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राजधानी के जामिया नगर इलाके में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने वाले जेवर (ग्रेटर नोएडा) के नाबलिग को अपने किए का कोई अफसोस नहीं है। शुक्रवार को पुलिस से पूछताछ में उसने कहा कि वह शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन से जुड़े वीडियो देखता रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार नाबालिग इन वीडियो से काफी प्रभावित था। वह प्रदर्शनकारियों को सबक सिखाना चाहता था।
उसने अपने बयान में कहा कि टीवी कवरेज, व्हॉटसऐप, फेसबुक व अन्य माध्यमों से उसने शाहीन बाग का रास्ता बंद होने से लोगों को हो रहे परेशानी को लगातार देख रहा था। यह देखकर वह आक्रोशित था। इसलिए उनसे एक दोस्त से तमंचा दस हजार रुपये में खरीदा और प्रदर्शन में पहुंचकर गोली चला दी। जुवेनाइल एंड जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं पुलिस का कहना है कि उसकी उम्र की जांच के लिए बोर्ड बनाया जाए।

शरजील के बयानों से भड़का
पुलिस को नाबालिग ने बताया कि वह जेएनयू के रिसर्च स्कॉलर शरजील इमाम के देश विरोधी बयानों से भड़का हुआ था। अपराध शाखा के अधिकारियों को उसने बताया कि वह हवा में फायर कर अपना विरोध दर्ज कराना चाहता था, ताकि लोग डर जाएं, मगर उससे गोली सीधे चल गई। अपराध शाखा ने बृहस्पतिवार दोपहर बाद उसे दिल्ली गेट स्थित जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजे बोर्ड) में पेश किया। उसे 28 दिन की हिरासत में बाल सुधार गृह भेजा गया है। पुलिस ने उसकी उम्र के सत्यापन के लिए जरूरी बोन ओसिफिकेशन टेस्ट के लिए मेडिकल पैनल गठित करने की मांग की है। उधर, गोलीकांड की जांच स्थानीय न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी (एनएफसी) थाना पुलिस से लेकर अपराध शाखा को सौंपी है।
चंदन की मौत से था आहत
नाबालिग ने पूछताछ में बताया है कि वह कासगंज में 26 जनवरी, 2018 को तिरंगा यात्रा के दौरान चंदन की मौत से बहुत आहत था। अपने एक दोस्त से उसने एक दिन पहले ही दस हजार रुपये में तमंचा लिया था। वह लंबे समय से अपनी पॉकेट मनी जमा कर रहा था। उसी से उसने तमंचा खरीदा था। वह सोशल मीडिया पर खासा सक्रिय था और इस पर आने वाली खबरों से प्रभावित था। वह यूपी के जेवर से दिल्ली बस में आया था।

किसी ने नहीं बहकाया
नाबालिग ने बताया कि उसे न तो किसी ने बहकाया और न ही किसी ने उसे ऐसा करने को कहा था। नाबालिग खुद को देशभक्त बता रहा है। उसने इस बात से भी इनकार किया है कि वह किसी संगठन से जुड़ा हुआ है। हालांकि नाबालिग मानता है कि प्रदर्शनकारियों के बीच जाते समय उसके अंदर डर था। नाबालिग ने अपने परिवार व दोस्तों को दिल्ली आने के बारे में कुछ नहीं बताया था। उसके पिता का बेकरी का काम है। उसका छोटा भाई आठवीं कक्षा में पढ़ता है।

घायल शादाब को एम्स से मिली छुट्टी
 जामिया नगर फायरिंग की घटना में घायल छात्र शादाब फारुक को शुक्रवार सुबह 6 बजे एम्स ट्रॉमा सेंटर से छुट्टी मिल गई। डॉक्टरों ने उसे 15 दिन तक बिस्तर पर आराम करने की सलाह दी है। शादाब के बाएं हाथ में गोली लगी थी।

डॉक्टरों का कहना है कि शादाब का काफी रक्त बह गया था। इससे शारीरिक कमजोरी है। इसी कारण उसे आराम करने की सलाह दी गई है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया का छात्र शादाब बृहस्पतिवार को प्रदर्शन में था, जहां हथियार हाथ में हिलाते हुए एक किशोर नारे लगा रहा था। उसकी चलाई गोली शादाब के हाथ में लगी थी। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने आरोपी किशोर को दबोच लिया।

कोण्डागांव 01 फरवरी 2020 गतवर्ष 26 जनवरी 2019 को जिला चिकित्सालय मे स्थापित ‘विशेष नवजात शिशु देखभाल केन्द्र‘ नन्हें शिशुओं के लिए एक संजीवनी स्थल की भूमिका बखूबी निभा रहा है। ज्ञात हो कि जिला चिकित्सालय में उक्त केन्द्र बनने के पूर्व अक्सर नवजात शिशुओं में पाई जाने वाली प्रसव उपरांत पाए जाने वाले विकारो के उपचार हेतु आपात स्थिति में जगदलपुर मेडिकल कॉलेज रिफर करना पड़ता था। यहां बताना जरुरी होगा कि जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचलो के नवजात शिशुओं में अकसर कम वजन, कमजोरी, सांस संबंधी परेशानियाँ आदि स्वास्थ्य संबंधी समस्याऐं पाई जाती है। ऐसे विकट स्थिति में पालको के समक्ष शिशुओं के उपचार के लिए अन्यत्र शहर जाने के अलावा कोई चारा नहीं रहता था, परन्तु अब जिला अस्पताल में ही विशेष नवजात शिशु देखभाल केन्द्र के अंतर्गत उपरोक्त लक्षणों से पीड़ित शिशुओं को बेहतरीन उपचार सुविधा उपलब्ध की जा रही है। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर श्री नीलकंठ टीकाम द्वारा प्रति सोमवार को संपूर्ण जिला चिकित्सालय सहित विशेष नवजात शिशु देखभाल केन्द्र, पोषण पुर्नवास केन्द्र का निरीक्षण कर स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सको की आवश्यक बैठक लेकर अस्पताल के प्रबंधन की जानकारी ली जाती है।

अब तक 690 शिशु हो चुके है स्वस्थ
    जिला चिकित्सालय में में स्थित विशेष नवजात शिशु देखभाल केन्द्र (एसएनसीयू) में अभी दो वेंटीलेटर, 6 फोटोथेरिपी मशीन एवं ट्रांस्पोटिंग इक्यूबेटर चिकित्सा उपकरण मशीन लगाए गए है और इस केन्द्र में 12 शिशुओं को एक साथ रखा जा सकता है। इसके अलावा इस केन्द्र में सेंट्रल ऑक्सीजन प्लांट भी लगाया जायेगा। बतौर स्टॉफ इस केन्द्र में 11 नर्से एवं 02 चिकित्सक (शिशु रोग विशेषज्ञ) कार्यरत है। अपनी स्थापना से अब तक इस केन्द्र से 690 शिशु उपचारित हो चुके है।

ग्रामीण पालको के लिए बना ‘शिशु आरोग्य मंदिर‘
    मौके पर मौजूद चिकित्सक डॉ0 संजय बसाख, डॉ0 राजेश बघेल एवं डॉ0 रुद्र कश्यप ने जानकारी दी कि उपरोक्त यूनिट के सभी कक्ष में उपचार होने वाले शिशुओं की उपस्थिति प्रतिदिन 90 प्रतिशत तक रहती है और वर्तमान में ग्राम लभा, पुसपाल, बुनागांव, कोंगेरा, सिरपुर, मालगांव, बड़ेकनेरा, जोंदरापदर, कमेला, कबोंगा, अनतपुर, सिरसीकलार, बिंजोली, चिलपुटी, गिरोला, जैतपुरी, बनचपई और केशकाल से उपचार हेतु शिशुओं को लाया गया है। उक्त केन्द्र में उपस्थित प्रसुता माताओं श्रीमती अनिता (ग्राम-हाटचपई), श्रीमती हसती बाई (ग्राम-मुण्डागांव), श्रीमती सुरेखा (लंजोड़ा) से चर्चा करने पर पता चला कि वे उनके शिशु कमजोरी, कम वजन इत्यादि से पीड़ित थे परन्तु केन्द्र में लाने के उपरांत उनके स्वास्थ्य में बेहतर सुधार हुआ है। यह सराहनीय है कि जिला चिकित्सालय में स्थित उक्त केन्द्र द्वारा नन्हें शिशुओं के स्वास्थ्य संबंधी दायित्वो का निर्वहन उत्कृष्टतापूर्वक किया गया है और उनके प्रयासों से जहां नन्हें बच्चों को स्वस्थ किया गया है वहीं उनके पालको को महंगे उपचार के खर्च से निजात भी मिली है। विशेष तौर पर ग्रामीण अंचलो के पालको एवं उनके शिशुओं के लिए उक्त केन्द्र एक ‘आदर्श आरोग्य मंदिर‘ का स्थान रखता है।

अगर आप बैंक के कामकाज निपटाने के बारे में सोच रहे हैं तो अलर्ट हो जाइए। ऐसा इसलिए क्योंकि आप अगले तीन दिनों तक बैंक के काम नहीं निपटा पाएंगे। कल से लगातार तीन दिनों तक देश में बैंक बंद रहने वाले हैं। 31 जनवरी से बैंक यूनियनों ने दो दिन की हड़ताल की घोषणा की है। यानी 31 जनवरी और एक फरवरी 2020 को हड़ताल के चलते बैंक बंद रहेंगे। वहीं दो फरवरी को रविवार है, इसलिए उस दिन भी आप बैंक का कोई कामकाज नहीं कर पाएंगे। इतना ही नहीं, यूनियन ने मार्च के महीने में तीन दिन और एक अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का एलान किया है। 

इतने दिन रह सकती है हड़ताल

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) ने कहा है कि 31 जनवरी और एक फरवरी को बैंकों में हड़ताल रहेगी। वहीं मार्च में 11,12 और 13 तारीख को भी हड़ताल रहेगी। बैंक यूनियन ने एक अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की भी घोषणा की है।

इस वजह से होगी हड़ताल

दिल्ली प्रदेश बैंक कर्मचारी संगठन के महासचिव अश्वनी राणा ने बताया कि इंडियन बैंक एसोसिएशन ने वेतन में 12.5 फीसदी वृद्धि करने का प्रस्ताव दिया है, जो कि मंजूर नहीं है। इसलिए देश भर के सभी सरकारी बैंकों में कार्यरत कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। इससे बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ सकता है। 

बैंक यूनियन की यह है मांग

  • बैंक यूनियनों की मांग है कि वेतन में कम से कम 20 फीसदी की वृद्धि की जाए। 
  • बैंकों में पांच दिन का कार्यदिवस हो। 
  • बेसिक पे में स्पेशल भत्ते का विलय हो। 
  • एनपीएस को खत्म किया जाए। 
  • पेंशन का अपडेशन हो। 
  • परिवार को मिलने वाली पेंशन में सुधार।
  • स्टाफ वेलफेयर फंड का परिचालन लाभ के आधार पर बांटना। 
  • रिटायर होने पर मिलने वाले लाभ को आयकर से बाहर करना। 
  • शाखाओं में कार्यों के घंटे और लंच समय का सही से बटवारा।
  • अधिकारियों के लिए बैंक में कार्य के घंटे का नियमतिकरण।
  • कांट्रैक्ट और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट के लिए समान वेतन।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में एक बार फिर देश विरोधी बयानबाजी करने वाले शरजील इमाम पर दिल्ली में एक और केस दर्ज किया गया है। इससे पहले अलीगढ़ में उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। शरजील इमाम की तलाश में यूपी-दिल्ली और बिहार की पुलिस लगी हुईं हैं।


आपको बता दें कि जेएनयू में माडर्न इंडियन हिस्ट्री का शोध छात्र बताए जाने वाले शरजील इमाम ने एएमयू के मुख्य द्वार ‘बाब ए सैयद’ पर चल रहे धरने के दौरान गत 16 जनवरी को बेहद आपत्तिजनक भाषण दिया था। उसने कहा कि अगर हम उत्तर पूर्व को भारत से अलग कर दें तो अपनी बात मनवाने के लिए बाध्य कर सकते हैं।

वायरल वीडियो में अन्य आपत्तिजनक बातें भी कही गई हैं। इनका गंभीरता से संज्ञान लेने के बाद पुलिस ने थाना सिविल लाइन में राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम उसकी तलाश में जुटी हैं।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पिछले डेढ़ महीने से नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी, एनपीआर, जेएनयू हिंसा और एएमयू में हुई हिंसा के विरोध में बाब ए सैयद पर लगातार धरना प्रदर्शन चल रहा है। इसी क्रम में स्वयं को जेएनयू का शोध छात्र बताने वाला एक छात्र शरजील इमाम गत 16 जनवरी को धरना स्थल पर आया और भड़काऊ संबोधन किया। इसके संबोधन का एक वीडियो वायरल हो रहा है।

इसमें वह बेहद भड़काऊ शैली में रणनीतिक तरीके से यह बताने का प्रयास कर रहा है कि अगर असम और पूर्वोत्तर को किसी तरह देश से अलग कर दिया जाए तो मेन लैंड पर किस तरह दबाव बनाकर अपनी बात मनवाई जा सकती है। पुलिस ने इसका संज्ञान लेते हुए धारा 124 ए(राजद्रोह), 153 ए, 153 बी, 505 (2) के तहत थाना सिविल लाइन में मुकदमा दर्ज किया गया है।
हमने इस वीडियो की जांच कराई। पहले लगा कि शाहीन बाग का है लेकिन बाद में जांच से पता चला कि यह बीती 16 जनवरी को एएमयू में दिया गया भाषण है। सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। शरजील इमाम को गिरफ्तार करने के लिए दो टीमें भेजी गई हैं। हम दिल्ली पुलिस और बिहार पुलिस के साथ को-ऑर्डिनेशन में काम कर रहे हैं।
- आकाश कुलहरि, एसएसपी

र्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन शांतिपूर्ण आंदोलनों की तारीफ की है, जो नए नागरिकता कानून के विरोध में चल रहे हैं। उनका कहना है कि इससे भारत का लोकतंत्र मजबूत हो रहा है। मैं तो इस कथन से भी थोड़ा आगे जाता हूं। मेरा कहना है कि यह आंदोलन चाहे इस गलतफहमी के आधार पर चल रहा है कि इस नए कानून से देश के मुसलमानों की नागरिकता छिन जाएगी जबकि इस कानून का संबंध सिर्फ उन मुसलमान शरणार्थियों से है, जो बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आ सकते हैं। भारत में रहनेवाले मुसलमान नागरिकों से इस कानून का कुछ लेना-देना नहीं है लेकिन वे और उनके साथ हिंदू और सिख नौजवान मिलकर जिस उत्साह से देश में प्रदर्शन कर रहे हैं, वह अपने आप में अनुपम है। इसके कई कारण हैं। पहला, तो यही कि देश में लोकतंत्र मजबूत हो रहा है। विरोध को पूरी आजादी है। दूसरा, यह आंदोलन अहिंसक है।। खून-खराबा बिल्कुल नहीं है। तीसरा, मुस्लिम महिलाएं पहली बार घर से बाहर निकल कर प्रदर्शन कर रही हैं। उनमें जागृति फैल रही है। हजार-बारह सौ साल में किसी मुस्लिम देश में भी ऐसा दृश्य कभी नहीं दिखा। चौथा, हिंदू-मुस्लिम एकता का यह प्रदर्शन भी अपूर्व है। पांचवां, मुसलमान छाती ठोक-ठोक कर कह रहे हैं कि हम उतने ही पक्के भारतीय हैं, देशभक्त हैं, जितना कि कोई और हो सकता है। इसका श्रेय भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को है। छठा, हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का सांप्रदायिक दांव नाकाम होता दिखाई पड़ रहा है। सातवां, भाजपा के आम कार्यकर्ता भी महसूस कर रहे हैं कि उनके नेताओं ने घर बैठे यह कैसी मुसीबत मोल ले ली है ? नई सरकार ने अपने गले में यह सांप क्यों लटका लिया है? कौन से मुसलमान शरणार्थी भारत में शरण मांगने आ रहे हैं ? एक काल्पनिक भूत ने देश में कोहराम मचा रखा है।

नई दिल्ली। शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ धरना प्रदर्शन में शनिवार को एक चैनल के पत्रकार दीपक चौरसिया पर भीड़ ने हमला कर दिया। बता दें की दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए और एनआरसी पर प्रदर्शन हो रहा है। इसमें शनिवार को पत्रकार दीपक चौरसिया रिपोर्टिंग करने पहुंचे थे। इस दौरान कुछ लोगों ने उनपर और उनके कैमरामैन पर हमला कर दिया और कैमरे तोड़ दिए। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है।
दीपक चौरसिया का आरोप है कि जब उन्होंने रिपोर्टिंग शुरू की तो कुछ लोग उनके आए और बदसलूकी करने लगे। इसके बाद जब कैमरामैन ने घटना को रिकॉर्ड करना शुरू किया तो उन लोगों ने कैमरामैन पर भी हमला कर दिया और कैमरा छीनकर तोड़ दिया। आरोप है कि भीड़ ने उन लोगों की पिटाई भी की। दीपक चौरसिया ने अपने ऊपर हमले की पुलिस में शिकायत की थी।

 दक्षिण-पूर्व के डीएसपी चिन्मय बिश्वाल ने कहा था कि वरिष्ठ पत्रकार की तरफ से उनको शिकायत मिली है। शनिवार को पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर लिया है। वरिष्ठ पत्रकार ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया और लिखा,'सुन रहे हैं कि संविधान खतरे में है, सुन रहे हैं कि लड़ाई प्रजातंत्र को बचाने की है। जब मैं शाहीन बाग की उसी आवाज को देश को दिखाने पहुंचा तो वहां मॉब लिंचिंग से कम कुछ नहीं मिला।' इस वीडियो में भीड़ दीपक चौरसिया के हाथ से माइक छिनने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।

लखनऊ में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के समर्थन में आयोजित एक रैली में शाह ने कहा था कि सीएए को वापस नहीं लिया जाएगा और जो प्रदर्शन कर रहें है वे करते रहें। उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं को संशोधित कानून पर सार्वजनिक बहस की चुनौती भी दी थी।

हैदराबाद। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गृह मंत्री अमित शाह को बुधवार को चुनौती दी कि वह विपक्ष के नेताओं की बजाय सीएए पर उनके साथबहस करें। नगर निकाय चुनाव से पहले करीमनगर में एक रैली को संबोधित करते हुए मंगलवार रात हैदराबाद से सांसद ने कहा कि गृह मंत्री ने विपक्षी नेताओं को सीएए पर बहस के लिए आमंत्रित किया है जबकि उन्होंने शाह को उनसे इस कानून पर बहस करने को कहा था। लखनऊ में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के समर्थन में आयोजित एक रैली में शाह ने कहा था कि सीएए को वापस नहीं लिया जाएगा और जो प्रदर्शन कर रहें है वे करते रहें। उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं को संशोधित कानून पर सार्वजनिक बहस की चुनौती भी दी थी।
 
शाह ने विपक्ष पर सीएए के खिलाफ लोगों को ‘‘गुमराह’’ करने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और मायावती को सार्वजनिक तौर पर इस पर बहस करने की चुनौती दी थी। शाह की चुनौती पर प्रतिक्रिया देते हुए औवेसी ने कहा, ‘‘ मैं यहां हूं.... मेरे साथ बहस करें... इन लोगों के साथ क्यों बहस करनी है... ‘‘दाढ़ी वाले से करो ना’’। हम सीएए, एनपीआर और एनआरसी पर बहस और बात करेंगे।’’ एआईएमआईएम प्रमुख ने केन्द्रीय बजट की ‘हलवा’ रस्म का जिक्र करते हुए भाजपा पर स्थानों का नाम बदलने को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘ भाजपा ने कहा है कि वह नाम बदलेंगे। मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि ‘हलवा’ शब्द कहां से आया है? यह अरबी शब्द है। यह हिंदी या उर्दू शब्द नहीं है। अब अरबी शब्द भी हटा दें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ वे (भाजपा) कहते हैं कि वे नाम बदलेंगे। इंशाअल्लाह देश के लोग आपको बदलेंगे। याद रखें मैं हलवा नहीं लाल मिर्च हूं।’’

इस बीच, एआईएमआईएम ने तेलंगाना राज्य चुनाव आयोग से शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव में प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे ‘फेस रिकग्निशन ऐप’ का उपयोग ना करने का अनुरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अन्य उल्लंघनों सहित नागरिकों की निजता का उल्लंघन है।

रायपुर, 22 जनवरी 2019 मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी के अवसर पर उन्हें नमन करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किया है। उन्होंने कहा है कि नेताजी स्वाधीनता संग्राम के अग्रणी तथा प्रमुख नेताओं में से हैं, जिन्होंने आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी। अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई के लिए उन्होंने ‘‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा‘‘ जैसे फौलादी नारों से लोगों का आव्हान कर उन्हें जागृत किया। मुख्यमंत्री ने कहा है कि आजाद हिंद फौज के गठन के माध्यम से उन्होंने स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत की स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष और अतुल्य योगदान के लिए नेताजी सदा याद किए जाएंगे।

बीजापुर। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तैनात जवान न केवल सुरक्षा और शांति बहाली के लिए दिन रात संघर्ष कर रहे हैं बल्कि सामाजिक सरोकार भी निभा रहे हैं।इसी क्रम में गंगालूर मार्ग पर स्थित सीआरपीएफ-85 बटालियन के जवानों द्वारा गर्भवती महिलाओं को कंधे पर लादकर अस्पताल तक पहुंचाया गया। गश्त के दौरान बीमार ग्रामीणों का इलाज भी सुनिश्चित करा रहे हैं। इससे जनसामान्य में जवानों के प्रति सम्मान बढ़ा है।

मंगलवार को जवान गश्त पर निकले थे, इसी दौरान उन्हें एक छात्र ने बताया कि गांव में एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से कराह रही है। अगर समय पर उसे अस्पताल नहीं पहुंचाया गया तो उसकी जान को खतरा भी हो सकता है। छात्र की बात को सुनते ही जवानों ने तत्काल महिला के घर जाकर उस गर्भवती महिला को चारपाई के सहारे कांधे पर लादकर 6 किलोमीटर पैदल दुर्गम क्षेत्र से सफर कर एंबुलेंस तक पहुंचाया जिसके बाद महिला को एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि अस्पताल में महिला को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा मिलना प्रारंभ हो गया है।

इस मामले में चेरपाल में पदस्थ सीआरपीएफ 85 बटालियन के कंपनी कमांडर अविनाश राय ने बताया कि चेरपाल कैंप से सीआरपीऍफ़ की एक टीम नक्सल उन्मूलन अभियान के लिए पदेडा गाँव की तरफ गयी थी। अभियान से जब सीआरपीऍफ़ टीम लौट रही थी। तभी गायतापारा निवासी एक स्कूली छात्र ने उन्हें एक महिला की ख़राब तबियत के संबंध में बताया और मदद मांगी। उस जगह पर अपने फर्स्ट ऐड टीम के साथ जाकर देखने पर पता चला कि महिला बूधी हपका पति अजय हपका निवासी गायतापारा प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत थी। उनकी टीम के कुछ जवानों ने तत्काल चारपाई एवं बल्ली की सहायता से स्ट्रेचर बनाकर महिला को निकटवर्ती रोड की तरफ रवाना किया।यह इलाका घोर नक्सल प्रभावित है। इसलिए बाकी के जवानों ने इस काफिले को सुरक्षा प्रदान करते हुए करीब छह किलोमीटर दूर सड़क के किनारे सकुशल ले गए।जहां उनकी कंपनी द्वारा पहले से ही एम्बुलेंस की व्यवस्था कर दी गयी थी।जिसकी मदद से महिला को उसके परिजनों समेत बीजापुर जिला अस्पताल भेज दिया गया।

2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में जब बाबा रामदेव भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने उन्हें मनाने का भरसक प्रयास किया था, लेकिन बाबा अपने हठ योग पर डटे रहे। नतीजा, पुलिस ने एक विशेष ऑपरेशन के तहत रातों-रात प्रदर्शनकारियों को वहां से खदेड़ कर रामलीला मैदान खाली करा दिया था।
बाबा रामदेव को हिरासत में लेकर दिल्ली से बाहर छोड़ दिया गया। अब कुछ वैसा ही शाहीन बाग में होने की आहट मिल रही है। पुलिस तैयारी में जुटी है। इंतजार केवल उचित समय और आदेशों का किया जा रहा है।

स्पेशल ब्रांच के सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को पहले समझाया जा रहा है, उन्हें बताया रहे हैं कि प्रदर्शन के कारण रोजाना दस लाख से ज्यादा लोगों को ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला भी दिया जा रहा है।

अगर इसके बाद भी प्रदर्शनकारी सड़क खाली नहीं करते हैं, तो 2011 का बाबा रामदेव कांड जैसा कुछ संभावित है। दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ 34 दिन से चल रहा प्रदर्शन अब केंद्र सरकार, पुलिस और सामान्य लोगों के लिए गले की फांस बन गया है।

प्रदर्शन रोजाना बढ़ता ही जा रहा है। इसके चलते सारिता विहार और कालिंदी कुंज का रास्ता पूरी तरह से बंद है। दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेशों पर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की है। इलाके के वरिष्ठ नागरिकों से बात कर उनसे सड़क खुलवाने की अपील की है।

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा, हम प्रदर्शनकारियों से अपील करते हैं कि वे सहयोग करें और जनता के हित में रास्ता खाली कर दें। दिल्ली पुलिस ने इससे पहले भी अपने एक अन्य ट्वीट में कहा था, हम शाहीन बाग में रोड 13ए पर बैठे प्रदर्शनकारियों से अपील करते हैं कि वे हाईवे ब्लॉक होने की वजह से दिल्ली-एनसीआर के निवासियों, वरिष्ठ नागरिकों, मरीजों और स्कूल जाने वाले छात्रों की परेशानियों को समझें।

यह मामला हाईकोर्ट में भी उठ चुका है। शाहीन बाग इलाके में वाहनों की आवाजाही शुरू करने की मांग को लेकर दी गई याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया था कि कानून व्यवस्था और जनता का हित देखते हुए इस मामले में कार्रवाई करे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि लोगों की परेशानी को देखते हुए कानून व्यवस्था के तहत पुलिस कभी भी रोड खाली करा सकती है।
तैयारियों में जुटी है पुलिस, आदेश का इंतजार
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, हम लोगों से अपील कर रहे हैं कि सड़क से हट जाएं। उनके सामने लोगों की परेशानियों को रखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों के अलावा इलाके के लोगों से भी मिलकर बात की जा रही हैं। बच्चों की परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं, सड़क बंद होने के कारण उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

पुलिस रिजर्व को तैयार रहने के लिए कहा गया है। सूत्रों ने बताया कि हम ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जो कानून के दायरे से बाहर हो। दिल्ली पुलिस जो भी कार्रवाई करेगी, वह हाईकोर्ट के आदेशों के अनुरुप ही होगी। किसी भी तरह से प्रदर्शनकारी नहीं मानते हैं तो उन्हें वहां से हटाने के लिए पुलिस तैयार है। जैसे ही आदेश मिलेगा, सड़क को खाली करा दिया जाएगा।

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