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मोहन भागवत ने कहा, ‘‘अमेरिका और रूस सुपरपावर हैं। चीन भी सुपर पावर बन जाएगा। सुपर पावर राष्ट्रों ने दूसरों के लिए क्या किया? अपने एजेंडा के लिए वे दूसरे देशों पर नियंत्रण कर लेते हैं। ये सुपर पावर तभी लौटाना शुरू करते हैं जब उन्हें ऐसा करने के लिए कहा जाता है।

अहमदाबाद। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भौतिक सुख में कई गुणा वृद्धि के बावजूद समाज में हर कोई नाखुश है और लगातार आंदोलन कर रहा है।  गुजरात के अहमदाबाद में व्याख्यान देते हुए भागवत ने कहा कि जो राजनीतिक दल सत्ता में नहीं हैं, वे भी आंदोलन कर रहे हैं। भागवत ने कहा,  ऐशो-आराम में बढ़ोतरी के बावजूद हर कोई नाखुश है और आंदोलन कर रहा है। चाहे वह मालिक हो या नौकर, विपक्षी दल हो या आम आदमी, छात्र हो या शिक्षक, हर कोई नाखुश और असंतुष्ट है।  संघ प्रमुख  वर्तमान विश्व परिदृश्य में भारत की भूमिका  विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा,  भारत को धर्म (ज्ञान) देना है, ताकि ज्ञान फैले लेकिन मनुष्य रोबोट न बने। हमने हमेशा वैश्विक परिवार की बात की है न कि वैश्विक बाजार की।

भागवत ने कहा कि वर्तमान दौर में कट्टरता, हिंसा और आतंकवाद बढ़ रहा है। व्याख्यान का आयोजन ‘माधव स्मृति न्यास’ ने किया था। यह संगठन आरएसएस से जुड़ा हुआ है।संघ प्रमुख ने कहा, ‘‘यह सोचना कि हम बेहतर दुनिया में जी रहे हैं, अर्द्धसत्य है। सुविधाएं समान रूप से सबको हासिल नहीं हो रही हैं। जंगल का नियम चल रहा है। आगे बढ़ने के लिए सक्षम व्यक्ति कमजोर को दबा रहा है। दुनिया में तबाही के लिए ज्ञान का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है।’’भागवत ने कहा कि लोग ‘‘गलत सूचना’’ प्रसारित करने के लिए सोशल मीडिया का दुरूपयोग कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि ‘हर किसी को एक रूप से देखने’ का प्रयास करना भी कट्टरता है।

भागवत ने कहा, ‘‘अमेरिका और रूस सुपरपावर हैं। चीन भी सुपर पावर बन जाएगा। सुपर पावर राष्ट्रों ने दूसरों के लिए क्या किया? अपने एजेंडा के लिए वे दूसरे देशों पर नियंत्रण कर लेते हैं। ये सुपर पावर तभी लौटाना शुरू करते हैं जब उन्हें ऐसा करने के लिए कहा जाता है। अन्यथा उन्होंने दूसरों को कभी कुछ नहीं दिया।’’उन्होंने दुख जताया कि भारतीय युवक ‘‘देश की ज्ञान शक्ति को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं और सोचते हैं कि भारत में जो भी अच्छा है वह दूसरे देशों से आया है।’’उन्होंने लोगों से अपील की कि भारत को ज्यादा ताकतवर बनाएं ‘‘क्योंकि दुनिया ताकतवर की ही सुनती है।’’

रामायण की कहानी के बारे में हम सभी जानते हैं। शायद ही ऐसा कोई हो जिसे इस बारे में न पता नहीं। असत्य पर सत्य की विजय की ये कहानी आज भी हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देती है। भगवान राम ने रावण का वध कर उसे उसकी पापों की सजा दी। इतना तो हम सभी ने टेलीविजन के पर्दे पर देखा है और पढ़ा भी है, लेकिन क्या आपको पता है कि रावण की मृत्यु के बाद मंदोदरी यानि कि रावण की पत्नी का क्या हुआ था? आज हम इस बारे में आपको बताने जा रहे हैं।
 
मंदोदरी हमेशा रावण को गलत काम करने से रोकती थी। यहां तक कि जब रावण माता सीता को हरण कर लंका लेकर आया था तब भी मंदोदरी ने उसे समझाया था कि वो उन्हें वापस लौटाकर आए, लेकिन रावण ने किसी की एक न सुनी और बाद में उसे इसका फल भी भुगतना पड़ा।
 
रावण के वध के बाद मंदोदरी युद्ध भूमि पहुंचती है। वहां अपने पति-पुत्र के शवों को देखकर उसे बहुत दुख होता है। मंदोदरी शोक में पूरी तरह से डूब जाती है। इस स्थिति में प्रभू श्रीराम मंदोदरी को याद दिलाते हुए कहते हैं कि, वो अभी भी बलशाली रावण की विधवा और लंका की महारानी है।
 
मंदोदरी वापस लंका तो लौट आती है, लेकिन उसके लिए इस गम को भूला पाना आसान नहीं होता है। वो खुद को महल में कैद कर बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह से समाप्त कर देती है। इस दौरान विभीषण लंका का राजपाट संभालते हैं।
 
सालों बाद मंदोदरी अपने महल से बाहर निकलती है। तब तक वो काफी काफी हद तक संभल चुकी होती है। राजनीतिज्ञ मंदोदरी को विभीषण से विवाह कर लेने की सलाह देते हैं जिसे वो मान लेती है और विभीषण से शादी कर लेती है। इसके बाद मंदोदरी विभीषण के साथ मिलकर अपने साम्राज्य को आगे बढ़ाने के काम में जुट जाती है। यह थी वो कहानी जिसके बारे में हम में से अधिकतर लोगों को नहीं पता था क्योंकि रावण की मृत्यु के बाद मंदोदरी के अध्याय को जैसे समाप्त ही कर दिया गया था। उनका मुश्किल से ही कहीं जिक्र मिलता है।
 

नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का शाहीन बाग नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ आंदोलन का केंद्र बनकर उभरा है। महिलाओं का धरना कड़कड़ाती सर्दी में भी लगातार जारी रहा। लगभग दो माह बाद ही यहां लोग धरने पर जमे हुए हैं। उधर, प्रेम का पर्व माने जाने वाले वैलेंटाइन्स डे की पूर्व संध्या पर शाहीन बाग में 'मोदी तुम कब आओगे' का तराना गूंजा। 
युवाओं की ओर से पीएम मोदी के लिए मंच पर गिफ्ट के तौर पर एक बड़ा टैडी बियर रखा गया। युवाओं के इस ग्रुप की सदस्य करिश्मा ने बताया कि पीएम मोदी को यहां बुलाने के लिए ऐसा किया गया है। वह यहां आएं और तोहफा कबूल करें। लोगों से बात करें। उन्होंने कहा कि यहां गाना होगा, बस वैलेंटाइन नहीं होगा।
युवा सदस्यों ने इसे प्यार के दिवस पर नफरत का प्रेम से दिया गया जवाब दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को यहां आकर धरने पर बैठी मां-बहनों से बात करनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए माइक बंद रखा जाएगा। उनके मुताबिक, पुलवामा में शहीद हुए जवानों के परिजनों को भी 14 फरवरी के दिन शाहीन बाग बुलाया गया है।
शाहीन बाग में गूंजा यह तराना-
सर्दी आकर चली गई,
गर्मी ज्यादा दूर नहीं।
मोदी तुम कब ओओगे,
महिलाओं का नारा है।
भारत वर्ष हमारा है, 
ये काला कानून हटाओ।
बता दें कि सीएए के संसद से पास होने के बाद 15 दिसंबर को शाहीन बाग में महिलाएं धरने पर बैठ गई थीं। धरनारत महिलाएं सीएए को वापस लिए जाने तक धरने पर अड़ी हैं। तमाम कोशिश की जा चुकी हैं, लेकिन धरना खत्म नहीं किया जा सका। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।  

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत के आरोपित डॉ. कफील की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।  नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में डॉ. कफील मथुरा जेल में बंद हैं। 10 फरवरी को जमानत के बाद रिहाई की तैयारी चल रही थी, जिसपर अभी रोक लग गई है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में विवादित बयान देने के मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए डॉ. कफील के खिलाफ अलीगढ़ सिविल लाइंस में रासुका के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

ये है पूरा मामला...
एएमयू में धरने को संबोधित करने के दौरान डॉ. कफील ने भड़काऊ भाषण दिया था। इसके बाद थाना सिविल लाइंस में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। उसी मामले में पुलिस ने उसे मुंबई से गिरफ्तारी करने के बाद मथुरा जेल बंद कर दिया था।

विश्वविद्यालय में विवादित बयान मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए अलीगढ़ के सिविल लाइंस में रासुका के तहत मुकदमा लिखा गया इसलिए अब डॉ कफील की रिहाई नहीं होगी।

गौरतलब है कि पिछले माह नागरिकता कानून को लेकर योगेंद्र यादव संग एएमयू में विवादित बयान देने पर कफील पर यहां सिविल लाइंस में मुकदमा लिखा गया था। उस मुकदमे में 10 फरवरी को जमानत के बाद  रिहाई की तैयारी चल रही थी।  जिला प्रशासन ने कफील पर सिविल लाइंस में रासुका के तहत लिखा मुकदमा लिखकर प्रपत्र मथुरा जेल में कफील को रिसीव करा दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दल आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों के बारे में 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को जानकारी दें। सुप्रीम कोर्ट ने यहा भी कहा कि ऐसे उम्मीदवारों के बारे में स्थानीय अखबारों में भी जानकारी दें।

राजनीति में बढ़ते अपराधिकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी वेबसाइट पर आपराधिक उम्मीदवारों के चयन के कारणों को अपलोड करें। सियासी दलों को वेबसाइट पर यह बताना होगा कि उन्होंने ऐसे उम्मीदवार क्यों चुनें जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। सियासी दलों को ऐसे उम्मीदवार को चुनने के 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी जिसके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं।

 सुप्रीम कोर्ट ने यहा भी कहा कि ऐसे उम्मीदवारों के बारे में विस्तृत जानकारी सोशल मीडिया और अखबारों में दें। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि राजनीतिक दल आदेश का पालन करने में विफल रहने पर अवमानना ​​के लिए उत्तरदायी होंगे। कोर्ट ने साफ कहा कि जिन उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं उनके बारे में अगर राजनीतिक दल न्यायालय की व्यवस्था का पालन करने में असफल रहते हैं तो चुनाव आयोग इसे शीर्ष अदालत के संज्ञान में लाए।

चीन में जानलेवा बने कोरोना वायरस का खौफ दुनियाभर में है। भारत में वायरस के संक्रमण को भी लोग कोरोना से जोड़कर भयभीत हैं। ऐसा ही मामला मंगलवार को हैदराबाद में सामने आया। 50 वर्षीय एक व्यक्ति को वायरल फीवर हुआ तो वह कोरोना वायरस समझकर फांसी पर झूल गया। परिजनों ने बताया कि उसने ऐसा कदम बीवी व बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए उठाया।
हैदराबाद के चित्तूर निवासी के. बाला कृष्णाहद को वायरल फीवर हुआ तो लोगों ने उन्हें कोरोना वायरस की जांच भी कराने की सलाह दी। इसके बाद कृष्णाहद ने मोबाइल पर कोरोना वायरस के लक्षण के वीडियो देखे। कोरोना वायरस का शक होने पर कृष्णाहद अपने बीवी व बच्चों को घर में बंद कर दिया। इसके बाद वह मां की कब्र के पास पहुंचा। यहां कृष्णाहद ने कब्र के पास एक पेड़ से फांसी का फदा लगाकर जान दे दी। परिजनों के शोर मचाने पर पड़ोसियों ने घर का दरवाजा खोला। खोजते हुए परिजन जब कब्र के पास गए तो कृष्णाहद फांसी पर लटकता मिला।

जांच में नहीं मिले कोरोना के लक्षण
सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों से पूछताछ किया। इसके बाद चिकित्सक को बुलाकर कृष्णाहद की जांच की गई। जांच के बाद चिकित्सक ने बताया कि उनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं मिले। वे सामान्य वायरल फीवर से पीड़ित थे। चिकित्सक ने लोगों को बताया कि हैदराबाद में अभी तक कोरोना का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने लोगों को सलाह दी ऐसा कदम न उठाएं, चिकित्सक से परामर्श लें और सही उपचार कराएं।

पटना. बिहार में घर टूटने के नए और चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं. ऐसा ही एक अजीबोगरीब मामला बिहार महिला आयोग में सामने आया जहां पत्नी अपने पति से सिर्फ इसलिए अलग होना चाहती हैं, क्योंकि उन्‍हें शुगर की बीमारी है. जानकारी के मुताबिक, डायबिटिज होने के कारण शख्‍स के खानपान पर प्रतिबंध था. महिला को यह बात नागवार गुजरी और संबंध तोड़ने का फैसला कर लिया.

मामला वैशाली जिले के मोहनपुर गांव का है जहां 20 वर्षीय महिला आंचल की शादी वैशाली जिले के ही रहने वाले दीनदयाल से जून 2019 में हुई थी. शादी के बाद पता चला कि पति को शुगर को बीमारी है और उन्हें खाने-पीने का परहेज़ है. इसके बाद आंचल ने पति के साथ न रहने की ठान ली.

महिला आयोग पहुंची आंचल ने बताया, मुझसे हर रोज पति के लिए अलग खाना बनाना संभव नहीं हो सकेगा. बीमार पति तो कभी भी भगवान को प्यारे हो जाएंगे और अगर बच्चा हो गया तो मुश्किल हो जाएगा. ऐसे में अभी ही रिश्ता तोड़ना ज्यादा अच्छा है.

इस मामले में पति दीनदयाल का कहना है कि आंचल झूठ बोल रही हैं. उन्‍हें कोई बीमारी नहीं है. मेरी तबियत हल्की-फुल्की नासाज़ रहती है. दीनदयाल ने बताया कि शादी परिवारवालों की मर्ज़ी से सबकुछ देख कर हुई थी. लड़की के पिता खुद कई बार मिल चुके थे, लेकिन अब लड़की उनके साथ रहने से मना कर रही है.

दीनदयाल ने बताया कि वह मजदूरी का काम करता है. उन्‍होंने आरोप लगाया कि पत्‍नी को मनाने के लिए एक दिन वह मिठाई लेकर ससुराल गए थे, जहां उनपर हमला कर दिया गया. दीनदयाल ने बताया कि समाज में नाम खराब न हो इसलिए वह पत्‍नी को साथ रखना चाहते हैं, लेकिन महिला उनके साथ रहने से साफ इंकार कर रही है.

महिला आयोग ने इस मामले में दोनों पक्षों को एक बार फिर से सोचने को कहा है और पत्नी को पति के साथ रहने की सलाह दी है. महिला आयोग में आए इस मामले से वहां के कर्मचारी भी सकते में है. आयोग ने दोनों पक्षों को एक मौका देते हुए आगे की तारीख दी है.

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान के तहत डीआरडीओ द्वारा बनाए गए एयर इंडीपेंडेंट प्रोपल्शन (एआइपी) सिस्टम्स को भारतीय नौसेना की कलवारी श्रेणी की पनडुब्बियों में फिट किया जाएगा। इस सिस्टम की वजह से भारतीय पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के नीचे रह सकेंगी। एआइपी को पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों में लगाया जाता है और इनसे उनकी पानी के नीचे रहने की क्षमता में वृद्धि होती है अन्यथा पनडुब्बियों को अपनी बैट्रियां चार्ज करने के लिए बार-बार पानी की सतह पर आना पड़ता है। फ्रांसीसी कंपनी नेवल ग्रुप के सीनियर एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट एलेन गुइलो ने कहा ‎कि 'डीआरडीओ द्वारा बनाई गई एआइपी को कलवारी श्रेणी की पनडुब्बियों में उनके रीफिट कार्यक्रम के दौरान फिट किया जाएगा। आइएनएस कलवारी श्रेणी की पहली पनडुब्बी का पहला रीफिट वर्ष 2023 में निर्धारित है। उन्होंने बताया कि डीआरडीओ का एआइपी सिस्टम अच्छा है और यह पनडुब्बियों की क्षमता में वृद्धि करेगा। डीआरडीओ इसे विकसित करने के लिए पुणे स्थित नेवल मेटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (एनएमआरएल) में नौसेना के साथ मिलकर कार्य करता रहा है।

चीन के हुबेई प्रांत में फैले कोरानावायरस से मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। चीन के स्वास्थ्य आयोग का कहना है कि नए कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 811 हो गई है, जो लगभग 17 साल पहले सार्स वायरस के कारण हुई मौतों से अधिक है। सार्स वायरस 2003 में फैला था और दो दर्जन से अधिक देशों में इसके मरीज पाए गए थे, सार्स के कारण 774 लोगों की जान गई थी। चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा दिए गए ताजा आकंड़े के मुताबिक, 2,649 संदिग्ध लोगो को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी कर दी गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस जानलेवा वायरस के कारण अब तक 811 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 37000 से ज्यादा लोग इस वायरस से संक्रमित हैं।

रूसी न्यूज एजेंसी स्पूतनिक के अनुसार, 33738 लोगों का कोरोनावायरस के कारण हुए निमोनिया का इलाज किया जा रहा है। चीन ने कोरोनावायरस के फैलाव से निपटने के लिए दर्जन भर शहरों में 5.6 करोड़ लोगों की आवाजाही को रोकने के लिए विशेष वार्ड से लेकर यात्रा प्रतिबंध तक जैसे कदम उठाए हैं। 

कोरोनोवायरस का पहला मामला दिसंबर के अंत में चीन के वुहान में पता चला था और तब से यह 25 से अधिक देशों में फैल चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रकोप के मद्देनजर वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।

वायरस के फैलाव में चीन की लापरवाही आई सामने 

चीन में बेकाबू हो चुके कोरोनावायरस ने वहां बड़े पैमाने पर बरती गई राजनीतिक-प्रशासनिक लापरवाही को दुनिया के समक्ष उजागर कर दिया है। चीन पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि जब वुहान में कोरोनावायरस फैल रहा था, तब वहां की मेयर ने सरकार पर आरोप लगाया तो रोग नियंत्रक अधिकारियों ने नौकरशाहों पर जिम्मेदारी डाल दी। सरकार में बैठे नेताओं ने तो जनता को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया।

मौत के आंकड़ों और संक्रमितों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी के बीच उच्च स्तर पर इस तरह आरोप-प्रत्यारोप वाकई हैरान करने वाले हैं। जानकारों का कहना है कि कोरोना को रोकने में विफल रहे चीन में पहली दफा जनता की नजरों में उनके सरकारी तंत्र की पोल खुल गई है, जिसे बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक कार्य करने में दक्ष माना जाता था। चीन के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने कार्यकाल में नौकरशाहों और टेक्नोक्रेट्स से ज्यादा पार्टी काडर को तवज्जो दी है।

इसके चलते पार्टी काडर नौकरशाही पर हावी हो गया है। नौकरशाह ऐसा कोई भी निर्णय लेने से कतराते हैं, जिससे सरकार की आलोचना हो।  मशहूर चीनी लेखक और वहां की राजनीति-नौकरशाही पर नजर रखने वाले शु काइझेन का मानना है कि कोरोना वायरस के बेकाबू होने में मौजूदा प्रशासनिक हालात का बड़ा योगदान है। वुहान से  फैली महामारी ने स्थानीय सरकार की कमजोर कार्रवाई और नौकरशाहों के मन में शीर्ष स्तर पर बैठे नेताओं के भय को उजागर कर दिया है। 

बोकारो. झारखंड के बोकारो जिला के तेलो थाना क्षेत्र के बंदियो निवासी राजीव कुमार ने अपनी पत्नी की बेवफाई से नाराज होकर उसके सामाजिक बहिष्कार का संदेश नए तरीके से दिया. पति का आरोप है कि उनकी पत्नी (32) अपने प्रेमी के साथ भाग गई. वह फिलहाल, वह अपने प्रेमी के साथ रांची में रह रही है.

विरोध जताने के लिए पति ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार पत्नी का पुतला बनाकर उसका विधिपूर्वक अंतिम संस्कार कर दिया. नाबालिग पुत्र ने अपनी मां के प्रतीकात्मक पुतले को मुखाग्नि दी. राजीव ने बताया कि अब उसकी पत्नी मर चुकी है. उसके साथ उसका और उनके परिवार के सदस्यों को किसी भी प्रकार का कोई रिश्ता नहीं रहा. पत्नी दो बच्चों की मां होने के बावजूद अपने गांव में ही रहने वाले अपने प्रेमी के साथ 4 जनवरी को घर से भाग गई थी.

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