छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ (21107)

  • छत्तीसगढ़ की सभी 11 सीटों को लेकर कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की दिल्ली में हुई बैठक
  • मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बैठक के बाद दी जानकारी, कहा- कार्यकर्ताओं से लिए गए हैं फीडबैक

रायपुर.  लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने अपनी मंशा साफ कर दी है। इस बार पार्टी नए चेहरों पर ही दांव लगाएगी। दिल्ली में हुई कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की शुक्रवार को हुई बैठक के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया कि प्रदेश की सीटों पर इस बार युवाओं और महिलाओं को तरजीह मिलेगी। 

प्रदेश की 11 लोकसभा सीटों में से 10 पर 15 साल से भाजपा का कब्जा

  1.  

    बैठक में प्रदेश की सभी 11 लोकसभा सीटों को लेकर चर्चा की गई।  चर्चा में प्रत्याशियों के नाम तय करने और चुनाव की रणनीति बनाने पर फोकस किया गया। चुनाव में नए चेहरों को मैदान में उतारने की रणनीति पर कांग्रेस काम कर सकती है। इस आशय पर बैठक में चर्चा की गई है। स्क्रिनिंग कमेटी की बैठक के बाद दिल्ली में मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि बैठक में सभी सीटो पर चर्चा हुई है। 

     

  2.  

    पीसीसी अध्यक्ष बघेल ने कहा कि इस बार युवाओं, महिलाओ और आदिवासी, जनरल सभी को प्रतिनिधित्व देने पर बात की गई। इसके लिए कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी लिए गए हैं। हालंकि चुनाव मैदान में इस बार ज्यादातर नए चहेरे होंगे। महिलाओं को भी तरजीह दी गई है। लोकसभा चुनाव की तैयारी को लेकर आलाकमान से चर्चा के लिए छत्तीसगढ़ कांग्रेस के बड़े नेता व पदाधिकारी दिल्ली गए हुए हैं।

     

  3.  

    दिल्ली में गुरुवार को कांग्रेस की चुनाव समिति और फिर शुक्रवार को स्क्रिनिंग कमेटी की बैठक हुई। इसमें ही चुनाव की रणनीति व प्रत्याशियों के नामों को लेकर चर्चा की गई। पिछले तीन बार के लोकसभा चुनावों को देखें तो प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति खराब रही है। तीनों चुनावों में प्रदेश की 11 में से 10 सीटों पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। विधानसभा चुनावों में भी सत्ता पर पिछले 15 सालों से काबिज भाजपा को पटखनी देकर कांग्रेस ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की है। ऐसे में अब कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में भी अच्छे परिणाम की उम्मीद है।

रायपुर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट में एक खास व्यवस्था शुक्रवार को देखने मिली। इस अवसर पर पूरे एयरपोर्ट में अलग-अलग सेक्शन में महिलाओं को ड्यूटी पर तैनात किया गया था। सुरक्षा से लेकर विमान परिचान और यातायात से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां महिला अधिकारी-कर्मचारियों के द्वारा ही संभाली गई। कुल मिलाकार पूरे एयरपोर्ट की कमान महिलाओं के हाथों में ही नजर आई।

इसी के साथ एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने रायपुर एयरपोर्ट में तैनात महिला अधिकारियों-कर्मचारियों की तस्वीर ट्विटर पर भी जारी कर उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। इस ट्विट में लिखा है- एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया लैंगिक पूर्वाग्रह से मुक्त कार्यशील वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्घ है।

रायपुर- आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है. पूरे देश में महिलाओं के जज्बे व हौसले को सलाम किया जा रहा है. प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत, मंत्री टीएस सिंहदेव, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष व भाजपा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने नारी शक्ति को बधाई दी है.  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर कहा कि नारी शक्ति के दृढ़ संकल्प और समर्पण को प्रणाम एवं समस्त महिलाओं को अनंत शुभकामनाएं दी. विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने नारी ममता का सम्मान हो तुम, नारी संस्कारों की जान हो तुम, स्नेह प्यार और त्याग की नारी एकलौती पहचान हो तुम. आप सभी को विश्व महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. वहीं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने भी महिला दिवस पर बधाई दी.

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने आँगन से अंतरिक्ष व रसोई से देश की रक्षा तक नारीशक्ति हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना कर नित नए कीर्तिमान रच रहीं हैं. आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य पर मैं देश की हर उस नारी को सलाम करता हूं, जो अपनी कड़ी मेहनत व लगन से सभी के लिए एक उदाहरण. नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने बधाई देते हुए कहा कि कोमल है तू कमज़ोर नहीं, शक्ति का नाम ही नारी है. जग को जीवन देने वाली, मौत भी तुझसे हारी है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस  के अवसर पर समस्त मातृशक्तियों को आदरपूर्वक नमन.

 

 

 

 

 

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर वाराणसी के सौंदर्यीकरण की परियोजना को समय से शुरू कराने में सहयोग नहीं देने का शुक्रवार को आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर संपर्क मार्ग का शिलान्यास करने के बाद जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि पहले तीन सालों में प्रदेश सरकार ने हमें सहयोग नहीं किया। वाराणसी में विकास की परियोजनाएं तभी शुरू हुई जब प्रदेश की जनता ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया। अगर पिछली सरकार से सहयोग मिला होता तो हम इन परियोजनाओं को पहले शुरू कर सकते थे।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 70 साल के दौरान किसी ने भी बाबा विश्वनाथ के बारे में नहीं सोचा। सब ने अपनी-अपनी चिंता की। मगर काशी की फिक्र नहीं की।  मोदी ने कहा कि उन्हें काशी विश्वनाथ के लिए निर्माण कार्य शुरू करने पर बेहद खुशी है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से मेरा सपना था कि इस स्थान के लिए कुछ काम करूं। जब मैं राजनीति में नहीं था तब अक्सर यहां आया करता था और सोचता था कि यहां कुछ न कुछ होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भोले बाबा ने तय किया होगा, बातें बहुत करते हो। यहां आओ कुछ करके दिखाओ। 

वाराणसी के सौंदर्यीकरण के बारे में मोदी ने कहा कि यह काशी विश्वनाथ विश्वनाथ धाम की मुक्ति की परियोजना है जो पहले अतिक्रमण से घिरा हुआ था। उन्होंने कहा, ‘ऐसा पहली बार हुआ है जब हमने काशी विश्वनाथ धाम के आसपास की इमारतों का अधिग्रहण किया और अतिक्रमण को हटाया, जिसके बाद 40 प्राचीन मंदिर सामने आए। उनमें से अनेक पर अतिक्रमण कर लिया गया था और लोगों ने अपनी रसोई घर बना लिए थे।’ प्रधानमंत्री ने इस परियोजना में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि मैंने अनेक सरकारी कर्मचारियों को देखा है, क्योंकि मैं लंबे समय तक मुख्यमंत्री भी रहा लेकिन मैं गर्व के साथ कहना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा यहां जिन अधिकारियों की टीम को काम सौंपा गया वह भक्ति और सेवा भाव से काम कर रही है। 

उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी संपत्ति देने के लिए मनाना और इसे राजनीतिक रंग ना लेने देना एक बहुत बड़ा काम था। मैं काशी के लोगों को भी धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने अपनी संपत्ति बाबा विश्वनाथ को दे दी। यह उनका सबसे बड़ा दान है। मोदी ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर को शत्रुओं ने निशाना बनाया था और इसे नष्ट करने की कोशिश की थी लेकिन लोगों की आस्था के कारण इसमें पुनर्जन्म लिया। जब महात्मा गांधी यहां आए थे तो उन्होंने इस स्थान की दुर्दशा पर दुख जताया था। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दिए गए अपने संबोधन में अपने इन विचारों को व्यक्त किया था। प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालय को सुझाव दिया कि वह इस संपूर्ण परियोजना को एक केस स्टडी बनाकर उस पर शोध करें ताकि जब यह परियोजना पूरी हो तो पूरी दुनिया इसके बारे में जाने। 

मोदी ने कहा कि हम खुदाई में अतिक्रमण हटाने के दौरान मिले 40 प्राचीन मंदिरों के इतिहास के बारे में पता लगाने की भी कोशिश करेंगे और सरकार इन मंदिरों का पूरा ख्याल रखेगी। यह परियोजना मंदिरों के संरक्षण कार्य का मॉडल होगा, जिसमें प्राचीन आस्था और आधुनिक तकनीक का संयोजन होगा इससे काशी को एक नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘यह काम मेरे ही नसीब में लिखा था। वर्ष 2014 में जब मैं यहां आया था तो कहा था कि मैं यहां आया नहीं बल्कि लाया गया हूं। हो सकता है कि भोले बाबा ने मुझे यहां बुलाया हो।’ इसके पूर्व प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए।

रायपुर। राजधानी रायपुर के उरला थाना क्षेत्र के बिरगांव, संतोषीपारा में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। कर्ज से परेशान एक परिवार के तीनों सदस्य मंगलवार की आधी रात खुदकुशी करने के लिए फांसी के फंदे पर झूल गए। सौभाग्य से जवान बेटे की जान इसलिए बच गई कि फंदा बड़ा होने से उसका पैर जमीन पर छू गया, जबकि दंपती की मौत हो गई। उसी ने घटना की जानकारी उरला पुलिस को दी। पुलिस ने दंपती के शव को फांसी के फंदे से उतारकर आंबेडकर अस्पताल भेजा। दोपहर में पोस्टमार्टम उपरांत शव परिजनों को सौंप दिया गया। इस घटना से बिरगांव में सनसनी फैल गई है। परिवार में मातम का माहौल है।

उरला पुलिस के मुताबिक संतोषीपारा निवासी मोहन लाल साहू (45) और राधा साहू (35) अपने 18 साल के बेटे सेवकराम साहू के साथ रहते थे। मोहन लाल ने पिछले साल नमकीन पैक करने वाली मशीन लगाने के लिए 4 लाख रुपये का लोन बैंक से लिया था। इसके अलावा स्थानीय परिचित लोगों से भी लाखों का कर्ज ले रखा था। मशीन लगाने के बाद भी कारोबार नहीं चला। कमाई कम होने से पूरा परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजरने लगा। ऊपर से बैंक समेत करीब 10 लाख से ज्यादा का कर्ज होने से लेनदार परेशान करने लगे थे। रोज-रोज के तगादे से साहू परिवार परेशान था।

खाना खाने के बाद लिया आत्मघाती फैसला

पुलिस का कहना है कि मंगलवार की रात में खाना खाने के बाद मोहन लाल साहू ने अपनी पत्नी राधा साहू और बेटे सेवकराम के साथ बातचीत कर एक साथ फांसी लगाकर जान देने का फैसला लिया। दंपती के साथ बेटे ने भी गले में नायलोन रस्सी का फंदा बांधा। बेटे का फंदा बड़ा होने से उसका पैर जमीन पर छू गया जिससे उसकी जान बच गई। दंपती की फंदे में लटकते ही दम घुटने से मौत हो गई। माता-पिता की लाश देख घबराए बेटे ने पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया।

बिलासपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट में गुरुवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान बड़ी टिप्पणी की। मामले में फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि शादी करने से इंकार करना आत्महत्या के लिए बाध्य करना नहीं माना जा सकता। यदि शादी से इंकार करने पर कोई लड़की या लड़का आत्महत्या करता है, तो दूसरे पक्ष पर कोई मुकदमा नहीं हो सकता। ऐसे मामलों में यदि लड़की या लड़का आत्महत्या करते हैं, तो यह भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत दंडनीय अपराध का मामला नहीं माना जा सकता।

छत्तीसगढ़ के उच्च न्यायालय ने माना कि विवाह से इनकार केवल आत्महत्या के लिए उकसाने का कारण नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी दी गई। जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल ने दो वर्ष पूर्व हुई एक घटना से जुड़े मामले में यह फैसला दिया।

दरअसल दो वर्ष पूर्व धमतरी जिले के कोहका कोलियारी गांव की रहने वाली कुसुमलता नामकी युवती की शादी की बात मानसिंह नामक युवक से चल रही थी। इसी बीच लड़के वाले लड़की के घर उसे देखने आए। बाद में किन्हीं कारणों से लड़के वालों ने शादी के बाद इंकार कर दिया। इस बात से आहत होकर युवती ने आत्महत्या कर ली थी।

रायपुर। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आदिवासियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर राज्य सरकार ने एक बेहद अहम कदम उठाया है. सरकार ने आदिवासियों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. 6 सदस्यों वाली इस उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एके पटनायक को बनाया गया है. सेवानिवृत्त जस्टिस पटनायक के नेतृत्व में कमेटी सभी मामलों की जांच करेगी और समीक्षा करेगी कि आदिवासियों के खिलाफ दर्ज मामले वास्तव में सही है या फिर फर्जी तरीके से दर्ज किया गया है.  गौरतलब है कि कांग्रेस ने चुनाव में भी आदिवासियों के खिलाफ दर्ज मामलों को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया था.

ये हैं कमेटी के सदस्य

इस कमेटी में जस्टिस पटनायक के अलावा महाअधिवक्ता/ अतिरिक्त महाअधिवक्ता, उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ सदस्य होंगे. इनके साथ ही गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, सचिव आदिम जाति अनुसूचित जाति विकास विभाग, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) छत्तीसगढ़, आयुक्त बस्तर संभाग जगदलपुर होंगे. गृह विभाग के अपर सचिव इस कमेटी में सदस्य सचिव होंगे.

आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस पिछली सरकार पर नक्सल मामलों को लेकर सवाल उठाते रही है.  मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी बस्तर में आदिवासियों के खिलाफ फर्जी कार्रवाई पर लगातार सरकार से जवाब तलब करते रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट में आदिवासियों को नक्सली बताकर प्रताड़ित करने के कई मामलों में तत्कालीन सरकार को मुंह की खानी पड़ी और ऐसे मामलों को लेकर कोर्ट ने कई बार राज्य सरकार को लताड़ चुकी है.

गुप्तांगों में डाले गए थे पत्थर

आप नेता सोनी सोरी भी उन्हीं में से एक है. पुलिस ने सोनी सोरी और उनके रिश्तेदारों को नक्सली बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की थी. सोनी सोरी पेशे से बस्तर के एक स्कूल में शिक्षिका थी. सोनी सोरी तब चर्चा में आई थीं जब अक्टूबर 2011 में वे पुलिस प्रताड़ना का शिकार हुईं. हिरासत में लिए जाने के एक हफ्ते के भीतर ही सोरी ने ये इल्ज़ाम लगाया था कि पुलिस हिरासत में उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और उनके गुप्तांगों में पत्थर डाले गए. कोलकाता के एक अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने सुप्रीम कोर्ट को एक रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें सोरी के जननांगों में बाहरी चीजें पाई गईं थी. बाद में सोनी सोरी के खिलाफ पुलिस कोई भी आरोप साबित नहीं कर पाई और कोर्ट ने उन्हें नक्सल आरोपों से बरी कर दिया था.

सात साल जेल में रहने के बाद बरी

सत्रह साल की एक आदिवासी लड़की मारिया (बदला हुआ नाम) पर साल 2008 में नक्सलियों के साथ एक गांव पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस आदिवासी लड़की के खिलाफ अदालत में कोई सबूत या गवाह नहीं पेश कर सकी. अदालत ने उसे बरी कर दिया. हालांकि उसे लगातार सात साल तक जेल में बंद रहना पड़ा.

सोनी सोरी, मारिया के अलावा बड़ी संख्या में ऐसे आदिवासियों जेलों में बंद हैं. पुलिस ने उन्हें नक्सली बताकर जेल में डाल दिया था लेकिन बताया जा रहा है कि इस तरह के 90 प्रतिशत मामलों में कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया.

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव को लेकर दिल्ली में छत्तीसगढ़ चुनाव समिति की अहम बैठक हुई. 15 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड में तकरीबन ढाई घंटे तक बैठक चली जिसमें प्रदेश की सभी 11 लोकसभा सीटों के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों के नाम पर चर्चाएं हुई.

बैठक में एआईसीसी के छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया, दोनों प्रभारी सचिव डॉ चंदन यादव और डॉक्टर अरुण उरांव, पीसीसी अध्यक्ष व सीएम भूपेश बघेल के साथ ही चुनाव समिति के सदस्य मौजूद थे.

नई दिल्ला के गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर स्थित बंगला नंबर 15  कांग्रेस के वॉर-रूम के तौर पर जाना जाता रहा है. पिछले कई सालों से यह जगह कांग्रेस के बंद दरवाजों के पीछे होने वाली अहम राजनीतिक बैठकों के लिए चर्चित रहा है.

रायपुर- पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में हुई एयर स्ट्राइक को क्या बीजेपी लोकसभा चुनाव में भुनाने जा रही है? दरअसल यह सवाल इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी डाक्टर अनिल जैन ने अपने एक बयान में कहा है कि- ‘निश्चित तौर पर हम इसे एक उपलब्धि के तौर पर लेंगे’ सरकार यदि अच्छा काम नहीं करती तो इस्तीफा किससे मांगा जाता है? ठीक ऐसे ही यदि सरकार अच्छा काम कर रही है तो वाहवाही किसकी होनी चाहिए”
 
अनिल जैन का यह बयान यह बताने के लिए काफी है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी बालकोट एयर स्ट्राइक को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने जा रही है. स्ट्राइक के जरिए बीजेपी एग्रेसिव कैंपेनिंग कर सियासी फायदा ढूंढ रही है. अनिल जैन मानते हैं कि यह एक बड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह से निर्लज्जता के साथ सेना के शौर्य की खिल्ली उड़ाई जा रही है. इसे हम देश के सामने लाएंगे. जिन लोगों ने सेना के शौर्य को नगण्य करने की कोशिश की है. ऐसे लोग पाकिस्तान में जाकर बैठ जाएं. अनिल जैन कहते हैं कि  सेना का शौर्य है, सेना मजबूत है लेकिन इसके पीछे जो मजबूत राजनीतिक शक्ति की जरूरत है वह मोदी के पास है. 
 
भूपेश बघेल पर पलटवार
 
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उस बयान पर भी अनिल जैन ने टिप्पणी की, जिसमें सवाल उठाते हुए पूछा गया था कि मुंबई हमले में ड्रेस बदलने पर तत्कालीन गृहमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था, तो पुलवामा की घटना के बाद फोटोशूट करा रहे मोदी पर बीजेपी खामोश क्यों है? जैन ने कहा कि यह बयान हास्यास्पद है. प्रधानमंत्री का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम था. घटना जब घटी, तो इसकी तात्कालीन सूचना मिलने के बाद प्रधानमंत्री को क्या दिग्विजय सिंह और भूपेश बघेल को बताना चाहिए कि उन्हें क्या करना है. इन लोगों के नेता जो महीनों छुट्टियां मनाते हैं, वे लोग परिश्रम की पराकाष्ठा पर उंगली उठाते हैं. मोदी ने एक बार नहीं बल्कि दो-दो बार साबित किया है कि सर्जिकल स्ट्राइक के लिए मजबूत राजनीतिक शक्ति किसके पास है. जितनी बार मोदी पर उंगली उठेगी, उतनी बार ये एक्सपोज होंगे. 
 
सेना की कार्यवाही पर श्रेय लेना सेना का अपमान- कांग्रेस
 
इधर बीजेपी प्रदेश अनिल जैन के बयान पर कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि यह बेहद बचकाना और स्तरहीन बयान है. सेना की कार्यवाही पर श्रेय लेना सेना का अपमान है. मोदी के फैसले सही भी हो सकते हैं और गलत भी हो सकते हैं. मोदी सरकार अपने राजनीतिक फैसले पर बात करे. सेना की कार्यवाहियों पर नहीं. पुलवामा में जिस तरह से इंटेलीजेंस फेल हुआ, उसकी बात करनी चाहिए, जिसकी वजह से 40 जवानों की शहादत हो गई. नरेंद्र मोदी गलती स्वीकार करने की बजाए सिर्फ अपनी विफलताओं से जनता का ध्यान हटाने की चाल चल रहे हैं. जनता इसे समझ रही है. 

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने मंगलवार को फिर साढ़े सात सौ करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) के माध्यम से लिए गए इस लोन को सरकार तीन वर्ष में चुकाएगी।

वह भी करीब साढ़े सात फीसद ब्याज दर पर। दो महीने में यह छठवां मौका है, जब सरकार ने अपनी प्रतिभूति (सिक्योरिटी बांड) बेची है। इससे राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़कर 58 हजार करोड़ के पार पहुंच गया है।

तीन महीने में बेच दिए 7 हजार करोड़ से अधिक का बांड

तीन महीने पुरानी कांग्रेस सरकार अपने इस छोटे कार्यकाल में अब तक सात हजार करोड़ से अधिक का बांड बेच चुकी है। छह बार में लिए गए इस कर्ज के लिए सरकार औसत आठ फीसद ब्याज भरेगी और दो से लेकर छह वर्ष में चुकाएगी।

कर्ज लेना सरकार की मजूबरी

अर्थशास्त्री डॉ. हुनमंत यादव कहते हैं कि बजट की व्यवस्था के लिए सरकार के पास बांड बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य सरकारों के पास टैक्स का विकल्प ज्यादा नहीं बचा है। पेट्रोल जैसी कुछ वस्तुएं हैं जिन पर राज्य टैक्स लगा सकता है, लेकिन इसका सीधा असर जनता पर पड़ेगा। ऐसे में सरकार इससे बचती है।

कर्ज माफी का बोझ 10 हजार करोड़

सत्ता में आने के लिए सरकार ने राज्य के किसानों से कृषि ऋण माफ करने का वादा किया था। इसके तहत अब तक सरकार 10 हजार करोड़ रुपये का अल्पकालीन कृषि ऋण माफ कर चुकी है। इसमें ग्रामीण और सहकारी बैंकों का 62 सौ करोड़ तथा व्यवसायिक बैंकों का चार हजार 17 करोड़ रुपये शामिल है। इसके साथ ही सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपये प्रति क्विंटल देने का वादा किया था। इसकी वजह से सरकार पर करीब 54 सौ करोड़ रुपये का बोझ बढ़ा है।

विकास कार्यों पर पड़ रहा असर

सरकार के दनादन कर्ज लेने का असर राज्य में अधोसंरचना विकास समेत अन्य विकास कार्यों पर पड़ रहा है। हाल ही में संपन्न् हुए विधानसभा के बजट सत्र में विधायकों ने मनरेगा का काम तक ठप होने का आरोप लगाया था। अर्थशास्त्री भी मान रहे हैं कि कर्ज की राशि ब्याज के साथ चुकाना है तो इसका असर कहीं न कहीं पड़ेगा ही।

जनवरी से अब तक

तारीख कर्ज की राशि ब्याज दर अवधि (वर्ष)

01 जनवरी 2000 7.94 04

15 जनवरी 1500 7.64 02

 

05 फरवरी 1000 8.4 06

12 फरवरी 1000 7.93 05

 

26 फरवरी 1000 8.18 06

05 मार्च 750 7.48 03

 

(नोट- राशि करोड़ रुपये में)

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