ईश्वर दुबे
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Bhilai
| स्थान | हस्ती | अंक (फीसदी में) |
| 1 | नरेंद्र मोदी | 15.66 |
| 2 | महेंद्र सिंह धोनी | 8.58 |
| 3 | रतन टाटा | 8.02 |
| 4 | बराक ओबामा | 7.36 |
| 5 | बिल गेट्स | 6.96 |
| 6 | अमिताभ बच्चन | 6.55 |
| 7 | सचिन तेंदुलक | 5.81 |
| 8 | विराट कोहली | 4.46 |
| 9 | शाहरुख खान | 3.63 |
| 10 | जैकी चेन | 3.44 |
दिल्ली से सटे यूपी के ग्रेटर नोएडा में एक ऐसे बच्चे ने जन्म लिया है जिसे देखने के लिए वहां लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. अस्पताल के कर्मचारी से लेकर आसपास के लोग उस बच्चे को देखने के लिए अस्पताल में जुट गए जिसकी वजह से डॉक्टरों को बच्चे को उसके माता-पिता के साथ घर भेजना पड़ा.
दरअसल ग्रेटर नोएडा के दनकौर स्थित प्राइमरी हेल्थ सेंटर में एक महिला ने एक बच्चे (लड़के) को जन्म दिया लेकिन उस बच्चे की पीठ के निटले हिस्से पर 'पूंछ' की तरह एक हिस्सा उभरा हुआ था. इसे देखकर डॉक्टर ही नहीं उसके परिजन भी हैरान रह गए.
यह बात जैसे ही अस्पताल में फैली कर्मचारी भी उस बच्चे को देखने पहुंच गए. 'पूंछ' के साथ जन्म इस बच्चे को लोग आश्चर्यचकित होकर देखते रहे.
वहीं 'पूंछ' जैसे अंग के साथ पैदा हुए इस बच्चे को लेकर डॉक्टर ने बताया कि कंजेनाइटल नॉर्मलिटी की वजह से ऐसा हुआ है और यह सिर्फ 1 या दो फीसदी लोगों में ही पाया जाता है जिसकी वजह से बाल ज्यादा होना, कान में कोई प्रॉब्लम या फिर किसी और अंग में ऐसी चीजें हो जाती है.
इस मामले को लेकर सीएमओ डॉक्टर अनुराग भार्गव ने कहा कि फिलहाल बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है और मां का दूध पी रहा है. ये एक तरीके का सैकोकोकीगल टेराटोमा प्रोविजनल डाइग्नोसिस होती है जो 1 या 2 फीसदी बच्चों में हो जाती है. इससे कोई खतरा नहीं होता है. जल्द ही बच्चे को अस्पताल में लाकर एमआरआई कराने के बाद इस मांस के टुकड़े को अलग कर दिया जाएगा. इससे बच्चे के जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
नई दिल्ली: मॉडल-अभिनेत्री ब्रूना अब्दुल्ला ने हाल ही में एक प्यारी सी बच्ची को जन्म दिया है। ब्रूना एक हेल्थ अवेयरनेस कैंपेन 'मिसिंगआई' को भी अपना समर्थन दे रही हैं। उनका कहना है कि उनमें आयोडीन की कमी नहीं है और इस वजह से वह अपनी बेटी को अच्छे से ब्रेस्ट फीडिग करा पाती हैं। ब्रूना हैशटैगमिसिंगआई कैम्पेन की हिस्सेदार हैं जो महिलाओं के शरीर में आयोडीन की कमी और इसके कारणों पर बात करती है।
इसके जवाब में उन्होंने आईएएनएस को बताया, "नहीं, बिल्कुल नहीं। इसी वजह से मैं अच्छे से ब्रेस्ट फीडिंग करा रही हूं।" ब्रूना ने 31 अगस्त को अपनी बेटी इजाबेला का इस दुनिया में स्वागत किया। ब्रूना का मानना है कि मां बनने के बाद उनकी जिंदगी पहले से काफी बेहतर हो गई है।
उन्होंने कहा, "सब कुछ अच्छे के लिए है। मैं उससे बहुत प्यार करती हूं और मैं वाकई में अपनी जिंदगी में इतना ज्यादा प्यार किसी और से नहीं कर सकती।" खबरों के मुताबिक, ब्रूना ने इस साल मई में अपने बॉयफ्रेंड एलन फ्रेस से शादी की थी। पेशेवर जिंदगी की बात करें तो ब्रूना 'ग्रैंड मस्ती', 'जय हो' और 'आई हेट लव स्टोरी' जैसी बॉलीवुड फिल्मों में काम कर चुकी हैं। वह 'डांसिंग क्वीन', 'खतरों के खिलाड़ी' और 'नच बलिए' जैसे शोज में भी दिख चुकी हैं। इसके जवाब में ब्रूना ने कहा, "मैं अपने लाइव शोज में वापसी के लिए तैयार हूं जो मुझे बेहद पसंद हैं। फिल्मों के बारे में कुछ नहीं कह सकती..खर, मैं काम कर रही हूं, लेकिन देखते हैं कि मैं उससे (अपनी बेटी) लंबे समय तक के लिए दूर रह पाती भी हूं या नहीं।"
चुकंदर आपके हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद होता है। डॉक्टर से लेकर घर में बूढ़े दादा-दादी का भी मानना है कि चुकंदर का जूस, या इसे सलाद के रूप में खाने आप हमेशा जवां महसूस करते हैं। आज हम आपको चुकंदर के ऐसे फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बाद आपको किसी भी तरह बीमारियां छू भी नहीं सकती। अगर आप रेगुलर अपनी डाइट में चुकंदर को शामिल करते हैं तो आपको खून की कमी नहीं होगी साथ ही आपका बीपी, शुगर लेवल हमेशा ठीक रहेगा। बता दें कि चुकंदर में आयरन, सोडियम, पोटेशियम, फास्फोरस आपके शरीर को एनर्जी प्रदान करती है है साथ ही यह आपको सभी तरह की बीमारियों से दूर रखती है।
चुकंदर का जूस पीने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है साथ ही साथ चुकंदर के ऊपर कई तरह के रिसर्च भी किये गए हैं जिसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि रोजाना चुकंदर के जूस का सेवन करने से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। वहीं एक 2011 की रिपोर्ट के मुताबिक चुकंदर का जूस पीने से डिमेंशिया का खतरा भी काफी कम हो जाता है। दरअसल, चुकंदर के जूस में भारी मात्रा में नाइट्रेट होता है जिसके कारण बढ़ती उम्र में चुकंदर हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। यह दिमाग में ब्लड फ्लो को तेज करता है। जिससे उनको भूलने की बीमारी नहीं होती है।
आयरन के साथ- साथ चुकंदर में पोटैशियम भी पाया जाता है। चुकंदर से शरीर में मौजूद हर चीज अच्छे ढंग से काम करती हैं। साथ ही साथ शरीर में पोटैशियम की कमी के कारण कमजोरी, ऐंठन और थकान महसूस होती है। एनीमिया से परेशान लोगों के लिए चुकंदर एक वरदान की तरह है। इसमें मौजूद आयरन शरीर में खून की कमी को दूर करने के साथ-साथ ब्लड को प्यूरीफाई भी करती है।
आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में तनाव और सिरदर्द जैसी समस्या आम हो चुकी है। जिससे निजात पाने के लिए हम कोई पेनकिलर झट से लेते है। लेकिन आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया कि आपको सिरदर्द अधिकतर तो नहीं रहता है। आखिर क्यों सिर में दर्द बार-बार हो रहा है? ऐसे ही कुछ लक्षण ब्रेन ट्यूमर के होते है। अगर इन छोटे-छोटे संकेतों को समझ लिया तो आपक ब्रेन ट्यूमर जैसी जानलेवा बीमारी से आसानी से बच सकते है। जानें आखिर क्या है ब्रेन ट्यूमर और इसके लक्षण।
क्या है ब्रेन ट्यूमर?
ब्रेन ट्यूमर को आमतौर पर कैंसर से ही जोड़ कर देखा जाता है, हालांकि ट्यूमर कैंसर के लिए जिम्मेदार नहीं होता है। जब मस्तिष्क में कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने वाली गांठ बन जाती है तो इसे ही ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है। इस रोग में मस्तिष्क के खास हिस्से में कोशिकाओं का गुच्छा बन जाता है। ब्रेन ट्यूमर किसी को भी हो सकता है।
ब्रेन ट्यूमर के कारण
अभी तक इसकी असली वजह सामने नहीं आ पाई है कि आखिर ब्रेन ट्यूमर क्यों होता है। लेकिन खराब लाइफस्टाइल, केमिल और प्रदूषण, रेडिएशन, आनुवांशिक कारण इसके जिम्मेदार माने जाते है।
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण
मिर्गी के दौरे पड़ना।
याददाश्त का काम हो जाना।
सुबह उठने पर अधिकतर उल्टी होना, खासतौर पर जब आप दूसरी जगह पर है।
सुनने की क्षमता में कमी आना
बैलेंस में समस्या होना।
प्रभावित जगह की मांसपेशियों में कमजोरी
प्रभावित कान में हमेशा कुछ बजने की आवाज आना
चेहरे का सुन्न हो जाना
सिर चकराना
केंद्र की नरेंद्र मोदी सराकर ने सरकारी कर्मचारियों की पेंशन के नियमों में बदलाव किया है। अब सात साल से कम के सेवाकाल में सरकारी कर्मचारी की मृत्यु पर उसके परिवार के सदस्य अब बढ़ी हुई पेंशन पाने के हकदार होंगे। इसके लिए सरकार ने पेंशन नियमों में संशोधनों को अधिसूचित कर दिया है।
पहले ये था पेंशन का नियम
इससे पहले यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु सात साल से कम के सेवाकाल में होती थी, तो उसके परिजनों को आखिरी वेतन के 50 फीसदी के हिसाब से बढ़ी हुई पेंशन मिलती थी। लेकिन अब सात साल से कम के सेवाकाल में मृत्यु होने पर कर्मचारी के परिजन बढ़ी हुई पेंशन पाने के पात्र होंगे।
एक अक्तूबर से लागू होगा नियम
अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम,1972 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। ये नियम केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) दूसरा संशोधन नियम, 2019 एक अक्तूबर, 2019 से लागू होंगे। इसका लाभ केंद्रीय सशस्त पुलिस बल के जवानों की विधवाओं को मिलेगा।
पूरी करने होंगी पारिवारिक पेंशन पाने की शर्तें
सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि ऐसे सरकारी कर्मचारी जिनकी मृत्यु एक अक्टूबर, 2019 तक दस साल का कार्यकाल पूरा करने से पहले हो जाती है और उन्होंने लगातार सात साल तक का सेवाकाल पूरा नहीं किया है, तो उनके परिजनों को एक अक्तूबर, 2019 से उप नियम (3) के तहत बढ़ी हुई दर पर पेंशन मिलेगी। इसके लिए पारिवारिक पेंशन पाने की अन्य शर्तों को पूरा करना होगा।
इसमें कहा गया है कि मृत्यु पर ग्रेच्युटी के संदर्भ में ग्रेच्युटी की राशि कार्यालय के प्रमुख द्वारा उसके पूरे सेवाकाल के बारे में जानकारी और सत्यापन के बाद तय की जाएगी। कार्यालय प्रमुख अस्थायी मृत्यु ग्रेच्युटी के भुगतान की तारीख से छह माह के भीतर इस राशि को तय करेगा।
मंत्रालय ने दिया बयान
कार्मिक एवं लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय ने बयान में कहा कि सरकार का मानना है कि पारिवारिक पेंशन की बढ़ी दर किसी सरकारी कर्मचारी के अपने करियर की शुरुआत में मृत्यु होने की स्थिति अधिक जरूरी है क्योंकि शुरुआत में उसका वेतन भी कम होगा।
एक ही मोहल्ले में रहने वाला एक शख्स, मृतक की मां और बहन पर बुरी नजर रखता था. मृतक ने जब इसका विरोध किया तो उस शख्स ने उसकी नृशंस हत्या कर दी. पहले उसका सिर काटा और फिर टुकड़ों में लाश को काटकर बोरे में भरकर एक नाले में फेंक दिया. दिल दहलाने वाली यह वारदात पंजाब के गुरदासपुर जिले की है.
गुरदासपुर जिले में बटाला के हसली नाले में बीते दिन एक नौजवान की सिर कटी लाश मिली थी. पुलिस ने कत्ल का मामला दर्ज कार्यवाही शुरू कर दी थी. सोमवार को बटाला पुलिस ने कत्ल की गुत्थी सुलझाने का दावा करते हुए बटाला के ही एक युवक अशोक कुमार के कत्ल के आरोप में गिरफ्तार किया.
पुलिस ने बताया की मरने वाला युवक रजिंदर, गांधी कैम्प का था और उसका कत्ल उसके मोहल्ला में रहने वाले अशोक कुमार ने किया था. वह 19 सितंबर की रात को उसकी लाश एक बोरे में डाल नाले में फेंक गया था. जांच में सामने आया कि अशोक कुमार, मृतक रजिंदर की मां और बहन पर बुरी नजर रखता था और रजिंदर अक्सर इस बात का विरोध जताता था. इसी रंजिश के चलते अशोक कुमार ने रजिंदर का बड़ी बेरहमी से कत्ल कर डाला. रजिंदर की पहचान न हो इस लिए सिर काट डाला और अपना जुर्म छिपाने के चलते रजिंदर की लाश के टुकड़े कर बोरे में डाल कर 19 सितंबर की रात को उसे नाले में फेंक दिया.
देश भर में प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं. देश के तमाम शहरों में प्याज की कीमत को लेकर एक जैसा हाल है. कभी प्याज 15 रुपए बिकता था, अब वही प्याज 80 रूपए तक पहुंच गया है. मुंबई में आज प्याज 75 से 80 रुपए प्रति किलो बिक रहा है. अभी कुछ ही दिन पहले दिल्ली में प्याज 30 रुपये से 40 रूपये किलो के बीच बिक रही थी. लेकिन चंद दिन में ही वो भाव 80 तक पहुंच चुका है. प्याज की कीमत में अचानक आई तेजी से हर कोई हैरान है. दिल्ली ही नहीं देश के तमाम शहरों में भाव बढ़ गया है.
दिल्ली में 80 रुपये किलो, मुंबई में भी 80 रुपये, गुरुग्राम में भी 80 रुपये किलो, पटना में करीब 70 रुपये, कोलकाता में 70 से 75 रुपये और चेन्नई में ये भाव 60 रुपये किलो के उपर ही है. नासिक के व्यापारियों की माने तो फिलहाल प्याज की कीमत गिरने नहीं जा रही है. यहां थोक भाव 4400 प्रति क्विंटल है.
जानकार बताते हैं कि पिछले साल के सूखे ने और इस बार मॉनसून की देरी ने मुश्किलें बढ़ा दीं. इस बार कई जगहों पर मूसलाधार बारिश की वजह से बड़े पैमाने पर प्याज की फसल भी बर्बाद हो गई. नतीजा मंडियों में सप्लाई कम हो गया और कीमतें खरीदारों को रुलाने लगीं. प्याज की बढ़ी कीमतों से दिल्ली सरकार लोगों को राहत देने की तैयारी में हैं. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया है कि 80 रुपए बिकने वाला प्याज वो 24 रुपए में मुहैया कराएंगे.
पाकिस्तान में महिलाओं पर किस तरह के अत्याचार होते हैं इसके आए दिन उदाहरण सामने आते रहते हैं। इसी बीच पाकिस्तान से एक युवती भागकर अमेरिका पहुंच गई है। उसे पाकिस्तानी अधिकारियों ने छुपकर जीने पर मजबूर कर दिया था। वह अगस्त में भागकर अमेरिका पहुंच गई और उसने अमेरिका से राजनीतिक शरण देने को कहा है। इस युवती का नाम गुलालाई इस्माइल है।
इस्माइल को पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसलिए निशाने पर लिया है क्योंकि उन्होंने देश की सेना द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों को उजागर किया था। उनपर पाकिस्तान ने राजद्रोह का आरोप लगाया गया था जिसके बाद वह भागकर अमेरिका आ गईं। रिपोर्ट के अनुसार वह वर्तमान में अपनी बहन के साथ ब्रूकलिन में रह रही हैं। उन्होंने अभी तक यह नहीं बताया है कि वह कैसे पाकिस्तान से भागकर आईं क्योंकि उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी हवाई अड्डे से उड़ान नहीं भरी है।
इस्माइल ने कहा, 'मैं आपको इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दूंगी। मेरी देश से भागने की कहानी बहुत से लोगों की जान को खतरे में डाल सकती है।' वहीं कोई भी राजनेता इसपर टिप्पणी ककरने से बच रहा है। न्यूयॉर्क में इस्माइल ने कुछ प्रमुख मानवाधिकार रक्षकों और कांग्रेस नेताओं के कर्मचारियों से मिलना शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि उसके पीछे सुरक्षा अधिकारी थे लेकिन उसका पता नहीं लगाया जा सका।
इमरान खान से मांगी थी सुरक्षा
इस्माइस ने पाकिस्तानी सेना द्वारा यौन शोषण की घटनाओं को उजागर करने की कोशिश की थी। देश की महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से उनपर देशद्रोह का आरोप लगाया गया। महिला कार्यकर्ताओं के एक समूह ने प्रधानमंत्री इमरान खान को पत्र लिखकर इस्माइल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी। उन्होंने अपने ऊपर लगे देशद्रोह के मामले को गलत बताया है।
साउथ सुपरस्टार नागार्जुन के खेत में सड़ी हुई लाश मिलने से हड़कंप मच गया है। पापिरेड्डीगुडा गांव (Papireddyguda village) में स्थित नागार्जुन की जमीन से एक अज्ञात शव बरामद हुआ जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इस गांव में तेलुगु स्टार नागार्जुन की तकरीबन 40 एकड़ जमीन है। हालांकि ये जमीन लंबे समय से इस्तेमाल नहीं की जा रही थी। खबरों की मानें तो पिछले दिनों ही नागार्जुन की पत्नी ने इस खेत का दौरा किया था। इस जमीन के आसपास कुछ किसानों द्वारा खेती की जा रही थी। तभी दुर्गंध महसूस हुई। जिसके बाद यह मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक ये लाश इतनी सड़ चुकी है कि पहचाननी मुश्किल हो रही है। हालांकि ये साफ है कि ये लाश किसी आदमी की है और मौत को तकरीनब 4-6 महीने गुजर चुके हैं। बता दें नागार्जुन के परिवार की तरफ से अब तक इस मामले में कोई बयान नहीं आया है। पुलिस कर्मियों ने इस जगह से सभी सेंपल ले लिए हैं। पुलिस ने गुरुवार को कथित तौर पर आईपीसी की धारा 174 के तहत संदिग्ध मौत का मामला दर्ज किया है। इन दिनों नागार्जुन 'बिग बॉस तेलुगु' के तीसरे सीजन की होस्ट कर रहे हैं।
एक महिला अपने ही घर के बाथरूम में लॉक हो गई. वह छह दिन तक अकेली ही बंद रही जिसके बाद उसे रेस्क्यू किया गया. ये घटना फ्रांस के डिनान नाम की जगह की है. महिला की उम्र 83 साल है, उनके नाम का खुलासा नहीं किया गया है. महिला अकेली ही अपने घर में रहती थीं. पुलिस ने जब महिला को रेस्क्यू किया तो वह काफी कमजोर हो चुकी थीं. कई दिनों तक उनसे संपर्क नहीं हो पाने के बाद महिला की एक भतीजी ने पुलिस को सूचना दी थी. पुलिस ने कहा है कि उन्होंने 6 दिनों से बंद महिला को रेस्क्यू कर लिया है. लेकिन यह नहीं बताया गया कि किस तरह वह 6 दिनों तक जिंदा रहने में सफल रहीं.
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, महिला का बाथरूम काफी गंदी हालत में था. पुलिस ने महिला का पता लगाने के बाद फायरमैन को भी घटनास्थल पर बुलाया. इसके बाद उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती किया गया. महिला की तबीयत में अब सुधार हो रहा है. महिला को रेस्क्यू 10 सितंबर को किया गया था, लेकिन पुलिस ने सोशल मीडिया पर 16 सितंबर को मामले का खुलासा किया.
फोन की बैटरी तय कर रही इंसान का मूडतकनीक ने जिंदगी को कंट्रोल किया है और फोन की बैटरी ने इंसान के मूड को। लोगों का दिमाग फोन की बैटरी के मुताबिक ही काम करता है। लंदन यूनिवर्सिटी के मार्केटिंग रिसर्चर थॉमस रॉबिन्सन और फिनलैंड की अल्टो यूनिवर्सिटी की रिसर्च में यह बात सामने आई है। शोध के मुताबिक, जिन लोगों की फोन की बैटरी हमेशा चार्ज रहती है वो अपनी ऊर्जा का उपयोग लंबे वक्त तक करते हैं। ऐसे लोग ज्यादा ऑर्गनाज्ड होते हैं। वहीं, जो लोग अपने फोन की बैटरी पर ध्यान नहीं देते या अक्सर उनके फोन की बैटरी कम रहती है, वे जीवन में अव्यवस्थित रहते हैं।
बैटरी के मुताबिक तय करते हैं अपना ट्रैवलिंग का समय
शोधकर्ताओं ने लंदन के 23-57 साल के 22 ऐसे लोगों पर शोध किया जो रोजाना कहीं जाने में 60-180 मिनट का वक्त लेते हैं। अगर ये अपनी मंजिल से 10 किलोमीटर दूर हैं या रास्ते में 10 स्टॉपेज हैं, तो ये उसकी तुलना बैटरी से करते हैं। जैसे फोन में बैटरी 50% है तो कितना समय में गंतव्य पहुंचने और बैटरी को फुल करने में कितना समय लगेगा। बैटरी का घटता पावर उन्हें समय से फोन चार्ज के लिए प्रेरित करती है। मसलन कम होती फोन की बैटरी को चार्ज करने के लिए लोग जल्द से जल्द ऐसी जगह पर पहुंचना पसंद करते हैं जहां वो अपना फोन चार्ज कर सकें।
शोध में सामने आया कि जिनका फोन फुल चार्ज होता है वे सकारात्मक महसूस करते हैं और ये सोचते हैं कि फुल बैटरी के साथ कहीं भी जा सकते हैं। वहीं आधी और इससे कम बैटरी वालों में नकारात्मकता बढ़ाती है। प्रतिभागियों से पूछा गया कि दिन ढलने के साथ उन्हें अपने डिवाइस का बैटरी आइकन देखने में कैसा लगता है। उन्होंने कहा, फुल बैटरी देखना सुखद है और 50 प्रतिशत बैटरी देखना चिंता जनक था। वहीं 30 प्रतिशत तक बैटरी पहुंचे पर ये चिंता और भी गहरी हो जाती है।
शोधकर्ताओं का तर्क है कि यह उपकरणों पर बढ़ती हमारी निर्भरता का परिणाम है। फोन की बैटरी कई चीजों पर असर डालती है। इससे फोन मैप, डिजिटल वॉलेट, डायरी, एंटरटेनमेंट भी प्रभावित होता है। डॉ. रॉबिन्सन कहते हैं- रिसर्च में हमने पाया है कि जिन लोगों की फोन बैटरी हमेशा फुल रहती है या जो हमेशा उस पर नजर बनाए रहते हैं, वे लोग उच्च स्तर के प्रभार को बनाए रखने के लिए बेहतर कदम उठाते हैं।
इसके विपरीत, जो बैटरी चार्ज नहीं रखते हैं वे अव्यवस्थित और किसी भी काम को सही ढंग करने में पीछे रहते हैं।
शोध के मुताबिक, जिनके फोन में बैटरी कम होती है, वे दूसरों पर निर्भर रहते हैं, इनका सामाजिक दायरा भी कम रहता है। जो लोग फोन की बैटरी को प्रभावी ढंग से मैनेज नहीं कर पाते और अपने जीवन का प्रबंधन करने में भी दिक्कतों का सामना करते हैं।
एक कंपनी अपने एम्प्लॉई को खुद सैलरी तय करने की इजाजत देती है. लंदन की इस कंपनी का नाम है ग्रांटट्री (GrantTree). यह कंपनी बिजनेस कंपनियों को सरकारी फंड हासिल करने में मदद करती है. ग्रांटट्री में काम करने वाली एक महिला ने कहा है कि उन्होंने खुद ही अपनी सैलरी 27 लाख रुपये से बढ़ाकर 33 लाख रुपये सालाना कर लिया. (Photo- GrantTree)
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रांटट्री में काम करने वाली 25 साल की सीसिलिया मंडुका ने बताया कि अपनी सैलरी करीब 6 लाख रुपये सालाना बढ़ाने को लेकर उनके मन में कई तरह की दुविधा थी. असल में इस कंपनी के एम्प्लॉई को सैलरी बढ़ाने को लेकर अपने कलीग से चर्चा करनी होती है.
सीसिलिया ने कहा कि उन्हें पता था कि उनका काम बदल गया है और वे टार्गेट से काफी आगे पहुंच गई थीं. जब उन्होंने अपने कलीग से बात की तो उन्होंने भी सीसिलिया का समर्थन किया कि उनकी सैलरी ग्रांटट्री कंपनी में करीब 45 स्टाफ काम करते हैं. सभी स्टाफ खुद अपनी सैलरी तय कर करते हैं और जब चाहें अपनी सैलरी में बदलाव भी कर सकते हैं. हालांकि, सैलरी बढ़ाने से पहले स्टाफ पहले ये पता करते हैं कि उनके जैसे काम के लिए अन्य कंपनी में कितना वेतन दिया जा रहा है.