छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ (21107)

 अब छत्तीगसढ़ के लोग खास तौर से किसान कहने लगे है कि बेटा चिन्ता मत कर किसान का बेटा मुख्यमंत्री बन गया है। उन्हें किसानों के हर दुख-दर्द और तकलीफों का पता है। वह सभी के दुख हर लेगा तू अपनी ईमानदारी से मेहनत कर के निष्चिंत हो जा। यह बातें अब किसानों में आम होने लगी है। नक्सल प्रभावित जिला नारायणपुर के गांव करलखा में जब किसान कर्ज माफी की चर्चा होती है तो पहला नाम किसान श्री अयोध्या प्रसाद यादव लिया जाना है, जिसका दो लाख 5 हजार 265 रूपए का कर्ज माफ हुआ। उसे छत्तीसगढ़ शासन की ओर से अल्पकालीन कृषि ऋण माफी योजना-2018 का प्रमाण पत्र भी मिल गया है। उन्होंने खेती-किसानी के लिए 1 लाख 90 हजार का कर्ज लिया था, जिस पर ब्याज भी लगा।

    श्री अयोध्या प्रसाद ने खेती-किसानी के साथ-साथ कर्ज माफी की राशि से अब गौ-पालन शुरू कर दिया है। आज उनके तबेले में लगभग 10-12 गाय है। उन्होंने बताया कि वह रोज सुबह और शाम लगभग सवा क्विंटल दूध बेच लेते है। इसके अलावा समय-समय पर पनीर और घी बनाकर भी बेच रहे है। उन्होंने बताया कि वह रोज लगभग 6 हजार रूपए का दूध घरों और दुकानों पर बेच लेते है। महीने में लगभग दो लाख रूपए का इनकम हो जाता है। गायों के चारा-दाना-पानी और अन्य खर्च काटकर लगभग 40-50 हजार रूपए की हर महीने बचत हो जाती है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के साथ-साथ वह गो सेवा कार्यों के लिए रखे गये 6 लोगों के परिवार का भी भरण पोषण कर रहे है।      
माटीपुत्र किसान अयोध्या प्रसाद ने बताया कि वह किसान कर्ज माफी से पहले बेहद परेशन रहता था। क्योंकि उसने खेती-किसानी के लिए एक लाख 90 हजार रूपए का बैंक से कर्ज ले रखा था। फसल भी उसकी उम्मीद से अच्छी नहीं हुई थी। उसे यही चिन्ता खाए जा रही थी कि वह बैंक का कर्ज कैसे चुकाएगा। किश्त समय पर जमा नहीं होने के कारण ब्याज भी बढ़ रहा था। वह हमेशा गुमसुम रहता था।
    उस समय अयोध्या प्रसाद की खुशी का ठिकाना नही रहा जब उसे पता चला कि किसान का बेटा मुख्यमंत्री बन गया है और नये मुख्यमंत्री बनते ही श्री भूपेश बघेल ने किसानों की कर्ज माफी और रूपए 2500 प्रति क्विटल की दर से धान खरीदी का निर्णय लिया। इसके साथ ही एक नम्बर 2018 से 30 नवम्बर 2018 के बीच लिंकिंग या नकद रूप मे चुकाए कर्ज की राशि भी माफी योग्य रहेगी, जो किसानों को वापसी योग्य रहेगी।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि सुराजी गांव योजना राज्य शासन की सर्वाधिक प्राथमिकता की योजना है। सुराजी गांव एक ऐसी अवधारणा है, जिसमें पुरातन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुर्नजीवन मिलेगा वहीं आर्थिक और रोजगार संबंधी अवसर उपलब्ध कराने के लिए भी यह योजना मील का पत्थर साबित होगी।
           श्री बघेल कल मंत्रालय में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण निधि नियम में संशोधन कर इसका दायरा बढ़ाया गया है।
    बैठक में गृहमंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे, वनमंत्री श्री मोहम्मद अकबर, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरू रूद्र कुमार, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, नगरीय प्रशासन मंत्री श्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा, राजस्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, प्राधिकरण के सदस्यगण सहित मुख्य सचिव श्री सुनील कुजुर, पुलिस महानिदेशक श्री डी.एम. अवस्थी, अपर मुख्य सचिव श्री के.डी.पी. राव एवं श्री आर.पी. मंडल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री गौरव द्विवेदी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
      मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की दृष्टि से नरवा, गरवा, घुरूवा अउ बाड़ी अभिनव एवं महत्वपूर्ण योजना है। पशुपालन को वतर्मान में अनार्थिक क्रिया होने के कारण बोझ समझा जाने लगा हैं। वास्तव में ये हमारे पशुधन है और एक बार फिर से सुराजी गांव योजना के माध्यम से इन्हें तथा हमारे जल संसाधनों, जैविक खाद और बाड़ी के समन्वित विकास को ग्रामीण अर्थव्यस्था का आधार स्तंभ बनाना है। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों के गांवों में गोठान का निर्माण वन विभाग के द्वारा किया जाएगा, इसके लिए कैम्पा की राशि का उपयोग किया जाए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा नगरीय क्षेत्रों के लिए भी गौठान निर्माण पर भी जोर दिया, इससे सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने प्रदेश में बनाए जा रहे गोठानों का समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित हो सके इसके लिए जनप्रतिनिधि गौठानों का नियमित निरीक्षण एवं मानिटरिंग करें।
      मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव में धान बुआई के बाद मवेशियों को खुला नहीं छोड़ने की छत्तीसगढ़ में परम्परा रही है। उन्होंने रथ यात्रा के बाद ’रोका छेंका’ की छत्तीसगढ़ी परम्परा के अनुरूप निर्णय लेकर तथा जन-सहयोग से इसका प्रभावी क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गौठानों में पशुओं के लिए ’डे-केयर’ की व्यवस्था है। रात में मालिक अपने पशुओं को घरों में रखेंगे। उन्होंने कहा कि गांवों में पैरादान के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करें और चारागाह विकास के लिए उपयुक्त भूमि का चिन्हांकन कर लें। उन्होंने गौठान व्यवस्था से ग्राम पटेलों को भी जिम्मेदारी सौपने तथा जहां पटेलों के पद रिक्त हैं वहां नियुक्त करने के निर्देेश भी दिए।
       मुख्यमंत्री ने गौठानों के लिए उपयुक्त ऊंचे स्थानों का चयन करने, इसके समीप हरे चारे की व्यवस्था करने के लिए चारागाह भूमि का चिन्हांकन करने भी कहा। उन्होंने गौठान की व्यवस्था से मवेशी चराने का कार्य करने वाले लोगों और स्व सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को जोड़ने के साथ ही रोजगार परक कार्य प्रारंभ करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं और महिलाओं को देशी किस्म के कुक्कुट पालन और वर्मी कम्पोस्ट निर्माण से जोड़ा जा सकता है।
    बैठक में बताया गया कि नई सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण निधि नियम में संशोधन कर इसका दायरा बढ़ाया गया है। पहले जहां निर्माण कार्याें पर जोर था, वहीं संशोधन के बाद अब स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, जल संरक्षण, पशु सेवाएं, रोजगार मूलक योजनाएं, कौशल उन्नयन जैसे अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं में भी कार्य किये जा सकेंगे। इनके माध्यम से हितग्राही मूलक एवं सामुदायिक योजनाओं को स्वीकृत किया जाएगा।  
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण प्राधिकरण के तहत नये कार्याे को स्वीकृति प्रदाय करने केे लिए जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया जाएगा। सभी संबंधित जिला कलेक्टर अपने जिलों में जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव प्राप्त कर एवं बैठक लेकर प्राथमिकता आधार पर प्रस्ताव 10 जुलाई तक प्राधिकरण को भेजना सुनिश्चित करेंगे।

मुख्यमंत्री के उप सचिव श्री तारन प्रकाश सिन्हा ने प्राधिकरण के कार्यों पर आडियो-वीडियो का प्रदर्शन कर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

       रायपुर, 28 जून 2019

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने बीजापुर जिले के भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत केशकुतूल गांव में आज सुबह हुई नक्सली हिंसा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने मुठभेड़ में शहीद सीआरपीएफ के तीन जवानों और एक बालिका की मृत्यु पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
        ज्ञातव्य है कि नक्सलियों ने यहां एम्बुश के माध्यम से घात लगाकर हमला किया था और फायरिंग की थी। नक्सली घटना के चपेट में आने से एक बालिका भी घायल हुई है। जिसका इलाज चिकित्सालय में किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बस्तर के किसी नेता को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने का अवसर नहीं मिला है। वैसे, राज्य बनने से पहिले भी मध्यप्रदेश के समय में छत्तीसगढ़ से अध्यक्ष हुए लेकिन, वे भी बस्तर के बाहर से रहे। मगर मोहन मरकाम पहले अध्यक्ष हैं जो कि बस्तर से होगें।

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोहन मरकाम को छत्तीसगढ़ का अध्यक्ष नियुक्त किया है। बता दें कि बीते दिनों मोहन मरकाम और वरिष्ठ आदिवासी विधायक मनोज मंडावी से पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुलाकात की थी। राहुल ने उनके राजनीतिक करियर, उनके किए गए कार्य, कब से राजनीति में हैं, छत्तीसगढ़ की राजनीति के बारे में उनकी सोच, संगठन के कामकाज, सरकार की कार्यप्रणाली, विधानसभा और लोकसभा के परिणामों पर उनकी राय जैसे कई सवाल पूछे थे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भूपेश बघेल के स्थान पर मरकाम की नियुक्ति की है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बस्तर के किसी नेता को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने का अवसर नहीं मिला है। वैसे, राज्य बनने से पहिले भी मध्यप्रदेश के समय में छत्तीसगढ़ से अध्यक्ष हुए लेकिन, वे भी बस्तर के बाहर से रहे। मगर मोहन मरकाम पहले अध्यक्ष हैं जो कि बस्तर से होगें। 


कौन हैं मोहम मरकम
मोहन मरकम कोडागांव से विधायक हैं। उनके पार्टी के सभी सीनियर नेताओं से उनके अच्छे संबंध हैं। हालांकि, टीएस सिंहदेव से उनकी नजदीकियां अधिक है। लेकिन, सीएम भूपेश बघेल से भी उनके करीबी संबंध हैं। मोहन मरकाम 2013 और 2019 लगातार दो बार के विधायक हैं।

रायगढ़ सांसद को पसंद आया पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय का बंगला
लैलूंगा विधायक चक्रधर ने कलेक्टर से मांगा था बंगला, आवेदन रिजेक्ट
रायगढ़. नवनिर्वाचित सांसद गोमती साय को पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और सांसद विष्णुदेव साय का बंगला पसंद आया है। उन्होंने 18 जून को कलेक्टर को आवेदन देकर बंगला अलॉट करने के लिए कहा है। चुनाव जीतने के बाद सांसद गोमती जशपुर जिले की मुंडाडीह स्थित अपने घर में रह रही हैं। शहर के प्रवास के दौरान वे सर्किट हाउस में ठहरती हैं जबकि बैठकें जिला भाजपा कार्यालय में ही लेती हैं। सांसद ने जो बंगला मांगा है वह फिलहाल पूर्व सांसद विष्णुदेव के पास है।
जब पूर्व केंद्रीय मंत्री से गोमती साय के आवेदन के विषय में बात की तो उन्होंने कहा कि यह घर की बात है, गोमती जब कहेंगीं वे बंगला खाली कर देंगे। वहीं रायगढ़ विधायक प्रकाश नायक कोतरा रोड के गजाननपुरम स्थित अपने निवास से ही दफ्तर संचालित कर रहे हैं। प्रकाश यहीं लोगों से मिलते हैं, उन्होंने कलेक्टर को बंगले के लिए आवेदन नहीं किया है। लैलूंगा विधायक चक्रधर सिदार ने भी कलेक्टर को रायगढ़ में बंगला अलॉट कराने के लिए आवेदन दिया लेकिन उसे रिजेक्ट कर दिया। उन्हें बताया गया कि नियमानुसार रायगढ़ में सरकारी बंगला सिर्फ रायगढ़ विधायक को ही मिल सकता है।

सुबह 8 बजे से जूनियर डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे
ट्रामा सेंटर और ऑपरेशन थियेटर में भी कोई ड्यूटी पर नहीं जाएगा
रायपुर. अंबेडकर अस्पताल में शुक्रवार सुबह 8 बजे से जूनियर डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। ओपीडी के साथ-साथ जूडो इमरजेंसी सेवाएं भी ठप करेंगे। ट्रामा सेंटर और ऑपरेशन थियेटर में भी कोई ड्यूटी नहीं जाएगा। 300 जूडो की हड़ताल से अंबेडकर अस्पताल में भर्ती 11 सौ मरीजों के इलाज और देखभाल का जिम्मा 150 सीनियर डाक्टरों पर आ जाएगा।
ओपीडी के साथ-साथ उन्हें इमरजेंसी और वार्ड में भी ड्यूटी करनी होगी। तीन शिफ्ट में इतने डाक्टर ड्यूटी नहीं कर सकेंगे। इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ेगा। हालांकि जूडो हड़ताल की घोषणा से ही अंबेडकर अस्पताल में शुक्रवार को रुटीन में होने वाले ज्यादातर बड़े ऑपरेशन रद्द कर दिए गए हैं।
जूडो ने एक हफ्ते पहले हड़ताल पर जाने की सूचना दे दी थी। उसके बाद भी चिकित्सा शिक्षा विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कोई ठोस वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए। अब जब शुक्रवार से जूडो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं तब मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदारों ने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य संचालक को पत्र लिखकर डाक्टर उपलब्ध कराने की मांग की है।
स्टायपेंड व ट्रामा सेंटर में सुरक्षा बढ़ाने की मांग करते हुए जूडो बुधवार से ओपीडी का बहिष्कार कर रहे हैं। सांकेतिक तौर पर की गई हड़ताल से ओपीडी में इलाज व सर्जरी प्रभावित हुई है। गुरुवार को सांकेतिक हड़ताल के दूसरे दिन 22 से ज्यादा ऑपरेशन टाल दिए गए। वहीं ओपीडी में केवल कंसल्टेंट डॉक्टरों के होने के कारण मरीजों को अपनी बारी के लिए देर तक इंतजार करना पड़ा।
चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का कहना है जूडाे की हड़ताल से सबसे ज्यादा प्रभावित इमरजेंसी में आने वाले मरीज होंगे। उन्हें तत्काल इलाज नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो सकती है। गुरुवार को जूडो के प्रतिनिधि मंडल ने स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारीक से मिलने का प्रयास किया। उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बावजूद दो दिनों तक न कॉलेज प्रबंधन की ओर से पहल की गई है और न डीएमई कार्यालय की ओर से।
प्रशासनिक अफसरों से मुलाकात न होने के बाद जूडो की गुरुवार की शाम अस्पताल परिसर में बैठक हुई। उसी में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया गया। अधिकारियाें का कहना है कि स्टायपेंड बढ़ाना शासन के जिम्मे है। इसमें वे कोई निर्णय नहीं कर सकते। अस्पताल प्रबंधन ने छुट्‌टी पर गए ऑर्थोपीडिक, मेडिसिन, रेडियो डायग्नोसिस, ईएनटी, ऑप्थेलमोलॉजी, गायनी व दूसरे विभागों के डॉक्टरों को वापस बुला लिया है।

डीकेएस में भी होगा इलाज प्रभावित
डीकेएस के न्यूरो सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी व पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में अंबेडकर अस्पताल के जूनियर डॉक्टर काम कर रहे हैं। हड़ताल से वहां भी सर्जरी प्रभावित होगी। इससे सर्जरी टल सकती है। एमसीएच कोर्स जुलाई से शुरू होने वाला है। वहां सुपर स्पेश्यालिटी विभागों में जूडो नहीं है। अभी अंबेडकर के जनरल सर्जरी विभाग के जूनियर डाक्टर ही सीनियरों की मदद कर रहे हैं। वे भी हड़ताल पर चले जाएंगे।

इसलिए असर पड़ेगा जूडो हड़ताल से
जूनियर डाक्टर अस्पताल में 24 घंटे मौजूद रहते हैं। हर विभाग के डाक्टर ट्रामा सेंटर में तीन पाली में ड्यूटी करते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की इमरजेंसी या मरीज आने पर सभी विभाग के डाक्टर तुरंत उपलब्ध हो जाते हैं। सीनियर डाक्टर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कराने के अलावा केवल ओपीडी में मरीजों की जांच करते हैं। सुबह 8 से दोपहर 2 बजे के बाद उनकी ड्यूटी खत्म हो जाती है। उसके बाद जूडो ही मरीजों का इलाज करते हैं।

एम्स, निजी अस्पतालों पर बढ़ेगा दबाव
हड़ताल के कारण एम्स व निजी अस्पतालों में मरीजों का दबाव बढ़ने की संभावना है। एम्स में ट्रामा सेंटर नहीं होने के कारण मरीजों की परेशानी बढ़ जाएगी। मरीजों के पास निजी अस्पताल जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। दरअसल जिला अस्पताल पंडरी में ट्रामा सेंटर केवल नाम का है। यहां पर सर्दी-खांसी के मरीज इमरजेंसी में आते हैं। चोट लगे वाले मरीज भी आते हैं, मरहम पट्‌टी कर अंबेडकर रिफर कर दिया जाता है।
कोई जिम्मेदार मिलने को तैयार नहीं- जूडो अध्यक्ष
जूनियर डाक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष भगवती चरण वर्मा का कहना कोई भी जिम्मेदार हमसे बात करने को राजी नहीं है। हमने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के पहले स्वास्थ्य विभाग की सचिव से भी मुलाकात करने की कोशिश की। उन्होंने समय ही नहीं दिया। दो दिनों तक लगातार मंत्रालय जाने के बावजूद वे नहीं मिलीं।

जूनियर डॉक्टर जितना स्टायपेंड मांग रहे उतना केवल एम्स में
जूनियर डॉक्टर 90 हजार स्टायपेंड मांग रहे हैं। इतना स्टायपेंड अभी केवल एम्स के जूनियर डाक्टरों को दिया जा रहा है। अफसरों का दावा है कि इसके अलावा देश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में जूडो को इतना स्टायपेंड नहीं दिया जा रहा है। अंबेडकर में असिस्टेंट प्रोफेसर को भी इतना वेतन नहीं दिया जा रहा है।
छुट्‌टी पर गए डॉक्टरों को बुलाया
मरीजों का इलाज प्रभावित न हो, इसके लिए समर वेकेशन पर गए डॉक्टरों को वापस बुलाया गया है। हेल्थ डायरेक्टर को भी डॉक्टर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। ट्रामा व वार्डों में कंसल्टेंट डॉक्टर, सीनियर रेसीडेंट व असिस्टेंट सर्जन की ड्यूटी लगाई जाएगी। - डॉ. एसबीएस नेताम, प्रभारी अधीक्षक अंबेडकर अस्पताल

औंधी क्षेत्र के कोहकाटोला जंगल में जिला पुलिस बल, डीआरजी, एसटीएफ व आईटीबीपी ने संयुक्त रूप से किया नक्सली कैंप पर हमला
मुठभेड़ में कई नक्सलियों के मारे जाने और घायल होने की संभावना, भारी मात्रा में विस्फोटक और नक्सली सामान बरामद, सर्चिंग जारी
राजनांदगांव. औंधी थाना क्षेत्र के कोहकाटोला जंगल में शुक्रवार सुबह जवानों ने नक्सली कैंप पर हमला बोल दिया। दोनों ओर से हुई मुठभेड़ में जवानों को भारी पड़ता देख नक्सली कैंप छोड़कर भाग निकले। मुठभेड़ में कई नक्सलियों के मारे जाने और घायल होने की संभावना है। जवानों ने मौके से भारी मात्रा में विस्फोटक और नक्सली सामान बरामद किया है। इलाके में जवानों का सर्च ऑपरेशन जारी है।
छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा से लगी पहाड़ी पर नक्सलियों ने बना रखा था कैंप
एएसपी नक्सल ऑपरेशन गोरखनाथ बघेल ने बताया कि सूचना मिली थी कि राजनांदगांव-कांकेर-गढ़चिरौली जिले के सीमा पर स्थित ग्राम कोहकाटोला की पहाड़ी पर नक्सलियों ने कैंप लगा रखा है। बड़ी संख्या में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर सुबह जिला पुलिस बल, डीआरजी, एसटीएफ व आईटीबीपी की संयुक्त टीम को मौके पर रवाना किया गया। पहाड़ी पर नक्सली कैंप देख जवानों ने हमला कर दिया।
इस पर नक्सलियों की ओर से भी फायरिंग की गई। दोनों ओर से हुई इस मुठभेड़ में जवान भारी पड़े और नक्सली मौके से भाग निकले। इस मुठभेड़ में कई नक्सलियों के मारे जाने और घायल होने की संभावना है। जवानों ने मौके से 1 नग 303 रायफल, 2 नग 12 बोर, 1 नग भरमार बंदूक, 1 नग एयर गन, वायरलेस सेट, 3 टेंट और भारी मात्रा में दैनिक उपयोग का सामान बरमद किया गया है। इलाके में सर्चिंग जारी है।


पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग 
 
कवर्धा - विगत दिनों बीजापुर में जिला पंचायत के सीईओ द्वारा पत्रकारों के साथ कैमरा मोबाईल छीनने एवं मारपीट व धमकी दिए जाने की निंदनीय घटना सामने आई थी जिससे पूरा पत्रकार वर्ग नाराज है । प्रदेश में भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी कर्मचारी द्वारा लगातार इस तरह की  हरकत की जा रही है जिससे पत्रकार जगत आहत , असुरक्षित व अपने आपको प्रताड़ित महसूस कर रहा है । 
 
 बीजापुर में पत्रकारों के साथ हुए घटना के मामले में गुरुवार को  कवर्धा के पत्रकारों के द्वारा अपर कलेक्टर जीवन किशोर ध्रुव को  मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कार्यवाही की मांग की गई हैं। उल्लेखनीय हो कि बस्तर संभाग के बीजापुर में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राहुल वेंकट द्वारा स्थानीय पत्रकारों के साथ किए गए अभद्र व्यवहार मामले को लेकर जिला मुख्यालय  कवर्धा में पत्रकारों द्वारा  बैठक आयोजित की गई तथा पत्रकार साथियों ने उपरोक्त घटना की कड़ी शब्दों में निंदा करते हुए आक्रोश व्यक्त किया। चंद्रशेखर शर्मा ने प्रदेश में पत्रकारों के साथ हो रहे घटनाओं पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन को कठोर कदम उठाते हुए पत्रकार सुरक्षा कानून अतिशीघ्र लागू करना चाहिए। यदि भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोहराया जाता है, तो प्रदेश स्तर पर प्रदर्शन के लिए पत्रकारों को आगे आने हेतु बाध्य होना पड़ेगा। इस अवसर पर चंद्र शेखर शर्मा ,शैलेन्द उपाध्याय, यशवंत झारिया, अजय यादव, परमेश्वर डड़सेना, मनीष मिश्रा, श्री कांत उपाध्याय,संतोष भारद्वाज,  संजय यादव, सिद्ध चंद्रवंशी, आशोक साहू सहित पत्रकार गण उपस्थित थे। 
 
ये है पूरा मामला-
दरअसल बीजापुर के पत्रकारों ने ओडीएफ की गड़बड़ी के बारे में खबर का प्रकाशन प्रमुखता के साथ किया था। उक्त खबर से नाराज जिला पंचायत सीईओ राहुल केंवट द्वारा उक्त दोनों पत्रकारों को केबिन में बुलाकर मारने की धमकी दी गई तथा उनके कैमरे और मोबाइल छीनकर अभद्र व्यवहार किया गया। 24 जून 2019 को जिला पंचायत सीईओ ने बीजापुर के 8 पत्रकारों को अपने कार्यालय में बुलाकर उन्हें गंदी और भद्दी गालियां देकर केबिन के अंदर ही पीटने की धमकी दी। जिसमें 2 इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों का कैमरा और मोबाइल भी छीन लिया। इतना ही नही अन्य पत्रकारों को भी देख लेने और कर्मचारियों से पिटवाने की धमकी दी गई।

रेलवे स्टेशन पर जीआरपी ने रिटायर्ड डीजीपी व महिला वकील के सहयोग से पकड़ा
ओडिशा से महाराष्ट्र लेकर जा रहा था बच्चों को, बरामद बच्चे बिहार व ओडिशा के
राजनांदगांव. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में ट्रेन के जरिए बच्चों की तस्करी का भंडाफोड़ हुआ है। जीआरपी ने गुरुवार को हावड़ा-मुंबई मेल से 38 बच्चों को बरामद कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी बच्चों को ओडिशा से महाराष्ट्र लेकर जा रहे थे। बरामद बच्चे बिहार और ओडिशा के रहने वाले बताए जा रहे हैं। जीआरपी ने रेलवे स्टेशन पर रिटायर्ड डीजीपी राजीव श्रीवास्तव व महिला वकील के सहयोग से इन बच्चों को बरामद किया है।
उर्दू पढ़ाने और घुमाने की बात कही, पर नहीं दिखा सका कोई दस्तावेज
जानकारी के मुताबिक, रिटायर्ड डीजीपी राजीव श्रीवास्तव को सूचना मिली कि हावड़ा-मुंबई मेल से कुछ लोग बड़ी संख्या में बच्चों को लेकर जा रहे हैं। उन्होंने इसकी जानकारी रायपुर की महिला वकील स्मिता पांडे को बताया। इस पर स्मिता ट्रेन में सवार हुई और एस 2 और एस 4 कोच में सवार बच्चों से पूछताछ की, लेकिन बच्चे काफी डरे हुए थे और ठीक से बात भी नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद इसकी सूचना राजनांदगांव पुलिस और जीआरपी को दी गई।
जीआरपी के साथ सिविल पुलिस ने भी रेलवे स्टेशन पर नाकाबंदी की और ट्रेन के आते ही उसमें चढ़ गए। उन्होंने बच्चों को नीचे उतारा और मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वो बच्चों को उर्दू सिखाने और घुमाने के लिए महाराष्ट्र के नांदेड़ लेकर जा रहे थे। हालांकि वो बच्चों को ले जाने से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके। पकड़े गए आरोपी बिहार के रहने वाले हैं। हालांकि अभी यह पता नहीं चल सका है कि इन बच्चों के साथ क्या किया जाना था।

गंज थाना परिसर में स्थित ऑफिस में सिर्फ 15 मिनट ही रुके डॉ. पुनीत गुप्ता
हाईकोर्ट जाने की बात कहकर थाने से निकले, पहले ही सैंपल देने से कर चुके थे इनकार
रायपुर. छत्तीसगढ़ अंतागढ़ टेप कांड मामले में आरोपी बनाए गए डॉ. पुनीत गुप्ता गुरुवार को पूछताछ के लिए एसआईटी ऑफिस पहुंचे। हालांकि वो बिना वॉयल सैंपल दिए ही वहां से चले गए। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद डॉ. गुप्ता महज 15 मिनट ही थाने में रुके। इस दौरान उन्होंने हाईकोर्ट जाने की बात कही और वहां से निकल गए। हालांकि डॉ. गुप्ता ने एक दिन पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वो वॉयस सैंपल नहीं देंगे।
अमित जोगी और मंतूराम पंवार भी बिना सैंपल दिए लौट चुके हैं एसआईटी ऑफिस के बाहर से
एसआईटी की ओर से डॉ. पुनीत गुप्ता को वॉयस सैंपल देने के लिए नोटिस भेजा गया था। जिसके बाद डॉ. गुप्ता गुरुवार सुबह करीब 11 बजे गंज थाना परिसर स्थित एसआईटी ऑफिस पहुंचे। ऑफिस में करीब 15 मिनट तक उन्होंने अधिकारियों से बातचीत की और फिर वहां से निकल गए। बताया जा रहा है कि उन्होंने हाईकोर्ट जाने की बात कही और उसके बाद वहां से निकल गए। ऐसे में डॉ. गुप्ता से पूछताछ भी पूरी तरह से नहीं की जा सकी।
इससे पहले भी केस में आरोपी अमित जोगी और मंतूराम पवार एसआईटी ऑफिस पहुंचे थे। वहां पर उन्होंने एसआईटी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हुए वॉयस सैंपल दिए बिना ही लौट गए थे। इससे पहले मंतूराम पवार ने कहा कि सैंपल देना है या नहीं ये अभी सोचूंगा। उन्होंने कहा कि अगर एसआईटी के पास कोर्ट की अनुमति होगी, उसके बाद ही वॉयस सैंपल दूंगा। वहीं बुधवार को अमित जोगी थाने के बाहर से ही वापस आ गए। उन्होंने पेन ड्राइव को फर्जी बताने के साथ ही एसआईटी व सरकार पर आरोप लगाए।

Ads

R.O.NO. 1399/63 Advertisement Carousel

MP info RSS Feed

फेसबुक