम्बे समय से आतंकवाद से प्रभावित है और अफागान युद्ध की पृष्ठभूमि में काफी संख्या में पाकिस्तान में शरणार्थी आए और आज भी लाखों की संख्या में वे मौजूद है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ अभियान शुरू किया था। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के कारण न केवल काफी संख्या में लोग मारे गए बल्कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

चीन के साथ चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा का जिक्र करते हुए गिलानी ने दावा किया यह गलियारा (सीपेक) चुनिंदा नहीं है बल्कि समावेशी स्वरूप का है जो सम्पर्क की दृष्टि से आगे बढ़ाया जा रहा है। गिलानी ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में सीपेक के बारे में कुछ लोग दुष्प्रचार करने में लगे हैं जबकि इसे बंदरगार के विकास, विशिष्ठ आर्थिक क्षेत्र तैयार करने, आधारभूत संरचना के विकास की दृष्टि से आगे बढ़ाया जा रहा है। एशिया प्रशांत शिखर सम्मेलन, नेपाल 2018 का आयोजन 30 नवंबर से 3 दिसंबर तक काठमांडू में हो रहा है जिसका मुख्य विषय ‘हमारे समय की महत्वपूर्ण चुनौतियां: स्वतंत्रता, साझी समृद्धि और सार्वभौम मूल्य’ है। एशिया प्रशांत शिखर सम्मेलन, नेपाल का आयोजन यूर्निवर्सल पीस फेडेरेशन ने किया है जो दुनिया के कई देशों में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के साथ मिलकर काम कर रहा है।

 

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