ईश्वर दुबे
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इस्लामाबाद पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एक प्रभावशाली धर्मगुरु एक विशाल रैली के लिए शुक्रवार को यहां पहुंचे। प्रदर्शनकारी इमरान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दक्षिणपंथी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने 27 अक्टूबर को अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के साथ दक्षिणी सिंध प्रांत से आजादी मार्च की शुरुआत की है। ये लोग खान पर 2018 के आम चुनावों में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
इमरान खान पर लगाया चुनाव में धांधली का आरोप
उन्होंने प्रधानमंत्री पर अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन, अक्षमता और कुप्रशासन का आरोप भी लगाया जिससे आम आदमी की मुश्किलें बढ़ गईं। जमीयत नेताओं ने कहा कि रहमान का 31 अक्टूबर को इस्लामाबाद पहुंचने का कार्यक्रम था, लेकिन काफिले में सैकड़ों की संख्या में वाहनों के होने की वजह से रफ्तार धीमी हो गई इससे देर हुई। मौलाना ने सुक्कूर, मुल्तान, लाहौर और गुजरांवाला के रास्ते अपना सफर तय किया और शुक्रवार को तड़के इस्लामाबाद पहुंचे। उन्होंने रास्ते में अपने समर्थकों को बताया, 'वह (प्रधानमंत्री खान) चुनावों में धांधली कर सत्ता में आए हैं। उन्हें स्पष्ट संकेत देखने चाहिए और इस्तीफा देना चाहिए वर्ना हम उन्हें बाहर कर देंगे।'
प्रदर्शन मार्च में पीपीपी के सदस्यों ने भी हिस्सा लिया
आज टीवी को दिए एक साक्षात्कार में रहमान ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो देश में अव्यवस्था फैलेगी। सुरक्षा संस्थाओं के मुताबिक आजादी मार्च में हजारों लोग हिस्सा ले रहे हैं। इस्लामाबाद में यह आंकड़ा और बढ़ गया क्योंकि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) समेत विपक्षी दलों के समर्थक भी सरकार विरोधी इस प्रदर्शन में शामिल हो गए। यह प्रदर्शनकारी पेशावर मोड के निकट एक विशाल मैदान में रुके हुए हैं जहां विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने कार्यकर्ताओं को ठहराने के लिये तंबू लगा रखे हैं।
बिलावल भुट्टो ने खान को बताया कठपुतली PM
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि इमरान खान एक कठपुतली हैं। भुट्टो ने कहा, 'यह देश
अपना सिर एक चयनित प्रधानमंत्री और उसका चयन करने वालों के सामने झुकाने के लिये तैयार नहीं हैं।' रहमान ने एक ट्वीट में सभी प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं को उनके समर्थन के लिए शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि यह रैली अब शुक्रवार की प्रार्थना के बाद शुरू होगी और सभी वरिष्ठ विपक्षी नेता इसमें मौजूद होंगे।
प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
इस बीच पाकिस्तानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये हैं। मुख्य मार्गों को पूरी तरह या आंशिक तौर पर बंद कर दिया गया है। प्रमुख सरकारी इमारतों और राजनयिक क्षेत्र समेत रेड जोन की तरफ प्रदर्शनकारियों को जाने से रोकने के लिये कंटीले तार लगाए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। संवेदनशील जगहों पर सैनिकों को भी तैनात किया गया है।
क्या आप भी उन लड़कियों या महिलाओं में से हैं जो जिम जाने से पहले अपने चेहरे को फ्लॉन्ट करने के मकसद से मेकअप लगाती हैं? अगर हां तो आज ही अपनी इस आदत को बदल दीजिए। आप हल्का-फुल्का कार्डियो एक्सर्साइज कर रही हों या फिर इंटेन्सिव वर्कआउट, मेकअप लगाकर एक्सर्साइज करना आपकी स्किन को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है। किसी भी तरह के वर्कआउट के दौरान चेहरे पर मेकअप लगाए रखना कहीं से भी उचित नहीं है। हम आपको बता रहे हैं उन 4 वजहों के बारे में जिनके कारण आपको एक्सर्साइज करते वक्त मेकअप लगाने से बचना चाहिए...
इंफेक्शन का खतरा
एक्सर्साइज करते वक्त खूब सारा पसीना निकलता है। ऐसे में अगर आप अपने चेहरे पर एक्सर्साइज करते वक्त मेकअप लगाकर रखेंगी तो बैक्टीरिया आने की आशंका बढ़ जाएगी क्योंकि मेकअप बैक्टीरिया को अट्रैक्ट करता है। शरीर से टॉक्सिन्स यानी हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने का बेहतरीन तरीका है एक्सर्साइज और मेकअप लगाकर आप टॉक्सिन्स को बाहर निकलने से रोक रही हैं।
स्किन के पोर्स हो जाएंगे बड़े
क्लॉग्ड पोर्स यानी स्किन के रोमछिद्र जब बंद हो जाते हैं और ऐक्ने की समस्या होती है तो इसका हल तो निकाला जा सकता है लेकिन अगर स्किन के पोर्स यानी रोमछिद्र बड़े हो जाएं तो वह स्किन को पर्मानेंट डैमेज करते हैं। वर्कआउट करते वक्त आपकी स्किन के पोर्स खुलते हैं लेकिन अगर वे खुल न पाएं तो समय के साथ वे बड़े होते जाते हैं जिससे स्किन को स्थायी नुकसान होता है।
स्किन इरिटेशन
अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा सेंसेटिव यानी नाजुक है तब तो आपको एक्सर्साइज के वक्त मेकअप से बिलकुल दूर रहना चाहिए वरना आपको चेहरे पर रेडनेस, असमान रंगत और इरिटेशन यानी खुजली-जलन की दिक्कत हो सकती है।
आदत नहीं बदल सकतीं तो प्रॉडक्ट बदलें
अगर आप जिम में मेकअप लगाकर जाने की अपनी आदत को नहीं बदल सकतीं तो कम से कम अपने मेकअप प्रॉडक्ट्स को जरूर बदल दें। नॉन-कोमेडोजेनिक प्रॉडक्ट्स यूज करें जो आपके स्किन के पोर्स को बंद नहीं करेंगे। हेवी ऑइल बेस्ड मेकअप प्रॉडक्ट्स की जगह उनका हल्का वर्जन यूज करें। फाउंडेशन की जगह टिंटेड क्रीम या सीसी क्रीम यूज करें।
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बालों को शाइनी और हेल्दी लुक देने के लिए हेयर सीरम का उपयोग किया जाता है। लेकिन इसे लगाने का सही तरीका और इसके फायदों के बारे में कम ही लोगों को जानकारी होती है। यहां जानिए, कैसे और कब लगाना चाहिए हेयर सीरम, साथ ही बालों को इससे कौन-कौन से लाभ मिलते हैं...
हेयर लेंथ और वॉल्यूम
बालों में हेयर सीरम का उपयोग करते समय उनकी लंबाई के साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि आपके बाल कितने घने हैं। हेयर सीरम हमेशा धुले हुए बालों में लगाना चाहिए।
कौन ना लगाएं
हेयर सीरम केवल ड्राई बालों में लगाना ही सही होता है। अगर आपके बाल ऑइली हैं तो आपको हेयर सीरम के उपयोग से बचना चाहिए नहीं तो आपके बाल बहुत अधिक चिपचिपे हो सकते हैं।
लगाने का सही तरीका
हेयर सीरम की 6 से 7 ड्राप हाथ में लेकर इसे दोनों हथेलियों पर रगड़ लें। अब हल्के हाथों से बालों की जड़ों से लेकर बालों के अंतिम छोर तक सीरम लगाएं। जरूरी लगे को आप इस विधि को दो से तीन बार तक दोहरा सकते हैं। ध्यान रखें कि सीरम का उपयोग बहुत अधिक करने पर बाल चिपचिपे भी दिख सकते हैं। इसलिए मात्रा का ध्यान रखें।
हेयर सीरम लगाने के फायदे
-इस तरह बालों की जड़ों में सीरम से मसाज करने, पूरे बालों पर सही तरीके से सीरम लगाने पर बालों की ग्रोथ अच्छी होती है, बाल शाइनी और मजबूत बनते हैं।
-हेयर सीरम बालों को सन हीट और पलूशन के प्रभाव से बचाता है।
-हेयर सीरम चुनते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि यह थर्मल प्रोटेक्शन युक्त होना चाहिए।
-कर्ली हेयर अक्सर रूखे होते हैं और इन्हें मैनेज करना भी मुश्किल भरा होता है। ऐसे में हेयर सीरम से कर्ली हेयर को आसानी से मैनेज किया जा सकता है।
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देश के हर भाग में आज श्रद्धा एवं विश्वास के साथ मनाये जाने वाला महान पर्व छठ सूर्योपासना सुख - शांति का प्रतीक बन चुका है। आज सूर्य ही प्रत्यक्ष देवता के रूप में सभी के समने विराजमान है, जो कालजयी एवं उर्जावान है। जिन्हें उपनिषद में ब्रम्हा, विष्णु, व महेश का स्वरुप बताया गया है। जिनकी उपासना से प्राणी हर कष्ट से मुक्त हो जाता है। वेद पुराण में सूर्य उपासना को प्रमुख बताया गया है। इसी तेजवान सूर्य की उपासना सुख शांति पुत्र प्राप्ति के लिये वर्षो से कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष के षष्ठी तिथि को प्रति वर्ष छठ व्रत के रूप में श्रद्धा एवं विश्वास के साथ नदी, तालाब के किनारे देश के हर भाग में किये जाने की परम्परा अनवरत चालू है। उगते सूर्य की पूजा तो प्रायः सभी करते है पर यह विश्व की पहली ऐसी उपासना है जहां डूबते सूर्य की भी पूजा की जाती है। यह व्रत कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष को षष्ठी तिथि में अस्ताचल की ओर जाते सूर्य की उपासना के साथ प्रारम्भ होकर दूसरे दिन सप्तमी तिथि में उदित सूर्य को अर्घ देने के साथ समाप्त होता है। वैसे इस व्रत का शुभारम्भ पंचमी से ही हो जाता है जिसे खरना कहा जाता हैं। इस दिन व्रत करने वाला दिन भर उपवास रहकर शाम को प्रसाद के रुप में खीर लेता है जिसे आंचलिक भाषा में खरना कहा जाता है। दूसरे दिन षष्ठी तिथि को बिना अन्न - जल ग्रहण किये व्रत करने वाला व्रती सरिवार संध्या काल में पूजन सामग्री के साथ पूजा घाट पर पहुंचता है जहां जल में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य की अराधना के साथ गंगा जल व गाय के दूध से अघ्र्र देकर घर वापिस आ जाता है, रात्रि भर उपवास रहने के बाद दूसरे दिन सप्तमी को पुनः सरिवार प्रसाद की डाल लेकर प्रातःकाल पूजा घाट पर पहुंचता है एवं जल में खड़े होकर उगते सूर्य को गाय के दूध से अर्घ देकर पूजा की समाप्ति करता है। तदपरान्त प्रसाद एक दूसरे को देकर एवं स्वयं ग्रहण कर श्रव्द्धा सहित इस महान पर्व को पूरा करता है। इस व्रत को करने वाला व्रती अधिकांशतः महिलाएं होती है । जब कि पुरुष वर्ग भी इस व्रत को करता है पर उसकी संख्या नगण्य होती है । इस व्रत में गुड़ -चीनी से बने मीठे पकवान जिन्हें बिहार की लोकभाषा में ठेकुआ कहा जाता है, के साथ हर प्रकार का मौसमी फल प्रसाद के रुप में चढ़ाया जाता है। गन्ना ( ईख ) का प्रयोग प्रसाद के रुप में इस व्रत में विशेष रुप से किया जाता है। पूजा घाट की शोभा इस गन्ने से और रमणीय एवं शोभनीय बन जाती है। इस व्रत में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। जहां आस्था के विभिन्न रुप के दर्शन होते है। कुछ व्रती घाट पर लेट कर प्रणाम्् की मुद्रा में आते देखे जा सकते है तो कुछ पूजा काल के दौरान पूरे समय तक जल में खड़े होकर सुर्य की अराधना करते देखे जा सकते है। मनोवांछित फल देनेे वाला यह व्रत आज पूर्वाचल से शुरू होकर देश विदेश में काफी लोकप्रिय हो चुका है । जहां जहां पूर्वाचल के लोग पहुंचे है, इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक सदा करते रहे है जिसके वजह से आज केवल यह पूर्वाचल का पर्व न होकर विश्व स्तरीय रुप धारण कर चुका है।
इस व्रत को प्राचीन काल से ही नाग, किन्नर, मानव में करने के प्रमाण मिलते है। संकट काल में द्वापर युग में दौपदी द्वारा इस व्रत को करने एवं पांडवों को अपना राज्य मिलने की भी बात प्रमुख रही है। यह व्रत विहार , झारखंड के हर परिवार में श्रद्धा के साथ प्रति वर्ष किया जाता है। इस प्रांत के निवासी देश, विदेश जहां भी रहते है, श्रद्धा के साथ वही इस व्रत को करते है। इसी करण यह व्रत आज अंतर्राष्टीय रुप ले चुका है। देश का हर कोना कोना आज इस व्रत की गंूज से गंुजयमान तो हो ही रहा है, मारिशश, फीजी, सूरीनामी आदि देश में भी इस छठ पूजा की धूम मची हुई है।
षष्ठी तिथि को अस्थाचल होते हुए सूर्य को प्रथम अघ्र्य इस कामना एवं विश्वास के साथ कि उदय के समय हमारी झोली खुशियों से सूर्य देव की असीम कृृपा से सदा के लिये भर जायेगी , दूसरे दिन उगते सूर्य को अघ्र्य देकर व्रत की समाप्ति होती है। इस अवसर पर घाट का दृृश्य अति मनोरम होता है। ईख से अच्छादित वातावरण हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है।
इस व्रत की महिमा अपरम्पार है। जिस किसी ने भी इस व्रत को विश्वास एवं श्रद्धा के साथ किया है। उसकी हर मनोकामना पूर्ण हुई है। पुत्र, यश , धन प्राप्ति के लिये किये इस व्रत के परिणाम सदैव ही सकरात्मक रहे है। तभी इस व्रत को करने वालों की संख्या में निरंतर वृृद्धि ही होती जा रही है। आज यह व्रत केवल विहार, झारखंड प्रांत का ही नहीं होकर पूरे देश का हो चला है। जो भी इस व्रत की अपार महिमा से परिचित हुआ है, इस व्रत को करते मिलेगा। इस व्रत को हर जाति संप्रदाय के लोग करते मिलेगें। इसी कारण यह व्रत आपसी भाईचारा एव्र सद््भावना का प्रतीक बन चुका है।
इस व्रत को बिहार प्रदेश के चर्चित राजनेताओं के साथ देश के समस्त भागों में इस आस्था से जुड़े लोगों ने श्रद्धा के साथ खुशहाली , अमन चैन के लिये प्रति वर्ष करते आ रहे है जिनमें हर वर्ष व्रत करने वालों की सेख्या में वृृद्धि ही होती जा रही है। इस व्रत की महिमा के प्रचार प्रसार में दृृश्य मीडिया के साथ - साथ भोजपुरी कलाकारों का योगदान काफी महŸवपूर्ण रहा है जिसके कारण आज बिहार संस्कृृति के अलावे देश की अन्य संस्कृृति से जृुड़े लोग भी श्रद्धा के साथ कर रहे है। विश्व का एक मात्र यहीं व्रत है जहां डूबते एवं उगते सूर्य की अराधना की जाती है।
आस्था एवं विश्वास से जुड़ा चर्चित एवं प्रसिद्ध धार्मिक पूजा छठ व्रत का शुभारम्भ श्रद्धा के साथ इस वर्ष1 नव. खरना के साथ पा्ररम्भ होकर 2 नवम्बर की संध्याकालीन पूजन एवं 3 नवम्बर को प्रातःकालीन पूजन के उपरान्त समाप्त हो जायेगा।
सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ बैगा युवाओं के लिए रोजगार के द्वारा भी खुले
वनमंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने चयनित बैगा युवक-युवतियों को शाला संगवारी प्रमाण पत्र वितरण किया
चयनित बैगा युवक-युवतियों ने छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया
कवर्धा, 31 अक्टूबर 2019

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के कबीरधाम जिले में निवासरत बैगा समाज (अति पिछड़ी जनजाति) के शिक्षित युवक-युवतियों को दीपावली पर्व पर बड़ी सौगात देते हुए उनके लिए रोजगार का द्वार खोल दिया है। छत्तीसगढ़ सरकार की नई नीति से कबीरधाम जिले के 57 बैगा युवक-युवितयों को रोजगार देते हुए शाला संगवारी के पद पर चयनित करते हुए सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की अनुमति दी है, इससे युवक-युवतियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल गया है। प्रदेश के वन, परिवहन, आवास एवं पर्यावरण मंत्री तथा कवर्धा विधायक श्री मोहम्मद अकबर ने आज जिला पंचायत में 57 शाला संगवारी के रूप में चयनित बैगा युवक-युवतियों को “शाला संगवारी“ प्रमाण पत्र प्रदान किया। चयनित शाला संगवरी में 50 प्राथमिक स्कूल के लिए और सात पूर्व माध्यमिक विद्यालय स्कूल के लिए शामिल है। इस अवसर पर पंडरिया विधायक श्रीमती ममता चंद्राकर, कलेक्टर श्री अवनीश कुमार शरण, जिला पंचायत के सीईओ श्री कुंदन कुमार, श्री रामकृष्ण साहू,श्री कन्हैया अग्रवाल, श्री ऋषि शर्मा, श्री प्रमोद लूनिया श्री कलीम खान एवं चयनित बैगा परिवार के पालकगण भी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में कबीरधाम पहला जिला बन गया है, जहां छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जिला खनिज संस्थान न्यास नियम 2015 में संशोधन करने के बाद नई नीति के तहत स्थानीय युवाओं को रोजगार मुहैया कराई जा रही है। जिला खनिज संसाधन न्यास के तहत ही कबीरधाम जिले में प्रदेश में पहली बार ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करते हुए 80 एएनएम की पदस्थापना की गई है। इसके अलावा जिला अस्पताल में चार अलग-अलग विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती की गई है। कबीरधाम जिले में आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली युवक-युवतियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले जेईई और नीट प्रतियोगिता की तैयारी के लिए आवासीय कोचिंग संचालित की जा रही है। वन मंत्री तथा कवर्धा विधायक श्री मोहम्मद अकबर और जिले के प्रभारी मंत्री श्रीमती अनिला भेड़िया की अध्यक्षता में आयोजित जिला खनिज न्यास संस्थान की बैठक में कबीरधाम जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बनाने और स्थानीय स्तर पर वनांचल में निवासरत अति पिछड़ी जनजाति में शिक्षित युवक-युवतियों को रोजगार उपलब्ध करने का फैसला किया गया था। इसके अलावा जिले के वनांचल क्षेत्र में संचालित स्वास्थ्य केन्द्र में एएनएम की भर्ती और जिला चिकित्सालय में चार अलग-अलग विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती का निर्णय किया गया था। कबीरधाम जिला प्रशासन द्वारा राज्य सरकार की डीएमएफ की संशोधित नए फैसले के तहत सभी निर्णय को मूर्त रूप दिया गया है।
छत्तीसगढ़ में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रीमंडल की बैठक में छत्तीसगढ़ खनिज संस्थान न्यास नियम 2015 में संशोधन की मंजूरी दी गई है। नए संशोधन के बाद अब डीएमएफ की राशि से शासकीय अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन और उन्हें प्रभावी बनाने के लिए संसाधनों की उपलब्धता बनाने स्कूलों के शिक्षकों की कमी दूर करने तथा खनन और संबंध गतिविधियों में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष प्रभावित इलाकों के परिवार के सदस्यों को नर्सिग, चिकित्सा शिक्षा, इंजीनियरिंग, निधि प्रबंधन, उच्च शिक्षा, व्यवसायिक, तकनीकी शिक्षा, शासकीय संस्थाओं, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक शुल्क और छात्रावास शुल्क में भुगतान के साथ ही सभी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग और आवासीय प्रशिक्षण की समूचित व्यवस्था करने का फैसला लिया गया है। जिले में राज्य सरकार की इस फैसले का सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है।
चयनित शाला संगवारी
शासकीय प्राथमिक शाला राजाढार में सुनउ सिंह को, मादीभाठा में पलटू सिंह, को, सजनखार में पंचवती मरावी, बड़ौदाखुर्द में जगनी बैगा, छपरापारा में सीमा, रमपुरा में संतोषी मेरावी, कुण्डापानी में ममता, सुखझर में श्रीमती गंगोत्री, खुजुर सिंह को बनगौरा, गुडली में सुखदेवी, सेजहडीह में बुधराम धुर्वे, जामपानी में हिरदु सिंह बैगा, कुल्हीडोरी में रामसिंह बैगा, माचापानी में धरम सिंह, पडरीपानी में रामाधीन, आगरपानी में मनबोधी, खम्हरिया में जनिया बैगा, मुकाम में शत्रुहन, काशीपानी में करन सिंह, बदनाचुवा में दुकलू राम, भड़गा में श्रीमती पन्टोरिन मेरावी, शंभुपीपर में रामप्रसाद, बाहपानी में जयसिंह बैगा, आमापानी में सम्मल सिंह, छिन्दीडीह में सोनराज, तेलियापानी धोबे में चौनसिंह, आश्रम पंडरीपानी में तिहारी, चकमकटोला में अमरित लाल, केसदा में राजेश कुमार बैगा, मुडवाही में ईश्वर सिंह, सरेण्डा में तेजेश्वरी, बांसाटोला में श्रीमती बिरसो बाई, कारीमाटी में रामकुमार, ठेगाटोला में मान बैगा, आश्रम चेन्दरादादर में रतन सिंह धुर्वे, खिचराही में दिनेश, बोदलपानी में जगमोहन धुर्वे, जोकपानी में गायत्री पिंडुलिया, बोदई में सुखबती, कबरीपथरा में राजकुमार और शासकीय प्राथमिक शाला सरहापथरा में संतोष कुमार को शाला संगवारी के लिए नियत मानेदय पर रखा गया है। इसी प्रकार शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला झलला में संजु कुमार, बोदा 47 में टेकवंतीन धुर्वे, छुही में दिलीप कुमार, सेंन्दूरखार में सरोज, लरबक्की में केशव प्रसाद और शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला शंभुपीपर में सोना बाई को शाला संगवारी के लिए नियत मानेदय पर रखा गया है।
देशभर की कई बड़ी हस्तियां आतंकियों के निशाने पर हैं। इसका खुलासा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एक खुफिया दस्तावेज में हुआ है। आतंकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक सहित भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली को निशाना बना सकते हैं।
खुफिया दस्तावेज के अनुसार ऑल इंडिया लश्कर-ए-तैयबा नाम का आतंकी संगठन देश में बड़े आतंकी हमले की साजिश रच रहा है। इस संगठन ने एक हिटलिस्ट तैयार की है जिसे एनआईए को भेजा गया है। इस सूची में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, सरसंघ संचालक मोहन भागवत, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, भाजपा महासचिव राम माधव, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के नाम भी शामिल हैं।
एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार इस खुलासे से साफ हो गया है कि पाकिस्तान एक और नापाक चाल चल रहा है। जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधान निरस्त करने के बाद से पाकिस्तान काफी बौखला गया है। वह लगातार इसी कोशिश में हैं कि किस तरह से वह भारत पर आतंकी हमले करे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की पहले ही काफी किरकिरी हो चुकी है।
ऐसे में वह नहीं चाहता कि किसी आतंकी संगठन के साथ उसका नाम जुड़े। यही वजह है कि उसने अपने यहां से आतंकियों को भेजकर संगठन को नया नाम दिया है। जिससे कि यदि ऑल इंडिया लश्कर-ए-तैयबा भारत में आतंकी साजिश को अंजाम दे तो वह इससे अपना पल्ला झाड़कर कह सके कि इन्हें भारत में स्थित आतंकी संगठन ने अंजां दिया है और उसका इससे कोई लेना-देना नहीं है।
दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। लोग कई दिनों पहले से ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ कर देते हैं, और सब अपने घरों, प्रतिष्ठानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। दिवाली के आते ही घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग अपने घरों और दुकानों को साफ सुथरा कर सजाते हैं।
लौकी की सब्जी चाहे आपको खाने में पसंद नहीं हो, लेकिन इसके छिलके में सेहत और सौन्दर्य समस्याओं से राहत देने वाले गुण मौजूद होते हैं, उन्हें जानने के बाद जब भी आप बाजार जाएंगे, लौकी जरूर खरीद कर लाएंगे। आइए, जानते हैं लौकी के छिलके में कौन से 3 औषधीय गुण होते है –
सनबर्न या टैनिंग - आपको यह जानकर हैरानी होगी, लेकिन लौकी के छिलके का प्रयोग धूप से झुलसी एवं काली हो चुकी त्वचा के लिए बेहद फायदमंद साबित हो सकता है। इसके लिए बस इन छिलकों का पेस्ट बनाना है, और त्वचा पर लगाकर रखना है और फिर धो लेना है।
गर्माहट व जलन - अधिक गर्मी के कारण त्वचा एवं पैर के तलवों में जलन होने लगती है, जिससे बचने के लिए लौकी के छिलकों का प्रयोग किया जा सकता है। इन छिलकों को त्वचा पर रगडऩे से राहत मिलती है।
बवासीर - बवासीर या पाइल्स की समस्या होने पर भी लौकी के छिलके फायदेमंद है। इन छिलकों को सुखाकर पाउडर बना लें और इसे रोजाना ठंडे पानी के साथ दिन में दो बार सेवन करें। जल्द राहत मिलेगी।
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हर महिला को पसंद है कि उसके रसोई के बर्तन हमेशा चमकते रहें, लेकिन अगर बर्तन जल जाता है तो, उसे साफ करने में दिक्कत आती हैं। आज हम आपको बर्तन को साफ करने के तरीके बताएंगें। इससे आपको अपने बर्तन चमकदार बनाने में आसानी होगी।
प्याज का प्रयोग-एल्यूमीनियम के जले हुए बर्तनों को साफ करने के लिए उसमें एक प्याज डालकर अच्छी तरह उबाल लें। फिर बर्तन धोने के पाउडर से साफ करें।
नींबू प्लास्टिक कंटेनर को बहुत ही अच्छे से साफ करने और उसमें से बदबू दूर करने के लिये फ्रेश नींबू का प्रयोग करें। नींबू के छिलके से कंटेनर को रगड कर साफ करें। इससे दाग हल्के और धीरे-धीरे साफ हो जाता है।
बेकिंग सोडा बरतन में 10-15 मिनट के लिए बेकिंग सोडा भिगो कर रखें दें। फिर सोडे को गोलाई में रगडे। इससे आपका एकदम साफ हो जाएगा।
बर्तनों के दाग-धब्बे साफ करने के लिए आप दही का इस्तेमाल अच्छा होता है।
अगर बर्तनों पर कडा और जिद्दी दाग है और आप के पास वाइन है तो उससे बर्तन को आसानी से साफ किया जा सकता है।
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दीवालीकी बात हो और तोहफों की न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। प्रॉब्लम बस ये होती है कि कई बार कन्फ्यूजन हो जाता है कि किसके लिए कौन सा गिफ्ट लें। अगर आप गिफ्ट लेने जा रहे हैं तो जिसके लिए लेने जा रहे हैं, उनकी उम्र और जरूरत के मुताबिक गिफ्ट ले सकते हैं। ताकि वह उनके काम भी आ जाए।
मिठाईयों संग दें ड्राई फ्रूट्स बॉक्स
अगर आप परिवार के बड़े-बुजुर्गों के लिए गिफ्ट लेने जा रहे हैं तो इस बार कपड़ों से अलग तोहफा दीजिए। आप उनके सेहत का ख्याल रखते हुए मिठाई के साथ ड्राई फ्रूट्स बॉक्स दे सकते हैं।
कांजीवरम संग लें बैंगल सेट
अगर आप मां के लिए गिफ्ट लेने जा रहे हैं तो उनके लिए आप लाइट वेट की कांजीवरम साड़ी ले सकती हैं। इसके अलावा प्यारा सा बैंगल सेट भी ले सकती हैं। इसके साथ ही पापा के लिए मां की साड़ी से मिलते- जुलते कलर का एथनिक कुर्ता भी खरीद सकती हैं।
उनकी पसंद का नेकलेस सेट
वाइफ के लिए तोहफा लेना है तो आप उन्हें नेकलेस सेट या फिर मॉर्डन लुक की डिजाइनर साड़ी गिफ्ट कर सकते हैं।
साथ ही कुछ डिजाइनर अरोमा कैंडल्स और आपके बेडरूम के लिए डेकोरेटिव आइटम्स की भी खरीदारी कर सकते हैं। यह आपके और उनके प्यार को और भी ज्यादा बढ़ाएगा।
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बीन्स एक ऐसी सब्जी है जिसका प्रयोग लगभग हर तरह के भोजन में किया जाता है। यह सेहत से भरा एक पौष्टिक विकल्प भी है। सलाद से लेकर, भोजन तक में प्रयोग की जाने वाली, प्रोटीन से भरपूर फ्रेंच बीन्स, किस तरह आपकी सेहत को और भी बेहतर बना सकती है, जानिए –
बीन्स की हरी पत्तियों को भी सब्जी के रूप में भोजन में शामिल किया जाता है तथा सूखी हुई फलियों को राजमा या लोबिया के रूप में खाया जाता है।
फ्रेंच बीन्स में मुख्यत: पानी, प्रोटीन, कुछ मात्रा में वसा तथा कैल्सियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन, थायमीन, राइबोफ्लेविन, नियासीन, विटामिन सी आदि तरह के मिनरल और विटामिन मौजूद होते हैं।
इनके अलावा बीन्स विटामिन बी2 का भी प्रमुख स्त्रोत है। प्रति सौ ग्राम फ्रेंच बीन्स से तकरीबन 26 कैलोरी मिलती है। राजमा में यही सब अधिक मात्रा में पाया जाता है इसलिए प्रति सौ ग्राम राजमा से 347 कैलोरी मिलती है।
बीन्स, घुलनशील फाईबर का अच्छा स्रोत है, जिसके कारण यह हृदय रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि प्रतिदिन एक कप पकी हुई बीन्स का प्रयोग करने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है और इससे हृदयाघात की संभावना भी 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
बीन्स में सोडियम की मात्रा कम तथा पोटेशियम, कैल्शियम व मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है जो रक्तचाप को बढऩे से रोकता है और हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है।
बीन्स का ग्लाइसेमिक इन्डेक्स कम होता है जिससे अन्य भोज्य पदार्थों की अपेक्षा बीन्स खाने पर रक्त में शर्करा का स्तर अधिक नहीं बढ़ता । इसमें मौजूद फाइबर रक्त में शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं। यही कारण है, कि मधुमेह के रोगियों को बीन्स खाने की सलाह देते है।
बीन्स का रस शरीर में इन्सुलिन के उत्पादन को बढ़ावा देता है। इस वजह से मधुमेह के मरीजों के लिए बीन्स खाना बहुत लाभदायक माना जाता है।
फ्रेंच बीन्स किडनी से संबंधित बीमारियों में भी काफी फायदेमंद है। किडनी में पथरी की समस्या होने पर, आप लगभग 60 ग्राम बीन्स की पत्तियों को चार लीटर पानी में करीब चार घंटे तक उबाल लें। फिर इसके पानी को कपड़े से छानकर करीब आठ घंटे तक ठंडा होने के लिए रख दें। अब इसे फिर से छान लें पर ध्यान रखें कि इस बार इस पानी को बिना हिलाए छानना है। इसे एक सप्ताह तक हर दो घंटे में
पीने से अत्यधिक लाभ होता है।
होम्योपैथिक दवाओं में भी बीन्स बहुत काम आती है। ताजी बीन्स का उपयोग रूमेटिक, आर्थ्राइटिस तथा मूत्र संबंधी तकलीफ के लिए दवाई बनाने के लिए किया जाता है।
बीन्स में एन्टीआक्सीडेंट की मात्रा भी काफी होती है। एन्टीऑक्सीडेंट शरीर में कोशिकाओं की मरम्मत के साथ् ही त्वचा व दिमाग के लिए भी अच्छा माना जाता है। इसलिए इसका सेवन करने से कैंसर की संभावना कम हो जाती है। इसमें मौजूद फाईटोएस्ट्रोजन स्तन कैंसर के खतरे को भी कम हो सकता है।
इन सभी के अलावा बीन्स कैल्शियम का एक अच्छा स्त्रोत हैं, जो हड्डियों तथा दांतों दोनों के विकास में महत्वपूर्ण होता है।
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रायपुर/देवभोग | स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि गरियाबंद के सुपेबेड़ा में लोगों की किडनी फेल होने के चार प्रमुख कारण सामने आए हैं। इनमें जेनेटिक बीमारी के साथ मलेरिया, डायबिटीज आैर गंदा पाना सबसे प्रमुख है। उन्होंने कहा कि क्रॉनिक किडनी डिसीज अननोन (सीकेडीयू) भी लोगों की मौत का कारण बन रहे हैं। इससे निपटने सरकार प्रयास कर रही है। पत्रकारों से बातचीत में सिंहदेव ने कहा कि सुपेबेड़ा के पानी की जांच के बाद फ्लोराइड व लेड जैसे दूसरे तत्व भी पाए गए हैं।
लोगों में यह बीमारी धीरे-धीरे फैलती है। शुरुआत में इसका पता नहीं चल पाने के कारण ही लोग गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम आैर एम्स के डॉक्टर लगातार वहां की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
इसके अलावा वहां पर पीने के पानी के लिए पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी। सिंहदेव ने कहा कि वहां लगभग 200 से 250 लोग पीड़ित हैं, हम वहां के प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त ध्यान दे रहे हैं। दो मोबाइल यूनिट वहां भेजे गए हैं। तेल नदी पर ब्रिज की स्वीकृति मिल गई है, फिल्टर प्लांट लगाकर शुद्ध पेयजल की सप्लाई की जाएगी। उन्होंने बीमारी के लिए आेडिशा के रास्ते आने वाला शराब को भी जिम्मेदार माना है। उनका कहना है कि वहां से आने वाले शराब में यूरिया की मात्रा ज्यादा होती है।
आज सुपेबेड़ा में राज्यपाल अनुसुइया उइके की चौपाल : राज्यपाल अनुसुइया उइके और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव मंगलवार को सुपेबेड़ा पहुंचेंगे। पीड़ितों से बातचीत के बाद वे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से जानकारी भी लेंगी। इस दौरान एम्स डॉक्टरों की एक टीम भी रहेगी।
प्याज का इस्तेमाल करने से पहले अगर आप उसके छिलकों को निकाल कर फेंक देते हैं, तो प्याज के छिलकों में छिपे सेहत और सौन्दर्य के ये 5 राज जानने के बाद आप उन्हें फेंकना भूल जाएंगे -
बैड कोलेस्ट्राल कम करने में मदद करता है -
इसके लिए आपको प्याज के छिलकों को पूरी रात पानी में भिगोकर रखना है और सुबह इस पानी को पीना है। इसका स्वाद आपको जरूर अच्छा नहीं लगेगा, इसलिए आप चाहें तो इसमें शहद या चीनी मिलाकर भी पी सकते हैं। रोजाना इसके सेवन से आपको कुछ दिनों में फर्क जरूर नजर आएगा है।
त्वचा की एलर्जी से राहत दिलाएगा -
यदि आपको त्वचा में किसी चीज से एलर्जी है तो आप ऊपर बताई गई विधि से ही प्याज के छिलकों का पानी बनाएं (यानी कि रातभर प्याज के छिलकों को पानी में भिगोकर रखें और सुबह प्याज के छिलकों का पानी तैयार है) अब इस पानी से रोजाना अपनी त्वचा साफ करें।
बालों को बनाएो खूबसूरत -
आप बालों को चमकदार बनाने के लिए कई तरह के कंडीशनर इस्तेमाल करती हैं, तो अब से आप प्याज के छिलकों का पानी भी इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे आपके बाल मुलायम और चमकदार हो जाएंगे।
चेहरे के दाग-धब्बे हटाएं -
चेहरे के दाग-धब्बे से निजात पाने के लिए आप प्याज के रसयुक्त छिलके का इस्तेमाल करें। इसके लिए आप प्याज के छिलके में हल्दी मिलाकर दाग-धब्बे वाली जगह पर लगाएं। जल्द ही आपको फर्क दिखेगा।
खराब गले को ठीक करें -
यदि कभी आपका गला खराब हो जाए तो आप प्याज के छिलकों को गर्म पानी में उबालें फिर इस पानी को पी लें। गले से संबंधित परेशानियों में प्याज की यह अनोखी चाय बेहद लाभकारी होगी।
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