राजनीति

राजनीति (2949)

नई दिल्ली. आज भारत बंद है. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने नए कृषि कानूनों के एक साल पूरा होने पर इस बंद को बुलाया है. किसान संगठन चाहते हैं कि सरकार तीन नए कृषि कानूनों को तुरंत वापस ले. पिछले साल देश के कई राज्यों में इस नए कानून के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था. आज किसान आंदोलन को 300 दिन भी पूरे हो रहे हैं.संयुक्त किसान मोर्चे में कुल 40 किसान संगठन शामिल हैं. इसके अलावा कई राजनीति पार्टियों ने भी इस बंद का समर्थन किया है.
10 घंटे का ये बंद आज सुबह 6 बजे से शुरू हो गया है. कई राज्यों में पुलिस ने किसान संगठनों के इस बंद को देखते हुए व्यापक सुरक्षा इंतज़ाम किए हैं.
भारत बंद का असर बिहार की राजधानी पटना और आरा में थोड़ा बहुत दिख रहा है. यहां RJD के नेता सड़कों में प्रदर्शन कर रहे हैं. गांधी सेतु जाम हो गया है.तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, केरल, पंजाब, झारखंड और आंध्र प्रदेश की राज्य सरकारों ने भारत बंद को अपना समर्थन दिया है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी जैसी वामपंथी पार्टियों ने भारत बंद को अपना समर्थन दिया है.हरियाणा में शाहबाद के पास दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे को किसानों ने जाम कर दिया है 10 घंटे का भारत बंद आज सुबह 6 बजे से शुरू हो गया है.
दिल्‍ली पुलिस ने भारत बंद को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को तैनात कियाहै. इसके अलावा पुलिस उपायुक्त (नई दिल्ली) दीपक यादव ने कहा कि भारत बंद के मद्देनजर एहतियात के तौर पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं. शहर की सीमाओं पर तीन विरोध प्रदर्शन स्थलों से किसी भी प्रदर्शनकारी को दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
एसकेएम नेता राकेश टिकैत ने समाचार एजेंसी एएनआई को कहा कि सभी व्यापारियों और दुकानदारों को बंद का समर्थन करना चाहिए, उन्होंने ये भी कहा कि रास्ते बंद रहेंगे, लेकिन अगर कोई डॉक्टर के क्लीनिक जाना चाहता है तो जा सकता है. एंबुलेंस, सब्जी और दूध के वाहन चलेंगे. उन्होंने कहा, 'हम बंद के दौरान दिल्ली के अंदर नहीं जाएंगे. ये आम लोगों का आंदोलन है. लोगों को एक दिन की छुट्टी लेनी चाहिए और चार बजे के बाद ही घर से बाहर निकलना चाहिए.'भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी जैसी वामपंथी पार्टियों ने भारत बंद को अपना समर्थन दिया है. कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), समाजवादी पार्टी (सपा), तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा), जनता दल (सेक्युलर), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम जैसे कई अन्य दल (डीएमके) ने भी सोमवार को भारत बंद के आह्वान का समर्थन किया है.
बिहार में आरजेडी के नेता पटना और आरा में प्रदर्शन कर रहे हैं. महात्मा गांधी सेतु और हाजीपुर-मुजफ्फरपुर रोड पर जाम लग गया है.ओडिशा में राजधानी भुवनेश्वर समेत राज्य के कई शहरों में भारत बंद का असर दिख रहा है. सरकारी बसें शाम 4 बजे तक बंद रहेगी. हालांकि इमरजेंसी सेवा काम कर रही है.
भारत बंद के समर्थन में राहुल गांधी ट्वीट किया है. उन्होंने कहा है कि किसानों का अहिंसक सत्याग्रह आज भी अखंड है.

मुंबई। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान सिनेमा हॉल और नाट्य सभागारों को खोलने की क्या जरूरत है जब कि भारतीय जनता पार्टी लोगों का ‘‘मनोरंजन’’ कर ही रही है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए आवश्यक सभी नियमों का पालन करने की शर्त के साथ 22 अक्टूबर से राज्य में सिनेमा हॉल और ड्रामा थियेटरों को खोलने की अनुमति दी जाएगी।
शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘रोकटोक’ में राउत ने लिखा कि महाराष्ट्र में विपक्षी दल भाजपा ने सभी सीमाएं लांघ दी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हर दिन, भाजपा नेता किरीट सौमैया राज्य के अलग-अलग मंत्रियों के खिलाफ आरोप लगाते हैं और उनके निर्वाचन क्षेत्रों में जाते हैं। मेरा खयाल है कि राज्य सरकार को उनके दौरों पर रोक नहीं लगानी चाहिए। उनके आरोप बुलबुलों के समान हैं। महाराष्ट्र भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल का तरीका अलग है।’’ राउत ने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी और पाबंदियां भले जारी हैं, लेकिन देश में राजनीतिक मनोरंजक कार्यक्रम तो चल रहे हैं। सब तरफ मजाक चल रहा है, विपक्षी दल जो मनोरंजन कर रहा है उसमें रहस्य और हास्य दोनों ही हैं।

कोलकाता । पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की पुत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। प्रणब मुखर्जी के परिवार से कांग्रेस में वह अकेली रह गई थीं। उनके भाई अभिजीत मुखर्जी कुछ समय पहले ही कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। शर्मिष्ठा ने ट्वीट कर यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा-सक्रिय राजनीति से विदा ले रही हूं, लेकिन कांग्रेस की प्राथमिक सदस्य के तौर पर पार्टी में बनी रहूंगी। कोई अगर देश-जाति की सेवा करना चाहता है तो दूसरे तरीके से भी कर सकता है। शर्मिष्ठा ने आगे कहा राजनीति मेरे लिए नहीं है। मैं दूसरे कामों में व्यस्त रहना चाहती हूं। राजनीति, विशेषकर विरोध की राजनीति करने के लिए बहुत भूख की जरूरत होती है। मैंने महसूस किया है कि मुझमें उस तरह की भूख नहीं है, इसलिए सक्रिय राजनीति में मेरे रहने का कोई मतलब नहीं रह गया है।'
शर्मिष्ठा ने यह भी साफ किया कि उन्हें पार्टी से कोई शिकायत नहीं है और वह किसी दूसरे राजनीतिक दल में भी नहीं जाएंगी। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपने इस फैसले से पहले ही अवगत करा दिया है। उल्लेखनीय है कि शर्मिष्ठा को पिछले साल दिल्ली प्रदेश महिला कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। इसके बाद से ही उन्होंने पार्टी में सक्रियता घटा दी थी।

नई दिल्ली । त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिपलब देब ने एक विवादित बयान देकर फिर से बवाल खड़ा कर दिया है। देब ने त्रिपुरा सिविल सर्विस ऑफिसरों की एक कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा अधिकारियों को अदालत की अवमानना से डरे बिना काम करना चाहिए। देब के इस बयान पर टीएमसी ने उन्हें आड़े हाथों लिया है। खुद टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने ट्वीट कर देब को पूरे देश के लिए शर्मनाक बताया है। बिपलब देब ने कहा, ‘कोर्ट की अवमानना इस तरह से कही जाती है जैसे कोई बाघ बैठा हो। मैं बाघ हूं। सत्ता उसी के पास होती है जो सरकार चलाता है। इसका मतलब है कि सारी शक्ति लोगों के पास है। हम ‘लोगों की सरकार है, न कि अदालत की सरकार।’ देब ने यह भी उल्लेख किया कि कैसे राज्य के पूर्व मुख्य सचिव को उनके कार्य से इसलिए मुक्त कर दिया गया था क्योंकि उन्हें अदालत की अवमानना का डर था। टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने बिपलब देब के बयान का वीडियो ट्वीट करते हुए साथ में मिला, 'बिपलब देब पूरे देश के लिए शर्मनाक हैं! वह बेशर्मी से लोकतंत्र, न्यायिक व्यवस्था का मजाक बना रहे हैं, क्या सुप्रीम कोर्ट इनके बयान का संज्ञान लेगा जिसमें अपमान झलक रहा है अभिषेक बनर्जी के ट्वीट पर बिपलब देब के ओएसडी ने प्रतिक्रिया दी है। संजय मिश्रा ने ट्वीट किया, 'अपना फेक प्रॉपेगेंडा फैलाने से पहले आपको पूरी स्पीच सुननी चाहिए। आप सरकारी संस्थाओं का कितना सम्मान करते हैं, यह हम सब जानते हैं।' वहीं, सीपीएम नेता पबित्र कार ने कहा, 'मुख्यमंत्री ने जो भी बयान दिया वह संविधान और न्यायिक व्यवस्था पर हमला है। एक मुख्यमंत्री होने के नाते वह ऐसे बयान नहीं दे सकते। हम इसकी निंदा करते हैं और हम न्यायालय का भी ध्यान इस तरफ खींचने की कोशिश करेंगे।

नई दिल्ली । पंजाब में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नए मंत्रिमंडल के साथ कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव की रणनीति का खाका पेश कर दिया है। पार्टी ने सरकार में युवाओं पर दांव लगाकर साफ कर दिया कि वह पीढ़ीगत बदलाव की हिमायती है। वहीं कई पुराने मंत्रियों की छुट्टी कर पार्टी ने दूसरे प्रदेशों के लिए भी ट्रेंड तय कर दिया है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के बागी तेवरों के बावजूद चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस नेतृत्व अपना दबदबा बरकरार रखने में कामयाब रहा है। चन्नी मंत्रिमंडल में कैप्टन के करीबियों को जगह नहीं देकर हाईकमान ने साफ कर दिया है कि वह वरिष्ठ नेताओं के बगावती तेवरों को ज्यादा अहमियत नहीं देगी। केंद्र में मोदी सरकार के गठन और एक के बाद एक चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस हाईकमान की पकड़ कमजोर पड़ गई थी। उसे पार्टी के अंदर चुनौतियां मिलने लगी थी। पर पंजाब के जरिए राहुल गांधी ने उस दबदबे को फिर से कायम करने की कोशिश की है। ऐसे में इसका असर राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी दिखाई देगा। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस के सामने लगभग पंजाब जैसी चुनौतियां हैं। कैप्टन की तरह इन प्रदेशों के मुख्यमंत्री अपने विरोधियों के मुकाबले ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा कर अपनी कुर्सी बरकरार रखना चाहते हैं। पर पंजाब में हाईकमान साबित करने में सफल रहा है कि विधायक उसके कहने पर नेता तय करेंगे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, इस आत्मविश्वास की बुनियाद पर ही कांग्रेस नेतृत्व राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की नाराजगी के बावजूद सचिन पायलट के साथ भविष्य की रणनीति पर कई दौर की चर्चा की है। छत्तीसगढ़ में भी भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के विवाद को पार्टी खत्म करना चाहती है।

नई दिल्ली । नक्सल प्रभावित राज्यों में वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को एक बैठक बुलाई। इस बैठक में नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। इस दौरान अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि वह अगला पूरा साल अपने राज्य में नक्सलवाद पर लगाम कसने में लगाएं। उन्होंने कहा कि नक्सली समूहों तक पहुंचने वाले पैसे को रोकने के लिए संयुक्त रणनीति बनानी होगी। इस बैठक में उड़ीसा, तेलंगाना, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड के मुख्यमंत्री शामिल हुए थे। बैठक के दौरान गृहमंत्री ने कहा कि नक्सली गुटों के खिलाफ लड़ाई आखिरी चरण में है। अब नक्सलियों के हमलों पर पूरी तरह से लगाम लग जानी चाहिए। उन्होंने बैठक में मौजूद सभी मुख्यमंत्रियों से अगले एक साल तक इस मुद्दे को प्राथमिकता से लेकर खत्म करने की बात कही। इस मीटिंग में नवीन पटनायक (उड़ीसा), के चंद्रशेखर राव (तेलंगाना), नीतीश कुमार (बिहार), शिवराज सिंह चौहान (मध्य प्रदेश), उद्धव ठाकरे (महाराष्ट्र) और हेमंत सोरेन (झारखंड) मुख्यमंत्री शामिल हुए। इनके अलावा केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, गिरिराज सिंह, अर्जुन मुंड और नित्यानंद राय भी बैठक में मौजूद रहे। वहीं पश्विम बंगाल, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और केरल के मुख्यमंत्री इस मीटिंग में हिस्सा लेने नहीं पहुंच सके। उनकी जगह इन राज्यों के मंत्रियों या वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में अमित शाह ने कहा कि नक्सली गुटों को मिलने वाले पैसे के स्रोत को बंद करने की कोशिश होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा बेहतर समन्वय से दबाव बनाकर और रफ्तार बढ़ाकर इस दिशा में सफलता पाई जा सकती है। शाह ने नक्सलियों पर लगाम के अन्य उपायों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा उपायों में इजाफा करके, नक्सलियों तक पहुंचने वाले पैसे को रोककर और स्टेट पुलिस के प्रयासों से ऐसा हो सकता है। साथ ही गृहमंत्री ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी स्तर से रेगुलर रिव्यू मीटिंग की जरूरत भी बताई। इस दौरान अमित शाह ने पिछले कुछ वक्त में नक्सल हिंसा की घटनाओं में आई कमी के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 2009 में नक्सली हिंसा की 2258 घटनाएं होती थीं। अब इनमें 70 फीसदी की कमी आई है 2020 में यह आंकड़ा 665 तक सिमट गया था। उन्होंने कहा कि 2010 में 1005 मौतों की तुलना में 2020 में 82 फीसदी की कमी आई है और अब यह केवल 183 रह गई है। गृहमंत्री ने बताया कि 2010 की तुलना में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में भी कमी आई है। तब जहां ऐसे कुल 96 जिले हुआ करते थे वहीं 2020 में ऐसे जिलों की संख्या घटकर केवल 53 रह गई है। उन्होंने कहा कि हमने जो लक्ष्य हासिल कर लिया है, उससे संतुष्ट होने के बजाए जो बचा हुआ है उसे हासिल करने पर जोर देना चाहिए।

लखनऊ. उत्तर प्रदेश से बड़ी खबर आ रही है. जानकारी के अनुसार योगी सरकार का आज मंत्रिमंडल विस्तार होना है. इसमें करीब आधा दर्जन नए मंत्री शपथ ले सकते हैं. दोपहर 2 बजे राजभवन में तैयारी को लेकर बैठक है. अभी तक जो संभावित नाम सामने आ रहे हैं, उनमें जितिन प्रसाद, संजय निषाद, बेबी रानी मौर्य, संगीता बलवंत बिंद, तेजपाल नागर सहित आधा मंत्री शपथ ले सकते हैं. इसके अलावा पलटू राम, दिनेश खटीक, कृष्णा पासवान का नाम भी मंत्री पद की दौड़ शामिल है. जानकारी के अनुसार आज शाम 5 बजे शपथ ग्रहण समारोह होना है.

खबर है कि राजभवन के सभी स्टाफ को रविवार को छुट्टी के दिन मीटिंग के लिए बुलाया गया है. कुछ विधायकों को भी लखनऊ रहने के लिए कहा गया है. ​

वहीं बीजेपी संगठन के सूत्रों के अनुसार आज 10 विधायक मंत्रिपद की शपथ ले सकते हैं. दरअसल जितिन प्रसाद, संजय निषाद, बेबी रानी मौर्य और पिछड़ा वर्ग के एक और नेता जिनको एमएलसी के नामों के लिए फाइनल किया गया है. उनका नाम मंत्री बनने के लिए लगभग तय है. लेकिन इसके अलावा आगामी चुनाव को देखते हुए अलग-अलग वर्गों से छह मंत्री और भी ले सकते हैं.

दरअसल अब सरकार के सामने इस बात की समस्या नहीं है कि जिसे मंत्री बनाया जाएगा, उसे एमएलसी या एमएलए भी होना जरूरी है. यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सरकार अलग-अलग लोगों को साधने के लिए अलग से आने वाले लोगों को मंत्री बना सकती है.

दरअसल, चार महीने बाद होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस कैबिनेट विस्तार विस्तार को काफी अहम माना जा रहा है. यह लंबे समय से प्रतीक्षित था. इसी साल 8 जुलाई को हुए मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार में भी उत्तर प्रदेश के नेताओं को खास तरजीह दी गई थी. इसमें जातीय गणित को भी साधने का प्रयास किया गया था. केंद्र में यूपी से बनाए गए 7 नए मंत्रियों में 4 ओबीसी, 2 दलित और एक ब्राह्मण समाज के थे. ये पहला मौका है जब मोदी कैबिनेट में यूपी से रिकॉर्ड 15 मंत्री बनाए गए हैं.

चंडीगढ़ । पंजाब में नए मंत्रिमंडल विस्तार के लिए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने राज्यपा से मुलाकात की। रविवार को शाम 4.30 बजे शपथग्रहण समारोह के लिए राज्यपाल ने सहमति दे दी है। इसके पहले चन्नी ने दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ देर रात तक मंत्रिमंडल को लेकर मंथन किया। चन्नी आलाकमान के निर्देश पर दिल्ली पहुंचकर राहुल गांधी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ नई कैबिनेट पर चर्चा की थी। नए मंत्रिमंडल में कैप्टन के 5 विधायक की मंत्री पद से छुट्टी होने जा रही है।
चन्नी मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरे दिखाई दे सकते है।रेस में ब्रह्म मोहिन्दरा, राणा गुरजीत, मनप्रीत बादल, तृप्त राजिंदर बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, अरुणा चौधरी, रजिया सुल्ताना, डॉ. राज कुमार वेरका, भारत भूषण आशु, विजय इंदर सिंगला, गुरकीरत कोटली, राजा वरिंग, संगत सिंह गिलजियां, काका रणदीप सिंह,परगट सिंह, कुलजीत सिंह नागरा हैं। सिद्धू के करीबी परगट सिंह फिलहाल पंजाब कांग्रेस के महासचिव हैं और गिलजियान पार्टी की प्रदेश इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।
बताया जा रहा है कि चन्नी और पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच पंजाब मंत्रिमंडल में मंत्रियों के नाम तय करने को लेकर चली चर्चा के बाद सामने आया कि पिछली अमरिंदर सिंह सरकार के कुछ मंत्रियों को छुट्टी लगभग तय है। कहा जा रहा है कि अमरिंदर बेहद खास गुरप्रीत सिंह कांगड़, राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी (खेल मंत्री) और साधु सिंह धर्मसोत (सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री) को कैबिनेट से हटाया जा सकता है।

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस राजनीति में लम्बे समय से सब ठीक नहीं चल रहा है और ढाई-ढाई साल के फार्मूले को लेकर नेतृत्व परिवर्तन की बात यहां यदा-कदा होती रहती है। छत्तीसगढ़ के लगभग 60 विधायकों जिनमें अनेक मंत्री भी शामिल थे के दिल्ली पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का पलड़ा भारी दिख रहा था और ऐसा माना जा रहा था कि उन्हें हाईकमान का अभयदान मिल गया है। छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी पी एल पूनिया ने दो-टूक शब्दों में कह दिया था कि ढाई-ढाई साल का कोई फार्मूला था ही नहीं। कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में केप्टन अमरिन्दर सिंह के स्थान पर चरणजीत सिंह चन्नी की ताजपोशी कर दी। इस परिवर्तन ने छत्तीसगढ़ के असंतुष्ट कांग्रेसजनों को एक प्रकार से संजीवनी बूटी दे दी है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद के एक दावेदार स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव का दिल्ली से वापस आने के बाद पंजाब के संदर्भ में यह कहना कि मुख्यमंत्री बदलने की वह एक प्रक्रिया थी, से लगता है उनके मुख्यमंत्री बनने के अरमानों को फिर से पंख लग गये।

छत्तीसगढ़ में सिंहदेव के इस रुख से जो अस्थिरता का वातावरण चल रहा था उसके बादल कुछ गहरे होते नजर आ रहे हैं। क्योंकि जब तक अब स्थायी तौर पर नेतृत्व परिवर्तन के सम्बन्ध में कांग्रेस आलाकमान का साफ रुख सामने नहीं आता उस समय तक प्रशासनिक अधिकारी दुविधा में रहेंगे और इससे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी को जितने दिन अस्थिरता चलती है उतने दिन नुकसान होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। नई दिल्ली से रायपुर लौटने के बाद विमानतल पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए सिंहदेव ने राज्य में सत्ता परिवर्तन को लेकर पंजाब की तर्ज पर अचानक एक बड़ा बयान दे डाला। उनका कहना था कि अचानक नहीं, यह एक प्रक्रिया है जो चल रही है। छत्तीसगढ़ में लोग ढाई-ढाई साल की बात कर रहे हैं लेकिन वह समय बीत गया। कहीं न कहीं चर्चा चलती रहती है और चर्चा को अंजाम तक ले जाने की जो बात है वह निर्णय के रुप में ही आती है। बिलासपुर विधायक शैलेष पांडेय के निष्कासन प्रस्ताव पर उनका कहना था कि हम सब कांग्रेस के व्यक्ति हैं, हाईकमान सोनिया जी के साथ जुड़े हुए हैं, नीति व आदेशों के साथ चलने वाले हैं, भावनाओं में आकर यदि कोई कुछ कह देता है तो वह पार्टी के अंदर की बात है। जहां तक कार्रवाई का सवाल है तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पास बात जाएगी। सिंहदेव के समर्थक माने जाने वाले शैलेष पांडेय के बारे में उन्होंने यह भी कहा कि वह बड़े भावनात्मक व्यक्ति हैं और मन की जो बातें रहती हैं वह कई बार बाहर आ जाती हैं सार्वजनिक जीवन में हम जितना संयमित रहें उतना अच्छा है। वैसे कांग्रेस के अंदर आंतरिक गुटबंदी और विवाद अब पर्दे के भीतर नहीं अपितु सार्वजनिक हो रहे हैं।

कांग्रेस विधायक शैलेष पांडेय के बयान जिसमें उन्होंने कहा था कि टीएस सिंहदेव का आदमी होने के कारण हमें परेशान किया जा रहा है। इस पर बिलासपुर से कांग्रेस के नेता अटल श्रीवास्तव ने बयान दिया कि मुझे नहीं मालूम कौन किसका आदमी है और कौन किसकी औरत है, पांडे कांग्रेस के विधायक हैं, इतना जानता हूं कि जो कार्रवाई पुलिस कर रही है वह सबूतों के आधार पर कर रही हैै। उनका कहना था कि शैलेष पांडेय इस प्रकार के बयान पहले भी देते रहे हैं। आने वाले समय में हम हाईकमान को अवगत करायेंगे कि यह पैराशूट विधायक हैं तथा इनके खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए। जिला कांग्रेस कमेटी ने पांडेय को निष्कासित करने का प्रस्ताव पास कर प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेज दिया है। सिंहदेव को भले ही उम्मीद हो कि उनकी लाटरी देर-सबेर खुलकर ही रहेगी, लेकिन इस समय देश में और खासकर मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में जिस प्रकार का राजनीतिक परिवेश है, उसमें यदि एक बार यह मान भी लिया जाए कि नेतृत्व परिवर्तन होता है तो भी इसमें सिंहदेव के अरमान पूरे होने की संभावना न्यूनतम है। हालांकि कांग्रेस राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। उनके स्थान पर किसी अन्य पिछड़े वर्ग या आदिवासी के मुख्यमंत्री बनने की अधिक संभावना है बशर्ते कांग्रेस हाईकमान बदलाव करना चाहे तो। जहां तक भूपेश बघेल का सवाल है उनकी मजबूती का सबसे बड़ा कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ आक्रामक रवैया तथा कांग्रेस के लगभग 60 विधायकों का समर्थन है। वे पिछड़े वर्ग के नेता हैं इसलिए कांग्रेस हाईकमान उन्हें बदलने का जोखिम शायद ही ले।

भाजपा डाल रही अजय सिंह पर डोरे ?

मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे तथा कांग्रेस के कद्दावर नेता अजय सिंह की गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा से 40 मिनट की मुलाकात और उसके बाद उनके जन्मदिन पर डॉ मिश्रा और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का उनके घर जाकर बधाई देने से अचानक ही सियासी सरगर्मी तेज हो गयी। अजय सिंह क्या भाजपा में जा रहे हैं इसको लेकर मीडिया में कयास लगाना चालू हो गया। मंगलवार को अजय सिंह डॉ मिश्रा से उनके निवास पर मिलने गये थे, यही कारण था कि दिन भर अटकलें चलती रहीं, हालांकि अजय सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह उनकी सौजन्य मुलाकात थी और क्षेत्र की समस्याओं को लेकर उनसे मिलने पहुंचे थे। डॉ मिश्रा को प्रदेश के कांग्रेस नेताओं को भाजपा में लाने में महारत हासिल हो चुकी है। मिश्रा ने मीडिया से चर्चा में अजय सिंह को प्रतिभावान बताते हुए कहा कि अजय सिंह की सियासत और उनकी विरासत का कांग्रेस सही उपयोग नहीं कर रही है। वे मेरे मित्र हैं, मैं उनके यहां जाता रहता हूं, वे उनसे अपने क्षेत्र के विकास को लेकर चर्चा करने आये थे। वैसे इस बात की संभावना बहुत कम है कि अजय सिंह भाजपा में जायेंगे, लेकिन राजनीति संभावनाओं का खेल है, इसलिए कभी भी कोई भी राजनीतिक गुल खिलने से इन्कार नहीं किया जा सकता। देखा जाए तो अजय सिंह हमेशा भाजपा के प्रति आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं। इस मुलाकात के बाद अटकलों का दौर इसलिए चला क्योंकि उनकी उपेक्षा की बात डॉ मिश्रा ने की। इसके बाद 23 सितम्बर को अजय सिंह का जन्मदिन था और उस दिन उन्हें बधाई देने भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय और गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित 12 विधायक उनके भोपाल स्थित आवास पर पहुंचे। विजयवर्गीय और मिश्रा के उनके आवास पर बधाई देने पहुंचने के मायने राजनीतिक हलकों में तलाशे जा रहे हैं। भाजपा नेता इन दिनों उन नेताओं की जो कांग्रेस में एक प्रकार से हाशिए पर माने जा रहे हैं उनकी उपेक्षा और उनका उपयोग न किये जाने की बात समय-समय पर उछलते रहे हैं। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव के बारे में भी इसी तरह की बातें समय समय पर उछालते रहे हैं। अरुण यादव ने तत्काल खंडन किया और यहां तक कह डाला कि मेरा सरनेम सिंधिया नहीं यादव है। अटकलों के बीच अजय सिंह ने भाजपा नेतृत्व पर तीखा हमला बोला और यह जताने की कोशिश की कि वह भाजपा के प्रति कोई नरम रुख नहीं रखते। वैसे भी उनके बयान भाजपा के खिलाफ समय-समय पर आते रहते हैं और भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करने का कोई अवसर हाथ से नहीं जाने देते। अजय सिंह ने शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगाया कि वे किसानों और बेरोजगारों को मजदूर बनाने पर तुले हुए हैं। एक कृषि अधिकारी के भरोसे 71 गांव हैं और 80 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। तमाम स्वरोजगार की योजनायें बंद हैं।

कांग्रेसी था, हूँ और रहूँगा

पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने उनके बीजेपी में जाने को लेकर मीडिया में चल रही अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें मनगढ़ंत निरूपित किया है । उन्होंने इन आधारहीन बातों को विराम देते का प्रयास करते हुए दो टूक शब्दों में कहा है कि मुझे अपने पिता स्व. अर्जुनसिंह से सदभाव के साथ सबको साथ लेकर चलने की सीख विरासत में मिली है। वे हमेशा अपने आपको कांग्रेस का सिपाही कहते थे| उनके विचारों विपरीत जाकर मैं आलोचना का भागीदार नहीं बनना चाहता। मैं उन्हीं की परम्परा का निर्वहन करता हूँ| मैं आत्मा से कांग्रेसी था, कांग्रेसी हूँ और कांग्रेसी रहूँगा| जो लोग ऐसा सोच रहे हैं कि मैं बीजेपी में जा सकता हूँ, उन सभी से मेरा विनम्र आग्रह है कि वे इस कल्पनाशील विचार को त्याग दें| मेरी प्रतिबद्धता कांग्रेस पार्टी के साथ है|

अजयसिंह ने स्व. अर्जुनसिंह के राजनीतिक कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा प्रतिपक्ष का सम्मान किया| प्रतिपक्ष के सुझावों को वे हमेशा ध्यान से सुनते थे और आलोचनाओं से कभी विचलित नही होते थे| लोकतंत्र की स्वस्थ परम्पराओं का उन्होंने हमेशा पालन किया| भले ही विचारधाराएँ अलग अलग हों लेकिन उन्होंने प्रदेश के विकास में इसे कभी आड़े आने नहीं दिया| यही कारण है कि प्रदेश में भाजपा सरकार के समय केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने मध्यप्रदेश को जो दिया वह हमेशा याद किया जाएगा| मैंने अपने राजनीतिक जीवन में उनसे बहुत सीखा है|

सिंह ने कहा कि मेरे मंत्री रहते हुए बीजेपी के बहुत से विधायक मुझसे क्षेत्र के काम से मिलते रहते थे और मैं सहर्ष उनकी समस्याओं को हल करता था| उनमें कई अभी वर्तमान में मंत्री हैं| इसी तरह मैं भी अपने क्षेत्र की समस्याओं और जनता के काम लेकर भाजपा सरकार के मंत्रियों से मिलता रहता हूँ| कई बार एक दूसरे से सौजन्य भेंट होती रहती है| प्रतिपक्ष दुश्मन तो नहीं होता| लोकतंत्र में वैमनस्य का कोई स्थान नहीं है| इस सौजन्यता का यह अर्थ कतई नहीं लगाना चाहिए कि मैं कांग्रेस छोड़ रहा हूँ| यह सिर्फ एक परिकल्पना मात्र है|

नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक बार फिर अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के जरिए राष्‍ट्र को संबोधित करेंगे. मन की बात के 81वें संस्‍करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खूंटी की महिलाओं से बात करेंगे. इन महिलाओं ने बांस की कारीगरी से दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है. बता दें कि मन की बात के 81वें संस्‍करण ऐसे समय में आ रहा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका से अपनी तीन दिन की यात्रा पूरी कर भारत लौट रहे हैं. प्रधामनंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 76वें सत्र को संबोधित किया था. ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि पीएम मोदी इस बार मन की बात कार्यक्रम के जरिए कई अंतरराष्‍ट्रीय महत्‍व के मुद्दों पर देश का ध्‍यान केंद्रित कर सकते हैं. इसके साथ ही आने वाले त्‍योहारों को देखते हुए कोरोना के खतरे से देश की जनता को करेंगे आगाह.

आजकल एक विशेष E-ऑक्शन, ई-नीलामी चल रही है. ये इलेक्ट्रॉनिक नीलामी उन उपहारों की हो रही है, जो मुझे समय-समय पर लोगों ने दिए हैं. इस नीलामी से जो पैसा आएगा, वो ‘नमामि गंगे’ अभियान के लिए ही समर्पित किया जाता है. देश भर में नदियों को बचाने की यही परंपरा, यही प्रयास, यही आस्था हमारी नदियों को बचाए हुए है.
मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, देश भर में नदियों को बचाने की यही परंपरा, यही प्रयास, यही आस्था हमारी नदियों को बचाए हुए है. हिंदुस्तान के किसी भी कोने से जब ऐसी खबरें मेरे कान पे आती हैं तो ऐसे काम करने वालों के प्रति एक बड़ा आदर का भाव मेरे मन में जागता है और मेरा भी मन करता है कि वो बातें आपको बताऊँ.
पीएम मोदी ने कहा, कभी भी छोटी बात को छोटी चीज को, छोटी मानने की गलती नहीं करनी चाहिए. छोटे-छोटे प्रयासों से कभी कभी तो बहुत बड़े-बड़े परिवर्तन आते हैं, और अगर महात्मा गांधी जी के जीवन की तरफ हम देखेंगे तो हम हर पल महसूस करेंगे कि छोटी-छोटी बातों की उनके जीवन में कितनी बड़ी अहमियत थी और छोटी-छोटी बातों को ले करके बड़े बड़े संकल्पों को कैसे उन्होंने साकार किया था.
कुछ ही दिन पहले सियाचिन के इस दुर्गम इलाके में 8 दिव्यांग जनों की टीम ने जो कमाल कर दिखाया है वो हर देशवासी के लिए गर्व की बात है. इस टीम ने सियाचिन ग्‍लेशियर की 15 हजार फीट से भी ज्‍यादा की ऊंचाई पर स्थित कुमार पोस्‍ट पर अपना परचम लहराकर वर्ल्‍ड रिकॉर्ड बना दिया है.
सियाचिन ग्लेशियर को फतह करने का ये ऑपरेशन भारतीय सेना के विशेष बलों के veterans की वजह से सफल हुआ है. मैं इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए इस टीम की सराहना करता हूं. यह हमारे देशवासियों के Can Do Culture, Can Do Determination, Can Do Attitude के साथ हर चुनौती से निपटने की भावना को भी प्रकट करता है.
पीएम मोदी ने कहा, आज हम लोगों की ज़िन्दगी का हाल ये है कि एक दिन में सैकड़ों बार कोरोना शब्द हमारे कान पर गूंजता है, सौ साल में आई सबसे बड़ी वैश्विक महामारी, COVID-19 ने हर देशवासी को बहुत कुछ सिखाया है. Healthcare और Wellness को लेकर आज जिज्ञासा भी बढ़ी है और जागरूकता भी. हमारे देश में पारंपरिक रूप से ऐसे Natural Products प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं जो Wellness यानि सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है.
ओडिशा के कालाहांडी के नांदोल में रहने वाले पतायत साहू जी इस क्षेत्र में बरसों से एक अनोखा कार्य कर रहे हैं. उन्होंने डेढ़ एकड़ जमीन पर Medicinal Plant लगाए हैं. यही नहीं, साहू जी ने इन Medicinal Plants को Documentation भी किया है. आज इस कार्य में करीब चालीस महिलाओं की टीम जुटी है और कई एकड़ में एलो वेरा की खेती होती है.ओड़िसा के पतायत साहू जी हों या फिर देवरी में महिलाओं की ये टीम, इन्होंने खेती को जिस प्रकार स्वास्थ्य के क्षेत्र से जोड़ा है, वो एक अपने आप में एक मिसाल है.
पीएम मोदी ने कहा, बच्चो में Medicinal और Herbal Plants के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने एक दिलचस्प पहल की है और इसका बीड़ा उठाया है हमारे प्रोफेसर आयुष्मान जी ने. हो सकता है कि जब आप ये सोचें कि आखिर प्रोफेसर आयुष्मान हैं कौन? दरअसल प्रोफेसर आयुष्मान एक कॉमिक बुक का नाम है. इसमें अलग अलग कार्टून किरदारों के जरिए छोटी-छोटी कहानियां तैयार की गई हैं . छोटी-छोटी कहानियां तैयार की गई हैं. साथ ही एलो वेरा, तुलसी, आंवला, गिलॉय, नीम, अश्वगंधा और ब्रह्मी जैसे सेहतमंद मेडिकल प्‍लांट की उपयोगिता बताई गई है.
पीएम मोदी ने कहा, दीनदयाल जी के जीवन से हमें कभी हार न मानने की भी सीख मिलती है. विपरीत राजनीतिक और वैचारिक परिस्थितियों के बावजूद भारत के विकास के लिए स्वदेशी मॉडल के विजन से वे कभी डिगे नहीं . आज बहुत सारे युवा बने-बनाए रास्तों से अलग होकर आगे बढ़ना चाहते हैं. वे चीजों को अपनी तरह से करना चाहते हैं. दीनदयाल जी के जीवन से उन्हें काफी मदद मिल सकती है. इसलिए युवाओं से मेरा आग्रह है कि वे उनके बारे में जरूर जानें.
पीएम मोदी ने कहा, वैक्‍सीनेशन में देश ने कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. इस लड़ाई में हर भारतवासी की अहम भूमिका है. हमें अपनी बारी आने पर वैक्‍सीन तो लगवानी ही है पर इस बात का भी ध्यान रखना है कि कोई इस सुरक्षा चक्र से छूट ना जाए. अपने आस-पास जिसे वैक्‍सीन नहीं लगी है उसे भी वैक्‍सीन सेंटर तक ले जाना है. वैक्‍सीन लगने के बाद भी जरूरी प्रोटोकॉल का पालन करना है. मुझे उम्मीद है इस लड़ाई में एक बार फिर टीम इंडिया अपना परचम लहराएगी.

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