खास खबर

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जम्मू.  नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की बहन व बेटी समेत अन्य महिला प्रदर्शनकारियों को बुधवार को जमानत पर रिहा कर दिया गया। इन्हें मंगलवार को राज्य में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के खिलाफ किए गए प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि डॉ. अब्दुल्ला की बहन सुरैया और उनकी बेटी साफिया और 11 अन्य महिलाअओं को धारा 107 के तहत 10,000 रुपये के निजी मुचलके और 40,000 रुपये की जमानत राशि का भुगतान करने के बाद रिहा किया गया। केंद्रीय जेल श्रीनगर में बंद महिलाओं को बुधवार शाम 6 बजे के आसपास मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने जमानत दे दी। 5 अगस्त के बाद, राज्य के अधिकारियों ने तीन तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों, डॉ. फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला सहित विभिन्न राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिया गया था। फारूक अब्दुल्ला को पिछले महीने जन सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था।

अयोध्या मामले पर सुनवाई के आखिरी दिन इस मामले में नया मोड़ आता दिखा। सूत्रों के मुताबिक मध्यस्थता पैनल ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट सौंपी है। इसमें वक्फ बोर्ड और हिंदू महासभा के दस्तखत हैं। बताया जा रहा है कि बोर्ड इस बात पर सहमत है कि विवादित जमीन को सरकार ले ले तो उसे कोई ऐतराज नहीं होगा। 
बोर्ड दूसरी जगह पर मस्जिद के लिए तैयार है। इस रिपोर्ट पर पांच अहम पक्षकारों के दस्तखत बताए जा रहे हैं। सूत्रों ने बताया, समझौता पत्र में अयोध्या की कुछ मस्जिदों की मरम्मत किए जाने और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा संरक्षित कुछ मॉन्यूमेंट्स में इबादत की अनुमति दिए जाने की मांग भी की गई है। 

बताया जा रहा है कि समझौता पत्र में इन मॉन्यूमेंट्स की पहचान के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक कमेटी को गठित किए जाने की सलाह दी गई है। कोर्ट में कई पक्षकारों के हस्ताक्षरों से युक्त समझौता पत्र में अयोध्या में भाईचारा बनाए रखने के लिए सद्भावना संस्थान बनाने की सलाह भी दी गई है।
अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है। 23 दिन में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आएगा। आज तय वक्त से एक घंटे पहले ही सुनवाई खत्म हो गई। अदालत ने कहा कि अगले तीन दिन तक इस मामले में दस्तावेज जमा कराए जा सकते हैं।

अदालत में बुधवार को राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद मामले की लगतार 40वें दिन सुनवाई हुई। पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। आज सुनवाई शुरू होते ही मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने साफ कर दिया कि आज शाम को पांच बजे मामले में अंतिम सुनवाई होगी। हालांकि सुनवाई एक घंटे पहले चार बजे ही खत्म हो गई। 
 
 

अयोध्या विवाद पर 40 दिनों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में पूरी होने के बाद अयोध्या इस फैसले को लेकर बेसब्र है। सर्वोच्च न्यायालय में अयोध्या विवाद के सुनवाई के अंतिम दिन बुधवार को पूरे दिन अयोध्या की निगाह दिल्ली पर लगी रही। साधु- संतों ने अपने धार्मिक कार्यों को निपटा कर कोर्ट की सुनवाई आरंभ होने के समय से लेकर पूरे दिन अपना ध्यान इस मामले से जुड़े पल-पल की खबर पर केंद्रित रखा। मणिराम छावनी, श्री राम जन्मभूमि निर्माण न्यास कार्यशाला , हिंदू धाम, श्री राम वल्लभा, कुंज दशरथ महल राम की पैड़ी गुप्तार घाट सरयू तट नया घाट हनुमानगढ़ी टेढ़ी बाजार राजघाट झुनकी घाट सियाराम किला आदि स्थानों पर गर्माहट देखी गई।  जिला अधिकारी अनुज कुमार झा ,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशीष कुमार तिवारी जहां एक ओर सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों को मुकम्मल अंजाम देने में लगे रहे वहीं सुरक्षाकर्मी अयोध्या के तिराहे चौराहों पर सक्रिय नजर आए।

इस बीच अयोध्या में सरयू में नाव चलने, ड्रोन के इस्तेमाल पर भीड़ इकट्ठी होने पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में पुलिस वाहनों से प्रसारण भी किए जा रहे हैं।  सायंकाल अयोध्या विवाद की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में पूरी होने के बाद अयोध्या बेसब्र हो उठी। श्री रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष व मणिराम दास जी की छावनी महन्त नृत्य गोपाल दास ने कहा कि राम मंदिर की तैयारी पूरी कर ली गई है, नए वर्ष का उपहार में भव्य राम मंदिर के रूप में मिलेगा। श्री राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ रामविलास वेदांती ने कहा कि हमारी विजय हो चुकी है। अब फैसला आना ही शेष है।
रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि अब यह विवाद समाप्त हो चुका है और फैसला रामलला के पक्ष में ही आएगा। अयोध्या एडवर्ड तीर्थ विवेचिनी सभा के अध्यक्ष व श्री राम वल्लभा कुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास ने कहा कि अब अयोध्या का विवाद हमेशा के लिए खत्म हो चुका है, अयोध्या अविवादित हो चुकी है और राम भक्तों के स्वागत के लिए खुद को तैयार कर रही है।   उन्होंने कहा कि करोड़ों राम भक्तों को श्री राम जन्मभूमि पर रामलला को भव्य मंदिर में बैठे हुए देखने की अभिलाषा अब शीघ्र पूरी होने वाली है, ऐसा हम सभी महसूस कर रहे हैं और हमें कोर्ट के फैसले का बेसब्री से इंतजार है। नाका हनुमानगढ़ी के महंत निर्मोही अखाड़े रामदास दिल्ली में ही रहे  उन्होंने दूरभाष पर बताया की हमें विश्वास है शीघ्र ही रामलला का भव्य मंदिर बनेगा। दूसरी ओर मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि मंदिर बने या मस्जिद , हिंदुस्थान में अमन-चैन कायम रहना चाहिए। बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का जो भी फैसला होगा उसे पूरी तरह मानेंगे। सायंकाल जब हम सभी तक पहुंचे तो वहां से आरती के प्रबंधक शशिकांत दास ने कहा कि सरयू सब को शांति देती हैं  और आज की आरती में हम सभी ने यही प्रार्थना किया अयोध्या को विवाद से मुक्त करो और भव्य राम मंदिर का निर्माण हो और करोड़ों राम भक्तों की इच्छा पूरी हो।

अयोध्या विवाद पर 40 दिनों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में पूरी होने के बाद अयोध्या इस फैसले को लेकर बेसब्र है। सर्वोच्च न्यायालय में अयोध्या विवाद के सुनवाई के अंतिम दिन बुधवार को पूरे दिन अयोध्या की निगाह दिल्ली पर लगी रही। साधु- संतों ने अपने धार्मिक कार्यों को निपटा कर कोर्ट की सुनवाई आरंभ होने के समय से लेकर पूरे दिन अपना ध्यान इस मामले से जुड़े पल-पल की खबर पर केंद्रित रखा। मणिराम छावनी, श्री राम जन्मभूमि निर्माण न्यास कार्यशाला , हिंदू धाम, श्री राम वल्लभा, कुंज दशरथ महल राम की पैड़ी गुप्तार घाट सरयू तट नया घाट हनुमानगढ़ी टेढ़ी बाजार राजघाट झुनकी घाट सियाराम किला आदि स्थानों पर गर्माहट देखी गई।  जिला अधिकारी अनुज कुमार झा ,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशीष कुमार तिवारी जहां एक ओर सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों को मुकम्मल अंजाम देने में लगे रहे वहीं सुरक्षाकर्मी अयोध्या के तिराहे चौराहों पर सक्रिय नजर आए।

इस बीच अयोध्या में सरयू में नाव चलने, ड्रोन के इस्तेमाल पर भीड़ इकट्ठी होने पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में पुलिस वाहनों से प्रसारण भी किए जा रहे हैं।  सायंकाल अयोध्या विवाद की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में पूरी होने के बाद अयोध्या बेसब्र हो उठी। श्री रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष व मणिराम दास जी की छावनी महन्त नृत्य गोपाल दास ने कहा कि राम मंदिर की तैयारी पूरी कर ली गई है, नए वर्ष का उपहार में भव्य राम मंदिर के रूप में मिलेगा। श्री राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ रामविलास वेदांती ने कहा कि हमारी विजय हो चुकी है। अब फैसला आना ही शेष है।
रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि अब यह विवाद समाप्त हो चुका है और फैसला रामलला के पक्ष में ही आएगा। अयोध्या एडवर्ड तीर्थ विवेचिनी सभा के अध्यक्ष व श्री राम वल्लभा कुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास ने कहा कि अब अयोध्या का विवाद हमेशा के लिए खत्म हो चुका है, अयोध्या अविवादित हो चुकी है और राम भक्तों के स्वागत के लिए खुद को तैयार कर रही है।   उन्होंने कहा कि करोड़ों राम भक्तों को श्री राम जन्मभूमि पर रामलला को भव्य मंदिर में बैठे हुए देखने की अभिलाषा अब शीघ्र पूरी होने वाली है, ऐसा हम सभी महसूस कर रहे हैं और हमें कोर्ट के फैसले का बेसब्री से इंतजार है। नाका हनुमानगढ़ी के महंत निर्मोही अखाड़े रामदास दिल्ली में ही रहे  उन्होंने दूरभाष पर बताया की हमें विश्वास है शीघ्र ही रामलला का भव्य मंदिर बनेगा। दूसरी ओर मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि मंदिर बने या मस्जिद , हिंदुस्थान में अमन-चैन कायम रहना चाहिए। बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का जो भी फैसला होगा उसे पूरी तरह मानेंगे। सायंकाल जब हम सभी तक पहुंचे तो वहां से आरती के प्रबंधक शशिकांत दास ने कहा कि सरयू सब को शांति देती हैं  और आज की आरती में हम सभी ने यही प्रार्थना किया अयोध्या को विवाद से मुक्त करो और भव्य राम मंदिर का निर्माण हो और करोड़ों राम भक्तों की इच्छा पूरी हो।


खास बातें

    अयोध्या विवाद मामले में नजदीक आ रही फैसले की घड़ी
    साल 1813 में हिंदू संगठनों ने पहली बार किया था दावा
    साल 2017 से अब तक मध्यस्थता के सारे प्रयास विफल रहे

अयोध्या विवाद मामले में फैसले की घड़ी नजदीक आ रही है। राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद की सुप्रीम कोर्ट में रोजाना हो रही सुनवाई का बुधवार को 40वां और अंतिम दिन है। इस दौरान कोर्ट में एक बार फिर सभी पक्षों की अंतिम दलीलें पेश होंगी।
इसके बाद कोर्ट अपना फैसला सुरक्षित रखेगा, क्योंकि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई कह चुके हैं कि फैसला लिखने में करीब चार हफ्ते लगेंगे। बहरहाल, इससे इतर क्या आप जानते हैं कि राम मंदिर का मुद्दा पहली बार अंग्रेजी हुकूमत के वक्त आज से करीब 206 साल पहले उठा था। यहां आप जान सकते हैं कि इस मामले में अब तक क्या कुछ हुआ है।
वर्ष 1813 में पहली बार किया गया था मंदिर को लेकर दावा
ब्रिटिश हुकूमत के वक्त साल 1813 में हिंदू संगठनों ने पहली बार यह दावा किया था कि वर्ष 1526 में जब बाबर आया तो उसने राम मंदिर को तुड़वाकर ही मस्जिद का निर्माण कराया था। उसी के नाम पर मस्जिद को बाबरी मस्जिद नाम से जाना गया। उस वक्त भी दोनों पक्षों के बीच हिंसात्मक घटनाएं हुई थीं।

ब्रिटिश सरकार ने साल 1859 में विवादित जगह पर तार की एक बाड़ बनवा दी। इसके बाद साल 1885 में पहली बार महंत रघुबर दास ने ब्रिटिश शासन के दौरान ही अदालत में याचिका देकर मंदिर बनाने की अनुमति मांगी थी।
पहली बार ढांचा साल 1934 में गिराया गया
साल 1934 में विवादित क्षेत्र को लेकर हिंसा भड़की। इस दौरान पहली बार विवादित हिस्सा तोड़ा गया। तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने तब इसकी मरम्मत कराई। इसके बाद 23 दिसंबर 1949 को हिंदुओं ने ढांचे के केंद्र स्थल पर रामलला की प्रतिमा रखकर पूजा-अर्चना शुरू की। इसके बाद से ही मुस्लिम पक्ष ने यहां नमाज पढ़ना बंद कर दिया और वह कोर्ट चला गया।
आजाद भारत में ऐसे बना बड़ा मुद्दा
साल 1950 में फैजाबाद की अदालत से गोपाल सिंह विशारद ने रामलला की पूजा-अर्चना करने के लिए विशेष अनुुमति मांगी थी। इसके बाद दिसंबर 1959 में निर्मोही अखाड़े ने विवादित स्थल को उसे हस्तांतरित करने और दिसंबर 1961 में उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर कर दिया। इस तरह आजाद भारत में राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर बड़ा मुद्दा बनना शुरू हो गया।

विश्व हिंदू परिषद ने भी बनाया मुद्दा
विश्व हिंदू परिषद ने साल 1984 में बाबरी मस्जिद के ताले खोलने, राम जन्मभूमि को स्वतंत्र कराने और यहां विशाल मंदिर निर्माण के लिए एक अभियान शुरू किया। इस दौरान देशभर में जगह-जगह प्रदर्शन किए गए। विहिप के साथ भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे को हिंदू अस्मिता के साथ जोड़ते हुए संघर्ष शुरू किया।
 
बाबरी एक्शन कमेटी 1986 में बनाई गई
कोर्ट में चल रहे मामले के दौरान साल 1986 में फैजाबाद जिला न्यायाधीश की ओर से पूजा की इजाजत दी गई तब ताले दोबारा खोले गए। हालांकि इससे नाराज मुस्लिम पक्ष ने बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी गठित करने का फैसला लिया।

इसके बाद साल 1992 में 6 दिसंबर को कारसेवकों ने भारी संख्या में अयोध्या पहुंचकर मस्जिद का ढांचा एक बार फिर ढहा दिया। इस दौरान भी हिंसा भड़की, देशभर में सांप्रदायिक दंगे हुए और इसी दौरान अस्थाई राम मंदिर भी बनाया गया। इसके बाद से ही मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों को तराशने के काम में तेजी भी आई। दिसंबर 1992 में ही लिब्रहान आयोग गठित किया गया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 2002 में सुनवाई शुरू की
अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर साल 2002 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन न्यायधीशों की खंडपीठ ने सुनवाई शुरू की। इसके बाद मार्च-अगस्त 2003 में हाईकोर्ट से मिले निर्देश पर पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने विवादित स्थल पर खुदाई की। विभाग ने दावा किया कि मस्जिद की खुदाई में विवादित ढांचे के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले हैं।
हाईकोर्ट के फैसले को साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई
साल 2011 में मामले की सुनवाई कर रही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने विवादित क्षेत्र को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड को बराबर तीन हिस्सों में बांटने का फैसला दिया। लेकिन यह फैसला सभी पक्षों को स्वीकार नहीं था। ऐसे में फरवरी 2011 में हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। तब मई 2011 में सुप्रीम कोर्ट की 2 सदस्यीय पीठ में सुनवाई शुरू हुई।

साल 2017 से अब तक मध्यस्थता के सारे प्रयास विफल रहे
साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तो शुरू हो गई, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट से भेजे गए दस्तावेजों का अनुवाद नहीं हो पाने के कारण यह मामला टलता रहा। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मध्यस्थता की पेशकश की, जो विफल रही। इसके बाद 6 अगस्त 2019 से सुप्रीम कोर्ट ने रोजाना सुनवाई कर जल्द से जल्द मामले का निपटारा करने की बात कही।
15वीं सदी से चल रहे विवाद का अंत नजदीक
अयोध्या विवाद पर 6 अगस्त 2019 से शुरू हुई रोजाना सुनवाई 16 अक्तूबर को खत्म हो जाएगी। 15वीं सदी से यह विवाद अब तक चला आ रहा है। हालांकि इसे प्रमुखता से 1813 में पहली बार उठाया गया। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 2010 में दिए अपने फैसले में विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला दिया था। जिस पर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी।

इसके बाद इसी मामले में विभिन्न पक्षों की ओर से 14 याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन पर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। ऐसे में देखा जाए तो 15वीं सदी से चल रहे इस विवाद का अंत अब नजदीक आ गया है।

डायबीटीज के मरीजों के लिए सबसे अहम होता है ब्लड शुगर लेवल को मेनटेन करना। यही वजह है कि इसके मरीजों को खान-पान को लेकर खास सावधानी बरतनी पड़ती है। आमतौर पर माना जाता है कि फ्रूट्स खाना डायबीटीज के मरीजों के लिए सेफ होते हैं लेकिन हाई शुगर वाले फ्रूट्स ऐसे मरीजों के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। चलिए जानते हैं कौन से फ्रूट्स डायबीटीज के मरीजों के लिए सेफ हैं और कौन से नहीं।
केला
केले को एनर्जी फ्रूट के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह शुगर लेवल को बढ़ाते हुए तुरंत शरीर को बूस्ट देता है। इसकी यही क्वॉलिटी डायबीटीज के मरीजों के लिए खराब है क्योंकि इससे शुगर लेवल ज्यादा इफेक्ट होता है।
आम
सिर्फ एक आम में ही करीब 45 ग्राम नैचरल शुगर होती है। ऐसे में डायबीटीज का मरीज अगर दो आम खा ले तो यह नैचरल शुगर भी उनकी हेल्थ बिगाड़ सकती है।
अंगूर
एक कप अंगूर खाने पर शरीर में 23 ग्राम शुगर जाती है। अगर आप डायबीटीज के मरीज हैं तो इस फल को सीमित मात्रा में खाना ही आपके लिए बेहतर है।
चेरी
एक कप चेरी में 18 ग्राम शुगर होती है। मीठी चेरी की जगह आप खट्टी चेरी खा सकते हैं जिसका नैचरल शुगर लेवल कम होता है।
लीची
लीची भी हाई शुगर लेवल वाले फ्रूट्स में से एक है। एक कप लीची में 29 ग्राम नैचरल शुगर होती है, जो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाते हुए तबीयत खराब कर सकती है।
ये फल हैं सुरक्षित, सेब
डायबीटीज के मरीजों के लिए लो शुगर वाले फ्रूट्स बेस्ट होते हैं। इन फ्रूट्स में से एक सेब है। एक सेब का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 36 होता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स इसे दिखाता है कि खाने की कोई चीज कितनी जल्दी शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ाती है। ऐपल में फाइबर और विटमिन सी भी बहुत होता है जो इसे जल्दी पचने नहीं देता और शुगर लेवल तेजी से नहीं बढ़ता।
नाशपाती
नाशपाती ऐंटीऑक्सिडेंट, विटमिन और मिनरल्स से भरपूर होता है। इसमें फाइबर भी काफी होता है जो पेट को देर तक भरा रखने के साथ ही धीरे-धीरे पचता है और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल तरीके से बढ़ाता है।
स्ट्रॉबेरी
स्ट्रॉबेरी यूं तो मीठी होती है लेकिन इसका जीआई इंडेक्स 25 है, जो इसे डायबीटीज के मरीजों के लिए सुरक्षित बनाता है। इतना ही नहीं यह बैड कलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में भी मदद करती है।
संतरा
संतरा विटमिन सी का अच्छा सोर्स होता है और इसका जीआई इंडेक्स भी कम होता है। इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखने और शुगर लेवल को कंट्रोल करने में भी मदद करता है।
आड़ू
आड़ू में विटमिन ए-सी, पोटैशियम और फाइबर की भरमार है। इसकी यह खासियत इसे डायबीटीज के मरीजों के लिए सुरक्षित फ्रूट बनाती है। हालांकि, ध्यान रहे कि इसे सीमित मात्रा में ही खाएं।
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सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि सेनाओं को इससे बहुत लाभ मिलेगा।’’ रावत ने कहा, ‘‘भारत हथियारों और गोला-बारूद के सबसे बड़े आयातकों में से एक है और आजादी के 70 साल बाद भी ऐसा कहना कोई गौरव की बात नहीं है। लेकिन पिछले कुछ सालों में यह स्थिति बदल रही है।

 

नयी दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने मंगलवार को सशस्त्र बलों में स्वदेशी प्रौद्योगिकी को व्यापक रूप से शामिल करने की वकालत करते हुए कहा कि भारत अगला युद्ध देश में ही विकसित समाधानों के साथ लड़ेगा और जीतेगा। 41वें डीआरडीओ निदेशक सम्मेलन को संबोधित करते हुए जनरल रावत ने यह भी कहा कि शस्त्रों और अन्य प्रणालियों का विकास भविष्य के युद्धों को दिमाग में रखकर होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम भविष्य के युद्धों की रूपरेखा की ओर देखें तो जरूरी नहीं कि ये आमने-सामने से लड़े जाएं। हमें साइबर क्षेत्र, अंतरिक्ष, लेजर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और रोबोटिक्स के विकास के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की ओर देखना होगा।’’ रावत ने कहा, ‘‘और अगर हम इस बारे में नहीं सोचते तो बहुत देर हो जाएगी।’’  उन्होंने पिछले कुछ दशकों में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की उपलब्धियों के लिए उसकी तारीफ की और कहा कि भारत अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में नये कीर्तिमान गढ़ रहा है। सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि सेनाओं को इससे बहुत लाभ मिलेगा।’’ रावत ने कहा, ‘‘भारत हथियारों और गोला-बारूद के सबसे बड़े आयातकों में से एक है और आजादी के 70 साल बाद भी ऐसा कहना कोई गौरव की बात नहीं है। लेकिन पिछले कुछ सालों में यह स्थिति बदल रही है। डीआरडीओ सेनाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रयासरत है जो स्वदेशी समाधानों से निकली हों।’’ यहां डीआरडीओ भवन में आयोजित दो दिवसीय उद्घाटन सत्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशिष्ट अतिथि थे।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह तथा डीआरडीओ के प्रमुख जी सतीश रेड्डी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। रक्षा मंत्री ने शुरूआत में डीआरडीओ परिसर में स्थित पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कलाम की 88वीं जयंती के मौके पर सिंह ने कहा, ‘‘हम उनके जीवन से प्रेरणा लें और भारत को वैज्ञानिक उपलब्धियों के माध्यम से विकसित देश बनाने के उनके सपने को पूरा करें।’’ उन्होंने दुनिया को बदलने वाली विनाशकारी तकनीकों के पहलुओं पर भी जोर दिया और कहा कि ‘‘भारत को इसमें नेतृत्व की भूमिका में उभरना होगा’’। सिंह ने देश को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी प्रणाली पर काम करने की वकालत की। डोभाल ने कहा कि मजबूत और सुरक्षित भारत बनाने के लिए डीआरडीओ की भूमिका बहुत अहम होगी।

सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि सेनाओं को इससे बहुत लाभ मिलेगा।’’ रावत ने कहा, ‘‘भारत हथियारों और गोला-बारूद के सबसे बड़े आयातकों में से एक है और आजादी के 70 साल बाद भी ऐसा कहना कोई गौरव की बात नहीं है। लेकिन पिछले कुछ सालों में यह स्थिति बदल रही है।

 

नयी दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने मंगलवार को सशस्त्र बलों में स्वदेशी प्रौद्योगिकी को व्यापक रूप से शामिल करने की वकालत करते हुए कहा कि भारत अगला युद्ध देश में ही विकसित समाधानों के साथ लड़ेगा और जीतेगा। 41वें डीआरडीओ निदेशक सम्मेलन को संबोधित करते हुए जनरल रावत ने यह भी कहा कि शस्त्रों और अन्य प्रणालियों का विकास भविष्य के युद्धों को दिमाग में रखकर होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम भविष्य के युद्धों की रूपरेखा की ओर देखें तो जरूरी नहीं कि ये आमने-सामने से लड़े जाएं। हमें साइबर क्षेत्र, अंतरिक्ष, लेजर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और रोबोटिक्स के विकास के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की ओर देखना होगा।’’ रावत ने कहा, ‘‘और अगर हम इस बारे में नहीं सोचते तो बहुत देर हो जाएगी।’’  उन्होंने पिछले कुछ दशकों में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की उपलब्धियों के लिए उसकी तारीफ की और कहा कि भारत अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में नये कीर्तिमान गढ़ रहा है। सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि सेनाओं को इससे बहुत लाभ मिलेगा।’’ रावत ने कहा, ‘‘भारत हथियारों और गोला-बारूद के सबसे बड़े आयातकों में से एक है और आजादी के 70 साल बाद भी ऐसा कहना कोई गौरव की बात नहीं है। लेकिन पिछले कुछ सालों में यह स्थिति बदल रही है। डीआरडीओ सेनाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रयासरत है जो स्वदेशी समाधानों से निकली हों।’’ यहां डीआरडीओ भवन में आयोजित दो दिवसीय उद्घाटन सत्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशिष्ट अतिथि थे।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह तथा डीआरडीओ के प्रमुख जी सतीश रेड्डी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। रक्षा मंत्री ने शुरूआत में डीआरडीओ परिसर में स्थित पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कलाम की 88वीं जयंती के मौके पर सिंह ने कहा, ‘‘हम उनके जीवन से प्रेरणा लें और भारत को वैज्ञानिक उपलब्धियों के माध्यम से विकसित देश बनाने के उनके सपने को पूरा करें।’’ उन्होंने दुनिया को बदलने वाली विनाशकारी तकनीकों के पहलुओं पर भी जोर दिया और कहा कि ‘‘भारत को इसमें नेतृत्व की भूमिका में उभरना होगा’’। सिंह ने देश को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी प्रणाली पर काम करने की वकालत की। डोभाल ने कहा कि मजबूत और सुरक्षित भारत बनाने के लिए डीआरडीओ की भूमिका बहुत अहम होगी।

सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि सेनाओं को इससे बहुत लाभ मिलेगा।’’ रावत ने कहा, ‘‘भारत हथियारों और गोला-बारूद के सबसे बड़े आयातकों में से एक है और आजादी के 70 साल बाद भी ऐसा कहना कोई गौरव की बात नहीं है। लेकिन पिछले कुछ सालों में यह स्थिति बदल रही है।

 

नयी दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने मंगलवार को सशस्त्र बलों में स्वदेशी प्रौद्योगिकी को व्यापक रूप से शामिल करने की वकालत करते हुए कहा कि भारत अगला युद्ध देश में ही विकसित समाधानों के साथ लड़ेगा और जीतेगा। 41वें डीआरडीओ निदेशक सम्मेलन को संबोधित करते हुए जनरल रावत ने यह भी कहा कि शस्त्रों और अन्य प्रणालियों का विकास भविष्य के युद्धों को दिमाग में रखकर होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम भविष्य के युद्धों की रूपरेखा की ओर देखें तो जरूरी नहीं कि ये आमने-सामने से लड़े जाएं। हमें साइबर क्षेत्र, अंतरिक्ष, लेजर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और रोबोटिक्स के विकास के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की ओर देखना होगा।’’ रावत ने कहा, ‘‘और अगर हम इस बारे में नहीं सोचते तो बहुत देर हो जाएगी।’’  उन्होंने पिछले कुछ दशकों में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की उपलब्धियों के लिए उसकी तारीफ की और कहा कि भारत अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में नये कीर्तिमान गढ़ रहा है। सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि सेनाओं को इससे बहुत लाभ मिलेगा।’’ रावत ने कहा, ‘‘भारत हथियारों और गोला-बारूद के सबसे बड़े आयातकों में से एक है और आजादी के 70 साल बाद भी ऐसा कहना कोई गौरव की बात नहीं है। लेकिन पिछले कुछ सालों में यह स्थिति बदल रही है। डीआरडीओ सेनाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रयासरत है जो स्वदेशी समाधानों से निकली हों।’’ यहां डीआरडीओ भवन में आयोजित दो दिवसीय उद्घाटन सत्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशिष्ट अतिथि थे।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह तथा डीआरडीओ के प्रमुख जी सतीश रेड्डी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। रक्षा मंत्री ने शुरूआत में डीआरडीओ परिसर में स्थित पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कलाम की 88वीं जयंती के मौके पर सिंह ने कहा, ‘‘हम उनके जीवन से प्रेरणा लें और भारत को वैज्ञानिक उपलब्धियों के माध्यम से विकसित देश बनाने के उनके सपने को पूरा करें।’’ उन्होंने दुनिया को बदलने वाली विनाशकारी तकनीकों के पहलुओं पर भी जोर दिया और कहा कि ‘‘भारत को इसमें नेतृत्व की भूमिका में उभरना होगा’’। सिंह ने देश को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी प्रणाली पर काम करने की वकालत की। डोभाल ने कहा कि मजबूत और सुरक्षित भारत बनाने के लिए डीआरडीओ की भूमिका बहुत अहम होगी।

जब वेट लॉस की बात आती है तो सबसे पहले लोग पिज्जा जैसे फूड से दूरी बना लेते हैं। पिज्जा के शौकीन लोगों के लिए ऐसा करना बहुत मुश्किल हो जाता है, लेकिन अगर हम कहें कि आप रोज इसे खाकर भी वजन कम कर सकते हैं तो आप क्या कहेंगे?
नहीं करना पड़ेगा ज्यादा वर्कआउट
जी हां, रोज पिज्जा खाने पर भी आप वेट लॉस कर सकते हैं। खास बात यह है कि आपको जिम में इससे मिलने वाली कैलरीज को बर्न करने के लिए एक्स्ट्रा वर्कआउट भी नहीं करना पड़ेगा।
36 किलो तक कम हुआ वेट
दरअसल, कुछ समय पहले न्यू यॉर्क के एक शेफ ने रोज पिज्जा खाकर अपना वजन करीब 36 किलो कम कर लिया था, जिससे सभी हैरान रह गए थे।
क्या था सीक्रेट
अपने इस वेट लॉस के सीक्रेट को शेयर करते हुए शेफ ने बताया था कि वह रोज लंच में पिज्जा खाते हैं। इस पिज्जा को वह खुद बनाते हैं।
कैसे बनाया पिज्जा
पिज्जा लवर इस शेफ ने खुद इसे बनाना शुरू कर दिया। इसके लिए उन्होंने मार्केट से बेस खरीदने की जगह खुद आटे, पानी, सी सॉल्ट और यीस्ट का इस्तेमाल कर पिज्जा बेस बनाया।
टॉपिंग हो ऐसी
उन्होंने इस बात का खास ध्यान रखा कि पिज्जा के जरिए भी उन्हें न्यूट्रिशन पूरा मिले। इसके लिए उन्होंने टॉपिंग्स के लिए सब्जियों के साथ ही मशरूम, अपने पसंद के मीट और चीज आदि को शामिल किया। ध्यान रहे कि पिज्जा में चीज की मात्रा बहुत ज्यादा न कर दें।
इन बातों का रखें ध्यान
पिज्जा के इस हेल्दी वर्जन को रोज खाने के बाद कुछ चीजों का ध्यान रखना भी जरूरी है। पिज्जा को अपना लंच बनाएं तो अन्य फास्ट फूड से दूरी बनाए रखें, साथ ही में कोल्डड्रिंक की जगह जूस का सेवन करें। अपना डेली वर्कआउट भी जरूर जारी रखें ताकि कैलरीज के कारण फैट न बढ़ सके।
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