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नई दिल्ली । भारतीाय जनता पार्टी के गोवा के नव नियुक्त चुनाव प्रभारी देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ जीत दर्ज करेगी। फडणवीस ने यह भी कहा कि भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक समान विचारधारा वाले दलों के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन पर फैसला करेगी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके फडणवीस अभी केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी और दर्शन जरदोश के साथ गोवा में हैं और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत लगातार बैठकें कर रहे हैं । रेड्डी और जरदोश को गोवा का सह चुनाव प्रभारी बनाया गया है। फडणवीस ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की सरकारों ने जो काम किया है उसके कारण आगामी विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत के साथ जीत के प्रति भाजपा आश्वस्त है। गौरतलब है कि 2017 में हुये प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 40 में से 17 सीटों पर जीत मिली थी जबकि भाजपा के खाते में 13 सीटें आयी थी। फडणवीस ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की कमी खलेगी, जिनका 2019 में निधन हो गया था। लेकिन पर्रिकर के निधन के बाद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने राज्य प्रशासन को बेहतर तरीके से संभाला है। उन्होंने यह भी कहा कि सही समय आने पर अगले मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के नाम की घोषणा की जायेगी।

चंडीगढ़/नई दिल्ली| पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. उनके इस बयान ने कांग्रेस के साथ-साथ पंजाब के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी. अमरिंदर ने शनिवार को ‘अपमान’ का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफा देने के तुरंत बाद सिंह ने पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू पर पाकिस्तान के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया और यहां तक कि उन्हें ‘राष्ट्र-विरोधी’ भी कहा. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि उनका पंजाब का मुख्यमंत्री बनना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा होगा.

उधर, पंजाब के होशियारपुर से बीजेपी के लोकसभा सांसद और मोदी सरकार में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने IANS से बात करते हुए कहा, ‘कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को हटाकर स्वीकार किया है कि पंजाब में उसकी सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है.’ उन्होंने कांग्रेस सरकार पर राज्य में माफिया, भ्रष्टाचार और अवैध खनन को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया. लेकिन साथ ही सोम प्रकाश ने यह भी कहा, ‘अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू के बारे में जो कह रहे हैं वह सच है और यह सभी जानते हैं.’
इस सवाल पर कि क्या कैप्टन भाजपा में शामिल होंगे, केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश ने कहा, ‘राजनीति में क्या होगा, कोई नहीं जानता.’ हालांकि, उन्होंने कहा कि इस पर पार्टी आलाकमान को फैसला करना है.

राजस्थान : कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को नया सीएम बनाकर कांग्रेस ने भले ही पंजाब इकाई में जारी रार को थामने की कोशिश की है लेकिन पार्टी को इस आंतरिक कलह का खामियाजा राजस्थान में भी भुगतना पड़ सकता है। कांग्रेस पार्टी की अकेले दम पर सिर्फ तीन राज्यों में सरकार है और हर जगह कांग्रेस में अंदरूनी कलह अब किसी से छिपी नहीं है।

माना जा रहा है कि पंजाब के बदलाव से राजस्थान में भी सचिन पायलट खेमे में उत्साह भर गया है और एक बार फिर से यहां अशोक गहलोत को हटाए जाने की मांग जोर पकड़ सकती है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच जारी मतभेद को एक साल से भी ज्यादा का समय बीत गया है। हाईकमान के दखल के बाद दोनों नेताओं के खेमों के बीच सीजफायर जरूर हुआ लेकिन अभी भी पायलट खेमे के विधायकों में कैबिनेट फेरबदल का वादा पूरा न किए जाने को लेकर नाराजगी बरकरार है।

पायलट के एक करीबी नेता ने कहा, 'हमें जल्द ही अच्छी खबर मिलने की उम्मीद है।' उन्होंने यह भी बताया कि पायलट की राहुल गांधी सहित कांग्रेस के कई आला नेताओं से पहले ही मुलाकात हो गई है और उन्हें यकीन है कि आने वाले कुछ हफ्तों पार्टी कोई बड़ा फैसला लेगी।

नई दिल्ली। पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने CM पद की शपथ ले ली है। उनके साथ डिप्टी सीएम के तौर पर सुखजिंदर सिंह रंधावा और ओपी सोनी ने भी शपथ ली। पंजाब में पहली बार 2 डिप्टी सीएम बनाए गए हैं। शपथ ग्रहण समारोह 11 बजे होना था लेकिन राहुल गांधी के इंतजार में 22 मिनट की देरी हुई। इसके बाद शपथ ग्रहण शुरु करवा दिया गया। राहुल गांधी उसके बाद राजभवन पहुंचे। अपमानित होकर मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने को मजबूर हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह शपथ ग्रहण समारोह में नहीं आए।

चरणजीत चन्नी अब पंजाब के इतिहास में पहले दलित मुख्यमंत्री बन गए हैं। वहीं, जट्‌टसिख कम्युनिटी से सुखजिंदर सिंह रंधावा और हिंदू नेता के तौर पर ओपी सोनी को डिप्टी सीएम बनाया गया है। पहले सोनी की जगह ब्रह्ममोहिंदरा का नाम घोषित किया गया था। मोहिंदरा कैप्टन ग्रुप से हैं, इसलिए अंतिम समय में उनका पत्ता कट गया। पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिद्धू के समर्थन से चन्नी CM की कुर्सी पाने में कामयाब रहे। यह कुर्सी कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।

शपथ के बाद मंत्रिमंडल पर नजर

चरणजीत चन्नी के शपथ लेने के बाद मंत्रिमंडल पर नजर रहेगी। चन्नी अब तक तकनीकी शिक्षा मंत्री रहे हैं। अब उनके पास कौन-सा मंत्रालय रहेगा। दो डिप्टी CM के पास कौन-सी जिम्मेदारी होगी। सबसे बड़ा सवाल यह कि अब कौन मंत्री बनेगा और कैप्टन सरकार के मंत्रियों में से किसका पत्ता कटेगा। चन्नी के CM बनने के बाद कांग्रेस दलित कार्ड खेल चुकी है। ऐसे में साधु सिंह धर्मसोत की वापसी मुश्किल हो गई है। उन पर दलित स्टूडेंट्स की पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में घोटाले का आरोप है।

कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक

पंजाब में 5 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में दलित वोट बैंक को साधने के लिए इसे कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा। पंजाब में 32% दलित आबादी है। 117 में से 34 सीटें रिजर्व हैं। वहीं चन्नी भले ही दलित नेता हैं, लेकिन सिख समाज से हैं। इस लिहाज से कांग्रेस को इसका बड़ा सियासी लाभ मिल सकता है। खासकर, दलित लैंड कहे जाने वाले पंजाब के दोआबा एरिया में कांग्रेस का दबदबा बढ़ सकता है।
हिंदू नेता ब्रह्ममोहिंदरा को डिप्टी CM बनाने से कांग्रेस ने हिंदू वोट बैंक को भी साधने की कोशिश की है। यह इसलिए अहम है, क्योंकि हिंदू वोट बैंक हमेशा भाजपा के साथ जाता है। हालांकि कैप्टन की व्यक्तिगत छवि को देखते हुए उन्हें भी शहरों से इसका लाभ मिलता रहा।
जट्‌ट सिख कम्युनिटी नाराज न हो, इसलिए सुखजिंदर रंधावा को डिप्टी CM बनाया जा रहा है। अब तक यही कम्युनिटी पंजाब को CM चेहरे देती रही है। यह वोट बैंक अकाली दल का माना जाता है। हालांकि 2017 में बेअदबी के मुद्दे पर यह छिटककर आम आदमी पार्टी की तरफ चला गया। रंधावा को मंत्रिमंडल गठित होने पर मजबूत प्रोफाइल दिया जा सकता है। इसके जरिए जट्‌ट सिख वोट बैंक में अपना शेयर सुनिश्चित किया जाएगा।
विरोधियों के लिए नई चुनौती

पंजाब में विरोधियों ने चुनाव के बाद जो वादे किए, वह कांग्रेस ने अभी पूरे कर दिए। BJP ने दलित CM कहा तो कांग्रेस ने चरणजीत चन्नी को बना दिया। अकाली दल ने एक हिंदू व एक दलित को डिप्टी CM बनाने की बात कही थी। कांग्रेस ने हिंदू व जट्‌ट सिख को डिप्टी सीएम बनाकर उसका तोड़ निकाल लिया। अब पंजाब में सरकार बनाने के लिए विरोधियों के आगे नई चुनौती पैदा हो गई हैं। अब जातीय ध्रुवीकरण के मुद्दे पर कांग्रेस के पास उनके लिए सटीक जवाब है।

पंजाब : कांग्रेस ने कांग्रेस में भले ही सरकार का मुखिया बदल दिया हो, लेकिन पार्टी में अभी भी गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। वरिष्ठ नेता और पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सोमवार को ट्विटर के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। उन्होंने कहा कि वह पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत के इस बयान से हैरान हैं कि अगला विधानसभा चुनाव नवजोत सिंह सिद्धू के नेतृत्व में लड़ा जाएगी।

हरीश रावत ने ठीक उसी दिन यह घोषणा की है जिस दिन चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने जा रहे हैं। उनके इस बयान से नए मुख्यमंत्री का अधिकार कमजोर हो सकता है।

सुनील जाखड़ ने ट्वीट कर कहा, ''मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत सिंह चन्नी के शपथ ग्रहण के दिन हरीश रावत का बयान (अगला विधानसभा चुनाव नवोजत सिंह सिद्धू के नेतृत्व में लड़ा जाएगा) चौंकाने वाला है। उनके इस बयान से मुख्यमंत्री के अधिकार को कमजोर करने की संभावना है।" आपको बता दें कि पंजाब में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार को पंजाब के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। रविवार को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए चरणजीत सिंह चन्नी को चुना। वह राज्य में सीएम की कुर्सी संभालने वाले पहले दलित बन गए।

शिमला : सोनिया गांधी कुछ दिनों के लिए शिमला के पास छराबड़ा में प्रियंका गांधी के निजी आवास में ठहरेंगी। सोनिया गांधी के बाद अब राहुल गांधी भी शिमला पहुंच सकते हैं।

पंजाब में उठे सियासी घमासान को निपटाने के बाद हुई थकान को मिटाने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सोमवार सुबह साढे़ दस बजे शिमला पहुंच गई हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी पिछले दो दिन से शिमला में हैं। प्रियंका वाड्रा छराबड़ा स्थित अपनी निजी कोठी में छुट्टियां बिता रही हैं। राबर्ट वाड्रा भी प्रियंका के साथ शिमला घूमने पहुंचे हैं।

सोनिया गांधी कुछ दिनों के लिए शिमला के पास छराबड़ा में प्रियंका गांधी के निजी आवास में ठहरेंगी। उल्लेखनीय है कि सोनिया की बेटी प्रियंका गांधी और दामाद राबर्ट वाड्रा शिमला में ही हैं। इनका छराबड़ा में करीब तीन दिन और ठहरने का कार्यक्रम है। अभी इनसे पार्टी का कोई नेता नहीं मिला है और न ही उनसे किसी को मिलने की अनुमति है।सोनिया गांधी के बाद अब राहुल गांधी भी शिमला पहुंच सकते हैं।

नई दिल्ली| पंजाब कांग्रेस में जारी सियासी उठापटक के बाद आखिरकार सीएम की कुर्सी से कैप्टन अमरिंदर सिंह की विदाई हो गई। अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद अब पंजाब के अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कांग्रेस में मथन जारी है। इस्तीफा सौंपने के बाद अमरिंद सिंह जब मीडिया के सामने आए तो उनका दर्द छलक पड़ा और उन्होंने इस दौरान नवजोत सिंह सिद्धू पर भी हमला बोला। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले अमरिंदर सिंह ने सोनिया गांधी से बातचीत की थी। कैप्टन ने इस्तीफा देने से पहले सोनिया गांधी के साथ हुई फोन पर हुई उसी बातचीत की भी पूरी कहानी बताई, जिसमें कांग्रेस प्रेसीडेंट ने उनसे सॉरी कहा था।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बताया, 'जब मुझे पता चला कि कांग्रेस विधायक दल का नया नेता चुनने की बात हो रही है तो मैंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सुबह करीब 10 बजे फोन किया। मैंने उनसे कहा कि मैम ये सब क्या हो रहा है। ऐसे में मैं इस्तीफा दे दूंगा। मुझे लगता है कि मुझे इस्तीफा दे देना चाहिए, मैं आपको अपना इस्तीफा भेज रहा हूं। इसके जवाब में सोनिया जी ने कहा कि आई एम सॉरी अमरिंदर, आप इस्तीफा दे सकते हैं। फिर मैंने कहा ओके मैम।'
इसके बाद कैप्टन ने राज्यपाल से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपा। अमरिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी में बदलाव के बाद भी उन्होंने सोनिया गांधी और उनके बच्चों के साथ निकटता के कारण इस तरह से अपमानित किये जाने की उम्मीद नहीं की थी। इधर, पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के कुछ घंटे बाद कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह ने शनिवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू पर तेज हमला किया और उन्हें 'राष्ट्र विरोधी, खतरनाक तथा पूरी तरह विपत्ति करार दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने यह भी कहा कि वह सिद्धू को अगले मुख्यमंत्री के रूप में या आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के चेहरे के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे।

अपना त्यागपत्र सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत में सिंह ने साफ किया कि उनकी राजनीति छोड़ने की कोई मंशा नहीं है। उन्होंने सिद्धू को 'राष्ट्र विरोधी, खतरनाक, अस्थिर, अक्षम करार देने के साथ राज्य और देश की सुरक्षा के लिए खतरा तक बता दिया। अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने के किसी भी कदम का पुरजोर विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का समर्थन करने का कोई प्रश्न नहीं उठता। उन्होंने आरोप लगाया कि वह (सिद्धू) 'साफतौर पर पाकिस्तान के साथ मिले हैं और पंजाब तथा देश के लिए खतरा और विपदा हैं। सिंह ने पाकिस्तान के नेतृत्व के साथ सिद्धू की करीबी को लेकर उन पर निशाना साधते हुए कहा, ''मैं ऐसे व्यक्ति को हमें तबाह नहीं करने दे सकता। मैं राज्य और उसकी जनता के लिए खराब मुद्दों पर लड़ता रहूंगा। उन्होंने कहा, ''हम सब ने सिद्धू को इमरान खान (पाकिस्तान के प्रधानमंत्री) और जनरल बाजवा (पाक सेना प्रमुख) को गले लगाते देखा है और करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की तारीफ करते सुना है, जबकि सीमा पर रोजाना हमारे जवान मारे जा रहे थे।'

कांग्रेस नेता ने राजनीति छोड़ने की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि एक सैनिक के तौर पर उनमें बहुत दृढ़ इच्छाशक्ति है और पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव में वह सक्रिय रहेंगे। सिंह ने दावा किया कि खुद उन्होंने अपने समर्थक विधायकों से कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल होने को कहा था और किसी बैठक में बड़ी संख्या में विधायकों की मौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि वे सिद्धू का समर्थन कर रहे थे। विधायकों का भरोसा खोने के केंद्रीय नेतृत्व के दावों को खारिज करते हुए सिंह ने इन्हें बेकार के बहाने बताया। उन्होंने कहा कि सारे विधायकों को खुश रखना मुमकिन नहीं है।

चंडीगढ़/नई दिल्ली. पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के साथ लंबे समय तक चली तनातनी के बाद अमरिंदर सिंह ने शनिवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि बार-बार विधायकों की बैठक बुलाए जाने से उन्होंने अपमानित महसूस किया, जिसके बाद पद छोड़ने का फैसला किया.

मुख्यमंत्री के बाद हुई विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को अधिकृत किया गया कि वह विधायक दल के नये नेता का चयन करें. यह नया नेता ही पंजाब का अगला मुख्यमंत्री होगा. सूत्रों के मुताबिक, नये विधायक दल के नेता के तौर पर सिद्धू के अलावा कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़, पूर्व मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा के नाम चर्चा में हैं.

इन नामों के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री अम्बिका सोनी, ब्रह्म मोहिंद्रा, विजय इंदर सिंगला, पंजाब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कुलजीत सिंह नागरा आदि के नामों की भी चर्चा है.
सिंह के इस्तीफे के बाद अंबिका सोनी पंजाब की सीएम हो सकती हैं. उनका नाम रेस में सबसे आगे है. हरीश रावत और हरीश चौधरी के बीच बंद कमरे में मीटिंग हुई. सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं ने कहा- आलाकमान जो फैसला लेगा वही होगा जो नाम थे सोनिया गांधी को भेज दिया गया है. उनका जो निर्णय आयेगा,आप लोगों को आज पता चल जाएगा. अंबिका सोनी बनाई जा सकती हैं पंजाब की सीएम, दोपहर बाद हो सकता है ऐलानपंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष पवन गोयल ने कहा कि हरीश रावत जी और अजय माकन जी के साथ कल विधायकों की बैठक हुई. एक प्रस्ताव पारित किया गया कि इस मामले में सोनिया गांधी जी का निर्णय अंतिम होगा. आज आपको फैसले के बारे में पता चलेगा.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोनिया गांधी ने अंबिका सोनी के नाम पर मुहर लगा दी है. ऐसे में माना जा रहा है कि वह राज्य की नई सीएम होंगी. सूत्रों ने बताया कि इसके बाद विधायक दल की 11 बजे होने वाली बैठक भी रद्द कर दी गई है. नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार ने पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह पर पलटवार किया. उन्होंने ट्वीट किया, 'सिद्धू को देशभक्ति पर लेक्चर की जरूरत नहीं है.'

कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद अंबिका सोनी ने पंजाब की सीएम बनने से इनकार कर दिया. उन्होंने सेहत का हवाला देते हुए सीएम बनने से इनकार किया है.

कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने कहा कि सब कांग्रेस आलाकमान पर निर्भर है. सीएम बनाना आलाकमान का विशेषाधिकार है. सीएलपी की बैठक कल हुई थी और उन्हें अधिकृत किया गया है. सीएलपी की एक और बैठक की जरूरत नहीं है.चंडीगढ़ में सुनील जाखड़ से मुलाकात के बाद कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह वैद ने कहा कि हम सोनिया गांधी के आदेश का इंतजार कर रहे हैं. इसके तुरंत बाद सीएलपी की बैठक में फैसला लिया जाएगा.

नई दिल्ली। पंजाब कांग्रेस की उठा-पटक के बीच आखिरकरार शनिवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह से सीएम की कुर्सी छिन गई। कैप्टन साल 2017 में पंजाब के सीएम बने थे। हालांकि, शनिवार को जो हुआ, उसका पहला संकेत कैप्टन को सीएम बनने के कुछ महीनों के अंदर ही मिल गया था। इसके बाद कई संकेत ऐसे थे, जो यह बता रहे थे कि कैप्टन के खिलाफ अंदरखाने गुस्सा बढ़ता जा रहा है और अपनी ही टीम पर वह पकड़ खोते जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत से मुंह मोड़े रखना कैप्टन के लिए सबसे बड़ा तूफान लेकर आया और इसके सूत्रधार भी उनकी अपनी ही पार्टी के विधायक रहे।

दरअसल, जिस साल अमरिंदर सिंह सीएम बने, उसी साल यानी 8 अगस्त 2017 को 33 विधायकों ने उन्हें चिट्ठी लिखकर पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजेठिया के खिलाफ एक ड्रग केस में जांच की मांग की थी। हालांकि, इस चिट्ठी में कार्रवाई नहीं की गई। साल 2017 के उपचुनावों के दौरान अमरिंदर सिंह ने गुटका साहिब हाथ में लेकर राज्य से नशा खत्म करने की शपथ ली थी। हालांकि, पंजाब इस मामले में कुछ खास आगे नहीं बढ़ पाया।

साल 2015 में गुरुग्रंथ साहिब बेअदबी के खिलाफ प्रदर्शन कर रही भीड़ पर पंजाब पुलिस ने फायरिंग की थी। इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई घायल हुए थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह पर इस मामले की जांच कराने का लगातार दबाव बनाया गया। साल 2017 में अमरिंदर सिंह ने जस्टिस रंजीत सिंह की अध्यक्षता में एक कमिशन भी बनाया लेकिन अभी तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पंजाब : अशोक गहलोत ने एक के बाद एक कुल चार ट्वीट किए हैं। उन्होंने कहा है, 'मुझे उम्मीद है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह जी ऐसा कोई कदम नहीं उठायेंगे जिससे कांग्रेस पार्टी को नुकसान हो। कैप्टन साहब ने स्वयं कहा कि पार्टी ने उन्हें साढे़ नौ साल तक मुख्यमंत्री बनाकर रखा है। उन्होंने अपनी सर्वोच्च क्षमता के अनुरूप कार्य कर पंजाब की जनता की सेवा की है।'

गहलोत आगे कहते हैं, ''हाईकमान को कई बार विधायकों एवं आमजन से मिले फीडबैक के आधार पर पार्टी हित में निर्णय करने पड़ते हैं। मेरा व्यक्तिगत भी मानना है कि कांग्रेस अध्यक्ष कई नेता, जो मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में होते हैं, उनकी नाराजगी मोल लेकर ही मुख्यमंत्री का चयन करते हैं। परन्तु वही मुख्यमंत्री को बदलते वक्त हाईकमान के फैसले को नाराज होकर गलत ठहराने लग जाते हैं। ऐसे क्षणों में अपनी अर्न्तरात्मा को सुनना चाहिए। मेरा मानना है कि देश फासिस्टी ताकतों के कारण किस दिशा में जा रहा है, यह हम सभी देशवासियों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।''

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू गुट के विधायकों के दबाव में कांग्रेस पार्टी ने भले की कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिलवा दिया हो, लेकिन पार्टी के तमाम बड़े नेताओं को उनकी सियासी ताकत का अंदाजा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी इसे बखूबी जानते हैं। राजस्थान के सीएम ट्वीट कर कहा है, "मुझे उम्मीद है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह जी कांग्रेस पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कदम नहीं उठाएंगे। वह पार्टी के एक सम्मानित नेता हैं और मुझे उम्मीद है कि वह पार्टी के हितों को आगे रखते हुए काम करते रहेंगे।"

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