खास खबर

खास खबर (1096)

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हमारी हथेली पर ऐसे कई निशान होते हैं जो छोटी-छोटी रेखाओं के मिलने या टकराने से बनते हैं। इनमें कुछ निशान हमें शुभ फल प्रदान करते हैं, किंतु कुछ बेहद अशुभ होते हैं।   कुछ खास स्थितियों में चक्र का निशान जहां हथेली के कुछ शुभ निशानों में माने जाते हैं, वहीं कुछ ऐसे निशान भी हैं जो हर परिस्थिति में बेहद अशुभ स्थितियां लाते हैं। जानिए हाथ में बनने वाले अशुभ निशान क्रॉस के बारे में।
सूर्य ग्रह हमें समाज में यश, सम्मान और प्रतिष्ठा दिलाता है और इसी पर्वत पर अशुभ चिह्न का होना मुसीबतें खड़ी कर देता है। सूर्य पर्वत पर स्थित क्रॉस संकट को दर्शाता है। यह व्यक्ति को प्रसिद्धि, कला या धन की खोज में निराशाजनक संकेत देता है। इस पर्वत पर क्रॉस व्यक्ति की बेईमान प्रकृति को दर्शाता है। व्यक्ति अच्छे मस्तिष्क होने के बावजूद दोहरी प्रकृति का होता है। यह निशान व्यक्ति की बुद्धि को नष्ट करने का काम भी करता है। सब कुछ जानते हुए भी वह बुरे कर्म करने लगता है।
चंद्र पर्वत पर क्रॉस पद, तो व्यक्ति कल्पना से प्रभावित रहेगा। व्यक्ति सदैव सपनों की दुनिया मे रह कर खुद को धोखा देगा। जब क्रॉस शुक्र पर्वत पर स्थित हो तो कुछ संकट या प्रेम संबंध में कष्ट का संकेत देता है। शुक्र प्रेम संबंधों और विलासता का कारक माना गया है, इसलिए क्रॉस का अशुभ चिह्न जीवन के इन्हीं दो बड़े क्षेत्रों पर आक्रमण करता है।
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हथेली पर बना क्रॉस का निशान मुसीबत, निराशा, खतरा और कभी-कभी जीवन में संकट का संकेत देता है। क्रॉस के लक्षण विभिन्न पर्वतों और रेखाओं की स्थिति पर निर्भर करते हैं।
यह व्यक्ति में शत्रु और चोटों के कारण संकट को दर्शाता है। यह संघर्ष, झगड़े और हिंसा द्वारा मृत्यु का भी संकेत देता है। ऐसे व्यक्ति का अगर किसी के साथ झगड़ा हो, तो वह अमूमन उग्र रूप ले लेता है।
26 फरवरी ईएमएस फीचर

लंदन। हाल ही एक शोध में सामने आया है ‎कि वजन कम करने के ‎लिये सुबह भरपेट नाश्ता ‎किया जाये और रात में हल्का ‎डिनर करें। इससे   वजन कम करने के साथ-साथ हाई ब्लड शुगर को भी नियंत्रित कर सकते हैं। जर्मनी स्थित लुबेक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि रात्रि के स्थान पर सुबह शरीर खाना अच्छे से पचाने में मदद करता है। यह शोध द जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने कहा ‎कि जब हम एब्जॉर्पशन, डाइजेशन, ट्रांस्पोट और पोषक तत्वों के भंडारण के लिए भोजन पचाते हैं तब हमारा शरीर ऊर्जा का विस्तार करता है। डाइट-इंड्यूस्ड थर्मोजेनेसिस (डीआईटी) के रूप में चर्चित इस प्रक्रिया में इस बात का माप होता है कि हमारा चयापचय कितनी अच्छी तरह काम कर रहा है और कैसे यह भोजन के आधार पर भिन्न हो सकता है। लुबेक विश्वविद्यालय की कॉरेस्पोंडेंस लेखक जूलियन रिचटर ने कहा ‎कि "हमारे परिणामों से पता चलता है कि नाश्ते में खाया जाने वाला भोजन, इसमें मौजूद कैलोरी की मात्रा की परवाह किए बिना, डिनर में किए गए भोजन की तुलना में दो बार उच्च आहार-प्रेरित थर्मोजेनेसिस बनाता है।" उन्होंने कहा ‎कि "इस शोध से अच्छे से नाश्ता करने के महत्व का पता चलता है।"

अनार के रस के सेवन का एक लाभ यह भी है कि यह रक्त में शर्करा के स्तर को नहीं बढ़ाता, जबकि अन्य फलों के रस का सेवन करने से ऐसा होता है। इसलिए मधुमेह से पीडि़त व्यक्ति भी इसका सेवन बेफिक्र होकर कर सकते हैं।

इस बात से तो हम सभी वाकिफ है कि फलों का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। लेकिन अक्सर देखने में आता है कि लोग हमेशा फलों के रस की बजाय उन्हें यूं ही खाने की सलाह देते हैं क्योंकि इससे उनके स्वास्थ्य लाभ काफी कम हो जाते हैं। दरअसल, अधिकतर फलों के छिलकों में एंटी−ऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं और जब उनका रस निकाला जाता है तो वह एंटी−ऑक्सीडेंट्स भी निकल जाते हैं। लेकिन अनार के रस के साथ ऐसा नहीं होता। अनार का रस भी सेहत के लिए उतना ही लाभकारी है, जितना इसके दानों का सेवन करना। तो चलिए आज हम आपको अनार के रस से होने वाले कुछ स्वास्थ्य लाभों के बारे में बता रहे हैं−

सुधारे दिल की सेहत
अनार का रस दिल की सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है। यह धमनियों में रूकावट के जोखिम को कम करता है। जिससे हृदय या मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह बेहतर तरीके से होता है। इसके अतिरिक्त यह खराब कोलेस्टॉल की मात्रा को भी कम करता है तथा अच्छे कोलेस्टॉल की मात्रा को बढ़ाता है।
 
बनाए रखे ब्लड शुगर लेवल
अनार के रस के सेवन का एक लाभ यह भी है कि यह रक्त में शर्करा के स्तर को नहीं बढ़ाता, जबकि अन्य फलों के रस का सेवन करने से ऐसा होता है। इसलिए मधुमेह से पीडि़त व्यक्ति भी इसका सेवन बेफिक्र होकर कर सकते हैं।
 
कम करें रक्तचाप
जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या रहती है, उन्हें अनार के रस का सेवन करना चाहिए। दरअसल, यह एक प्राकृतिक एस्पिरिन है, जो रक्त के जमाव और रक्त के थक्का बनने से रोकता है। साथ ही यह रक्त को पतला करके उसके प्रवाह को बेहतर बनाता है, जिससे व्यक्ति को ब्लड प्रेशर की समस्या नहीं होती।

दस्त में लाभदायक
अनार के रस का इस्तेमाल दस्त के उपचार के रूप में भी किया जा सकता है। दरअसल, यह एंजाइम्स के स्राव में अहम भूमिका निभाता है और पाचन प्रक्रिया को सही करता है। अगर किसी व्यक्ति को अपच की शिकायत हो तो उसे एक टीस्पून शहद का सेवन एक गिलास अनार के रस में मिलाकर करना चाहिए।

बढ़ाए इम्युनिटी
अनार के रस में एंटी−बैक्टीरिल और एंटी−माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो वायरस व बैक्टीरिया से लड़ने में मददगार होते हैं। साथ ही प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत बनाते हैं। इतना ही नहीं, इसके एंटी−माइक्रोबियल गुण इसे एचआईवी संचरण का अवरोधक भी बनाते हैं। आपको शायद पता न हो लेकिन अनार एक ऐसा फल है, जिसमें एचआईवी के संचरण को रोकने की क्षमता सबसे अधिक है।
 
मिताली जैन

शिवपुराण की विद्येश्वर संहिता में रुद्राक्ष के 14 प्रकार बताए गए हैं। एकमुखी रुद्राक्ष धारण करने वाला कभी गरीब नहीं होता, उस पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है, ऐसा शिवपुराण में लिखा है। हम आपको रुद्राक्ष के प्रकार तथा उससे जुड़ी खास बातें बता रहे हैं।

1. एक मुखी रुद्राक्ष
एक मुखी रुद्राक्ष भगवान शिव का स्वरूप है। जहां इसकी पूजा होती है, वहां से माता लक्ष्मी दूर नहीं जातीं। यानी जो इस रुद्राक्ष को धारण करता है, वह कभी गरीब नहीं होता।
धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं नम:

2. दो मुखी रुद्राक्ष
दो मुख वाला रुद्राक्ष देव देवेश्वर कहा गया है। यह सभी इच्छाएं पूरी करता है। धारण करने का मंत्र- ऊं नम:

3. तीन मुखी रुद्राक्ष
तीन मुख वाला रुद्राक्ष सफलता दिलाने वाला होता है। विद्या प्राप्ति के लिए भी यह रुद्राक्ष बहुत विशेष है।
धारण करने का मंत्र- ऊं क्लीं नम:

4. चार मुखी रुद्राक्ष
चार मुख वाला रुद्राक्ष ब्रह्मा का स्वरूप है। उसके दर्शन तथा स्पर्श से धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं नम:

5. पंचमुखी रुद्राक्ष
पांच मुख वाला रुद्राक्ष कालाग्नि रुद्र स्वरूप है। इसको पहनने से अद्भुत मानसिक शक्ति का विकास होता है।
धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं नम:

6. छ: मुखी रुद्राक्ष
छ: मुख वाला रुद्राक्ष भगवान कार्तिकेय का स्वरूप है। जो भी इस रुद्राक्ष को पहनता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं हुं नम:

7. सात मुखी रुद्राक्ष
सात मुख वाला रुद्राक्ष अनंग नाम से प्रसिद्ध है। इसे धारण करने वाला गरीब भी राजा बन जाता है।
धारण करने का मंत्र- ऊं हुं नम:

8. अष्टमुखी रुद्राक्ष
आठ मुख वाला रुद्राक्ष अष्टमूर्ति भैरवस्वरूप है। जो भी ये रुद्राक्ष पहनता है उसकी आयु बढ़ जाती है।
धारण करने का मंत्र- ऊं हुं नम:

9. नौमुखी रुद्राक्ष
नौ मुख वाला रुद्राक्ष भैरव व कपिलमुनि का प्रतीक है। इसे पहनने से गुस्से पर नियंत्रण व ज्ञान की प्राप्ति होती है।
धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं हुं नम:

10. दस मुखी रुद्राक्ष
दस मुख वाला रुद्राक्ष भगवान विष्णु का रूप है। इसे धारण करने वाले मनुष्य की संपूर्ण इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।
धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं नम:

11. ग्यारह मुखी रुद्राक्ष
ग्यारह मुखवाला रुद्राक्ष रुद्र रूप है। जो इस रुद्राक्ष को पहनता है, किसी भी क्षेत्र में उसकी कभी हार नहीं होती।
धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं हुं नम:

12. बारह मुखी रुद्राक्ष
बारह मुख वाले रुद्राक्ष को धारण करने से इज्जत, शोहरत, पैसा या अन्य किसी चीज की कोई कमी नहीं होती।
धारण करने का मंत्र- ऊं क्रौं क्षौं रौं नम:

13. तेरह मुखी रुद्राक्ष
तेरह मुख वाला रुद्राक्ष विश्वदेवों का रूप है। इसे धारण कर मनुष्य सौभाग्य और मंगल लाभ प्राप्त करता है।
धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं नम:

14. चौदह मुखी रुद्राक्ष
चौदह मुख वाला रुद्राक्ष परम शिवरूप है। इसे धारण करने पर समस्त पापों का नाश हो जाता है।
धारण करने का मंत्र- ऊं नम:
 

घर में सिंक कहां हो, जो कि आपके सौभाग्य में वृद्धिकारक हो। फेंगशुई में इसके बारे स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया है। यदि फेंगशुई की इस सलाह को ध्यान में रखकर अपने भवन में सिंक का निर्माण कराएंगे तो इसका सकारात्मक प्रभाव आपके जीवन पर पड़ेगा।

नवनिर्मित मकान में जब तक नल का कार्य नहीं करवाया जाता, तब तक सिक लगवाना व्यावहारिक है। सिक पानी से संबंधित है। फेंग शुई के अनुसार उत्तर दिशा को जल तत्व के लिए सही माना गया है। अत: सिक को उत्तर दिशा में ही स्थापित करें। यदि किसी कारणवश सिक उत्तर दिशा में स्थापित न हो पाए तो उसे दक्षिण के अलावा किसी भी दिशा में लगाया जा सकता है, क्योंकि दक्षिण दिशा अग्नि तत्व वाली है। अग्नि और जल का एक दिशा में होना ठीक नहीं है।

उत्तर दिशा में सिक स्थापना का एक अन्य लाभ यह है कि यह क्षेत्र शांति, सेक्स और भविष्य - निर्माण का प्रतीक है। इस तरह से सिक - स्थापना से उपरोक्त सभी क्षेत्रों में लाभ उठाया जा सकता है। सिंक जब भी आप भी आप अपने घर में लगाए तो आपकी प्राथमिकता उत्तर दिशा ही होनी चाहिए। दक्षिण दिशा में नहीं लगाए, अन्यथा यह आपके परिवार की सुàख-शांति व समृद्धि के लिए उचित नहीं है।

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM)  के मंच पर एक लड़की ने पाकिस्तान के समर्थन में नारा लगाकर हर किसी को सकते में डाल दिया. पाकिस्तान समर्थित नारा लगाने वाली लड़की अमूल्या लियोना के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज हो चुका है. कोर्ट ने अमूल्या लियोना को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

अमूल्या लियोना को परप्पाना अग्रहारा की सेंट्रल जेल में रखा जाएगा. इसके साथ ही बेंगलुरू पुलिस ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ फ्रीडम पार्क में आयोजित रैली के आयोजकों को भी नोटिस भेजा है. उन्हें पूछताछ के लिए आज सुबह बुलाया गया.

इस बीच बीजेपी मीडिया सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने आरोपी लड़की अमूल्या लियोना का ट्वीट किया और आशंका जाहिर की है कि जो दिख रहा है उसके पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं. अमूल्या का ये वीडियो 21 जनवरी का है, जिसमें उसने एक यू ट्यूब चैनल को इंटरव्यू में ये सारी बातें कहीं हैं, जिसे अमित मालवीय ने जारी किया है.
अमूल्या लियोना के विवादित नारों को सुनकर ना सिर्फ राजनीति सुलग रही है, बल्कि खुद उसके पिता ने बेटी के बयानों से पल्ला झाड़ लिया है. चिक्कमंगलुरु में पिता जेडीएस के नेता हैं लेकिन कहते हैं कि बेटी के बयान से लेना देना नहीं. उन्होंने कहा कि मैंने कई बार उनसे कहा कि वे मुसलमानों से न जुड़ें. उसने नहीं सुना. मैंने उसे कई बार भड़काऊ बयान नहीं देने के लिए कहा है लेकिन उसने नहीं सुना.

शिव ने संसार और संन्यास दोनों को जीया है। उन्होंने जीवन को नई और परिपूर्ण शैली दी। पृथ्वी, पानी, अग्नि, वायु, वनस्पति की जीवन में आवश्यकता और उपयोगिता का प्रशिक्षण दिया। कला, साहित्य, शिल्प, मनोविज्ञान, विज्ञान और शिक्षा के साथ साधना के मानक निश्चित किए।

भगवान शिव आदिदेव है, देवों के देव हैं, महादेव हैं। सभी देवताओं में वे सर्वोच्च हैं, महानतम हैं, दुःखों को हरने वाले हैं। वे कल्याणकारी हैं तो संहारकर्ता भी हैं। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है, जो शिवत्व का जन्म दिवस है। यह शिव से मिलन की रात्रि का सुअवसर है। इसी दिन निशीथ अर्धरात्रि में शिवलिंग का प्रादुर्भाव हुआ था। इसीलिये यह पुनीत पर्व सम्पूर्ण देश एवं दुनिया में उल्लास और उमंग के साथ मनाया जाता है। यह पर्व सांस्कृतिक एवं धार्मिक चेतना की ज्योति किरण है। इससे हमारी चेतना जाग्रत होती है, जीवन एवं जगत में प्रसन्नता, गति, संगति, सौहार्द, ऊर्जा, आत्मशुद्धि एवं नवप्रेरणा का प्रकाश परिव्याप्त होता है। यह पर्व जीवन के श्रेष्ठ एवं मंगलकारी व्रतों, संकल्पों तथा विचारों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
 
भगवान शिव भोले भण्डारी हैं और जग का कल्याण करने वाले हैं। सृष्टि के कल्याण हेतु जीर्ण-शीर्ण वस्तुओं का विनाश आवश्यक है। इस विनाश में ही निर्माण के बीज छुपे हुए हैं। इसलिये शिव संहारकर्ता के रूप में निर्माण एवं नव-जीवन के प्रेरक भी हैं। सृष्टि पर जब कभी कोई संकट पड़ा तो उसके समाधान के लिये वे सबसे आगे रहे। जब भी कोई संकट देवताओं एवं असुरों पर पड़ा तो उन्होंने शिव को ही याद किया और शिव ने उनकी रक्षा की। समुद्र-मंथन में देवता और राक्षस दोनों ही लगे हुए थे। सभी अमृत चाहते थे, अमृत मिला भी लेकिन उससे पहले हलाहल विष निकला जिसकी गर्मी, ताप एवं संकट ने सभी को व्याकुल कर दिया एवं संकट में डाल दिया, विष ऐसा कि पूरी सृष्टि का नाश कर दें, प्रश्न था कौन ग्रहण करे इस विष को। भोलेनाथ को याद किया गया गया। वे उपस्थित हुए और इस विष को ग्रहण कर सृष्टि के सम्मुख उपस्थित संकट से रक्षा की। उन्होंने इस विष को कंठ तक ही रखा और वे नीलकंठ कहलाये। इसी प्रकार गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिये भोले बाबा ने ही सहयोग किया क्योंकि गंगा के प्रचंड दबाव और प्रवाह को पृथ्वी कैसे सहन करे, इस समस्या के समाधान के लिये शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को समाहित किया और फिर अनुकूल गति के साथ गंगा का प्रवाह उनकी जटाओं से हुआ। ऐसे अनेक सृष्टि से जुड़े संकट और उसके विकास से जुड़ी घटनाएं हैं जिनके लिये शिव ने अपनी शक्तियों, तप और साधना का प्रयोग करके दुनिया को नव-जीवन प्रदान किया। शिव का अर्थ ही कल्याण है, वही शंकर हैं, और वही रुद्र भी हैं। शंकर में शं का अर्थ कल्याण है और कर का अर्थ करने वाला। रुद्र में रु का अर्थ दुःख और द्र का अर्थ हरना- हटाना। इस प्रकार रुद्र का अर्थ हुआ, दुःख को दूर करने वाले अथवा कल्याण करने वाले।

भौतिक एवं भोगवादी भागदौड़ की दुनिया में शिवरात्रि का पर्व भी दुःखों को दूर करने एवं सुखों का सृजन करने का प्रेरक है। भोलेनाथ भाव के भूखे हैं, कोई भी उन्हें सच्ची श्रद्धा, आस्था और प्रेम के पुष्प अर्पित कर अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना कर सकता है। दिखावे, ढोंग एवं आडम्बर से मुक्त विद्वान-अनपढ़, धनी-निर्धन कोई भी अपनी सुविधा तथा सामर्थ्य से उनकी पूजा और अर्चना कर सकता है। शिव न काठ में रहता है, न पत्थर में, न मिट्टी की मूर्ति में, न मन्दिर की भव्यता में, वे तो भावों में निवास करते हैं।
 
यह पर्व महाकाल शिव की आराधना का महापर्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूजा एवं अभिषेक करने पर उपासक को समस्त तीर्थों के स्नान का फल प्राप्त होता है। शिवरात्रि का व्रत करने वाले इस लोक के समस्त भोगों को भोगकर अंत में शिवलोक में जाते हैं। शिवरात्रि की पूजा रात्रि के चारों प्रहर में करनी चाहिए। शिव को बिल्वपत्र, धतूरे के पुष्प तथा प्रसाद में भांग अति प्रिय हैं। लौकिक दृष्टि से दूध, दही, घी, शक्कर, शहद- इन पाँच अमृतों (पंचामृत) का पूजन में उपयोग करने का विधान है।
 
महामृत्युंजय मंत्र शिव आराधना का महामंत्र है। शिवरात्रि वह समय है जो पारलौकिक, मानसिक एवं भौतिक तीनों प्रकार की व्यथाओं, संतापों, पाशों से मुक्त कर देता है। शिव की रात शरीर, मन और वाणी को विश्राम प्रदान करती है। शरीर, मन और आत्मा को ऐसी शान्ति प्रदान करती है जिससे शिव तत्व की प्राप्ति सम्भव हो पाती है। शिव और शक्ति का मिलन गतिशील ऊर्जा का अन्तर्जगत से एकात्म होना है। लौकिक जगत में लिंग का सामान्य अर्थ चिह्न होता है जिससे पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसक लिंग की पहचान होती है। शिव लिंग लौकिक के परे है। इस कारण एक लिंगी है। आत्मा है। शिव संहारक हैं। वे पापों के संहारक हैं। शिव की गोद में पहुंच कर हर व्यक्ति भय-ताप से मुक्त हो जाता है।
 
शिवरात्रि जागृति का पर्व है। जिसमें आत्मा का मंगलकारी शिव से मिलना होता है। यह आत्म स्वरूप को जानने की रात्रि है। यह स्वयं के भीतर जाकर अथवा अंतश्चेतना की गहराइयों में उतरकर आत्म साक्षात्कार करने का दुर्लभ प्रयोग है। यह आत्मयुद्ध की प्रेरणा है, क्योंकि स्वयं को जीत लेना ही जीवन की सच्ची जीत है, शिवत्व की प्राप्ति है। काल के इस क्षण की सार्थकता शिवमय हो जाने में है। शक्ति माया नहीं है, मिथ्या नहीं है, प्रपंच नहीं है। इसके विपरीत शक्ति सत्य है। जीव और जगत भी सत्य है। सभी तत्वतः सत्य हैं। सभी शिवमय हैं।
 
शिव शक्ति के प्रतीक ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की निशीथ काल में हुआ था। शिव पुराण के अनुसार सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा ने इसी दिन रुद्र रूपी शिव को उत्पन्न किया था। शिव एवं हिमालय पुत्री पार्वती का विवाह भी इसी दिन हुआ था। अतः यह शिव एवं शक्ति के पूर्ण समरस होने की रात्रि भी है। वे सृष्टि के सर्जक हैं। वे मनुष्य जीवन के ही नहीं, सृष्टि के निर्माता, पालनहार एवं पोषक हैं। उन्होंने मनुष्य जाति को नया जीवन दर्शन दिया। जीने की शैली सिखलाई।

शिवरात्रि भोगवादी मनोवृत्ति के विरुद्ध एक प्रेरणा है, संयम की, त्याग की, भक्ति की, संतुलन की। सुविधाओं के बीच रहने वालों के लिये सोचने का अवसर है कि वे आवश्यक जरूरतों के साथ जीते हैं या जरूरतों से ज्यादा आवश्यकताओं की मांग करते हैं। इस शिवभक्ति एवं उपवास की यात्रा में हर व्यक्ति में अहंकार नहीं, बल्कि शिशुभाव जागता है। क्रोध नहीं, क्षमा शोभती है। कष्टों में मन का विचलन नहीं, सहने का धैर्य रहता है। यह तपस्या स्वयं के बदलाव की एक प्रक्रिया है। यह प्रदर्शन नहीं, आत्मा के अभ्युदय की प्रेरणा है। इसमें भौतिक परिणाम पाने की महत्वाकांक्षा नहीं, सभी चाहों का संन्यास है।
 
शिव ने संसार और संन्यास दोनों को जीया है। उन्होंने जीवन को नई और परिपूर्ण शैली दी। पृथ्वी, पानी, अग्नि, वायु, वनस्पति की जीवन में आवश्यकता और उपयोगिता का प्रशिक्षण दिया। कला, साहित्य, शिल्प, मनोविज्ञान, विज्ञान, पराविज्ञान और शिक्षा के साथ साधना के मानक निश्चित किए। सबको काम, अर्थ, धर्म, मोक्ष की पुरुषार्थ चतुष्टयी की सार्थकता सिखलाई। वे भारतीय जीवन-दर्शन के पुरोधा हैं। आज उनका सम्पूर्ण व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व सृष्टि के इतिहास का एक अमिट आलेख बन चुका है। उनका सम्पूर्ण जीवन प्रेरणास्रोत है। लेकिन हम इतने भोले हैं कि अपने शंकर को नहीं समझ पाए, उनको समझना, जानना एवं आत्मसात करना हमारे लिये स्वाभिमान और आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला अनुभव सिद्ध हो सकता है। मानवीय जीवन के सभी आयाम शिव से ही पूर्णत्व को पाते हैं।
 
आज चारों ओर अनैतिकता, आतंक, अराजकता और अनुशासनहीनता का बोलबाला है। व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र- हर कहीं दरारे ही दरारे हैं, हर कहीं टूटन एवं बिखराव है। मानवीय दृष्टि एवं जीवन मूल्य खोजने पर भी नहीं मिल रहे हैं। मनुष्य आकृति से मनुष्य रह गया है, उसकी प्रकृति तो राक्षसी हो चली है। मानवता क्षत-विक्षत होकर कराह रही है। इन सबका कारण है कि हमने आत्म पक्ष को भुला दिया है। इन विकट स्थितियों में महादेव ही हमें बचा सकते हैं, क्योंकि शिव ने जगत की रक्षा हेतु बार-बार और अनेक बार उपक्रम किये।
 
वस्तुतः अपने विरोधियों एवं शत्रुओं को मित्रवत बना लेना ही सच्ची शिव भक्ति है। जिन्हें समाज तिरस्कृत करता है उन्हें शिव गले लगाते हैं। तभी तो अछूत सर्प उनके गले का हार है, अधम रूपी भूत-पिशाच शिव के साथी एवं गण हैं। समाज जिनकी उपेक्षा करता है, शंकर उन्हें आमंत्रित करते हैं। शिव की बरात में आए नंग-धड़ंग, अंग-भंग, भूत-पिशाच इसी तथ्य को दृढ़ करते हैं। इस लिहाज से शिव सच्चे पतित पावन हैं। उनके इसी स्वभाव के कारण देवताओं के अलावा दानव भी शिव का आदर करते हैं। सचमुच ! धन्य है उनकी तितिक्षा, कष्ट-सहिष्णुता, दृढ़-संकल्पशक्ति, धैर्यशीलता, आत्मनिष्ठा और अखण्ड साधनाशीलता।
 
भारतीय संस्कृति की भांति शिव परिवार में भी समन्वयकारी गुण दृष्टिगोचर होते हैं। वहां जन्मजात विरोधी स्वभाव के प्राणी भी शिव के प्रताप से परस्पर प्रेमपूर्वक निवास करते हैं। शंकर का वाहन बैल है तो पार्वती का वाहन सिंह, गणेश का वाहन चूहा है तो शिव के गले का हार सर्प एवं कार्तिकेय का वाहन मयूर है। ये सभी परस्पर वैर भाव को छोड़कर सहयोग एवं सद्भाव से रहते हैं। शिव परिवार का यह आदर्श रूप प्रत्येक परिवार एवं समाज के लिए ग्राह्य है। आज समाज एवं राष्ट्र में ऐसे ही सद्भाव, सौहार्द एवं समन्वय की आवश्यकता है।
 
-ललित गर्ग

नई दिल्ली। काशी महाकाल एक्सप्रेस का आधिकारिक सफर गुरुवार से शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी को चंदौली के पड़ाव से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। ये ट्रेन वाराणसी से इंदौर के बीच चलेगी, जो तीन ज्योतिर्लिंगों (श्री ओम्कारेश्वर, श्री महाकालेश्वर और काशी विश्वनाथ) को आपस में जोड़ेगी। आईआरसीटीसी काशी महाकाल एक्सप्रेस का शुभारंभ महाशिवरात्रि के एक दिन पहले यानी 20 फरवरी से शुरू हो रहा है। देश की तीसरी कॉरपोरेट ट्रेन कैंट रेलवे स्टेशन से दोपहर 2.45 बजे इंदौर के लिए रवाना होगी और दूसरे दिन सुबह 9.40 बजे इंदौर पहुंच जाएगी। महाकाल के पहले यात्रियों को आईआरसीटीसी की ओर से आकर्षक उपहार भी दिए जाएंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आने से ठीक पहले भारत ने 30 हैवी ड्यूटी मल्टीरोल कॉम्बैट हेलिकॉप्टरों की डील की है. ये डील करीब 25 हजार करोड़ रुपये की है. इनमें से 6 अपाचे हेलिकॉप्टर होंगे और 24 MH 60R रोमियो सीहॉक मल्टीमिशन हेलिकॉप्टर. रोमियो सीहॉक मल्टीमिशन हेलिकॉप्टर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, तुर्की और स्पेन का पसंदीदा हेलिकॉप्टर है. सब ठीक रहा तो यह भारतीय नौसेना के लिए भी आएगा.
कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी (CCS) के सूत्रों की माने तो इन सौदों को अगले सप्ताह औपचारिक मंजूरी मिल जाएगी. उम्मीद जताई जा रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के दौरान इस समझौते को अंतिम रूप दिया जाए.

CCS के सूत्रों के अनुसार डील के तहत भारत को MH 60R हेलिकॉप्टरों के लिए पहली किस्त के तौर पर 15% की किस्त देनी होगी. डील पर साइन होने के बाद अगले 2 साल में हेलिकॉप्टरों की पहली किस्त आ जाएगी. अगले 4 साल में सभी 24 हेलिकॉप्टर आ जाएंगे.

भूषण ने कहा कि प्रस्तावित योजना के अंतर्गत प्राधिकारियों को बिजली चालित वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिये सब्सिडी मुहैया करानी होगी और उन्हें मॉल तथा पेट्रोल पंप समेत सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे वाहनों के लिए चार्जिंग प्वाइंट बनाने होंगे।

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने वायु प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से, सभी सार्वजनिक परिवहन वाहनों और सरकारी वाहनों की जगह क्रमिक रूप से विद्युत चालित वाहन (ईवी) लाने के मुद्दे पर बुधवार को केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ इस विषय पर बातचीत की इच्छा व्यक्त की। हालांकि, शीर्ष अदालत ने अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी की आपत्ति को देखते हुये मंत्री की उपस्थिति के बारे में कुछ नहीं कहा। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने अतिरिक्त सालीसिटर जनरल ए एन एस नादकर्णी से जानना चाहा कि क्या मंत्री शीर्ष अदालत की सहायता के लिए बातचीत करने आ सकते हैं। पीठ ने नादकर्णी से कहा, ‘‘क्या परिवहन मंत्री उच्चतम न्यायालय आ सकते हैं और बिजली अथवा हाइड्रोजन से चलने वाले प्रदूषण रहित वाहनों के प्रस्ताव पर जानकारी दे सकते हैं?’’
 
पीठ ने इस बात का जिक्र किया कि मंत्री निजी और सार्वजनिक यातायात के लिये वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल के बारे में बात करते रहे हैं, अत: न्यायालय उनके साथ बातचीत करना चाहेगा। पीठ ने कहा, ‘‘आपके मंत्री इसके बारे में बात करते हैं। हम उन्हें सुनना चाहेंगे। किसी जिम्मेदार व्यक्ति को आना चाहिए।’’ नादकर्णी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मंत्री के आने का राजनीतिक कारणों से दुरुपयोग किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नेताओं के अदालत में उपस्थित होने में कुछ गलत नहीं है। पीठ ने कहा, ‘‘हम समझते हैं कि प्रशांत भूषण जी राजनीतिक शख्सियत हैं लेकिन वह मंत्री से जिरह करने नहीं जा रहे हैं।’’ परिवहन मंत्री की उपस्थिति के बारे में कुछ भी कहे बगैर ही पीठ ने कहा, ‘‘हम यह उचित समझते हैं कि इस मामले में निर्णय लेने के अधिकृत प्राधिकारियों की मदद से सारे मुद्दों पर एकसाथ विचार किया जाये।’’

इसके साथ ही पीठ ने गैर सरकारी संगठन सेन्टर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस की याचिका चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध कर दी। इससे पहले सुनवाई के दौरान गैर सरकारी संगठन की ओर से अधिवक्ता भूषण ने कहा कि राष्ट्रीय ई-मोबिलिटी मिशन योजना, 2020 पेश की गयी थी जिसके अनुसार सरकार को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने थे। भूषण ने कहा कि प्रस्तावित योजना के अंतर्गत प्राधिकारियों को बिजली चालित वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिये सब्सिडी मुहैया करानी होगी और उन्हें मॉल तथा पेट्रोल पंप समेत सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे वाहनों के लिए चार्जिंग प्वाइंट बनाने होंगे।

Ads

R.O.NO. 1399/63 Advertisement Carousel

MP info RSS Feed

फेसबुक