ईश्वर दुबे
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Bhilai
मोहन भागवत ने कहा, ‘‘अमेरिका और रूस सुपरपावर हैं। चीन भी सुपर पावर बन जाएगा। सुपर पावर राष्ट्रों ने दूसरों के लिए क्या किया? अपने एजेंडा के लिए वे दूसरे देशों पर नियंत्रण कर लेते हैं। ये सुपर पावर तभी लौटाना शुरू करते हैं जब उन्हें ऐसा करने के लिए कहा जाता है।
अहमदाबाद। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भौतिक सुख में कई गुणा वृद्धि के बावजूद समाज में हर कोई नाखुश है और लगातार आंदोलन कर रहा है। गुजरात के अहमदाबाद में व्याख्यान देते हुए भागवत ने कहा कि जो राजनीतिक दल सत्ता में नहीं हैं, वे भी आंदोलन कर रहे हैं। भागवत ने कहा, ऐशो-आराम में बढ़ोतरी के बावजूद हर कोई नाखुश है और आंदोलन कर रहा है। चाहे वह मालिक हो या नौकर, विपक्षी दल हो या आम आदमी, छात्र हो या शिक्षक, हर कोई नाखुश और असंतुष्ट है। संघ प्रमुख वर्तमान विश्व परिदृश्य में भारत की भूमिका विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा, भारत को धर्म (ज्ञान) देना है, ताकि ज्ञान फैले लेकिन मनुष्य रोबोट न बने। हमने हमेशा वैश्विक परिवार की बात की है न कि वैश्विक बाजार की।
भागवत ने कहा कि वर्तमान दौर में कट्टरता, हिंसा और आतंकवाद बढ़ रहा है। व्याख्यान का आयोजन ‘माधव स्मृति न्यास’ ने किया था। यह संगठन आरएसएस से जुड़ा हुआ है।संघ प्रमुख ने कहा, ‘‘यह सोचना कि हम बेहतर दुनिया में जी रहे हैं, अर्द्धसत्य है। सुविधाएं समान रूप से सबको हासिल नहीं हो रही हैं। जंगल का नियम चल रहा है। आगे बढ़ने के लिए सक्षम व्यक्ति कमजोर को दबा रहा है। दुनिया में तबाही के लिए ज्ञान का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है।’’भागवत ने कहा कि लोग ‘‘गलत सूचना’’ प्रसारित करने के लिए सोशल मीडिया का दुरूपयोग कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि ‘हर किसी को एक रूप से देखने’ का प्रयास करना भी कट्टरता है।
भागवत ने कहा, ‘‘अमेरिका और रूस सुपरपावर हैं। चीन भी सुपर पावर बन जाएगा। सुपर पावर राष्ट्रों ने दूसरों के लिए क्या किया? अपने एजेंडा के लिए वे दूसरे देशों पर नियंत्रण कर लेते हैं। ये सुपर पावर तभी लौटाना शुरू करते हैं जब उन्हें ऐसा करने के लिए कहा जाता है। अन्यथा उन्होंने दूसरों को कभी कुछ नहीं दिया।’’उन्होंने दुख जताया कि भारतीय युवक ‘‘देश की ज्ञान शक्ति को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं और सोचते हैं कि भारत में जो भी अच्छा है वह दूसरे देशों से आया है।’’उन्होंने लोगों से अपील की कि भारत को ज्यादा ताकतवर बनाएं ‘‘क्योंकि दुनिया ताकतवर की ही सुनती है।’’
रामायण की कहानी के बारे में हम सभी जानते हैं। शायद ही ऐसा कोई हो जिसे इस बारे में न पता नहीं। असत्य पर सत्य की विजय की ये कहानी आज भी हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देती है। भगवान राम ने रावण का वध कर उसे उसकी पापों की सजा दी। इतना तो हम सभी ने टेलीविजन के पर्दे पर देखा है और पढ़ा भी है, लेकिन क्या आपको पता है कि रावण की मृत्यु के बाद मंदोदरी यानि कि रावण की पत्नी का क्या हुआ था? आज हम इस बारे में आपको बताने जा रहे हैं।
मंदोदरी हमेशा रावण को गलत काम करने से रोकती थी। यहां तक कि जब रावण माता सीता को हरण कर लंका लेकर आया था तब भी मंदोदरी ने उसे समझाया था कि वो उन्हें वापस लौटाकर आए, लेकिन रावण ने किसी की एक न सुनी और बाद में उसे इसका फल भी भुगतना पड़ा।
रावण के वध के बाद मंदोदरी युद्ध भूमि पहुंचती है। वहां अपने पति-पुत्र के शवों को देखकर उसे बहुत दुख होता है। मंदोदरी शोक में पूरी तरह से डूब जाती है। इस स्थिति में प्रभू श्रीराम मंदोदरी को याद दिलाते हुए कहते हैं कि, वो अभी भी बलशाली रावण की विधवा और लंका की महारानी है।
मंदोदरी वापस लंका तो लौट आती है, लेकिन उसके लिए इस गम को भूला पाना आसान नहीं होता है। वो खुद को महल में कैद कर बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह से समाप्त कर देती है। इस दौरान विभीषण लंका का राजपाट संभालते हैं।
सालों बाद मंदोदरी अपने महल से बाहर निकलती है। तब तक वो काफी काफी हद तक संभल चुकी होती है। राजनीतिज्ञ मंदोदरी को विभीषण से विवाह कर लेने की सलाह देते हैं जिसे वो मान लेती है और विभीषण से शादी कर लेती है। इसके बाद मंदोदरी विभीषण के साथ मिलकर अपने साम्राज्य को आगे बढ़ाने के काम में जुट जाती है। यह थी वो कहानी जिसके बारे में हम में से अधिकतर लोगों को नहीं पता था क्योंकि रावण की मृत्यु के बाद मंदोदरी के अध्याय को जैसे समाप्त ही कर दिया गया था। उनका मुश्किल से ही कहीं जिक्र मिलता है।
नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का शाहीन बाग नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ आंदोलन का केंद्र बनकर उभरा है। महिलाओं का धरना कड़कड़ाती सर्दी में भी लगातार जारी रहा। लगभग दो माह बाद ही यहां लोग धरने पर जमे हुए हैं। उधर, प्रेम का पर्व माने जाने वाले वैलेंटाइन्स डे की पूर्व संध्या पर शाहीन बाग में 'मोदी तुम कब आओगे' का तराना गूंजा।
युवाओं की ओर से पीएम मोदी के लिए मंच पर गिफ्ट के तौर पर एक बड़ा टैडी बियर रखा गया। युवाओं के इस ग्रुप की सदस्य करिश्मा ने बताया कि पीएम मोदी को यहां बुलाने के लिए ऐसा किया गया है। वह यहां आएं और तोहफा कबूल करें। लोगों से बात करें। उन्होंने कहा कि यहां गाना होगा, बस वैलेंटाइन नहीं होगा।
युवा सदस्यों ने इसे प्यार के दिवस पर नफरत का प्रेम से दिया गया जवाब दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को यहां आकर धरने पर बैठी मां-बहनों से बात करनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए माइक बंद रखा जाएगा। उनके मुताबिक, पुलवामा में शहीद हुए जवानों के परिजनों को भी 14 फरवरी के दिन शाहीन बाग बुलाया गया है।
शाहीन बाग में गूंजा यह तराना-
सर्दी आकर चली गई,
गर्मी ज्यादा दूर नहीं।
मोदी तुम कब ओओगे,
महिलाओं का नारा है।
भारत वर्ष हमारा है,
ये काला कानून हटाओ।
बता दें कि सीएए के संसद से पास होने के बाद 15 दिसंबर को शाहीन बाग में महिलाएं धरने पर बैठ गई थीं। धरनारत महिलाएं सीएए को वापस लिए जाने तक धरने पर अड़ी हैं। तमाम कोशिश की जा चुकी हैं, लेकिन धरना खत्म नहीं किया जा सका। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत के आरोपित डॉ. कफील की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में डॉ. कफील मथुरा जेल में बंद हैं। 10 फरवरी को जमानत के बाद रिहाई की तैयारी चल रही थी, जिसपर अभी रोक लग गई है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में विवादित बयान देने के मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए डॉ. कफील के खिलाफ अलीगढ़ सिविल लाइंस में रासुका के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
ये है पूरा मामला...
एएमयू में धरने को संबोधित करने के दौरान डॉ. कफील ने भड़काऊ भाषण दिया था। इसके बाद थाना सिविल लाइंस में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। उसी मामले में पुलिस ने उसे मुंबई से गिरफ्तारी करने के बाद मथुरा जेल बंद कर दिया था।
विश्वविद्यालय में विवादित बयान मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए अलीगढ़ के सिविल लाइंस में रासुका के तहत मुकदमा लिखा गया इसलिए अब डॉ कफील की रिहाई नहीं होगी।
गौरतलब है कि पिछले माह नागरिकता कानून को लेकर योगेंद्र यादव संग एएमयू में विवादित बयान देने पर कफील पर यहां सिविल लाइंस में मुकदमा लिखा गया था। उस मुकदमे में 10 फरवरी को जमानत के बाद रिहाई की तैयारी चल रही थी। जिला प्रशासन ने कफील पर सिविल लाइंस में रासुका के तहत लिखा मुकदमा लिखकर प्रपत्र मथुरा जेल में कफील को रिसीव करा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दल आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों के बारे में 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को जानकारी दें। सुप्रीम कोर्ट ने यहा भी कहा कि ऐसे उम्मीदवारों के बारे में स्थानीय अखबारों में भी जानकारी दें।
राजनीति में बढ़ते अपराधिकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी वेबसाइट पर आपराधिक उम्मीदवारों के चयन के कारणों को अपलोड करें। सियासी दलों को वेबसाइट पर यह बताना होगा कि उन्होंने ऐसे उम्मीदवार क्यों चुनें जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। सियासी दलों को ऐसे उम्मीदवार को चुनने के 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी जिसके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यहा भी कहा कि ऐसे उम्मीदवारों के बारे में विस्तृत जानकारी सोशल मीडिया और अखबारों में दें। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि राजनीतिक दल आदेश का पालन करने में विफल रहने पर अवमानना के लिए उत्तरदायी होंगे। कोर्ट ने साफ कहा कि जिन उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं उनके बारे में अगर राजनीतिक दल न्यायालय की व्यवस्था का पालन करने में असफल रहते हैं तो चुनाव आयोग इसे शीर्ष अदालत के संज्ञान में लाए।
चीन में जानलेवा बने कोरोना वायरस का खौफ दुनियाभर में है। भारत में वायरस के संक्रमण को भी लोग कोरोना से जोड़कर भयभीत हैं। ऐसा ही मामला मंगलवार को हैदराबाद में सामने आया। 50 वर्षीय एक व्यक्ति को वायरल फीवर हुआ तो वह कोरोना वायरस समझकर फांसी पर झूल गया। परिजनों ने बताया कि उसने ऐसा कदम बीवी व बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए उठाया।
हैदराबाद के चित्तूर निवासी के. बाला कृष्णाहद को वायरल फीवर हुआ तो लोगों ने उन्हें कोरोना वायरस की जांच भी कराने की सलाह दी। इसके बाद कृष्णाहद ने मोबाइल पर कोरोना वायरस के लक्षण के वीडियो देखे। कोरोना वायरस का शक होने पर कृष्णाहद अपने बीवी व बच्चों को घर में बंद कर दिया। इसके बाद वह मां की कब्र के पास पहुंचा। यहां कृष्णाहद ने कब्र के पास एक पेड़ से फांसी का फदा लगाकर जान दे दी। परिजनों के शोर मचाने पर पड़ोसियों ने घर का दरवाजा खोला। खोजते हुए परिजन जब कब्र के पास गए तो कृष्णाहद फांसी पर लटकता मिला।
जांच में नहीं मिले कोरोना के लक्षण
सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों से पूछताछ किया। इसके बाद चिकित्सक को बुलाकर कृष्णाहद की जांच की गई। जांच के बाद चिकित्सक ने बताया कि उनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं मिले। वे सामान्य वायरल फीवर से पीड़ित थे। चिकित्सक ने लोगों को बताया कि हैदराबाद में अभी तक कोरोना का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने लोगों को सलाह दी ऐसा कदम न उठाएं, चिकित्सक से परामर्श लें और सही उपचार कराएं।
पटना. बिहार में घर टूटने के नए और चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं. ऐसा ही एक अजीबोगरीब मामला बिहार महिला आयोग में सामने आया जहां पत्नी अपने पति से सिर्फ इसलिए अलग होना चाहती हैं, क्योंकि उन्हें शुगर की बीमारी है. जानकारी के मुताबिक, डायबिटिज होने के कारण शख्स के खानपान पर प्रतिबंध था. महिला को यह बात नागवार गुजरी और संबंध तोड़ने का फैसला कर लिया.
मामला वैशाली जिले के मोहनपुर गांव का है जहां 20 वर्षीय महिला आंचल की शादी वैशाली जिले के ही रहने वाले दीनदयाल से जून 2019 में हुई थी. शादी के बाद पता चला कि पति को शुगर को बीमारी है और उन्हें खाने-पीने का परहेज़ है. इसके बाद आंचल ने पति के साथ न रहने की ठान ली.
महिला आयोग पहुंची आंचल ने बताया, मुझसे हर रोज पति के लिए अलग खाना बनाना संभव नहीं हो सकेगा. बीमार पति तो कभी भी भगवान को प्यारे हो जाएंगे और अगर बच्चा हो गया तो मुश्किल हो जाएगा. ऐसे में अभी ही रिश्ता तोड़ना ज्यादा अच्छा है.
इस मामले में पति दीनदयाल का कहना है कि आंचल झूठ बोल रही हैं. उन्हें कोई बीमारी नहीं है. मेरी तबियत हल्की-फुल्की नासाज़ रहती है. दीनदयाल ने बताया कि शादी परिवारवालों की मर्ज़ी से सबकुछ देख कर हुई थी. लड़की के पिता खुद कई बार मिल चुके थे, लेकिन अब लड़की उनके साथ रहने से मना कर रही है.
दीनदयाल ने बताया कि वह मजदूरी का काम करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि पत्नी को मनाने के लिए एक दिन वह मिठाई लेकर ससुराल गए थे, जहां उनपर हमला कर दिया गया. दीनदयाल ने बताया कि समाज में नाम खराब न हो इसलिए वह पत्नी को साथ रखना चाहते हैं, लेकिन महिला उनके साथ रहने से साफ इंकार कर रही है.
महिला आयोग ने इस मामले में दोनों पक्षों को एक बार फिर से सोचने को कहा है और पत्नी को पति के साथ रहने की सलाह दी है. महिला आयोग में आए इस मामले से वहां के कर्मचारी भी सकते में है. आयोग ने दोनों पक्षों को एक मौका देते हुए आगे की तारीख दी है.
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान के तहत डीआरडीओ द्वारा बनाए गए एयर इंडीपेंडेंट प्रोपल्शन (एआइपी) सिस्टम्स को भारतीय नौसेना की कलवारी श्रेणी की पनडुब्बियों में फिट किया जाएगा। इस सिस्टम की वजह से भारतीय पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के नीचे रह सकेंगी। एआइपी को पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों में लगाया जाता है और इनसे उनकी पानी के नीचे रहने की क्षमता में वृद्धि होती है अन्यथा पनडुब्बियों को अपनी बैट्रियां चार्ज करने के लिए बार-बार पानी की सतह पर आना पड़ता है। फ्रांसीसी कंपनी नेवल ग्रुप के सीनियर एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट एलेन गुइलो ने कहा कि 'डीआरडीओ द्वारा बनाई गई एआइपी को कलवारी श्रेणी की पनडुब्बियों में उनके रीफिट कार्यक्रम के दौरान फिट किया जाएगा। आइएनएस कलवारी श्रेणी की पहली पनडुब्बी का पहला रीफिट वर्ष 2023 में निर्धारित है। उन्होंने बताया कि डीआरडीओ का एआइपी सिस्टम अच्छा है और यह पनडुब्बियों की क्षमता में वृद्धि करेगा। डीआरडीओ इसे विकसित करने के लिए पुणे स्थित नेवल मेटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (एनएमआरएल) में नौसेना के साथ मिलकर कार्य करता रहा है।
चीन के हुबेई प्रांत में फैले कोरानावायरस से मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। चीन के स्वास्थ्य आयोग का कहना है कि नए कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 811 हो गई है, जो लगभग 17 साल पहले सार्स वायरस के कारण हुई मौतों से अधिक है। सार्स वायरस 2003 में फैला था और दो दर्जन से अधिक देशों में इसके मरीज पाए गए थे, सार्स के कारण 774 लोगों की जान गई थी। चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा दिए गए ताजा आकंड़े के मुताबिक, 2,649 संदिग्ध लोगो को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी कर दी गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस जानलेवा वायरस के कारण अब तक 811 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 37000 से ज्यादा लोग इस वायरस से संक्रमित हैं।
रूसी न्यूज एजेंसी स्पूतनिक के अनुसार, 33738 लोगों का कोरोनावायरस के कारण हुए निमोनिया का इलाज किया जा रहा है। चीन ने कोरोनावायरस के फैलाव से निपटने के लिए दर्जन भर शहरों में 5.6 करोड़ लोगों की आवाजाही को रोकने के लिए विशेष वार्ड से लेकर यात्रा प्रतिबंध तक जैसे कदम उठाए हैं।
कोरोनोवायरस का पहला मामला दिसंबर के अंत में चीन के वुहान में पता चला था और तब से यह 25 से अधिक देशों में फैल चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रकोप के मद्देनजर वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।
चीन में बेकाबू हो चुके कोरोनावायरस ने वहां बड़े पैमाने पर बरती गई राजनीतिक-प्रशासनिक लापरवाही को दुनिया के समक्ष उजागर कर दिया है। चीन पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि जब वुहान में कोरोनावायरस फैल रहा था, तब वहां की मेयर ने सरकार पर आरोप लगाया तो रोग नियंत्रक अधिकारियों ने नौकरशाहों पर जिम्मेदारी डाल दी। सरकार में बैठे नेताओं ने तो जनता को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया।
मौत के आंकड़ों और संक्रमितों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी के बीच उच्च स्तर पर इस तरह आरोप-प्रत्यारोप वाकई हैरान करने वाले हैं। जानकारों का कहना है कि कोरोना को रोकने में विफल रहे चीन में पहली दफा जनता की नजरों में उनके सरकारी तंत्र की पोल खुल गई है, जिसे बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक कार्य करने में दक्ष माना जाता था। चीन के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने कार्यकाल में नौकरशाहों और टेक्नोक्रेट्स से ज्यादा पार्टी काडर को तवज्जो दी है।
इसके चलते पार्टी काडर नौकरशाही पर हावी हो गया है। नौकरशाह ऐसा कोई भी निर्णय लेने से कतराते हैं, जिससे सरकार की आलोचना हो। मशहूर चीनी लेखक और वहां की राजनीति-नौकरशाही पर नजर रखने वाले शु काइझेन का मानना है कि कोरोना वायरस के बेकाबू होने में मौजूदा प्रशासनिक हालात का बड़ा योगदान है। वुहान से फैली महामारी ने स्थानीय सरकार की कमजोर कार्रवाई और नौकरशाहों के मन में शीर्ष स्तर पर बैठे नेताओं के भय को उजागर कर दिया है।
बोकारो. झारखंड के बोकारो जिला के तेलो थाना क्षेत्र के बंदियो निवासी राजीव कुमार ने अपनी पत्नी की बेवफाई से नाराज होकर उसके सामाजिक बहिष्कार का संदेश नए तरीके से दिया. पति का आरोप है कि उनकी पत्नी (32) अपने प्रेमी के साथ भाग गई. वह फिलहाल, वह अपने प्रेमी के साथ रांची में रह रही है.
विरोध जताने के लिए पति ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार पत्नी का पुतला बनाकर उसका विधिपूर्वक अंतिम संस्कार कर दिया. नाबालिग पुत्र ने अपनी मां के प्रतीकात्मक पुतले को मुखाग्नि दी. राजीव ने बताया कि अब उसकी पत्नी मर चुकी है. उसके साथ उसका और उनके परिवार के सदस्यों को किसी भी प्रकार का कोई रिश्ता नहीं रहा. पत्नी दो बच्चों की मां होने के बावजूद अपने गांव में ही रहने वाले अपने प्रेमी के साथ 4 जनवरी को घर से भाग गई थी.
PM मोदी ने कहा कि करोड़ों देशवासियों की तरह ही मेरे हृदय के करीब है इस विषय पर बात करना मैं अपना सौभाग्य समझता हूं। ये विषय श्रीराम जन्म भूमि से जुड़ा हुआ है। ये विषय है अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर से जुड़ा हुआ है।
राम मंदिर निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 87 दिन बाद केद्र सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र नाम के एक ट्रस्ट की घोषणा की है। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद संसद में की। PM मोदी ने कहा कि करोड़ों देशवासियों की तरह ही मेरे हृदय के करीब है इस विषय पर बात करना मैं अपना सौभाग्य समझता हूं। ये विषय श्रीराम जन्म भूमि से जुड़ा हुआ है। ये विषय है अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर से जुड़ा हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’’ के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया, यह ट्रस्ट अयोध्या में भगवान राम मंदिर के निर्माण और उससे संबंधित विषयों पर निर्णय के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र होगा। उन्होंने कहा कि 9 नवंबर, 2019 को मैं करतारपुर साहिब कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए पंजाब में था। वो एक अद्भुत अनुभव था। मुझे राम जन्मभूमि मामले पर ऐतिहासिक निर्णय के बारे में पता चल गया था, जबकि मैं वहां था।
मोदी ने कहा कि SC ने राम मंदिर के पक्ष में फैसला दिया था। इसने सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन देने को भी कहा था। आज सुबह, एक बैठक में, SC के निर्णय के अनुरूप बड़े फैसले लिए गए हैं। हमने अयोध्या में यूपी सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए 5 एकड़ जमीन देने का अनुरोध किया। यूपी सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। सरकार ने राममंदिर के दर्शन के लिए जाने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए एक और बड़ा फैसला किया है। मेरी सरकार ने फैसला किया है कि अधिकृत भूमि, जो लगभग 67.703 एकड़ है और अंदर और बाहर का आंगन है, को राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र में स्थानांतरित किया जाएगा।
PM मोदी ने कहा कि 9 नवंबर को राम जन्मभूमि पर फैसला आने के बाद सभी देशवासियों ने अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं पर विश्वास जताते हुए बहुत परिपक्वता का उदाहरण दिया था। मैं आज सदन में देशवासियों के परिपक्व व्यवहार की प्रसंशा करता हूं। हमारी संस्कृति, परंपराएं, हमें वसुधैव कुटुंबकम और सर्वे भवन्तु सुखिनः का दर्शन देती हैं और इसी भावना के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती हैं। हिंदुस्तान में हर पंथ के लोग एक बृहद परिवार के सदस्य हैं। इस परिवार के हर सदस्य का विकास हो, वो सुखी, स्वस्थ रहे, समृद्ध रहे, देश का विकास हो, इसी भावना के साथ मेरी सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के सिद्धांत पर चल रही।
‘कैंसर’ एक ऐसा शब्द है, जिसे अपने किसी परिजन के लिए डॉक्टर के मुंह से सुनते ही परिवार के तमाम सदस्यों के पैरों तले की जमीन खिसक जाती है। दरअसल परिजनों को अपने परिवार के उस सदस्य को हमेशा के लिए खो देने का डर सताने लगता है। बढ़ते प्रदूषण तथा पोषक खानपान के अभाव में यह बीमारी एक महामारी के रूप में तेजी से फैल रही है। कैंसर के संबंध में यह जान लेना बेहद जरूरी है कि यह बीमारी किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन अगर इसका सही समय पर पता लगा लिया जाए तो उपचार संभव है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि हमारे देश में पिछले बीस वर्षों के दौरान कैंसर के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। प्रतिवर्ष कैंसर से पीडि़त लाखों मरीज मौत के मुंह में समा जाते हैं और माना जा रहा है कि वर्ष 2020 तक कैंसर के मरीजों की संख्या एक करोड़ की संख्या को भी पार कर जाएगी। हालांकि कुछ वर्ष पूर्व तक कैंसर को एक असाध्य अर्थात् लाइलाज रोग के रूप में जाना जाता था लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के उपचार की दिशा में क्रांतिकारी खोजें हुई हैं और अब अगर समय रहते कैंसर की पहचान कर ली जाए तो उसका उपचार किया जाना काफी हद तक संभव हो जाता है।
दुनियाभर में कैंसर के मामलों को कम करने के लिए कैंसर तथा उसके कारणों के प्रति लोगों को जागरूक किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि वे इस बीमारी, इसके लक्षणों और इसके भयावह खतरे के प्रति जागरूक रहें। दरअसल कैंसर के करीब दो तिहाई मामलों का बहुत देर से पता चलता है और कई बार तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इसी उद्देश्य से दुनियाभर में लोगों को कैंसर होने के संभावित कारणों के प्रति जागरूक करने, प्राथमिक स्तर पर कैंसर की पहचान करने और इसके शीघ्र निदान तथा रोकथाम के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिवर्ष 4 फरवरी को ‘विश्व कैंसर दिवस’ मनाया जाता है। दरअसल कैंसर आज न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में एक ऐसी भयानक बीमारी बन चुका है कि तमाम प्रयासों के बावजूद इसके मरीजों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है तथा लाखों लोग हर साल इस बीमारी के कारण बेमौत मारे जा रहे हैं। इसी वजह से वर्ष 2005 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिवर्ष 4 फरवरी को ‘विश्व कैंसर दिवस’ मनाने का निर्णय लिया गया ताकि लोगों को इस भयानक बीमारी से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा सके और ज्यादा से ज्यादा जागरूक किया जा सके।
दरअसल कैंसर से लड़ने का सबसे बेहतर और मजबूत तरीका यही है कि लोगों में इसके बारे में जागरूकता हो, जिसके चलते जल्द से जल्द इस बीमारी की पहचान हो सके और शुरूआती चरण में ही इस बीमारी का इलाज संभव हो। यदि कैंसर का पता शीघ्र ही लगा लिया जाए तो उसके उपचार पर होने वाला खर्च बहुत कम हो जाता है लेकिन इसकी पहचान अगर विकसित दशा में होती है तो उपचार की लागत कई गुना बढ़ जाती है। कैंसर के तीसरे या चौथे चरण में पहुंच जाने की स्थिति में मरीज का इलाज मुश्किल हो जाता है और खर्च भी अपेक्षाकृत काफी बढ़ जाता है। ऐसे मरीजों के लंबा जीवन जीने की उम्मीदें भी कम हो जाती है। यही वजह है कि जागरूकता के जरिये इस बीमारी को शुरूआती दौर में ही पहचान लेना बेहद जरूरी माना गया है क्योंकि ऐसे मरीजों के इलाज के बाद उनके स्वस्थ एवं सामान्य जीवन जीने की संभावनाएं काफी ज्यादा होती हैं। हालांकि देश में कैंसर के इलाज की तमाम सुविधाओं के बावजूद अगर हम इस बीमारी पर लगाम लगाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं तो इसके पीछे इस बीमारी का इलाज महंगा होना एक बहुत बड़ी समस्या है। वैसे देश में जांच सुविधाओं का अभाव भी कैंसर के इलाज में एक बड़ी बाधा है, जो बहुत से मामलों में इस बीमारी के देर से पता चलने का एक अहम कारण होता है।
आधुनिक जीवनशैली, नियमित व्यायाम न करना, भोजन की शुद्धता पर ध्यान न देना, प्रदूषित वातावरण इत्यादि कई ऐसे अहम कारण हैं, जो शरीर में कैंसर विकसित होने के प्रमुख कारक हो सकते हैं। कैंसर के संबंध में यह जान लेना बेहद जरूरी है कि आखिर यह है क्या? हमारे शरीर की कोशिकाएं जब अनियंत्रित होकर अपने आप तेजी से बढ़ने लगती हैं तो कोशिकाओं ेकेे समूह की उस अनियंत्रित वृद्धि को ही कैंसर कहते हैं। जब ये कोशिकाएं टिश्यू को प्रभावित करती हैं तो कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है और ऐसी स्थिति में कैंसर काफी घातक हो जाता है। वैसे तो कैंसर के सौ से भी ज्यादा प्रकार हैं लेकिन ब्रेन कैंसर के अलावा पुरूषों में मुख्यतः मुंह व जबड़ों का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, पित्त की थैली का कैंसर, पेट का कैंसर, लीवर कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर होता है जबकि महिलाओं में होने वाले कैंसर में स्तन तथा ओवेरियन कैंसर प्रमुख हैं। दुनिया भर में कैंसर से लड़ने और इस पर विजय पाने के चिकित्सीय उपाय हो रहे हैं और चिकित्सा के क्षेत्र में शोधकर्ताओं के प्रयासों के चलते कैंसर का प्रारम्भिक स्टेज में इलाज अब संभव है। यही कारण है कि 1990 के बाद से कैंसर से मरने वालों की संख्या में करीब 15 फीसदी की कमी आई है।
वैसे तो कैंसर कई प्रकार का होता है और हर प्रकार के कैंसर के होने के कारण भी अलग-अलग होते हैं किन्तु इस बीमारी के कुछ ऐसे मुख्य कारक होते हैं, जिनकी वजह से किसी को भी कैंसर का खतरा हो सकता है। वजन बढ़ना या मोटापा, शारीरिक सक्रियता का अभाव, अधिक मात्रा में अल्कोहल तथा नशीले पदार्थों का सेवन करना, पौष्टिक आहार न लेना, नियमित व्यायाम न करना इत्यादि इन कारणों में शामिल हो सकते हैं। कैंसर एक ऐसी खामोश बीमारी है, जिसके कभी-कभार कोई लक्षण सामने नहीं आते किन्तु कैंसर के अक्सर जो लक्षण सामने आते हैं, उनकी जानकारी होना बहुत जरूरी है ताकि ऐसे लक्षण नजर आते ही तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क कर जरूरी जांच करा ली जाएं। ऐसे ही लक्षणों में लगातार वजन घटते जाना, शरीर में रक्त की कमी होते जाना, तेज बुखार आना और बुखार का ठीक न होना, निरन्तर थकान व कमजोरी महसूस करना, चक्कर आना, उल्टी होना, भूलना, दौरे पड़ना शुरू होना, आवाज में बदलाव आना, सांस लेने में दिक्कत होना, पेशाब और शौच के समय खून आना, खांसी के दौरान खून आना, लंबे समय तक कफ रहना और कफ के साथ म्यूकस आना, कुछ भी निगलने में दिक्कत होना, गले में किसी भी प्रकार की गांठ होना, शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ या सूजन होना, स्तन में गांठ, माहवारी के दौरान अधिक स्राव होना इत्यादि शामिल हैं।
कीमोथैरेपी, रेडिएशन थैरेपी, बायोलॉजिकल थैरेपी, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट इत्यादि के जरिये कैंसर का इलाज होता है किन्तु यह इलाज प्रायः इतना महंगा होता है कि एक गरीब व्यक्ति इतना खर्च उठाने में सक्षम नहीं होता। इसलिए जरूरत इस बात की महसूस की जाती रही है कि ऐसे मरीजों का इलाज सरकारी अस्पतालों में हो या निजी अस्पतालों में, सरकार ऐसे मरीजों के इलाज में यथासंभव सहयोग करे। हालांकि दिल्ली स्थित एम्स में कैंसर के इलाज की सारी सुविधाएं हैं और हरियाणा में झज्जर के बादली क्षेत्र में बाढ़सा स्थित एम्स में भी कैंसर के इलाज की सुविधाएं शुरू हो चुकी हैं किन्तु देशभर में कैंसर के मरीजों की संख्या जिस गति से बढ़ रही है, उसके दृष्टिगत केवल सरकारी अस्पतालों के भरोसे कैंसर मरीजों के इलाज की कल्पना बेमानी ही होगी।
हिंदू धर्म में सबसे पूज्य देवी देवताओं में से एक हैं भगवान शिव । देवों के देव महादेव लोगों के दुखों के संहारकर्ता भगवान शिव की पूजा मूर्ति एवं शिवलिंग दोनों ही रूपों में की जाती है। इस सृष्टि के स्वामी शिव को भक्त महादेव, भोलेनाथ, शिव शंभू जैसे कई नामों से पुकारते हैं। भगवान शिव को रूद्र नाम से जाना जाता है रुद्र का अर्थ है रुत दूर करने वाला अर्थात दुखों को हरने वाला।
शिव में परस्पर विरोधी भावों का सामंजस्य देखने को मिलता है। शिव के मस्तक पर एक ओर चंद्र है, तो दूसरी ओर महाविषधर सर्प भी उनके गले का हार है।वे अर्धनारीश्वर होते हुए भी कामजित हैं। गृहस्थ होते हुए भी श्मशानवासी, वीतरागी हैं। सौम्य, आशुतोष होते हुए भी भयंकर रुद्र हैं। शिव परिवार भी इससे अछूता नहीं हैं। उनके परिवार में भूत-प्रेत, नंदी, सिंह, सर्प, मयूर व मूषक सभी का समभाव देखने को मिलता है। वे स्वयं द्वंद्वों से रहित सह-अस्तित्व के महान विचार का परिचायक हैं। शिव का संपूर्ण रूप देखकर यह संदेश मिलता है कि हम जिन चीजों को अपने आस-पास देख भी नहीं सकते उसे उन्होंने बड़ी आसानी से अपनाया है।
भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार हैं। शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है, लेकिन वे हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं। रावण, शनि, कश्यप ऋषि आदि इनके भक्त हुए है। शिव सभी को समान दृष्टि से देखते है इसलिये उन्हें महादेव कहा जाता है। भगवान शिव से जुड़े बहुत सारे ग्रंथ लिखे गए हैं जिनमें उनके जीवन चरित्र, रहन-सहन, विवाह और उनके परिवार के बारे में बताया गया है। लेकिन उन सब में से महर्षि वेदव्यास द्वारा लिखे गए शिव-पुराण को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। इस ग्रंथ में भगवान शिव की भक्ति महिमा और उनके अवतारों के बारे में विस्तार से बताया गया है। माना जाता है कि शिवपुराण को पढ़ने और सुनने से पुण्य की प्राप्ति होती है। शिव पुराण में प्रमुख रूप से शिव-भक्ति और शिव-महिमा का प्रचार-प्रसार किया गया है।
भगवान शंकर का चित्र या मूर्ति पर जटाएं हैं। उन जटाओं में एक चन्द्र चिह्न होता है। उनके मस्तक पर तीसरी आंख है। वे गले में सर्प और रुद्राक्ष की मा ला लपेटे रहते हैं। उनके एक हाथ में डमरू तो दूसरे में त्रिशूल है। वे संपूर्ण देह पर भस्म लगाए रहते हैं। उनके शरीर के निचले हिस्से को वे व्याघ्र चर्म से लपेटे रहते हैं। वे वृषभ की सवारी करते हैं और कैलाश पर्वत पर ध्यान लगाए बैठे रहते हैं। शिव के ये सभी प्रतीक अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए हैं जिन्हें सभी भक्तजनों को जानना चाहिए। शिव के स्वरूप का विशिष्ट प्रभाव अपनी अलग-अलग प्रकृति को दर्शाता है। पौराणिक मान्यता से देखें तो हर आभूषण का विशेष प्रभाव तथा महत्व बताया गया है। शिव की वेशभूषा ऐसी है कि प्रत्येक धर्म के लोग उनमें अपने प्रतीक ढूंढ सकते हैं। भगवान शिव सब देवों से निराले हैं।
उनका वेश, स्वरूप, श्रृंगार और प्रतीक - ये सब उन्हें विशेष बनाते हैं। वे संपूर्ण जगत के निर्माता हैं। समाधि में रहकर भी पूरे विश्व पर उनकी नजर रहती है।उनकी समाधि जितनी रहस्यमय है, उतने ही रहस्यमय हैं उनके साथ जुड़े प्रतीक। शिव अपने शरीर पर भस्म धारण करते हैं। भस्म जगत की निस्सारता का बोध कराती है। भस्म आकर्षण, मोह आदि से मुक्ति का प्रतीक भी है। देश में एकमात्र जगह उज्जैन के महाकाल मंदिर में शिव की भस्म आरती होती है जिसमें श्मशान की भस्म का इस्तेमाल किया जाता है। यज्ञ की भस्म में वैसे कई आयुर्वेदिक गुण होते हैं। प्रलयकाल में समस्त जगत का विनाश हो जाता है, तब केवल भस्म (राख) ही शेष रहती है। यही दशा शरीर की भी होती है।
मेष, वृषभ, तुला:- इन राशि वाले लोगों के लिए आने वाला समय बेहद शुभ रहने वाला है, आपको प्रेम से जुडी हर बाधा से मुक्ति प्राप्त होने वाली है। सिंगल लोगों को पार्टनर मिल सकता है। प्रेमिका से किया हुआ वादा पूरा नहीं होगा, जिससे प्रेमिका आप से बहुत गुस्से में रह सकती है। प्रेमिका से तरफ से आपको शुभ समाचार मिल सकते है। पार्टनर के लिए कोई महंगी गिफ्ट खरीद कर ला सकते है। जो लोग सिंगल है उनको सच्चा प्यार मिल सकता है। आप अपने लव पार्टनर से मुलाक़ात कर सकते हैं तथा उनसे दिल की बात भी शेयर कर सकते हैं।
सिंह, कन्या, मिथुन:- व्यापार व नौकरी पेशा में सफलता प्राप्त होने वाली है, आपको अपना सच्चा प्यार अवश्य मिलेगा। लाइफ में होने वाले परिवर्तन आपके लिए बेहद खास रहेंगे। जितना आप दूसरों की भलाई करेंगे। जीवन में उतनी ही तेजी से कामयाबी हासिल करेंगे। खुशहाली आपके जीवन में दस्तक देने वाली है। आपके जीवन के सभी प्रकार के दुखों का अंत होगा।आपके द्वारा की गई मेहनत रंग लाने वाली है, कार्यस्थल में आपको शुभ परिणाम हासिल होगा, बच्चों के साथ अच्छा समय व्यतीत करेंगे, आमदनी के अच्छे स्रोत हासिल हो सकते हैं।शैक्षणिक कार्य आसानी से हल होने वाले है।
धनु, मकर, कुंभ:- कुछ बिगड़े हुए कार्य पूरे हो सकते हैं, व्यापार के क्षेत्र में आपको लाभ होगा। समय अनुकूल रहेगा। आपके ऊपर पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। लेकिन आप फिर भी अपनी जिम्मेदारियों को ठीक प्रकार से निभाएंगे। नौकरी और बिजनेस के मामले में आपको अचानक फैसला लेना पड़ सकता है, आपका व्यवहार अच्छा रहेगा ,आप अपनी सभी जिम्मेदारियां ठीक प्रकार से निभाएंगे, काफी लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं, कुछ नए लोग आपके साथ जुड़ सकते हैं।