देश

देश (9405)

र्व वित्त सचिव और वित्त आयोग के वर्तमान सदस्य शक्तिकांत दास को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में नियुक्त किया गया है। पिछले साल वह आर्थिक मामलों के सचिव पद से रिटायर हुए थे। मोदी सरकार द्वारा किए गए नोटबंदी के फैसले में भी इनकी प्रमुख भूमिका रही थी। 

बता दें कि सोमवार को RBI गवर्नर उर्जित पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने ने कहा कि वह यह फैसला व्यक्तिगत कारणों से ले रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक में वर्षों से विभिन्न पदों पर काम करना मेरे लिए सम्मान की बात रही।

नयी दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सिखाया कि ‘क्या नहीं करना चाहिए’ और उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार से भी ‘काफी कुछ सीखा।’ राहुल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को विशाल जनादेश मिला था, लेकिन उन्होंने ‘देश की धड़कन’ सुनने से इनकार कर दिया। हिंदीभाषी राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के फिर से उदय के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, ‘मैं कल अपनी मां से बात कर रहा था और मैं उनसे कह रहा था कि मेरे लिए सबसे अच्छी बात कुछ हुई है तो वह है 2014 का (लोकसभा) चुनाव। मैंने उस चुनाव से काफी कुछ सीखा है।’


राहुल (48) ने कहा कि 2014 के चुनाव से उन्हें जो सबसे अहम चीज सीखने को मिली, वह ‘विनम्रता’ है। उन्होंने कहा, ‘यह एक महान देश है और इस देश में सबसे अहम चीज है कि लोग क्या मानते हैं।’ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि एक नेता के तौर पर यह समझना होता है कि लोग क्या महसूस कर रहे हैं और वह जिस चीज को महसूस करते हैं, उससे जुड़ाव पैदा करना होता है। उन्होंने कहा, ‘बेबाकी से कहूं तो नरेंद्र मोदी जी ने मुझे सबक सिखाया कि क्या नहीं करना चाहिए।’ 

 

राहुल ने कहा कि पांच साल पहले उन्हें (मोदी को) इस देश में बदलाव लाने का बड़ा मौका दिया गया। दुखद चीज यह है कि उन्होंने देश की धड़कन सुनने से मना कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी ने युवाओं और किसानों की आवाज सुनने से इनकार कर दिया। राहुल ने जोर देकर कहा, ‘थोड़ा अहंकार आ गया है। मेरा मानना है कि यह किसी नेता के लिए घातक होता है। उनके काम करने के तरीके से मैंने यह बात सीखी है। मेरे लिए इस देश के लोग ही सबसे अच्छे शिक्षक हैं।’

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली जीत पर बधाई दी। इसी के साथ उन्होंने कहा कि हाथी अब हाथ को समर्थन देगा। मायावती के समर्थन के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनना लगभग पूरी तरह से तय हो गया है। हालांकि, मायावती ने कहा कि मैं कांग्रेस की कई नीतियों से खुश नहीं हूं फिर भी कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने के लिए तैयार हूं, जरुरत पड़े तो राजस्थान में भी।

मायावती ने कहा कि हमारे पार्टी के लोगों का ये कहना है कि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान की जनता बीजेपी सरकार की गलत कार्य प्रणाली की वजह से दुखी हो चुकी थी। इसी वजह से वह बीजेपी को सत्ता में आते हुए नहीं देखना चाहती थी, जिसका फायदा कांग्रेस को मिला और अब लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस इस जीत को भुनाने की कोशिश करेगी।
पांच राज्यों के चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी को मिली शिकस्त आर्थिक मोर्चे पर सरकार के लिए खतरे की घंटी है। केंद्र सरकार को अब इस मोर्चे पर कुछ ऐसे फैसले लेने होंगे, जिनसे आम जनता को फायदा हो। हालांकि लोकसभा चुनाव में अब पांच महीने का वक्त शेष रह गया है, ऐसे में देखना होगा कि सरकार किस तरह के फैसले लेती है, जिससे लोगों को जिंदगी में कुछ बदलाव आ सके। 

पॉलिसी में करने होंगे बदलाव

केयर रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस के अनुसार सरकार को अब अपनी इकोनॉमिक पॉलिसी में बड़े बदलाव करने होंगे। इसमें किसानों का कर्ज माफ करना, खेती पर फोकस करना और समाज से जुड़े मुद्दों पर फोकस करना होगा। आगे के महीनों में हम देख सकते हैं कि सरकार एक बार फिर से कई ऐसे मुद्दों पर फैसला लें, जो जनता से सीधे जुड़े हैं। 

गांवों की ओर अब ध्यान देगी सरकार

आनंद राठी फाइनेंस सर्विस के चीफ इकोनॉमिस्ट सुजन हजरा ने कहा कि अब सरकार एक बार से गांवों की ओर ध्यान देगी। इसमें किसानों को फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी करना और अन्य ग्रामीण भारत के लिए बनी हुई योजनाओं पर फोकस करने का होगा।
 
इस वक्त देश का चालू खाता घाटा 4 फीसदी के पार चला गया है। वहीं अप्रत्यक्ष कर से होने वाली आय और विनिवेश काफी कम हो गई है, जिस पर सरकार को थोड़ा सोचना होगा। एचडीएफसी बैंक चीफ इकोनॉमिस्ट अभीक बरूआ ने कहा कि सरकार फिलहाल किसी तरह की कोई नई योजना की घोषणा नहीं करेगी, बल्कि पुरानी योजनाओं को सीधे आम आदमी तक पहुंचाने के लिए कदम उठाएगी। 

अंतरिम बजट में दिखेगा बदलाव

सरकार 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश करेगी।  इस दौरान हो सकता है वित्त मंत्री अरुण जेटली अपना फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, घर, रेलवे और सड़कों पर कर लें। इसके साथ ही सब्सिडी में बढ़ावा और टैक्स की दरों में और कमी की जा सकती है, जिससे आम लोगों को राहत मिल सके। 

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन का श्रेय पार्टी के नेता अपने अध्यक्ष राहुल गांधी को दे रहे हैं। जिन्होंने चुनाव वाले पांचों प्रदेशों में कुछ हफ्तों के भीतर ही 82 सभाएं और सात रोड शो किए थे।

कांग्रेस के संगठन महासचिव अशोक गहलोत का कहना है कि इन चुनावों में खासकर राजस्थान में पार्टी के अच्छे प्रदर्शन का श्रेय राहुल गांधी के नेतृत्व को जाता है।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान से जुड़े पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने 7 अक्तूबर को चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने के बाद सबसे अधिक 25 जनसभाएं मध्य प्रदेश में की। उन्होंने मध्य प्रदेश में 4 रोड शो भी किए।

कांग्रेस अध्यक्ष ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ में 19-19 चुनावी सभाओं को संबोधित किया। इसके अलावा उन्होंने राजस्थान में 2 और छत्तीसगढ़ में एक रोड शो भी किया।

राजस्थान में कांग्रेस पांच साल बाद सत्ता में वापसी करती दिख रही है। दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में कांग्रेस 15 वर्षों के बाद भारी बहुमत से सत्ता में वापसी कर रही है।

गांधी ने तेलंगाना में 17 जनसभाएं करके कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन के उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे, हालांकि यहां पार्टी को निराशा हाथ लगी। 
उन्होंने मिजोरम में 2 सभाएं की लेकिन यहां कांग्रेस अपनी सत्ता बचाने में नाकाम रही।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, "इस चुनाव का एक बड़ा संदेश यह है कि जनता राहुल गांधी को एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर स्वीकार कर रही है। यह आने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस के लिए शुभ संकेत है।" 

मध्य प्रदेश और मिजोरम में 28 नवंबर को मतदान हुआ तो राजस्थान एवं तेलंगाना में 7 दिसंबर को वोट डाले गए। छत्तीसगढ़ में 12 और 20 नवंबर को दो चरणों में मतदान हुआ था।

आईजोल। मिजोरम विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को आज तब बड़ा झटका लगा जब राज्य के मुख्यमंत्री ललथनहावला दोनों विधानसभा सीटों से अपना चुनाव हार गये। यहां रुझानों में एमएनएफ को बहुमत मिलता दिख रहा है। कांग्रेस ने राज्य में अपनी सत्ता बचाने के लिए प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी थी और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी सहित सभी स्टार प्रचारकों को चुनाव प्रचार में उतार दिया था। कांग्रेस को यहां अंतिम समय तक अपनी सरकार बनने की उम्मीद थी इसलिए उसने केंद्र से कई नेता यहां भेज रखे थे कि यदि जोड़तोड़ की जरूरत पड़े तो वह समय रहते की जा सके।

 
पूरे उत्तर-पूर्व में देखें तो कांग्रेस के पास यही एकमात्र राज्य बचा था जहां उसकी सत्ता थी। उत्तर-पूर्व में मिजोरम को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में भाजपा और कांग्रेस की सरकारें हैं। यहां भाजपा और कांग्रेस ने जमकर प्रचार किया था लेकिन जनता ने क्षेत्रीय दल को सरकार बनाने के लिए चुना।
 

भोपाल। कांग्रेस के स्टार प्रचारक और पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस को मिल रही जीत पर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को बधाई दी और कहा कि मेहनत और सब्र का फल मीठा होता है। बुरे दिन जाने वाले हैं और राहुल गांधी आने वाले हैं। उन्होंने कहा कि अब लाल किले की तरफ राहुल गांधी आगे बढ़ रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि लोगों के भीतर काफी आक्रोश था और उन्होंने बीजेपी के वादों को देखा और फिर सत्य को जिताया। 

इसी के साथ सिद्धू ने 2019 में राहुल के लाल किले से झंडा फहराने का दावा करते हुए कहा कि राहुल के आने से सभी के भीतर विश्वास जागा है और कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व की वजह से सभी एकजुट हुए हैं। जिसका असर चुनाव परिणामों पर दिखाई दे रहा है। 

जयपुर। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे झालरापाटन विधानसभा सीट से जीत चुकी हैं। बता दें कि कांग्रेस के उम्मीदवार मानवेंद्र सिंह पहले वसुंधरा राजे को कड़ी टक्कर देते हुए दिखाई दे रहे थे, मगर राजे आधे के अंतर से जीत चुकी हैं। 

हालांकि, राजस्थान की स्थिति देखी जाए तो रुझानों में कांग्रेस को बहुमत मिल चुका हैं। जबकि बीजेपी के पास अभी 80 से कम सीटें नजर आ रही हैं। इसी उठापटक के बीच वसुंधरा राजे ने पार्टी नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठक की और चुनाव परिणाम जो सामने आए उसका विश्लेषण किया।

वहीं, कांग्रेस की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष सचिन पायलट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि हम राज्य में सरकार बनाएंगे, लेकिन उनकी वार्ता में अजीब सी कशमकस भी देखने को मिली। उन्होंने कहा कि बीजेपी बस खरीद-फरोख्त की राजनीति न करें। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने निर्दलियों से समर्थन लेने की बात कही।

मथुरा। केंद्रीय गृहमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति, विश्व की श्रेष्ठतम संस्कृति है। समकालीन सभ्यताएं उससे बहुत पीछे हैं। भारत में संस्कारों का बहुत महत्व है और यही संस्कार उसे अन्य सभ्यताओं से ज्यादा महान देश बनाते हैं। उन्होंने बताया कि एप्पल कंपनी के सीईओ स्टीव जॉब्स ने व्हाट्सएप्प और फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से कहा था कि जब कभी आपका मन कमजोर पड़े या व्याकुल हो तो भारत में नैनीताल के नींव करौरी बाबा के आश्रम चले जाना, मन को बहुत शांति मिलेगी और इतनी ऊर्जा का संचार होगा कि फिर कभी विचलन नहीं होगा।

उन्होंने यह सीख यहां एक निजी विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्रों को दी। समारोह में एक अन्य विशिष्ट अतिथि रक्षा अनुसंधान संस्थान के पूर्व महानिदेशक एवं अग्नि मिसाइल एवं सामरिक कार्यक्रम के निदेशक डॉ. वेंकटस्वामी ज्ञान शेखरन ने कहा, ‘पहले की तुलना में आज का शिक्षा तंत्र बहुत सरल हो गया है। आज इंटरनेट के माध्यम से आप किसी भी चीज को आसानी से सीख सकते हैं।’ इस मौके पर डॉ. भाटकर एवं डॉ. शेखरन को ‘डॉक्टर ऑफ साइंस’ की उपाधि प्रदान की गई। इनके अलावा दीक्षांत समारोह में 12 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 12 को रजत पदक, 10 को मेरिट सर्टिफिकेट तथा कुल 3196 को मास्टर एवं बैचलर डिग्रियां प्रदान की गईं।

नयी दिल्ली पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने संशोधित वृद्धि दर के आंकड़ों पर विवाद के बीच इसकी समीक्षा विशेषज्ञों द्वारा कराने की वकालत की है। उन्होंने कहा है कि संदेह दूर करने और भरोसा कायम करने के लिए ऐसा किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि आंकड़ों को लेकर बनी ‘पहेली’ पर भी चीजें साफ की जानी चाहिए। नीति आयोग की ओर इशारा करते हुए सुब्रमण्यम ने कहा कि ऐसे संस्थान जिनके पास सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना की विशेषज्ञता नहीं है, उनको इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। सुब्रमण्यम ने हाल में अपनी नई किताब ‘आफ काउंसिल: द चैलेंजेस आफ द मोदी जेटली इकनॉमी’ में नोटबंदी की आलोचना की है। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या इस मामले में उनसे सलाह ली गई थी, तो उन्होंने इसका कोई साफ जबाब नहीं दिया। 

सुब्रमण्यम ने पीटीआई भाषा से साक्षात्कार में कहा, ‘‘एक अर्थशास्त्री के रूप में मेरा मानना है कि जीडीपी श्रृंखला की नवनिर्धारित पिछली कड़ियों कुछ ‘पहेली जरुर है जिन्हें स्पष्ट किया जाना चाहिए।’’ चूंकि कुछ चीजों को स्पष्ट किए जाने की जरूरत है, ऐसे में भरोसा कायम करने और किसी तरह के संदेह को दूर करने के लिए मुझे लगता है कि विशेषज्ञों को इसकी गहन जांच करनी चाहिए और अपना जवाब देना चाहिए।’’ 

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा पिछले महीने जीडीपी की पिछली श्रृंखला के आंकड़ों के दौरान नीति आयोग की मौजूदगी को लेकर पैदा हुए विवाद पर सुब्रमण्यम ने कहा कि आंकड़ें बनाने और उनपर चीजें स्पष्ट करने की मुख्य जिम्मेदारी विशेषज्ञों की है। ‘‘मुझे लगता है कि जीडीपी की गणना काफी तकनीकी काम है और तकनीकी विशेषज्ञों को ही यह काम करना चाहिए। ऐसे संस्थान जिनके पास तकनीकी विशेषज्ञता नहीं हैं उन्हें इससे दूर रखा जाना चाहिए।’’ सीएसओ ने पिछले महीने 2004-05 के बजाय 2011-12 के आधार वर्ष का इस्तेमाल करते हुए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के जीडीपी आंकड़ों को घटा दिया था। इस आलोचना पर कि जब वह सरकार के साथ काम कर रहे थे तो उन्होंने नोटबंदी पर कुछ नहीं कहा था और अब वह इस मुद्दे को अपनी किताब बेचने के लिए उठा रहे हैं, सुब्रमण्यम ने कहा कि लोगों को जो कहना हैं वे कहें।

उन्होंने कहा कि अपनी नई किताब के जरिये वह उस पहेली बड़ी पहेली की ओर ध्यान खींच रहा हूं कि 86 प्रतिशत करेंसी बंद हो जाती है और अर्थव्यवस्था पर काफी कम असर पड़ा है। पूर्व सीईए का इशारा था कि क्या अर्थव्यवस्था पर इतना कम असर पड़ना जीडीपी की गणना के मौजूदा तरीके की वजह से है। 

सुब्रमण्यम ने कहा कि अर्थव्यवस्था पर कम असर पड़ने की वजह क्या है? क्या हम जीडीपी का आंकड़ा सही तरीके से नहीं निकाल रहे या हमारी अर्थव्यवस्था काफी ठोस है।’’ सुब्रमण्यम फिलहाल हार्वर्ड केनेडी स्कूल में पढ़ाते हैं। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच हालिया विवाद के बारे में पूछे जाने पर सुब्रमण्यम ने कहा कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को कायम रखा जाना चाहिए क्योंकि जब संस्थान मजबूत होते हैं तभी देश को भी फायदा होता है। देश में बढ़ती असहिष्णुता पर पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि दुनिया भर के देशों में देखा गया है जब देश में अधिक सामाजिक शांति होगी तभी आर्थिक वृद्धि भी बेहतर होगी। 

Ads

R.O.NO. 13895/62 Advertisement Carousel

MP info RSS Feed

फेसबुक