राजनीति

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नई दिल्ली. गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के एक दिन बाद यानी गुरुवार को पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल से मुलाकात की. पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात को ध्यान में रखें तो ऐसे में यह मुलाकात अहम माना जा रही है. कुछ देर पहले पूर्व सीएम ने डोवाल से मुलाकात की. इस्तीफा देने के बाद भी सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू पर भी निशाना साधा था. गौरतलब है कि बुधवार को ही अमरिंदर ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की, जिसके बाद राजनीति में सिंह के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. हालांकि, अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने गृह मंत्री से अनुरोध किया है कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करके और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देकर पिछले 10 महीनों से चल रहे किसानों के आंदोलन के मुद्दे का समाधान किया जाए.

भवानीपुर । पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए वोटिंग हो रही है, जहां ममता बनर्जी की सियासी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इस सीट के दो लाख से ज्यादा मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार के लिए मतदान करेंगे। भवानीपुर के अलावा, आज पश्चिम बंगाल के समसेरगंज और जंगीरपुर और पिपली (ओडिशा) में भी उपचुनाव के लिए वोटिंग है। उपचुनाव के वोटों की गिनती 3 अक्टूबर को होगी। भवानीपुर सीट पर मुकाबला बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार प्रियंका टिबरीवाल के बीच है। ममता बनर्जी के लिए यह उपचुनाव बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि सीएम की कुर्सी पर बने रहने के लिए उन्हें यह उपचुनाव हर हाल में जीतना होगा। अगर वह हारती हैं तो उन्हें सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। बता दें कि विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को चुनावी दंगल में पटखनी दी थी। हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। भवानीपुर में उपचुनाव के लिए वोटिंग से पहले भाजपा की प्रत्याशी प्रियंका टिबरेाल ने कहा कि हम निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कर रहे हैं। सुरक्षा तैनाती बहुत महत्वपूर्ण है। मैं आज क्षेत्र के मतदान केंद्रों का दौरा करूंगी। राज्य सरकार अभी डरी हुई है। पश्चिम बंगाल की भवानीपुर हाई प्रोफाइल विधानसभा सीट पर आज मतदान होगा। इस सीट के दो लाख से ज्यादा मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार के लिए मतदान करेंगे। तृणमूल कांग्रेस के निर्वाचित सदस्य सोबनदेव चट्टोपाध्याय ने अपनी पार्टी की नेता ममता बनर्जी के विधानसभा की सदस्यता हासिल करने वास्ते विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस वर्ष मार्च-अप्रैल चुनावों में नंदीग्राम सीट पर भाजपा उम्मीदवार शुवेंदु अधिकारी से ममता चुनाव हार गयी थीं। अब वह मुख्यमंत्री बनी रहने के लिए अपनी पुरानी सीट भवानीपुर से उपचुनाव लड़ रही हैं।

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने केंद्र सरकार को तीन काले कृषि कानून तुरंत रद्द करने की अपील की है। ऐसा नहीं करने की सूरत में पंजाब सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर किसान विरोधी कानूनों को ख़ारिज कर देगी। उन्होंने कहा कि किसानों और खेत मज़दूरों के हितों की रक्षा की जानी जरूरी है। वे पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से गुजऱ रहे हैं।
सीएम चन्नी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह को यह कानून रद्द करने के लिए कहा था, परन्तु उस मौके पर मंत्रीमंडल ने उन्हें (कैप्टन अमरिन्दर सिंह) इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत कर दिया था। उन्होंने इन कठोर कृषि कानूनों को रद्द करने की बजाय संशोधित बिल लाने का रास्ता चुना था।
केंद्र सरकार को देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए बलिदानों के लिए सीमावर्ती राज्य को मान्यता देने की अपील करते हुए चन्नी ने कहा कि केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर की तरह राज्य में बेचैनी पैदा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि देश के हित में किसानों के चल रहे संघर्ष का हल जल्द किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में संयुक्त किसान मोर्चा और किसानों के साथ दृढ़ प्रतिबद्धता ज़ाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि केंद्र सरकार इन कानूनों को रद्द करने की मांग को तुरंत स्वीकार नहीं करती, तो वह इस मुद्दे पर पैदल या साइकिल पर दिल्ली की ओर विशाल मार्च निकालने का नेतृत्व करेंगे। इन कृषि कानूनों के खि़लाफ़ चल रहे संघर्ष में किसानों और खेत मज़दूरों के साथ एकजुटता ज़ाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसानों के सरोकारों का समर्थन करते रहेंगे।
उन्होंने अफसोस ज़ाहिर किया कि ये कानून राज्य के किसानों को पूरी तरह से बर्बाद कर देंगे, क्योंकि हमारे किसान पहले ही एक लाख करोड़ रुपए के बोझ के नीचे दबे हुए हैं, जिस कारण केंद्र सरकार को किसानों को इस वित्तीय संकट में से बाहर निकालने के लिए आगे आना चाहिए। सीएम चन्नी ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि अन्नदाता को केंद्र के अडिय़ल रवैए के कारण भिखारी बनने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
उन्होंने कहा यदि केंद्र सरकार द्वारा बड़े कॉर्पोरेट घरानों के कर्जे माफ किए जा सकते हैं, तो गरीब और जरूरतमंद किसानों के कर्जे माफ करने से इन्हें कौन रोकता है? उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही छोटे और सीमांत किसानों को दो लाख रुपए तक की राहत प्रदान की है और अब खेत मज़दूरों को भी अपने संसाधनों में से 25 हज़ार रुपए तक की राहत दी जा रही है।
काले कृषि कानूनों के खि़लाफ़ आंदोलन में अपनी जान गंवाने वाले किसानों के पीडि़त परिवारों के जख्मो पर मरहम लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पीडि़त परिवारों के परिवारिक सदस्यों को सरकारी नौकरियां प्रदान करने के अलावा प्रति परिवार 5 लाख रुपए की वित्तीय सहायता भी मुहैया की गई है। मुख्यमंत्री ने जि़क्र किया कि उन्होंने निजी तौर पर ऐसे परिवार को नियुक्ति पत्र सौंपा था जो गरीबी भरे हालात में रहते हैं और जिनके घर पर छत भी नहीं है।

नई दिल्ली । कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे और चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद ऐसा लग रहा था कि पंजाब में कांग्रेस का विवाद खत्म हो गया है। लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है।अचानक मंगलवार को नवनियुक्त प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से नवजोत सिंह सिद्धू ने अपना इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से एक बार फिर से पंजाब में कांग्रेस की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।इस बीच भाजपा ने कांग्रेस पर तंज कसा है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने सिद्धू के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद ट्वीट कर कहा कि वह दो आए नहीं... एक चला गया... छा गए गुरु। इसके अलावा उन्होंने लिखा कि छात्र” के आने से पहले गुरु चला गया।
अपने ट्वीट में जिस दो के आने की बात पात्रा कर रहे हैं, वह दरअसल कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवानी है जिन्हें आज ही कांग्रेस में शामिल कराया जाना है। इसके लिए दिल्ली में एक भव्य कार्यक्रम भी रखा गया है, वही एक चला गया मतलब सिद्धू का इस्तीफा है। कहीं ना कहीं पंजाब में विपक्ष को कांग्रेस पर तंज कसने का सिद्धू ने बड़ा मौका दे दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में सिद्धू ने कहा है कि वह पार्टी की सेवा करना जारी रखने वाले है। सिद्धू ने इसी साल जुलाई में पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष का पद संभाला था।
अब तक यह पता नहीं सका है, कि सिद्धू को किस कारण पंजाब कांग्रेस प्रमुख का पद छोड़ना पड़ा है। वहीं अमरिंदर लगातार सिद्धू पर हमलावर हैं। इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह ने सिद्धू पर तेज हमला कर उन्हें ‘राष्ट्र विरोधी, खतरनाक तथा पूरी तरह विपत्ति’ करार दिया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह सिद्धू को अगले मुख्यमंत्री के रूप में या आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के चेहरे के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे।

चंडीगढ़/नई दिल्ली. पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू के कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी एक बार फिर सकते में है. सिद्धू ने ना सिर्फ पार्टी नेताओं बल्कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को भी चौंका दिया. पार्टी के वरिष्ठ नेता सिद्धू की ‘लोकप्रिय’ व्यक्ति के रूप में प्रशंसा कर रहे थे. वह सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के साथ आने वाले चुनावों में पार्टी का ‘संयुक्त’ चेहरा थे. सिद्धू ने गांधी भाई-बहनों, विशेषकर प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ कथित करीबी के बावजूद सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे की जानकारी दी. इससे यह संकेत मिल रहे हैं कि प्रियंका को भी इसकी जानकारी नहीं थी.पार्टी ने काफी हद तक सिद्धू के कहने पर पंजाब इकाई में अहम फेरबदल किए गए. वहीं बिना कैप्टन अमरिंदर सिंह को जानकारी दिए विधायक दल की बैठक बुलाने का फैसला भी सिद्धू का ही था. इन सबके बीच पार्टी सांसद इस बात पर भड़क गए कि राज्य इकाई में किए गए बदलावों पर उनकी बात नहीं सुनी गई.सिद्धू ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी क लिखी चिट्टी में कहा कि ‘वह कुछ फैसलों पर ‘समझौता’ नहीं करेंगे इसलिए वह इस्तीफा दे रहे हैं’. सिद्धू के इस बयान ने गांधी परिवार को शर्मनाक स्थिति में डाल दिया है. सिद्धू का इस्तीफा ऐसे वक्त में आया है जब कांग्रेस हाईकमान राज्यों के साथ-साथ केंद्रीय नेतृत्व में पुनर्गठन पर बारीकियों से काम कर रहा है.

कांग्रेस नेताओं ने मारे ताने…
कांग्रेस के लिए इस शर्मसार स्थिति के बीच कई नेताओं ने ताने मारे. अमरिंदर ने ट्वीट किया- ‘मैंने आपसे कहा था … वह एक स्थिर व्यक्ति नहीं और सीमावर्ती राज्य पंजाब के लिए फिट नहीं है.’ जी-23 के सदस्य और सांसद मनीष तिवारी ने एक पंजाबी गीत ट्वीट किया जिसमें चंचल युवा लड़कियों से दोस्ती न करने की सलाह है. इसमें कहा गया है ‘जो आसानी से दोस्त बनती हैं, लेकिन जल्दी से नाराज भी हो जाती हैं.दिवंगत पीएम लाल बहादुर शास्त्री के पोते विभाकर शास्त्री ने पार्टी से बाहरी लोगों को शामिल होने से कम से कम पांच साल बाद कोई महत्वपूर्ण पद नहीं देने को कहा. राहुल गांधी के सहयोगी निखिल अल्वा ने कहा, ‘पंजाब कांग्रेस इस कहावत का जीता-जागता सबूत है कि वास्तविकता कल्पना से अलग होती है.’ उधर कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने सिद्धू के इस्तीफे को ‘भावनात्मक प्रतिक्रिया’ बताया. उन्होंने कहा, ‘सब ठीक हो जाएगा.’अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस इस पेचीदा समस्या का कोई हल निकाल पाती है या नहीं. कई लोगों का मानना है कि अगर सिद्धू कांग्रेस से बाहर निकलते हैं तो यह पार्टी के लि बुरा होगा.

नई दिल्ली: पंजाब कांग्रेस में एक बड़ा सियासी ड्रामा पिछले कई दिनों से चल रहा है. इस ड्रामे की पहली कड़ी सिद्धू Vs कैप्टन थी जो कुछ दिन पहले ही खत्म हुई. अब इसकी दूसरी कड़ी शुरू हुई है और इस नए अध्याय का नाम है सिद्धू Vs राहुल गांधी. मंगलवार को नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, उनके इस्तीफे के बाद पंजाब कैबिनेट मंत्री समेत 4 नेताओं ने भी इस्तीफा सौंप दिया.

BJP ज्वाइन करने को लेकर क्या बोले कैप्टन?
पंजाब में जारी सियासी ड्रामे के बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह के BJP ज्वाइन करने के कयास तेज हो गए हैं. सिद्धू के इस्तीफे के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ज़ी मीडिया से बातचीत की. पंजाब के पूर्व सीएम ने सिद्धू को देश विरोधी बताया. उन्होंने कहा कि सिद्धू मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चलाने की कोशिश कर रहे थे. वहीं, पार्टी छोड़ने के सवाल पर कैप्टन ने साफ-साफ कुछ भी जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस में रहूंगा या नहीं जवाब नहीं दे सकता.

अमित शाह से मिलेंगे कैप्टन?
इस बीच बता दें कि कैप्टन इस समय दिल्ली में हैं. मीडिया में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि कैप्टन दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात करेंगे. हालांकि पूर्व सीएम के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने कहा, 'कैप्टन के दिल्ली दौरे को लेकर काफी कुछ पढ़ने को मिल रहा है. वो एक निजी यात्रा पर हैं. इस दौरान वो अपने कुछ दोस्तों से मिलेंगे और पंजाब के नए सीएम के लिए कपूरथला हाउस को भी खाली करेंगे. किसी गैरजरुरी आशंकाओं की जरूरत नहीं है.'

सभी विकल्प खुले हैं: कैप्टन
बता दें कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू के साथ हुए कलह के बाद सीएम के पद से इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफे के बाद कांग्रेस आलाकमान के प्रति कैप्टन अमरिंदर सिंह की नाराजगी भी सामने आई थी. कैप्टन ने जब पद से इस्तीफा दिया तो भाजपा में न जाने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया था. कैप्टन ने कहा था कि सभी विकल्प खुले हैं. उनके इस जवाब के बाद कई राजनीतिक विश्लेषक अपनी-अपनी तरफ से कयास लगा रहे थे. उस समय कैप्टन ने कहा था कि उन्हें अपमानित होकर मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी. इसके बाद उन्होंने सिद्धू पर बड़ा हमला बोला. सिद्धू को एंटी नेशनल बताते हुए ऐलान कर दिया कि वो उन्हें पंजाब का CM नहीं बनने देंगे.

नई दिल्ली । पार्टी ज्वॉइन करने के समय खुद को 'जन्मजात कांग्रेसी' बताने वाले नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को अचानक पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर हाईकमान को संकट में डाल दिया है। हालांकि, पार्टी आलाकमान ने अब तक सिद्धू का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है और खुद 'वेट एंड वॉच' की पॉलिसी अपना रही है। कांग्रेस हाईकमान ने फिलहाल इस मुद्दे को सुलझाने की जिम्मेदारी पंजाब इकाई को ही सौप दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से सिद्धू के इस्तीफे ने पंजाब में पार्टी के संकट को और बढ़ा दिया है। मामले के जानकार एक नेता ने बताया कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व फिलहाल इस स्थिति को लेकर 'वेट एंड वॉच' मोड में है। नेता ने कहा, 'हम फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं क्योंकि नवजोत सिंह सिद्धू एक भावुक व्यक्ति हैं। उनके इस्तीफे को पार्टी अध्यक्ष ने अभी तक स्वीकार नहीं किया है और हमने पंजाब लीडरशीप से इस मसले को सुलझाने के लिए कहा है। सिद्धू ने सोनिया गांधी को भेजे अपने इस्तीफे में लिखा है, 'नवजोत सिंह सिद्धू ने सोनिया गांधी को भेजी अपनी चिट्ठी में कहा है कि किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व में गिरावट समझौते से शुरू होती है, मैं पंजाब के भविष्य को लेकर समझौता नहीं कर सकता हूं। इसलिए मैं पंजाब प्रदेश अध्यक्ष पद से तुरंत इस्तीफा देता हूं।' बता दें कि सिद्धू को इसी साल 23 जुलाई को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। सिद्धू के इस्तीफे के बाद उनके समर्थन में चन्नी सरकार के मंत्री सहित कई बड़े नेताओं के इस्तीफों की झड़ी लग गई। सिद्धू के करीबी माने जाने वाली एक मंत्री के साथ ही अन्य तीन कांग्रेसी नेताओं ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। इस बीच पंजाब के मंत्री परगट सिंह और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग मंगलवार को सिद्धू से मिलने उनके घर भी पहुंचे। इस मुलाकात के बाद वारिंग ने कहा, 'कुछ छोटे मसले हैं जो गलतफहमियों की वजह से पनपे हैं। इन्हें कल तक सुलझा लिया जाएगा। बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब के मुख्यमंत्री बनना चाहते थे लेकिन पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कमान देकर चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया। माना जा रहा है कि सिद्धू अपनी अनदेखी के कारण नाराज हैं और इसलिए इस्तीफा भी दिया है।

नई दिल्ली । अपने आप को ‘जन्मजात कांग्रेसी’ कहने वाले पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब इकाई के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर पार्टी को झटका दे दिया है। करीब पांच साल पहले सिद्धू जब भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे, तो उन्होंने खुद को अपनी जड़ों की ओर लौटने वाला ‘जन्मजात कांग्रेसी’ बताया था। सिद्धू को 18 जुलाई को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपी गई थी। उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद के घटनाक्रम के दौरान राज्य में पार्टी के कद्दावर नेता अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ गया। नये मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा राज्य की कमान संभालने के कुछ ही दिन बाद 57 वर्षीय सिद्धू ने अचानक पार्टी की प्रदेश इकाई की जिम्मेदारी छोड़कर सभी को चौंका दिया। उन्होंने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव में पांच महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे में पार्टी मुश्किलों में फंसती नजर आ रही है। सिद्धू 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। तब उन्होंने कहा था कि वह आलाकमान द्वारा नियुक्त किसी भी नेता के अधीन काम करने को तैयार रहेंगे। पार्टी जहां से चाहे, वहां से वह चुनाव लड़ेंगे। जब सिद्धू से उस वक्त पूछा गया था कि क्या वह पार्टी के मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनना चाहते हैं तो उन्होंने जवाब दिया था कि इस बारे में बातचीत करना जल्दबाजी होगी। सिद्धू ने 2004 में अमृतसर से भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर राजनीतिक पारी शुरू की। उन्होंने पहले ही चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज आरएल भाटिया को हराया था। भाजपा में रहते हुए भी सिद्धू के सहयोगी अकाली दल के बादल परिवार से खटास भरे रिश्ते रहे थे, लेकिन जब भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अरुण जेटली को अमृतसर से उतारा तो उनके भाजपा से भी रिश्ते तनावपूर्ण हो गए। उन्हें भाजपा ने राज्यसभा में भेजा लेकिन वह पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। सिद्धू की एक समारोह में पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से गले मिलने की तस्वीरें आने के बाद चहुंओर काफी आलोचना हुई थी।

नई दिल्ली । मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज दिल्ली विधानसभा परिसर में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के 114वें जन्मदिन पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। साथ ही, शहीद सुखदेव और राजगुरू की प्रतिमा पर भी पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान केंद्रीय विधानसभा के प्रथम निर्वाचित भारतीय अध्यक्ष स्वर्गीय विट्ठलभाई पटेल की भी जयंती मनाई गई। सीएम अरविंद केजरीवाल ने उन्हेंं पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सीएम अरविंद केजरीवाल, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल समेत अन्य गणमान्य लोगों ने स्वर्गीय विट्ठलभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। इस दौरान सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने देश को आजाद कराने के लिए सर्वोच्च कुर्बानी दी। दिल्ली सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य समेत अन्य क्षेत्रों में उनके बताए रास्ते पर चलने की कोशिश कर रही है।
दिल्ली विधानसभा परिसर में आज शहीद-ए-आजम भगत सिंह के 114वें जन्म दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, विधानसभा स्पीकर राम निवास गोयल, स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन, समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम और डिप्टी स्पीकर राखी बिड़लान समेत दिल्ली सरकार के सभी मंत्री और विधायकों आदि गणमान्य लोगों ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। इसके साथ, मुख्यमंत्री ने शहीद सुखदेव और शहीद राजगुरू की प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भी नमन किया। इसके अलावा, आज केंद्रीय विधानसभा के प्रथम निर्वाचित भारतीय अध्यक्ष स्वर्गीय विट्ठलभाई झावेरभाई पटेल की 148वीं जयंती भी है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ अन्य गणमान्य लोगों ने स्वर्गीय विट्ठलभाई पटेल की प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर कहा, ‘‘माननीय मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल जी ने आज दिल्ली विधानसभा परिसर में महान क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरू जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।’’
इस दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्मदिन के अवसर पर हम आज यहां पर उन्हें याद करने के लिए एकत्र हुए थे। शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने देश को आजाद कराने के लिए सर्वोच्च कुर्बानी दी थी। उनके बताए हुए रास्ते पर हम सब चलने की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य समेत अन्य क्षेत्रों में उनके बताए रास्ते पर चलने की कोशिश कर रही है। आज बिट्ठल भाई पटेल का भी जन्मदिन है। आज उन्हें भी हम लोगों ने याद किया। उनके बताए रास्ते पर भी हम सब लोग चलने की कोशिश कर रहे हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि उनका आशीर्वाद हम सब पर बना रहे।
शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्म दिवस पर किसानों को भारत बंद का आह्वान करना पड़ रहा है, यह बहुत ही दुख की बात है : अरविंद केजरीवाल*
सीएम अरविंद केजरीवाल ने मीडिया के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि यह बहुत ही दुख की बात है कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्म दिवस पर आज किसानों को भारत बंद का आह्वान करना पड़ रहा है। किसानों को अपनी मांगों को मनवाने के लिए लगभग एक साल का समय हो गया है। यह तो आजाद भारत है, आजाद भारत में भी अगर किसानों की नहीं सुनी जाएगी, तो फिर कहां सुनी जाएगी। किसानों की जितनी भी मांगे हैं, वह सभी जायज हैं। हम शुरू से ही उनकी मांगों के पक्ष में रहे हैं। मैं केंद्र सरकार से अपील करता हूं कि जल्द से जल्द उनकी मांगे माने, ताकि किसान अपने घर जाएं और अपने काम पर लगें। एक अन्य सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के साथ वार्ता को बहुत हो चुकी है। अब केंद्रीय कृषि मंत्री को एलान कर देना चाहिए कि केंद्र सरकार उनकी मांगे मान रही है।

कोलकाता । पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए प्रचार करने पहुंचे भाजपा नेता दिलीप घोष के साथ धक्का-मुक्की हुई है। घोष के साथ सांसद अर्जुन सिंह भी थे। तृणमूलकार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं का पीछा किया। इस दौरान वहां तनाव काफी बढ़ गया। भाजपा नेताओं की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने दोनों नेताओं को वहां से सुरक्षित निकाला, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाकर्मियों को हथियार निकालने पड़े। भवानीपुर सीट पर हो रहे उपचुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उम्मीदवार हैं, और उनका मुकाबला भाजपा की प्रियंका टिबरेवाल से है। इस सीट पर मतदान 30 सितंबर को होगा।
पार्टी उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल के लिए प्रचार करते समय भाजपा सांसद अर्जुन सिंह के खिलाफ सत्तारूढ़ तृणमूल के कार्यकर्ताओं ने ‘‘वापस जाओ'' के नारे लगाए। राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर दिखा कि घोष के साथ सड़क पर धक्का-मुक्की की जा रही है और दुर्व्यवहार किया जा रहा है और सुरक्षाकर्मी उन्हें बचाने का प्रयास कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक संदिग्ध समर्थक को एक सुरक्षाकर्मी का कॉलर पकड़ते देखा गया, जिसने भीड़ को हटाने के लिए तुरंत पिस्तौल निकाल ली।
घटना तब हुई जब घोष विधानसभा क्षेत्र के जोडुबाबर बाजार इलाके में एक टीकाकरण शिविर के अंदर गए थे। वहां मौजूद तृणमूल समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए उन्हें वहां से चले जाने के लिए कहा और आरोप लगाया कि सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में वह चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
घोष सुरक्षाकर्मियों के घेरे में वहां से चले गए और बाद में आरोप लगाया कि तृणमूल समर्थकों ने अकारण उन पर ‘‘हमला'' किया और एक भाजपा कार्यकर्ता को घायल कर दिया। उन्होंने पूछा, ‘‘हम मामले को चुनाव आयोग के समक्ष उठाएंगे। यह किस तरह का चुनाव है?''
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के सूत्रों ने कहा कि चुनाव आयोग ने शाम चार बजे तक राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी थी। यह अभी तक पता नहीं चला है कि राज्य सरकार ने चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेजी है अथवा नहीं।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मांग की कि चुनाव आयोग घटना के दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करे। उन्होंने कहा, ‘‘यहां स्थिति नाजुक है। लेकिन भाजपा कार्यकर्ता अंतिम सांस तक लड़ेंगे और छोड़ेंगे नहीं।''
तृणमूल के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने कहा कि हर किसी को घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करने का अधिकार है लेकिन हथियार से लोगों को धमकाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘यह गोधरा या भाटपारा नहीं है, यह भवानीपुर है। भाजपा को उसके कार्यों के लिए 30 सितंबर को करारा जवाब मिलेगा।''

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