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नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट में संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उनके 'मिस्टर 56-इंच चीन से डरते हैं।' ट्वीट पर आलोचना की और वायनाड के सांसद को "गैर-गंभीर, पार्ट टाइम राजनेता" कहा। प्रह्लाद जोशी ने मैंने पहले भी यह कहा है कि राहुल गांधी को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। उन्हें इतिहास या भविष्य के बारे में नहीं पता है। भारत एक वैश्विक नेता के रूप में उभर रहा है, जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "राहुल गांधी एक गैर-गंभीर, अंशकालिक राजनेता हैं। जब भी कोई गंभीर संकट होता है, तो वह देश से बाहर जाते हैं। यह उनके बयानों पर प्रतिक्रिया के लायक नहीं है। यह सबसे बचकाना और अपरिपक्व बयान है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इससे पहले शुक्रवार को चीन के साथ गतिरोध को लेकर केंद्र पर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने एक वीडियो क्लिप के साथ ट्वीट किया, "मिस्टर 56-इंच चीन से डरते हैं। वहीं, कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री, डॉ के सुधाकर ने शुक्रवार को कांग्रेस पर आरोप लगाया कि अपने राजनीतिक लाभ के लिए कोविड-19 मौतों का इस्तेमाल करती है। कर्नाटक विधानसभा में बोलते हुए, मंत्री ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस पार्टी इतनी नीचे गिर गई है कि वह अपने राजनीतिक लाभ के लिए कोरोना पीड़ितों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत का इस्तेमाल करने में संकोच नहीं करती है।" कांग्रेस पार्टी पर 'हिट एंड रन' की संस्कृति दिखाने का आरोप लगाते हुए सुधाकर ने सदन में हंगामा करने के लिए पार्टी पर निशाना साधा।

नई दिल्ली । कांग्रेस का राजनीतिक संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी एक राज्य में सुलझाने की कोशिश करती है, तो दूसरे प्रदेश में मुश्किल खड़ी हो जाती है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना है, पर कांग्रेस संगठन इस जिम्मेदारी को निभाने में नाकाम साबित हुआ है। पार्टी में बुजुर्ग नेता जहां लगभग साइडलाइन हैं, वहीं एक के बाद एक युवा नेता कांग्रेस का हाथ छोड़ रहे हैं। ललितेशपति त्रिपाठी और कांग्रेस का कई पीढियों का साथ रहा है। चार पीढियों में यह पहला मौका है, जब पंडित कमलापति त्रिपाठी परिवार के किसी सदस्य ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया है। चुनाव से ठीक पहले पार्टी छोडने वाले ललितेशपति त्रिपाठी अकेले नहीं है, उनसे पहले जितिन प्रसाद भी ऐसा चुके हैं। संजय सिंह, अन्नू टंडन, चौधरी बिजेंद्र सिंह और सलीम शेरवानी भी दूसरी पार्टियों में अपने लिए जगह तलाश कर चुके हैं। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि क्या कांग्रेस ने चुनावों में जीत की उम्मीद छोड़ दी है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने यूपी का प्रभार संभालने के बाद संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश की है, वहीं अंदरुनी झगडा भी बढा है। इसके साथ पार्टी को इन प्रियंका गांधी के प्रयासों का चुनावी लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। इसलिए, ललितेश और जितिन प्रसाद के बाद कई और नेता पार्टी छोड़ सकते हैं। इस फेहरिस्त में पश्चिमी उप्र के वरिष्ठ मुसलिम नेता भी शामिल हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि लगातार हार से कार्यकर्ताओं और नेताओं में मायूसी बढी है। कांग्रेस में खुद का कायाकल्प करने का कोई दमखम भी नजर नहीं आता। जबकि युवाओं के पास अभी बीस-तीस साल का राजनीतिक कैरियर है। इसलिए, वह दूसरी पार्टियों में अपने लिए जगह तलाश रहे हैं। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में मायूसी की एक वजह नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता भी है। पार्टी के असंतुष्ट नेताओं की लगातार मांग के बावजूद अध्यक्ष पद के चुनाव लगातार टल रहे हैं। वहीं, हर चुनाव में हार के कारणों पर विचार करने के लिए पार्टी समिति का गठन करती है, पर समितियों से कोई लाभ नहीं हुआ। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी ने हार के कारणों पर विचार करने के लिए एंटनी समिति का गठन किया था। इसके बाद हर हार के बाद समिति बनाई गई। पश्चिम बंगाल, केरल और असम चुनाव में हार के बाद भी अशोक चव्हाण की अध्यक्षता में समिति बनी थी, पर समितियों की सिफारिशों पर अमल नहीं दिखता। ऐसा सिर्फ यूपी में नहीं है। पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की युवा टीम में शामिल ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुष्मिता देव भी कांग्रेस छोड़ चुके हैं। इनसे पहले अशोक तंवर, प्रियंका चतुर्वेदी और खुशबू सुंदर अलग अलग पार्टियों में अपनी लिए जगह बना चुके हैं। पर पार्टी की तरफ से स्थिति को संभालना का कोई प्रयास नहीं दिखता।

नई दिल्ली। जेएनयूएसयू  के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई नेता कन्हैया कुमार 28 सितंबर को कांग्रेस पार्टी का दामन थामने जा रहे हैं। कांग्रेस मुख्यालय में उनके और गुजरात से विधायक जिग्नेश मेवानी को पार्टी की सदस्यता दिलाई जाएगी। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
एक के बाद एक चुनाव हार चुकी कांग्रेस अब खुद को बदलने की तैयारी कर रही है। पार्टी की नजर विधानसभा के साथ लोकसभा चुनाव पर है। चुनाव में जीत की दहलीज तक पहुंचने के लिए पार्टी जातीय समीकरणों के साथ युवाओं पर दांव लगाने जा रही। ताकि, 2024 के चुनाव में जीत हासिल की जा सके। कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवानी को पार्टी में शामिल कराना उसी का हिस्सा है।
कन्हैया कुमार: कन्हैया कुमार का ताल्लुक बिहार के बेगुसराय है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने किस्मत भी आजमाई थी, पर वह भाजपा के गिरिराज सिंह से हार गए। बेगुसराय में भूमिहार मतदाताओं की तादाद सबसे ज्यादा है और कन्हैया कुमार भी भूमिहार है। ऐसे में वह खुद को साबित करने में विफल रहे।इसके बावजूद पार्टी मानती है कि बिहार में नए चेहरे की जरुरत है। छात्र नेता के तौर पर उन्हें संगठन बनाने का अनुभव है। बिहार कांग्रेस के नेता अमरिंदर सिंह कहते हैं कि कन्हैया के आने से पार्टी को फायदा होगा। क्योंकि, कन्हैया वही मुद्दे और लड़ाई लड़ रहे हैं जिन्हें कांग्रेस उठाती रही है।
जिग्नेश मेवाणी: वर्ष 2017 के चुनाव में हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी की तिगड़ी ने अहम भूमिका निभाई थी। हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। वहीं, अल्पेश ठाकोर भाजपा में चले गए। पर जिग्नेश मेवाणी ने कभी कोई समझौता नहीं किया और वह लगातार भाजपा से लड़ते रहे हैं। गुजरात में सात फीसदी दलित हैं और उनके लिए 13 सीट आरक्षित हैं। पिछले चुनाव में अधिकतर आरक्षित सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। उस वक्त जिग्नेश मेवाणी अपनी सीट तक सीमित रहे थे और कांग्रेस ने उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा था। पर मेवाणी के कांग्रेस में आने से तस्वीर बदल सकती है।

चंडीगढ़| पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी नीत मंत्रिमंडल में 7 नए चेहरों को शामिल किए जाने जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की सरकार में शामिल रहे 5 मंत्रियों को शामिल नहीं किए जान की संभावना है। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
नए मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले मंत्रियों की अंतिम सूची तैयार होने के बाद मुख्यमंत्री चन्नी ने शनिवार दोपहर करीब 12 बजकर 30 मिनट पर राजभवन में राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मुलाकात की। राज्यपाल से मिलने के बाद चन्नी ने संवाददाताओं को बताया कि रविवार शाम चार बजकर 30 मिनट पर नए मंत्रियों के लिए शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन होगा।

दिल्ली से लौटने के कुछ घंटे बाद ही चन्नी ने राज्यपाल से मुलाकात की। दिल्ली में उन्होंने नए मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले चेहरों को लेकर पार्टी के आलाकमान के साथ अंतिम चरण की चर्चा की।

सूत्रों के अनुसार परगट सिंह, राजकुमार वेरका, गुरकीरत सिंह कोटली, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, कुलजीत नागरा और राणा गुरजीत सिंह मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं। वहीं पार्टी ने अमरिंदर सिंह सरकार में मंत्री रहे विजय इंदर सिंगला, मनप्रीत सिंह बादल, ब्रह्म मोहिंदरा, सुखबीर सिंह सरकारिया, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, अरुणा चौधरी, रजिया सुल्तान और भारत भूषण आशु को मंत्रिमंडल में बनाए रखने का फैसला लिया है।

सूत्रों ने बताया कि हालांकि अमरिंदर सिंह नीत मंत्रिमंडल में मंत्री रहे पांच विधायकों राणा गुरमीत सिंह सोढी, साधु सिंह धर्मसोत, बलबीर सिंह सिद्धू, गुरप्रीत सिंह कांगड़ और सुंदर शाम अरोड़ा का मंत्रिमंडल से पत्ता कट सकता है। राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के अन्य वरिष्ठ सदस्यों के साथ बैठक के बाद चन्नी नीत मंत्रिमंडल के नामों पर सहमति बनी। मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा करने के लिए चन्नी को कांग्रेस आलाकमान ने शुक्रवार को दिल्ली तलब किया था। मुख्यमंत्री चन्नी और दो उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और ओपी सोनी समेत कुल 18 विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

इनका कट सकता है पत्ता
पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पांच करीबी मंत्रियों की छुट्टी होने की संभावना है। इनमें साधु सिंह धर्मसोत, बलवीर सिद्धू, राणा गुरमीत सोढ़ी, गुरप्रीत कांगड़ और सुंदर शाम अरोड़ा हो सकते हैं। धर्मसोत पर पोस्टमैट्रिक छात्रवृत्ति में कथित तौर पर घोटाले के आरोप हैं। वहीं सोढी और अरोड़ा भी कैप्टन के खासमखास हैं। कांगड़ उनके दामाद को सरकारी नौकरी दिलाने के कारण निशाने पर रहे हैं।

नई दिल्ली । आने वाले दिनों में कार के इंजन में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। दरअसल, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया है कि वह अगले तीन से चार महीने में एक आदेश जारी करेंगे। इस आदेश में सभी वाहन निर्माताओं को फ्लेक्स इंजन यानी वैकल्पिक ईंधन वाले इंजन के वाहनों के मैन्युफैक्चरिंग को अनिवार्य किया जाएगा। करीब दो साल से नितिन गडकरी कार कंपनियों से फ्लेक्स इंजन बनाने की अपील कर रहे थे लेकिन इसे अनिवार्य नहीं किया गया था। अब पहली बार इस तरह के इंजन के लिए आदेश जारी किया जाएगा।ये वो इंजन होते हैं जिसमें पेट्रोल और इथेनॉल या मेथनॉल के मिश्रण का भी प्रयोग किया जा सकता है। मौजूदा समय में, भारत में पेट्रोल में 20 फीसदी तक इथेनॉल के मिश्रण की इजाजत है। हालांकि, इंजन में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। अब अगर इथेनॉल की मात्रा बढ़ाई जाती है तो इंजन में भी जरूरी मॉडिफिकेशन करना होगा। यही वजह है कि नितिन गडकरी कार कंपनियों से इंजन में बदलाव करने को कह रहे हैं। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार वैकल्पिक ईंधन की ओर रुख कर रही है। बीते दिनों नितिन गडकरी ने बताया था कि इससे कई फायदे होंगे। पहले तो प्रदूषण में कमी आएगी। वहीं, दूसरा बड़ा फायदा ये होगा कि कच्चे तेल के आयात में गिरावट आएगी। बता दें कि भारत 80 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल का आयात करता है। डॉलर में कारोबार होने की वजह से इसमें विदेशी मुद्रा भी ज्यादा खर्च होता है। सरकार कच्चे तेल का आयात कम कर इस खर्च में भी कटौती कर सकेगी। इसके अलावा, देश में गन्ने और मक्के के अपशिष्ट से भी वैकल्पिक ईंधन इथेनॉल का निर्माण किया जा सकेगा।

नई दिल्ली । पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी की ताजपोशी के बाद नाराज बताए जा रहे सीनियर नेता सुनील जाखड़ ने अब इसे साहसी फैसला करार दिया है। सुनील जाखड़ के लेटेस्ट बयान से लगता है कि राहुल गांधी उन्हें मनाने में कामयाब रहे हैं। मुख्यमंत्री पद की दौड़ से बाहर होने पर नाराजगी जाहिर करने के कुछ दिनों बाद पंजाब कांग्रेस प्रदेश कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने के राहुल गांधी के फैसले का समर्थन किया है और इसे साहसी फैसला बताया है।दिल्ली में राहुल गांधी संग मुलाकात के बाद सुनील जाखड़ ने ट्वीट किया और राहुल गांधी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत सिंह को चुनकर पार्टी में अन्य लोगों के लिए भी उभरकर आने का अवसर दिया है। उन्होंने इसे साहसिक निर्णय बताया है और कहा कि यह फैसला जो सिख धर्म के लोकाचार में निहित है, न केवल राज्य के लिए बल्कि राज्य के सामाजिक ताने-बाने के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षण है। दरअसल, चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने के बाद नाराज चल रहे पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी। इतना ही नहीं जाखड़ राहुल-प्रियंका के साथ ही विमान से दिल्ली भी आए थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद भावी मुख्यमंत्रियों की सूची में सबसे आगे चल रहे थे। हालांकि, बाजी मारी चरणजीत सिंह चन्नी ने। इसके बाद सुनील जाखड़ ने खुलकर नाराजगी जाहिर की थी। सूत्रों ने बताया कि राहुल और प्रियंका शिमला से लौटे थे और दोनों बुधवार शाम को चंडीगढ़ से दिल्ली जाने के लिए एक विमान में सवार हुए। जाखड़ भी इस यात्रा में उनके साथ थे। माना जा रहा है कि जाखड़ को शांत कराने के लिए दिल्ली लाया गया ताकि उनकी बयानबाजी से पार्टी को नुकसान न हो। इसके अलावा जल्दी ही उन्हें कोई नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। पार्टी के चुनावी कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष के तौर पर जाखड़ के नाम पर पहले से ही विचार किया जा रहा है। बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने से पहले सुनील जाखड़ी ही यह पद संभाल रहे थे।

नई दिल्ली । कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी को कोवैक्सीन लगवाने के बाद भी अमेरिका में एंट्री मिलने को लेकर सवाल उठाया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस वैक्सीन को अमेरिका ने अपनी लिस्ट में शामिल नहीं किया है। ऐसे में इस टीके को लगवाने के बाद भी पीएम नरेंद्र मोदी को एंट्री कैसे मिली है? दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, 'यदि मुझे सही से याद है तो पीएम नरेंद्र मोदी ने कोवैक्सीन ली थी, जिसे अमेरिका की ओर से मंजूरी नहीं मिली है। या फिर उन्होंने इसके अलावा कोई और वैक्सीन भी ली है या अमेरिका के प्रशासन ने उन्हें छूट दी है? देश यह जानना चाहता है। दिग्विजय सिंह के अलावा कांग्रेस की सीनियर नेता मारग्रेट अल्वा के बेटे निखिल अल्वा ने भी इस पर सवाल उठाया है। उन्होंने खुद भी कोवैक्सीन ही लगवाई है। निखिल अल्वा ने ट्वीट किया अपने प्रधानमंत्री की तरह मैंने भी आत्मनिर्भर कोवैक्सीन लगवाई है। अब मैं ईरान, नेपाल और कुछ अन्य देशों को छोड़कर दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में नहीं जा सकता है। लेकिन मुझे यह जानकर हैरानी हो रही है कि पीएम नरेंद्र मोदी को अमेरिका जाने की अनुमति मिल गई है, जो कोवैक्सीन को मान्यता ही नहीं देता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि वास्तव में उन्होंने कौन सी वैक्सीन ली थी। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च को दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में जाकर कोरोना वैक्सीन का पहला टीका लगवाया था। उन्होंने भारत में ही बनी कोवैक्सीन की डोज ली थी। बता दें कि कोवैक्सीन को अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रे्लिया समेत दुनिया के कई बड़े देशों की ओर से मान्यता नहीं दी गई है। हालांकि कोविशील्ड को इस सूची में शामिल किया गया है।

नई दिल्ली । यूपी विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों के लिए शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया दिसम्बर में शुरू कर सकती है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने 28 नवम्बर को अध्यापक पात्रता परीक्षा का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि अभी तक रिक्त पदों की संख्या तय नहीं है। राज्य सरकार ने 51 हजार रिक्त पदों पर भर्ती की घोषणा की है जबकि समग्र शिक्षा अभियान की वार्षिक कार्ययोजना के मुताबिक 73 हजार रिक्त पद हैं। राजस्व परिषद के चेयरमैन की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही रिक्त पदों की अंतिम संख्या तय हो सकेगी। प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 51,112 रिक्त पदों का हलफनामा दायर किया था और सरकार ने ट्वीट कर भर्ती का भी ऐलान किया था। वहीं इसी वर्ष जून में हुई पीएबी की बैठक में परिषदीय स्कूलों में 73711 पद रिक्त होने की जानकारी केन्द्र सरकार को दी गई है। कमेटी अगले हफ्ते रिपोर्ट सौंप सकती है और इसके बाद ही रिक्त पदों की संख्या तय करके नई शिक्षक भर्ती का ऐलान होगा। इसकी प्रक्रिया सरकार दिसम्बर में शुरू कर सकती है। भले ही शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा का आयोजन या फिर इसका रिजल्ट नई सरकार आने के बाद घोषित हो क्योंकि इस बीच चुनावी अधिसूचना जारी होने की संभावना है। लोकसभा चुनाव से पहले वर्ष 2018 में 68500 शिक्षक भर्ती के नियुक्ति पत्र सितम्बर में बांटे गए थे। उसी मंच से मुख्यमंत्री ने रिकार्ड समय में 69 हजार शिक्षक भर्ती कराने की घोषणा कर दी थी। इसके लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा नवम्बर के पहले हफ्ते में करवाई गई। वहीं 22 दिसम्बर से शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन लेकर 6 जनवरी 2019 को लिखित परीक्षा करा दी गई थी जबकि इससे पहले एक परीक्षा कराने में न्यूनतम तीन महीने का समय लग रहा था लेकिन राज्य सरकार ने अपना वायदा निभाते हुए शिक्षक भर्ती को तेजी से करवाया।

नई दिल्ली । राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत की ओर से सलाह दिए जाने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें अपने ही राज्य तक सीमित रहने की नसीहत दी है। अशोक गहलोत ने कहा था कि मैं उम्मीद करता हूं कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे कांग्रेस को नुकसान होगा। इस सलाह को लेकर अशोक गहलोत पर बरसते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा वे राजस्थान पर ध्यान दें। एक टीवी चैनल से बातचीत में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, ‘गहलोत अपना राजस्थान संभालें, हमारे पंजाब को छोड़ें। वह मेरे दोस्त हैं, चुनाव में जिस कमेटी ने टिकट दिए, वे उसके चैयरमेन थे। वह बहुत अच्छे आदमी हैं, लेकिन उन्हें अपनी परेशानियों को देखना चाहिए। तीन तो स्टेट रह गए हैं कांग्रेस के पास। आप पंजाब खराब कर ही रहे हो।’ दरअसल अशोक गहलोत ने 19 सितंबर को कैप्टन अमरिंदर सिंह के नाम एक पत्र ट्वीट किया था और कहा था कि मुझे उम्मीद है कि वे ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे कांग्रेस का नुकसान हो। अशोक गहलोत ने लिखा था, 'मुझे उम्मीद है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे, जिससे कांग्रेस को नुकसान हो। कैप्टन साहब ने खुद कहा है कि पार्टी ने उन्हें सीएम बनाया और वे साढ़े 9 साल तक प्रदेश के मुखिया रहे। उन्होंने अपनी पूरी ताकत के साथ काम किया और पंजाब के लोगों की सेवा की थी। कई बार हाईकमान विधायकों और आम लोगों की राय के आधार पर पार्टी के हित में फैसले लेता है। हालांकि इस तरह से अशोक गहलोत का नसीहत देना कैप्टन अमरिंदर सिंह को रास नहीं आया है और उन्होंने सलाह दी है कि वे राजस्थान को संभालें। बता दें कि सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद से ही कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस पर हमलावर हैं। हाल ही में उन्होंने बयान जारी कर कहा था कि वे किसी भी कीमत पर नवजोत सिंह सिद्धू को भविष्य में सीएम नहीं बनने देंगे और उनके खिलाफ मजबूत उम्मीदवार उतारेंगे। उनके इस बयान से इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वे 2022 के विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने वाले हैं।

लखनऊ । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के गठबंधन का ऐलान शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री और प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान ने किया। उन्होंने लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि भाजपा का निषाद पार्टी से गठबंधन हो चुका है। यूपी चुनाव में भाजपा और निषाद पार्टी मिलकर लड़ेंगी। अपना दल पहले से इस गठबंधन का हिस्सा है। प्रेस कांफ्रेंस में बीजेपी के चुनाव प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान, प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह के साथ निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद भी मौजूद रहे। इसके अलावा यूपी सरकार के प्रवक्ता और मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह की मौजूदगी भी रही। धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि चुनाव प्रभारी बनने के बाद तीन दिन से उत्तर प्रदेश में हूं। यहां 2022 में एक बार फिर भाजपा की जीत सुनिश्चित है। उन्होंने निषाद पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन की अधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि इससे एनडीए के अभियान को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि अपना दल और कई अन्य सामाजिक संगठन भी हमारे साथ जुड़े हैं। धमेन्द्र प्रधान ने कहा कि इस गठबंधन से एनडीए के चुनावी अभियान को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि 2022 का चुनाव हम मिलकर लड़ेंगे। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सियासी बिसात बिछने लगी है। हर राजनीतिक दल अपने समीकरण दुरुस्त करने में लगा है। भाजपा ने भी चुनाव प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान की अगुवाई में रणनीतिकारों की पूरी टीम मैदान में उतार दी है। पिछले कई दिनों से यह टीम अलग-अलग स्तरों पर बैठकें कर माहौल को भांपने और पार्टी कार्यकर्ताओं-नेताओं को जीत के गुर सिखाने में जुटी है। इसी क्रम में शुक्रवार को बीजेपी के चुनावी गठबंधन का ऐलान करते हुए प्रधान ने कहा सबका साथ और सबका विश्वास जरूरी है।प्रेस कांफ्रेंस में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि यूपी चुनाव को लेकर पिछले तीन दिन से बैठकें चल रही हैं। निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद भी हमारे साथ हैं। 2022 के लिए दोनों दल मिलकर ताकत से लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि सीएम योगी और पीएम मोदी के नेतृत्व में हम आगे बढ़ेंगे। दोनों मिलकर राज्य में कमल खिलाएंगे।

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