छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ (21107)

गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को ज्ञापन सौंप जिले में पंजीकृत वाहनों को टोल मुक्त करने की रखी मांग
भिलाई। नेहरू नगर अंजोरा बाइपास पर बने दुर्ग शिवनाथ एक्सप्रेस वे प्रा.लि. (बाफना टोल प्लाजा) को स्थानीय निवासियों व दुर्ग से पंजीकृत दो पहिया व चार पहिया वाहनों को टोलमुक्त करने टोल पे हल्ला बोल अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए जिले के पत्रकार लामबंद हो रहे हैं। इस संबंध में आज पत्रकारों का एक प्रतिनिधि मंडल प्रदेश के गृह, जेल, लोक निर्माण, पर्यटन, धर्मस्व व संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहू से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपकर इस पर उचित कार्रवाई करने की मांग रखी। पत्रकारां की मांग पर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।
बता दें कि नेहरू नगर अंजोरा बाइपास पर बने दुर्ग शिवनाथ एक्सप्रेस वे प्रा.लि. (बाफना टोल प्लाजा) में पत्रकारों सहित आम लोगों के साथ लगातार बदसलुकी की जा रही है। अधिमान्य पत्रकारों से लेकर शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमजीवी पत्रकारों के साथ आए दिन बदसलुकी की जाती है। ताजा मामले में दो दिन पूर्व राजनांदगांव जा रहे पत्रकारों के एक ग्रुप का वाहन रोक कर टोल के नाम पर उनके साथ बदसलुकी की गई। इसके बाद बुधवार को दुर्ग सर्किट हाउस में पत्रकारों की बैठक हुई जिसमें उक्त टोल प्लाजा में स्थानीय निवासियों व दुर्ग से पंजीकृत दो पहिया व चार पहिया वाहनों को टोल फ्री कराने का निर्णय लिया गया। इसके लिए पत्रकारों ने पहले बातचीत का रास्ता अख्तियार किया जिसकी शुरुआत गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को ज्ञापन सौंप कर किया गया। बैठक में छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष बीडी निजामी, सुबोध तिवारी, अनिल गुप्ता, कमल शर्मा, रमेश गुप्ता, प्रीती सरु, हरप्रीत सिंह भाटिया, आकाश मदने, चंद्रकांत देवांगन, वीणा दुबे, संतोष शर्मा्र्र्र्र, अमित, राजेश अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
नांदगांव टोल प्लाजा में भी हुई थी ऐसी घटना
बता दें कि नांदगांव टोलप्लाजा में भी अधिमान्य व स्थानीय पत्रकारों को छूट नहीं मिल रही थी। इसे लेकर टोल प्रबंधन के साथ कई बार विवाद की स्थितियां बन रही थी। यहां के पत्रकारों ने कुछ साल पहले टोल प्लाजा का घेराव किया। इस दौरान नांदगांव गुंडरदेही, गंडई, कवर्धा, दुर्ग भिलाई के सैकड़ों पत्रकारों ने अपनी आवाज बुलंद की थी। इसके बाद यहां की परिस्थितियां बदली और अब नांदगांव टोल प्लाजा में अधिमान्य पत्रकारों व स्थानीय पत्रकारों को टोल में छूट दी जाती है। यही नहीं राजनांदगांव के टोल में स्थानीय नागरिकों को आधार कार्ड दिखाने पर भी आवाजाही में टोल की छूट दी जाती है।
कोसानाला टोल प्लाजा में थी छूट
भिलाई फोरलेन पर कोसानाला टोल प्लाजा में भी निर्माणी एजेंसी द्वारा सभी प्रकार के वाहनों से टोल लिया जाता था। बाद में तात्कालीन केबिनेट मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय की पहल पर यहां दुर्ग से पंजीकृत चार पहिया वाहनों को टोल मुक्त कर दिया गया था। जब तक टोल प्लाजा बंद नहीं हुआ तब तक यह व्यवस्था लागू थी। दुर्ग शिवनाथ एक्सप्रेस वे प्रा.लि. (बाफना टोल प्लाजा) भी दुर्ग भिलाई शहर की परिधि में है लेकिन यहां पर दो पहिया वाहनों से भी टोल टैक्स लिया जाता है। राजनांदगांव व भिलाई कोसानाला टोल प्लाजा की तर्ज पर यहां पर भी स्थानीय वाहनों व दुर्ग से पंजीकृत दोपहिया व चार पहिया वाहनों को टोल मुक्त किया जाना चाहिए।
तो करेंगे टोल पर हल्लाबोल
छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ के प्रदेश अघ्यक्ष बीडी निजामी ने बताया कि दुर्ग शिवनाथ एक्सप्रेस वे प्रा.लि. (बाफना टोल प्लाजा) में स्थानीय निवासियों को टोल मुक्त करने हमने गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को ज्ञापन सौंपा है। हमारे पड़ोसी जिले राजनांदगांव की तर्ज पर यहां भी स्थानीय निवासियों को टोल शुल्क से मुक्ति मिलनी चाहिए। जबकि कई सालों से उक्त टोल प्लाजा में लोगों से इस प्रकार की बेजा वसूली की जा रही है। यहां दो पहिया वाहनों से भी टोल टैक्स वसूला जा रहा है जो कि निंदनीय है। हमने गृहमंत्री से निवेदन किया है कि इस संबंध में उचित निर्णय ले। श्री निजामी ने कहा कि जल्द ही इस पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती तो स्थानीय निवासियों के साथ टोल पर हल्ला बोल अभियान शुरू किया जाएगा।
गृहमंत्री ने दिया उचित कार्रवाई का आश्वासन
मामले में प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। आज उन्होंने पत्रकारों के प्रतिनिधि मंडल से बात करते हुए कहा कि इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। अधिकारियों से चर्चा के बाद दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को टोल शुल्क मुक्त किए जाने की मांग उचित है और इस मांग के क्रियान्वयन के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

पाटन के मर्रा स्थित अपने स्कूल से शाला प्रवेशोत्सव की मुख्यमंत्री ने की शुरुआत
बच्चों को लगाया तिलक, उनके साथ मैदान में खेले, बच्चों के ही साथ खाएंगे मिड डे मील
दुर्ग. जिले के पाटन में मर्रा स्थित स्कूल का नजारा बुधवार को बदला-बदला था। स्कूल के मैदान की पिच पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर अनिल कुंबले बॉलिंग कर रहे थे और बैटिंग पर थे प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अनिल कुंबले की बॉलिंग पर जमकर शॉट लगाए। कुछ शॉट काफी शानदार रहे, जिसकी लोगों ने भी खूब तारीफ की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूल के बच्चों के साथ भी खेला और वहीं परिसर में ताइक्वांडो के खिलाड़ियों से भी मुलाकात की। वे स्कूल में ही बच्चों के साथ मध्याह्न भोजन भी करेंगे।
सहपाठियों से घुले मिले मुख्यमंत्री, पुरानी यादें ताजा कीं
दरअसल, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मर्रा स्थित स्कूल से प्रदेश में शाला प्रवेशोत्सव की शुरुआत करने के लिए पहुंचे थे। उन्होंने बच्चों को तिलक लगाकर इसका शुभारंभ किया। इस दौरान क्रिकेटर अनिल कुंबले भी मुख्यमंत्री के साथ पहुंचे स्कूल में पहुंचे थे। इस दौरान शासकीय स्कूल परिसर में नेट प्रैक्टिस के लिए बने पिच पर मुख्यमंत्री बघेल ने बैटिंग की। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ अनिल कुंबले ने भी मंच भी साझा किया। खेल को बढ़ावा देने दोनों ने कार्यक्रम से पहले बच्चों के साथ स्कूल मैदान में क्रिकेट भी खेला।
मर्रा गांव पाटन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और मुख्यमंत्री का क्षेत्र है। मुख्यमंत्री बघेल ने इसी स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की थी। यहां मुख्यमंत्री अपने सहपाठियों से घुलमिल गए। उनसे बातचीत कर न केवल बीते दिनों की पुरानी याद ताजा की बल्कि उनके साथ फोटो भी खिचवाई। मुख्यमंत्री स्कूल में बच्चों को पुस्तक और यूनिफार्म वितरण करेंगे। साथ ही स्कूल में एक कंप्यूटर लैब, आईसीटी कक्ष का उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम ने की।
चार साल इसी स्कूल से पढ़ाई की है मुख्यमंत्री भूपेश ने
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 1967 से 1971 तक प्राइमरी की पढ़ाई अपने गृह ग्राम बेलौदी में की थी। इसके बाद उन्होंने छठवीं से मैट्रिक तक की पढ़ाई के लिए मर्रा स्कूल में प्रवेश लिया। भूपेश बघेल सुबह-सुबह चार किमी तक कभी साइकिल से आते और कभी बरसात की वजह से पैदल आते क्योंकि पगडंडी रास्ता था और काफी खराब हो जाता था। फिर बेलौदी लौटते और फिर साढ़े दस बजे स्कूल के समय में पहुंच जाते। इस प्रकार सोलह किमी रोज उन्हें साइकिल से या पैदल तय करना होता था।

ट्रेनिंग के दौरान हादसा, मशीन के भीतर थीं तब किसी ने ऑन कर दिया बटन
अफसर अब छिपाने में लगे, चार दिन बाद मुख्यमंत्री इसी सेंटर का उद्घाटन करने आएंगे
बिलासपुर. गनियारी के मल्टी स्किल सेंटर में फ्लाइ एश ब्रिक्स की मिक्सर मशीन के भीतर महिला सफाई कर रही थी, इसी बीच हाइड्रोलिक मशीन का स्विच चालू करने गई महिला से मिक्चर मशीन का बटन दब गया। भीतर काम कर रही महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे अपोलो में भर्ती कराया है। जिला प्रशासन मामले को दबाने में जुटा है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री चार दिन बाद इसी सेंटर का उद्घाटन करने वाले हैं।
महिलाओं को दी जा रही है फ्लाइ एश से ईंट बनाने की ट्रेनिंग
कोटा क्षेत्र के ग्राम गनियारी में मल्टी स्किल सेंटर है। जिला पंचायत यहां महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण देता है। वर्तमान में यहां ईंट बनाने का प्रशिक्षण चल रहा है। अन्य महिलाओं के साथ राजेश्वरी वस्त्रकार भी यहां आई थीं। शनिवार को सभी की ट्रेनिंग चल रहा थी। शाम 6 बजे राजेश्वरी और संतोषी केंवट फ्लाइ एश की मिक्सर मशीन में मसाला साफ कर रही थी। इसी दौरान वहां काम कर रहे लोगों को हाइड्रोलिक मशीन चालू करने की जरूरत पड़ी।
एक महिला उसका स्विच ऑन करने गई। गलती से वह मिक्चर मशीन का बटन दबा दिया। मिक्चर मशीन के साथ दोनों भीतर घूमने लगे और राजेश्वरी व संतोषी को चोंटें आई। मौजूद महिलाओं ने देखा तो दौड़कर स्विच ऑफ किया और दोनों को बाहर निकला। संताषी तो इस हादसे में सुरक्षित बच गई, लेकिन राजेश्वरी की हालत गंभीर थी, इसलिए उसे अस्पताल भेज दिया गया। अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल अधिकारी इस बारे में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
सेंटर में महिला स्व सहायता समूहों को फ्लाइ एश ब्रिक्स, पेवर ब्लॉक, चेन फेसिंग के अलावा सीमेंट पोल, अगरबत्ती, लेदर बैग, सिलाई व एलईडी बल्ब बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। 11 समूह की 110 महिलाएं हैं। जिस वक्त घटना हुई उस वक्त वहां ऑपरेटर मौजूद नहीं था।

राज्य का एकमात्र यूनिट
सरकार ने 3.50 करोड़ की राशि की जिस योजनाओं से महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का सपना देखा है उनके अफसर उसी को पलीता लगा रहे हैं। यह अब तक राज्य का एकमात्र यूनिट हैं। घटना को जिला पंचायत के अफसरों ने दबाने की पूरी कोशिश की।
पुलिस को नहीं दी गई सूचना
प्रशासन इस मामले को दबाने में जुटी हुई है। अभी तक किसी को जानकारी नहीं दी गई है। दुर्घटना होने के बाद भी कोटा पुलिस को इस संबंध में सूचना नहीं दी गई है।
मशीन साफ करते वक्त गलती
बटन मशीन साफ करते हुए किसी महिला का हाथ गलती से मिक्सर मशीन बटन पर चला गया जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। महिला का अपोलो हास्पिटल में इलाज चल रहा है। उसकी स्थिति अब ठीक है।
रितेश अग्रवाल, सीईओ, जिला पंचायत
मुझे नहीं थी जानकारी
घटना के वक्त मुझे जानकारी नहीं मिल पाई थी। उत्पादन के दौरान मॉनिटरिंग की जाती है। महिलाओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है।
बीआर वर्मा, परियोजना अधिकारी, जिपं

बच्ची के पिता केंद्रीय कारागार में सजायाफ्ता कैदी, पिछले दिनों कलेक्टर ने जेल में बच्ची से मुलाकात की थी
बच्ची ने पढ़ाई की इच्छा जताई, तो कलेक्टर जेल से लेकर स्कूल पहुंचे
कलेक्टर की पहल पर जेल में रह रहे 17 अन्य बच्चों की भी स्कूल एडमिशन प्रक्रिया शुरू
बिलासपुर. केंद्रीय जेल में सजायाफ्ता कैदी की बेटी खुशी (बदला नाम) अब सलाखों के पीछे नहीं रहेगी। उसे रहने के लिए हॉस्टल और एक बेहतर माहौल मिलेगा। जहां वह अपने सपनों का भविष्य तैयार करेगी। स्कूल खुलने के पहले दिन कलेक्टर डॉ. संजय अलंग खुद सेंट्रल जेल से खुशी का एडमिशन कराने स्कूल लेकर पहुंचे। स्कूल जाने के लिए खुशी सुबह से ही तैयार हो गई थी। अब वह जैन इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई करेगी।
जेल में इच्छा पूछी तो बोली- स्कूल में पढ़ाई करना चाहती हूं
केंद्रीय जेल में बंद एक सजायाफ्ता कैदी की 6 साल की बेटी खुशी (बदला हुआ नाम) की शिक्षा शहर के जैन इंटरनेशनल स्कूल में होगी । स्कूल जाने के लिए पहले दिन जब वह केंद्रीय जेल से स्कूल के लिए रवाना हुई तब उसके पिता की आंखें नम थीं,  लेकिन खुशी स्कूल जाने के लिए खुश थी। इसकी शुरूआत तब हुई जब कलेक्टर डॉ. संजय अलंग एक दिन केंद्रीय जेल का निरीक्षण करने पहुंचे थे।
उन्होंने महिला बैरक में महिला कैदियों के साथ छोटी सी बच्ची को भी देखा । बच्ची से पूछने पर उसने बताया कि जेल से बाहर स्कूल में पढ़ाई करना चाहती है। कलेक्टर ने बच्ची से स्कूल में पढ़ाने का वादा किया और शहर के स्कूल संचालकों से बात की । इसके बाद जैन इंटरनेशनल स्कूल के संचालक खुशी को एडमिशन देने को तैयार हो गए। आमतौर पर स्कूल जाने के पहले दिन बच्चे रोते हैं। लेकिन खुशी आज बेहद खुश थी।
स्कूल जाने की ललक से उसकी खुशी दोगुनी हो रही थी। अब वह सलाखों की जगह स्कूल के हॉस्टल में रहेगी। खुशी के लिए विशेष केयर टेकर का भी इंतजाम किया गया है। स्कूल संचालक अशोक अग्रवाल ने कहा है कि खुशी की पढ़ाई और हॉस्टल का खर्चा स्कूल प्रबंधन ही उठाएगा। खुशी को स्कूल छोड़ने जेल अधीक्षक एसएस तिग्गा भी गए। कलेक्टर की पहल पर जेल में रह रहे 17 अन्य बच्चों को भी जेल से बाहर स्कूल में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
महिला कैदियों के साथ रह रही थी खुशी
खुशी के पिता केंद्रीय जेल बिलासपुर में एक अपराध में सजायाफ्ता कैदी हैं। खुशी के पिता ने पांच साल की सजा काट ली है और उसे पांच साल और जेल में रहना है। खुशी जब पंद्रह दिन की थी तभी उसकी मां की मौत पीलिया से हो गई थी। पालन पोषण के लिए घर में कोई नहीं था। इसलिए उसे जेल में ही पिता के पास रहना पड़ रहा था। जब वह बड़ी होने लगी तो उसकी परवरिश का जिम्मा महिला कैदियों को दे दिया गया। वह जेल के अंदर संचालित प्ले स्कूल में पढ़ रही थी।

रायपुर- ओवर रेट पर शराब बेचे जाने के मामले में अब आबकारी विभाग के अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. विभाग के अधिकारियों को आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने सख्त निर्देश देते हुए दो टूक कह दिया है कि शराब के तय रेट से ज्यादा में होने वाली बिक्री की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए. शासकीय शराब दुकानों में ओवर रेट पर शराब बेचने की शिकायत मिलने पर त्वरित जांच की जाए. लखमा ने अधिकारियों को सचेत किया है कि ओव्हर रेट की शिकायतों को गंभीरता से संज्ञान में लिया जाएगा और जांच में ऐसी शिकायतों के प्रमाणित होने पर जिम्मेदारी तय कर दोषी वरिष्ठ आबकारी अधिकारियों पर नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
 विभाग के कामकाज की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री कवासी लखमा ने शराब दुकानों की जिलेवार स्थिति की भी विस्तृत जानकारी ली. बताया गया है कि  प्रदेश में वर्तमान में 341 देशी और 313 विदेशी शराब दुकानों का संचालन किया जा रहा हैं. आबकारी मंत्री ने कहा कि अवैध शराब के मामलों में नियमानुसार आपराधिक प्रकरण दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. काॅल सेन्टर में मिलने वाली शिकायतों को भी तत्काल संज्ञान में लिया जाना चाहिए. लखमा ने बैठक में राजस्व प्राप्ति की वर्तमान स्थिति की भी समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को राज्य के सीमावर्ती जिलों में अन्य प्रदेशों से अवैध शराब की आवक रोकने के लिए लगातार चौकस रहने और इस प्रकार की अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों की धर-पकड़ के लिए त्वरित कदम उठाने के भी निर्देश दिए. आबकारी सचिव निरंजन दास ने बैठक में कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप विभाग द्वारा सभी जिलों में शराब के अवैध कारोबार की रोकथाम के लिए पूरी सतर्कता बरती जा रही हैं.
 
इधर आबकारी मंत्री कवासी लखमा की समीक्षा बैठक के ठीक पहले आयुक्त ने भी अधिकारियों की अलग बैठक लेकर उन्हें जरूरी दिशा-निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि शराब दुकानों में अहाता संचालन की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा. किसी भी शराब दुकान में 50 मीटर की परिधि में अहाता संचालन नहीं होना चाहिए. उन्होंने जिला आबकारी अधिकारियों से कहा कि अहाता संचालन के बारे में मिलने वाली ऐसी शिकायतों को तत्काल संज्ञान में लेकर नियमों के तहत संबंधितों पर कार्रवाई की जाए और अगर कहीं 50 मीटर के भीतर अहाता चल रहा हो तो उसे तत्काल हटवाया जाए. अवैध शराब की धर-पकड़ के लिए सभी मैदानी अधिकारी स्थानीय पुलिस के साथ भी समन्वय बनाकर काम करें. निरंजन दास ने कहा कि सभी जिला आबकारी अधिकारी, सहायक आबकारी अधिकारी और आबकारी निरीक्षक अपने-अपने कार्य क्षेत्रों में शराब दुकानों का नियमित रूप से तथा आकस्मिक रूप से भी निरीक्षण करें. आबकारी आयुक्त ने बैठक में विभाग में लंबित पेंशन प्रकरणों की भी समीक्षा की. बैठक में बताया गया कि वर्तमान में सात पेंशन प्रकरण लंबित है. दास ने संबंधित अधिकारियों को उनका निराकरण सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ करने के निर्देश दिए. बैठक में विशेष सचिव ए.पी. त्रिपाठी, अपर आयुक्त पी.एल. वर्मा और आर. के. मंडावी सहित मुख्यालय रायपुर के उपायुक्त, सहायक आयुक्त तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों के जिला आबकारी अधिकारी, सहायक आबकारी अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

माध्यमिक शिक्षा मंडल ने स्कूलों में भेजी नियमावली
स्कूल संचालकों व प्राचार्यों को प्रवेश संबंधी नियम बताए गए
भिलाई. स्थानांतरण प्रकरण को छोड़कर 10वीं और 12वीं कक्षा में बिना औपचारिकताएं पूरी किए 10 फीसदी से अधिक बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा। ऐसा करते हैं तो स्कूल संचालक को स्टॉफ और फर्नीचर की अतिरिक्त व्यवस्था करनी होगी और इसके बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल से विशेष अनुमति लेनी होगी। औपचारिकताएं पूरा नहीं करेंगे को छात्रों का प्रवेश अमान्य हो जाएगा। इसकी सारी जिम्मेदारी स्कूल के संचालकों और प्राचार्यों की होगी। इस मामले में पालकों को भी अलर्ट रहने की जरूरत है। गड़बड़ी होने पर नतीजा बच्चे भुगतेंगे।
इस तरह किया जाएगा 10 फीसदी का आकलन
उदाहरण स्वरूप किसी स्कूल में कक्षा 9वीं में पास छात्रों की संख्या 100 हैं और कक्षा में 10वीं में अनुत्तीर्ण छात्र 20 और श्रेणी सुधार के 10 छात्र हैं। इस तरह कक्षा में 130 छात्र होंगे। इसका 10 फीसदी 13 होता है। अर्थात अधिक से अधिक 13 छात्रों को वहां सीधे प्रवेश दिया जा सकेगा। इससे अधिक होने पर संस्था को माशिमं से जारी सारी औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। तभी प्रवेश को पूरा माना जाएगा।
ऐसे स्कूल जहां 10वीं और 12वीं में छात्रों की संख्या 45 से कम है, तो ऐसी परिस्थिति में दोनों कक्षाओं में छात्रों की संख्या 45 होते तक 10 फीसदी वाले नियम को शिथिल किया जा सकता है। प्राचार्य या संस्था के संचालक छात्रों की संख्या 45 होने तक अपनी संस्था में छात्र-छात्राओं को प्रवेश दे सकेंगे। उन्हें विशेष अनुमति की जरूरत नहीं पड़ेगी।
10 फीसदी से अधिक छात्र-छात्राओं को बोर्ड कक्षा में प्रवेश देने की अनुमति मांगने पर माध्यमिक शिक्षा मंडल की एक समिति संस्था की जांच करेगी। वहां पाए जाने वाले संसाधनों की एक रिपोर्ट बनाएगी। इससे पहले संस्था के संचालक को एक विशेष प्रोफार्मा में आवेदन देना होगा। संबंधित अनुविभागीय अधिकारी से अभिप्रमाणित भी कराना होगा। इसकी पूर्ति के बाद मान्यता दी जा सकेगी।
पूरक और क्रेडिट योजना के अंतर्गत उत्तीर्ण होने वाले छात्र-छात्राओं को बोर्ड कक्षा में प्रवेश के लिए परिणाम जारी होने के 15 दिन के भीतर अगली कक्षा में प्रवेश लेना होगा। इसके बाद विशेष परिस्थितियों में ही उन्हें प्रवेश दिया जा सकेगा। उन्हें प्रवेश के दौरान होने वाली सारी परेशानियों के लिए छात्र-छात्राएं या उनके अभिभावक ही जिम्मेदार होंगे।

एकेडमिक कैलेंडर के अनुसार 1 जुलाई से कॉलेजों में कक्षाएं शुरू होनी हैं
नए सिलेबस से छात्रों को पढ़ाने कॉलेज के शिक्षक और लाइब्रेरी तैयार नहीं
बिलासपुर. स्नातक स्तर के सभी विषयों के सिलेबस में बदलाव हो गया है। इस बदलाव को अटल यूनिवर्सिटी ने स्वीकार भी कर लिया है। इसे स्वीकार करने यूनिवर्सिटी ने बोर्ड ऑफ स्टडी, विद्यापरिषद और कार्यपरिषद की आपात बैठक बुलाई और नए सिलेबस को यूटीडी व कॉलेजों में लागू करने निर्णय भी लिया। सभी निर्णय लेने के बाद भी यूनिवर्सिटी ने अभी तक कॉलेजों को इसकी जानकारी तक नहीं दी है।
नए सिलेबस को लागू करने के लिए आपात बैठक की थी
एकेडमिक कैलेंडर के अनुसार 1 जुलाई से कॉलेजों में पढ़ाई शुरू होनी है, पर अभी तक शिक्षकों को पता ही नहीं है कि उन्हें पढ़ाना क्या है? यहां तक यूनिवर्सिटी नए सिलेबस को अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड नहीं कर पाई है। यूनिवर्सिटी की वेबसाइट में अभी तक 2017-18 का ही सिलेबस अपलोड है। 10 साल बाद अब स्नातक के सभी विषयों का सिलेबस बदल गया है।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ स्टडी कमेटी ने बीए, बीएससी गणित, बॉयोटेक्नॉलॉजी, जूलॉजी, बीकॉम सहित अन्य स्नातक विषयों के सिलेबस में बदलाव किया है। इस सिलेबस में वर्तमान समय की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम डाले गए हैं। अब अटल यूनिवर्सिटी के सभी कॉलेजों में इस वर्ष स्नातक की पढ़ाई नए सिलेबस से होगी। यह निर्णय अटल यूनिवर्सिटी ने 14वीं विद्यापरिषद और 24वीं कार्यपरिषद की बैठक में लिया है।
अब ऐसे में शिक्षक परेशान हैं कि 1 जुलाई से शुरू हो रही कक्षाएं में वे छात्रों को क्या पढ़ाएंगे। वहीं नए सिलेबस के अनुसार अभी तक मार्केट में किताबें भी नहीं आई हैं। वहीं कॉलेजों की लाइब्रेरी में भी नए सिलेबस के अनुसार तैयार नहीं है। ऐसे में नए सत्र से यूनिवर्सिटी की गलती का खामियाजा कॉलेज के शिक्षक और छात्र भुगतेंगे।
जेपी वर्मा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल मुशरीफ ने कहा कि अभी तक यूनिवर्सिटी से नए सिलेबस से संबंधित कोई भी सूचना नहीं आई है। वहीं डीपी विप्र लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अन्नूभाई सोनी ने कहा कि लॉ के सिलेबस में थोड़ा बदलाव हुआ है। सिलेबस अभी राज्य की बोर्ड ऑफ स्टडी के पास जाएगा, फिर उसे लागू किया जाएगा। डीपी विप्र कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अंजू शुक्ला ने कहा कि मैं बाहर हूं, नए सिलेबस की जानकारी नहीं है। सीएमडी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय सिंह ने कहा कि एक जुलाई से पढ़ाई की तैयारी की जा रही है।
 
अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी के पीआरओ प्रो. सौमित्र तिवारी ने कहा कि सभी प्रक्रियाएं पूरी कर सभी कॉलेजों में सिलेबस भेजने की तैयारी की जा रही है। मंगलवार को सभी कॉलेजों को सिलेबस भेज दिया जाएगा। वहीं यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया जाएगा।

आंगनवाड़ी से लौटते समय बस्तर हाट के पास सड़क पर बैठे कुत्तों ने किया हमला
बच्ची को सिर और शरीर पर आईं चोटें, गंभीर हालत में रायपुर किया गया रेफर
जगदलपुर. जिले के बस्तर ब्लॉक में आंगनवाड़ी से लौट रही पांच साल की एक बच्ची के ऊपर सड़क पर बैठे कुत्तों ने हमला कर दिया। कुत्तों ने बच्ची का कान नोंच लिया। इसके साथ ही बच्ची के सिर और शरीर पर भी चोटें आई हैं। बच्ची को गंभीर हालत में रायपुर रेफर किया गया है। बताया जा रहा है कि शहर में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। वहीं अस्पतालों में रैबीज के इंजेक्शन भी नहीं हैं।
घर के पास ही किया हमला, लोगों ने बचाया
जानकारी के मुताबिक, घटना बस्तर ब्लॉक में हुई। बताया जा रहा है कि पांच वर्षीया बच्ची सोमवार को आंगनवाड़ी से पढ़कर लौट रही थी। इसी दौरान बस्तर हाट के पास घर से कुछ दूरी पर ही सड़क पर बैठे आवारा कुत्तों ने बच्ची पर हमला कर दिया। कुत्ते ने बच्ची के कान को नोच लिया। इससे कान का एक हिस्सा बच्ची के शरीर से अलग हो गया हैञ इसके अलावा बच्ची के सिर पर भी गंभीर चोंटें आई हैं। मासूम को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
हमले के दौरान जहां बच्ची के सिर के पिछले हिस्से में कुत्ते के दांतों के निशान हैं तो वहीं दाहिना कान भी पूरी तरह से अलग हो गया है।  कुत्ते के हमले से लहू लुहान हो चुकी बच्ची को आसपास के लोगों ने किसी तरह छुड़ाया और उसके बाद उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज डिमरापाल भेजा गया। जहां बच्ची को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है।  इस घटना से गांव में कुत्तों के बढ़ते आतंक को लेकर लोगों में गुस्सा है।

रायपुर । छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित अंतागढ़ टेपकांड के मामले में एसआईटी आज तत्कालीन कांग्रेस उम्मीदवार रहे मंतूराम का वायस सैंपल लेगी। इसके अलावा इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी को भी वायस सैंपल देने के लिए नोटिस भेजा गया है। गौरतलब है कि 2012 में अंतागढ़ विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले कांग्रेस उम्मीदवार रहे मंतूराम ने नाम वापस ले लिया था, इसमें सात करोड़ की डील का एक ऑडियो सामने आया था, जिसकी जांच एसआइटी कर रही है।

मंतूराम पवार एसआईटी ऑफिस पहुंच चुके हैं। यहां मंतूराम ने मीडिया से चर्चा एसआईटी के गठन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खरीद फरोख्त के झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। वाइस सैंपल लेने के मामले में उन्होंने कहा कि यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में एसआईटी द्वारा वाइस सैंपल लेने की कार्रवाई पूरी तरह गलत है। उन्होंने एसआईटी के खिलाफ कोर्ट में आपत्ति जताई है।

 

अमित जोगी की चुनौती-- हिम्मत है तो गिरफ्तार करे सरकार

इधर अमित जोगी ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा है कि अगर हिम्मत है तो मुझे गिरफ्तार करके दिखाए। मामले की जांच के लिए बनी एसआइटी ने अमित और उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को वाइस सैंपल देने के लिए बुलाया था। दोनों पिता-पुत्र वाइस सैंपल देने नहीं गए। अब अमित ने यह चुनौती दे दी है।

रायपुर- मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मां बिंदेश्वरी बघेल की हालत बेहद नाजुक है. रामकृष्ण केयर अस्पताल ने मेडिकल बुलेटिन जारी किया है. अस्पताल के वरिष्ठ डाक्टर अब्बास नकवी और डाक्टर प्रवास चौधरी ने मेडिकल बुलेटिन जारी करते हुए बताया कि बिंदेश्वरी बघेल को कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल लाया गया था. उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी, साथ ही किडनी में इंफेक्शन भी पाया गया था. उन्होंने बताया कि फिलहाल डाक्टरों की विशेष टीम बेहतर इलाज मुहैया करा रही है.

इधर मुख्यमंत्री की मां की तबियत नाजुक होने के बाद सरकार के कई मंत्रियों और कांग्रेस नेताओं के अस्पताल पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है. हर कोई उनकी बेहतरी के लिए प्रार्थना कर रहा है. अस्पताल में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मां को देखने कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, शिव डहरिया, प्रेमसाय सिंह टेकाम पहुंचे हैं. साथ ही विधायक अनीता शर्मा, चंद्रदेव राय समेत कई विधायकों ने भी अस्पताल पहुंचकर हालचाल जाना है.

बता दें कि मां की तबियत बिगड़ने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं. वह सुबह आठ बजे से ही अस्पताल पहुंच गए हैं.

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