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नवरात्रि खत्म होते ही दिवाली की तैयारियां शुरू हो गई है। इस बार दीपावली 27 अक्टूबर को है। दीवाली पर लगभग सभी लोग अपने घरों को सजाते है। दिवाली से सात दिन पहले ही घरों को सजाने के लिए तैयारियां शुरू हो जाती है। ऐसे में आज हम आपको कुछ आसान टिप्स देने जा रहे हैं जिससे आप कुछ ही समय में अपने घर को नया लुक दे सकते हैं। इसके लिए आप घर में जो भी गैर जरूरी चीजें जमा हैं, उन्हें हटा दें क्योंकि वह बेवजह घर में स्पेस घेरे रहती हैं। आइए उन टिप्स के बारे में जानते है।
फूल और फूल-मालाएं : अपने घर को ताजे-फूलों और फूल मालाओं से सजाएं और आप पारंपरिक लटकन भी अपने घर के लिए ला सकते हैं। क्योंकि ये कांच, कड़े, मोतियों और सीप्स से बनी हो सकती हैं। इसी के साथ आप अपनी पसंद के डिजाइन ले सकते हैं और आप चाहे तो राजस्थानी और गुजराती लटकने भी लगा सकते हैं क्योंकि ये कहीं अधिक कलरफुल होती हैं। इसी के साथ घर के लिए बंदरवाल जरूर खरीदें या आम के पत्तों से बनाएं।
पेंटिंग, गुलदस्ते लाइट
पेंटिंग, गुलदस्ते लाइट : आजकल घरों की सजावट के लिए पेटिंग सबसे तरीका है। आप घर पर भी पेटिंग बना सकते है। अगर आप घर के कामकाजों में व्यस्त रहते है तो आप बाजार से भी पेटिंग ला सकते है। इसके अलावा आप गुलदस्ते लगा सकते है। अगर आपके घर में गमलों में पौधें लग रहे है तो आप उन पर लाइट या कलर पेंट करके घर को सजा सकते है।
वहीं दिवाली पर घर में सबसे जरूरी है। लाइट डेकोरेशन जरूरी है। ऐसे में आप बाजार से या घर में लाइट की लडियां बना सकते है। घर के मेन गेट पर आप गुलदस्तें रख सकती हैं। इसी के साथ इन्हें दरवाजे के दोनों तरफ रखें। आपका घर काफी सुंदर नजर आएगा।
रंगोली: कहते हैं दिवाली में रंगोली बनाना बहुत शुभ होता है। ऐसे में घर में स्वागत करने और उन्हें विराजमान करने के लिए आप रंगोली बना सकती हैं। वैसे इन दिनों मार्केट में बने-बनाएं रंगोली स्टीकर मिलते हैं लेकिन रंगोली कलर्स और लकड़ी के बुरादे या मोटे अनाज से बने तो पवित्र मानी जाती है।
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पैरों पर जमी मृत त्वचा को हटाकर उन्हें साफ-सुथरा और खूबसूरत बनाने के लिए महिलाएं पेडिक्योर
कराती है। पिछले काफी समय से फिश पेडिक्योर
काफी चलन में है। फिश पेडिक्योर
की प्रक्रिया में पैरों को मछलियों से भरे एक टब में डाला जाता है, टब में मौजूद छोटी-छोटी मछलियां पैरों से मृत त्वचा को अलग कर उसे खा लेती है और आपके पैरों को साफ-सुथरा बना देती है।
अगर आप भी पहली बार फिश पेडिक्योर
को आजमाने जा रही हैं तो पहले जान लीजिए इसके फायदे और नुकसान -
1 इसे करवाने से पैरों की त्वचा मुलायम बनती है और पैरों की थकान में आराम मिलता है।
2 फिश पेडिक्योर
एक्जिमा और सोरायसिस जैसी बीमारियों में फायदा करता है।
3 इसे करवाना आपको ज्यादा मंहगा नहीं पड़ता।
4 इस पेडिक्योर
के लिए यूज की जाने वाली गारा रूफा नाम की मछलियां मृत त्वचा को साफ करने के अलावा रक्तप्रवाह को भी बढ़ाती है।
5 इसे कराने के बाद पैर सुंदर और ग्लोइंग बनाते हैं।
अब जानते हैं, अगर सावधानी नहीं बरती तो फिश पेडिक्योर
के क्या नुकसान हो सकते हैं -
6 फिश पेडिक्योर
तभी सुरक्षित होते हैं जब उसे करवाते समय साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा गया हो।
7 कई बार पार्लर और स्पा सेंटर में फिश पेडिक्योरके पॉट के पानी को कई दिनों तक नहीं बदला जाता। जिसकी वजह से टैंक में उपस्थित माइक्रोबैक्टीरिया के कारण कई तरह के स्किन इंफेक्शन हो सकते है।
8 अगर आपके पैरों में चोट लगी हो तो फिश पेडिक्योर
न करवाएं। ऐसा करवाने से चोट से खून बह सकता है, जो टब में जाकर इंफेक्शन का कारण बनता है।
9 अगर आप पहले से ही किसी शारीरिक समस्या या चोट से जूझ रहे हैं तब भी फिश पेडिक्योर
करवाने से बचें।
10 जिन लोगों कि इम्युनिटी कमजोर है या जो लोग शुगर के मरीज हैं उन्हें भी फिश पेडिक्योर
करवाने से बचना चाहिए।
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रंग-बिरंगे सुंदर फूल न केवल देखने में अच्छे लगते हैं बल्कि अपनी खुशबू से हमारे मन को भी महका देते हैं। फूलों का इस्तेमाल केवल सजने-संवरने और घर की शोभा बढ़ाने के लिए ही नहीं होता, बल्कि आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि इनके पास हमारे शरीर की कई बीमारियों को ठीक करने का इलाज है।
फूलों की हजारों प्रजातियों में से कई ऐसी हैं, जिनमें घाव को भरने से लेकर त्वचा संबंधी बीमारियों को दूर करने का भी उपचार है। फूलों की अलग-अलग प्रजातियां अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में सहायक होती हैं और इसलिए इनका उपयोग करने के पहले विशेषज्ञ का परामर्श आवश्यक होता है।
गुलाब का फूल -
फूलों के राजा गुलाब का भी चिकित्सा के क्षेत्र में अहम योगदान है। आयुर्वेद में गुलाब का उपयोग स्कर्वी के उपचार और गुर्दे संबंधी समस्याओं में होता है। फूलों से उपचार के क्षेत्र में शोध कर रहे आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. नितिन शर्मा ने बताया कि गुलाब का फूल शरीर में विटामिन सी की कमी को दूर करने में सहायक होता है।
गुलाब की कलियां विटामिन सी से समृद्ध होती हैं। इन कलियों को स्कर्वी दूर करने के एक प्रमुख तत्व के तौर पर शामिल किया जाता है। गुलाब की कलियों का अर्क गुर्दे की बीमारियों की दवाइयां बनाने में भी इस्तेमाल होता है। यह मूत्र संबंधी विकारों को दूर करती हैं। इसके अलावा गुलाब की पंखुडिय़ां गर्मी से आए बुखार को दूर करने, शरीर को ठंडा करने और त्वचा की झाइयों को दूर करने में उपयोग की जाती हैं।
गेंदे के फूल -
जिनके घरों में बच्चे हों, उन्हें अपने घरों में गेंदे का फूल जरूर लगाना चाहिए। गेंदे के फूल को घाव भरने के लिए सर्वश्रेष्ठ मरहम माना जाता है। पुराने समय में बच्चों को चोट लगने पर गेंदे के फूलों को पीस कर घाव के स्थान पर लगा दिया जाता था।
गेंदे के फूल के साथ तुलसी के पत्ते -
गेंदे के फूलों को तुलसी के पत्तों के साथ पीस कर उसका मलहम बना कर भी घाव के उपर रखा जा सकता है। इसके अलावा गेंदे की एक विशेष प्रजाति से त्वचा संबंधी रोगों का भी उपचार किया जा सकता है। इन दिनों लोकप्रिय अरोमाथेरेपी में भी एग्जिमा, जलन और त्वचा के दाग-धब्बों के उपचार संबंधी दवाइयों में गेंदा मुख्य घटक होता है।
कमल का फूल -
कीचड़ में खिलने वाला कमल भी डायरिया को दूर करने और गर्मी के कारण झुलसी त्वचा को निखारने में मददगार साबित होता है।
डायरिया के उपचार के लिए कमल के बीजों को गर्म पानी में डाल कर उसमें काला नमक मिलाया जाता है। अब इसमें चाय की पत्ती डालकर उबाल कर पीने से डायरिया का उपचार किया जा सकता है।कमल की पत्तियों को पीस कर उसे झुलसी त्वचा पर लगाने से त्वचा की गर्मी दूर हो जाती है और झुलसने का निशान भी चला जाता है। शरीर से अतिरिक्त वसा कम करने की दवाइयों में भी कमल की पत्तियों का उपयोग होता है।
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आमतौर पर बढ़ती उम्र का असर सबसे पहले चेहरे की त्वचा से ही झलकता है, जो आपकी खूबसूरती को कम करता है। अगर अपने चेहरे की सुंदरता को बरकरार रखना चाहती हैं, तो चेहरे की ढीली पड़ी त्वचा में कसाव लाने के लिए आजमाएं ये 5 शानदार टिप्स -
एस्ट्रिजेंट का प्रयोग - स्किन टोनर की तरह ही एस्ट्रिजेंट भी त्वचा के लिए फायदेमंद है। बाजार में यह आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है। दरअसल एस्ट्रिजेंट का हर दिन प्रयोग आपकी त्वचा के तंतुओं को बांधे रखने का कार्य करते हैं और त्वचा में कसाव बना रहता है।
पानी - पानी पीने का संबंध केवल सेहत ही नहीं बल्कि स्वस्थ त्वचा से भी है। दिनभर में 10 से 12 गिलास पानी पीना त्वचा को ढीला होने से बचाता है और कसाव बनाए रखने में मदद करता है।
व्यायाम - त्वचा में कसाव लाने के लिए चेहरे के व्यायाम पर ध्यान दें। इससे त्वचा की वे कोशिकाएं भी सक्रिय होंगे जिनका उपयोग काफी समय से नहीं हुआ हो। चेहरे का व्यायाम करने से आपके गाल, आंखो के आसपास, होंठ, नेक और माथे के पास की त्वचा में कसाव आने लगेगा।
कुकंबर - यह ढीली होती त्वचा के लिए बेहतरीन उपाय है। इसके लिए कुकंबर को पीसकर उसका रस निकालें और अपने चेहरे पर लगाएं। जब यह परत के रूप में रूख जाए तो चेहरा धो लें। आंखों के आसपास की त्वचा पर इसे लगाना, झुर्रियों, काले घेरों और सूजन को कम करने के लिए भी फायदेमंद है।
मसाज - चेहरे की मसाज करना, त्वचा में कसाव लाने के साथ-साथ प्राकृतिेक चमक भी देता है। आप चाहें तो एलोवेरा का गूदा निकालकर इससे चेहरे की मसाज कर सकते हैं। यह त्वचा में कसाव लाने में मददगार होता है। इसके अलावा प्राकृतिक तेलों से भी चेहरे की मसाज करना फायदेमंद साबित होगा।
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कई लोगों की आदत होती है कि यूरिन आने पर, बहुत देर तक उसे रोके रखते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो जान लीजिए कि इससे आपको क्या नुकसान हो सकते हैं
ऐसा करने से यूरिनरी ब्लेडर, किडनी या पेशाब की नली में जलन और सूजन की समस्या हो सकती है। यह किडनी के लिए बेहद हानिकारक है।
इससे किडनी की कार्य प्रणाली में बाधा होती है और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। यह किडनी में पथरी यानि किडनी स्टोन या किडनी संक्रमण का कारण बन सकता है।
शरीर की अशुद्धियों को यूरिन के माध्यम से बाहर निकाला जाता है। अगर सही समय पर यूरीन त्याग न हो तो शरीर में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है, जो सबसे ज्यादा किडनी को प्रभावित करता है।
देर तक यूरिन रोकने से यूरिनरी ट्रेक्ट इंफेक्शन या मूत्र मार्ग संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है, जो आपकी सेहत को प्रभावित करता है।
ऐसा करने से ब्लेडर में सूजन आने का खतरा बढ़ जाता है और डिस्चार्ज के दौरान तेज दर्द होने की समस्या हो सकती है।
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अक्टूबर, शनिवार को स्कंद षष्ठी मनाई जा रही है। हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी मनाई जाती है।
यह षष्ठी अति महत्वपूर्ण मानी गई है। यह तिथि भगवान शिव जी के बड़े पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। माना गया है कि भगवान कार्तिकेय का पूजन मनोकामना सिद्धि को पूर्ण करने में सहायक है। इस दिन भगवान कार्तिकेय के पूजन से रोग, राग, दुःख और दरिद्रता का निवारण होता है।
पौराणिक शास्त्रों के अनुसार स्कंद षष्ठी के दिन स्वामी कार्तिकेय ने तारकासुर नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए इस दिन भगवान कार्तिकेय के पूजन से जीवन में उच्च योग के लक्षणों की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि स्कंद षष्ठी का व्रत करने से काम, क्रोध, मद, मोह, अहंकार से मुक्ति मिलती है और सन्मार्ग की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु ने माया मोह में पड़े नारद जी का इसी दिन उद्धार करते हुए लोभ से मुक्ति दिलाई थी, ऐसा पुराणों में वर्णन है।
इस दिन कार्तिकेय के साथ भगवान विष्णु के पूजन-अर्चन का विशेष महत्व है। इस दिन ब्राह्मण भोज के साथ स्नान के बाद कंबल, गरम कपड़े दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
यह व्रत करने से नि:संतान लोगों को संतान की प्राप्ति होती है साथ ही सफलता, सुख-समृद्धि, वैभव प्राप्त होता है। दरिद्रता मिटकर दु:ख का निवारण होता है, तथा जीवन में धन-ऐश्वर्य मिलता है। इतना ही नहीं इस व्रत को करने से क्रोध, लोभ, अहंकार, काम जैसी बुराइयां भी खत्म हो जाती हैं और मनुष्य अच्छा और सुखी जीवनव्यतीत करता है।

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) पिछले कुछ दिनों से हॉस्पिटल में एडमिट थे. सूत्रों के अनुसार मंगलवार से वह मुंबई के नानावती अस्पताल (Nanavati hospital) में भर्ती थे. खबरों की मानें तो उनके लीवर में तकलीफ बताई जी रही थी. हालांकि जब हमने अस्पताल प्रशासन से शुक्रवार को बिग बी की हेल्थ अपडेट के लिए बात की तो उन्होंने इन बातों को शेयर करने से मना कर दिया था, क्योंकि अमिताभ बच्चन का कहना था कि वह खुद मीडिया से बात करेंगे. खैर अब उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया जा चुका है.

कैंसिल हुई 'KBC' की शूटिंग
अमिताभ बच्चन को शुक्रवार को ही हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया. जब अमिताभ हॉस्पिटल से वापस घर जा रहे थे तो इस दौरान उनके साथ अभिषेक बच्चन और जया बच्चन भी नजर आईं. बता दें, अमिताभ बच्चन का केबीसी की शूटिंग शुक्रवार और शनिवार को की जानी थी, लेकिन उस दौरान बिग बी हॉस्पिटल में भर्ती थे, तो इस बात को ध्यान में रखते हुए शूटिंग शेड्यूल को 2 दिन पहले ही कैंसिल कर दिया गया था. केबीसी शूट करने वाले सूत्रों के अनुसार 2 दिन पहले उन्हें प्रोडक्शन हाउस की तरफ से यह मैसेज आ गया था कि शूट को फिलहाल कैंसिल कर दिया गया है.

बता दें कि 'केबीसी' का शूट 18 और 19 अक्टूबर तारीख को होने वाला था, जो कि फिलहाल के लिए कैंसिल कर दिया गया है. गौरतलब है कि बिग बी को लिवर से जुड़ी समस्‍या साल 1982 में हुई थी, जब उन्‍हें फिल्‍म 'कुली' की शूटिंग के दौरान चोट लग गई थी. रिपोर्ट्स मानें तो जब बिग बी को चोट लगी थी, तब गलती से एक ऐसे ब्‍लड डोनर का खून उनके सिस्‍टम में पहुंच गया जिसे हेपेटाइटिस बी वायरस था.

नई दिल्ली: शिवसेना पार्टी के प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और युवा सेना अध्यक्ष आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) की मौजूदगी में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान के बॉडीगार्ड शेरा (Shera) शुक्रवार को शिसेना में शामिल हुए. इस बात की जानकारी शिवसेना पार्टी ने अपने ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करते हुए दी. साथ ही उस ट्वीट के जरिए कुछ तस्वीरें भी शेयर की गईं, जिसमें उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के साथ शेरा नजर आ रहे हैं. 

अपना चुनावी मैदान में आदित्य ठाकरे 
बता दें, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 (Maharashtra Assembly Elections 2019) के लिए शिवसेना चुनावी बिगुल फूंकने जा रही है. माना जा रहा है कि यह चुनाव शिवसेना (Shiv Sena) के लिए बेहद खास है, क्योंकि इस विधानसभा चुनाव से उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे अपना चुनावी डेब्यू करने जा रहे हैं. आदित्य ठाकरे मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और उनके सपोर्ट में कुछ बॉलीवुड सितारे भी उनके साथ खड़े हैं, जिसमें संजय दत्त और मिथुन चक्रवर्ती का नाम मुख्य रूप से शामिल है

खानपान की गलत आदत, पानी कम पीना और भोजन में फाइबर की कमी की वजह से कॉन्स्टिपेशन यानी कब्ज की बीमारी तेजी से बढ़ रही है और बड़ी संख्या में लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। अगर समय रहते कब्ज का इलाज न किया जाए तो यह पाइल्स का रूप ले सकता है जो एक गंभीर बीमारी है जिसमें दर्द और तकलीफ के साथ-साथ मलाशय से खून भी आने लगता है। इस समस्या से निपटने में आपकी मदद कर सकता है केला।
लाइफस्टाइल में बदलाव से दूर होगी बीमारी
लाइफस्टाइल से जुड़ी कई दूसरी बीमारियों की ही तरह पाइल्स को भी आप अपने डायट में बदलाव करके दूर कर सकते हैं। फाइबर से भरपूर आहार का सेवन करें, खूब सारा पानी पिएं और लिक्विड डायट का सेवन करें ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। इसके अलावा हेल्दी एक्सर्साइज और नींद भी पाइल्स के इलाज में मददगार साबित हो सकती है। इन सबके साथ-साथ केला भी पाइल्स को दूर करने में अहम रोल निभाता है।
नैचरल लैक्सेटिव का काम करता है केला
पका हुआ केला, पाइल्स की प्रॉब्लम दूर करने में घरेलू नुस्खे का काम करता है। कार्बोहाइड्रेट्स से भरपूर केला, नैचरल लैक्सेटिव यानी मुलायम करने वाली दवा के रूप में काम करता है।
रोज केला खाने से डाइजेशन रहेगा बेहतर
रोजाना केला खाने से न सिर्फ आपका डाइजेशन यानी पाचन तंत्र बेहतर रहता है बल्कि फाइबर से भरपूर केला, पाइल्स की प्रॉब्लम दूर करने में भी मदद करता है। केले में मौजूद नैचरल शुगर, ऐंटिबायॉटिक क्वॉलिटी से भरपूर होती है जो इंफेक्टेड एरिया से बैक्टीरिया का ग्रोथ कम करने में मदद करती है।
दर्द और जलन दूर करता है केला
पाइल्स की वजह से इंफेक्टेड हिस्से में दर्द और जलन भी महसूस हो रही होती है जिसे बहुत हद से कम करने में मदद करता है केला। रोजाना केला खाने से डाइजेस्टिव सिस्टम सही रहता है और पोषक तत्वों का सही तरीके से अब्जॉर्प्शन होता है जिससे इम्यून सिस्टम भी हेल्दी बना रहता है।
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डाइटिंग करने वालों के लिए अच्छी खबर है कि फिट रहने के लिए सिर्फ सलाद पर निर्भर रहने की अपेक्षा उच्च कैलोरीयुक्त चॉकलेट और मांस (स्टीक) कहीं अधिक लाभकारी हो सकता है। डाइटिंग करने वाले अधिकांश व्यक्ति शुरूआत में ही हार मान लेते हैं, क्योंकि लगातार कम वसायुक्त, कम कैलोरीयुक्त स्वादहीन भोजन करते रहना कभी-कभी काफी कठिन हो जाता है। कम वसायुक्त पारंपरिक व्यंजनों में वसा की जगह कार्बोहाइड्रेट और शर्करा की मात्रा अधिक होती है, जो हमारे शरीर को उपवास की उस मुद्रा में ले जाता है जहां से भूख लगने का विषम चक्र शुरू हो जाता है।
लुडविग ने 2012 में हुए अध्ययन का हवाला देते हुए कहा, वह अध्ययन दर्शाता है कि समान ऊर्जायुक्त मध्यम या उच्च वसायुक्त पारंपरिक भोजन ग्रहण करने पर लोगों ने जितनी कैलोरी बर्न की उसकी अपेक्षा जिस दिन उन्होंने कम वसायुक्त भोजन किया उस दिन वे 325 कैलोरी ऊर्जा कम बर्न कर पाए। लुडविग के अनुसार, लजीज और अपनी पसंद का खाना न केवल आपका पेट भरता है, बल्कि आपकी भूख को भी लंबे समय के लिए शांत कर देता है, जिससे आपको काफी समय तक भूख नहीं लगती। कम वसा वाला आहार आधुनिक चिकित्सा में सबसे बड़ी आपदाओं में से एक हो गया है। यह समय है कि हमें कैलोरी को मापना छोड़कर पारंपरिक भोजन की तरफ ध्यान देना चाहिए।
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