छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ (21107)

गोंदेरास के जंगल में तड़के हुई मुठभेड़, हथियार समेत बड़ी संख्या में नक्सली सामान बरामद
बड़े नक्सली नेताओं समेत 70 से ज्यादा नक्सलियों के मौजूद होने की थी सूचना, मारे गए नक्सलियों की पहचान नहीं
दंतेवाड़ा. पुलिस और डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) की संयुक्त टीम ने बुधवार तड़के नक्सलियों के कैंप पर धावा बोल दिया। सुरक्षाबलों ने महिला नक्सली समेत दो वर्दीधारी नक्सलियों को मार गिराया। हालांकि बाकी नक्सली जंगल का फायदा उठाकर भाग निकले। मारे गए नक्सलियों की अभी शिनाख्त नहीं हो सकी है। पुलिस ने मौके पर हथियार समेत भारी मात्रा में सामान बरामद किया है। खास बात यह है कि पहली बार नक्सलियों से मुठभेड़ में महिला कमांडो को भी शामिल किया गया।
दंतेवाड़ा-सुकमा बॉर्डर के जंगलों में 7 से ज्यादा कैंप लगा रखे थे नक्सलियों ने
मुठभेड़ के बाद नक्सलियों से बरामद सामान लेकर लौटते जवान।
पुलिस को दंतेवाड़ा-सुकमा बॉर्डर पर गोंदेरास के जंगलों में मंगलवार को बड़ी संख्या में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। साथ ही यह भी पता चला था कि वहां पर नक्सलियों के कई बड़े नेताओं की भी मौजूदगी है। इस पर अरनपुर थाने से एसटीएफ और डीआरजी की एक टीम बनाकर देर शाम उन्हें रवाना किया गया। इसके बाद टीम वहां पहुंची तो पता चला कि नक्सलियों ने सात से ज्यादा कैंप लगा रखे थे। जवानों ने घेराबंदी की और तड़के 5 बजे मुठभेड़ शुरू हो गई।
करीब एक घंटे से ज्यादा चली इस मुठभेड़ में जवानों ने वर्दीधारी महिला नक्सली को ढेर कर दिया। बाकी नक्सली जंगल का फायदा उठाते हुए भाग निकले। जवानों के मुताबिक, मौके से भागे नक्सलियों में से कई को गोली भी लगी है। जवानों को मौके से इंसास राइफल, 12 बोर बंदूक, पाइप बम के साथ सामानों का जखीरा बरामद हुआ है। हालांकि इसमें क्या-क्या और है, ये जवानों के लौटने के बाद ही पता चल सकेगा। दंतेवाड़ा एसपी अभिषेक पल्लव ने मुठभेड़ की पुष्टि की है।
पहली बार मुठभेड़ में शामिल हुई महिला कमांडो, बंद कराए गए मोबाइल टावर
नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में पहली बार महिला कमांडो को भी शामिल किया गया। टीम के साथ 10 महिला कमांडो भेजी गई थीं। यह महिला कमांडो जिला पुलिस बल का हिस्सा हैं। इनमें सरेंडर कर चुकी महिला नक्सली भी शामिल हैं। जिस टीम ने नक्सलियों के साथ मुठभेड़ की, उसमें 2-3 सरेंडर महिला नक्सली भी शामिल थीं। वहीं इस मुठभेड़ से पहले उस क्षेत्र के सभी मोबाइल टावर पुलिस ने बंद करा दिए थे। इसका बड़ा कारण कि नक्सलियों के संतरी जवानों के पहुंचने की सूचना न दें सकें।

साईंटांगरटोली स्थित गोदाम से ड्यूटी खत्म कर देर शाम लौट रहे थे अपने गांव लोदाम
गोदाम से निकलने के बाद कुछ दूरी पर बाइक सवार बदमाश जबरदस्ती बैठा कर ले गए
जशपुर. जिले से लगती झारखंड बॉर्डर से मंगलवार देर शाम बाइक सवार बदमाश एक सीमेंट कंपनी के सहायक प्रबंधक का अपहरण कर ले गए। सहायक प्रबंधक साईंटांगरटोली गांव स्थित गोदाम से ड्यूटी खत्म कर अपने गांव लौट रहे थे। सरगुजा आईजी ने सहायक प्रबंधक के अपहरण की पुष्टि की है। हालांकि स्थानीय पुलिस कुछ भी कहने से बच रही है।
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 जानकारी के मुताबिक, पत्थलगांव के सीमेंट व्यापारी मदन अग्रवाल का साईंटांगरटोली में सीमेंट का गोदाम है। इस गोदाम में लोदाम निवासी सद्दाम हुसैन सहायक मैनेजर के तौर पर कार्यरत हैं। बताया जा रहा है कि सद्दाम हुसैन मंगलवार देर शाम काम खत्म करने के बाद गांव लौट रहे थे। इसी दौरान गोदाम से कुछ दूर आगे बाइक सवार बदमाशों ने उनका अपहरण कर लिया।
बदमाश उन्हें जबरदस्ती बाइक पर बिठाकर ले गए। बताया जा रहा  है कि दो बदमाश थे, जिन्होंने झारखंड से लगती सीमा पर वारदात को अंजाम दिया। सद्दाम हुसैन के अपहरण की पुष्टि सरगुजा आईजी केसी अग्रवाल ने की है। हालांकि जशपुर पुलिस अभी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रही है।

सरोना इलाके के गांव सारंडा के जंगल में पहाड़ी पर मंगलवार सुबह 9 बजे हुई थी भिड़ंत
जब भालू के बच्चे की रोने की आवाज सुन लोग वहां पहुंचे तो मादा भालू भी वहीं मौजूद थी   
कांकेर. जंगल में पहाड़ी की ओर से दिन से भालू के रोने की आवाज आ रही थी। मंगलवार सुबह 9 बजे भालू की मदद करने के इरादे से बीटगार्ड, फायर वाचर तथा गांव के लोग गए। मादा भालू ने मदद करने गए लोगों पर ही हमला कर दिया। इस हमले में एक दूसरे को बचाते हुए दो दोस्तों की मौत हो गई। दो अन्य लोग घायल हैं।
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 फायर वाचर राजकिशोर ने भालू के रोने की जानकारी मंगलवार सुबह बीट गार्ड दुर्गेश कश्यप को दी। मदद करन के लिए मंगलवार सुबह 9 बजे भालू को देखने बीट गार्ड दुगेश कश्यप, फायर वाचर राज किशोर, श्रवण सुरोजिया व महेंद्र कुमार जंगल गए।

देखा तो भालू के बच्चे के पास बैठी थी मां
घटना के प्रत्यक्षदर्शी बीट गार्ड दुर्गेश व फायर वाचर राजकिशोर ने देखा तो भालू का बच्चा बैठा था। पास ही मादा भालू भी थी। वापस आ रहे थे तभी मादा भालू ने पीछे से फायर वाचर श्रवण पर हमला कर दिया। उसे बचाने का प्रयास राजकिशोर ने किया तो भालू ने राजकिशोर को भी बुरी तरह घायल कर दिया। भालू पीछे नहीं हटा।

जान बचाकर भागा बीट गार्ड
बीट गार्ड कश्यप भागते हुए हुए गांव गया। लोगों को मदद के लिए बुलाया। सारंडा के रोशन नेताम अपने दोस्तों को बचाने जंगल कुत्ता लेकर गया। मौके पर पहुंचे ही थे कि भालू ने रोशन पर भी हमला कर दिया। कई स्थानों पर चीर दिया। रोशन की मौके पर ही मौत हो गई। गांव वालों में शामिल रतन नेताम पर भी भालू ने हमला किया। उसका हाथ टूट गया। घायल राजकिशोर व रतन नेताम को संजीवनी से अस्पताल पहुंचाया गया। इसके बाद मृतक रोशन नेताम का शव जिला अस्पताल लाया गया।

6 घंटे बाद जंगल में मिली फायर वाचर की लाश
घायलों को अस्पताल भेजने के बाद ग्रामीण व डिप्टी रेंजर रहमान खान, आसपास के वनपाल समेत अन्य वन कर्मी जंगल में लापता फायर वाचर श्रवण सुरोजिया की खोजबीन में निकले। वनकर्मी व गांव के लोग भालू के डर से सतर्कता के साथ खोजते रहे। 6 घंटे बाद दोपहर तीन बजे जंगल में लापता फायर वाचर श्रवण सुरोजिया की भी लाश मिली।

रायगढ़. यात्रियों से प्रीमियम एक्सप्रेस का किराया वसूल कर पैसेंजर ट्रेन की सवारी कराने वाले एसईसीआर रेलवे को उपभोक्ता फोरम में जुर्माना लगाया है। उपभोक्ता फोरम ने मामले में दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद एसईसीआर के बिलासपुर मंडल प्रबंधक और मुख्य स्टेशन प्रबंधक को एक माह के भीतर यात्री से किराया में वसूल की गई अतिरिक्त राशि और रायपुर-दिल्ली के एयर टिकट का किराया कुल 6964 रुपए लौटने का आदेश दिया है। साथ ही एक हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति भी यात्री को देने के निर्देश दिए हैं।
दैनिक भास्कर ने 25 जनवरी को रेलवे द्वारा यात्रियों से पैसेंजर ट्रेनों की सवारी के लिए प्रीमियम एक्सप्रेस का किराया वसूल करने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद रेलवे की सेवा से नाराज यात्री कालिंदीकुंज निवासी व्यवसायी संतोष मित्तल ने रेलवे द्वारा अधिक किराया और ट्रेन विलंब के कारण ट्रेन छूटने पर अपने अधिवक्ता मुकेश गोयल के माध्यम से फोरम में परिवाद दाखिल किया।
ट्रेन की देरी के चलते यात्री का हुआ नुकसान
परिवादी को 26 जनवरी 2019 को दिल्ली निवासी अपने रिश्तेदार की शादी में जाना था। 25 जनवरी की सुबह 6.20 बजे ट्रेन में सवार हुए थे। इंटरनेट से बुक कराए गए सीट डी-8 के 103 नंबर पर जाकर बैठे। बिलासपुर से उन्हें बिलासपुर-निजामुद्दीन हमसफर एक्सप्रेस से दिल्ली जाना था, लेकिन जनशताब्दी एक्सप्रेस अपने नियमित समय से लेट छूटी। बिलासपुर 8.40 की बजाय यह 11 बजे पहुंची, जिससे उनकी हमसफर एक्सप्रेस छूट गई। विलंब का कारण पूछने पर टीटीई ने जनशताब्दि को पैसेंजर ट्रेन के रूप में चलने की बात बताई।
मजबूरन फ्लाइट से दिल्ली जाना पड़ा
टिकटका पैसा अधिक लेने की बात पर टीटीई उच्च अफसरों से बात करने को कहा। मजबूरन उन्हें जनशताब्दी से रायपुर जाना पड़ा, और ट्रेन नहीं होने की स्थिति में रायपुर से दिल्ली के लिए उन्होंने 8379 रुपए खर्च कर एयर टिकट खरीदना पड़ा। जिससे वे 26 जनवरी को शादी समारोह में शामिल हो सके। वापस लौटने के बाद उन्होंने रेलवे के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में परिवाद दाखिल किया था। जिसमें उन्होंने टिकट में अंतर की राशि, एयर टिकट का किराया और 50 हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति की मांग की थी। इस पर विचार करने के बाद फोरम में यात्री के पक्ष में निर्णय सुनाया है।

यात्री सलाहकार समिति के सदस्यों की भी सुनवाई नहीं
रेलवे के जोनल और डिवीजनल यात्री सलाहकार समिति के सदस्यों ने रेलवे की इस मनमानी पर रोक लगाने जीएम को पत्र भी लिखा गया, लेकिन जीएम ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई। बिलासपुर जेडआरयूसीसी सदस्य राजू अग्रवाल ने पत्र लिखकर इस अनियमितता में सुधार की मांग की थी। इसके अलावा खरसिया और रायगढ़ से भी सदस्यों ने इसमें सुधार की मांग थी।

दोगुनी हो गई थी शताब्दी ट्रेनों की टिकट बिक्री
जनवरी में ब्लॉक के दौरान सामान्य दिनों की तुलना में जनशताब्दी की टिकट बुकिंग दोगुनी हो गई थी। ब्लॉक के पहले 10 और 11 जनवरी को शताब्दी के एसी कोच में औसत टिकटों की बुकिंग 120 और सामान्य कोच में एक हजार थी, लेकिन 10 दिन बाद 22 और 23 जनवरी को यह बढ़कर एसी कोच में 204 और सामान्य श्रेणी में 2063 पहुंच गई थी। रेलवे ने पैसेंजर की सवारी कराकर यात्रियों से एक्सप्रेस का किराया वसूल किया था।

कई ऐसी बेजरूरत मशीनें और उपकरण खरीद लिए जिन्हें ऑपरेट करने वाले ही नहीं
रायपुर . दाऊ कल्याण सिंह डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की मशीनों और रिनोवेशन में करोड़ों के खेल होने की शिकायत है। मशीन व उपकरणों की खरीदी की प्रक्रिया सीजीएमएससी के माध्यम से की गई। इसके लिए टेंडर भी निकाला गया। इसमें कागजों में तो पूरी पारदर्शिता बरती गई, लेकिन टेंडर में सारे बड़े काम चहेतों को दिए गए।  
इसमें मोटा कमीशन लिए जाने की चर्चा है। प्रबंधन ने ऐसी कई मशीनें और उपकरण खरीद लिए, जिसकी जरूरत  नहीं है। विदेश से मंगवायी वर्चुअल बॉडी यानी प्लास्टिक का पुतला इसमें शामिल है। केवल इसी की खरीदी में साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा खर्च किया गया है।
शिकायत और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद पुलिस ने उन डाक्टरों और अफसरों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है, जो पर्चेस यानी खरीदी के लिए गठित कमेटी में शामिल थे। उन्हें डा. पुनीत के केस में सह अभियुक्त बनाया जाएगा। अफसवरों ने संकेत दिए हैं इन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है। गौरतलब है कि डॉ. पुनीत गुप्ता जब डीकेएस अधीक्षक थे, तब छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के एमडी बी. रामाराव थे। उन्हीं को सारी मशीनों व उपकरणों की खरीदी के लिए प्रस्ताव भेजा गया। उसके बाद सीजीएमएससी के माध्यम से खरीदी का टेंडर जारी किया गया। शिकायत है कि पहले कंपनियों को तय कर लिया गया था कि किस कंपनी ने क्या सामान खरीदना है। उसके बाद उस कमेटी की योग्यता के आधार पर टेंडर जारी किया गया।
पर्चेस कमेटी इसलिए घेरे में : अस्पताल की पर्चेस कमेटी इसलिए गठित की जाती है कि ये स्पष्ट रहे कि कौन सी जरूरत पहले पूरी करनी है और कौन सी बाद में। इस कमेटी में डॉ. प्रफुल्ल दावले, डॉ. कृष्णा ध्रुव, डॉ. ए. मेनन व स्वाति शर्मा थीं। डॉ. दावले जनरल फिजिशियन हैं और वर्तमान में किडनी विभाग में पदस्थ है। ध्रुव प्लास्टिक सर्जन हैं। डॉ. मेनन पीडियाट्रिक सर्जन हैं और शर्मा फिजियोथैरेपिस्ट हैं। हालांकि शर्मा ने कुछ महीना पहले इस्तीफा दिया था, जो अब तक मंजूर नहीं हुआ है।
जांच कमेटी के सामने इन डॉक्टरों ने बयान दिया था कि उन्होंने डॉ. गुप्ता के कहे अनुसार हस्ताक्षर किया है। खरीदी में इससे ज्यादा उनकी भूमिका नहीं है। खरीदी डॉ. गुप्ता व सीजीएमएससी के अधिकारियों ने की है।
फाइनल चालान पेश करने की तैयारी : डॉ. पुनीत गुप्ता की जांच कर रही एसआईटी फाइनल चालान पेश करने की तैयारी में हैं। चर्चा है कि इस महीने के अंत तक पुलिस आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर सकती है। इसलिए किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की जा रही है। कोर्ट के माध्यम से आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
मशीन व उपकरणों में फिजूलखर्ची
वर्चुअल बॉडी- 80 लाख रुपए के हिसाब से चार बॉडी यानी प्लास्टिक के पुतले खरीदे गए। इसकी कीमत 3.20 करोड़ रुपए से ज्यादा है। विशेषज्ञों के अनुसार पीजी इंस्टीट्यूट में इसकी जरूरत ही नहीं है। मेडिकल कॉलेज में जहां एमबीबीएस अथवा पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई होती है, वहां यह उपयोग में लिया जा सकता है।
थिएटर- करोड़ों की लागत से थिएटर बनाया गया है। दावा है कि किसी सरकारी अथवा निजी अस्पताल में यह देश का पहला थिएटर है। थिएटर का उपयोग अब तक नहीं हो सकता है। डॉ. गुप्ता के हटते ही थिएटर भी डेड हो गया है। हालांकि अब कहा जा रहा है कि इसमें लोगों को बीमारी संबंधी प्रेरक कार्यक्रम दिखाए जाएंगे।
मॉड्यूलर ओटी- एक मॉड्यूलर ओटी में 10 करोड़ रुपए खर्च करने का हल्ला है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार इसमें दो से तीन करोड़ रुपए खर्च होता है। इसमें भी भारी भ्रष्टाचार किए जाने के संकेत है।
 
अधीक्षक कक्ष- अधीक्षक कक्ष पासवर्ड से संचालित होता है। अधीक्षक कक्ष में जाने के लिए पहले कार्ड स्वाइप कर गेट खोला जाता है। इसके बाद एक और गेट है, जो सीधे अधीक्षक कमरे का है। इस गेट को खोलने के लिए पासवर्ड की जरूरत होती है। यह गेट तभी खुलता, जब अधीक्षक चाहे। हालांकि अब पहले वाले गेट में कार्ड स्वाइप वाली व्यवस्था हटा दी गई है।

  • मध्यप्रदेश में हुए खुलासे से चौकन्नी हुई छत्तीसगढ़ सरकार
  • मुख्यमंत्री ने विद्युत मंडल से तीन दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

रायपुर . राज्य में पिछले एक महीने से हो रही अघोषित बिजली कटौती को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिजली कंपनी को जांच कर रिपोर्ट देने कहा है। मुख्यमंत्री को आशंका है कि मध्यप्रदेश की तरह यहां भी चुनाव में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए अधिकारी-कर्मचारी भाजपा के साथ सांठगांठ कर बिजली कटौती की साजिश कर रहे हैं। इस वजह से ‘बिजली बिल हाफ’ योजना का असर कमतर हो रहा है। इस पर बिजली कंपनी के चेयरमैन डाॅ. शैलेंद्र शुक्ला ने अपने सभी सीई से फीडरवाइज बीते 15 दिनों में हुई कटौती की जानकारी मांगी है। यदि मेंटेनेंस या आंधी तूफान के अलावा कटौती के मामले सामने आए तो दोषी स्टाफ पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि प्रदेश के अधिकांश फीडर आउटसोर्स स्टाफ के भरोसे संचालित हो रहे हैं। यह आउटसोर्सिंग भाजपा शासनकाल में की गई थी। 

 
 

भाजपा चुनावी सभाओं में बिजली कटौती को मुद्दा बनाए हुए है। कटौती से ग्रामीण इलाकों में केसकाल से सरगुजा तक बड़ी नाराजगी देखी जा रही है। सरकार को रोजना दी जा रही इंटेलिजेंस रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख हो रहा है। पूर्व सीएम रमन सिंह ने भी सरप्लस बिजली के बाद भी कटौती का आरोप लगाया है।


 इसे गंभीरता से लेते हुए सीएम बघेल ने  सीएसईबी चेयरमैन डा. शुक्ला को इसकी जांच कर रिपोर्ट देने कहा है।  सीएम का मानना है कि एमपी में कुछ दिनों पहले कांग्रेस के चुनाव अभियान को नुकसान पहुंचाने के इरादे से भाजपा नेताओं के इशारे पर बिजली कटौती की घटनाएं सामने आईं थीं। इस पर वहां के मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर जांच हुई और करीब 200 विद्युत कर्मियों पर कार्रवाई की गई। इसलिए यहां भी एेसी ही आशंका जताई जा रही है। आंधी-तूफान के कारण भी हो सकती है बिजली सप्लाई बाधित : वैसे यह भी कहा जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में आंधी तूफान के कारण कई जगहों में पेड़ गिरने से लाइन टूटने की घटनाएं हुई हैं जिसकी वजह से कटौती करनी पड़ी है।

15 दिन की रिपोर्ट मांगी गई
 

प्रदेश के कई जगहों से अघोषित कटौती की शिकायतें मिली हैं। इसकी जांच चल रही है। हमने सीई स्तर पर हर फीडर से पिछले 15 दिनों में एक घंटे से अधिक की कटौती वाले इलाकों की जानकारी मांगी है।

-शैलेंद्र शुक्ला, चेयरमैन, विद्युत मंडल

छत्तीसगढ़ की कोरबा लोकसभा सीट पर तीसरे चरण में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. इस चरण में कोरबा के अलावा 14 राज्यों की 114 लोकसभा सीटों पर भी वोटिंग होगी. इसके बाद 23 मई को मतगणना होगी और चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे.

कोरबा लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी ने ज्योति नंद दुबे, कांग्रेस पार्टी ने ज्योत्सना चंद्रदास महंत, बहुजन समाज पार्टी ने परमित सिंह, अंबेडकराइट पार्टी ऑफ इंडिया ने ने चंद्र भूषण कंवर और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने तुलेश्वर हीरा सिंह मरकम को चुनाव मैदान में उतारा है. इस सीट पर कुल 13 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं.

इससे पहले साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के बंशीलाल महतो ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने अपने करीबी कांग्रेस प्रतिद्वंदी चरणदास महंत को हराया था. पिछले लोकसभा चुनाव में बंशीलाल महतो को 4 लाख 39 हजार दो वोट हासिल हुए थे, जबकि कांग्रेस के चरणदास महंत 4 लाख 34 हजार 737 वोट मिले थे. पिछली बार इस सीट पर कुल 73.35 फीसदी मतदान हुआ था. हालांकि इस बार बीजेपी ने बंशीलाल महतो का टिकट काट दिया और उनकी जगह ज्योति नंद दुबे को चुनाव मैदान में उतारा है.

 
 

इससे भी पहले साल 2009 में कोरबा लोकसभा सीट पर कांग्रेस के चरण दास ने बाजी मारी थी. उन्होंने बीजेपी की करुणा शुक्ला को हराया था. साल 2009 के लोकसभा चुनाव में चरण दास को  3 लाख 14 हजार 616 वोट मिले थे और करुणा शुक्ला को 2 लाख 93 हजार 879 वोट मिले थे. इस सीट पर मतदान 58.42 फीसदी रहा.

कोरबा लोकसभा सीट साल 2008 में अस्तित्व में आई. इसके बाद यहां साल 2009 में लोकसभा चुनाव हुए और कांग्रेस ने जीत का परचम फहराया. हालांकि साल 2014 में उसे बीजेपी के हाथों हार का सामना करना पड़ा. कोरबा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आठ विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें भरतपुर-सोनहत (एसएसटी), रामपुर (एसएसटी), पाली-तानाखार (एसएसटी), मनेन्द्रगढ़, कोरबा, मरवाही (एसएसटी), बैकुंठपुर और कटघोरा विधानसभा सीटें शामिल हैं.

कोरबा जिले का गठन 25 मई 1998 को किया गया था. यह एक आदिवासी बहुसंख्यक जिला है, जो छत्तीसगढ़ के उत्तर-मध्य भाग में स्थित है. कोरबा छत्तीसगढ़ राज्य की पावर कैपिटल कही जाती है. यह जिला बिलासपुर संभाग के अंतर्गत आता है और मुख्य रूप से आदिवासी द्वारा संरक्षित जनजाति कोरवा (पहाड़ी कोरवा) का बसाया हुआ है.

छत्‍तीसगढ़ राज्‍य की स्‍थापना 1 नवंबर 2000 को मध्‍य प्रदेश के 16 जिलों को मिलाकर की गई. इसके बनाए जाने के पीछे मुख्‍य आधार छत्तीसगढ़ी बोलने वाले जिले थे. छत्तीसगढ़ में कुल पांच संभाग रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा और बस्तर हैं. सूबे में कुल 27 जिले हैं. इस राज्‍य में 11 लोकसभा और 5 राज्‍यसभा सीटें आती हैं. यह क्षेत्रफल के हिसाब से देश का दसवां सबसे बड़ा राज्‍य है. फिलहाल राज्‍य की राजधानी रायपुर है, जिसे बदलकर नया रायपुर किया जाना प्रस्‍तावित है.

हंसदेव और अहिरन नदियों के संगम के किनारे बसे कोरबा में हरे-भरे जंगल हैं. कोरबा को छत्तीसगढ़ का औद्योगिक केंद्र भी कहा जाता है. कोयला और पानी जैसे बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक सभी आवश्यक कच्चे माल से जिला अपने आपमें समृद्ध है. यहां चार थर्मल पावर प्लांट NTPC, KTPS, BALCO & BCPP, DSPM, CSEB ईस्ट, CSEB वेस्ट हैं.

इनके अलावा माचाडोली (बांगो) में स्थित एक हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर स्टेशन है. कोल इंडिया लिमिटेड के तहत SECL कंपनी की कोरबा जिले में कई बड़ी खदानें हैं. साथ ही सबसे बड़ी एल्युमीनियम उत्पादन करने वाली बाल्को (भारत एल्युमिनियम कंपनी) भी यहां स्थित है.

इस लोकसभा सीट पर साल 2014 में पुरुष मतदाताओं की संख्या 7 लाख 25 हजार 821 थी, जिनमें से 5 लाख 46 हजार 46 ने वोटिंग में हिस्सा लिया था. वहीं पंजीकृत 6 लाख 93 हजार 789 महिला वोटरों में से 5 लाख 6 हजार 674 महिला वोटरों ने वोट डाला था. इस तरह कुल 14 लाख 19 हजार 610 मतदाताओं में से कुल 10 लाख 52 हजार 720 ने चुनाव में अपनी हिस्सेदारी दर्ज की थी.

देश भर में लोकसभा चुवान की गर्मा-गर्मी चल रही है इसी बीच चुनाव से ठीक पहले नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में एक बड़ी घटना को अंजाम दिया है। नक्सलियों ने दंतेवाड़ा के कुआकोण्डा थाना क्षेत्र के श्यामगिरी में IED ब्लास्ट कर किया। नक्सलियों की तरफ से ये बड़ी कार्यवई की गई है। बीजेपी विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर नक्सलियों ने घात लगाया था।

ब्लास्ट के बाद बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की मौत हो गई है। सूत्रों के अनुसार काफिले के 5 जवान शहीद हुए है लेकिन अभी इसकी कोई भी अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ब्लास्ट में सुरक्षा बल के जवानों को बड़ा नुकसान होने की सूचना भी मिली है। डीआईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि घटना की जानकारी मिली है। मौके पर सुरक्षा बल के अतिरिक्त जवानों को रवाना कर दिया गया है। विस्तृत जानकारी का इंतजार है। 

राज्य के नक्सल विरोधी अभियान के महानिदेशक गिरधारी नायक ने आज यहां भाषा को बताया, ‘‘जिले के बचेली क्षेत्र में श्यामगिरी के करीब नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट किया है। इस घटना में दंतेवाड़ा विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक भीमा मंडावी के काफिले में चल रहे वाहन में सवार तीन लोग घायल हो गए हैं। नक्सलियों ने विस्फोट के बाद गोलीबारी भी की है।’’ 

नायक ने बताया, ‘‘पुलिस को जनकारी मिली है कि भीमा मंडावी का काफिला आज बचेली से कुआकोंडा की ओर रवाना हुआ था। काफिला जब श्यामगिरी के करीब था तब नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट कर दिया। इस घटना में वाहन क्षतिग्रस्त हो गया तथा उसमें सवार तीन लोग घायल हो गए। घटना के बाद नक्सलियों ने गोलीबारी भी है।’’ उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्र के लिए अतिरिक्त बल रवाना किया गया है।

रायपुर । एम्स, मेडिकल कॉलेज और सैकडों पीएचसी, सीएचसी की बड़ी-बड़ी बिल्डिंग, फिर भी स्वास्थ्य सेवाएं अगर वेंटीलेटर पर हैं तो आम जनता की चिंता बढ़ना लाजिमी है। राज्य की बड़ी आबादी के पास इतनी आर्थिक कूबत नहीं कि निजी अस्पतालों में इलाज का बोझ उठा सके।

गंभीर बीमारियों में सरकारी मदद के बिना उबर पाना गरीबों के लिए आसान कहां। योजनाएं बनती हैं लेकिन लाभ कितना हो पाता है, इसकी पोल जमीनी रिपोर्ट में खुलती रही है। स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाएं राहत तो लेकर आईं लेकिन कंपनियों पर लूट के आरोप भी चस्पा होते रहे।

अब भारत सरकार ने आयुष्मान भारत योजना की शुरूआत की है लेकिन यह योजना भी छत्तीसगढ़ में धरातल पर उतरने से पहले ही विवादों में आ गई। निजी चिकित्सकों और चिकित्सालयों ने योजना को खारिज कर दिया। राज्य में नवगठित कांग्रेस सरकार भी इस योजना के बदले दूसरी महत्वाकांक्षी योजना लाने का ताना-बाना बुन रही हैं।

पिछले दिनों राज्य के दौरे पर आए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ समेत तीन राज्यों में कांग्रेस सरकार की नई स्वास्थ्य नीति की पुरजोर वकालत के साथ ही महत्वपूर्ण बात यह भी कही कि हेल्थ सेक्टर में बजट पर्याप्त होना चाहिए।

विसंगति यह भी कि छत्तीसगढ़ सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में स्वास्थ्य का बजट घटा दिया है। स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही बदहाल हैं। बड़ा मुद्दा यह कि अब सेहत पर सियासत में आम लोगों का क्या होगा....।।।

छह मेडिकल कॉलेजों को जरुरत पूरी करने में लगेंगे 22 साल

राज्य में अभी छह सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। हर वर्ष वहां से करीब 11 सौ डॉक्टर बन रहे हैं। ऐसे में डब्ल्यूएचओ के मापदंड के अनुसार डॉक्टरों की जरूरत पूरी करने में 22 वर्ष लग जाएंगे, लेकिन यह भी सच्चाई है कि यहां से पढ़ने के बाद ज्यादातर डॉक्टर निजी सेक्टर या दूसरे राज्यों में चले जाते हैं।

हर साल औसतन 50 लाख मरीज हर साल औसतन 50 लाख मरीज प्रदेश के अस्पतालों में पंजीकृत (ओपोडी रजिस्ट्रेशन) होते हैं। इनमें लगभग 41 लाख और करीब 12 लाख पुराने मरीज होते हैं। यह संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रह है।

भवन और उपकरण लेकिन चलाने वाले नहीं

राज्य में अस्पताल के नाम पर बड़े पैमाने पर भवन बना दिए गए हैं। वहां उपकरण भी उपलब्ध करा दिया गया है, लेकिन डॉक्टर और तकनीकी स्टॉफ नहीं है। इसका सबसे ज्यादा बुरा असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ रहा है। आदिवासी क्षेत्रों से आज भी लोग बैगा गुनिया के पास जाते हैं।

बस्तर व सरगुजा संभाग में स्थिति दयनीय

बस्तर और सरगुजा संभाग की स्थिति सबसे खराब है। यहां पर डॉक्टरों के सेटअप के ही पद नहीं भरे जा सके हैं। डब्लूएचओ के मानक के अनुसार डॉक्टरों की उपलब्धता तो दूर की बात है। बस्तर संभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों के जहां 95 फीसदी पद खाली हैं, वहीं चिकित्सा अधिकारियों के 56 फीसदी पद रिक्त हैं। वहीं इन दोनों संभागों में दंत चिकित्सकों के कुल स्वीकृत 25 में से 24 पद यानी 96 फीसदी पद खाली हैं।

 डेंटल में तो सबसे बुरा हाल

प्रदेश में डेंटल डॉक्टरों की भी भारी कमी है। यहां डेंटल की 91 फीसदी डॉक्टरों के पद खाली हैं। राज्य में डेंटल के कुल 112 पद स्वीकृत हैं, इनमें से केवल 10 पर ही दंत चिकित्सक पदस्थ हैं। शेष 102 पद खाली हैं। सबसे बुरा हाल बस्तर का है। यहां डेंटल के एक भी डॉक्टर पदस्थ नहीं है। बस्तर संभाग के 14 में से 14 पद और सरगुजा में 11 में से 10 पद खाली पड़े हैं, जबकि रायपुर संभाग में 69 में से 63 पद और बिलासपुर संभाग में 18 में से 15 पद खाली हैं।

रायपुर। कांग्रेस के बाद अब बहुजन समाज पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ में अपने 6 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है।

दो दिन पहले कांग्रेस ने अपने पांच प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। बसपा ने बस्तर से आदिवासी नेता आयतुराम मंडावी, जांजगीर से दाउराम रत्नाकर और कांकेर से सुबे सिंह धुर्वे को टिकट दी है। पहली सूची में तीन प्रत्‍याशियों के नाम घोषित करने के बाद बसपा ने शाम को तीन और उम्‍मीदवारों की दूसरी सूची भी जारी की।

इसमें सरगुजा सीट से माया भगत, रायगढ़ सीट से इन्‍नोसेंट कुजूर और दुर्ग सीट से गीतांजलि सिंह को पार्टी ने अपना उम्‍मीदवार बनाया है।

 

 

 

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