ईश्वर दुबे
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Bhilai
गर्भावस्था के दौरान दौरान खराब क्वालिटी या बीपीए युक्त प्लास्टिक बोतल में पानी पीने वाली महिलाओं के होने वालों बच्चों को पेट की बीमारियां हो सकती हैं। प्लास्टिक में पाया जाने वाले बीपीए रसायन के कारण पेट में मौजूद अच्छे और बुरे जीवाणुओं का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके अलावा यह लीवर में दर्द और कोलोन में सूजन का कारण बन सकता है।
शोधकर्ताओं का दावा है कि जन्म से पहले गर्भ में रहने के दौरान ही बच्चे खतरनाक रसायनों के संपर्क में आ सकते हैं। यहां तक कि जन्म के ठीक बाद भी मां के दूध से उनमें खतरनाक रसायन जा सकते हैं।
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार जन्म लेने के ठीक बाद मां के दूध से रसायनों के संपर्क में आए बच्चों को आगे की जिंदगी में पेट से संबंधित परेशानियां हो सकती हैं.
दरअसल, बीपीए के नाम से प्रचलित बिस्फेनॉल ए एक तरह का औद्योगिक रासायन है, जिसे साल 1960 से प्लास्टिक बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
बीपीए प्लास्टिक के कई कंटेनरों और बोतलों में पाया जाता है. खासतौर सस्ते और खराब क्वालिटी वाले बोतलों में इसका मिलना आम है। शोध में दावा किया गया है कि ऐसे ऐसे प्लास्टिक के बर्तनों में रखा गया खाना आसानी से बीपीए रसायन को सोख लेता है।
अध्ययनकर्ताओं ने यह अध्ययन खरगोशों पर किया है।
अध्ययन के दौरान पाया गया कि जो खरगोश प्रेग्नेंसी के दौरान बीपीए रसायन के संपर्क में रहे या बीपीए से दूषित खाने व पानी का सेवन किया, उनके बच्चों में जन्म लेने के 7 दिनों बाद से ही पेट से संबंधित परेशानियां उत्पन्न होने लगीं।
शोधकर्ताओं ने अध्ययन से निष्कर्ष निकाला कि बीपीए एक्सपोज होने वाले बच्चों में गट बैक्टीरियल डिसबायोसिस विकसित हो जाता है, जिसके कारण उनके लीवर में दर्द, कोलोन सूजन आदि होता है।
इसलिए शोधकताओं ने गर्भवती महिलाओं को सुझाव दिया है कि वो खाना या पानी रखने के लिए ऐसी कंटेनर या बोतल का ही इस्तेमाल करें जो बीपीए मुक्त हों।
मुजफ्फरनगर। दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर 1 महिला की ससुराल वालों ने जहरीला पदार्थ खिलाकर हत्या कर दी। मामला
उत्तर प्रदेश के शामली जिले का है। पुलिस ने बुधवार को बताया कि महिला के पति और ससुराल के पांच लोगों के खिलाफ इस संबंध में मामला दर्ज किया गया है। घटना मंगलवार को जिले के आजाद चौक इलाके में हुई। महिला का नाम मुस्कान है और कासिफ के साथ उसका निकाह मई में हुआ था। उन्होंने बताया कि मुस्कान के परिवार की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार कासिफ कई महीनों से उसे दहेज को लेकर प्रताड़ित कर रहा था। बाद में ससुराल वालों ने जहर खिलाकर उसकी हत्या कर दी। भारतीय दंड संहिता की प्रासंगिक धाराओं और दहेज निषेध अधिनियम के तहत आसिफ, उसकी मां, उसके तीन भाई और एक बहन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सभी की तलाश जारी है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
शरीर के किसी अंग का आग या ताप में जल जाना, बेहद तकलीफदेह होता है। कई बार खाना बनाते वक्त, गर्म पानी से या फिर बिजली के किसी उपकरण से जल जाने पर त्वचा पर फफोले हो जाते हैं, जो आपकी तकलीफ को कई गुना बढ़ा देते हैं। ऐसे में कुछ घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकते हैं। जब भी किसी कारण से त्वचा जल जाए, तो तुरंत उस पर ठंडा पानी डालें, ताकि फफोले ना पड़ सकें। इसके बाद भी आप जले हुए स्थान पर ठंडे पानी में कपड़ा भिगोकर लपेट दें, ताकि यह खतरा और भी कम हो जाए।
जलने पर एलोवेरा काफी फायदा पहुंचाता है। प्राथमिक उपचार के तौर पर इसका प्रयोग जले हुए स्थान पर किया जा सकता है। इसेक बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे। पानी या दूध से घाव को धोने के बाद एलोवेरा को जले हुए स्थान पर लगाएं। जले हुए स्थान पर आलू या आलू का छिलका लगाकर रखने से भी जलन से राहत मिलेगी और ठंडक मिलेगी। इसके लिए आलू को दो भागों में काटकर उसे जख्म पर रखें। जलने के तुरंत बाद यह करना काफी फायदेमंद होगा। जले हुए स्थान पर तुरंत हल्दी का पानी लगाने से दर्द कम होता है और आराम मिलता है। इसलिए इसे प्राथमिक उपाचार के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है।
शहद का प्रयोग भी जले हुए स्थान पर करने से लाभ होता है, क्योंकि यह एक अच्छा एंटीबायोटिक होता है। यह घाव के कीटाणुओं को खत्म करने में सहायक होता है। इसके लिए शहद को पट्टी पर लेकर पट्टी को घाव पर रख दें और इस पट्टी को दिन में दो से तीन बार जरूर बदलें।
जले हुए स्थान पर टी-बैग रखने से भी आपको काफी राहत मिलेगी। इसके लिए टी-बैग को फ्रिज या ठंडे पानी में कुछ देर रखने के बाद घाव पर लगाएं। इसमें टैनिक अम्ल होता है, जो घाव की गर्मी को कम की उसे ठीक करने में मदद करता है।
जले हुए हिस्से पर तुलसी के पत्तों का रस लगाना भी बेहद असरकारक होता है। इससे हुए वाले भाग पर दाग बनने की संभावना कम होती है।
तिल का उपायोग भी जलने पर राहत पहुंचाने में सहायक है। तिल को पीसकर जले हुए स्थान पर लगाने से जलन और दर्द नहीं होगा। तिल लगाने से जलने वाले हिस्से पर से दाग-धब्बे भी समाप्त होते हैं।
जल जाने पर टूथपेस्ट भी एक कारगर उपचार है जिससे जलन तो कम होती ही है, साथ ही त्वचा पर फफोले भी नहीं पड़ते। इसलिए जलने पर कुछ उपलब्ध न हो तो तुरंत टूथपेस्ट लगा लिजिए।
जलने पर तुरंत पानी में नमक डालकर गाढ़ा घोल बनाएं, और प्रभावित स्थान पर लगाएं, इससे ठंडक भी मिलेगी और त्वचा फफोले भी नहीं पड़ेंगे। जले हुए स्थान पर तुरंत मीठा सोडा डालकर रगड़ने से भी फफोले नहीं पड़ते और बिल्कुल जलन नहीं होती।
सेब रखेगा सेहतमंद
कुछ लोग सेब को छिलकर खाना पंसद करते है लेकिन इससे सेब के सारे जरूरी न्यूट्रिन निकल जाते है। सेब को छिलकर खाने की बजाएं छिलके समेत खाने से आपकी कई बीमारियां दूर हो सकती है और यह खाने में भी टेस्टी लगता है। आइए जानते है सेब को छिलके समेत खाने से शरीर को क्या फायदे होते है।
ब्लड शुगर
डायबिटिज का समस्यां वाले लोगों को सेब छिलके समेत खाना चाहिए। इसे ऐसे खाने से शुगर कंट्रोल में रहती है।
ब्रेन सेल
सेब को बिना छिले खाने से आपके ब्रेन सेल डैमेज नहीं होते है। इसके अलावा इसे ऐसे खाने से दिमाग भी तेज होता है।
आंखों में कैटरेक्ट
सेब का छिलका आपको आंखों में होने वाली कैटरेक्ट की बीमारी से बचाता है। नियमित सेब खाने से आपको यह बीमारी नहीं होती है।
पित्ते की पत्थरी
फाइबर के गुणों से भरपूर सेब का छिलका पित्त की थैली में जमा कॉलेस्ट्रोल को कम करके आपको स्टोन प्रॉब्लम से बचाता है।
दातों में सड़न
सेब का छिलका दातों में कैवटी को होने से रोकता है। इसके अलावा प्रैग्नेंसी में इसका सेवन करने से खून की कमी पूरी होती है।
कैंसर
कैल्शियम, इंजाइम, एंटी ऑक्सीडेंट और प्लेविनाइड के गुणों से भरपूर सेब का छिलका मोटापे को दूर करने के साथ-साथ लीवर, ब्रेस्ट और कोलोन कैंसर से बचाता है।
नई दिल्ली। अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो यह समझते हैं कि नॉन एल्कोहॉलिक होने से वो कभी फैटी लीवर के शिकार नहीं हो सकते तो आप गलत हैं। जी हां आजकल तनाव और खान-पान की गलत आदतों की वजह से ज्यादातर लोग फैटी लीवर के शिकार हो रहे हैं। शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में लीवर अहम भूमिका निभाता है। शरीर के लिए प्रोटीन का निर्माण, पाचन के लिए पित्त का उप्तादन करना, पोषक तत्वों को ऊर्जा में बदलने के साथ प्रतिरक्षा कारकों को बनाने और बैक्टीरिया व विषाक्त पदार्थों को खून से निकालकर संक्रमण से लडने में भी लिवर मदद करता है। शरीर का इतना जरूरी अंग होने के बावजूद थोड़ी सी लापरवाही आपको फैटी लीवर का शिकार बना सकती है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर फैटी लीवर क्या है और इसके होने के पीछे क्या कारण और बचाव के उपाय हैं।
क्या है फैटी लीवर-
फैटी लिवर का अर्थ है लिवर में अतिरिक्त फैट का जमा होना। जिसके बढ़ने पर यह लिवर फेलियर या लिवर सिरोसिस का कारण भी बन सकता है। फैटी लिवर की समस्या जिन भी लोगों में देखी जाती है, उन्हें अक्सर पेट से जुड़ी कोई ना कोई समस्या परेशान करती रहती है। उदाहरण-कई बार थोड़ा-सा खाने पर भी उन्हें लगता है जैसे उन्होंने ओवर ईटिंग कर ली हो वहीं कई बार अपनी डाइट से बहुत ज्यादा खाने पर भी उन्हें अपने पेट के भरे होने का अहसास नहीं होता है।
फैटी लिवर के कारण-
-मोटापा या अधिक वजन होना
-टाइप- 2 डायबिटीज होना
-मेटाबॉलिज्म सिंड्रोम होने पर
-दवाओं का सेवन
-एल्कोहॉल
- अनुवांशिक
-अनुचित आहार
-पोस्ट मेनोपॉज से गुजर रही महिला को
-जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल की शिकायत रहती है, उन्हें यह समस्या हो सकती है।
-ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से ग्रसित लोगों को भी यह समस्या हो सकती है।
फैटी लिवर के लक्षण-
-जिन लोगों को फैटी लिवर की समस्या होती है, उन्हें अक्सर थकान बनी रहती है और शरीर में कमजोरी रहती है।
-फैटी लिवर के रोगियों का वजन तेजी से घट सकता है और भूख कम हो जाती है। पेट में दर्द बना रह सकता है या अक्सर पेट दर्द की समस्या होने लगती है।
-शरीर में पीलिया के लक्षण दिखने लगते हैं जैसे त्वचा का रंग और आंखों में पीलापन दिखने लगता है।
कितने तरह का होता है फैटी लीवर-
फैटी लीवर दो तरह का होता है-एल्कोहॉलिक और नॉन-एल्कोहॉलिक। आइए जानते हैं क्या है इनमें फर्क-
एल्कोहॉलिक फैटी लीवर-
इस रोग के बारे में इसके नाम से ही पता चल जाता है। यह रोग जरूरत से ज्यादा शराब पीने से या फिर खराब गुणवत्ता वाली शराब पीने से होता है। जो लोग जरूरत से ज्यादा शराब पीते हैं, उनके लिवर में सिकुडन आ जाती है।
नॉन- एल्कोहॉलिक फैटी लिवर -
उन लोगों को होता है,जो भारी मात्रा में शराब तो नहीं पीते हैं लेकिन उन्हें ये जेनेटिक कारणों से या फिर गलत लाइफस्टाइल के कारण भी हो सकती है। कहा जाता है कि मोटाप और मधुमेह इस जोखिम को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर आप इस बीमारी को रोक सकते हैं।
फैटी लीवर से बचाव-
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि फैटी लिवर से बचे रहने के लिए व्यक्ति को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
-शरब से परहेज करें।
-थायराइड और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें
-वजन घटाएं
-डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए दवा लें
-नियमित रूप से व्यायाम करें या फिर अपनी फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाएं ।
मुल्तानी मिट्टी बालों के लिए बेहद लाभकारी है. इस खबर में हम आपको मुल्तानी मिट्टी का उपयोग करने का तरीका बता रहे हैं.
नई दिल्ली। अगर आप बालों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या से परेशान हैं तो ये खबर आपकी मदद करेगी. हर कोई अपने बालों को हेल्दी रखना चाहता है. हम देखते हैं कि फैशन के इस दौर में बालों को सिल्की-शाइनी और खूबसूरत बनाने के लिए ज्यादातर लोग अब केमिकल बेस्ड हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं. ये केमिकल बेस्ड प्रोडक्ट्स बालों को इंस्टेंट तौर पर खूबसूरत तो बनाते हैं, लेकिन कई बार इनके साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिल जाते हैं.
अगर आप इन साइड इफेक्ट्स से अपने बालों को बचाना चाहते हैं, तो आप अपनी हेयर केयर के लिए मुल्तानी मिट्टी हेयर मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं. ये आपके बालों को खूबसूरती के साथ मजबूती देने का काम भी बखूबी करेंगे. इन हेयर मास्क को आप किस तरह से तैयार और इस्तेमाल कर सकते हैं, जानिए इस खबर में....
बालों की देखभाल के लिए इस तरह करें मुल्तानी मिट्टी का उपयोग
1. ड्राई बालों के लिए इस तरह करें उपयोग
ड्राई बालों के लिए मुल्तानी मिट्टी हेयर मास्क बनाने के लिए आप चार चम्मच मुल्तानी मिट्टी लें.
अब इसको रात भर के लिए लिए आधे कप पानी में भिगो कर रख दें.
सुबह जब ये फूल जाए तो इसमें तीन चम्मच दही और एक चम्मच नींबू का रस मिक्स कर लें.
इसके बाद इस मिक्सचर को स्कैल्प और बालों की लेंथ पर अच्छी तरह से लगाएं.
करीब बीस मिनट तक इसे लगा रहने दें और बाद में सादे पानी से धो लें.
2. ऑयली बालों के लिए इस तरह करें उपयोग
आप आधी कटोरी मुल्तानी मिट्टी को एक कटोरी छाछ में चार-पांच घंटे या रात भर के लिए भिगो कर रख दें.
जब ये अच्छी तरह से भीग जाए, तो इसका स्मूथ पेस्ट तैयार कर लें.
अब इसमें एक चम्मच आंवला पाउडर और एक चम्मच शिकाकाई पाउडर भी मिक्स कर लें.
इसके बाद इस मास्क को अपने स्कैल्प और बालों पर लगाएं
20 मिनट के बाद सादे पानी से सिर को अच्छी तरह से धो लें.
3. डैंड्रफ हटाने के लिए इस तरह करें उपयोग
तीन चम्मच मुल्तानी मिट्टी लेकर इसको कुछ घंटो के लिए आधे कप पानी में भिगो दें.
एक चम्मच मेथी दाना भी चौथाई कप पानी में अलग से भिगो दें.
जब ये दोनों भीग जाएं तो मिट्टी को फेंट लें और मेथी को बारीक पीसकर पेस्ट बना लें.
अब मिट्टी में मेथी का पेस्ट और एक चम्मच नींबू का रस मिक्स कर लें.
अब इस पेस्ट को अपने स्कैल्प और बालों पर लगा कर बीस मिनट के लिए छोड़ दें.
20 मिनट के बाद आप अपने सिर को सादे पानी से सिर धो लें.
4. बालों को सिल्की-शाइनी बनाने के लिए इस तरह करें उपयोग
चार चम्मच मुल्तानी मिट्टी लेकर इसको कुछ घंटों के लिए आधे कप पानी में भिगो दें.
भीग जाने पर इसका पेस्ट बनाएं और एक चम्मच शहद और आधा बड़ा चम्मच नींबू का रस मिक्स कर लें.
अब इस मास्क को अपने बालों और स्कैल्प पर अच्छी तरह से अप्लाई करें.
करीब बीस मिनट तक इसे लगा रहने दें और बाद में सादे पानी से धो लें.
क्या आप घर पर ही चेहरे को पार्लर जैसा साफ करना चाहते हैं? तो मुंह धोने का यह तरीका जरूर अपनाएं.
नई दिल्ली। धूल-मिट्टी, गंदगी, प्रदूषण, तेल आदि के कारण त्वचा के रोमछिद्र बंद होने लगते हैं. जिसके कारण त्वचा खुलकर सांस नहीं ले पाती है और पिंपल्स, ब्लैकहेड्स जैसी समस्या होने लगती है. लेकिन आप सिर्फ 2 मिनट में चेहरे को बिल्कुल साफ कर सकते हैं और इसके लिए आपको बहुत ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी है. आइए जानते हैं कि चेहरे को साफ करने का बेहतरीन तरीका क्या है.
चेहरा धोने की तैयारी
चेहरे को अंदर से साफ करने के लिए आपको आधा कप दूध लेना है. इस आधे कप में 2 चम्मच ओट्म मिलाकर रख दें. आप देखेंगे कि कुछ ही मिनट में ओट्स ने सारा दूध सोख लिया है और वह काफी मुलायम बन गए हैं. अब इन ओट्स को चम्मच की मदद से पेस्ट बना लें. पेस्ट को थोड़ा दरदरा रखें, ताकि वह बेहतर तरीके से चेहरे की सफाई कर सके.
2 मिनट में चेहरा धोने का बेस्ट तरीका
अगर आपकी चेहरा धोने की पूरी तैयारी हो गई है, तो अब आपको चेहरा धोने में सिर्फ दो मिनट ही लगेंगे. आप सबसे पहले चेहरे से पूरा मेकअप हटा लीजिए, अगर है तो. इसमें लिपस्टिक और काजल जैसी चीजें भी शामिल हैं. अब चेहरे को माइल्ड फेसवॉश की मदद से साफ करके तौलिये से पोंछ लें.
इसके बाद हल्के हाथों से चेहरे पर ये पेस्ट लगाकर 2 मिनट मसाज करें. मसाज सर्कुलर मोशन में करें और फिर चेहरा धोकर तौलिये से पोंछ लें.
अगर समय है तो थोड़ा ज्यादा टाइम लगाएं
अगर आपके पास समय की कमी नहीं है, तो आप 2 मिनट की जगह 5 मिनट चेहरे पर मसाज करें. इससे आपको ज्यादा बेहतर फायदा मिलेगा. 5 मिनट मसाज करने के बाद पेस्ट को चेहरे पर 15 से 20 मिनट लगा रहने दें और फिर इसे धो लें. धोने के बाद चेहरे को तौलिये से पोंछ लें. अब अपने चेहरे पर गुलाब जल लगाएं और फिर मॉश्चराइजर का इस्तेमाल करें.
घनी पलकें और आइब्रो आपके खूबसूरती में चार चांद लगा देती हैं. जानें घर पर ही इन्हें घना कैसे बनाएं.
नई दिल्ली। चेहरे की खूबसूरती में हर एक चीज का अपना महत्व है. हमारी पलकें और आइब्रो बेशक बहुत छोटा हिस्सा होती हैं, लेकिन इनके बिना चेहरे का आकर्षण कुछ भी नहीं है. चेहरे पर घनी आइब्रो और पलकें सिर्फ आंखों की ही नहीं, बल्कि पूरे चेहरे की सुंदरता बढ़ाती हैं. हल्की आइब्रो और पलकों को घना बनाने के लिए आप कुछ घरेलू उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं. जिससे आपका पार्लर में होने वाला खर्चा हमेशा के लिए बच जाएगा.
पलकों और आइब्रो को घना कैसे बनाएं
अपनी पलकों और आइब्रो को घना बनाने के लिए आप निम्नलिखित घरेलू उपाय अपना सकते हैं. जैसे-
पेपरमिंट सीरम
पेपरमिंट सीरम में मौजूद पोटैशियम, आयरन और फोलेट जैसे तत्व पलकों और आइब्रो को घना बनाने में मदद कर सकते हैं. साथ ही इससे बाल झड़ने भी कम होने लगते हैं. इसे इस्तेमाल करने के लिए एक बर्तन में आधा कप पानी डालकर गर्म करें. इसके बाद इसमें मुट्ठीभर पुदीने के पत्ते डालकर उबालें. अब इसमें 4-5 बूंद ऑलिव ऑयल डालकर 5 मिनट तक उबालें. इसके बाद मिश्रण को धीमी आंच पर रखकर ढक्कर से ढक दें. 2-3 मिनट बाद गैस बंद करके इसे ठंडा कर लें. मिश्रण को जार में निकाल लें और बिल्कुल सामान्य होने पर पलकों और भौहों पर अच्छी तरह लगाएं. ध्यान रहे कि यह आंखों के अंदर ना जाए.
रोजमेरी सीरम
रोजमेरी की मदद से बालों को मोटा और घना किया जा सकता है. इससे पलकों और आइब्रो के बालों का विकास तेजी से होने लगता है. इस उपाय को अपनाने के लिए आप आधा कप पानी में थोड़ा रोजमेरी एसेंशियल ऑयल डालकर उबालें. जब एसेंशियल ऑयल का रंग पानी में अच्छी तरह मिल जाएं और पानी आधा रह जाए, तो गैस बंद करके पानी को एक जार में छानकर निकाल लें. अब इसमें कैस्टर ऑयल, मस्करा वैंड को मिलाएं और आई लैशेज व आइब्रोज पर लगाएं.
करी पत्ता सीरम
आइब्रोज और पलकों को घना बनाने के लिए करी पत्ता भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए आप एक बर्तन में आधा कप पानी डालकर उबालें. फिर इसमें मुट्ठीभर करी पत्ता डालकर 5 से 7 मिनट तक उबालें. इस मिश्रण को ठंडा करके जार में छान लें और विटामिन ई की कुछ बूंदे डालकर आइब्रो और पलकों पर लगाएं.
नई दिल्ली। जैसे किसी बीमारी के इलाज के लिए बीमारी को समझना जरूरी है। उसी तरह आत्महत्या को रोकने के लिए इसके कारण और बचाव के तरीकों को गहराई से जानना बेहद जरूरी है। दरअसल आत्महत्या एक वैश्विक समस्या है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक हर साल करीब 8 लाख लोग आत्महत्या करते हैं। यानी हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति है। प्रत्येक आत्महत्या के लिए, 20 से अधिक आत्महत्या के प्रयास होते हैं। विश्व स्तर पर, आत्महत्या से होने वाली अधिकांश मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों (79%) में हुईं, जहां अधिकांश (84%) दुनिया की आबादी रहती है। उम्र के लिहाज से देखें तो, वैश्विक आत्महत्याओं के आधे से अधिक (52.1%) केस 45 वर्ष की आयु के पहले के हैं। आत्महत्या से मरने वाले अधिकांश किशोर (90%) निम्न और मध्यम आय वाले देशों से हैं।
दुनिया भर में होने वाली सभी मौतों में आत्महत्या का हिस्सा 1.3% था, जिससे यह 2019 में सुसाइड मृत्यु का 17 वां प्रमुख कारण बन गया।
नई दिल्ली। जरूरत से ज्यादा मोटापे, गर्भावस्था या फिर पीरियड्स के दौरान अक्सर शरीर पर स्ट्रेच मार्क्स बन जाते हैं। दरअसल, आपके शरीर में किसी भी तरह का उतार चढ़ाव होने पर शरीर पर खिंचाव के निशान बनने लगते हैं। हालांकि ये निशान किसी तरह के रोग या शारीरिक समस्या का संकेत नहीं होते हैं, लेकिन कई लोगों को यह देखने में बुरे जरूर लगते हैं। जिन्हें छिपाने के लिए उन्हें लंबे कपड़ों का सहारा लेना पड़ता है। अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये घरेलू नुस्खे।
स्ट्रेच मार्क्स दूर करने के आसान घरेलू नुस्खे-
विक्स वेपोरब -
अक्सर लोग विक्स का इस्तेमाल सर्दी जुकाम होने पर करते हैं। लेकिन बहुत कम ही लोग यह बात जानते हैं कि इसका इस्तेमाल स्ट्रेच मार्क्स दूर करने के लिए भी किया जा सकता है। इसके लिए विक्स वेपोरब को निशान के ऊपर लगाएं फिर उस जगह को क्लिंग रैप की मदद से कवर कर लें। इसे रात भर के लिए ऐसे ही छोड़ दें। अगर आप रोज रात में ये उपाय करेंगे तो कुछ ही दिनों में आपको फर्क नजर आने लगेगा।
नींबू का रस-
एक कटोरी में नींबू का रस निकालकर अपने स्ट्रेच मार्क्स वाली जगह पर गोलाकार दिशा में लगाएं। इसे दस मिनट तक लगा रहने दें और फिर हल्के गुनगुने पानी से धो लें।
बादाम का तेल-
शरीर के किसी भी हिस्से की त्वचा पर स्ट्रेच मार्क्स बन गए हैं तो आप अपनी पसंद का कोई भी तेल लेकर उसमें एक से दो चम्मच बादाम का तेल मिला लें। अब इस तेल को हल्का गर्म करके स्ट्रेच मार्क्स वाली जगह पर लगाएं। इस तेल को भी आपको गोलाकार दिशा में घुमाते हुए लगाना है। इसे सूखने तक मलते रहें। इस उपाय को आप दिन में दो बार करें।
बेसन और खीरे का रस-
स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पाने के लिए एक कटोरी में बेसन लेकर उसमें एक चम्मच खीरे का रस मिला कर उसका पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को स्ट्रेच मार्क्स वाली जगह पर लगाकर 10 मिनट के लिए सूखने दें। इसे धोने के लिए हल्के गर्म पानी का इस्तेमाल करें।
भांग की चटनी सिर्फ स्वाद में ही लाजवाब नहीं है, बल्कि ये कई बेहतरीन स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करती है.
भांग पीने के बारे में तो आप ने कई बार सुना होगा. इसके नशे के बारे में भी आप जानते ही होंगे. लेकिन क्या आप ने कभी भांग की चटनी के बारे में सुना है. जी हां, भांग की चटनी एक पहाड़ी रेसिपी है, जिसके स्वाद का नशा हमेशा आपकी जीभ पर रहेगा. कमाल की बात यह है कि भांग की चटनी ना सिर्फ टेस्टी होती है, बल्कि कई फायदे भी देती है. आइए भांग की चटनी की रेसिपी और हेल्थ बेनिफिट्स जानते हैं.
भांग की चटनी की टेस्टी रेसिपी
Virat Kohli के रेस्टॉरेंट कंपनी में बतौर कॉर्पोरेट शेफ कार्यरत पवन बिष्ट ने भांग की चटनी की रेसिपी शेयर की है. उन्होंने रेसिपी के साथ भांग की चटनी खाने के फायदे भी बताए.
सामग्री
90 ग्राम भांग के बीज (Hemp seeds)
5-6 लहसुन की कली
2-3 हरी मिर्च
हरा धनिया या मुट्ठीभर धनिया के बीज
मुट्ठीभर पुदीना के ताजा पत्ते
1 नींबू का रस
स्वादानुसार नमक
जरूरतानुसार पानी
शेफ पवन बिष्ट के मुताबिक, लोग इन सामग्री के अलावा भी अपने स्वाद के अनुसार अन्य चीजें भी डाल लेते हैं. जैसे- भुने हुए टमाटर, सूखी साबुत लाल मिर्च, प्याज, जीरा आदि.
भांग की चटनी बनाने की विधि-
सबसे पहले एक पैन गर्म करें और सूखे पैन में ही भांग के बीज भूनें. भूनने के बाद बीजों को एक तरफ निकाल लें.
अब एक सिल-बट्टे पर भांग के भुने हुए बीज, लहसुन, हरी मिर्च, धनिया और पुदीना का पेस्ट बना लीजिए. अगर घर में सिलबट्टा नहीं है, तो मिक्सी में पेस्ट बना सकते हैं.
सिलबट्टे या मिक्सी में पेस्ट बनाने के लिए जरूरतानुसार पानी मिला लीजिए.
इस पेस्ट को एक बर्तन में निकाल लीजिए और इसमें नींबू का रस और नमक डाल लें.
आपकी भांग की चटनी तैयार है. इसे परांठे, चावल या खाने के साथ खा सकते हैं.
भांग की चटनी के फायदे-
बुखार और सनस्ट्रोक में फायदेमंद
पाचन बेहतर होता है
भूख सही होती है
ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड प्राप्त होते हैं
प्रोटीन, फाइबर और अन्य विटामिन व मिनरल्स मिलते हैं. आदि
अगर आपके बच्चे की हाइट धीरे बढ़ रही है, तो उसे ये आदतें सीखाएं. तेजी से बढ़ने लगेगी बच्चे की हाइट...
अक्सर माता-पिता अपने बच्चे की हाइट को लेकर चिंतित रहते हैं. दरअसल, समाज में व्यक्ति की हाइट को शारीरिक विकास से जोड़कर देखा जाता है. इसी कारण लंबी और अच्छी हाइट वाला शख्स आकर्षण और तारीफ का केंद्र बनता है. अगर आप भी बच्चे की लंबाई बढ़ाना चाहते हैं, तो उसे कुछ आदतें जरूर सीखानी चाहिए. इन आदतों वाले बच्चे की लंबाई काफी तेजी से बढ़ती है.
बच्चे की हाइट बढ़ाने वाली आदतें
किसी भी बच्चे की हाइट उसके शारीरिक विकास और आनुवांशिक कारणों पर निर्भर करती है. लेकिन इसके पीछे पोषण और शारीरिक गतिविधियों का बहुत बड़ा हाथ होता है. वरना बच्चे का शरीर संभावित लंबाई प्राप्त नहीं कर पाता है. यहां बताई जा रही आदतें बच्चे की हाइट बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती हैं.
विटामिन और मिनरल्स
बच्चे का शरीर विकासशील होता है. जिसके लिए उसे विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है. आप बच्चे को दूध, दाल और हरी-पत्तेदार सब्जियां खाने की आदत जरूर डालें. जिससे बच्चे को पर्याप्त मात्रा में विटामिन और मिनरल्स प्राप्त होंगे और हाइट को बढ़ने के लिए जरूरी मजबूती मिलेगी.
अंकुरित अनाज
बच्चों की डाइट में अंकुरित अनाज का खास महत्व है. इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और विटामिन-बी की अधिकता होती है. इसके लिए आप बच्चे को साबुन अनाज, चना आदि का सेवन जरूर करवाते रहें.
हाइट बढ़ाने के लिए एक्सरसाइज
एक्सरसाइज से हाइट बढ़ती है या नहीं, यह विवादास्पद हो सकता है. लेकिन इसमें कोई बहस की गुंजाइश नहीं है कि एक्सरसाइज शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है. मजबूत मांसपेशियों और शरीर का विकास तेजी से होता है और शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण सही होता है. जिस कारण बच्चे की हाइट बढ़ने में मदद मिल सकती है.
हाइट बढ़ाने का तरीका : योगासन
एक्सरसाइज की तरह योगा भी हाइट बढ़ाने में कारगर साबित हो सकती है. क्योंकि, लंबी हाइट के लिए शरीर को मजबूती के साथ लचीलापन और खिंचाव भी चाहिए होता है. जो कि योगासन प्रदान करता है. योगासन से शरीर में रक्त प्रवाह बेहतर होता है. जिससे सभी अंगों को पर्याप्त पोषण प्राप्त होता है.
खेलकूद
बच्चों को खेलना काफी पसंद होता है. लेकिन खेल कौन-सा है, यह ध्यान देना जरूरी है. आउटडोर और शारीरिक मेहनत वाले खेल बच्चे की हाइट बढ़ाने में मददगार होते हैं. साथ ही इन खेलों में बच्चे का भविष्य भी चमक सकता है. इसलिए, उसे बास्केटबॉल, दौड़, स्विमिंग, बैडमिंटन आदि खेल खेलने के लिए प्रेरित करें.
ये कब्ज को भी ठीक करने के साथ ही मेटॉबालिजम को बूस्ट करता है.
शरीर के सभी अंगों के सही से काम करने के लिए प्रोटीन की सबसे ज्यादा जरुरत होती है जो कि अंकुरित अनाज में सबसे ज्यादा पाया जाता है.
आज हम आपके लिए लेकर आए हैं अंकुरित मूंग के फायदे. जी हां अंकुरित मूंग सेहत के लिए बेहद लाभकारी है. इसमें काफी सारे इंजाइम होते हैं जो पाचन के लिए बेहतर होते हैं. ये कब्ज को भी ठीक करने के साथ ही मेटॉबालिजम को बूस्ट करता है. शरीर के सभी अंगों के सही से काम करने के लिए प्रोटीन की सबसे ज्यादा जरुरत होती है जो कि अंकुरित अनाज में सबसे ज्यादा पाया जाता है. अंकुरित मूंग खाने से शरीर में शुगर का लेवल बढ़ता नहीं है.
अंकुरित मूंग में पाए जाने वाले पोषक तत्व
मूंग साबुत हो या धुली, पोषक तत्वों से भरपूर होती है. अंकुरित होने के बाद तो इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों केल्शियम, आयरन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन्स की मात्रा दोगुनी हो जाती है.
डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद
जाने माने आयुर्वेद डॉक्टर अबरार मुल्तानी के अनुसार, अंकुरित मूंग की दाल में ग्लूकोज का स्तर बहुत कम पाया जाता है. इसकी वजह से डाइबिटीज के रोगी इसे आसानी से खा सकते हैं. अंकुरित दाल में ऐसे गुण होते हैं, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देते हैं.
अंकुरित मूंग खाने के जबरदस्त फायदे
इसमें पाया जाने वाले सॉल्यूबल फायइबर आपको वजन को कम करने में बहुत फायदेमंद होता है.
इसमें आयरन की अच्छी मात्रा है, जिस वजह से आपकी स्किन हेल्दी बनी रहती है.
इसके सेवन से शरीर में फाइबर की भरपूर मात्रा जाती है, जिससे कब्ज की समस्या खत्म होती है.
मूंग स्प्राउट्स का रोजाना सेवन इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है.
मूंद स्प्राउट्स पेट की गर्मी को शांत करने काम करता है
किस समय करें अंकुरित मूंग का सेवन
अंकुरित मूंग का सेवन सुबह या शाम के नाश्ते में सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.
मोरिंगा में आयरन की भरपूर मात्रा होती है, जिसकी वजह से एनीमिया दूर करने के लिए इसके इस्तेमाल की सलाह दी जाती है. जानिए मोरिंगा के जबरदस्त फायदे...
आज हम आपके लिए लेकर आए हैं मोरिंगा के फायदे. जी हां यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद चीज है. आमतौर पर दक्षिण भारत में इसका ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. मोरिंगा को स्पिरुलिना भी कहा जाता है. कोरोना महामारी के इस दौरान मोरिंगा इम्युनिटी बूस्ट करने का एक बेहतर विकल्प है.
जाने माने आयुर्वेदिक डॉक्टर अबरार मुल्तानी के अनुसार, मोरिंगा में विटामिन, मिनरल, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन और कई अन्य तत्व पाए जाते हैं. मोरिंगा घातक बैक्टीरिया से हमारे शरीर की रक्षा करता है. इसके नियमित सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं और लीवर फंक्शन बेहतर होता है.
मोरिंगा में पाए जाने वाले पोषक तत्व:
विटामिन C, A और कैल्शियम से भरपूर मोरिंगा में सभी जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. एक रिसर्च में ये जानकारी सामने आई है कि मोरिंगा में संतरे की तुलना में सात गुना ज्यादा विटामिन C पाया जाता है और गाजर की तुलना में 10 गुना ज्यादा विटामिन A पाया जाता है. यह सभी तत्व एक स्वस्थ शरीर के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.
डॉक्टर अबरार मुल्तानी कहते हैं कि मोरिंगा में आयरन की भरपूर मात्रा होती है, जिसकी वजह से एनीमिया दूर करने के लिए इसके इस्तेमाल की सलाह दी जाती है. मोरिंगा में खूब सारा प्रोटीन, एमिनो एसिड, फाइबर, विटामिन B, C और E पाया जाता है.
मोरिंगा के जबरदस्त लाभ :
मोरिंगा में फाइटोकेमिकल्स पाया जाता है, जो ब्लड शुगर को कम नियंत्रित करने का काम करता है.
मोरिंगा में एक प्रकार का प्रोटीन जिसका नाम ट्रिप्टोफेन है, मौजूद रहता है, जो दिमाग में याददाश्त वाले उतकों को सक्रिय कर देता है, जिससे दिमाग तेज और याददाश्त मजबूत होती है.
मोरिंगा के पत्ते पेट के लिए बहुत लाभदायक हैं. इससे पाचन क्रियाओं को बहुत आसानी होती है. इसके अलावा कब्ज, सूजन, गैस, गैस्ट्राइटिस और अल्सरेटिव कोलाइटिस से भी राहत मिलती है.
मोरिंगा हड्डियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. चूंकि मोरिंगा के पत्तों में एक एंटी इंफ्लेमेटरी प्रकृति होती है, वे गठिया को रोकने और ऑस्टियोपोरोसिस से लड़ने में मदद करता है. इससे हड्डियां मजबूत रहती हैं.
मोरिंगा के पत्ते खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करके हृदय की रक्षा करते हैं और हृदय प्रणाली का समर्थन करते हैं. यह रक्त वाहिकाओं को सही रखने में मदद करता है, जिससे दिल का दौरा नहीं पड़ता है.